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अलग राज्य की मांग करने वाले महाराष्ट्र के महाधिवक्ता ने दिया इस्तीफा

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अलग विदर्भ राज्य की मांग करके चौतरफा फंसे राज्य के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आज सुबह अपना इस्तीफा राज्यपाल के विद्यासागर राव को सौंप दिया। हालांकि अभी उसे स्वीकार किया गया नहीं इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

बता दें कि महाराष्ट्र के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे ने मराठवाड़ा को अलग राज्य बनाने की मांग की थी। जिसके बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल शिवसेना सहित विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी ने अणे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया ‌था। विपक्ष ने अणे के बयान को लेकर सोमवार को विधानसभा और विधान परिषद में कामकाज नहीं होने दिया।

वहीं, शिवसेना भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आ गई और शिवसेना के मंत्रियों ने अणे को पद से हटाए बिना कैबिनेट की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस हंगामे के बाद भाजपा के एक नेता ने बताया था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अणे को अपना पद छोड़ने के लिए कह सकते हैं।
शिवसेना ने श्रीहरि अणे को महाराष्ट्र का ओवैसी बताते हुए कहा है कि जिस तरह से एमआईएम के औवैसी बंधु देश के टुकड़े करने का प्रयास कर रहे हैं, उसी तरह राज्य के महाधिवक्ता महाराष्ट्र के टुकड़े करने की बयानबाजी कर रह रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल एवं एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने अणे को निलंबित किए जाने की मांग की थी।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अणे को पदमुक्त किए जाने तक सदन नहीं चलने देंगे। अणे इससे पहले विदर्भ को अलग राज्य बनाने के लिए जनमत संग्रह कराए जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि उनके उस बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उस समय उनका बचाव करते हुए कहा था कि अलग राज्य के गठन का अधिकार संसद और केंद्र सरकार का है, इसलिए उन्हें त्यागपत्र देने की जरूरत नहीं है।

और बढ़ा मुलायम का सियासी कुनबा, 21वें सदस्य ने दी दस्तक

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देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार का कुनबा और बढ़ गया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को रविवार को लखनऊ कैंट सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया है। अपर्णा के साथ ही मुलायम परिवार के 21वें सदस्य की राजनीति की मुख्यधारा में एंट्री हो गई।

मुलायम सिंह देश के इकलौते ऐसे नेता है जिनका बेटा मुख्यमंत्री हैं और परिवार के छह सदस्य सांसद हैं। मुलायम सिंह खुद तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके हैं।

वह विधानमंडल के दोनों सदनों में नेता विरोधी दल रहे हैं और छठी बार के सांसद हैं। इस समय वह आजमगढ़ से सांसद और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके बड़े बेटे अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

सपा मुखिया के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री और सपा के प्रमुख प्रवक्ता हैं। उनके बेटे आदित्य यादव उर्फ अंकुर पीसीएफ के चेयरमैन हैं।

अंकुर की मां और शिवपाल सिंह यादव की पत्नी सरला यादव जिला सहकारी बैंक इटावा की निदेशक हैं। सपा मुखिया के भतीजे अनुराग यादव समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव हैं।

मुलायम सिंह 2014 में मैनपुरी और आजमगढ़ से सांसद चुने गए थे। उन्होंने मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया था। इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनके पौत्र तेज प्रताप सिंह यादव सांसद चुने गए हैं।

तेज प्रताप की शादी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी राज लक्ष्मी के साथ हुई है। सपा अध्यक्ष की पुत्रवधू और सीएम अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से दूसरी बार सांसद हैं।

सपा मुखिया के बड़े भाई अभयराम के बेटे धर्मेंद्र यादव बदायूं से सांसद हैं। मुलायम के चचेरे भाई रामगोपाल यादव राज्यसभा सदस्य और पार्टी महासचिव हैं। रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव फिरोजाबाद से सांसद हैं।

सीएम अखिलेश यादव विधान परिषद सदस्य हैं। वह कन्नौज और फिरोजाबाद से सांसद रह चुके हैं। मंत्री शिवपाल यादव जसवंत नगर से विधायक हैं। रामगोपाल यादव के भतीजे अरविंद यादव पिछले दिनों स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से एमएमलसी चुने गए हैं।

मुलायम सिंह के छोटे भाई राजपाल सिंह के बेटे अभिषेक यादव उर्फ अंशुल इटावा जिला पंचायत के अध्यक्ष चुने गए हैं। 25 वर्षीय, एमबीए डिग्रीधारी अंशुल कुछ महीने पहले ही राजनीति में सक्रिय हुए हैं।

सपा मुखिया की भतीजी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या मैनपुरी जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। उनकी एक अन्य रिश्तेदार वंदना यादव हमीरपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष चुनी गई हैं।

सांसद तेज प्रताप की मां मृदुला यादव सैफई की ब्लॉक प्रमुख हैं। सपा मुखिया मुलायम सिंह के बहनोई अजंट सिंह यादव भी ब्लॉक प्रमुख चुने गए हैं। मुलायम सिंह के भाई राजपाल यादव की पत्नी प्रेमलता जिला पंचायत सदस्य हैं।

रामगोपाल यादव के भतीजे बिल्लू यादव भी ब्लॉक प्रमुख हैं। रामगोपाल यादव के भतीजे की पत्नी मीनाक्षी यादव मैनपुरी से जिला पंचायत सदस्य हैं।

हरीश रावत ने किया सरकार बनाने का दावा, पहुंचे राजभवन

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प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के चंद घंटों के अंदर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार बनाने का दावा किया है। इस संबंध में रावत ने राज्यपाल को पत्र दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री रावत पांच विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे थे।

राज्यपाल से भेंट न होने के कारण रावत ने राजभवन में विशेष कार्याधिकारी को पत्र दिया। इसमें 28 मार्च को सदन के फ्लोर पर बहुमत साबित करने का दावा किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्यपाल को संबोधित पत्र में कहा है कि ‘आपने मुझे 28 मार्च को विधानसभा सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दिया था।

रावत ने कहा कि उनके पास पूर्ण बहुमत है वह राज्यपाल की आज्ञा के अनुपालन में सोमवार को सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे। इसके लिए उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्हें बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिला और राष्ट्रुपति शासन लागू कर दिया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री रावत के साथ वित्त और संसदीय कार्य मंत्री रहीं इंदिरा हृदयेश, विधायक हेमेश खर्कवाल, गणेश गोदियाल, मनोज तिवारी, अनुसुइया प्रसाद मैखुरी तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय रहे।

अब सत्ता का केंद्र होगा राजभवन, नौकरशाही का अहम रोल

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प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद अब सत्ता का केंद्र राजभवन बन जाएगा। राज्यपाल की रिपोर्ट को आधार बनाकर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर धारा 356 का इस्तेमाल किया है, जिससे प्रदेश की समस्त सरकारी मशीनरी सीधे राजभवन के अधीन आ गई है।

राष्ट्रपति शासन के बाद राज्यपाल के पद में असीमित शक्तियां निहित हैं। नौकरशाही अब सीधे राजभवन को रिपोर्ट करेगी और राज्यपाल की तय गाइडलाइन पर उसे कामकाज करना होगा। इस व्यवस्था के तहत अधिकारियों को कामकाज की अधिक स्वतंत्रता मिलने की उम्मीद रहेगी।

संविधान की धारा 356 में प्रावधान है कि अगर राज्य में निर्वाचित सरकार संवैधानिक प्रावधानों एवं मर्यादाओं के निर्वहन में विफल रहती है तो राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश को आधार बनाकर राज्य सरकार को बर्खास्त, भंग या फिर निलंबित कर सकते हैं। उत्तराखंड में विधानसभा निलंबित कर दी है, जिसके बाद तमाम शक्तियां राज्यपाल को प्राप्त होंगी।

ऐसे में नौकरशाही प्रत्यक्ष रूप से राजभवन के अधीन होने से कामकाज अधिक स्वतंत्र रूप से होने की संभावना रहेगी। सचिवों को अब हर फाइल पर विभागीय मंत्रियों के अनुमोदन से राहत मिलेगी, जिससे नौकरशाही को निर्णय लेने की स्वतंत्रता अधिक मिलेगी।

राष्ट्रपति शासन के दौरान नौकरशाही का सबसे अहम रोल है, जिसमें मुख्य सचिव की भूमिका सबसे अहम होती है। विभागीय फाइलें से मुख्य सचिव के माध्यम से राजभवन जाएंगी। लेकिन प्रमुख सचिव गृह व प्रमुख सचिव कार्मिक का रोल भी अहम होगा। सचिवों की कार्यप्रणाली में राजनीतिक दखल कम होगा। सचिवालय के बाद जिलों की प्रशासनिक इकाइयों के अधिकार भी इस दौरान अधिक हो जाते हैं।

उत्तराखंड में लगाया गया राष्ट्रपति शासन, हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है कांग्रेस

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देहरादून: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। केंद्र सरकार ने बीती रात कैबिनेट की बैठक के बाद राष्ट्रपति से इसके लिए सिफ़ारिश की थी जिसे राष्ट्रपति ने मान लिया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि वह केंद्र के इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।

केंद्र सरकार का कहना है कि उत्तराखंड में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा गई थी और विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त हो रही थी जिसे देखते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला किया गया है।

विधानसभा को भंग नहीं किया गया है बल्कि निलंबित रखा गया है। उधर, कांग्रेस और ख़ासतौर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे संविधान और लोकतंत्र की हत्या बताया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि धारा 356 के प्रयोग का इससे बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता है। पिछले नौ दिन से हर दिन संविधान के प्रावधानों की हत्या हो रही थी।

नौ दिन पहले कांग्रेस के नौ विधायकों की बग़ावत का पटाक्षेप उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के तौर पर हुआ। राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट की सिफ़ारिश राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूर कर ली। ये फ़ैसला उत्तराखंड विधानसभा में बहुमत परीक्षण से ठीक एक दिन पहले हुआ।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा चुकी थी।

जेटली ने कहा कि संविधान में लिखा है कि जब बजट फेल होता है तो इस्तीफ़ा देना होता है। स्वतंत्र भारत में पहला उदाहरण है जब एक एक फेल्ड बिल को बिना वोट लिए पारित होने की घोषणा कर दी गई। 18 तारीख़ के बाद से जो सरकार चली है वो असंवैधानिक है।

उधर, मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे लोकतंत्र और संविधान की हत्या बताते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

रावत ने कहा कि शायद ही ऐसा कोई उदाहरण जिसे बहुमत सिद्ध करने से एक दिन पहले ही बर्ख़ास्त कर दिया जाए। सरकार का बहुमत विधानसभा में तय होना चाहिए था। ऐसी क्या जल्दबाज़ी थी कि सरकार को भंग कर दिया गया।

अरुण जेटली ने ये भी कहा कि विधानसभा स्पीकर ने बीजेपी के एक बाग़ी विधायक के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की जबकि वो कांग्रेस के नौ बाग़ी विधायकों के ख़िलाफ़ मनमाने तरीके से दल बदल कानून का प्रयोग कर रहे थे।

जेटली ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची है जिसका डिसक्रिमिनेटरी तरीके से प्रयोग हुआ। ये पहला उदाहरण है स्वतंत्र उदाहरण में कि एविडेंस आया हो और अपने मुंह से मुख्यमंत्री जी हॉर्स ट्रेडिंग का प्रयास कर रहे हों।

राष्ट्रपति शासन के ऐलान के बावजूद उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर रहे गोविंद सिंह कुंजवाल ने बाग़ी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का ऐलान कर दिया।
उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि हमें राष्ट्रपति शासन की कोई सूचना नहीं मिली है।

साफ़ है कि उत्तराखंड की सियासत को लेकर खींचतान अभी बाक़ी है। विधानसभा को भंग नहीं किया गया है बल्कि निलंबित रखा गया है। ऐसे में राष्ट्रपति शासन के बावजूद किसी नई सरकार के गठन का विकल्प अभी खुला है। देखना है कि इसके लिए बीजेपी अगर पहल करती है तो कब।

उत्तराखंड में वसंत के मौसम में ही सियासी सरगर्मियों ने पारा काफ़ी बढ़ा दिया है। विधायकों की ख़रीदफ़रोख़्त के आरोपों के बीच बीते दो महीने में दूसरी बार किसी राज्य सरकार को बर्ख़ास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा है। हालांकि अरुणाचल में इसके बाद बीजेपी ने सरकार बना ली, लेकिन क्या उत्तराखंड में भी बाग़ियों के सहारे ऐसा करने की कोशिश होगी। ये एक बड़ा सवाल है।

मस्जिद से अजान के दौरान पीएम मोदी ने चुनावी भाषण से लिया कुछ विराम

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खड़गपुर (पश्चिम बंगाल): चुनावी जनसभा में तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चा की नीतियों पर बरसने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना भाषण उस समय रोक दिया, जब पास की मस्जिद से अजान की आवाज आने लगी। पश्चिम मिदनापुर जिले में यहां के बीएनआर मैदान पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए प्रचार के दौरान पीएम मोदी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही अजान शुरू हुई, उन्होंने अपना भाषण रोक दिया और अजान खत्म होने की प्रतीक्षा की।

मैदान पर मौजूद हजारों लोगों ने उनसे बोलने का आग्रह किया, लेकिन पीएम मोदी ने हाथ के इशारे से उनसे शांत रहने को कहा।
भाषण शुरू करने पर उन्होंने कहा, “क्षमा करें, अजान हो रही थी। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से किसी की इबादत में खलल पड़े। इसलिए मैं कुछ मिनट के लिए रुक गया।”

इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चा पर बंगाल को तबाह करने का आरोप लगाया।
नवंबर 2014 में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता में भाषण के दौरान अजान शुरू होने पर इसी तरह भाषण रोक दिया था।

कोयला घोटाले में बड़ा फैसला; झारखंड इस्पात के दो निदेशक दोषी करार, 31 मार्च को सजा का ऐलान

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नई दिल्ली: सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के एक मामले में झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के दो निदेशकों आर एस रूंग्टा और आर सी रूंग्टा को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आर एस रूंग्टा और आर सी रूंग्टा को भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए उन्हें हिरासत में लेने के आदेश दिए। अदालत ने इस मामले में सजा की मात्रा पर दलीलों की सुनवाई के लिए 31 मार्च का दिन तय किया है। यानी दोषियों को सजा 31 मार्च को सुनाई जाएगी।

गौर हो कि सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने पिछली 21 मार्च को मामले में फैसला सुनाने के लिये 28 मार्च की तारीख तय की थी। कोयला ब्लाक आवंटन घोटाला मामले में यह पहला प्रकरण है जिसमें विशेष अदालत अपना फैसला सुनाया है। विशेष अदालत कोयला घोटाला मामले से जुड़े सभी पहलुओं को देख रही है।

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि कि जेआईपीएल और तीन अन्य कंपनियों- मेसर्स इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग लि., मेसर्स आधुनिक एलॉयज एंड पावर लि. तथा मेसर्स पवनजय स्टील तथा पावर लि. को संयुक्त रूप से धादू कोयला ब्लाक आबंटित किये गये। लेकिन न तो जांच समिति ने आवेदनकर्ता कंपनी के दावे का सत्यापन किया और न ही राज्यमंत्री (एमओएस) ने आवेदनकर्ता कंपनियों के आकलन के लिये कोई तौर-तरीके अपनायें। अदालत ने इन पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा चलाया है।

लाहौर में बच्चों के पार्क के बाहर आत्मघाती हमला, 69 मरे

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पाकिस्तान के लाहौर में रविवार शाम एक चिल्ड्रनपार्क के बाहर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 69 लोगों की मौत हो गई है। डॉन न्यूज ने पुलिस के हवाले से बताया है कि शहर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क के बाहर हुए इस जबरदस्त विस्फोट में 300 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के एक धड़े जमातुल अहरार ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। लाहौर के डीआईजी हैदर अशरफ ने कहा, ‘यह शक्तिशाली धमाका था। यह आशंका है कि आत्मघाती हमलावर ने पार्क के मेन गेट पर खुद को उड़ा लिया।’ हमलावर 20 साल का एक युवक बताया जा रहा है।
ईस्टर की छुट्टी के मौके पर रविवार शाम को शहर के पॉश रिहायशी इलाके में स्थित गुलशन-ए-इकबाल पार्क में काफी भीड़ थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पार्क में खून ही खून और शव बिखरे पड़े थे। घायलों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। डॉन न्यूज से बातचीत में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पार्क में हर जगह मृतक और घायल पड़े थे। घायल लोगों को रिक्शा और टैक्सी के जरिये अस्पताल पहुंचाया गया।
कई लोगों ने कहा कि पार्क के आसपास कोई सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं था। एक व्यक्ति ने बताया कि यह पार्क बहुत बड़ा है और इसमें कई प्रवेश द्वार है। बचाव अधिकारियों और पुलिस ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही वे घटनास्थल पर पहुंचे।
पंजाब इमरजेंसी सेवा बचाव 1122 के प्रवक्ता दीबा शाहनाज ने कहा कि बड़ी संख्या में घायल लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास शाम 6:44 बजे इमरजेंसी कॉल आई थी और इसके बाद घटनास्थल पर 23 एंबुलेंस भेजे गए। घायलों को लाहौर के विभिन्न अस्पतालों में दाखिल कराया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। लोगों से घायल लोगों के लिए रक्तदान करने की अपील की गई। शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई और भारी संख्या में पुलिस बल ने क्षेत्र को सील कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस धमाके के लिए 10 से 15 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया होगा। मौके से बॉल बेयरिंग बरामद हुई हैं।
इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जमातुल अहरार ने दावा किया है कि उसके निशाने पर ईसाई समुदाय था। संगठन के एक प्रवक्ता एहशानुल्लाह एहसान ने हमले के बाद बयान जारी कर कहा कि धमाके में ईसाईयों को लक्ष्य किया गया था।
हम प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तक संदेश पहुंचाना चाहते थे कि हम लाहौर में घुस गए हैं। वह जो चाहें कर सकते हैं लेकिन हमें रोक नहीं पाएंगे। हमारे आत्मघाती हमलावर इस तरह के हमले जारी रखेंगे। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इस बात को खारिज किया है कि आतंकियों के निशाने पर ईसाई थे।
उनका कहना है कि यह पार्क केवल ईसाईयों के लिए नहीं था। मरने वालों में यह समुदाय भी हो सकता है। अमेरिका ने पाकिस्तान में हुए आत्मघाती हमले की निंदा की है। अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि उनका देश अपने सहयोगियों के साथ पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ को फोन कर लाहौर हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना जाहिर की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि मोदी ने नवाज से बातचीत के दौरान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का समझौता नहीं करने की जरूरत बताई है।
पीएम ने इससे पहले ट्वीट कर भी शोक जताया था।
उन्होंने लिखा था, ‘लाहौर में हुए विस्फोट के बारे में सुना। मैं कड़े शब्दों में इसकी निंदा करता हूं। मृतकों के परिजनों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के लिए प्रार्थना करता हूं।’

सेमीफाइनल के लिए ऑस्ट्रेलिया से होगा टीम इंडिया का 'फाइनल'

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नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया ने मोहाली में शुक्रवार को आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप के सुपर 10 के ग्रुप -2 में पाकिस्तान को हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा है।

अब सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए मोहाली में टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच 27 मार्च को मुकाबला खेला जाएगा। आइए ग्रुप-2 में मौजूदा टीमों की स्थिति पर डालते हैं नजरः

न्यूजीलैंड: न्यूजीलैंड की टीम के 3 मैचों में इस वक्त 6 अंक के साथ पहले नंबर पर है और वह सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। अब उसका न्यूजीलैंड आखिरी मुकाबले में बांग्लादेश से 26 मार्च को कोलकाता में भिड़ेगी।

ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को पाक को हराकर 4 अंक अर्जित कर लिए हैं और +0.44 रन रेट के साथ ऑस्ट्रेलिया दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। उसका एक मैच रविवार को भारत के खिलाफ है।

टीम इंडिया: एमएस धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने 3 मैच में से 2 जीत के साथ 4 अंक के साथ तीसरे नंबर पर है। चूंकि टीम इंडिया का रन रेट ऑस्ट्रेलिया से कम है लिहाजा वो तीसरे स्थान पर है । अब टीम इंडिया 27 मार्च को ऑस्ट्रेलिया को हरा दे तो उसके 6 अंक हो जाएंगे और वह सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी।

पाकिस्तानः पाकिस्तान ने अपने चार मुकाबलों में जीत दर्ज की है और 2 अंक के साथ चौथे स्थान पर है और टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है।
बांग्लादेशः बांग्लादेश ने सुपर 10 के ग्रुप मुकाबले में अब तक 3 मैच खेले हैं। तीनों में हार मिली है। उसे अब आखिरी मैच न्यूजीलैंड से 26 मार्च को खेलना है। बांग्लादेश तीनों मुकाबला हारने के साथ ही पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है।

टी-20 में ऑस्ट्रेलिया और टीम इंडिया के बीच अब तक 12 मुकाबले हुए है। इन मुकाबलों में टीम इंडिया का पलड़ा भारी रहा है। टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया से 8 मुकाबलों में जीत हासिल की है जबकि 4 मैच में हार का सामना करना पड़ा है।

सपनों के 'बजट' में घुमड़ता किसान

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वित्त वर्ष 2016-17 के लिए संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आज पेश किए गए बजट की यह सबसे अहम बात है। हालांकि बजट का अर्थशास्त्र कैसे काम करता है इस मामले में मेरी समझ कमजोर है, बावजूद इसके आगामी पांच साल में किसानों की आय को दोगुना करने का सरकार का विचार एक सपने जैसा मालूम पड़ता है। इसलिए जरूरी था, वित्त मंत्री अरुण जेटली देश को यह बताने का साहस करते कि यह लक्ष्य कैसे हासिल किया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पांच साल में हर वर्ष खेती की आय में करीब 14 फीसदी सालाना बढ़ोतरी की जरूरत होगी। आगे बढ़ने से पहले हम एक नजर खेती और किसानी को सरकार ने बजट में क्या-क्या दिया है, जान लें।

जेटली ने किसानों और कृषि पर बजट को फोकस करते हुए अपने बजट भाषण में कहा कि ‘कृषि एवं किसानों के कल्‍याण के लिए 35,984 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार का मकसद जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की समस्‍या को दूर करने, सिंचाई के लिए नए बुनियादी ढांचे का निर्माण करने, उर्वरक के संतुलित उपयोग के साथ मृदा उर्वरता को संरक्षित करने एवं कृषि से बाजार तक संपर्क मुहैया कराने का है। उन्होंने कहा कि ‘141 मिलियन हेक्‍टेयर शुद्ध खेती वाले क्षेत्रों में से केवल 65 मिलियन हेक्‍टेयर ही सिंचित हैं। इस बारे में, उन्‍होंने ‘प्रधानमंत्री सिंचाई योजना’ की घोषणा की जिससे कि अन्‍य 28.5 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई के साथ लाने के लिए मिशन मोड में लागू किया जा सके। एआईबीपी के तहत 89 परियोजनाओं को फास्‍ट ट्रैक किया जाएगा जो अन्‍य 80.6 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई के तहत लाने में मदद करेगा। इन परियोजनाओं में से 23 को 31 मार्च 2017 से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इस मद में अगले वर्ष 17 हजार करोड़ रुपए और अगले पांच वर्षों में 86,500 करोड़ रुपए की जरूरत होगी।
वित्‍त मंत्री ने घोषणा की कि लगभग 20 हजार करोड़ रुपए की प्रारंभिक कार्पस राशि से नाबार्ड में एक समर्पित दीर्घावधि सिंचाई निधि बनाई जाएगी। बहुपक्षीय वित्‍त पोषण के लिए 6 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से भूजल संसाधनों के ठोस प्रबंधन के लिए एक ऐसे ही कार्यक्रम का भी प्रस्‍ताव रखा गया है। इसके अलावा मार्च 2017 तक 14 करोड़ कृषि जोतों के कवरेज को मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के लिए लक्ष्‍य निर्धारित कर रखा है। यह किसानों को उर्वरक का उचित उपयोग करने में मदद करेगा। उन्‍होंने कहा कि ‘उर्वरक कंपनियों के 2,000 मॉडल खुदरा विक्रय केंद्रों को अगले तीन वर्षों में मृदा एवं बीज परीक्षण सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

वित्त मंत्री के मुताबिक यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि किसानों को पर्याप्त और समय पर ऋण मिले। उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2015-16 में 8.5 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 2016-17 में कृषि ऋण का लक्ष्य 9 लाख करोड़ रुपए होगा जो आज तक का उच्चतम स्तर है।’ किसानों के ऋण भुगतान का बोझ कम करने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि ब्याज छूट के लिए 2016-17 के बजट में 15,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
जैविक खेती के तहत 5 लाख एकड़ वर्षा जल क्षेत्रों को लाने के लिए ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ की घोषणा की गई है। इसी वर्ष 14 अप्रैल को डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के जन्‍मदिवस पर एकीकृत कृषि विपणन ई-मंच राष्‍ट्र को समर्पित किया जाएगा। इसके तहत सभी किसानों तक न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य सुनिश्चित करने के लिए तीन विशिष्‍ट पहलों को अमल में लाया जाएगा जिसमें खरीदारी का विकेन्‍द्रीकरण, एफसीआई के माध्‍यम से ऑनलाइन खरीदारी प्रणाली और दालों की खरीदारी के लिए प्रभावी प्रबंध करना शामिल है।

दुग्‍ध उत्‍पादन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए पशुधन संजीवनी, नकुल स्‍वास्‍थ्‍य पत्र, उन्‍नत प्रजनन प्रौद्योगिकी, ई-पशुधन हॉट और देसी नस्‍लों के लिए राष्‍ट्रीय जीनोमिक केन्‍द्र की स्‍थापना करने की भी घोषणा बजट में की गई है। इन परियोजनाओं में अगले कुछ वर्षों के दौरान 850 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा जेटली ने ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को ग्रांट इन एड के रूप में 2.87 लाख करोड़ रुपए आवंटित करने की घोषणा की। ऐसा 14वें वित्‍त आयोग की सिफारिशों के अनुसार किया गया है और यह राशि पिछले पांच वर्ष की तुलना में 228 प्रतिशत अधिक है। दीन दयाल अंत्‍योदय मिशन को प्रत्‍येक सूखाग्रस्‍त विकास खंड में और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को ऐसे ही जिलों में शुरू किया जाएगा।
खेती और किसानी के लिए सरकार द्वारा बजट में की गई इन बातों से तो समझ में नहीं आया कि पांच साल में किसानों की आय दोगुनी कैसे हो जाएगी। ये तो बस कृषि क्षेत्र को आवंटित बजट राशि में किस मद में कितना खर्च होना है उसका ब्योरा बताया गया है। इस बजट राशि से सीधे तौर पर किसानों का कोई भला नहीं हो सकता। हां! खेती और किसानी क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए धीरे-धीरे एक ढांचा जरूर खड़ा होगा जिसका फायदा एक वक्त के बाद किसानों को मिलेगा। देश का किसानों इस वक्त जिन हालातों से गुजर रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। दो दिन पहले आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया कि औसतन एक किसान की सालाना आमदनी 20 से 30 हजार रुपये है। तो क्या ये मानें कि पांच साल बाद इस किसान की सालाना आमदनी 40 हजार से 60 हजार रुपए हो जाएगी। अगर हो भी गई तो क्या इस बात का दावा किया जा सकता है कि महंगाई का आंकड़ा दोगुना या उससे अधिक नहीं होगा।

दूसरी अहम बात यह कि खेती-किसानी पर लगातार आपदा की वजह से किसान भीषण कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक घाटे का सौदा होने की वजह से हर रोज ढाई हजार किसान खेती छोड़ रहे हैं और हर दिन 50 के करीब किसान मौत को गले लगा रहे हैं। और तो और, देश में अभी किसानों की कोई एक परिभाषा भी नहीं है। वित्तीय योजनाओं में, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो और पुलिस की नजर में किसान की अलग-अलग परिभाषाएं हैं। ऐसे में किसान हितों से जुड़े लोग उम्मीद जता रहे थे कि आम बजट में गांव, खेती और किसान के अस्तित्व को बचाने के लिए सकारात्मक तौर पर फौरी राहत देने वाली कोई पहल होगी। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पिछले 5 वर्षों के आंकडों के मुताबिक सन् 2009 में 17 हजार, 2010 में 15 हजार, 2011 में 14 हजार, 2012 में 13 हजार और 2013 में 11 हजार से अधिक किसानों ने खेती-बाड़ी से जुड़ी तमाम दुश्वारियों समेत अन्य कारणों से आत्महत्या की राह चुन ली। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या की दर सबसे अधिक रही है।

यह उस देश के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है जहां की 60 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी से गुजारा करते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए था कि जिस तरह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उबारने के लिए एक लाख करोड़ से अधिक की राशि का बजट में प्रावधान किया गया, उसी तरह से किसानों का कर्जा माफ करने के लिए बजट में यथोचित धनराशि का प्रावधान किया जाता। सब-कुछ अगर किसान के लिए किया जा रहा है तो उस किसान को बचाने का काम तो पहले किया जाना चाहिए। बजट में इसके लिए तात्कालिक राहत जैसी कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। हां थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है कर्ज पर ब्याज माफी के मद में 15 हजार करोड़ रुपये से, लेकिन यह तो ऊंट के मुंह में जारी के समान है।

कुल मिलाकर कहें तो देश एक बड़े संकट की तरफ बढ़ रहा है जहां कोई किसानी नहीं करना चाहता, लेकिन भोजन सबको चाहिए। इस गम्भीर विषय पर समय रहते सरकारों को संजीदा होना होगा और व्यावहारिक रणनीति बनानी होगी।’ विशेषज्ञों का भी मानना है कि आने वाले दशकों में खाद्यान्न जरूरतों में वृद्धि के चलते वैकल्पिक खाद्य वस्तुओं, मसलन डेयरी उत्पादों, मत्स्य व पोल्ट्री उत्पादों के विकल्पों पर भी ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि खेती के समानांतर रोजगार के नऐ विकल्पों की जरूरत महसूस की जा रही है। जब औद्योगिक उत्पादन लगातार उतार चढ़ाव झेल रहा है ऐसे में अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करने वाले कृषि क्षेत्र के लिए मौसम की बेरूखी के कारण खाद्यान्न उत्पादन में कमी की आशंका संकट की स्थिति का संकेत दे रही है।

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