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राम मंदिर चंदा घोटाला: SIT ने सौंपी 150 पन्नों की रिपोर्ट, टिन्नू समेत 5 पर FIR की तैयारी, PMO के निर्देशों का इंतजार

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अयोध्या: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच पूरी हो गई है। छह दिनों तक अयोध्या में डेरा डालकर सघन तफ्तीश करने के बाद लखनऊ लौटी एसआईटी सोमवार (आज) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 150 से अधिक पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने जा रही है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले की आंच अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में न केवल निचले स्तर के गणनाकर्मी बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों की भूमिका भी गंभीर लापरवाही और संदिग्ध संलिप्तता के दायरे में आई है। इस बीच, दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की एक विशेष टीम ने भी गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है, जिसके बाद अब ट्रस्ट के पुनर्गठन और बड़े चेहरों पर बड़ी कानूनी गाज गिरने की संभावना तेज हो गई है।

चंपत राय के पूर्व ड्राइवर ‘टिन्नू’ पर कस रहा शिकंजा

एसआईटी सूत्रों के अनुसार, जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर और वर्तमान में मंदिर व्यवस्थाओं में असीमित दखल रखने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, गणनाकर्मी लवकुश और अनुकल्प सहित पांच प्रमुख लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की पूरी संस्तुति कर दी गई है।

  • 20 घंटे का शिकंजा: एसआईटी ने इन आरोपियों से 20 घंटे से अधिक समय तक कड़ी पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ में इनके गोलमोल जवाबों और नकदी बरामदगी के पुख्ता सबूतों ने इनका अपराध लगभग तय कर दिया है।

  • IPS की निगरानी में होगी विवेचना: मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार इस मुकदमे की आगे की विवेचना किसी आईपीएस (IPS) अधिकारी की निगरानी में विशेष रूप से गठित टीम से कराने पर विचार कर रही है। एफआईआर में अज्ञात के रूप में कई अन्य बड़े चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

ट्रस्टियों को अयोध्या न छोड़ने का फरमान

चोरी का भंडाफोड़ होने के बाद मंदिर प्रबंधन ने त्वरित कदम उठाते हुए बैंक और ट्रस्ट की चंदा गिनती टीम में शामिल सभी 40 गणनाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

  • नई व्यवस्था: बैंक की ओर से अब नए गणनाकर्मियों को काम पर लगाया गया है, जो ट्रस्ट और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी और लाइव निगरानी में दान राशि की गणना कर रहे हैं।

  • शहर छोड़ने पर रोक: एसआईटी ने मामले की संवेदनशीलता और आगे की पूछताछ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख अधिकारियों और पदाधिकारियों को तत्काल अयोध्या न छोड़ने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

PMO की सीधी नजर

एसआईटी रिपोर्ट में इस बात का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है कि मंदिर परिसर की पूरी निगरानी व्यवस्था ध्वस्त थी। तय की गई सरकारी गाइडलाइंस और सुरक्षा ऑडिट नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था, जिसका फायदा उठाकर बेखौफ तरीके से करोड़ों का गबन किया जाता रहा। यह प्रशासनिक लापरवाही ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के लिए बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकती है।

चूंकि इस ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था, इसलिए इस पर पीएमओ की सीधी नजर है। पीएमओ के अधिकारियों ने भी हाल ही में गुप्त रूप से अयोध्या पहुंचकर एक समानांतर गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है। अब अंतिम कार्रवाई और ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर दिल्ली (PMO) से मिलने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।

अपराधी को मिले कड़ी से कड़ी सजा

इस पूरे घटनाक्रम पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संगठन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि चढ़ावे के गबन का यह मामला बेहद गंभीर है। जिसने भी यह घिनौना अपराध किया है, उसे कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम इस बात से संतुष्ट हैं कि ट्रस्ट की अपील पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल एसआईटी का गठन किया। हम चाहते हैं कि निष्पक्ष और गहराई से जांच हो, न कि किसी के प्रति सहानुभूति के आधार पर। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट आने से पहले कयासों के आधार पर सभी की छवि खराब करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, एसआईटी को विस्तृत जांच के लिए दो से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है, जिसमें गबन की गई कुल धनराशि के सटीक आंकड़ों और सोने-चांदी के गायब जेवरातों की परतों को खोला जाएगा।

कतर के गैस टर्मिनल में भीषण विस्फोट : 54 घायल, 18 लापता, वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट गहराने की आशंका

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दोहा : पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और शांति वार्ताओं के बीच कतर से एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। कतर के प्राकृतिक गैस उद्योग के प्रमुख केंद्र रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र (Ras Laffan Industrial City) स्थित बरजान गैस आपूर्ति संयंत्र में रविवार रात मरम्मत के बाद परिचालन शुरू करते समय एक भीषण विस्फोट हो गया। इस धमाके के बाद प्लांट में प्रलयंकारी आग लग गई, जिसकी चपेट में आने से 54 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि 18 कर्मचारी अब भी लापता हैं।

कतर सरकार की स्वामित्व वाली दिग्गज कंपनी कतर एनर्जी (QatarEnergy) और देश के गृह मंत्रालय ने इस दर्दनाक हादसे और स्थिति की गंभीरता की आधिकारिक पुष्टि की है। इस घटना के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों (Global Energy Markets) में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति ठप होने और कीमतों में भारी अस्थिरता आने की आशंका तेज हो गई है।

ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त हुआ था प्लांट

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान युद्ध के दौरान हुए एक हवाई हमले में कतर के इस प्रमुख गैस प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा था। लंबे समय तक चले मरम्मत कार्य के बाद रविवार को इस निर्यात टर्मिनल को फिर से चालू (Restart) करने की कोशिश की जा रही थी, इसी दौरान तकनीकी गड़बड़ी के चलते यह जोरदार ब्लास्ट हो गया।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और कतर की मजबूरी

हालिया दिनों में ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण कड़ा किए जाने के कारण कतर वैश्विक बाजार और अपने अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों तक गैस की खेप नहीं भेज पा रहा था। इस नाकाबंदी की वजह से कतर को अपनी गैस उत्पादन गतिविधियों को अस्थायी रूप से ठप करना पड़ा था।

हालांकि, युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच जब ईरान ने जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की, तो कतर ने तुरंत अपने सबसे बड़े निर्यात टर्मिनल को दोबारा एक्टिव करने की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन पहली ही कोशिश में यह बड़ा हादसा हो गया।

गृह मंत्रालय ने किया बड़ी तबाही का खुलासा

विस्फोट के तुरंत बाद कतर एनर्जी के अधिकारियों ने नुकसान का आकलन करते हुए शुरुआती बयानों में केवल कुछ ही लोगों के मामूली रूप से झुलसने की बात कही थी। लेकिन कई घंटों की मशक्कत और आग पर काबू पाने के बाद स्थिति की भयावहता सामने आई।

कतर के गृह मंत्रालय ने देर रात विस्तृत बयान जारी कर बताया कि हादसे में घायल होने वाले लोगों की संख्या 54 तक पहुंच चुकी है, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों के बर्न यूनिट और आईसीयू में भर्ती कराया गया है। मलबे और धुएं के बीच लापता 18 कर्मचारियों को ढूंढने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

दुनियाभर में बढ़ेगा ऊर्जा संकट!

कतर वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े तरल प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। इस भीषण विस्फोट और प्लांट के दोबारा बंद होने से यूरोपीय और एशियाई देशों में गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रास लाफान टर्मिनल लंबे समय तक बंद रहा, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे पहले से ही महंगाई की मार झेल रही वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक और बड़ा झटका लगेगा।

नगरासू गुरुद्वारे में 27 घंटे चला ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ शांत, सेवादार रिहा, भ्रामक पोस्ट करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

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रुद्रप्रयाग/देहरादून : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार शाम से चल रहा ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ रविवार शाम को करीब 27 घंटे बाद कुछ शांत हुआ। कर्णप्रयाग प्रकरण में गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग को लेकर गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर मोर्चा लगाकर बैठे सात निहंगों में से तीन निहंग (परमवीर सिंह, अकाल सिंह व एक अन्य) प्रशासन के साथ चौथे दौर की वार्ता के बाद नीचे उतर आए हैं।

निहंगों ने अपने कब्जे में लिए गए सेवादार नवतेज सिंह को भी पूरी तरह सुरक्षित रिहा कर दिया है। वर्तमान में पांच निहंग अभी भी गुरुद्वारे के भीतर मौजूद हैं, जिनसे प्रशासन की बातचीत चल रही है। गुरुद्वारे में अब अरदास, लंगर और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रूप से शुरू हो चुकी है।

सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा, इंटरनेट सेवाएं की गईं बंद

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए चमोली और रुद्रप्रयाग प्रशासन बेहद सतर्क है। एहतियात के तौर पर कर्णप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। गुरुद्वारा परिसर और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील अन्य सीमाओं पर उत्तराखंड पुलिस, एटीएस (ATS), आईटीबीपी (ITBP) और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। इससे पूर्व, एसपी नीहारिका तोमर ने फोन पर करीब एक घंटे तक निहंगों को मनाने का प्रयास किया था, लेकिन शुरुआती तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी।

लंगर के दौरान शुरू हुआ था विवाद: आईजी गढ़वाल

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे में लंगर के दौरान प्रबंध कमेटी और निहंगों के बीच आपसी मतभेद के कारण विवाद हुआ था। इसकी सूचना कंट्रोल रूम को मिलने पर जब पुलिस पहुंची, तो निहंगों को लगा कि कमेटी ने उन्हें पकड़वाने के लिए पुलिस बुलाई है। इसी गलतफहमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई। निहंगों का आम जनता या पुलिस से कोई टकराव नहीं है।

दोनों बंधक छोड़े जा चुके हैं और भ्रामक पोस्ट करने वालों के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, नीचे उतरे निहंग अकाल सिंह ने बयान जारी कर कहा, “हम सभी सही-सलामत हैं। हम कर्णप्रयाग जाने के लिए नगरासू आए थे, जहां किसी बात पर मतभेद हो गया और हमने मोर्चा लगा लिया। अब हम नीचे आ गए हैं और अपने घर जा रहे हैं।”

कब्जे या हिंसा की बातें पूरी तरह असत्य

सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने अपील की है कि नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे में किसी प्रकार के अवैध कब्जे, हिंसा या बड़े पैमाने पर बंधक बनाए जाने की खबरें पूरी तरह अपुष्ट और असत्य हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

इन पर लगेगा NSA

चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के बीच आए इस संवेदनशील मामले पर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। गृह सचिव शैलेश बगोली ने आधिकारिक बयान जारी कर चेतावनी दी है कि इस व्यक्तिगत और भावनात्मक विवाद को सांप्रदायिक रंग देकर देवभूमि का माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (रांसुका/NSA) की जाएगी।

  • Status Report तलब: सरकार ने एडीजी लॉ एंड ऑर्डर से पूरे प्रकरण की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मामले की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी आईजी गढ़वाल को सौंपी गई है।

  • 24 घंटे काम करेगी हेल्प-डेस्क: श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए वर्तमान में संचालित ‘चारधाम सेल’ को अब हेमकुंड साहिब यात्रा से भी जोड़ दिया गया है। यह व्यवस्था यात्रा अवधि के दौरान चौबीसों घंटे (24×7) कार्य करेगी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति का त्वरित समाधान किया जा सके।

उत्तराखंड: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग महाकुंभ एमडीडीए ने किया आयोजन

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उत्तराखंड योग की छांव में विकास का संकल्प, देहरादून एमडीडीए सिटी फॉरेस्ट पार्क बना स्वास्थ्य और प्रकृति का महाकुंभ

मुख्य सचिव संग हजारों लोगों ने किया योग, प्रकृति की गोद से गूंजा स्वास्थ्य का संदेश

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देहरादून 21 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को वैश्विक पहचान दिलाने व जन-जन तक पहुंचाने के अभियान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्तराखंड को योग, वेलनेस एवं प्राकृतिक चिकित्सा की राजधानी बनाने के प्रयासों के बीच अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून का सिटी फॉरेस्ट पार्क स्वास्थ्य, आध्यात्म और प्रकृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण {एमडीडीए} द्वारा सिटी फॉरेस्ट पार्क में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने शिरकत की। इस दौरान मुख्य सचिव व अन्य प्रशासनिक अधिकारीगण अपर सचिव मुख्यमंत्री एवं एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया, प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रकृति की हरियाली और पहाड़ों की शांत वादियों के बीच एक हजार से अधिक लोगों ने सामूहिक योग कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने योग प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा योग जागरूकता के लिए उनके योगदान की सराहना की।

सुबह की ताजा हवा, वृक्षों की छांव और पक्षियों की मधुर आवाजों के बीच जब एक साथ हजारों हाथ योग मुद्राओं में उठे तो पूरा सिटी फॉरेस्ट पार्क मानो योगमय हो गया। योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की क्रियाओं का अभ्यास किया। कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

इस वर्ष योग दिवस का आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसे प्रकृति संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक जागरूकता से भी जोड़ा गया। एमडीडीए द्वारा विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क में आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का भी मार्ग है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को योग के वैज्ञानिक लाभों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित योग तनाव को कम करने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और विभिन्न जीवनशैली जनित बीमारियों से बचाव में प्रभावी भूमिका निभाता है। बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी ने यह भी दर्शाया कि योग अब केवल पारंपरिक अभ्यास नहीं बल्कि आधुनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि योग भारत की सनातन संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जिसने पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली और आज विश्व के करोड़ों लोग इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव और व्यस्त जीवनशैली के बीच योग मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र को स्वस्थ बनाने का अभियान है।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से योग, तप और आध्यात्मिक साधना की भूमि रहा है। यहां का प्राकृतिक वातावरण और सांस्कृतिक विरासत लोगों को संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

बनबसा में मुख्यमंत्री धामी ने किया सामूहिक योगाभ्यास, योग को जीवनशैली बनाने का किया आह्वान

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पिथौरागढ़ (बनबसा)। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बनबसा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने हजारों योग साधकों, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों, छात्र-छात्राओं, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए योग को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन का आधार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ शारदा की पावन भूमि पर क्षेत्रवासियों के साथ योगाभ्यास करना उनके लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले योग प्रशिक्षकों, साधकों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली एक संपूर्ण जीवन पद्धति है। योग व्यक्ति को मानसिक स्थिरता प्रदान करता है और उसे सकारात्मक एवं सफल जीवन की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, अवसाद और अस्वस्थ जीवनशैली से उत्पन्न चुनौतियों के बीच योग एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार के रूप में उभर रहा है। नियमित योग और प्राणायाम से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा मानसिक एकाग्रता मजबूत होती है।

उन्होंने कहा कि योग ने भारतीय संस्कृति के संदेश ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ को वैश्विक पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को विश्वव्यापी मान्यता मिली और आज 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग से जुड़ चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड योग, अध्यात्म और साधना की प्राचीन परंपराओं की भूमि है। राज्य सरकार उत्तराखंड को योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके लिए राज्य में देश की पहली योग नीति लागू की गई है, जिसके तहत योग एवं ध्यान केंद्रों की स्थापना के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी तथा योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा प्रदेश में पांच नए योग हब विकसित किए जा रहे हैं और सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में योग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि बनबसा में राज्य स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य शारदा नदी तट पर योग एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 3300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही शारदा कॉरिडोर परियोजना के तहत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट सहित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। प्रथम चरण में 179 करोड़ रुपये की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास कार्य शुरू किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखने और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की अपील की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी उत्तराखंड को योग का वैश्विक केंद्र बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एकेश्वर बीडीसी बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर भड़के कवींद्र इष्टवाल, जनप्रतिनिधियों ने भी जताई नाराजगी

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एकेश्वर। विकासखंड मुख्यालय एकेश्वर में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के अलावा कोई भी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और बैठक की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए।

बैठक में जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र इष्टवाल ने क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सड़क, पेयजल और विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि यदि बैठकों में समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे तो ऐसे आयोजनों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

कवींद्र इष्टवाल ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से सड़क और पानी की गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन इनके समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिला स्तर के अधिकारी बैठक में भाग ही नहीं लेते तो जनता की समस्याओं का निराकरण कैसे संभव होगा।

बैठक के दौरान एक अन्य मुद्दे पर भी विवाद खड़ा हो गया। इष्टवाल ने आरोप लगाया कि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) की ओर से उन्हें यह कहा गया कि जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि को बैठक में शामिल होने का अधिकार नहीं है। इस पर उन्होंने कड़ा विरोध जताया। मामले में सीडीओ ने स्पष्ट किया कि जिला पंचायत सदस्य का अधिकृत प्रतिनिधि बैठक में शामिल हो सकता है और बीडीओ की ओर से दी गई जानकारी गलत थी।

इस पर इष्टवाल ने सीडीओ से मांग की कि संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है और प्रशासनिक अधिकारियों को नियमों की सही जानकारी होनी चाहिए।

बैठक में मौजूद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रतिनिधि को भी इष्टवाल ने आड़े हाथों लिया और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं में कथित खामियों को उजागर करते हुए कहा कि कई गांवों में आज भी लोगों को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

जनसमस्याओं के समाधान में प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाते हुए कवींद्र इष्टवाल ने बैठक के दौरान जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर के अधिकारी पहले से ही क्षेत्र की समस्याओं से अवगत हैं, लेकिन बड़ी और जटिल समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर ही संभव है। ऐसे में जिला स्तरीय अधिकारियों की अनुपस्थिति जनप्रतिनिधियों और आम जनता के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायत बैठकों का उद्देश्य विकास कार्यों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना होता है। यदि जिम्मेदार अधिकारी इन बैठकों को गंभीरता से नहीं लेंगे तो इनका उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इष्टवाल ने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में सभी संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी बीडीसी बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

बैठक के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने भी अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि विकास योजनाओं की समीक्षा और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी आवश्यक है।

NEET UG Re-Exam: नागपुर के छात्र के एडमिट कार्ड में अबू धाबी का परीक्षा केंद्र, NTA ने मानी तकनीकी गलती

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नई दिल्ली। देशभर में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET UG री-एग्जाम से पहले एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के नागपुर निवासी एक छात्र के एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र भारत के बजाय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी में दर्शाया गया, जिससे छात्र और उसके परिवार की चिंता बढ़ गई।

जानकारी के अनुसार, नागपुर के छात्र अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब ने NEET UG परीक्षा के लिए भारत में ही परीक्षा केंद्र का चयन किया था। हालांकि, जब उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसमें परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी स्थित एक केंद्र का नाम दर्ज था।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि छात्र के पास पासपोर्ट तक नहीं है। ऐसे में विदेश जाकर परीक्षा देना उसके लिए संभव नहीं है। एडमिट कार्ड में हुई इस त्रुटि के बाद परिवार ने तुरंत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से संपर्क किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NTA ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इसे तकनीकी खामी का परिणाम बताया है। एजेंसी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए छात्र और उसके परिवार को आश्वस्त किया है कि जल्द ही संशोधित एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा।

परिवार का कहना है कि उन्हें NTA की ओर से ई-मेल प्राप्त हुआ है, जिसमें बताया गया है कि एडमिट कार्ड में हुई गलती को ठीक कर दिया जाएगा और छात्र को सही परीक्षा केंद्र के साथ नया एडमिट कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा।

NEET UG री-एग्जाम से ठीक पहले सामने आए इस मामले ने परीक्षा व्यवस्था और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि NTA ने भरोसा दिलाया है कि छात्र को परीक्षा में शामिल होने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने से किया इनकार, युवक ने झोंका फायर, तमंचे के साथ गिरफ्तार

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सितारगंज। शक्तिफार्म क्षेत्र की एक महिला पर कथित रूप से जबरन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का दबाव बनाने, धमकाने और विरोध करने पर फायरिंग करने के मामले में पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त 315 बोर का तमंचा और एक खोखा कारतूस भी बरामद किया है।

पुलिस के अनुसार शांति विहार, सिंह कॉलोनी, रुद्रपुर निवासी अजय रस्तोगी को शक्तिफार्म स्थित सुखी नदी पुल के पास से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की गई और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी महिला पर उसके साथ रहने का दबाव बना रहा था। महिला द्वारा स्पष्ट रूप से इनकार किए जाने के बाद वह उससे रंजिश रखने लगा और लगातार जान से मारने की धमकियां देने लगा।

पुलिस के मुताबिक, 12 जून को पीड़िता अपनी मां माया मंडल के साथ बाजार से घर लौट रही थी। इसी दौरान आरोपी बाइक से वहां पहुंचा और दोनों को रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि उसने गाली-गलौज शुरू कर दी और विरोध करने पर तमंचे से फायर झोंक दिया।

बताया गया कि गोली महिला के सीने को छूते हुए निकल गई, जिससे वह गंभीर हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर दबिश दी। लगातार तलाश के बाद पुलिस टीम ने उसे शक्तिफार्म के सुखी नदी पुल के निकट से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया कि आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 315 बोर का तमंचा और एक खोखा कारतूस बरामद किया गया है। मामले में आगे की जांच और विधिक कार्रवाई जारी है। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक सुंदरम शर्मा, उपनिरीक्षक जगदीश चंद्र तिवारी, हरीश चंद्र, प्रेम कनवाल और भूपाल सिंह शामिल रहे।

उत्तराखंड : बदहाली में दम तोड़ रहा नैनीताल का ऐतिहासिक रैमजे अस्पताल, सांसद ने खोली पोल

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नैनीताल। कभी पूरे कुमाऊं मंडल ही नहीं बल्कि देशभर के मरीजों के लिए भरोसे का केंद्र रहा नैनीताल का ऐतिहासिक रैमजे (जीबी पंत) अस्पताल आज बदहाली और उपेक्षा की मार झेल रहा है। 27 एकड़ में फैला यह विशाल अस्पताल परिसर अब लगभग वीरान हो चुका है। अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और कार्यालयों में ताले लटके हैं, बिस्तर सड़ चुके हैं और भवन के दरवाजे-खिड़कियां तथा लकड़ी का फर्श जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं।

शुक्रवार को क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अस्पताल की स्थिति देखकर वह भी हैरान रह गए। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में कोई चिकित्सक या कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। बाद में पहुंची एक नर्स ने बताया कि अस्पताल में न तो नियमित इलाज की व्यवस्था है और न ही मरीजों के लिए कोई विशेष सुविधा। वर्तमान में अस्पताल का उपयोग कभी-कभार फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किया जाता है।

अस्पताल में डॉक्टर नहीं, स्टाफ भी नदारद

जानकारी के अनुसार अस्पताल में स्टाफ के नाम पर केवल पांच नर्सिंग कर्मी, दो फार्मासिस्ट और एक चिकित्सक तैनात हैं। हालांकि तैनात एकमात्र चिकित्सक भी पीजी डिग्री प्राप्त करने के लिए लंबी छुट्टी पर हैं। ऐसे में अस्पताल पूरी तरह स्वास्थ्य सेवाओं से खाली पड़ा हुआ है।

ajjay bhatt ramjey hospital

अस्पताल की स्थिति इतनी खराब है कि वार्डों में पड़े पुराने बिस्तर सड़ चुके हैं। भवन के कई हिस्सों में जर्जरता साफ दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अस्पताल के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह नष्ट हो सकती है।

स्वास्थ्य मंत्री से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

अस्पताल की बदहाली देखकर सांसद अजय भट्ट ने मौके से ही स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से फोन पर बातचीत की। उन्होंने अस्पताल के पुनरुद्धार और स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए तत्काल एक समिति गठित करने का अनुरोध किया। साथ ही स्वास्थ्य महानिदेशक को अस्पताल के पुनर्विकास संबंधी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश देने की बात कही। सांसद ने कहा कि अस्पताल के जीर्णोद्धार और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए केंद्र सरकार से भी सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

133 साल पुराना गौरवशाली इतिहास

ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1893 में स्थापित रैमजे अस्पताल, जिसे बाद में जीबी पंत अस्पताल के नाम से जाना गया, कभी उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में शुमार था। सीमित संसाधनों के दौर में भी यहां अनुभवी चिकित्सक और प्रसिद्ध सर्जन सेवाएं देते थे। कुमाऊं और गढ़वाल के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते थे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला यह अस्पताल समय के साथ सरकारी उपेक्षा, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार हो गया। आज यह कभी की गौरवशाली स्वास्थ्य व्यवस्था की याद भर बनकर रह गया है।

हंस फाउंडेशन के सहयोग से चल रही डायलिसिस सेवा

अस्पताल की वीरानी के बीच एक राहत की बात यह है कि यहां एक कमरे में डायलिसिस सेवा संचालित हो रही है। इस सेवा के लिए उपकरण, चिकित्सक और अन्य व्यवस्थाएं हंस फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराई गई हैं। वर्तमान में अस्पताल परिसर में यही एक सक्रिय स्वास्थ्य सुविधा है।

सुधार के प्रस्ताव अब भी लंबित

अस्पताल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के पुनरोद्धार के लिए समय-समय पर कई प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हो सका है।

एसीएमओ जीएस धर्मसक्तु ने बताया कि अस्पताल में तैनात एकमात्र चिकित्सक उच्च शिक्षा के लिए अवकाश पर हैं। अस्पताल के सुधार और पुनर्जीवन के लिए कई प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, लेकिन वे अभी तक लंबित हैं।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि सांसद के निरीक्षण के बाद अस्पताल की दशा सुधारने और यहां स्वास्थ्य सेवाओं को पुनः बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में बड़ा एक्शन, 10 लोगों पर अभियोग दर्ज करने की मंजूरी

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस जांच में भूमि क्रय-विक्रय प्रक्रिया में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ अभियोग दर्ज करने की मंजूरी दे दी है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री ने 10 लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने का अनुमोदन किया है। इनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, संपत्ति लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं। इसके अलावा भूमि विक्रेता सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई की है। तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई की संस्तुति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भेजी जा रही है। इसके अतिरिक्त तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल कराई गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भ्रष्टाचार और जनधन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दोहराया कि पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।