देहरादून की राजनीति में ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सत्ता और टिकट के लालच के साथ भरोसे का ऐसा जाल बुना गया कि एक महिला नेता इसके झांसे में आ गईं। 12 अप्रैल को आए एक फोन कॉल से इस पूरी कहानी की शुरुआत हुई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को राहुल गांधी का निजी सचिव कनिष्क बताया।
उसने कहा कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की एक टीम देहरादून आ रही है, जिसमें करीब 12 विधायक शामिल होंगे और उनके ठहरने के लिए होटल की व्यवस्था करनी होगी, जिसका खर्च करीब 30 लाख रुपये आएगा।
विश्वास कायम करने के लिए ठग ने फोन पर बड़े नेताओं गणेश गोदियाल, हरीश रावत, हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य की कथित आवाजें भी सुनवाईं। इन आवाजों ने भावना पांडे को पूरी तरह भरोसे में ले लिया और उन्हें यकीन हो गया कि वे पार्टी के शीर्ष स्तर से जुड़ी किसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
इसके बाद ठग ने पैसों की व्यवस्था करने को कहा, जिस पर भावना ने 25 लाख रुपये नकद जुटा लिए। कुछ समय बाद “अजय” नाम का एक व्यक्ति, जिसे विधायक का पीए बताया गया, पैसे लेने पहुंचा और भावना ने बिना संदेह किए रकम उसे सौंप दी।
रकम देने के बाद कुछ दिनों तक बातचीत चलती रही, लेकिन फिर अचानक संपर्क टूट गया, जिससे ठगी का अहसास हुआ। जांच में सामने आया कि इसी ठग ने सोनिया आनंद नाम की एक अन्य महिला को भी निशाना बनाया था और उससे भी मोटी रकम मांगने की कोशिश की थी।
ठग ने भ्रम फैलाने के लिए एक कथित स्क्रीनशॉट भी भेजा, जिसमें गणेश गोदियाल के नाम से संदेश दिखाया गया था कि भावना पांडे को पार्टी में न लाया जाए और इसके बदले पांच करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी, हालांकि इस संदेश की पुष्टि नहीं हो सकी।
इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठा कि भावना पांडे का नंबर ठग तक कैसे पहुंचा। इस पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष जसविंदर गोगी का नाम सामने आया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार किया कि उन्होंने भावना का नंबर साझा किया हो। गोगी के मुताबिक उन्हें भी “कनिष्क” बनकर एक कॉल आया था, जिसमें कुछ सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम और नंबर मांगे गए थे, और उन्होंने केवल राजपुर और रायपुर क्षेत्र के दो-तीन लोगों के नंबर दिए थे।
इस तरह यह मामला सिर्फ आर्थिक ठगी का नहीं, बल्कि राजनीतिक पहचान, भरोसे और तकनीकी चालाकी का इस्तेमाल कर रची गई एक सुनियोजित साजिश का प्रतीक बनकर सामने आया है।














