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बढ़ते कोरोना के मामलों में आई तेज़ी, एक ही दिन में 19 हजार के करीब पहुंचे मामले, इतनों की हुई मौत…

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देश में कोरोना का कहर धीरे धीरे बढ़ता हुआ दिख रहा है। पीछे कुछ दिनों पहले तक कोरोना के नए मामलों में काफी कमी आ गई थी। लेकिन अब देखते ही देखते नए मरीजों की संख्या उम्मीद से भी ज्यादा पहुंच गई है। बता दें कि हर रोज हजारों की संख्या में लोग वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीजों की संख्या 19 हजार के करीब पहुंच गई है और अगर ऐसे ही आंकड़े बढ़ते गए तो वो दिन दूर नहीं जब सरकार लॉकडाउन की घोषणा कर देगी।

ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में कोरोना के 18930 नए मरीज़ मिले हैं। इनमें से 35 लोगों ने अपनी जान भी गवा दी। ऐसे में अब देश में इस वायरस से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर सवा पांच लाख के पार पहुंच गई है। गौरतलब हैं कि इन दिनों देशभर में एक्टिव मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। मौजूदा समय में देश के 1,19,457 नागरिक कोरोना के संक्रमण से जूझ रहे हैं। डेली पॉजिटिविटी रेट भी बढ़कर अब 4.32% पर पहुंच गई है।

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बता दें कि इन दिनों सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में पाए जा रहे हैं। पिछले 24 घंटों में भी सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में ही दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 3142 मामले सामने आए। इस बीच महाराष्ट्र में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 19981 पर पहुंच गई है। जबकि दिल्ली में ये संख्या 2,590 है। गोरतलब हैं कि पीछे कुछ दिनों पहले दिल्ली में भी कोरोना ने अपना कहर बरपाया था। लेकिन अब दिल्ली में बढ़ते मामलों पर काबू पा लिया गया है।

एक याचिका से हुआ एलन मस्क की जिंदगी का बड़ा खुलासा, 7 नहीं बल्कि 9 बच्चों के हैं पिता…

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एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार हैं। मौजूद समय में उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के तौर पर पहचान बना रखी है। वह अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इसकी वजह सिर्फ ये ही नहीं है कि वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। बल्कि वह अपने बयानों और अपनी निजी जिंदगी के कारण भी चर्चा में बने रहते हैं। हाल ही में उनकी निजी जिंदगी का एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है और ये खुलासा एक याचिका के जरिए हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल के महीने में एक याचिका दायर की गई थी, जिससे ये बड़ा खुलासा हुआ है।

बता दें कि एलन मस्क अब 7 नहीं बल्कि 9 बच्चों के पिता हैं। अभी तक हर कोई ये जनता था कि उनके केवल 7 बच्चे हैं। लेकिन दायर की गई इस याचिका से पता चलता है कि उनके 7 नहीं बल्कि 9 बच्चे हैं। खबरों के अनुसार पिछले साल एक महिला ने उनके जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। जिसके चलते अब उनके 9 बच्चे हो गए हैं। ये महिला कोई और नहीं बल्कि उन्हीं की कंपनी की महिला अधिकारी शिवोन जिलिस हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिवोन एलन मस्क के न्यूरोलिंक की सबसे बड़ी अधिकारी हैं।

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वहीं, अगर बात करें याचिका के बारे में तो अप्रैल के महीने में एलन और जिलिस ने एक याचिका दायर की थी। जिसमें बच्चों के नाम बदलने की मांग की गई थी। याचिका के अनुसार दोनों ने मांग की थी कि बच्चों के नाम में आखिरी में पिता का नाम और बीच में मां का नाम जोड़ा जाए। इस याचिका से पहले किसी को इस बात की खबर भी नहीं थी कि एलन मस्क दो और बच्चों के पिता बन चुके हैं। इसके अलावा आपको बता दें कि एलन मस्क के 7 और बच्चे हैं जिसमें से दो बच्चों को कनाडा की गायक ग्रिम्स ने जन्म दिया है और 5 बच्चों को उनकी पूर्व पत्नी कनाडाई लेखक जस्टिन विल्सन ने जन्म दिया है।

ब्रिटेन में एक महिला की कोख से जन्म अनोखा बच्चा, दो फुट लंबा और…

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अपने बच्चे को दुनिया में लाने का ख्वाब हर कोई देखता है। जैसे ही प्रेग्नेंसी की जानकारी होती है, दोनों पार्टनर उस समय से लेकर आखिरी समय तक बस इस बात का ख्याल रखते हैं कि बच्चा स्वस्थ और सुंदर हो। जिसके लिए वह हर एक चीज का खयाल रखते हैं। हालांकि इतना सब कुछ करने के बाद भी बहुत से लोगों को तंदुरुस्त बच्चा नहीं मिल पाता है। देखना चाहती है कि उसका बच्चा कैसा दिखता है? ब्रिटेन के बकिंघमशायर में रहने एक कपल की भी ये ही ख्वाहिश थी की उनका बच्चा स्वस्थ में अच्छा हो। लेकिन उनको इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह कुछ ज्यादा ही स्वस्थ हो जाएगा।

आपको बता दें कि टेन के बकिंघमशायर में रहने वाली एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया है। जिसको देख सब लोग हैरान हैं। सिर्फ माता पिता ही नहीं बल्कि वहां मौजूद डॉक्टर, नर्स हर कोई बच्चे की स्वस्थ को देख चौंक गए हैं। दरअसल, बच्चे की लंबाई करीब 2 फीट की है और इसका वजन 5 किलोग्राम से भी ज्यादा है। ऐसे में सबका हैरान होना लाजमी था। क्योंकि आम तौर पर एक स्वस्थ बच्चे का वजन जन्म के वक्त 3.5 किलो से 4 किलोग्राम तक होता है।

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बताया जा रहा है कि बच्चे के माता पिता एमी स्मित और जैक भी हाइट में काफी लंबे हैं। रिपोर्ट्स की माने तो दोनों की हाइट 6 फीट के करीब है। अपनी हाइट को देखते हुए दोनों को अंदाजा था कि आने वाला बच्चा कद में लंबा होगा। लेकिन इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि बच्चा बाकी और बच्चों से बिलकुल ही अलग होगा। सूत्रों के मुताबिक बच्चे को गर्भ से बाहर लाने में 2 लोगों की मदद लेनी पड़ी थी।

11 सालों बाद बढ़ेगी दिल्ली के विधायकों की तनख्वाह .? राष्ट्रपति के पास पहुंचा प्रस्ताव…

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विधानसभा में ऐसे बहुत से कम मुद्दे देखने को मिलते हैं, जिसके विरोध में एक भी विधायक नहीं रहता। वरना तो हर एक मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा होने तय है। आज एक ऐसा ही मुद्दा दिल्ली की विधानसभा में देखने को मिला, जिसके विरोध में एक भी विधायक नहीं था। बता दें कि ये मुद्दा दिल्ली के विधायकों की वेतन को बढ़ाने का था। जिसके समर्थन में सत्ता और विपक्ष दोनों थे। इस मुद्दे पर बिना किसी हंगामे के ही सबने हामी भरी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली के विधायकों की वेतन बाकी और राज्यों के विधायकों से काफी कम है।

विधायकों की वेतन को बढ़ाने का मुद्दा कई बार उठ चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया था। लेकिन अब सभी विधायकों की सहमति के बाद विधेयक को देश के राष्ट्रपति के पास भेजा जा रहा है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली के विधायकों की सैलरी बढ़ा दी जाएगी। बता दें कि इससे पहले साल 2011 में दिल्ली विधायकों की सैलरी बढ़ाई गई थी। पिछले 11 सालों में इसमें कोई भी वृद्धि नहीं की गई है।

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बता दें कि मौजूदा समय में दिल्ली के विधायकों को 54 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। लेकिन अगर राष्ट्रपति इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देते हैं तो विधायकों की तनख्वाह बढ़कर 90 हजार प्रतिमाह हो जाएगी। हालांकि, इस बढ़ोतरी के बाद भी दिल्ली के विधायकों की सैलरी तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश के विधायकों की तुलना में कम ही रहेगी। गोरतलब हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मई के पहले हफ़्ते में वेतन वृद्धि पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद इसमें संशोधन करने के लिए बिल लाया गया।

एकनाथ शिंदे पर शिवसेना का एक और वार, मुखपत्र जारी कर कहीं ये बड़ी बातें…

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आज एक बार फिर शिवसेना ने अपना मुखपत्र सामना जारी किया है। इस दौरान सामना में शिवसेना ने एकनाथ शिंदे और उनके समर्थकों पर निशाना साधा है। बता दें कि एकनाथ शिंदे केसरिया पगड़ी बांधकर विधानसभा में पहुंचे थे जिसको लेकर सामना में उनको निशाना बनाया गया है। सामना में लिखा गया है कि “शिंदे गुट के विधायक आए, भगवा पगड़ी पहनकर बालासाहेब की प्रतिमा को प्रणाम करते हुए निष्ठा का नाटक किया. लेकिन उन सभी के चेहरे साफ गिरे हुए दिख रहे थे। उनका पाप उनके मन को कचोट रहा था, ऐसा उनके चेहरों से साफ प्रतीत हो रहा था।”

इसके आगे लिखा गया कि “शिवसेना प्रमुख का स्मारक चेतना और ऊर्जा का सूर्य है। ये भगवाधारी विधायक जुगनू भी नहीं थे। शिवसेना में रहने के दौरान क्या वो तेज, क्या वो रुआब, क्या वो हिम्मत, क्या वो सम्मान, क्या वो स्वाभिमान… ऐसा बहुत कुछ था। ‘कौन आया, रे कौन आया, शिवसेना का बाघ आया’ ऐसी गर्जना की जाती थी। वैसा कोई दृश्य देखने को नहीं मिला। कान टोपी की तर्ज पर भगवा पगड़ी पहनने से कोई ‘मावला’ बन सकता है क्या? लेकिन भौचक्का हुए ये विधायक केंद्रीय सुरक्षा में आ गए और उन्होंने विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया।”

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सामना में इस मुद्दे पर आगे बात करते हुए कहा गया कि “यह चुनाव अवैध है, लोकतंत्र और नैतिकता के अनुरूप नहीं है। इस अनैतिक कार्य में हमारे राज्यपाल का शामिल होना, इस पर किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। इससे पहले महाविकास अघाड़ी ने विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए राज्यपाल से अनुमति मांगी थी, लेकिन 15 मार्च को मामला न्यायालय में विचाराधीन होने वगैरह का कारण बताते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। फिर आघाड़ी के लिए जो नियम लगाए, वही इस बार क्यों नहीं लगाए जाने चाहिए?”

आगे लिखा गया कि “इस सवाल का जवाब मिलने की संभावना नहीं ही है। उपराष्ट्रपति पहले ही शिंदे सहित अपने समूह के 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने का नोटिस जारी कर चुके हैं। अर्थात मामला विचाराधीन है ही ना? विधानसभा अध्यक्ष के पद के लिए चुनाव ‘हेड काउंट’ पद्धति से किया गया, लेकिन महाविकास अघाड़ी सरकार को ऐसा करने की अनुमति नहीं थी। उस समय उन्हें गुप्त मतदान चाहिए था। ऐसे में राज्यपाल के हाथ में मौजूद संविधान की पुस्तक निश्चित तौर पर किसकी है? डॉ. आंबेडकर की या किसी और की? उनके हाथ में न्याय का तराजू सत्य का है या सूरत के बाजार का? यह सवाल महाराष्ट्र की जनता के मन में उठ ही रहा है।”

शिवसेना को लगा एक और बड़ा झटका, अजय चौधरी को पद से हटाकर शिंदें को चुना गया…

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महाराष्ट्र में राजनीति लगातार रंग बदल रही है। पहले विधायकों की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने अपना पद गवाया, जिससे पूरे महाराष्ट्र में खलबली मच गई। बता दें कि उद्धव ठाकरे के बाद पार्टी से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे को राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया। इस बीच एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। बता दें कि एकनाथ शिंदे धीरे धीरे राजनीति में उद्धव ठाकरे का नाम खत्म करने में जुट गए हैं। महत्वपूर्ण विश्वास मत से एक दिन पहले एकनाथ शिंदे ने फिर एक बार उद्धव ठाकरे गुट को एक बड़ा झटका दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र विधानसभा के नवनियुक्त अध्यक्ष ने रविवार रात एक और बदलाव किया है। इस बदलाव के कारण शिवसेना काफी निराश है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में बदलाव करते हुए नवनियुक्त अध्यक्ष ने शिवसेना विधायक अजय चौधरी को विधायक दल के पद से हटा दिया। गोरतलब हैं कि अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अजय चौधरी को पद से हटाते हुए शिंदे को शिवसेना के विधायक दल के नेता के रूप में चुना है।

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जिससे शिवसेना काफी निराश है, इसके अलावा आपको बता दें कि सुनील प्रभु को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह शिंदे खेमे से भरत गोगावाले को शिवसेना के मुख्य सचेतक के रूप में दी गई है। हालांकि शिवसेना इस फैसले से खुश नहीं है और पार्टी का कहना है कि वह इस फैसले के खिलाफ अदालत जाएगी। शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता और सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि “निर्णय संविधान और लोकतांत्रिक मानदंडों को रौंदने के बराबर है। भाजपा निरंकुशता की ओर बढ़ रही है। हम इस “असंवैधानिक” फैसले को अदालत में चुनौती देंगे।”

महीने की शुरुआत में ही FPI निवेशकों ने की बिकवाली, निकाले इतने करोड़ रूपये…

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मई के महीने में शुरुआती चार कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजारों से 6,400 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की थी। जिसके बाद अब खबरें है कि इस महीने की शुरुआत भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बेचने से ही की है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के पहली ही दिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल मिलाकर 811 करोड़ रुपए निकाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2022 से तक लगातार एफपीआई भारतीय बाजारों में शुद्ध बिकवाल रहे हैं।

बता दें कि अब तक उन्होंने शेयरों से 1.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। ये निकासी आगे कुछ और महीनों तक जारी रहने की आशंका है। बढ़ती मंहगाई और महामारी और आक्रामक मौद्रिक नीति के सख्त होने के कारण मंदी की आशंका है। जिसके चलते निवेशक खूब बिकवाली कर रहे हैं। इस बीच जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ वीके विजयकुमार ने कहा कि एफपीआई भारत जैसे बढ़ते चालू खाता घाटे (सीएडी) वाले देशों में अधिक बेच रहे हैं क्योंकि ऐसे देशों की मुद्राएं अधिक गिरावट की चपेट में हैं।”

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हालांकि इस बीच उन्होंने कहा कि यहां अब बिकवाली का फ्लो कम होता दिख सकता है। इसके बारे में बातचीत करते में विजयकुमार कहते हैं कि “अगर जुलाई में बाजार में पहली तिमाही के अच्छे नतीजों की उम्मीद या प्रतिक्रिया होती है, तो एफपीआई फिर से बेच सकते हैं। यह बिकवाली तभी रुकेगी जब डॉलर स्थिर होगा और यूएस बॉन्ड यील्ड में गिरावट आएगी।”

फिर एक बार शिवसेना के निशाने पर आए फडणवीस, अपने जूनियर के नीचे काम करना बताया कर्मों का फल…

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एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब शिवसेना ने पार्टी का मुखपत्र सामना जारी किया है। जिसमें पार्टी ने फिर एक बार एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस को निशाना बनाया है। साथ ही इसमें आरोप लगाया गया है कि ये सब भाजपा की सोची समझी साजिश थी, जिसमें राज्यपाल ने भी अपना समर्थन दिया। उन्होंने राज्यपाल पर भी शक्तियों का अप्रत्यक्ष रूप से गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया। सामना में कहा गया कि “महाराष्ट्र की सियासत में एकनाथ शिंदे की बगावत से बड़ा भूकंप, पिछले 9 दिनों में तब आया, जब एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनेंगे, ऐसा कहने वाले धराशायी हो गए।”

साथ ही आरोप लगाया गया कि “महाराष्ट्र भाजपा का एकतरफा नेतृत्व शिंदे के हाथ में था। फडणवीस का डिप्टी सीएम पद लेने से इनकार का फैसला भी भाजपा नेतृत्व ने ठुकरा दिया। उन्हें किसी समय अपने जूनियर मंत्री रहे शिंदे के मातहत काम करना पड़ रहा है, ये यह उनके कर्मों का फल है।” मुख्यपत्र में आगे लिखा गया कि “2019 में सत्ता का 50-50 का फॉर्मूला उन्होंने ठुकराया था, उसी के बाद महाविकास आघाड़ी सरकार बनी।”

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आगे लिखा गया कि “उद्धव ठाकरे ढाई साल मुख्यमंत्री बने और अब बागी शिवसैनिक शिंदे को यह पद भाजपा हाईकमान ने दिया है. यह काल द्वारा फडणवीस से लिया गया बदला है।” इसके ही सामना में राज्यपाल के फैसले के खिलाफ भी सवाल उठाए गए। लिखा गया कि “सभी विधायक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना उम्मीदवार के रूप में जीते थे, फिर भी उन्होंने उद्धव के खिलाफ बगावत की। दलबदल विरोधी कानून के तहत उनका विधायक पद जा सकता है। लेकिन महाराष्ट्र के राज्यपाल और सर्वोच्च न्यायालय ने इन लोगों बल प्रदान किया।”

घुटने की समस्या से जूझ रहे हैं एमएस धोनी, मात्र 40 रूपये में करा रहे हैं इलाज….

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अपने क्रिकेट के बलबूते पर महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्हें कई सारे रिकॉर्ड कायम किए हैं, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि वह भारत के सबसे सफल कप्तानों में से भी एक हैं। उन्होंने न सिर्फ अपनी बल्लेबाजी से बल्कि अपनी काबिलियत से भी भारत को कई मुकाबलों में जीत हासिल करवाई है। आपको बता दें कि अच्छे से अच्छे गेंदबाजों को धूल चटाने वाले महेंद्र सिंह धोनी पिछले कुछ समय से घुटने के दर्द से काफी परेशान हैं। इसके लिए वह कई जगहों पर अपना इलाज करवा चुके हैं।

सूत्रों की माने तो उन्होंने हाल ही में रांची से करीब 70 किलोमीटर दूर लापुंग के घने जंगलों वाले इलाके में रहने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सक वंदन सिंह खेरवार से अपने घुटनों का इलाज शुरू करवाया है। बता दें कि ये डॉक्टर धोनी का इलाज करने के लिए केवल 40 रुपए फीस लेते हैं। इस बात की जानकारी खुद डॉक्टर वंदन सिंह खेरवार ने दी है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि “मैं उनसे परामर्श शुल्क के रूप में ₹20 लेता हूं और उन्हें ₹20 की दवाएं लिखता हूं।”

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इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वह उनके माता पिता का भी इलाज कर रहे हैं और पिछले एक महीने से हर चार दिन बाद धोनी भी अपने इलाज के लिए उनके आश्रम आते हैं। उन्होंने आगे बताया कि “जब धोनी मुझसे मिलने आए तो मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। महेंद्र सिंह धोनी के साथ आए लोगों ने ही डॉक्टर को बताया कि वो उनसे अपना इलाज कराने आए हैं। मैंने धोनी के माता-पिता का भी इलाज किया है, वे पिछले तीन महीनों से उनकी दवाएं ले रहे हैं।”

सीएम पद हासिल करने के बाद फिर एक बार गोवा पहुंचे एकनाथ शिंदे, सभी समर्थकों संग आज करेंगे…

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महाराष्ट्र में सियासी युद्ध थमने के नाम नहीं ले रहा। एक के बाद एक अलग खबर सुनने में आ रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के सीएम पद से इस्तीफा दे चुके हैं। जिसके बाद बागी विधायक एकनाथ शिंदे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। खबर सामने आ रही है कि राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे एक बार फिर गोवा को रवाना हो गए हैं। बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात को ही वह गोवा अपने समर्थकों के पास पहुंच गए हैं और अब उन सभी को मुंबई वापस लाने की तैयारी की जा रही है।

खबर है कि एकनाथ शिंदे सभी विधायकों के साथ आज ही मुंबई वापस आ जाएंगे और अपनी बहुमत साबित कर देंगे। इस बीच राज्यपाल ने भी उनको अपनी बहुमत हासिल करने को बोला है। मिली जानकारी के अनुसार रविवार और सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा का अधिवेशन होगा। इस बीच ही एकनाथ शिंदे को अपनी बहुमत साबित करनी पड़ेगी। अगर वह ऐसा नहीं कर पाए तो वह राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। वहीं खबर है कि महाविकास आधाड़ी अब भी बागी विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटा रहा है।

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बताया जा रहा है कि महाविकास आधाड़ी ने शिवसेना के बागी विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें मांग की गई है कि उन्हें विधानसभा आने से रोका जाए। इसके अलावा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए एकनाथ शिंदे को शिवसेना नेता के पद से हटा दिया है। उनका कहना है कि शिंदे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।