सीनियर वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अदालत की अवमानना (Contempt of Court) को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुना दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ सज़ा सुना दी गई है। कोर्ट द्वारा प्रशांत भूषण पर 1 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत द्वारा कहा गया कि, भूषण ने 15 सितंबर तक फाइन नहीं भरा, तो उन्हें 3 महीने की जेल होगी। साथ ही 3 साल के लिए प्रैक्टिस पर रोक लगा दी जाएगी। इस बीच खबर है कि सुप्रीम कोर्ट की सजा पर प्रशांत भूषण 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
अमित शाह को मिली कोरोना से राहत, एम्स में इलाज के बाद अब…
कोरोना संकट देश में लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी रफ्तार थमने का नाम ही नहीं ले रही। वहीं इस संकट के शिकार हुए भारत के गृह मंत्री अमित शाह की सेहत से जुड़ी खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि अमित शाह अब पूरी तरह से ठीक हैं और उनको अस्पताल से छुट्टी भी मिल चुकी है। मिली जानकारी के मुताबिक एम्स के डॉक्टरों ने इस बात की जानकारी दी है। एम्स की ओर से सोमवार को यह जानकारी दी गई है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
कोरोना संकट के बीच भी लोगों में खत्म हो रहा है इसका डर, खुलेआम कर रहे हैं…
कोरोना वायरस वैश्विक महामारी का संकट दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। वहीं अनलॉक 4 के दिशानिर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। लोगों की ज़िंदगी को सामान्य बनाने के लिए अनलॉक 4 में रियायतें भी दी गई हैं और कई चीजें खोल दी गई हैं। मगर इन सब तमाम कोशिशों के बाद भी कोरोना थमने का नाम नही ले रहा है। इस तरह लोगों के सामने दोतरफा चुनौती सामने है पहली खुद को इससे बचाना है और दूसरा लॉकडाउन (Lockdown) से मुकाबला करते हुए कामकाज चलाना है। इतना सब हो जाने के बाद लोगों के दिल में कोरोना संक्रमण को लेकर जितना डर पहले था, अब इतना डर नही रहा है पहले लोग संक्रमण के डर के कारण अपने घरों से बाहर भी नहीं निकलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ज़्यादातर लोगों ने मान लिया है कि उन्हें कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा। यही कारण है कि लोग पूरी सावधानी बरतते हुए नौकरी या कामकाज पर जा रहे हैं। इस सब के पीछे मनोविज्ञान है।
रेल मंत्री ने 9 राज्यों के मख्यमंत्रियों को लिखा पत्र, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट में…
रेल मंत्री (Railway Minister) पीयूष गोयल द्वारा नौ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर उनसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) परियोजना में अड़चनों को दूर करने का आग्रह किया गया और कहा कि, प्रधानमंत्री परियोजना पर करीबी नजर रख रहे हैं। पीयूष गोयल द्वारा 9 मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में भूमि संबंधी मुद्दों, ग्रामीणों की मांगों और राज्य के अधिकारियों द्वारा धीमी गति से काम करने का मामला उठाया गया, जिनसे 81,000 करोड़ रुपये की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना का काम प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्रियों से इस मामले में रेल मंत्री ने हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड के मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्रों में कहा गया कि, कैसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ‘लंबे समय से लंबित मुद्दा’ बना हुआ है जिसका अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
Unlock 4 के तहत दिल्ली मेट्रो में सफर के लिए नियम जारी, अब टोकन से भी नहीं कर सकेंगे…
कोरोनावायरस के कारण देश में लॉक डाउन लगा दिया गया था जिससे देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ती जा रही थी। जिसको मद्देनजर रखते हुए सरकार ने अनलॉक की प्रतिक्रिया शुरू की जिसके चलते धीरे धीर सभी जगहों पर दफ्तरों को खुलने की इजाज़त मिलती गई। बता दें कि अब 1 सितंबर से अनलॉक 4 की शुरुवात होने जा रही है। जिसके गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। जारी गाइडलाइन के मुताबिक सभी स्कूल, कॉलेज और सिनेमा हॉल 30 सितंबर तक रखे जाएंगे।
ध्यानचंद ने ठुकराया था हिटलर का यह प्रस्ताव, भारत को दिलाई नई पहचान
राष्ट्रीय खेल दिवस (National Sports Day) हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर मनाया जाता है। ध्यानचंद को भारतीय हॉकी का जनक माना जाता है। ध्यानचंद द्वारा कायम गए हॉकी के इतिहास को देख कर हर भारतीय गर्व महसूस करता है। मेजर ध्यानचंद का जन्म इलाहाबाद में 29 अगस्त, 1905 को हुआ था। मेजर ध्यानचंद द्वारा भारतीय हॉकी के इतिहास में कई ऐसे कारनामे किये हैं जिसकी गूंज आज तक सुनाई देती है। 1932 ओलंपिक के फाइनल में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया था। मेजर ध्यानचंद द्वारा उस ओलंपिक फाइनल में अकेले 8 गोल किये गए थे। लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम द्वारा कुल 35 गोल किए गए थे जिसमें 25 गोल मेजर ध्यानचंद द्वारा किए गए थे। मेजर ध्यानचंद ने अपने धमाकेदार परफॉर्मेंस से सबको दीवाना बनाया ही थी और उनमें देशभक्ति भी कूट कूट कर भारी हुई थी।
‘मन की बात’ में PM मोदी ने दिया खिलौना बाजार पर बयान, कहा खिलौना ऐसा हो जो…
रेडियो कार्यक्रम मन की बात (mann ki baat) के 68वें संस्करण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी खिलौने और कंप्यूटर गेम बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत अभियान में गेम्स हों, खिलौने का सेक्टर हो, सभी ने, बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। 100 वर्ष पहले, गांधी जी ने लिखा था कि –“असहयोग आन्दोलन, देशवासियों में आत्मसम्मान और अपनी शक्ति का बोध कराने का एक प्रयास है।” प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में कहा कि “खिलौना वो हो जिसकी मौजूदगी में बचपन खिले भी, खिलखिलाए भी हम ऐसे खिलौने बनाएं, जो पर्यावरण के भी अनुकूल हों।”
नंदकिशोर नौटियाल जी जैसे व्यक्तित्व कभी मरते नहीं बल्कि सदा अमर रहते हैं — किशन शर्मा
कुछ ऐसे लोग भी संसार में हुए हैं, जिनका जन्मदिन चार वर्ष में केवल एक बार ही मनाया जाता रहा है, परंतु पंडित नंदकिशोर नौटियाल जी एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनका जन्मदिन कम से कम मुझ जैसे कुछ लोग तो हर वर्ष दो बार मनाया करते थे; 15 जून को स्कूल के प्रमाण पत्र में लिखी जन्मतिथि के अनुसार और 21 सितम्बर को उनकी वास्तविक जन्मतिथि के अनुसार । 2019 की 21 सितम्बर ऐसी तिथि आई है, जब पंडित नंदकिशोर नौटियाल जी का जन्मदिवस उनकी शारीरिक अनुपस्थिति में प्रणाम करते हुए मनाना है ।
यह पहला अवसर है जब 21 सितम्बर को सुबह सवेरे फ़ोन पर उनको जन्मदिन की बधाई नहीं दे पाऊंगा । 30 अगस्त 2019 को देहरादून में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया । 89 वर्ष की आयु में भी युवाओं जैसा उत्साह रखते थे नौटियाल साहब । पहाडी व्यक्तित्व में बहुत जोश भरा रहता था । हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे । आंखों में स्नेह की चमक दिखाई देती रहती थी । मैं उन्हें, और वो मुझे नाम से तो जानते थे, परंतु हमारी पहली भेंट मुम्बई में मुख्य मंत्री निवास ”वर्षा” में हुई जब वे मुख्य मंत्री जी से मिलकर बाहर निकले और मुझे भीतर बुलाया गया एक लम्बे साक्षात्कार के लिये । वे मुख्य मंत्री कक्ष से बाहर आकर मेरी तरफ़ देख कर बोले, “अच्छा, तो तुम किशन शर्मा हो ।
तुम्हारी लोकप्रियता से तो मुझे लगा था कि मेरी जैसी उम्र के व्यक्ति होगे, परंतु तुम तो मेरे बेटे की उम्र के हो । मिलो बाद में मुझसे” । और मेरे सिर पर हाथ रखकर उन्होंने आशीर्वाद दिया । मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि बाद में मुझे उनके साथ ही महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी में सेवा करने का अवसर मिल जायेगा । सरकार ने मुझे अकादमी के सदस्य के रूप में नियुक्त कर दिया था । थोडे ही समय में वे मेरे कार्य, विचारों, और अनुशासनात्मक कार्य पद्धति से बहुत प्रभावित हो गए और मुझे अपने निकटतम व्यक्तियों की सूची में उन्होंने मुझे शामिल कर लिया । फ़िर अक्सर ही चर्चगेट स्टेशन के पास “टी सेंटर” में, या खार के “क्लब” में चाय-नाश्ते पर नौटियाल साहब, विश्वनाथ सचदेव जी, डॉ0 कन्हैया लाल नंदन जी, राजू भाई पटेल जी जैसे विख्यात व्यक्तित्वों से भेंट होने लगी ।
अकादमी के अगले सत्र में मुझे पुरस्कार समिति का प्रमुख बना दिया गया और अकादमी का कार्यालयीन सचिव भी बना दिया गया । अकादमी के कार्यालय में उस दौरान भीड लगी रहती थी । स्वयं मुख्य मंत्री जी भी आ जाया करते थे । माननीय विलास राव देशमुख साहब, माननीय सुशील कुमार शिंदे साहब और माननीय अशोक चव्हाण साहब मुख्य मंत्री होते हुए, अकादमी के अध्यक्ष भी रहे । मंत्रालय से विभाग के प्रधान सचिव महोदय भी समय समय पर आते रहते थे । उप सचिव तो अकादमी के कार्यालय में ही बैठा करती थीं । हर समय चहल पहल बनी रहती थी ।
साढे तीन-चार बजे के आसपास नौटियाल साहब मुझसे कहते थे, “अरे भाई, कुछ खिलाओ-पिलाओ”; और फ़िर सभी के लिये कुछ खाद्य पदार्थ और चाय पास के ही उपहार गृह से मंगवा लिये जाते थे । यह नौटियाल जी का ही असर था कि किसी भी मुख्य मंत्री महोदय ने कभी अकादमी के किसी प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं किया और केवल कुछ हज़ार रुपयों से बढकर पुरस्कारों की राशि लाखों रुपयों तक हो गई । नौटियाल जी छोटे पैमाने का कोई कार्य नहीं करते थे । इसलिये अकादमी के बडे बडे सम्मेलन महाराष्ट्र के अनेक नगरों में आयोजित करवा दिये । विश्व भाषा सम्मेलन का प्रस्ताव उस समय के सदस्य सचिव डॉ0 केशव फ़ालके जी ने रखा था, और नौटियाल जी ने उसे भव्य स्तर पर पुणे में आयोजित करवा दिया ।
विश्व हिंदी सम्मेलन के लिये अकादमी की ओर से नौटियाल जी के नेतृत्व में पांच सदस्यों का दल हर सम्मेलन में विश्व के उन उन राष्ट्रों में भेजा गया, जहां जहां सम्मेलन आयोजित हुए । मुझे हर बार कहा गया, परंतु मैं कभी ऐसे सम्मेलनों में नहीं गया । मेरा निवेदन रहता था कि मैं तो अपने मंच कार्यक्रमों के सिलसिले में विश्व भर में घूमता ही रहता हूं, इसलिये मेरे स्थान पर ऐसे हिंदी सेवियों-विद्वानों को भेजा जाये जो कभी विदेश नहीं गये, या बहुत अधिक बार विदेश नहीं गये । मैंने नौटियाल जी के मार्गदर्शन में पुरस्कार वितरण समारोह का स्वरूप ही बदल डाला ।
विशाल सभागृह में आयोजन, शाम पांच बजे स्वादिष्ट नाश्ता और गर्म चाय, शाम ठीक छ: बजे से रात नौ बजे तक पुरस्कार वितरण, और साढे नौ बजे स्वादिष्ट भोजन । पूरा सभागार लोगों से भरा रहता था । पुरस्कृत विद्वानों को वातानुकूलित स्वतंत्र कक्षों में सुविधापूर्वक ठहराना, आने-जाने का वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी का रेल किराया, महिला पुरस्कार विजेताओं को दो व्यक्तियों का किराया, अखिल भारतीय पुरस्कार विजेताओं को दो व्यक्तियों का हवाई यात्रा का किराया, सभी को टैक्सी आदि का तथा रास्ते का खर्च, पुरस्कार स्थल पर ही नकद प्रदान कर दिया जाता था । पुरस्कारों की राशि भी लाखों रुपये कर दी गई । देश भर से विद्वानों को इन पुरस्कारों के लिये चुना जाता था ।
अकादमी ने कभी कभी कुछ करोड रुपये भी सम्मेलनों पर खर्च कर दिये । नौटियाल जी के प्रभाव के कारण कभी भी किसी ने भी कोई आनाकानी नहीं की, विरोध नहीं किया, और अस्वीकृत भी नहीं किया । मैं, डॉ0 केशव फ़ालके जी, श्री अनुराग त्रिपाठी जी, तथा अन्य सभी मित्रवर्ग एकजुट होकर सेवा करते थे । जब नौटियाल जी ने “नूतन सवेरा” का प्रकाशन शुरू किया, तब मुझे हर अंक में एक लेख लिखने के लिये प्रोत्साहित किया । मैं अभी तक नूतन सवेरा के लिये लगातार लिख रहा हूं । मुझे नौटियाल जी ने पिता तुल्य स्नेह प्रदान किया । परिवार के हर समारोह में मुझे विशिष्ट कार्य सौंप दिये जाते थे । यहां तक कि जब राजीव नौटियाल को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ, तो नौटियाल जी के साथ मैं कहीं यात्रा कर रहा था ।
नौटियाल जी ने मुझसे ही पूछा कि उसका नाम क्या रखा जाये । मैंने “प्रवेश” नाम सुझाया और उन्होंने तुरंत वही नाम दे दिया अपने पौत्र को ।बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष चुने जाने पर नौटियाल जी ने मुझे वहां का सांस्कृतिक सचिव बना दिया और मैं उनके साथ अनेक बार चार धाम की महत्वपूर्ण यात्राएं कर आया । बडे बडे पत्रकारों और साहित्यकारों के अलावा बडे बडे नेताओं, अधिकारियों और उद्योगपतियों से भी अपने साथ मुझे मिलने का अवसर प्रदान करते रहे नौटियाल जी । द्वारका और ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती महाराज से मेरी बहुत अधिक निकटता नौटियाल जी के ही कारण हो सकी ।
नौटियाल जी के छोटे पुत्र भरत के विवाह समारोह में भी मुझे विशेष महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में शामिल किया गया । नौटियाल जी को मैंने कभी भी नाराज़ होते या अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते हुए नहीं देखा । वे स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कह देते थे और फ़िर मुस्कुरा देते थे । मैं जब भी किसी बात पर किसी व्यक्ति से क्रोधित हो जाता था तो वे मुझे समझाया करते थे और शांत कर दिया करते थे । बुद्धिनाथ मिश्र जी, प्रोफ़ेसर डी0 तंकप्पन नायर जी, सुशीला गुप्ता जी, डॉ0 बाल शौरी रैड्डी जी, डॉ0 राजम पिल्लै, डॉ0 महावीर अधिकारी जी जैसे व्यक्तित्वों से मेरी विशेष भेंट नौटियाल जी ने ही करवाई थी ।
डॉ0 धर्मवीर भारती जी, पुष्पा भारती जी, मनोहर श्याम जोशी जी, खुशवंत सिंह जी, डॉ0 कर्णसिंह जी और डॉ0 हरिकृष्ण देवसरे जी आदि से मेरी पहचान पहले से ही थी, क्योंकि मेरे लेख इनके द्वारा संपादित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे । मुझे एक बात का दुख हमेशा रहेगा । नौटियाल साहब ने अपने जीवन में अनेक व्यक्तित्वों को अनेक पुरस्कार प्रदान किये और करवाए, परंतु महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी सहित किसी भी संस्था या विभिन्न पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्थाओं और उनसे जुडे व्यक्तियों ने कभी नौटियाल साहब को सम्मानित करने के बारे में सोचा भी नहीं । अब इस बारे में सोचना भी ठीक नहीं लगता । नौटियाल साहब भले ही शारीरिक रूप से मुझसे बिछुड गये हैं, परंतु मेरे मन-मस्तिष्क में वे सदा विराजमान रहेंगे, क्योंकि ऐसे व्यक्तित्व कभी मरते नहीं, बल्कि सदा अमर रहते हैं।
किशन शर्मा – 20.9.2019
बीजेपी अध्यक्ष का बेटा निकला कोरोना पॉजिटिव, कई बड़े नेताओं का…
कोरोना वायरस संक्रमण तेज़ी से बढ़ता जा रहा है हालांकि अभी तक इस वायरस की कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो पाई है। लेकिन सभी वैज्ञानिकों द्वारा वैक्सीन बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत (Bansidhar Bhagat) के बेटे व बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विकास भगत कोरोना पॉजिटिव (Vikas Bhagat Corona Positive) पाए गुए हैं। कोरोना पॉज़िटिव पसे जाने के बाद विकास भगत को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में एडमिट कराया गया है। बताया जा रहा है कि देहरादून से लौटने के बाद विकास को बुखार की शिकायत थी। इसके बाद उनकी कोरोना जांच हुई, जिसमें विकास कोरोना पॉजिटिव पाए गए।
सुशांत सिंह सुसाइड केस में CBI ने लिया एक और फैसला, रिया का करवाएंगे…
सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामले और पेंचीदा होता जा रहा है। इतनी पूछताछ के बाद भी इस मामले में कोई भी ठोस सबूत सामने नहीं आया है। बता दें कि सीबीआई की लगातार पूछताछ जारी है। सीबीआई भी इस मामले की जांच में बहुत से लोगों से पूछताछ की और अब सुशांत की गरलफ्रेंड रिया चक्रवर्ती से पूछताछ जारी है। खबर के मुताबिक बताया जा रहा है कि इस मामले में सीबीआई अब पूरा सच का पता लगाने के लिए रिया चक्रवर्ती का पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवा सकती है।

















