Home Blog Page 5

उत्तराखंड : नीट अभ्यर्थियों को उत्तराखंड रोडवेज बसों में मिलेगी मुफ्त यात्रा सुविधा

0

देहरादून। 21 जून को आयोजित होने जा रही नीट (NEET) पुनर्परीक्षा को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को उत्तराखंड परिवहन निगम की साधारण बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाएगी।

उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी ने बताया कि नीट पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले राज्य के अभ्यर्थी रोडवेज की साधारण बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए अभ्यर्थी का उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। साथ ही यात्रा के दौरान उन्हें अपना वैध प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) बस परिचालक को दिखाना होगा।

उन्होंने बताया कि यह सुविधा परीक्षा से दो दिन पहले 19 जून से शुरू होकर परीक्षा के दो दिन बाद 23 जून तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र तक आने-जाने के लिए निशुल्क यात्रा का लाभ उठा सकेंगे।

गौरतलब है कि पूर्व में परीक्षा में गड़बड़ियों के बाद 21 जून को नीट पुनर्परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों की सुविधा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए यह विशेष व्यवस्था लागू की है।

खुर्पाताल रोड पर टेम्पो ट्रैवलर दुर्घटनाग्रस्त, 21 घायल सुरक्षित निकाले गए, दो महिलाओं की मौत

0

कालाढूंगी। नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र में खुर्पाताल रोड पर बुधवार रात एक टेम्पो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 20 से 25 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में वाहन में सवार कई यात्री घायल हो गए, जबकि दो महिलाओं की मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार 17 जून की रात करीब 8:08 बजे डायल-112 के माध्यम से पुलिस को सूचना मिली कि कालाढूंगी से लगभग चार किलोमीटर ऊपर खुर्पाताल रोड पर टेम्पो ट्रैवलर (संख्या यूपी-15 एफटी-6795) दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीम मौके के लिए रवाना हुई।

डॉ. मंजुनाथ टीसी के निर्देश पर कोतवाली कालाढूंगी पुलिस आपदा प्रबंधन उपकरणों के साथ घटनास्थल पहुंची। स्थानीय लोगों और राहगीरों के सहयोग से पुलिस, एसडीआरएफ तथा फायर सर्विस की टीम ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। रेस्क्यू के दौरान वाहन में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पुलिस के अनुसार वाहन में चालक समेत कुल 29 लोग सवार थे। बचाव दल ने 21 घायलों को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालाढूंगी पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने दो महिलाओं को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य घायलों का उपचार जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक नगर हल्द्वानी मनोज कत्याल, क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी अमित कुमार सैनी, प्रभारी निरीक्षक कालाढूंगी अरुण कुमार सैनी सहित पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।

उत्तराखंड : सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी गतिविधियों में संलिप्त युवक गिरफ्तार, पाकिस्तान-मलेशिया कनेक्शन की जांच में जुटी STF

0

देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोशल मीडिया के माध्यम से कथित रूप से कट्टरपंथी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद सलाउद्दीन निवासी गदरपुर, जनपद ऊधमसिंहनगर के रूप में हुई है। एसटीएफ ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एसटीएफ को प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया गतिविधियों की पड़ताल में इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म पर कट्टरपंथी एवं जिहादी विचारधारा से जुड़े समूहों, चैट और सामग्री मिलने का दावा किया गया है।

प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को प्रभावित कर उन्हें उग्र विचारधारा की ओर प्रेरित करने का प्रयास कर रहा था। एसटीएफ के अनुसार उसके ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय कट्टरपंथी तत्वों से संभावित संपर्कों के संकेत भी मिले हैं।

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी के मोबाइल से हथियारों, विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित भंडारण और उनकी आवाजाही से संबंधित संदिग्ध बातचीत भी सामने आई है। इन चैट और डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी तथा फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कुछ चैट और संपर्कों को हटाने की बात भी स्वीकार की है।

उत्तर प्रदेश तक फैली जांच

एसटीएफ को जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी एक व्यक्ति से आरोपी के संपर्कों की जानकारी भी मिली है। संबंधित व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है। संभावित नेटवर्क का पता लगाने के लिए एसटीएफ की विशेष टीमें उत्तर प्रदेश में भी दबिश दे रही हैं और अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं।

पाकिस्तान और मलेशिया कनेक्शन की आशंका

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ और गोपनीय स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि आरोपी को पाकिस्तान से जुड़े एक हैंडलर के माध्यम से मलेशिया से संचालित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि किसी संभावित घटना को अंजाम देने की तैयारी संबंधी सूचनाओं की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।

एसएसपी ने बताया कि मामले की जानकारी खुफिया एजेंसियों को भी दे दी गई है। एसटीएफ, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य सुरक्षा इकाइयों के साथ समन्वय कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

डिजिटल नेटवर्क की गहन पड़ताल

जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट हिस्ट्री और संपर्कों का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित उद्देश्यों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

रेत खनन विवाद में खूनी संघर्ष: भाजपा नेता समेत तीन लोगों की जिंदा जलाया, चार आरोपी गिरफ्तार

0

कोरिया/सोनहत। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में रेत उत्खनन को लेकर चल रहे विवाद ने मंगलवार रात भयावह रूप ले लिया। दो पक्षों के बीच हुए हिंसक संघर्ष और आगजनी की घटना में भाजपा नेता एवं पूर्व जनपद पंचायत उपाध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है, जिसे देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

पुलिस के अनुसार नौगई गांव में त्रिपाठी और ठाकुर गुट के बीच लंबे समय से रेत उत्खनन को लेकर विवाद चल रहा था। मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद मारपीट और हिंसा में बदल गया। इसी दौरान एक फॉर्च्यूनर वाहन में आग लग गई, जिसमें भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह गंभीर रूप से झुलस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना में वाहन में मौजूद वीरेंद्र प्रताप सिंह और नागेंद्र प्रताप सिंह भी गंभीर रूप से झुलस गए थे। नागेंद्र प्रताप सिंह को बेहतर इलाज के लिए रायपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं वीरेंद्र प्रताप सिंह की अंबिकापुर अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।

रेत कारोबार को लेकर था पुराना विवाद

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच रेत उत्खनन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों गुटों के बीच कहासुनी और मारपीट हुई थी। हालांकि फॉर्च्यूनर वाहन में आग कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है। मामले में हत्या, हत्या के प्रयास और आगजनी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

चार आरोपी गिरफ्तार, छह की तलाश जारी

सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा ने बताया कि सोनहत थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों—अक्षत त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और मन्नू त्रिपाठी—को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं छह अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

आईजी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच पूर्व से भी विवाद की जानकारी मिली है और पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और पुलिस जांच में सहयोग करने की अपील की है।

राजनीतिक दलों ने जताया शोक

घटना की जानकारी मिलते ही बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े और पूर्व कांग्रेस विधायक गुलाब कमरो सहित भाजपा और कांग्रेस के कई नेता नौगई पहुंचे। दोनों नेताओं ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

भैयालाल राजवाड़े ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा

घटना की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से पूरी जानकारी ली। पुलिस ने पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई बनी कारण

पुलिस जांच में यह बात सामने आ रही है कि रेत उत्खनन के वर्चस्व और पुरानी रंजिश को लेकर दोनों गुटों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था। इसी विवाद ने मंगलवार रात हिंसक रूप धारण कर लिया। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जल्द ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है।

सपा में टूट के दावे पर अड़े ओपी राजभर, बोले- बलिया का नेता करेगा बागी सांसदों का नेतृत्व

0

महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर नया मोड़, उद्धव गुट के दो सांसदों ने बगावत से किया इनकार

0

मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच नया मोड़ सामने आया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया है कि पार्टी में टूट की अटकलों के बीच लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए कथित पत्र पर छह में से दो सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे बागी गुट की संख्या को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर और मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय पाटिल ने अलग गुट बनाने संबंधी किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है। दोनों सांसदों का कहना है कि वे उस समय नई दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे, जब इस तरह की गतिविधियों की चर्चा हो रही थी।

हालांकि, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट के छह सांसदों को अपने पक्ष में लाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। सूत्रों के मुताबिक, अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे को छोड़कर अधिकांश सांसद नए गुट का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।

इस बीच संजय पाटिल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह इन अटकलों से परेशान हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें शिंदे गुट की ओर से किसी बैठक या चर्चा के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है और वह किसी बागी समूह का हिस्सा नहीं हैं।

शक्ति परीक्षण की तैयारी में उद्धव गुट

राजनीतिक अनिश्चितता के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई है और अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। पार्टी नेतृत्व इस बैठक के जरिए यह दिखाने की कोशिश करेगा कि कितने सांसद अब भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि तीन से अधिक सांसद बैठक में शामिल होते हैं तो शिंदे गुट के लिए अलग गुट बनाने की संवैधानिक प्रक्रिया जटिल हो सकती है। किसी भी दल में वैध विभाजन और विलय के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक माना जाता है।

संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बनाया जा रहा है। राउत ने कहा कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया गया है, जबकि 15 करोड़ रुपये अग्रिम राशि के तौर पर दिए जाने की बात सामने आई है। राउत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को टैग करते हुए इस मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया।

निंबालकर मामले को लेकर भी उठे सवाल

राउत ने दावा किया कि सांसद ओमराजे निंबालकर पर उनके परिवार से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में अदालत का फैसला 20 जून को आने वाला है और इसी संदर्भ में राजनीतिक दबाव की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों ने भी इन दावों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा

इस पूरे विवाद में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की टिप्पणी ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कथित धनराशि के दावों पर सवाल उठाए। इसके जवाब में संजय राउत ने फिर दावा किया कि सांसदों के लिए न्यूनतम “राजनीतिक मूल्य” 50 करोड़ रुपये तक तय किया गया है।

संसदीय दल की बैठक

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दिल्ली में होने वाली शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक से यह साफ हो सकता है कि पार्टी के कितने सांसद अब भी उद्धव ठाकरे के साथ हैं और क्या वास्तव में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत किसी बड़े राजनीतिक विभाजन की जमीन तैयार हो चुकी है।

चंबा में दर्दनाक सड़क हादसा: खाई में गिरी बोलेरो, सात लोगों की मौत

0

चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बुधवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। हादसा पुखरी क्षेत्र के चंबा-मसरूंड मार्ग पर छतरूंड के पास हुआ, जहां एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कुठेड़ के महल गांव के निवासी काकड़ोथा गांव में आयोजित एक मुंडन संस्कार कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। देर रात घर लौटते समय छतरूंड के समीप वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा, जिसके बाद बोलेरो सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी।

हादसा इतना भीषण था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। दुर्घटना में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। मृतकों में महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने खाई में उतरकर शवों को बाहर निकाला। बाद में पुलिस, प्रशासन और राहत दल भी घटनास्थल पर पहुंच गए।

स्थानीय लोगों ने दुर्घटना स्थल पर सड़क सुरक्षा इंतजामों की कमी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सड़क किनारे क्रैश बैरियर लगाए गए होते तो हादसे की गंभीरता कम हो सकती थी।

पुलिस अधीक्षक चंबा विजय कुमार सकलानी ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेज दिया गया था। पुलिस और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटे रहे। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

हादसे के बाद पूरे महल गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। प्रशासन मृतकों की पहचान और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा हुआ है।

उत्तराखंड : SIR अभियान ने पकड़ी रफ्तार, 97 फीसदी मतदाताओं तक पहुंचे गणना प्रपत्र

0

देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 अभियान के तहत मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्वाचन विभाग के अनुसार 17 जून तक प्रदेश के करीब 97 प्रतिशत मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं। अब निर्वाचन आयोग का फोकस प्राप्त प्रपत्रों के सत्यापन, डिजिटाइजेशन और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोडिंग की प्रक्रिया को गति देने पर है।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 8 जून से 7 जुलाई तक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। इसके लिए प्रदेशभर में बूथ स्तर पर मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं।

पर्वतीय जिलों में शानदार प्रदर्शन

निर्वाचन विभाग के अनुसार रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पौड़ी, पिथौरागढ़, चमोली और चंपावत जिलों में 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं। विभाग का कहना है कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में अभियान की सफलता उल्लेखनीय रही है।

वहीं, देहरादून, नैनीताल समेत अन्य जिलों में भी अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभाग को उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में प्रपत्र वितरण का कार्य पूरी तरह पूरा कर लिया जाएगा।

डिजिटाइजेशन और ऑनलाइन अपलोडिंग पर जोर

इस बार निर्वाचन आयोग पूरी प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। मतदाताओं से प्राप्त गणना प्रपत्रों का सत्यापन कर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकेगी।

निर्वाचन विभाग के अनुसार अधिकांश जिलों में प्राप्त प्रपत्रों के सत्यापन और डिजिटाइजेशन का कार्य भी शुरू हो चुका है। कई जिलों में 10 प्रतिशत से अधिक प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। बूथ स्तर के अधिकारी और निर्वाचन कर्मी प्राप्त प्रपत्रों को तत्काल डिजिटल रिकॉर्ड में परिवर्तित कर रहे हैं, ताकि अंतिम समय में कार्यभार न बढ़े।

नैनीताल डिजिटाइजेशन में पीछे

हालांकि, डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में सभी जिलों की प्रगति समान नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नैनीताल जिला अन्य जिलों की तुलना में कुछ पीछे चल रहा है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे किए जा सकें।

राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी

एसआईआर अभियान में राजनीतिक दलों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का आग्रह किया था, जिससे मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सके।

प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने 11 हजार से अधिक बीएलए तैनात किए हैं, जो सभी दलों में सबसे अधिक हैं। वहीं कांग्रेस ने 10 हजार से ज्यादा बीएलए नियुक्त कर दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई है। अन्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर बीएलए तैनात किए हैं।

क्या है एसआईआर अभियान का उद्देश्य?

निर्वाचन आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। इसके तहत मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों की पहचान की जा सके। साथ ही नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जा रही है।

निर्वाचन विभाग का मानना है कि इस अभियान के पूरा होने के बाद प्रदेश को अधिक स्वच्छ, सटीक और विश्वसनीय मतदाता सूची प्राप्त होगी, जो आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित होगी। अधिकारियों के अनुसार प्रपत्र वितरण, सत्यापन, डिजिटाइजेशन और पोर्टल अपलोडिंग की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने के लिए सभी जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि 7 जुलाई तक अभियान के सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए जाएंगे।

चुनावी हुंकार: उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा का दो दिवसीय दौरा शुरू, बीजापुर गेस्ट हाउस में बैठकों का दौर

0

देहरादून : आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तराखंड कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा आज अपने दो दिवसीय दौरे पर प्रादेशिक राजधानी देहरादून पहुंचीं। दौरे के पहले ही दिन कुमारी शैलजा ने बीजापुर गेस्ट हाउस में जिला, महानगर अध्यक्षों सहित पार्टी के सभी प्रकोष्ठों और विभागों के साथ मैराथन बैठकें कीं। इस दौरान बीजापुर गेस्ट हाउस में पार्टी के तमाम सीनियर लीडर मौजूद रहे, जहां संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति को लेकर गंभीर मंथन हुआ।

संगठन सृजन और ब्लॉक इकाइयों की हुई समीक्षा

बैठक के पहले सत्र के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि ‘संगठन सृजन’ अभियान के तहत प्रदेश में जिला इकाइयों और ब्लॉक अध्यक्षों का गठन किया गया था। आज की बैठक में संगठन के हिसाब से सभी जिलों की अब तक की प्रगति और हाल ही में आयोजित हुए पार्टी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई है।

गोदियाल ने कहा कि “प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा आज ही पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग से मुलाकात करेंगी, जिसमें संगठनात्मक ढांचे को धार देने के साथ-साथ आगामी चुनावी रणनीति पर गहन चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, आने वाले समय में जनता के बीच ले जाने वाले पार्टी के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की जा रही है।”

एकजुटता और चुनावी रोडमैप पर रहेगा फोकस

राजनीतिक गलियारों में कुमारी शैलजा के इस दो दिवसीय दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। गुटबाजी को दरकिनार कर पूरी एकजुटता के साथ चुनावी मैदान में उतरने के लिए आलाकमान ने कमर कस ली है।

  • आज का एजेंडा: जिला व महानगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों, विभिन्न प्रकोष्ठों, विभागों और सेलों (Cells) के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर जमीनी फीडबैक लेना।

  • बुधवार (कल) का कार्यक्रम: दौरे के दूसरे दिन भी प्रदेश प्रभारी उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगी। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनावों को पूरी मजबूती से लड़ने के लिए एक ‘अभेद्य’ चुनावी रोडमैप तैयार किया जाएगा।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के बाद संगठन में निष्क्रिय चल रहे पदाधिकारियों की जगह नए और ऊर्जावान चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि चुनाव से ठीक पहले बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका जा सके।

बड़ा हादसा टला: झील में गिरी पर्यटकों की अनियंत्रित कार, स्थानीय लोगों ने बचाई चार जानें

0

नैनीताल : जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर कालाढूंगी रोड पर स्थित सरिताताल क्षेत्र में सोमवार देर शाम एक बड़ा सड़क हादसा होने से टल गया। नैनीताल से घूमकर वापस लौट रहे मुरादाबाद के पर्यटकों की एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगी रेलिंग को तोड़ते हुए सीधे सरिताताल झील में समा गई। गनीमत यह रही कि उस स्थान पर झील अधिक गहरी नहीं थी और स्थानीय लोगों ने गजब की तत्परता दिखाते हुए समय रहते कार सवार दो युवकों और दो युवतियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

मोड़ पर खोया नियंत्रण, रेलिंग तोड़कर डूबी कार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी आलम अली अपने बुलंदशहर निवासी दोस्त उमेश और दो महिला मित्रों के साथ नैनीताल घूमने आए हुए थे। सोमवार देर शाम चारों अपनी कार (संख्या: UP 21 CC 5213) से वापस घर की ओर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी कार कालाढूंगी मार्ग पर सरिताताल के पास पहुंची, तभी एक तीखे मोड़ पर चालक कार से नियंत्रण खो बैठा। रफ्तार तेज होने के कारण कार सड़क किनारे लगी सुरक्षा रेलिंग को तोड़ते हुए सीधे झील में जा गिरी।

स्थानीय लोगों की सूझबूझ से बची जान

कार को झील में गिरता देख आसपास के स्थानीय दुकानदार और राहगीर तुरंत मौके पर दौड़े। बिना वक्त गंवाए लोगों ने झील में उतरकर कार के भीतर फंसे चारों पर्यटकों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। हादसे की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दी गई।

मल्लीताल कोतवाल राजेंद्र सिंह रावत ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि “हादसे में चारों पर्यटक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्हें प्राथमिक उपचार और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रात में ही उनके घर के लिए रवाना कर दिया गया था। चूंकि सोमवार रात अंधेरा काफी था, इसलिए मंगलवार सुबह पुलिस टीम ने क्रेन की मदद से सरिताताल झील में डूबी कार को बाहर निकलवाया। पहाड़ी मार्गों पर लगातार हो रहे इन हादसों को देखते हुए पुलिस ने एक बार फिर बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि वे पर्वतीय मोड़ों पर गति सीमा का विशेष ध्यान रखें और सतर्कतापूर्वक वाहन चलाएं।