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जांच के दौरान हुई IAS अधिकारी के बेटे की मौत, पुलिस पर लगा गोली मारने का आरोप, बोले “मेरे सामने..”

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देश में भ्रष्ट्राचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। भ्रष्ट्राचार के मामले में अब तक कई बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बीच चंडीगढ़ में एक आईएएस अधिकारी का भी नाम सामने आया है। जिसको पंजाब पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। दुखद खबर ये रही कि इस दौरान अधिकारी के बेटे की गोली लगने से मौत हो गई। बेटे की मौत को लेकर अधिकारी का कहना है कि पंजाब पुलिस ने उसको गोली मारी है। जबकि पंजाब पुलिस का कहना है कि उसने पकड़े जाने के डर से खुद को गोली मार आत्महत्या कर ली है।

ये मामला तब पेश आया है जब पंजाब पुलिस भ्रष्टाचार के एक मामले में चंडीगढ़ में आईएएस अधिकारी संजय पोपली को गिरफ्तार करने उनके घर पहुंची। यहां से पुलिस को 12 किलो सोना और 3 किलों मिला। इसके साथ ही छानबीन के दौरान एक स्टोर रूम में कई स्मार्ट फोन भी मिले। पुलिस के मुताबिक ये सभी सामान एक लेदर के बैग में रखा हुआ था। जैसे ही ये बैग पुलिस के हाथ लगा तभी अधिकारी के बेटे कार्तिक ने खुद को गोली मार ली।

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लेकिन अधिकारी का कहना है कि पुलिस ने उनकी आंखों के सामने उनके बेटे को खड़ा कर गोली मारी है। उन्होंने कहा कि इस मामले का चश्मदीद गवाह मैं हूं। जानकारी के अनुसार आईएएस अधिकारी संजय पोपली और उनके एक सहयोगी को नवांशहर में सीवरेज पाइप डालने के टेंडर को मंजूरी देने के लिए कथित तौर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जिसके चलते इस मामले की जांच के लिए पुलिस अधिकारी के घर पहुंची थी, तभी ये हादसा पेश आया।

डिप्टी स्पीकर द्वारा समन जारी करने के बाद संजय राउत का ट्वीट, “कब तक छिपोगे गौहाटी में..?”

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महाराष्ट्र में जारी सियासी जंग के बीच कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। विधायकों के द्वारा बगावत किए जाने पर पार्टी काफी नाराज़ है। इस नाराजगी के बीच भी पार्टी ने कई बार विधायकों से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिशें की, लेकिन ये सभी कोशिशें असफल रहीं। जिसके बाद पार्टी ने इन विधायकों के खिलाफ एक्शन लेते हुए वरिष्ठ मंत्री एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के 16 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की अर्जी डाली। इस अर्जी के बाद विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने इन सभी बागी विधायकों से जवाब मांगा है।

जानकारी के अनुसार विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने सभी विधायकों को समन जारी किया है और उनसे 27 जून तक जवाब तलब किया है। उनके इस फैसले से खुश शिवसेना सांसद संजय राउत ने ट्विटर पर एक पोस्ट कर एकनाथ शिंदे समेत 16 बागी विधायकों के ऊपर हमला बोला है। उनका कहना है कि विधायकों को अब सामने आना ही पढ़ेगा। वह और ज्यादा समय तक अब छुप नहीं सकते। उन्होंने ट्विटर पर विधानसभा उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल की एक तस्वीर को शेयर किया।

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इस तस्वीर को शेयर करते हुए संजय राउत ने लिखा कि “कब तक छिपोगे गौहाटी में, आना ही पड़ेगा चौपाटी में।” नरहरि जिरवाल के इस फैसले से अब ये बाजी पलटती दिख रही है। बता दें कि बीते दिन उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। जिसमें इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हुई है। क्योंकि की उद्धव ठाकरे कोरोना से पीड़ित हैं तो उन्होंने डिजिटल माध्यम से इस बैठक में शामिल होने का फैसला लिया था।

राष्ट्रपति चुनाव से पहले बसपा प्रमुख की बड़ी घोषणा, विपक्षी उम्मीदवार का नहीं करेंगी समर्थन…

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अगले महीने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल समापत होने जा रहा है। जिसके चलते अब नए राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर देश भर में सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है। बता दें कि भाजपा और विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति उम्मीदवार के नामों पर अंतिम मुहर भी लगाई जा चुकी है। जहां एक तरफ़ एनडीए गठबंधन ने झारखंड की पूर्व गवर्नर द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति उम्मीदवार होने की घोषणा की है। वहीं, विपक्ष द्वारा आपस में विचार विमर्श कर के यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है।

अभी तक विपक्ष में सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन अचानक से सामने आए बसपा प्रमुख मायावती के बयान के बाद विपक्ष की परेशानियां बढ़ चुकी हैं। दरअसल, मायावती ने खुलेआम एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। अगर वह एनडीए गठबंधन को समर्थन देती हैं तो विपक्ष का जीतना काफी मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने अपने इस बड़े कदम के पीछे की वजह भी बताई। उनका कहना है कि यशवंत सिन्हा के नाम की घोषणा करने से पहले विपक्ष ने उनसे उनकी राय नहीं ली।

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वह कहती हैं कि “बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने बसपा को राष्ट्रपति उम्मीदवार तय करने के लिए आयोजित बैठक में नहीं बुलाया। बसपा एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है, जिसका नेतृत्व दलितों के साथ है. हम ऐसी पार्टी नहीं हैं जो बीजेपी या कांग्रेस को फॉलो करती है, या जो उद्योगपतियों से जुड़ी है. हम उत्पीड़ितों के पक्ष में निर्णय लेते हैं. ऐसे में अगर कोई पार्टी ऐसी जातियों या लोगों के वर्ग के पक्ष में निर्णय लेती है, तो हम परिणाम की परवाह किए बिना इन दलों का समर्थन करते हैं।”

उन्होंने कहा कि “बंगाल की सीएम ने पहली बैठक के लिए कुछ चुनिंदा पार्टियों को ही बुलाया और शरद पवार ने भी बसपा को चर्चा के लिए नहीं बुलाया। विपक्ष ने केवल राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने की कोशिश का ढोंग किया। विपक्ष बसपा के खिलाफ अपनी जातिवादी मानसिकता के साथ जारी है और इसलिए हम राष्ट्रपति चुनाव पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। हमारी पार्टी ने आदिवासी समुदाय को हमारे आंदोलन के एक प्रमुख हिस्से के रूप में पहचाना है और द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने का फैसला किया है। इसका बीजेपी या विपक्ष से कोई लेना-देना नहीं है।”

विधायकों की बगावत के बीच शिवसेना की अहम बैठक, डिजिटल माध्यम से शामिल होंगे उद्धव ठाकरे…

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महाराष्ट्र में सियासी युद्ध बरकरार है, पार्टी के नेताओं द्वारा बगावत के बाद महाराष्ट्र सरकार की मुसीबत लगातार बढ़ती जा रही है। इस मामले को लेकर शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Cm uddhav Thackeray) को भावुक देखा गया। इस दौरान उन्होंने बागी नेताओं और भाजपा पर निशाना साधा। हालांकि वह काफी भावुक थे, उन्होंने आरोप लगाया कि बागियों ने उनके साथ छल किया है। बता दें कि शुक्रवार को पार्टी के विधायकों के साथ एक बैठक में उद्धव ठाकरे वर्चुअली जुड़े और उन्हें संबोधित किया।

बताया जा रहा है कि आज वह फिर एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने आज अपनी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। गोरतलब हैं कि उद्धव ठाकरे कोरोना से संक्रमित हैं। जिसके कारण वह आज भी डिजिटली इस बैठक को संबोधित करेंगे। इससे पहले शुक्रवार में हुई एक बैठक में उद्धव ठाकरे को भावुक देखा गया। वह अपने संबोधन में कहते हैं कि “हमें अपने ही लोगों ने धोखा दिया है. बगावत करने वाले शिवसेना के विधायकों को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया गया, जबकि कई शिवसैनिक नामांकन के इच्छुक थे।”

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इसके साथ ही शुक्रवार शाम उन्होंने भाजपा के खिलाफ भी आरोप लगाया। वह कहते हैं कि “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मकसद शिवसेना को समाप्त करना है क्योंकि वह हिंदू वोट बैंक को साझा नहीं करना चाहती।” उन्होंने कहा कि “पार्टी के आम कार्यकर्ता मेरी ‘‘पूंजी” हैं और जब तक वे मेरे साथ खड़े हैं, तब तक मैं किसी अन्य द्वारा की जाने वाली आलोचना की परवाह नहीं करता।”

आधी रात को ही घर से बाहर निकले आदित्य ठाकरे, सियासी संकट के बीच किया…

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महाराष्ट्र सरकार में सियासी घमासान जारी है, राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पार्टी के बड़े नेता सभी इस मामले को सुलझाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। लेकिन फिलहाल इसका कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में एक के बाद एक बड़े खबरें सामने आ रही हैं। बता दें कि बीती रात ठाकरे परिवार मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास ‘वर्षा’ से अपने घर ‘मातोश्री’ में शिफ्ट हो गया है। इस बीच देर रात को ही उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे घर के बाहर मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते नजर आए।

इस सियासी घमासान को लेकर मीडिया इतनी सक्रिय है कि पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे के घर के बाहर ही डेरा डाल लिया है। ऐसे में ‘मातोश्री’ में शिफ्ट होने के बाद आदित्य ठाकरे ने देर रात घर से बाहर निकल कर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने आते ही सबसे पहले पूछा कि क्या आपने खाना खाया है.? इसके बाद उन्होंने मीडिया से सभी कैमरे बंद करने की अपील की। वह कहते हैं कि मैं कोई बयान देने नहीं आया हूं। इस बीच उनसे उद्धव ठाकरे की सेहत से जुड़ा सवाल पूछा गया।

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इस सवाल के जवाब में शिवसेना मंत्री और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे कहते हैं कि वो पूरी तरह से ठीक हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उद्धव ठाकरे कोरोना से पीड़ित पाए गए हैं। वहीं अगर बात करें इस सियासी युद्ध कि तो एकनाथ शिंदे समेत पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी के साथ बगावत कर दी है। जिसके चलते अब उद्धव ठाकरे की सरकार की गिरने की संभावना जताई जा रही है। एकनाथ शिंदे का दावा है कि उसके साथ 50 से ज़्यादा विधायकों का समर्थन है।

सियासी घमासान के बीच भाजपा पर संजय राउत का आरोप, “शरद पवार को धमका रहे हैं…”

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महाराष्ट्र सरकार इन दिनों काफी मुसीबतों का सामना कर रही है। पिछले कुछ दिनों से बागी नेताओं ने उद्धव ठाकरे सरकार में हंगामा मचा रखा है। इस बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने इस दौरान भाजपा पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र सरकार में जो कुछ भी हो रहा है उसमें भाजपा का हाथ है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री द्वारा शरद पवार को धमकाने की भी बात कही। उन्होंने ट्विटर पर ट्वीट कर ये आरोप लगाया है।

उन्होंने ट्वीट में लिखा कि “महाविकास अघाड़ी सरकार को बचाने की कोशिश की तो शरद पवार को घर नहीं जाने देंगे, उन्हें रास्ते पर रोकेंगे, ऐसी धमकी बीजेपी के एक केंद्रीय मंत्री दे रहे हैं। अगर यह बीजेपी की अधिकृत भूमिका है तो आप ऐसा ऐलान कीजिए। सरकार टिकेगी या जाएगी, लेकिन शरद पवार के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल महाराष्ट्र को स्वीकार नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने इस बात को मीडिया के सामने भी रखा।

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मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि “पवार साहब को धमकियां मिल रही हैं। एक केंद्रीय मंत्री धमकियां दे रहा है, कह रहा है कि घर नहीं जाने देंगे। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सुन लें – आपका एक मंत्री पवार जी को धमकियां दे रहा है, क्या आपको ये मंजूर है?” उन्होंने आगे कहा कि “आंकड़ा कभी स्थिर नहीं रहता। जिन 12 विधायकों ने बगावत की है, उनके खिलाफ ऐक्शन की शुरुआत की गई है। अब तो ये कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। ये तो संवैधानिक लड़ायी है। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में जो हो रहा है, उसके पीछे बीजेपी का हाथ है।”

एकनाथ शिंदे की वापसी के लिए शरद पवार का सुझाव, मुख्यमंत्री पद से दें इस्तीफा…

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महाराष्ट्र में बगावत पर उतरे शिवसेना के विधायक कभी भी उद्धव ठाकरे की सरकार का तख्ता पलट सकते हैं। ऐसे में इस संकट को दूर करने के लिए शिवसेना और सहायक दल विधायकों को समझाने की कोशिशों में जुटी हुई है। हाल ही में दिए गए एक बयान में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने इस मुद्दे को हल करने का एक सुझाव दिया है। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे अपनी कुर्सी छोड़ दें और एकनाथ शिंदे को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया जाए। होने कहा कि अगर ऐसा होता है तो फिर किसी को कोई आपत्ती नहीं होगी।

हालांकि इस बात के लिए उद्धव ठाकरे पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने बगावत के इस दौर में पार्टी के लिए अपना पद छोड़ने की बात कही है। कल एक फेसबुक संबोधन में उन्‍होंने कहा कि “मैं अपना इस्‍तीफा तैयार रख रहा हूं। आइए और मुझे बताइए कि क्‍या आप चाहते हैं कि मैं पद छोडूं। मैं कुर्सी पकड़ कर बैठने वालों में से नहीं हूं। जब सरकार बनी थी तब भी पवार साहेब (Sharad Pawar) ने मुझे कहा था कि मैं चाहता हूं कि सरकार को तुम ही चलाओ। पवार ने भी मुझ पर भरोसा जताया है लेकिन अगर मेरे लोग ही मेरे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं तो मैं क्या हूं।”

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उन्होंने कहा कि “सूरत और कहीं और जाकर बात करने से अच्छा था कि वो मेरे पास आकर बात करते और मुझे कहते कि आप मुख्यमंत्री मत रहिए। तो मैं इसे ज्यादा बेहतर समझता। अगर एक भी विधायक कहता है कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री नहीं रहना चाहिए तो मैं आज के आज में इस्तीफा दे दूंगा। मैं कोई कुर्सी पकड़कर बैठने वाला आदमी नहीं हूं लेकिन ये कहना है कि यह हमारी शिवसेना नहीं है, ये गलत है। शिवसेना कभी भी हिंदुत्‍व को नहीं छोड़ेगी। हिंदुत्‍व हमारी पहचान है।”

खुद पर लगे आरोपों पर बातचीत करते हुए वह कहते हैं कि “मुझ पर लोगों/पार्टी जनों से नहीं मिलने के आरोप लगाए गए। जहां तक लोगों से न मिलने की बात है तो इसका कारण यह था कि मैं अस्‍वस्‍थ था और इस कारण लोगों से मिल नहीं पा रहा था। ऐसा नहीं है कि मेरे अस्‍वस्‍थ्‍य नहीं रहने के दौरान प्रशासनिक काम नही हो रहा था वह चल रहा था। लोग कहते हैं कि यह बाला साहेब की शिवसेना नहीं रही मैं पूछता हूं क्‍या फर्क है। यह अभी भी पहले वाली ही शिवसेना है।”

भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली के LG का बड़ा आदेश, तीन बड़े अधिकारी निलंबित…

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देश में भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है। पिछले कुछ सालों में इसके खिलाफ कई एक्शन लिए जा चुके हैं और कई अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया जा चुका है। इस बीच अब एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में देश की राजधानी दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने राज्य के तीन बड़े अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। इन अधिकारियों में एक डिप्टी सेक्रेटरी का भी नाम शामिल है। डिप्टी सेक्रेटरी के साथ दो एसडीएम को भी निलंबित किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार निलंबित अधिकारियों में एसडीएम वसंत विहार हर्षित जैन, एसडीएम विवेक विहार देवेंद्र शर्मा और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े उपसचिव प्रकाश चंद ठाकुर का नाम शामिल है। इनके ऊपर आरोप है कि इन्होंने तय प्रक्रिया में चूक की है, जिससे भ्रष्टाचार होने की संभावना दिखाई देती है। ऐसे में जब तक इस मामले की पूरी कार्यवाही नहीं हो जाएगी तब तक ये तीनों अधिकारी निलंबित रहेंगे। वहीं आपको बता दें कि हाल ही में सांसद मनोज तिवारी की एक साल पुरानी अस्पताल बनाने में गड़बड़ी की शिकायत पर उप राज्‍यपाल ने ACB जांच का आदेश दिया था।

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उनके इस आदेश के विरोध में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कुछ सवाल उठाए थे। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा था कि “अगर किसी जनसेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत आती है तो जांच एजेंसी इस मामले में तब तक जांच शुरू नहीं कर सकती जब तक सरकार इसकी इजाजत न दे। इस मामले में निर्वाचित सरकार से इजाजत नहीं ली गई।” वहीं मंगलवार को भी अपने एक बयान में वह कहते हैं कि “भ्रष्टाचार निरोधक कानून के मुताबिक, ऐसी किसी भी शिकायत पर 4 महीने के भीतर फैसला करना होता है जबकि इस मामले में शिकायत किए हुए करीब एक साल का समय हो चुका है।”

महाराष्ट्र सरकार पर गहराया संकट, एकनाथ शिंदे ने किया बड़ा दावा…

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महाराष्ट्र के मंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा पार्टी के कई विधायकों के साथ शहर से बाहर जाने से शिवसेना सरकार पर सियासी संकट छा गया है। इस बीच अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार गिर जाएगी। एकनाथ शिंदे का दावा है कि उनके साथ शिवसेना के 40 और निर्दलीय 6 विधायक मौजूद हैं और उनको असम के होटल रेडिशन ब्लू में पहुंचा दिया गया है। जानकारी के अनुसार कल शाम सूरत में शिवसेना के दो नेताओं ने एकनाथ शिंदे से बातचीत की थी। सिर्फ नेताओं से ही नहीं बल्कि इस दौरान उनकी फोन कॉल पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी बात हुई।

ये बातचीत करीब 10 मिनट तक चली, लेकिन बताया जा रहा है कि इस दौरान कोई भी हाल निकल कर सामने नहीं आया है। एकनाथ शिंदे ने अब तक महाराष्ट्र में वापसी नहीं की है। अपने इस उठाए गए कदम पर एकनाथ शिंदे का कहना है कि “पार्टी की भलाई के लिए यह कदम उठा रहे हैं। अब तक मैंने कोई फैसला नहीं लिया है और न ही किसी दस्तावेज़ पर दस्तखत किए हैं।” इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि “शिवसेना छोड़ा नहीं है, बालासाहेब का हिंदुत्व आगे बढ़ाएंगे।”

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वहीं, इस मामले पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि “भाजपा शासित गुजरात के सूरत शहर में शिंदे के साथ पार्टी के 14 से 15 विधायक हैं।” उनका कहना है कि “नितिन देशमुख सहित इनमें से दो विधायकों को पीटा गया है और देशमुख को दिल का दौरा पड़ा है।” इस बीच भाजपा के बड़े नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र में जल्दी ही अब भाजपा की सरकार बनने वाली है।

राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर लगी अंतिम मुहर, एनडीए गठबंधन ने चुना द्रौपदी मुर्मू का नाम…

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देश के मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल अगले महीने ही खत्म होने वाला है। जिसके बाद अब नए राष्ट्रपति के चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में अब देश में सियासी तापमान काफी बढ़ा हुआ नजर आ रहा है। सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर भाजपा से लड़ने की योजना बना रही हैं। ऐसे में देखना होगा की कौन बाजी मारता है। जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति उम्मीदवार के अंतिम नाम भी लगभग तय कर लिए गए हैं। एनडीए गठबंधन ने मंगलवार को एक बैठक कर अपने राष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम चुन लिया है।

वहीं, दूसरी ओर विपक्ष ने भी राष्ट्रपति उम्मीदवार का नाम सामने रख दिया है। बताते चलें कि भाजपा की बैठक में पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के बाद जेपी नड्डा ने ऐलान किया कि झारखंड की पूर्व गवर्नर द्रौपदी मुर्मू एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनाया जा रहा है। आपको बता दें कि द्रौपदी मुर्मू पहली ऐसी आदिवासी नेता हैं जिनका नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए घोषित किया गया है और अगर वे चुनाव जीत जाती हैं तो प्रतिभा पाटिल के बाद देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनेंगी।

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इसके साथ ही आपको बता दें कि द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला गवर्नर और ओडिशा की पहली महिला और आदिवासी नेता रही हैं। ऐसे ने अनुमान लगाया जा रहा है कि वह राष्ट्रपति चुनाव आसानी से जीत सकती हैं। वहीं अगर बात करें विपक्ष की तो संयुक्त उम्मीदवार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा गया है।