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UKSSSC पेपर लीक कांड : अब ढीला क्यों पड़ने लगा मामला?

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अधीनस्त चयन सेवा आयोग पेपर लीक कांड के बाद सरकार एक्शन लिया। कई लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई। सरकार की तारीफ भी हुई और हो भी रही है। आलोचना और तारीफ भाजपा-कांग्रेस के लोग कर रहे हैं। लेकिन, इस मामले में तीसरा मोर्चा बेरोजगार हैं। वो बेरोजगार, जिनकी नौकरियों बेच दी गईं। वो बेरोजगार जिनके सपनों को नीलाम किया गया। वो बेरोजगार जिनकी जिंदगियों से खिलावाड़ किया गया। वो बेरोजगार जिनके परिजनों ने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी।

गरीबी में जीकर मेहनत की, लेकिन उनके हिस्से की नौकरी पैसे वाले खा गए। बेरोजगार बार-बार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। हर बार एक ही सवाल उठा रहे हैं कि सरकार किसीको बचाना चाह रही है? क्यों बचाना चाहती है? आखिर वो कौन लोग हैं, जिनको सरकार बचाना चाहती है?

बरोजगारों के नेता बॉबी पंवार के पेपर लीक कांड की शिकायत करने से लेकर अब तक के जितने भी इंटरव्यू और बयान हैं, वो हर बार एक बात को दोहरा रहे हैं कि सरकार किसी को क्यों बचाना चाह रही है? हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर वो कौन लोग हैं, जिनको बचाया जा रहा है? उनका कहना है कि कुछ बड़ी मछलियां अब भी इस मामले में बच गई हैं। आखिर उनको क्यों बचाया जा रहा है?

कांग्रेस इस मामले में शुरू में मुखर रही। लेकिन, कांग्रेस का मुखरपन धीमा पड़ गया है। हां, इसमें कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी की याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल जरूर किया है, लेकिन सड़क पर कांग्रेस ढीली हो गई है। इसका कारण भी किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्यों? विधानसभा बैकडोर भर्ती का मामला भी ढीला हो गया। इसका कारण शायद जांच के लिए जो एक माह का समय मांगा गया है, सभी उसका इंतजार कर रहे हैं।

अब तक सोशल मीडिया पर शोर मचा रहे लोगों को जोश भी ढीला पड़ गया है। ऐसा लगता है कि इस मामले में अब शायद सबकुछ हो गया है। हालांकि, जांच एजेंसियों अपने-अपने स्तर पर काम कर रही हैं। अच्छा काम भी किया है, लेकिन उन सवालों के भी जवाब मिलने चाहिए, जिनका उत्तर आम लोग और बेरोजगार मांग रहे हैं।

ज्ञानवापी मामला सुनवाई के योग्य, अदालत का ऐतिहासिक फैसला

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ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में पांच महिलाओं की ओर से दाखिल याचिका पर अदालत का फैसला आ गया है। दोपहर एक बजे के बाद से ही परिसर में गहमागहमी तेज हो गई और दोपहर दो बजे अजय कुमार विश्‍वेश की अदालत ने फैसला पढ़ना शुरू किया।

सवा दो बजे अदालत ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के प्रार्थना पत्र को अपने फैसले में खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण के आगे भी सुनवाई जारी रहने की जानकारी देते हुए अगली तिथि 22 सितंबर तय कर दी।

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को लेकर दायर मुकदमा नंबर 693/2021 (18/2022) राखी सिंह (व अन्‍य) बनाम उत्तर प्रदेश राज्य सरकार मामले में अदालत ने दोपहर सवा दो बजे फैसला सुना दिया। वाराणसी के जिला जज ने अपना ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कहा कि उपरोक्त मुकदमा न्यायालय में चलने योग्य है।

यह निर्धारित करते हुए प्रतिवादी संख्या चार अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के द्वारा अदालत को दिए गए 7/11 के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया। इसी के साथ अदालत ने अगली सुनवाई की ति‍थि 22 सितंबर तय कर दी है। वहीं अंंजुमन इंतेजा‍मिया मसा‍जिद कमेटी ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन कोर्ट ने बताया कि हमारी बहस को अदालत में मान लिया गया है। मुस्लिम पक्ष के आवेदन को रद्द कर करते हुूए कोर्ट ने कहा है कि याचिका सुनवाई के योग्य है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होनी है तो हम आगे की प्रक्रिया के लिए अब तैयारी कर रहे हैं।

UKSSSC पेपर लीक मामला : कांग्रेस विधायक की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, मांगा पूरा ब्यौरा

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नैनीताल: पेपर लीक मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस भेजकर मामले की पूरी जानकारी 21 सितंबर तक हाईकोर्ट को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इस नोटिस में नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार से भर्ती परीक्षा को लेकर कई सवालों के जबाब मांगे हैं। कांग्रेस विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की।

यूकेएसएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष मामले में सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए मामले में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। जिसके चलते सरकार लगातार मामले में कार्रवाई कर रही है।

नैनीताल हाईकोर्ट ने यूकेएससीसी की भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर खटीमा के कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी की याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार से पूछा है कि परीक्षा में किस-किस की नियुक्ति कैसे-कैसे हुई, उसका पूरा चार्ट बनाकर 21 सितम्बर से पहले दाखिल करें।

NCP प्रमुख शरद पवार बोले- दिल्ली दरबार के आगे कभी नहीं झुकेंगे

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नई दिल्ली : NCP अध्यक्ष शरद पवार ने रविवार को दो टूक कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली में मौजूद शासकों के सामने कभी नहीं झुकेगी। उन्होंने BJP को सत्ता से बेदखल करने के लिए अन्य सभी दलों से एक बार फिर मिलकर काम करने का आह्वान किया। वे दिल्ली में आयोजित राकांपा के आठवें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

पवार ने कहा कि छत्रपति शिवाजी कभी दिल्ली के शासकों के सामने नहीं झुके और NCP उस रास्ते पर ही चलती आई है और उसने खुद को एक प्रगतिशील राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित किया है। पवार की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कई विपक्षी नेता CBI, ED जैसी जांच एजेंसियों का सामना कर रहे हैं। राकांपा नेता नवाब मलिक और अनिल देशमुख न्यायिक हिरासत में हैं।

शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार CBI और ED का गलत इस्तेमाल कर रही है। विरोधी नेताओं को झूठे केसों में फंसा रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि हमें बड़ी लड़ाई लड़नी है। प्रजातांत्रिक तरीके से मोदी सरकार को चलता करना है। इस दौरान पवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया।

पार्टी महासचिव प्रफुल पटेल ने कहा कि शरद पवार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को एकजुट करने में पवार अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आगामी आम चुनाव में राकांपा बड़ी भूमिका में होगी। NCP महासचिव प्रफुल्ल पटेल आगे कहा कि हमारी पार्टी आगामी आम चुनावों में अहम भूमिका निभाएगी। लेकिन पार्टी का रुख एकदम स्पष्ट है कि विपक्ष को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा हम भी यूपीए सरकार का हिस्सा थे इसलिए कांग्रेस से हमारी कोई लड़ाई नहीं है।

UKSSSC पेपर लीक मामले में बड़ी करवाई, आयोग ने हटाये कई कर्मचारी

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देहरादून :UKSSSC पेपर लीक प्रकरण में विजिलेंस जांच की जद में आए अनुभाग अधिकारी व समीक्षा अधिकारियों को आयोग ने हटा दिया है। इनमें से दो को बाध्य प्रतीक्षा में डाल दिया है, जबकि एक को अनुभाग से हटाकर लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। 16 अन्य कर्मचारियों को भी आयोग के सचिव एसएस रावत ने इधर से उधर कर दिया है।

पेपर लीक प्रकरण में सरकार ने आयोग के तत्कालीन सचिव संतोष बडोनी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक एनएस डांगी के अलावा अनुभाग अधिकारी कैलाश चंद्र नैनवाल, समीक्षा अधिकारी दीपा जोशी व बीएल बहुगुणा के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू की है। जांच का आदेश होने के बाद आयोग के सचिव एसएस रावत ने भी आयोग के स्तर से कार्रवाई की।

कैलाश चंद्र जोशी को परीक्षा अनुभाग से हटाते हुए लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। समीक्षा अधिकारी दीपा जोशी को गोपन अनुभाग से हटाकर बाध्य प्रतीक्षा में डाला है। समीक्षा अधिकारी बीएल बहुगुणा को अधियाचन अनुुुभाग से हटाकर बाध्य प्रतीक्षा में डाल दिया है। सहायक समीक्षा अधिकारी प्रवीण राणा को लोक सूचना अधिकारी से हटाकर अधियाचन अनुभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

आयोग में 16 कर्मचारियों की जिम्मेदारी बदली 

प्रभारी अनुसचिव राजन नैथानी को विभागीय नियमावली आदि के कार्यों से हटाकर जांच से संबंधित काम दिए गए हैं। अनुभाग अधिकारी संतोष कुमार निराला को परीक्षा से गोपन, सहायक लेखाकार भरत सिंह चौहान को बजट से लेखा के सभी काम, सुभाष घिल्डियाल को अधियाचन से हटाकर परीक्षा अनुभाग, प्रमीत अधिकारी को अति गोपन से हटाकर गोपन अनुुुभाग, सतीश चंद्र उप्रेती को विधि, बबीता को परीक्षा अनुभाग, सपना को परीक्षा अनुभाग, अरविंद सिंह को गोपन अनुभाग, अनिल कुमार को विधि अनुभाग, विनीत रावत को गोपन और पंकज सुंद्रियाल को लेखा अनुभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती : 9 साल कि उम्र में घर छोड़ने से देवलोक गमन तक की यात्रा, एक नजर

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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हम सब के बीच नहीं रहे हैं। MP के नरसिंहपुर जिले स्थित आश्रम में उन्होंने 11 सितंबर को दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब अंतिम सांस ली है। निधन से नौ दिन पहले ही उन्होंने आश्रम में अपना 99वां जन्मदिन मनाया था। स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म एमपी के सिवनी जिले स्थित दिघोरी गांव में दो सितंबर 1924 को हुआ था।

शंकराचार्य का पद हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण
हिंदुओं को संगठित करने की भावना से आदिगुरु भगवान शंकराचार्य ने 1300 बर्ष पूर्व भारत के चारों दिशाओं में चार धार्मिक राजधानियां (गोवर्धन मठ, श्रृंगेरी मठ, द्वारका मठ एवं ज्योतिर्मठ) बनाईं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी दो मठों (द्वारका एवं ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य हैं। शंकराचार्य का पद हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है। हिंदुओं का मार्गदर्शन एवं भगवत् प्राप्ति के साधन आदि विषयों में हिंदुओं को आदेश देने के विशेष अधिकार शंकराचार्यों को प्राप्त होते हैं। सभी हिंदूओं को शंकराचार्यों के आदेशों का पालन करना चाहिये। वर्तमान युग में अंग्रेजों की कूटनीति के कारण धर्म का क्षय, जो कि हमारी शिक्षा पद्धति के दूषित होने एवं गुरुकुल परंपरा के नष्ट होने से हुआ है।

swami swroopanand swarswti jyotishpeethdhiswar

इनका किया विरोध
हिंदूओं को संगठित कर पुनः धर्मोत्थान के लिये चारों मठों के शंकराचार्य एवं सभी वैष्णवाचार्य महाभाग सक्रिय हैं। स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती उन्हीं में से एक थे। वे सांई बाबा की पूजा करने के विरोध में रहे। क्योंकि कुछ हिंदू दिशाहीन हो कर अज्ञानवश असत् की पूजा करने में लगे हुए हैं, जिससे हिंदुत्व में विकृति पैदा हो रही है। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के अनुसार इस्कॉन भारत में आकर कृष्ण भक्ति की आड़ में धर्म परिवर्तन कर रहा है, ये अंग्रेजों की कूटनीति है कि हिंदुओं का ज्ञान ले कर हिंदुओं को ही दीक्षा दे कर अपना शिष्य बना रहे हैं।

मध्य प्रदेश में हुआ जन्म
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म 2 सितम्बर 1924 को मध्य प्रदेश राज्य के सिवनी जिले में जबलपुर के पास दिघोरी गांव में ब्राह्मण परिवार में पिता श्री धनपति उपाध्याय और मां गिरिजा देवी के यहां हुआ। माता-पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा। नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ कर धर्म यात्रायें प्रारम्भ कर दी थीं। इस दौरान वह काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी करपात्री महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली।

स्वतंत्रता आंदोलनन में कूदे
यह वह समय था जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में नौ और मध्यप्रदेश की जेल में छह महीने की सजा भी काटी। वे करपात्री महाराज की राजनीतिक दल राम राज्य परिषद के अध्यक्ष भी थे। 1950 में वे दंडी संन्यासी बनाये गए और 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली। 1950 में शारदा पीठ शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड-सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे।

99वें जन्मदिन के नौ दिन बाद निधन
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कई दिनों से बीमार थे। वह नरसिंहपुर जिले स्थित आश्रम में ही रह रहे थे। झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने साढ़े तीन बजे दोपहर अंतिम सांस ली है। इसके बाद आश्रम में भक्तों की भीड़ उमड़ गई है। शंकराचार्य ने नौ दिन पहले ही दो सितंबर को अपना 99वां जन्मदिन मनाया था। निधन की खबर से उनके भक्त शोकाकुल है। आश्रम में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे हैं। प्रदेश की राजनीति के कई बड़े नेता स्वारूपनंद सरस्वती के शिष्य थे।

नौ साल की उम्र में छोड़ दिया था घर
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म दो सितंबर 1924 को हुआ था। उनका पैतृक घर सिवनी जिले के दिघोरी गांव में है। वह ब्राह्मण परिवार से आते हैं। पिता का नाम धनपति उपाध्याय था। माता-पिता इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा था। नौ वर्ष की उम्र में इन्होंने घर छोड़कर धार्मिक यात्राएं शुरू कर दी थी। इसी क्रम में वह काशी पहुंचे और स्वामी करपात्री महाराज से वेद-वेदांग और शास्त्रों की शिक्षा ली। इसके बाद धर्म की राह पर ही चलते रहे।

1981 में मिली शंकराचार्य की उपाधि
आजादी की लड़ाई के साथ-साथ वह धार्मिक कार्यों से भी जुड़े थे। 1950 में वे दंडी संन्यासी बन गए थे। इसके लिए उन्होंने शारदा पीठ शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से दंड-संन्यास की दीक्षा ली थी। इसके बाद से उन्हें स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के नाम से जाने जाने लगे। पहली बार स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली। वह अभी द्वारका और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य थे।

सियासत में भी दिलचस्पी
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को उनके गुरु के पास धर्म और राजनीति दोनों की शिक्षा मिल रही थी। उनके गुरु करपात्री महाराज की एक राजनीतिक पार्टी राम राज्य परिषद थी, जिसके वह अध्यक्ष थे। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राम मंदिर निर्माण के लिए भी लड़ाई लड़ी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें जब ट्रस्ट में जगह नहीं मिली तो वह नाराज हो गए थे। उन्होंने मुहूर्त और कामकाज पर भी सवाल उठाया था।

अजीत पवार की इस हरकत से मचा पार्टी में बवाल, बीच बैठक में…

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महाराष्ट्र में लगातार सियासी घमासान जारी है। पहले शिवसेना के नेताओं में बवाल हुआ, जिससे उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई। अब खबर है कि एनसीपी में भी नेताओं के बीच टकराव होना शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजीत पवार पार्टी से नाराज़ चल रहे हैं। बता दें कि रविवार को अजीत पवार की एक हरकत से पार्टी में दरार आने की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक हुई। इस बैठक के बीच में से ही अजीत पवार उठकर चले गए।

उनके इस कदम के बाद विपक्ष को निशाना साधने का मौका मिल गया। बताया जा रहा है कि सम्मेलन में जैसे ही पार्टी नेता जयंत पाटिल को उनके सामने बोलने का मौका दिया गया, अजीत पवार कुछ ही देर बाद मंच से उठकर चले गए। कुछ समय के बाद महाराष्ट्र के इस नेता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बैठक में इसलिए नहीं बोला क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर की बैठक थी।

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जब ये वाकया हुआ उस वक्त मंच पर खुद शरद पवार मौजूद थे। उनके अलावा प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल, प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले भी वहां थीं। इस पूरे सियासी घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो रहा है। बता दें कि इस सम्मेलन के दौरान शरद पावर के बाद उनके भतीजे अजित पावर को कार्यकर्ताओं को संबोधित करना था, लेकिन उनसे पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को संबोधन के लिए बुला लिया गया। ऐसे में इस बात से नाराज़ होकर ही अजीत पवार बैठक छोड़ के चले गए। हालांकि बाद में उनको खूब मनाया गया लेकिन वह नहीं माने।

AAP के छापामारी के दावे पर गुजरात पुलिस का बयान, ऐसी कोई भी…

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आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच सियासी लड़ाई अब भी जारी है। पहले दिल्ली में दोनों पार्टियों के बीच तनाव देखने को मिला और अब गुजरात में दोनों दलों के बीच तनाव देखने को मिल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार गुजरात में भी आम आदमी पार्टी के दफ्तर में छापा मारा गया है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि अहमदाबाद में मौजूद आम आदमी पार्टी के दफ्तर पर गुजरात पुलिस ने छापा मारा है। आप नेता इसुदान गढ़वी ने इस बात की जानकारी दी है।

उन्होंने बताया है कि पुलिस ने रात के समय में दफ्तर पर छापा मारा। हालांकि गुजरात पुलिस इस बात से इंकार करती है। गुजरात पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई कार्य नहीं किया। इसुदान गढ़वी ने अपने ट्वीट में लिखा कि “आम आदमी पार्टी पर गुजरात पुलिस की 2 घंटे की रेड में कुछ नहीं मिला।” बता दें कि मौजूदा समय में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुजरात दौरे पर हैं और उनके वहां पहुंचने पर दफ्तर में छापा पड़ना एक परेशानी का कारण बना हुआ है।

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ऐसे में अब आम आदमी पार्टी के नेता भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। आम आदमी पार्टी के इस दावे पर गुजरात पुलिस ने कहा कि “इस प्रकार का कोई रेड अहमदाबाद शहर पुलिस के द्वारा करने में नहीं आई है। अहमदाबाद पुलिस ने ट्वीट कर कहा कि कल आम आदमी पार्टी के कार्यालय पर अहमदाबाद शहर पुलिस द्वारा रेड करने में आई, ऐसा समाचार सोशल मीडिया से ज्ञात हुआ है। इस प्रकार का कोई रेड अहमदाबाद शहर पुलिस के द्वारा करने में नहीं आई है।”

रणबीर की ‘ब्रह्मास्त्र’ की रिकॉर्ड तोड़ कमाई, पहले वीकेंड शानदार कलेक्शन

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  • टी.एस. लामा 

मुंबई : लंबे वक्त से बॉलीवुड की फिल्मों को अच्छा रिस्पांस नहीं मिल पा रहा है। लेकिन, रणबीर कपूर की ब्रह्मास्त्र सिनेमाघरों में धमाल मचा रही है। फिल्म लगातार तीन दिनों से ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। रविवार को तो इसके कलेक्शन में और भी इजाफा हुआ। इसके साथ ही अयान मुखर्जी की यह फिल्म सिर्फ घरेलू बॉक्स ऑफिस पर जल्द ही 150 करोड़ करोड़ का आंकड़ा छूने वाली हैं।

ब्रह्मास्त्र, रणबीर कपूर की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्म बन गई है, इससे पहले यह रिकॉर्ड संजू के नाम था। रणबीर कपूर की पिछली फिल्म ‘शमशेरा’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। इस बार आलिया भट्ट उनके लिए लकी साबित हुई हैं। फिल्म ने पहले दिन ही दुनियाभर में 75 करोड़ की कमाई की थी। दूसरे दिन तो यह आंकड़ा 160 करोड़ पहुंच गया था। ब्रह्मास्त्र का सोशल मीडिया पर लगातार बायकॉट चल रहा है बावजूद इसके फिल्म का जबरदस्त कलेक्शन इन बायकॉट गैंग्स को मुंह चिढ़ा रहा है।

घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ब्रह्मास्त्र ने पहले दिन 37 करोड़ की कमाई की थी। दूसरी दिन इस कलेक्शन में उछाल देखने को मिला और शनिवार को फिल्म ने 42 करोड़ रुपये अपनी झोली में बटोरे। तीसरे दिन तो ब्रह्मास्त्र ने बमफाड़ कमाई की और सभी भाषाओं में 46 करोड़ कमाकर टिकट खिड़की पर अपना जलवा कायम रखा। इसके साथ ही तीन दिनों में फिल्म ने 125 करोड़ का बिजनेस कर पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

देशभर में कुल 125 करोड़ की कमाई में दक्षिण भारतीय डब वर्जन के 16 करोड़ भी शामिल हैं। इसमें सबसे ज्यादा केलक्शन, करीब 13 करोड़ रपये, तेलुगु डब से आएं हैं। तो वहीं फिल्म की हिन्दी रिलीज ने बॉक्स ऑफिस पर शतक लगाया है। फिल्म ने 109 से 110 करोड़ के बीच का बिजनेस किया है। इसके साथ ही यह अब तक कि टॉप 5 फिल्मों के वीकेंड कलेक्शन में शामिल हो गई है।

ब्रेकिंग : NIA की दिल्ली समेत कई जगहों पर छापेमारी, ये है वजह

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नई दिल्ली : पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) सोमवार को देश के कई हिस्सों में छापेमारी कर रही है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि एनआईए की छापेमारी मूसेवाले की हत्या से जुड़े संदिग्ध आतंकी गिरोहों के संबंध में की जा रही है। एनआईए ने दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा और पंजाब के विभिन्न स्थानों पर तलाशी कर रही है।

मूसे वाला की हत्या के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने रविवार को अंतिम आरोपी शूटर दीपक मुंडी को उसके दो सहयोगियों के साथ पश्चिम बंगाल में भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया था। मूसे वाला की नृशंस हत्या के मामले में अब तक पंजाब पुलिस ने 23 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

चंडीगढ़ पुलिस ने कहा कि आरोपियों को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे नेपाल भागने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए अन्य दो लोगों की पहचान कपिल पंडित और राजिंदर उर्फ जोकर के रूप में हुई है। इस ऑपरेशन को पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ संयुक्त रूप से अंजाम दिया।
पंजाब पुलिस ने कहा, ‘जैसे ही पंजाब पुलिस ने मामले में छठे और आखिरी शूटर को गिरफ्तार किया, पूरी साजिश और तौर-तरीके के साथ-साथ इन गैंगस्टरों के लिंक-अप का भी खुलासा हुआ है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्य हत्यारे दीपक मुदी ने पंजाबी गायक पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं।