महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद लंबी चली खींचतान और राष्ट्रपति शासन जैसे पड़ावों से गुज़रने के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी। जिसमें नेतृत्व मिला शिवसेना के उद्धव ठाकरे को, मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी मैदान में पूरे तामझाम के साथ शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, उद्धव ठाकरे को लगा होगा कि, मुश्किलें ख़त्म हुईं, लेकिन गठबंधन की सरकार में आप अकेले कोई निर्णय नहीं ले सकते।
वायरल हुई 2000 के नोट बंद होने की ख़बर, 1000 के नए नोट पर भी…
सोशल मीडिया में आजकल बड़ी तेज़ी से एक मैसेज वायरल हो रहा है कि, जिसके पास भी 2 हज़ार रुपये के नोट हैं, वह उन्हें जल्द से जल्द बदल वालें, अन्यथा उनके यह नोट महज़ रद्दी का एक टुकड़ा बनकर रह जाएंगे। क्योंकि सरकार 31 दिसंबर से 2 हज़ार रुपये के नोट बंद कर रही है। और अगर आप भी इस वायरल मैसेज के शिकार बन कर घबरा रहे हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी जानकारी है कि, सरकार ऐसा कुछ भी करने नहीं जा रही है।
वायरल मैसेज में यह भी कहा जा रहा है कि, एक हज़ार रुपये का नया नोट भी बाज़ार में उतारा जाएगा। तो आपको बता दें कि, यह भी महज़ एक अफ़वाह है। क्योंकि प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा है। 2 हज़ार रुपये के नोट बंद होने और एक हज़ार रुपये का नोट बाज़ार में उतारे जाने की बात करते वायरल मैसेज में एक न्यूज़ वेबसाइट की लिंक भी दी गई है। लेकिन इस रिपोर्ट में भी कहीं, कुछ भी ऐसा नहीं दिखता है कि, जिससे ऐसा लगे कि सरकार 2 हज़ार रुपये का नोट बंद करने जा रही है।
अक्टूबर महीने की इस ख़बर में लिखा हुआ है कि, एसबीआई एटीएम से लोग 2 हज़ार रुपये के नोट नहीं ले सकेंगे। क्योंकि एसबीआई धीरे-धीरे बड़े नोटों को एटीएम मशीन में डालना बंद करेगा। इसकी जगह 500, 100, 200 रुपए के नोट बढ़ाए जाएंगे।
जानकार सूत्रों के हवाले से बता दें कि, आरबीआई के नोटिफिकेशन सेक्शन से ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है। 2 हज़ार का नोट एक लीगल टेंडर है, और इसके बंद होने को लेकर फैलाई जा रही सभी बातें महज़ अफ़वाह हैं।
क्या इस वजह से देवेन्द्र फडनवीस ने किया था अजीत पवार पर भरोसा?
शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के साथ हाथ मिलाकर, कुछ घंटों की सरकार बनाने वाली बीजेपी ने शायद सपने में भी सोचा नहीं होगा कि, चाचा-भतीजे की ये जोड़ी उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगी। और सत्ता का सपना दिखाकर आसमान पर बैठाने की वजह धड़ाम से औंधे मुंह ज़मीन पर पटक देगी। आज तक सभी के दिमाग में यह सवाल कुलबुलाता रहता है कि, आखिर वह कौन से कारण थे, जिनकी वजह से महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अजीत पवार पर भरोसा कर बैठे।
CAB के ख़िलाफ़ तेज़ हुआ आन्दोलन, लखनऊ में हुआ विरोध प्रदर्शन..
लखनऊ 9 दिसंबर: उत्तर प्रेदेश ग़ैर भाजप संगठनों का साझा आंदोलन “नागरिकता बचाओ आंदोलन” के बैनर पर गांधी प्रतिमा, हज़रतगंज, लखनऊ में नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (CAB) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया की। प्रो। रमेश दीक्षित ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल संरचना है। सीएबी संविधान के इस दर्शन का उल्लंघन करता है। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन करता है।
प्रो. अली खान महमूदाबाद ने कहा कि CAB न केवल अवैध है बल्कि यह अनैतिक है। सीएबी संविधान की हत्या और ‘भारत के विचार’ की हत्या है। श्री अब्दुल हफीज गांधी ने बोलते हुए कहा कि भारत में धर्म कभी भी नागरिकता का आधार नहीं रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सीएबी और एनआरसी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का हमारे देश और संविधान की आत्मा को बचाने के लिए विरोध किया जाना चाहिए।
डॉ. पवन राव अंबेडकर ने सीएबी पर बोलते हुए कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने कभी भी इस स्थिति की कल्पना नहीं की, जहां सरकार भारतीय संविधान के बहुलतावादी मूल्यों के खिलाफ काम करेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को सीएबी और एनआरसी का बहिष्कार करने के लिए खुलकर सामने आना चाहिए।
प्रदर्शन में बोलते हुए श्री अमीक जामई ने कहा कि सीएबी संविधान विरोधी है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को वर्तमान सरकार के संवैधानिक विरोधी कदमों का खुलकर विरोध करना चाहिए। श्री जामई ने कहा कि सीएबी और एनआरसी के बारे में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सरकार यह सब कर रही है। यह सरकार हमेशा सांप्रदायिक विभाजन पैदा करती है।
सदफ जफर, कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मैं अपना कोई भी दस्ताबेज़ प्रस्तुत नहीं करूंगी। सीएबी के खिलाफ एक सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान करूंगी क्योंकि यह सामाजिक और संवैधानिक दोनों मूल्यों को नष्ट करने के लिए है। ताहिरा हसन, महिला अधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि यह किस तरह का बिल है, जहां एक समुदाय अलग-थलग है। क्या यह संविधान पर हमला नहीं है? यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। हम सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जो संविधान के अनुसार चलता है। जिसके अनुसार देश का प्रत्येक नागरिक कानून के समक्ष समान है, इसलिए संविधान और मानवता की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ें सीएबी न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि अपरिपक्व भी है।
श्री ओवैस सुल्तान खान ने कहा कि NRC पूरी तरह से एक निरर्थक प्रयास है जैसा कि असम के मामले में साबित हुआ। जब यह सत्तारूढ़ पार्टी के अनुरूप नहीं था, तो उसने घोषणा की कि वे एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे। पूरे अभ्यास पर बहुत पैसा खर्च किया गया। लेकिन परिणाम शून्य है। श्री सुहैब अंसारी ने कहा कि इस बिल को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। यह देश सभी का है। विधेयक हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हमला है। समानता हमारा मौलिक अधिकार है। धर्म के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि सीएबी पूरी तरह से असंवैधानिक है। यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन है जो सभी को यह अधिकार देता है कि किसी को भी धर्म, आयु, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। डॉ. सबीहा फातमा ने कहा कि CAB का एकमात्र उद्देश्य भारत के मुसलमानों को दरकिनार करना प्रतीत होता है और मैं इसका कड़ा विरोध करती हूँ।
नाहीद अकील, सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा इस देश का दूसरा विभाजन नहीं होने देंगे। हम इस देश के संस्थापक हैं और हम एक बार फिर बलिदान देंगे। CAB और NRC स्वीकार्य नहीं है। अब्दुल हन्नान ने कहा कि CAB और NRC देश की अखंडता और धर्मनिरपेक्षता पर हमला है। हम इसे किसी सूरत में बर्दास्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ अपने आंदोलन को गति देते रहेंगे।
बीते कल जनसंगठनों की साझा बैठक मे जिसकी अध्यक्षता प्रो रूपरेखा वर्मा, प्रो रमेश दिक्षित व चचा अमीर हैदर ने तय किया यह आंदोलन “नागरिकता बचाओ आंदोलन” के नाम से चलेगा और यह तहरीक नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (CAB) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ यूपी भर जनता को तैयार करेगी, सदारत कर रहे व वर्किग ग्रुप ने अब्दुल हफीज गॉधी, अतहर हुसैन व अमीक जामेई को बतौर कंवीनर चुना गया!
उन्नाव रे’प पीड़ि’ता के परिवार से मिलने पहुँचे साक्षी महाराज, हुआ ऐसा विरोध कि..
उन्नाव रे’प पी’ड़िता के साथ हुई दिल दहला देने वाली घटना की वजह से पूरा देश ग़ुस्से से उबल रहा है। लोग दोषियों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ रे’प और हिंसा के मामलों के ख़िलाफ़ देश की जनता कार्यवाही की मांग कर रही है। लोगों का देश की क़ानून व्यवस्था से विश्वास उठ गया है। इस सबके बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार के दो मंत्रियों कमल रानी और स्वामी प्रसाद मौर्य को तत्काल उन्नाव के गांव जाने का निर्देश दिया था। और मुख्यमंत्री के आदेश का पालन करते हुए दोनों नेता उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज को साथ लेकर पहुंचे थे।
जहां उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के क़ानूनी तंत्र के लचर रवैए की वजह से हुए उन्नाव रे’प पीड़ि’ता को जलाकर मार दिए जाने की घटना की वजह से ग़ुस्से से भरे लोगों की भीड़ के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बता दें कि प्रदेश की विपक्षी पार्टी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने ‘मंत्री जी वापस जाओ’ के नारे लगाने शुरू कर दिए, जिसके बाद पुलिस ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को बल का प्रयोग करते हुए मारते हुए हटाया। वहां श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपना बयान देते हुए कहा है कि, पी’ड़ित परिवार जो भी जांच चाहेगा, वह उसे कराएंगे। जिन भी लोगों के नाम पीड़ि’ता ने अपने बयान में लिए हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही की जाएगी। किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा है कि यह राजनीति का विषय नहीं है। तो वहीं दूसरी ओर, साक्षी महाराज ने कहा है कि, वह अपनी पार्टी के साथ पी’ड़ित परिवार के समर्थन में हैं। साक्षी महाराज ने कहा कि वह संसद में भी इसके बारे में मुखर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, अपराधियों को गिरिफ़्तार किया जाएगा। किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा। साक्षी महाराज का कहना था कि, उन्नाव का नाम बदनाम हो गया है।
सिर्फ़ इतने वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनीं सना..
फ़िनलैंड में 34 साल की सना मारिन ने प्रधानमंत्री पद संभाल लिया है. वो देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री हैं. बता दें कि फिनलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री साउली निनीस्तो के पद से इस्तीफा देने के बाद से सना मारिन के प्रधानमंत्री बनने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, ऐसा नहीं है कि वह सीधे ही प्रधानमंत्री के पद पर क़ाबिज़ हो गई हैं। इससे पहले वह परिवहन और संचार मंत्री भी रही हैं।
CAB के ख़िलाफ़ जमा हुए नेता और कार्यकर्ता, बिल का विरोध करने के लिए होगी विपक्षी दलों से बात..
कैफ़ी आज़मी अकादमी, लखनऊ में नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 (CAB) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर एक परामर्श बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नागरिकता संशोधन विधेयक और NRC से संबंधित व्यापक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में बोलते हुए श्री अमीक जामई ने कहा कि सीएबी संविधान विरोधी है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को वर्तमान सरकार के संवैधानिक विरोधी कदमों का खुलकर विरोध करना चाहिए। श्री जामई ने कहा कि सीएबी और एनआरसी के बारे में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। लोगों को पता होना चाहिए कि ये दोनों प्रावधान भारत की छवि को धूमिल करेंगे। असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सरकार यह सब कर रही है। यह सरकार हमेशा सांप्रदायिक विभाजन पैदा करती है। हम चाहते हैं कि लोगों को शरण के साथ-साथ नागरिकता भी मिलनी चाहिए, अगर वे धार्मिक आधार पर अपने ही देशों में सताए जाते हैं, लेकिन धर्म ऐसे लाभों को तय करने का मापदंड नहीं हो सकता।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि हमें बिल का विरोध करने के लिए सभी विपक्षी दलों से बात करनी चाहिए। हम चाहते कि वे बिल का विरोध करें। राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी को लागू करना संभव नहीं है। हमें भारत के संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए।
प्रो. अली खान महमूदाबाद ने कहा कि CAB न केवल अवैध है बल्कि यह अनैतिक है। सीएबी संविधान की हत्या और ‘भारत के विचार’ की हत्या है। यह हिंदुओं के लिए भी चिंता का कारण होना चाहिए! उन देशों की स्थिति को देखना होगा जो धर्म के आधार पर बनाए गए थे। आज भाजपा मुसलमानों को बदनाम कर रही है कल वे हिंदुओं को बताएंगे कि वे सही तरह के हिंदू नहीं हैं।
प्रो.रूप रेखा वर्मा ने कहा कि इस बिल के माध्यम से हर किसी पर हमला हो रहा है। हम इस बिल के खिलाफ आखिर तक लड़ेंगे। उन्होंने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया। यह केवल मुसलमानों के बारे में नहीं है बल्कि हमारे संवैधानिक मूल्य खतरे में हैं।
श्री अब्दुल हफीज गांधी ने बैठक में बोलते हुए कहा कि भारत में धर्म कभी भी नागरिकता का आधार नहीं रहा है। सरकार का प्रयास नागरिकता को धर्म-केंद्रित बनाने का है। धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल संरचना है। इस देश की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं के उल्लंघन में कोई कानून बनाकर इस संरचना का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सीएबी और एनआरसी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का हमारे देश की आत्मा को बचाने के लिए विरोध किया जाना चाहिए।
प्रो। रमेश दीक्षित ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल संरचना है। सीएबी संविधान के इस दर्शन का उल्लंघन करता है। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन करता है। डॉ पवन राव अंबेडकर ने सीएबी पर बोलते हुए कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने कभी भी इस स्थिति की कल्पना नहीं की, जहां सरकार भारतीय संविधान के बहुलतावादी मूल्यों के खिलाफ काम करेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को सीएबी और एनआरसी का बहिष्कार करने के लिए खुलकर सामने आना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यह केवल मुसलमानों से संबंधित नहीं है बल्कि यह सवाल है कि हम अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। सभी नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कतार में नहीं लगाया जा सकता है। नागरिकता साबित करने का बोझ लोगों पर नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार को यह देखना चाहिए कि कौन अवैध प्रवासी है। लेकिन पूरे भारत को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए अपने दस्तावेजों के साथ कतार में खड़े होने के लिए पूछना अतार्किक है।
श्री ओवैस सुल्तान खान ने बोलते हुए कहा कि NRC पूरी तरह से एक निरर्थक प्रयास है जैसा कि असम के मामले में साबित हुआ। जब यह सत्तारूढ़ पार्टी के अनुरूप नहीं था, तो उसने घोषणा की कि वे एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे। पूरे अभ्यास पर बहुत पैसा खर्च किया गया। लेकिन परिणाम शून्य है। उन्होंने आगे कहा कि CAB को अधिनियमित करने का प्रयास भेदभाव को संस्थागत बनाने और नागरिकता से प्राप्त किसी भी अधिकार से सबसे बढे अल्पसंख्यक को निष्क्रिय और रहित बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि सीएबी का विचार संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सबके लिए यह देश है। यहां हर सताया हुए का स्वागत है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री खालिद चौधरी ने कहा कि वह सीएबी का विरोध करते हैं। यह संविधान की धर्मनिरपेक्षता की भावना के खिलाफ है। सीएबी और एनआरसी न केवल अल्पसंख्यकों को प्रभावित करेगा, बल्कि यह देश भर के दलितों, आदिवासियों, वन, झुग्गी-झोपड़ी, प्रवासी और महिलाओं जैसे सभी हाशिए के समुदायों को भी प्रभावित करेगा। सुश्री सुमाय्या राणा ने कहा कि वह बिल के पूरी तरह से खिलाफ हैं। इन फैसलों को वापस लेना चाहिए।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि सीएबी पूरी तरह से असंवैधानिक है। यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन है जो सभी को यह अधिकार देता है कि किसी को भी धर्म, आयु, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह विधेयक पूरी तरह से सांप्रदायिक है, जो सीधे सबसे बड़े अल्पसंख्यक को लक्षित करता है। धर्म से राष्ट्रवाद को परिभाषित नहीं करना चाहिए। यह दो-राष्ट्र सिद्धांत जैसा कुछ है, जो राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष लोकाचार का उल्लंघन करता है।
श्री सुहैब अंसारी ने कहा कि इस बिल को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। यह देश सभी का है। विधेयक हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हमला है। समानता हमारा मौलिक अधिकार है। धर्म के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है।
ट्विंकल खन्ना ने निर्मला सीतारमण पर कसा तंज़, इस फल से की प्याज़ की तुलना..
ट्विंकल खन्ना अक्षय कुमार की पत्नी होने के साथ-साथ ख़ुद भी एक अभिनेत्री निर्माता और लेखक हैं। अभिनेत्री, निर्माता और लेखक होने के साथ-साथ ट्विंकल खन्ना ब्लॉग भी लिखती हैं। और इस बार ट्विंकल खन्ना ने प्याज़ की बढ़ी हुई कीमतों पर एक बहुत ही चुटकुले अंदाज़ में एक ब्लॉग लिखा है। और प्याज़ की बहुत ही महंगे फल एवाकाडो से तुलना करते हुए अपने ब्लॉग में दो तस्वीरों को अपलोड किया है। जिसमें वह एक तस्वीर में एवोकाडो लिए हैं, और दूसरी तस्वीर में प्याज़ लिए हुए नज़र आ रही हैं।
बता दें कि ट्विंकल खन्ना ने अपने बेबाक और बिंदास अंदाज़ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तंज़ भी कसा है। अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आड़े हाथों लेते हुए फ्रांस की महारानी का उदाहरण देते हुए निर्मला सीतारमण को प्याज़ के महंगे होने का ताना दिया है। ट्विंकल खन्ना ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि, शुक्र है कि निर्मला सीतारमण ने फ्रांस की महारानी मैरी एंतोने की तरह यह नहीं कहा की, ‘अगर प्याज़ नहीं है, तो कांदा भजिया खाओ।’
इतना ही नहीं ट्विंकल खन्ना ने पांच रेसिपी भी शेयर की हैं। जिन्हें प्याज़ के बिना भी बनाया जा सकता है। और वह रेसिपीज़ हैं, पाव-भाजी, चिकन-करी, राज़मा, बैगन का भरता, और मटन-कीमा की रेसिपी। और यह रेसिपी अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने इंटरनेट पर गूगल सर्च करने के बाद अपने ब्लॉग पर डाली हैं। अभिनेत्री निर्माता और लेखक ट्विंकल खन्ना अपने बेबाक अंदाज़ की वजह से अक़्सर ही सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट से सुर्खियों में छाई रहती हैं।
बिहार: शिक्षकों को नीतीश कुमार ने दी बड़ी ख़ुशख़बरी…
बिहार की नीतीश सरकार बिहार के शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी लेकर आई है। और इस ख़ुशख़बरी के अनुसार, बिहार की नीतीश सरकार नियोजित शिक्षकों को सेवा शर्त की सुविधा देने की तैयारी में है। जिसके अनुसार हर नियोजित शिक्षक को अपने पूरे सेवाकाल में तीन बार पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा। वहीं दूसरी ओर, महिला शिक्षकों को केंद्र सरकार के अधीनस्थ कर्मचारियों की तरह 180 दिन के मातृत्व अवकाश की सुविधा का लाभ भी मिल सकेगा।
सूत्रों से प्राप्त ख़बरों की मानें तो, इस नियमावली के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए वित्त विभाग, शिक्षा विभाग, और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों की टीम कार्य में जुटी है। बिहार के शिक्षा विभाग से भी कुछ इसी तरह की ख़बरें आ रही हैं कि, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही बिहार की नीतीश सरकार नियोजित शिक्षकों के लिए सेवा शर्त नियमावली को लागू करने का पूरा प्रयास कर रही है।
कहा जा रहा है कि जैसे ही सेवा शर्त नियमावली का ड्राफ्ट तैयार हो जाएगा, उसके बाद उस पर विधि विभाग के साथ विचार-विमर्श करने के बाद, बिहार सरकार द्वारा उसे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। इस नियमावली में नियोजित शिक्षकों को सेवा निरंतरता का लाभ देने का प्रावधान किया जा रहा है। अगर प्राइमरी स्कूल से हाई स्कूल में कोई शिक्षक, शिक्षण कार्य में है तो भविष्य में दोनों सेवा अवधि को जोड़कर वरीयता और पदोन्नति का लाभ मिलेगा। इसी तरह से हाई स्कूल से सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों पर भी ये प्रावधान लागू होगा। इसके अलावा 10 साल की शिक्षा सेवा पूरी करने के बाद प्रमोशन का लाभ भी दिया जाना तय किया जाएगा। जबकि नियोजित शिक्षकों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही की ज़िम्मेदारी पंचायती राज संस्थाओं की होगी।
NRC और CAB के विरोध में लखनऊ से उठेगी आवाज़? कल अहम् मीटिंग!
देश में इस समय जिन कुछ मुद्दों की सबसे अधिक चर्चा है उनमें से एक है NRC और सिटिज़नशिप अमेंडमेंट बिल, 2019. असल में ये दोनों ही कहीं न कहीं एक दूसरे से जुड़े भी हैं. जहाँ केंद्र सरकार और भाजपा ये कह रही है कि इस बिल से उन लोगों को राहत मिलेगी जो पड़ोसी देश में अपने धर्म की वजह से उत्पीड़न का शिकार हैं. इस बिल की सबसे विवादित बात ये बतायी जा रही है कि इसमें धर्म के आधार पर नागरिकता का पैमाना बनाने की कोशिश है.

















