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उत्तराखंड: दर्दनाक सड़क हादसा, खाई में गिरी कार, तीन लोगों की मौत

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अल्मोड़ा। जनपद अल्मोड़ा के भिकियासैंण क्षेत्र में गुरुवार सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद एसडीआरएफ उत्तराखण्ड पुलिस ने दुर्गम खाई में चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान चलाकर तीनों शवों को बाहर निकाला।

जानकारी के अनुसार गुरुवार प्रातः तहसील प्रशासन को सूचना मिली कि राफड़ क्षेत्र के समीप एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई है। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम अपर उप निरीक्षक महिपाल सिंह के नेतृत्व में आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके के लिए रवाना हुई।

घटनास्थल पर पहुंचने पर टीम ने पाया कि मारुति ऑल्टो 800 कार संख्या UK04F6683 सड़क से करीब 200 मीटर नीचे गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त पड़ी हुई थी। क्षेत्र अत्यंत दुर्गम और ढलानयुक्त होने के कारण रेस्क्यू अभियान काफी कठिन रहा।

एसडीआरएफ जवानों ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया। प्रारंभिक तलाश में दो लोग अलग-अलग स्थानों पर अचेत अवस्था में मिले, जिन्हें सावधानीपूर्वक खाई से बाहर निकाला गया। इसके बाद चलाए गए विस्तृत सर्च अभियान में तीसरे व्यक्ति को भी खोजकर सड़क तक पहुंचाया गया।

मौके पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान भुवन पुत्र दीवान राम निवासी ग्राम सनेटी, कैलाश चंद्र पुत्र बहादुर राम निवासी ग्राम दौड़ाखाल (उम्र 32 वर्ष) तथा आनंद राम निवासी सोनी, रानीखेत (उम्र लगभग 40 वर्ष) के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि तीनों व्यक्ति जागरी कार्य से जुड़े थे और ग्राम चमोली पुसैला में आयोजित जागर कार्यक्रम संपन्न कराने के बाद देर रात अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा।

एसडीआरएफ टीम ने तीनों शवों को खाई से बाहर निकालकर आगे की कार्रवाई के लिए मोर्चरी रानीखेत भिजवा दिया है।

बाबा केदार की नगरी में सुरक्षा में बड़ी सेंध! संदिग्ध युवक के पास मिली एयर गन और धारदार हथियार! पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

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रुद्रप्रयाग : केदारनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचे एक संदिग्ध युवक के पास से एयर गन और धारदार हथियार मिलने की सूचना सामने आई। पुलिस इसे अपनी “सघन चेकिंग अभियान” की सफलता बता रही है और बरामद हथियार को “खिलौना बंदूक” करार दे रही है, लेकिन मामला गंभीर है।

 रायबरेली निवासी युवक धाम में दर्शन के लिए पहुंचा था और घोड़ा पड़ाव के पास एक टेंट में ठहरा हुआ था। इसी दौरान टेंट संचालक को युवक के सामान पर शक हुआ। कपड़े में लिपटी संदिग्ध वस्तु को देखकर उसके होश उड़ गए। जब सामान की जांच की गई तो उसमें बंदूक और धारदार हथियार दिखाई दिए। इसके बाद टेंट संचालक ने बिना देर किए पुलिस और एलआईयू को सूचना दी। सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।

लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पुलिस की सघन चेकिंग इतनी मजबूत थी, तो संदिग्ध युवक एयर गन लेकर केदारनाथ धाम तक पहुंचा कैसे? आखिर सोनप्रयाग, गौरीकुंड और रास्ते में मौजूद तमाम सुरक्षा जांच चौकियों पर उसकी तलाशी क्यों नहीं हुई? क्या सुरक्षा जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है?

पुलिस ने मामले को हल्का दिखाने की कोशिश करते हुए दावा किया कि युवक को मानसिक रूप से अस्वस्थ है और बरामद बंदूक को “खिलौना” बंदूक कहा है। केदारनाथ सीओ नितिन लोहनी के मुताबिक 6 मई की शाम संदिग्ध व्यक्तियों की जांच के दौरान युवक पकड़ा गया। लेकिन, स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस मौके पर तब पहुंची जब टेंट संचालक ने खुद सूचना दी। ऐसे में पुलिस द्वारा इसे “सघन चेकिंग अभियान की सफलता” बताना कई सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियों में भी साफ नजर आ रहा है।

अगर टेंट संचालक सतर्कता न दिखाता तो क्या होता? क्या वही युवक लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता था? यह सवाल अब हर श्रद्धालु के मन में है।

पुलिस ने बिना वैध आईडी के युवक को ठहराने पर टेंट संचालक के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है, लेकिन असली सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर है। चारधाम यात्रा के दौरान हर दिन हजारों श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच रहे हैं। ऐसे में एक संदिग्ध युवक का बंदूक और धारदार हथियारों के साथ धाम तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना जा रहा है।

साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर महावीर रवांल्टा को मिलेगा ‘बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान-2026’

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पुरोला: उत्तराखण्ड के वरिष्ठ साहित्यकार एवं बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार महावीर रवांल्टा को उनकी चर्चित बाल कृति ‘गोलू पढ़ेगा’ के लिए प्रतिष्ठित ‘बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान-2026’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान आगामी 14 जून को बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट में होगा।

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‘बालप्रहरी’ त्रैमासिक पत्रिका के संपादक एवं संस्थान के सचिव उदय किरौला द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार देशभर के चयनित 10 बाल साहित्यकारों को इस अवसर पर स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र एवं सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया जाएगा।

बाल साहित्य में विशिष्ट पहचान

अस्सी के दशक से साहित्य सृजन में सक्रिय महावीर रवांल्टा ने बाल साहित्य, कहानी, नाटक, व्यंग्य, कविता, लोक साहित्य और लघुकथा सहित विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी चर्चित बाल पुस्तकों में ‘ननकू नहीं रहा’, ‘विनय का वादा’, ‘अनोखा जन्मदिन’, ‘जुगनू की पढ़ाई’, ‘चल मेरी ढोलक ठुमक ठुम’, ‘पोखू का घमंड’ और ‘दैत्य और पांच बहिने’ जैसी कृतियां शामिल हैं।

अब तक उनकी 46 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। बाल साहित्य और हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें देशभर की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनमें उत्तराखण्ड बाल साहित्य संस्थान, बाल कल्याण एवं शोध केन्द्र, शब्द प्रवाह और बाल वाटिका प्रमुख हैं।

लोक संस्कृति और रवांल्टी भाषा के संवाहक

महावीर रवांल्टा को रवांल्टी भाषा में लेखन की शुरुआत करने वाले अग्रणी साहित्यकारों में भी माना जाता है। उन्होंने रवांई क्षेत्र की लोकगाथाओं और लोककथाओं को हिंदी साहित्य से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। ‘गजू-मलारी’ लोकगाथा पर आधारित ‘एक प्रेमकथा का अंत’, ‘रथ देवता’ पर आधारित ‘सफेद घोड़े का सवार’ तथा ‘बदला’ पर आधारित ‘धुएं के बादल’ जैसे नाटकों के माध्यम से उन्होंने लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।

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भाषा संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे उत्तराखण्ड भाषा संस्थान, भाषा-शोध एवं प्रकाशन केन्द्र तथा सेल (सोसायटी फार इंडेजर्ड एंड लेस नोन लैंग्वेजेस) के भाषा सर्वेक्षण एवं प्रलेखन कार्यों से जुड़े रहे हैं।

रंगमंच और साहित्य दोनों में सक्रिय

महावीर रवांल्टा की कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की संस्कार रंग टोली सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा दिल्ली, देहरादून और खुर्जा में किया जा चुका है। साहित्य के साथ-साथ रंगकर्म में भी उनकी गहरी रुचि रही है और उन्होंने कई नाटकों का लेखन, अभिनय एवं निर्देशन किया है।

उनकी चर्चित लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर लघु फिल्म का निर्माण भी हो चुका है। वर्तमान में वे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। आराकोट जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र में भी वे लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

46 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन.

बाल साहित्य की एक दर्जन चर्चित कृतियां.

रवांल्टी भाषा में लेखन की अग्रणी पहल.

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा रचनाओं का मंचन.

‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान-गोविन्द पुरस्कार-2022’ सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मान.

लघुकथा ‘तिरस्कार’ पर लघु फिल्म का निर्माण.

“बाल साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के संस्कार और संवेदनाओं का आधार है।”

-महावीर रवांल्टा

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या से सनसनी, बोले- “सोची-समझी साजिश”

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा नेता Suvendu Adhikari के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या किए जाने से राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद भाजपा ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह हत्या पूरी तरह सुनियोजित साजिश के तहत की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने 2-3 दिनों तक रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम दिया।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह पहले से सोची-समझी हत्या है। डीजीपी ने भी यही कहा है। कई दिनों तक रेकी की गई और पूरी योजना बनाकर हमला किया गया। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन हम बेहद दुखी हैं और इस घटना की निंदा के लिए शब्द नहीं हैं।”

उन्होंने बताया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी मामले की जानकारी ली है। केंद्रीय मंत्री Sukanta Majumdar ने मृतक के परिजनों और पुलिस अधिकारियों से बात की है। कई भाजपा नेता और विधायक भी मध्यमग्राम पहुंचे।

डीजीपी बोले- जांच जारी, संदिग्ध गाड़ी जब्त

पश्चिम बंगाल के डीजीपी Siddh Nath Gupta ने कहा कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और घटना में इस्तेमाल की गई चार पहिया गाड़ी को जब्त कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में गाड़ी की नंबर प्लेट नकली होने और उससे छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई है।

डीजीपी के अनुसार घटनास्थल से जिंदा और इस्तेमाल किए गए कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस चश्मदीदों से पूछताछ कर रही है और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।

चश्मदीद ने बताया- बेहद करीब से की गई फायरिंग

घटना के एक चश्मदीद के मुताबिक, रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच चंद्रनाथ रथ की कार अचानक सड़क पर धीमी हुई, तभी बाइक सवार एक हमलावर आया और कार की बाईं ओर से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हमलावर बेहद पेशेवर लग रहा था और वारदात के तुरंत बाद फरार हो गया। उसने कहा कि गोलियां बेहद करीब से चलाई गई थीं और पूरी घटना पूर्व नियोजित प्रतीत हो रही थी।

कार घेरकर बरसाईं गोलियां

जानकारी के अनुसार, चंद्रनाथ रथ पर चलती कार में चार गोलियां चलाई गईं, जिनमें से तीन गोलियां उन्हें लगीं। हमलावरों ने पहले उनकी कार का पीछा किया और मौका मिलते ही हमला बोल दिया। कार की खिड़कियों पर गोलियों के निशान साफ देखे गए हैं। घटना में चालक भी घायल हुआ है।

चंद्रनाथ रथ लंबे समय से सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे और राजनीतिक गतिविधियों के समन्वय सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते थे। भाजपा ने इस हत्या को राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का उदाहरण बताते हुए दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

बदरीनाथ मास्टर प्लान योजना क्रियान्वयन की समीक्षा

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श्री बदरीनाथ धाम को स्प्रिचुअल हिल टाउन के रूप में विकसित किये जाने की कार्ययोजना

देहरादून 6 मई।बदरीनाथ धाम में संचालित पुनर्निर्माण कार्यों के साथ ही अब बदरीनाथ को स्प्रिचुअल हिल टाउन के रूप में विकसित किये जाने की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष बुधवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान के अंतर्गत चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की। बैठक में सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया गया कि बदरीनाथ को एक आध्यात्मिक स्मार्ट हिल टाउन के रूप में विकसित करने के लिए बहु-आयामी और चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ दिव्य और व्यवस्थित अनुभव प्रदान करना है।

उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान के तहत क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थलों को विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है। देव दर्शनी पॉइंट को इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि श्रद्धालुओं को यहां से बदरीनाथ धाम के प्रथम दर्शन एक भव्य और दिव्य रूप में प्राप्त हो सकें। वहीं बद्रीनारायण चौक को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं और आकर्षक सार्वजनिक स्थल उपलब्ध होंगे।

बद्रीनाथ धाम में आईएसबीटी वॉल पर स्थानीय कला एवं धार्मिक विषयों पर आधारित भित्ति चित्रों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जायेगा। वसुधा वाटिका कलाकृति के माध्यम से प्रकृति, आध्यात्मिकता और उत्तराखंड की पारंपरिक कला का समावेश करते हुए आकर्षक लैंडस्केप तैयार किए जायेंगे।

मास्टर प्लान में भगवान विष्णु से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता दी गई है, जिनमें पाञ्चजन्य शंख, कौमोदकी गदा, सुदर्शन चक्र, वैकुंठ द्वार जैसी भव्य कलाकृतियों का निर्माण किया जायेगा, जो न केवल धार्मिक महत्व को दर्शायेंगे, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनेंगे। इसके साथ ही शेषनेत्र कलाकृति और पंच तत्व थीम पर आधारित संरचनाएं आध्यात्मिक ऊर्जा और भारतीय दर्शन को दर्शाने का कार्य करेंगी। भगवान राम एवं कृष्ण पर आधारित रामायण एवं महाभारत कालीन प्रतीकों का इसमें समावेश किया गया है। दिया आरती स्थल के विकास की योजना भी तैयार की गई है, ताकि यहां आयोजित होने वाली आरती श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य और अविस्मरणीय अनुभव बने। वहीं पूरे क्षेत्र में स्ट्रीटस्कैप का विकास कार्य किया जाना भी प्रस्तावित है, जिसके तहत आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाएं, साइनेज और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य कराये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बदरीनाथ धाम के दिव्य स्वरूप को और अधिक भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए इस मास्टर प्लान में सभी आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित किये जायें। साथ ही स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के माध्यम से बद्रीनाथ में न केवल आध्यात्मिक वातावरण सुदृढ़ होगा, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा दी जा सकेगी। परियोजना के पूर्ण होने पर बद्रीनाथ एक ऐसे आदर्श स्थल के रूप में स्थापित होगा, जहां आस्था, आधुनिकता और प्रकृति का संतुलित संगम देखने को मिलेगा।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, संयुक्त सचिव अनिल जोशी एवं संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

उत्तराखंड : शादी समारोह से लौट रही नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, आरोपी फरार

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चम्पावत। उत्तराखंड के शांत कहे जाने वाले पहाड़ों से एक बेहद शर्मनाक और खौफनाक घटना सामने आई है। जनपद के सल्ली गांव में एक शादी समारोह से घर लौट रही नाबालिग बालिका को बंधक बनाकर तीन दरिंदों ने चाकू की नोक पर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, चम्पावत जिले के एक दूरस्थ गाँव की रहने वाली नाबालिग बालिका पास के ही सल्ली गाँव में एक वैवाहिक समारोह में शामिल होने गई थी। कार्यक्रम के बाद जब वह वापस अपने घर लौट रही थी, तभी रास्ते में तीन युवकों ने उसे रोक लिया। आरोप है कि तीनों आरोपियों ने बालिका को डराया-धमकाया और चाकू की नोक पर उसे एकांत स्थान पर ले गए, जहाँ उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद बालिका के घर न पहुँचने पर परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पीड़िता के पिता ने तत्काल ‘112’ के माध्यम से पुलिस को सूचना दी।

पुलिस की सक्रियता और बालिका की बरामदगी

सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के निर्देश पर चम्पावत पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया। पुलिस की टीम रात में ही मौके पर रवाना हुई और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाते हुए सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद बालिका को एक डेयरी के समीप से बरामद किया गया। बरामदगी के समय बालिका बेहद डरी-सहमी और बदहवास स्थिति में थी।

पूछताछ के दौरान बालिका ने आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से बालिका को जिला चिकित्सालय भेजा, जहाँ उसका उपचार और चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल एग्जामिनेशन) कराया गया।

साक्ष्य संकलन और आरोपियों की तलाश

पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि घटना स्थल को सुरक्षित कर लिया गया है। फील्ड यूनिट और वैज्ञानिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से साक्ष्य एकत्रित किए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसओजी (SOG) और स्थानीय पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।

पुलिस अधीक्षक के अनुसार:

“112 पर सूचना मिलते ही पुलिस ने गुमशुदगी के आधार पर तलाश शुरू की थी। बालिका के बरामद होने और दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद तीन आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर दबिश दी जा रही है। आरोपियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

इलाके में आक्रोश

इस जघन्य अपराध के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों ने आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी सजा देने की माँग की है। वर्तमान में पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और जल्द ही सफलता मिलने का दावा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7.56 लाख पेंशनर्स के खातों में भेजे 111.82 करोड़ रुपये

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए “वन क्लिक” के माध्यम से राज्य के लाखों जरूरतमंदों के खातों में पेंशन राशि हस्तांतरित की। इस पहल के तहत कुल 7,56,682 पेंशनर्स को 111 करोड़ 82 लाख 52 हजार रुपये की धनराशि जारी की गई। यह भुगतान अप्रैल माह की पेंशन के रूप में किया गया, जिसमें वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली और बौना पेंशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।

अंत्योदय पर सरकार का फोकस
सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय के सिद्धांत पर काम कर रही है और समाज के आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति पेंशन के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में लगातार आयोजित किए जा रहे बहुउद्देश्यीय शिविरों के माध्यम से हर साल 60 हजार से अधिक नए लाभार्थी पेंशन योजनाओं से जुड़ रहे हैं।

60 वर्ष पूरी होते ही मिले पेंशन—अधिकारियों को निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 59 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लोगों का सर्वे कर समय रहते उनकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि 60 वर्ष की आयु पूरी होते ही उन्हें पेंशन का लाभ मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए वार्षिक आय सीमा को व्यावहारिक बनाया जाए और सभी योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाए, जिससे आम जनता को सुविधा हो।

नवाचार और संवाद पर जोर
मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि विभाग अपनी “बेस्ट प्रैक्टिस” अन्य विभागों के साथ भी साझा करे। साथ ही, पेंशनर्स विशेषकर बुजुर्गों से संवाद बनाए रखने के लिए कॉल सेंटर के माध्यम से नियमित संपर्क स्थापित करने पर भी जोर दिया।

पारदर्शिता पर मंत्री का भरोसा
इस अवसर पर मौजूद विभागीय मंत्री खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विभाग प्रत्येक जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशन योजनाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है और लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।

जनकल्याण की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार की इस पहल को सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सीधे बैंक खातों में पेंशन ट्रांसफर होने से न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है, बल्कि लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल रही है।

BKTC पर फिर गंभीर आरोप: केदार सभा को 11 लाख के भुगतान पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेजों के आधार पर समिति पर केदारनाथ धाम में तीर्थ-पुरोहितों की संस्था “केदार सभा” को 11 लाख रुपये का भुगतान नियमों को दरकिनार कर करने के आरोप लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

ढाई महीने बाद स्वीकृति, प्रक्रिया पर सवाल
अधिवक्ता विकेश नेगी के अनुसार, केदारनाथ धाम में 25 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ था। हैरानी की बात यह है कि आयोजन समाप्त होने के करीब ढाई महीने बाद 12 अक्टूबर 2025 को बीकेटीसी ने आनन-फानन में दो अलग-अलग नोटशीट तैयार कर 11 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी। इन दस्तावेजों पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल, उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण और अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हस्ताक्षर दर्ज हैं। नेगी ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में वित्त नियंत्रक की सहमति नहीं ली गई, जो वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि केदार सभा की ओर से आर्थिक सहायता के लिए कोई औपचारिक आवेदन किया गया था या नहीं।

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विरोध के बाद भुगतान, ‘सेटिंग’ के आरोप
मामले को और संदिग्ध बनाता है घटनाक्रम का समय। नेगी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 को केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष की कार्यशैली के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके ठीक दो दिन बाद 12 अक्टूबर को 11 लाख रुपये की स्वीकृति मिलना कई सवाल खड़े करता है। नेगी का आरोप है कि यह भुगतान विरोध को शांत कराने के उद्देश्य से किया गया, जो दान-चढ़ावे के दुरुपयोग का संकेत देता है।

लाइव स्ट्रीमिंग भुगतान और कोटेशन प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में
मामले में एक और पहलू सामने आया है, जिसमें कथा के लाइव प्रसारण के लिए ‘तीतर मीडिया एंड एडवर्टाइजिंग कंपनी’ को 1.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि इस कार्य के लिए अपनाई गई कोटेशन प्रक्रिया संदिग्ध थी। तीन अलग-अलग कंपनियों के कोटेशन एक ही तारीख पर और लगभग समान भाषा में प्रस्तुत किए गए, जिससे मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

नियमों के विरुद्ध नियुक्तियां भी सवालों में
नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि बीकेटीसी ने केदार सभा से जुड़े कुछ लोगों को “विशेष आमंत्रित सदस्य” के रूप में नियुक्त किया, जबकि इसके लिए पहले शासन स्तर पर नियम बनना आवश्यक है। ऐसे में इन नियुक्तियों की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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पहले भी लग चुके हैं आरोप
अधिवक्ता नेगी ने दावा किया कि इससे पहले भी बीकेटीसी के एक उपाध्यक्ष पर अपनी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखाकर वेतन लेने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

सीएम से जांच और कार्रवाई की मांग
विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे न केवल मंदिर समिति की विश्वसनीयता प्रभावित होगी, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंचेगी।

आस्था बनाम आरोपों की चुनौती
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में मंदिर समिति पर लग रहे वित्तीय अनियमितता के आरोप न केवल प्रशासनिक बल्कि धार्मिक विश्वास के स्तर पर भी गंभीर माने जा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।

उत्तराखंड : BJP के आठ विधायकों पर संकट, सर्वे में कमजोर प्रदर्शन से टिकट पर खतरा

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देहरादून : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भाजपा ने अपने ही आठ विधायकों के प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के आंतरिक सर्वे में इन विधायकों का कामकाज संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके चलते उनकी उम्मीदवारी पर खतरा मंडराने लगा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, लगातार दो बार सत्ता में रहने के बाद भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इसी के चलते संगठन हर सीट और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की बारीकी से समीक्षा कर रहा है। सर्वे रिपोर्ट में आठ ऐसी सीटें सामने आई हैं, जहां पार्टी को हार का खतरा नजर आ रहा है।

बताया जा रहा है कि इन विधायकों ने चुनाव के दौरान जनता से किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं किए हैं। साथ ही, क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी अपेक्षाकृत कम पाई गई है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि 10 साल की सत्ता के खिलाफ किसी प्रकार की एंटी-इंकंबेंसी लहर तैयार हो।

संगठन ने ऐसे विधायकों को सख्त संदेश देते हुए अपने कामकाज में सुधार और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की नसीहत दी है। साथ ही, जिन सीटों पर पार्टी पिछली बार हार गई थी, वहां भी अलग रणनीति पर काम किया जा रहा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के लिए हर सीट पर जीतने वाला उम्मीदवार ही प्राथमिकता होगा। सर्वे रिपोर्ट को इसी आधार पर देखा जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि संबंधित विधायक अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं करते हैं, तो पार्टी उनके टिकट काटने का फैसला भी ले सकती है।

कांग्रेस का TVK को समर्थन, विजय के लिए सरकार बनाने का रास्ता साफ

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नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Indian National Congress की राज्य इकाई ने Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) प्रमुख Vijay को राज्य में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया है। यह निर्णय तमिलनाडु कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की आपात बैठक में लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के तमिलनाडु मामलों के प्रभारी Girish Chodankar ने बैठक बुलाई, जिसमें वरिष्ठ नेताओं ने एकमत से विजय के नेतृत्व में ‘सेक्युलर सरकार’ के समर्थन का प्रस्ताव पारित किया। इससे पहले विजय ने कांग्रेस से समर्थन मांगा था, जिस पर पार्टी नेतृत्व ने राज्य इकाई को अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी थी।

इस मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की बैठक Mallikarjun Kharge के आवास पर हुई, जिसमें Rahul Gandhi भी मौजूद रहे। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) K. C. Venugopal ने कहा कि पार्टी तमिलनाडु में संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के पक्ष में है और भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कदम उठाएगी।

विधानसभा चुनाव परिणामों की बात करें तो 234 सदस्यीय सदन में टीवीके ने 108 सीटें हासिल की हैं और उसे बहुमत के लिए 10 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। कांग्रेस को 5 सीटें मिली हैं, जबकि Dravida Munnetra Kazhagam (डीएमके) ने 59 और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (एआईएडीएमके) ने 47 सीटें जीती हैं। Bharatiya Janata Party को एक सीट पर जीत मिली।

वहीं, विजय ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी का आभार जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी जनसेवा और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के विकास के लिए सभी के साथ मिलकर काम करेगी।