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बैरागीवाला में खूनी संघर्ष पर SSP का बयान, चार आरोपी गिरफ्तार, 50 से अधिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज 

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देहरादून। सहसपुर थाना क्षेत्र के बैरागीवाला गांव में खेत में पानी छोड़ने को लेकर दो पक्षों के बीच हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। मारपीट की इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, शनिवार शाम बैरागीवाला गांव में खेतों की सिंचाई के लिए पानी चलाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से तनाव चल रहा था। विवाद बढ़ने पर एक पक्ष के दर्जनों लोगों ने दूसरे पक्ष के अशोक कुमार, विनोद कुमार और राजेश कुमार के साथ मारपीट कर दी।

घटना में गंभीर रूप से घायल तीनों भाइयों को ग्रामीणों द्वारा उपचार के लिए लेहमन अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान विनोद कुमार की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

मृतक के भाई अशोक कुमार की तहरीर पर सहसपुर कोतवाली में 12 नामजद आरोपियों समेत 30-40 अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गईं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों रज्जाक, सलमान, जावेद और शहबाज को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

एसएसपी देहरादून ने आमजन से शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी तथा न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर कठोर सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा रूपरेखा जारी होने तक एससीईआरटी और डायट के पुनर्गठन पर रोक लगाने की मांग

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देहरादून। एससदेहरादून की एक अतिआवश्यक ऑनलाइन बैठक संगठन के अध्यक्ष विनय थपलियाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा एवं शिक्षक शिक्षा के ढांचे में प्रस्तावित बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए विनय थपलियाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) तथा डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के पुनर्गठन और नए प्रशासनिक ढांचे को लेकर प्रस्ताव तैयार कर शासन स्तर पर प्रेषित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू होने के बाद देशभर में शिक्षा व्यवस्था संक्रमण काल से गुजर रही है, ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने से पहले राज्य स्तर पर जल्दबाजी में ढांचा बदलना उचित नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पारंपरिक डीएलएड और बीएड पाठ्यक्रमों के स्थान पर चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) लागू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों के लिए अलग-अलग प्रकार के शिक्षक तैयार किए जाएंगे। इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव डायट संस्थानों पर पड़ेगा, जो अब तक मुख्य रूप से डीएलएड और प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण का कार्य करते रहे हैं।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आईटीईपी लागू होने के बाद डायट की पारंपरिक भूमिका समाप्तप्राय हो जाएगी और उन्हें अकादमिक नेतृत्व, अनुसंधान, सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) तथा शैक्षिक नवाचारों के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। इसी प्रकार एससीईआरटी को भी केवल प्रशिक्षण एवं पाठ्यसामग्री निर्माण तक सीमित न रहकर अनुसंधान एवं मूल्यांकन की शीर्ष संस्था के रूप में विकसित करना आवश्यक होगा।

वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-टीई) को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें एससीईआरटी और डायट जैसी संस्थाओं के भविष्य के स्वरूप, विशेषज्ञता और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया जाएगा। ऐसी स्थिति में उत्तराखंड सरकार को राष्ट्रीय स्तर की अंतिम अनुशंसाओं की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

बैठक में यह भी कहा गया कि यदि राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी होने से पहले राज्य में नया ढांचा लागू किया जाता है, तो बाद में उसे पुनः संशोधित करना पड़ सकता है, जिससे प्रशासनिक विसंगतियां, वित्तीय हानि तथा शिक्षकों और अधिकारियों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न होगी।

वक्ताओं ने वर्ष 2013 में एससीईआरटी और डायट के पुनर्गठन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय बिना समग्र अध्ययन के तैयार किए गए ढांचे में डायटों में उप प्राचार्य का पद नहीं रखा गया था, जिसके कारण राज्य को लंबे समय तक अकादमिक एवं वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। केंद्र सरकार की अनुशंसाओं के अनुरूप व्यवस्था न होने से केंद्रीय सहायता प्राप्त करने में भी कठिनाइयां आईं।

बैठक में सर्वसम्मति से मांग की गई कि जब तक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा और उससे संबंधित दिशा-निर्देश केंद्र सरकार तथा एनसीटीई द्वारा जारी नहीं कर दिए जाते, तब तक एससीईआरटी और डायट के नए ढांचे को लागू करने की प्रक्रिया स्थगित रखी जाए। राष्ट्रीय अनुशंसाओं के अध्ययन के बाद ही उत्तराखंड की आवश्यकताओं के अनुरूप दीर्घकालिक और वैज्ञानिक शिक्षा ढांचा तैयार किया जाए।

बैठक में भुवनेश पंत, राकेश रावत, मनोज शुक्ला, रविदर्श तोपाल, मनोज बहुगुणा, अरुण थपलियाल, दिनेश चौहान, हरेंद्र अधिकारी, हरीश बड़ोनी, सुशील गैरोला, रमेश पंत सहित लगभग 40 प्रवक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। बैठक का संचालन मंत्री अखिलेश डोभाल एवं रमेश पंत ने संयुक्त रूप से किया।

सहसपुर हिंसा पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, कहा- प्रदेश का सौहार्द बिगाड़ने वालों को नहीं बख्शेंगे

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून को चुनौती देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में हिंसा और अराजकता फैलाने का प्रयास करने वालों को ऐसा दंड दिया जाएगा, जो भविष्य के लिए नजीर बने। गौरतलब है कि शनिवार को बैरागीवाला गांव में दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया था। घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि खेतों में पानी देने को लेकर शुरू हुए विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया।

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। रविवार सुबह कुछ लोगों ने आरोपियों के घरों के आसपास आगजनी और पथराव किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

पुलिस ने मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं प्रशासन ने आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की है। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय विधायक मुन्ना सिंह चौहान भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार गश्त की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।

भाजपा नेता की हत्या के बाद विकासनगर में तनाव, आरोपी के घर में आगजनी और बुलडोजर कार्रवाई

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विकासनगर। सहसपुर क्षेत्र के बैरागीवाला गांव में भाजपा ओबीसी मोर्चा के मीडिया प्रभारी विनोद की हत्या के बाद रविवार को क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान एक आरोपी के घर में आगजनी की घटना भी सामने आई। बाद में प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। बताया गया कि विनोद अपने भाइयों अशोक और राजेश के साथ खेत में सिंचाई कर रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी खेत को लेकर दूसरे पक्ष के लोगों के साथ कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

आरोप है कि इम्तियाज, रज्जाक तथा उनके साथियों ने विनोद और उनके भाइयों पर धारदार एवं भारी हथियारों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल तीनों भाइयों को उपचार के लिए हरबर्टपुर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान विनोद की मृत्यु हो गई, जबकि अन्य घायलों का इलाज जारी है।

घटना की सूचना फैलते ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। रविवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीणों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने गांव में एकत्र होकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान एक आरोपी के घर में आग लगा दी गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। प्रशासन और पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

लच्छीवाला टोल के ई-डिटेक्शन सिस्टम ने काटे 42 चालान, जुर्माना पहुंचा सवा चार लाख

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देहरादून। देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित लच्छीवाला टोल प्लाजा के ई-डिटेक्शन सिस्टम ने एक टैक्सी मालिक को भारी परेशानी में डाल दिया है। वाहन की फिटनेस समाप्त होने के बाद टैक्सी के 42 ई-चालान कट गए, जिनकी कुल राशि ₹4 लाख 15 हजार तक पहुंच गई है।

जानकारी के अनुसार भानियावाला निवासी विजय कुमार की टैक्सी ऑनलाइन बुकिंग ऐप के माध्यम से देहरादून, ऋषिकेश और भानियावाला क्षेत्र में संचालित होती है। वाहन की फिटनेस अवधि समाप्त होने के बावजूद टैक्सी नियमित रूप से लच्छीवाला टोल प्लाजा से गुजरती रही। फरवरी माह से यहां शुरू हुई ई-डिटेक्शन व्यवस्था के तहत हर बार टोल पार करने पर वाहन का स्वतः चालान कटता गया।

चालान की सूचना लगातार मोबाइल पर आती रही, लेकिन वाहन चला रहे चालक ने इन्हें सामान्य रिमाइंडर संदेश समझकर नजरअंदाज कर दिया। जब टैक्सी मालिक को इसकी जानकारी मिली तो उनके होश उड़ गए। उनका कहना है कि जुर्माने की राशि वाहन की मौजूदा कीमत से भी अधिक है और वह इतना बड़ा भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने परिवहन विभाग से राहत देने की मांग की है।

परिवहन विभाग के अनुसार लच्छीवाला टोल प्लाजा पर फरवरी से लागू ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए बीमा, फिटनेस, पंजीकरण और प्रदूषण प्रमाण पत्र की वैधता की स्वचालित जांच की जा रही है। दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर तुरंत ई-चालान जारी किया जाता है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस व्यवस्था के तहत अब तक 15 हजार से अधिक चालान जारी किए जा चुके हैं, जबकि इनमें से केवल 578 चालानों का ही भुगतान हुआ है।

परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल पर आने वाले ई-चालान संबंधी संदेशों को नजरअंदाज न करें। साथ ही वाहन के पंजीकरण प्रमाण पत्र में मोबाइल नंबर अपडेट रखें, ताकि किसी भी उल्लंघन की सूचना समय पर प्राप्त हो सके और भारी जुर्माने से बचा जा सके।

विभाग ने बताया कि वाहन स्वामी एम-परिवहन (mParivahan) ऐप या परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने वाहन पर लंबित चालानों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

शिंदे से संपर्क की अटकलों के बीच उद्धव ने बुलाई सांसदों की बैठक, मातोश्री पर शक्ति प्रदर्शन आज

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख Uddhav Thackeray ने रविवार को अपने सभी लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

यह बैठक मुंबई स्थित ‘मातोश्री’ में दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सभी नौ सांसदों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे उद्धव ठाकरे के शक्ति प्रदर्शन और पार्टी एकजुटता के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, शिंदे पहले ही इन अटकलों को खारिज कर चुके हैं और उन्होंने कहा है कि चुनाव समाप्त हो चुके हैं तथा किसी प्रकार के संख्या बल की आवश्यकता नहीं है।

बैठक में सांसद संजय उर्फ बंडू जाधव की उपस्थिति पर भी विशेष नजर रहेगी, क्योंकि वे पार्टी की पिछली कुछ बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषक इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा में नौ सांसद हैं। इनमें अरविंद सावंत, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय हरिभाऊ जाधव, राजाभाऊ वाजे, संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब वाखचौरे, अनिल देसाई और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर शामिल हैं।

हालांकि, पार्टी के एक सांसद ने पाला बदलने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि यह एक नियमित बैठक है और इसका किसी राजनीतिक घटनाक्रम से सीधा संबंध नहीं है। बावजूद इसके, महाराष्ट्र की राजनीति की नजरें इस बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

उत्तराखंड: भाजयुमो नेता की हत्या के बाद विकासनगर में तनाव, भारी पुलिस बल तैनात

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विकासनगर: सहसपुर कोतवाली क्षेत्र के बैरागीवाला गांव में शनिवार को पुरानी रंजिश और खेत में सिंचाई को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। हमले में भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) से जुड़े नेता विनोद (45) की मौत हो गई, जबकि उनके दो भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके चलते भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है।

जानकारी के अनुसार विनोद और उनके भाई अशोक तथा राजेश सरकारी ट्यूबवेल से अपने खेत में पानी लगा रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी खेत के मालिक इम्तियाज ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया और आरोप है कि इम्तियाज सहित कई लोगों ने धारदार एवं भारी हथियारों से तीनों भाइयों पर हमला कर दिया।

घायलों को तत्काल हरबर्टपुर स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान विनोद ने दम तोड़ दिया। अशोक और राजेश का इलाज जारी है तथा उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

मृतक विनोद भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े हुए थे और पूर्व में बीडीसी चुनाव भी लड़ चुके थे। घटना की सूचना फैलते ही विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ता गांव पहुंच गए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। दून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के थानों की पुलिस और पीएसी बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।

भारतीय सेना का नया ड्रेस कोड लागू, औपनिवेशिक परंपराओं को किया गया समाप्त

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नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और सैन्य परंपराओं से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए नया ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ मैनुअल जारी किया है। 174 पृष्ठों के इस मैनुअल का उद्देश्य औपनिवेशिक दौर की बची-खुची परंपराओं को समाप्त कर भारतीय पहचान और सैन्य संस्कृति को और मजबूत करना बताया गया है।

नए नियमों के तहत औपचारिक अवसरों पर अधिकारियों को बंद गले वाली ‘बंदी जैकेट’ पहनने की अनुमति दी गई है। वहीं, कई औपनिवेशिक परंपराओं से जुड़े प्रावधानों को समाप्त या वैकल्पिक बनाया गया है। परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार रखना अब अनिवार्य नहीं रहेगा, जबकि कुछ औपचारिक ड्रेसों से सेरेमोनियल पाउच बेल्ट भी हटा दी गई है।
सेना ने सभी रैंकों के लिए ‘3बी’ नामक नई शीतकालीन वर्दी भी शुरू की है, जिसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल होंगे।

मैनुअल में सैनिकों के पहनावे के साथ-साथ उनकी ग्रूमिंग और व्यक्तिगत प्रस्तुति से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। टैटू और शरीर में पियर्सिंग पर प्रतिबंध बरकरार रखा गया है। वर्दी के साथ किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी, सिवाय धार्मिक अवसरों पर कलाई में बंधे पवित्र धागे के। धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन पर भी रोक रहेगी, हालांकि सिख सैनिकों को इसमें विशेष छूट प्रदान की गई है।
मूंछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं हो सकेगी। इसके अलावा वर्दी में रहते हुए डिओडोरेंट और परफ्यूम के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि आफ्टर-शेव लोशन की अनुमति होगी।

महिला अधिकारियों और सैनिकों के लिए भी स्पष्ट ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है। वे सादे रंगों की साड़ी अथवा दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार पहन सकेंगी, लेकिन बिना आस्तीन वाले कुर्ते, पलाजो और अन्य कैजुअल लोअर पहनने की अनुमति नहीं होगी। लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पर भी प्रतिबंध रहेगा, जबकि सिंदूर लगाने की अनुमति होगी, बशर्ते वह टोपी या बेरेट के नीचे दिखाई न दे।

मैनुअल में सेना की शब्दावली से ‘रॉयल’ जैसे औपनिवेशिक शब्दों को भी हटाया गया है। सेना अधिकारियों के अनुसार यह कदम भारतीय सैन्य परंपराओं को देश की सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सेना में स्वदेशीकरण और भारतीयकरण की यह प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से लगातार जारी है। इसका उद्देश्य सैन्य परंपराओं, प्रक्रियाओं और प्रतीकों को भारतीय मूल्यों और आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना है।

पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर नए नियम लागू, एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आदेश के अनुसार अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से सीधे ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। साथ ही किसी भी ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा।

सरकार के मुताबिक बड़े उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता का ईंधन केवल अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही प्राप्त करना होगा। पेट्रोल पंपों पर डीजल केवल वाहन की टंकी में या पीईएसओ (PESO) से अनुमोदित कंटेनरों में ही दिया जा सकेगा। इसके अलावा खरीदे गए ईंधन की पुनर्विक्रय (रीसेल) की अनुमति नहीं होगी।

मंत्रालय ने तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह व्यवस्था प्रारंभिक तौर पर अधिकतम 90 दिनों के लिए प्रभावी रहेगी, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।

क्यों लिया गया फैसला

सरकार ने इस निर्णय के पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं। पहला, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। दूसरा, देश के कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में असामान्य वृद्धि देखी गई है।

सरकार के अनुसार खुदरा और थोक कीमतों में अंतर का लाभ उठाकर कुछ औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयां बड़ी मात्रा में पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रही थीं, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध स्टॉक प्रभावित होने का खतरा पैदा हो रहा था। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंकाएं भी बढ़ रही थीं।

नियम उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 तथा अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकृत अधिकारी, डीएसपी रैंक या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के अधिकृत अधिकारी जांच, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कर सकेंगे।

आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य वाहन चालकों के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की ईंधन क्षमता 200 लीटर से काफी कम होती है, इसलिए यह सीमा आम उपभोक्ताओं को प्रभावित नहीं करेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य केवल बड़े खरीदारों द्वारा होने वाली अत्यधिक खरीद पर नियंत्रण लगाना और आम जनता के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

उत्तराखंड: IMA पासिंग आउट परेड के चलते 13 जून को यातायात रहेगा डायवर्ट

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देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में 13 जून को आयोजित होने वाली पासिंग आउट परेड के मद्देनजर देहरादून पुलिस ने विशेष यातायात डायवर्जन प्लान जारी किया है। सुरक्षा और सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित और डायवर्ट रहेगा।

परेड के दौरान आईएमए क्षेत्र को पूर्ण रूप से जीरो जोन घोषित किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार के वाहन को आईएमए की ओर जाने की अनुमति नहीं होगी।

यातायात पुलिस के अनुसार, बल्लूपुर से प्रेमनगर की ओर जाने वाले वाहनों को रांघड़वाला तिराहे से मिठी बेरी मार्ग होते हुए भेजा जाएगा। वहीं प्रेमनगर से शहर की ओर आने वाले छोटे वाहनों को प्रेमनगर चौक से एमटी गेट और मिठी बेरी गेट होते हुए रांघड़वाला के रास्ते शहर की ओर डायवर्ट किया जाएगा।

सेलाकुई और भाऊवाला क्षेत्र से आने वाले सभी भारी वाहनों को धूलकोट तिराहे से सिंघनीवाला और नया गांव मार्ग के जरिए शहर की ओर भेजा जाएगा। इसके अलावा देहरादून से विकासनगर जाने वाले भारी वाहनों को शिमला बाईपास से डायवर्ट कर धर्मावाला मार्ग से विकासनगर भेजा जाएगा।

पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे निर्धारित समय के दौरान वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।