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नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन जारी, कई इलाकों में झड़पें, 300 से ज्यादा गिरफ्तार

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नोएडा: वेतन वृद्धि की मांग को लेकर Noida में श्रमिकों का प्रदर्शन मंगलवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इसके बावजूद कई जगहों पर छिटपुट हिंसक घटनाएं सामने आई हैं।

सेक्टर 121 और फेज-2 में हिंसा

जानकारी के अनुसार, सेक्टर 121 में प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए इलाके में धरपकड़ अभियान शुरू कर दिया। गलियों में उतरकर उपद्रवियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।वहीं, Noida Phase 2 में भी प्रदर्शनकारियों ने दोबारा एकत्र होकर पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

गढ़ी चौखंडी में आंसू गैस और हवाई फायरिंग

Garhi Chaukhandi के पास प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हवाई फायरिंग भी की। पुलिस आयुक्त Laxmi Singh ने बताया कि सोमवार की हिंसा के संबंध में सात मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, उकसाने वालों की पहचान कर आगे कार्रवाई की जा रही है।

सेक्टर 74 में कर्मचारियों का विरोध

Sector 74 Noida स्थित केपटाउन सोसायटी के बाहर सुरक्षाकर्मी और सफाईकर्मी भी प्रदर्शन में शामिल हो गए। उन्होंने सड़क जाम करने का प्रयास किया और कहा कि 12 घंटे की नौकरी के बावजूद मिलने वाला वेतन घर चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

औद्योगिक क्षेत्रों में अलर्ट

Sector 63 Noida में एक औद्योगिक इकाई ने कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद दो दिन की छुट्टी का नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, Greater Noida के विभिन्न सेक्टरों में भी पुलिस बल तैनात कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जहां सोमवार को उग्र प्रदर्शन हुआ था।

डीजीपी की शांति बनाए रखने की अपील

उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी Rajeev Krishna ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन श्रमिकों और उद्योग प्रबंधन के साथ बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।

सरकार ने बढ़ाई न्यूनतम मजदूरी

इस बीच, Yogi Adityanath सरकार ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में करीब 21 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है।

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का आज लोकार्पण, कार से एलिवेटेड रोड के सफर पर निकले पीएम मोदी

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सहारनपुर/देहरादून: प्रधानमत्री Narendra Modi आज बहुप्रतीक्षित Dehradun–Delhi Expressway का लोकार्पण करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर सहारनपुर के गणेशपुर में उतर चुका है, जहां से वह कार के जरिए एलिवेटेड रोड के निरीक्षण के लिए रवाना हुए।

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान एलिवेटेड कॉरिडोर के व्यू प्वाइंट का जायजा ले रहे हैं और परियोजना की प्रगति व सुविधाओं की जानकारी ले रहे हैं। यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली—तीनों राज्यों के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है।

इस परियोजना के शुरू होने के बाद देहरादून से दिल्ली के बीच यात्रा समय में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे आवागमन तेज और सुगम होगा। साथ ही, क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

देहरादून में गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी से बड़े खुलासे, ISI मॉड्यूल का हिस्सा होने की आशंका

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देहरादून: झाझरा से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी Vikrant Kashyap के मामले में जांच एजेंसियों को कई चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि वह Inter-Services Intelligence (ISI) से जुड़े एक सुनियोजित मॉड्यूल का हिस्सा था, जो देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था।

अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ तैयार किया गया नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस मॉड्यूल को बेहद रणनीतिक तरीके से तैयार किया गया था। इसमें शामिल हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं, ताकि किसी एक के पकड़े जाने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा न हो सके।
कुछ सदस्यों को भीड़भाड़ और संवेदनशील स्थानों की रेकी का काम सौंपा गया था, जबकि अन्य को ठिकाने, संसाधन और आवाजाही जैसे लॉजिस्टिक सपोर्ट की जिम्मेदारी दी गई थी।

सोलर वाई-फाई कैमरों से निगरानी

सूत्रों के अनुसार, मॉड्यूल के कुछ सदस्य सोलर वाई-फाई कैमरे लगाने का काम कर रहे थे। इन कैमरों के जरिए संवेदनशील स्थानों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी और डेटा को दूर बैठकर एक्सेस किया जा सकता था, जिससे संदेह की संभावना कम हो जाती थी।

कई राज्यों में फैला नेटवर्क

विक्रांत की गिरफ्तारी से पहले ही इस मॉड्यूल से जुड़े करीब 32 संदिग्धों को Uttar Pradesh, Delhi और Rajasthan में गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसियों का मानना है कि यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क

Ajay Singh (एसएसपी, एसटीएफ) ने बताया कि विक्रांत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस नेटवर्क के संपर्क में था। उसके पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, जिससे और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पाकिस्तान और आतंकी संगठनों से कनेक्शन

जांच में यह भी सामने आया है कि विक्रांत कथित तौर पर Al Bark Brigade से जुड़े आतंकी शहजाद भट्टी और ISI हैंडलर्स के संपर्क में था। उस पर देहरादून के संवेदनशील सरकारी संस्थानों और सैन्य ठिकानों की तस्वीरें साझा करने का आरोप है।

हथियार बरामद, हमले की साजिश का शक

एसटीएफ ने विक्रांत के पास से एक पिस्टल, सात कारतूस और स्प्रे-पेंट कैन बरामद की है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वह ग्रेनेड हमलों की योजना बना रहा था। साथ ही उसने कुछ स्थानों पर Tehreek-e-Taliban Hindustan (TTH) से जुड़े नारे भी लिखे थे।

कड़ी सुरक्षा और आगे की जांच

इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है। विक्रांत पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है और केंद्रीय एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि समय रहते इस मॉड्यूल का खुलासा होने से एक बड़े खतरे को टाल दिया गया है। वहीं, विक्रांत से पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और भी अहम खुलासे होने की संभावना है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आंदोलन के बाद मजदूरी बढ़ी, यूपी सरकार का बड़ा फैसला

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लखनऊ: Yogi Adityanath सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में जारी मजदूरों के आंदोलन के बाद न्यूनतम मजदूरी में करीब 21 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने सोमवार देर रात आदेश जारी कर दिया।

मजदूरी में कितना हुआ इजाफा

सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है।
अर्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों की 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये हो गई है।

अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरों को 13,006 रुपये, अर्धकुशल को 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,025 रुपये मिलेंगे। वहीं, अन्य जिलों में भी मजदूरी दरों में संशोधन किया गया है।

आंदोलन के बाद लिया गया फैसला

यह निर्णय हाल ही में Noida और Greater Noida के औद्योगिक क्षेत्रों में हुए मजदूरों के आंदोलन के बाद लिया गया है।

मजदूरों का कहना था कि महंगाई बढ़ने के बावजूद उनकी सैलरी 9,000 से 13,000 रुपये के बीच ही सीमित है। इसके अलावा 12 घंटे काम के बावजूद ओवरटाइम का उचित भुगतान नहीं, साप्ताहिक अवकाश की कमी और बोनस में देरी जैसी समस्याएं भी सामने आईं।

हरियाणा के फैसले से शुरू हुआ विवाद

मजदूरों का आंदोलन Haryana सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी के फैसले के बाद तेज हुआ। Gurugram और मानेसर के मजदूरों को इसका लाभ मिलने के बाद नोएडा के श्रमिकों ने भी समान बढ़ोतरी की मांग उठाई।

प्रदर्शन हुआ हिंसक

शुक्रवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन सोमवार, 13 अप्रैल को हिंसक हो गया। मजदूरों ने सड़कें जाम कर दीं, कई जगहों पर वाहनों में आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। हालात काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कई मजदूरों को हिरासत में लिया गया।

मजदूरों की प्रमुख मांगें

  • न्यूनतम वेतन 18–20 हजार रुपये
  • ओवरटाइम का दोगुना भुगतान
  • साप्ताहिक अवकाश
  • समय पर वेतन और बोनस
  • बेहतर कार्य परिस्थितियां और सुरक्षा

प्रशासन की पहल और सरकार का निर्णय

प्रशासन की ओर से पहले ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक छुट्टी और समय पर वेतन-बोनस देने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद राज्य सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला लिया।

सारा अली खान ने किया पंवाली कांठा ट्रेक, बर्फ के बीच लिया पहाड़ों का आनंद

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टिहरी: बॉलीवुड अभिनेत्री Sara Ali Khan ने उत्तराखंड के टिहरी जनपद स्थित खूबसूरत Panwali Kantha Bugyal का ट्रेक कर एक बार फिर पहाड़ों की अद्भुत सुंदरता को सुर्खियों में ला दिया है। उनकी इस यात्रा से उत्तराखंड के बुग्यालों की ओर पर्यटकों का आकर्षण बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, सारा अली खान Ghuttu क्षेत्र पहुंचीं, जहां से उन्होंने Gwana Village से करीब 18 किलोमीटर लंबे ट्रेक की शुरुआत की। यह ट्रेक घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर रास्तों से होकर गुजरता है, जो ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए बेहद खास माना जाता है।

ट्रेक के दौरान उन्होंने Dophan नामक स्थान पर रात्रि विश्राम किया। खास बात यह रही कि यहां किसी भी प्रकार की होटल या रेस्टोरेंट सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद सारा ने बर्फबारी के बीच टेंट में रुककर असली एडवेंचर का अनुभव लिया।

अगले दिन वह पंवाली कांठा बुग्याल पहुंचीं, जहां इन दिनों ताजा बर्फबारी के चलते पूरा इलाका सफेद चादर से ढका हुआ है। बर्फीले नजारों और हरी-भरी वादियों के बीच उन्होंने काफी समय बिताया और प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर आनंद लिया। देर शाम वह दोफन लौट आईं और अगले दिन घुत्तू के लिए रवाना हो गईं।

इस दौरान सारा अली खान ने सादगी का परिचय देते हुए खुद को एक सामान्य यात्री की तरह प्रस्तुत किया। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों जैसे लाल चावल, मंडवे की रोटी और लेंगड़े की सब्जी का स्वाद भी लिया।

ट्रैकर्स से बातचीत में सारा ने कहा कि यह स्थान बेहद खूबसूरत है और यहां आकर उन्हें काफी सुकून मिला। उन्होंने इसे अपने लिए एक यादगार अनुभव बताया और भविष्य में दोबारा यहां आने की इच्छा भी जताई।

CBSE बोर्ड रिजल्ट 2026: DigiLocker पर ऐसे देखें 10वीं-12वीं के नतीजे, जानिए पूरी प्रक्रिया

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नई दिल्ली: Central Board of Secondary Education के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के नतीजे जल्द जारी होने वाले हैं। इस बार छात्रों के लिए रिजल्ट देखने की प्रक्रिया और भी आसान कर दी गई है। छात्र अपना परिणाम सीधे DigiLocker पर देख सकेंगे।बोर्ड के अनुसार, जिन छात्रों की APAAR ID पहले से सीबीएसई रिकॉर्ड से लिंक है, उन्हें रिजल्ट सीधे DigiLocker के “Issued Documents” सेक्शन में मिल जाएगा। वहीं, जिन छात्रों के पास APAAR ID लिंक नहीं है, उन्हें पहले DigiLocker पर अपना अकाउंट बनाना होगा।

APAAR ID लिंक है तो आसान प्रक्रिया

सीबीएसई ने बताया है कि जिन छात्रों का APAAR ID पहले से जुड़ा हुआ है, वे रिजल्ट जारी होने के बाद अपने आधार नंबर की मदद से DigiLocker में लॉगिन कर सकते हैं। लॉगिन के बाद “Issued Documents” सेक्शन में जाकर वे अपनी डिजिटल मार्कशीट आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे।

CBSE result

APAAR ID नहीं है तो ऐसे बनाएं अकाउंट

जिन छात्रों के पास APAAR ID लिंक नहीं है, उन्हें DigiLocker पर अपना अकाउंट बनाना जरूरी होगा। इसके लिए बोर्ड ने सरल प्रक्रिया बताई है:

  • सबसे पहले स्कूल द्वारा दिया गया 6 अंकों का एक्सेस कोड दर्ज करें।
  • यदि कोड 5 अंकों का है, तो उसके आगे ‘0’ जोड़ें।
  • अपनी जानकारी वेरिफाई करें और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  • OTP के जरिए वेरिफिकेशन पूरा करें।
  • इसके बाद आपका DigiLocker अकाउंट तैयार हो जाएगा।

अन्य प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध होगा रिजल्ट

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र UMANG App के अलावा cbse.gov.in और results.cbse.nic.in वेबसाइट पर भी अपना परिणाम देख सकेंगे।

पहले से तैयारी क्यों जरूरी

रिजल्ट के दिन भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट धीमी या बंद हो सकती हैं। ऐसे में अगर छात्र पहले से DigiLocker पर अकाउंट बना लेते हैं, तो वे बिना किसी परेशानी के सीधे लॉगिन कर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।

डिजिटल मार्कशीट पूरी तरह मान्य

DigiLocker पर जारी की गई मार्कशीट पूरी तरह वैध होती है और इसका उपयोग एडमिशन या अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया जा सकता है। साथ ही, यह दस्तावेज ऑनलाइन सुरक्षित रहता है और खोने का कोई खतरा नहीं होता।

क्या है DigiLocker और APAAR ID

DigiLocker भारत सरकार की डिजिटल सेवा है, जहां छात्र अपने जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं। वहीं APAAR ID एक 12 अंकों की यूनिक पहचान संख्या है, जो छात्र के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक जगह जोड़ती है। यह एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) से जुड़ी होती है और शिक्षा प्रणाली को डिजिटल व पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अभी से अपनी तैयारी पूरी कर लें, ताकि रिजल्ट जारी होने के दिन किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

बिना परमिट पर्यटकों के आदि कैलाश पहुंचने से मचा हड़कंप, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

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पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित Adi Kailash में बिना इनर लाइन परमिट कुछ पर्यटकों के पहुंचने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो 12 अप्रैल का बताया जा रहा है, जिसमें कुछ पर्यटक आदि कैलाश के दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि कुछ टूर ऑपरेटर नियमों की अनदेखी कर पर्यटकों को प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्रों में ले जा रहे हैं।

गौरतलब है कि Om Parvat और आदि कैलाश India-China Border के नजदीक स्थित हैं, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। प्रशासन ने Chhiyalekh को इनर लाइन क्षेत्र घोषित किया हुआ है। इस क्षेत्र से आगे जाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के पास वैध इनर लाइन परमिट होना अनिवार्य है।

छियालेख में Indo-Tibetan Border Police के जवान तैनात रहते हैं, जो आने-जाने वाले सभी लोगों के दस्तावेजों की सख्ती से जांच करते हैं। इसके बावजूद बिना परमिट पर्यटकों के पहुंचने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय टूर ऑपरेटर प्रदीप ह्याकी का कहना है कि भारत-चीन सीमा के निकट स्थित यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। ऐसे में बिना अनुमति लोगों का वहां पहुंचना गंभीर मामला है और इसमें शामिल टूर ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मामले में धारचूला के उपजिलाधिकारी Ashish Joshi ने बताया कि आईटीबीपी को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिन लोगों ने आदि कैलाश की यात्रा की है, उनका पूरा विवरण पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू होने जा रही है, जिसके लिए प्रशासन द्वारा विधिवत इनर लाइन परमिट जारी किए जाएंगे। ऐसे में इस घटना ने यात्रा से पहले सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेसवे: रफ्तार का फायदा या बढ़ता खतरा?

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देहरादून : बहुप्रतीक्षित Dehradun–Delhi Expressway को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। दावा किया जा रहा है कि इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद देहरादून से दिल्ली का सफर महज ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा। जहां यह परियोजना कनेक्टिविटी और विकास के लिहाज से अहम मानी जा रही है, वहीं तेज रफ्तार के कारण बढ़ते सड़क हादसों का खतरा भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

सफर होगा आसान, समय की बचत

इस एक्सप्रेसवे के बनने से उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजधानी के बीच दूरी काफी कम हो जाएगी। इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि व्यापार और आवागमन भी तेज होगा। खासकर Dehradun से Delhi आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। लंबे जाम और खराब सड़कों की समस्या से भी निजात मिलने की उम्मीद है।

हादसों का बढ़ता जोखिम

हालांकि, तेज रफ्तार इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा जोखिम भी बन सकती है। हाल ही में Narendra Modi के प्रस्तावित दौरे से पहले इसी एक्सप्रेसवे पर एक के बाद एक कई गाड़ियां आपस में टकरा गई थीं। यह घटना इस बात का संकेत है कि हाई-स्पीड कॉरिडोर पर जरा सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी है। स्पीड लिमिट, लेन अनुशासन, और ड्राइवर की सतर्कता सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। यदि इनका सही तरीके से पालन नहीं किया गया, तो दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ सकती है।

संतुलन की जरूरत

एक्सप्रेसवे जहां विकास और सुविधा का प्रतीक है, वहीं इसके साथ जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बेहतर होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां सुरक्षा उपायों को और मजबूत करें, साथ ही लोगों में जागरूकता भी बढ़ाई जाए। कुल मिलाकर, देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेसवे यात्रा को तेज और आसान जरूर बनाएगा, लेकिन सुरक्षित ड्राइविंग और सख्त नियमों के बिना यह सुविधा खतरे में भी बदल सकती है।

कमजोर मानसून का अनुमान, फसलों पर पड़ सकता है असर

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नई दिल्ली: इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की संभावना ने चिंता बढ़ा दी है। दो वर्षों तक अच्छी बारिश के बाद इस बार कम वर्षा का अनुमान लगाया गया है, जिसका सीधा असर देश की खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत की करीब आधी कृषि मानसून पर निर्भर है, ऐसे में धान, दालों और तिलहन की बुवाई व उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने पहले आधिकारिक पूर्वानुमान में कहा है कि जून से सितंबर के बीच देश में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रहने की संभावना है। एलपीए (1971–2020) 87 सेंटीमीटर है, और 90 से 95 प्रतिशत के बीच की बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने भी करीब 94 प्रतिशत वर्षा का अनुमान जताया है।

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा के अनुसार, मानसूनी वर्षा में लगभग 5 प्रतिशत तक की कमी या बढ़ोतरी संभव है। हालांकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है, लेकिन बाकी क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका है।

कमजोर मानसून का एक बड़ा कारण जून के आसपास प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का बनना बताया जा रहा है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में वर्षा घटती है और सूखे की स्थिति बन सकती है। हालांकि, हिंद महासागर में सकारात्मक आईओडी (इंडियन ओशन डाइपोल) बनने के संकेत हैं, जो मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है।

भारत के लिए मानसून बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की कुल वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत इसी मौसम में होता है। यह न सिर्फ खेती बल्कि पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए भी जरूरी है। वर्तमान में केवल करीब 55 प्रतिशत खेती योग्य भूमि ही सिंचाई के दायरे में है, जिससे मानसून पर निर्भरता और बढ़ जाती है।

अगर वर्षा कम रहती है, तो फसलों का उत्पादन घट सकता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने का खतरा है। इसके अलावा, ग्रामीण आय में कमी आने से बाजार में मांग घट सकती है, जिसका असर देश की आर्थिक वृद्धि दर पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति पर करीबी नजर रखना जरूरी होगा, ताकि संभावित चुनौतियों से समय रहते निपटा जा सके।

DD न्यूज के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने लाइव शो में राहुल गांधी को बताया सावरकर की जूते की धूल, मचा बवाल

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नई दिल्ली: सरकारी समाचार चैनल दूरदर्शन के एक डिबेट कार्यक्रम में एंकर अशोक श्रीवास्तव द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

क्या है मामला?

डीडी न्यूज के शो ‘टो द पॉइंट/टो टूक’ के दौरान एंकर अशोक श्रीवास्तव ने चर्चा में भाग ले रहे पैनलिस्टों के बीच कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी “विनायक दामोदर सावरकर के जूते की नोंक के बराबर भी नहीं है।”

इसी क्रम में उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी टिप्पणी करते हुए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया।

इस दौरान कार्यक्रम में भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा, राजनीतिक विश्लेषक सैय्यद जव्वाद, युवा चेतना के रोहित सिंह और समाजवादी पार्टी के अशोक यादव शामिल थे। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

कांग्रेस और युवा संगठनों का विरोध

वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और उससे जुड़े संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारतीय युवा कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि करदाताओं के पैसों से चलने वाले सरकारी चैनल पर नेता प्रतिपक्ष के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग अस्वीकार्य है।

युवा कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इस मामले में संबंधित एंकर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने इसे पत्रकारिता की मर्यादा के खिलाफ बताया।

सोशल मीडिया पर भी नाराजगी

इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने बयान की आलोचना करते हुए सार्वजनिक प्रसारक की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बता रहे हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल इस मामले में दूरदर्शन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच इस पर कार्रवाई की मांग लगातार तेज होती जा रही है।