UKSSSC पेपर लीक कांड : अब ढीला क्यों पड़ने लगा मामला?

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अधीनस्त चयन सेवा आयोग पेपर लीक कांड के बाद सरकार एक्शन लिया। कई लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई। सरकार की तारीफ भी हुई और हो भी रही है। आलोचना और तारीफ भाजपा-कांग्रेस के लोग कर रहे हैं। लेकिन, इस मामले में तीसरा मोर्चा बेरोजगार हैं। वो बेरोजगार, जिनकी नौकरियों बेच दी गईं। वो बेरोजगार जिनके सपनों को नीलाम किया गया। वो बेरोजगार जिनकी जिंदगियों से खिलावाड़ किया गया। वो बेरोजगार जिनके परिजनों ने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी।

गरीबी में जीकर मेहनत की, लेकिन उनके हिस्से की नौकरी पैसे वाले खा गए। बेरोजगार बार-बार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। हर बार एक ही सवाल उठा रहे हैं कि सरकार किसीको बचाना चाह रही है? क्यों बचाना चाहती है? आखिर वो कौन लोग हैं, जिनको सरकार बचाना चाहती है?

बरोजगारों के नेता बॉबी पंवार के पेपर लीक कांड की शिकायत करने से लेकर अब तक के जितने भी इंटरव्यू और बयान हैं, वो हर बार एक बात को दोहरा रहे हैं कि सरकार किसी को क्यों बचाना चाह रही है? हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर वो कौन लोग हैं, जिनको बचाया जा रहा है? उनका कहना है कि कुछ बड़ी मछलियां अब भी इस मामले में बच गई हैं। आखिर उनको क्यों बचाया जा रहा है?

कांग्रेस इस मामले में शुरू में मुखर रही। लेकिन, कांग्रेस का मुखरपन धीमा पड़ गया है। हां, इसमें कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी की याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल जरूर किया है, लेकिन सड़क पर कांग्रेस ढीली हो गई है। इसका कारण भी किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्यों? विधानसभा बैकडोर भर्ती का मामला भी ढीला हो गया। इसका कारण शायद जांच के लिए जो एक माह का समय मांगा गया है, सभी उसका इंतजार कर रहे हैं।

अब तक सोशल मीडिया पर शोर मचा रहे लोगों को जोश भी ढीला पड़ गया है। ऐसा लगता है कि इस मामले में अब शायद सबकुछ हो गया है। हालांकि, जांच एजेंसियों अपने-अपने स्तर पर काम कर रही हैं। अच्छा काम भी किया है, लेकिन उन सवालों के भी जवाब मिलने चाहिए, जिनका उत्तर आम लोग और बेरोजगार मांग रहे हैं।