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उत्तराखंड: सीपीए में इंडिया रीजन की प्रतिनिधि बनीं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, जानें क्या होती है CPA

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देहरादून: विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यकारी समिति में इंडिया रीज़न के प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यकारी समिति में सदस्य के तौर पर नामित होने पर लोकसभा अध्यक्ष और सीपीए इंडिया रीजन के अध्यक्ष ओम बिरला का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उनका नहीं बल्कि उत्तराखंड के साथ-साथ देश की प्रत्येक महिला का सम्मान है।

सीपीए कि अंतरराष्ट्रीय स्तर‌ की कार्यकारी समिति में इंडिया रीजन से उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष के अलावा दो अन्य क्षेत्रीय प्रतिनिधि सांसद अनुराग ठाकुर और आसाम के विधानसभा अध्यक्ष सीपीए कार्यकारी समिति में नामित हैं। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष को कार्यकारी समिति में 2025 तक 3 साल के लिए नामित किया गया है।

सीपीए की कार्यकारी समिति सीपीए के नियंत्रण और प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को कौन सा देश मेजबानी करेगा उसका निर्धारण, सीपीए की सम्पत्ति का प्रबंधन, सीपीए सचिवालय के कर्मचारियों का अधिष्ठान संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों को करती है।

कार्यकारी समिति में सीपीए के अध्यक्ष के नेतृत्व में लगभग 35 सदस्य शामिल हैं, जिसमें एसोसिएशन के अधिकारी, राष्ट्रमंडल महिला संसद सदस्यों (सीडब्ल्यूपी) के अध्यक्ष और अफ्रीका को छोड़कर प्रत्येक रीजन के तीन क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

उत्तराखंड: बच्चों के साथ अमानवीयता, लीसे से नहलाया, ऐसे हुआ खुलासा

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अल्मोड़ा: अल्मोड़ा के स्यालदे तहसील क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामले सामने आया है। यहां बच्चों को लीसे नहला दिया गया। जिससे बच्चों की आखों में सूजन आ गई है। गनीमत रही कि उनको कुछ और बड़ी समस्या नहीं हुई। मामले की जानकारी लगने के बाद अब स्यालदे एसडीएम ने मामले में जांद के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मामला अल्मोड़ा जिले के देघाट क्षेत्र का है। बच्चों के सिर पर जबरन लीसा डाला गया। मामले सामने आने के बाद हड़कं मच गया। एसडीएम शिप्रा जोशी ने मामले के जांच के आदेश दिए हैं। बाल आयोग के समक्ष भी मामला रखा जाएगा। घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष है।

अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे तहसील के ग्राम गुरना में पांच बच्चे जंगल की तरफ खेल रहे थे। ठेकेदारों ने चीड़ के पेड़ से लीसा निकालने के लिए गमले लगा रखे थे। इस दौरान बच्चों से कुछ गमले निकल गए। इस दौरान लीसा ठेकेदार की ओर से रखे गए एक नेपाली श्रमिक ने बच्चों को गमलों से खेलते हुए पकड़ लिया। श्रमिक और उसके साथी ने बच्चों को धमकाना शुरू किया।

बच्चों को श्रमिकों ने फटकार लगाई। इसके बाद पशुता दिखाते हुए बच्चों से उनके सिर पर जबरन लीसा डलवाया गया। सिर से चेहरे तक पहुंचे लीसे से उनकी आंखों में सूजन आ गई और जलन हो होने लगी। इस घटना का आरोपितों ने खुद वीडियो भी बनाया। बुधवार से वीडियो वायरल होना शुरू हुआ। मामले में दोनों पक्षों में पूर्व में समझौता हो गया था। इधर मासूमों के साथ इस तरह की अमानवीय घटना से लोगों में आक्रोश है।

बताया जा रहा है कि यह मामला कुछ दिन पुराना है। लेकिन, सोशल मीडिया में सार्वजनिक वायरल होने के बाद अब इसका संज्ञान प्रशासन ने लिया। घटना को अंजाम देने वाला आरोपित नेपाली श्रमिक उन्हीं पीड़ित बच्चों का पड़ोसी है। और दोनों पक्षों का समझौता हो गया है।

लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद से अब मामला फिर से गरमाने लगा है। इसके लिए प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम स्याल्दे शिप्रा जोशी ने बताया कि वायरल वीडियो से मामला सामने आया है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली जा रही है। राजस्व पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड ब्रेकिंग: मार्ग बंद होने से थमी बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा

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चमोली: भारी बारिश के बाद भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। भूस्खलन के कारण जहां रोड़ें बंद हो जाती हैं। वहीं, जान का खतरा भी बना रहा है। भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ हाईवे पागल नाना के पास बंद हो गया है। मलबा आने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। बद्रीनाथ धाम और हेमकुंछ की साहिब की यात्रा भी फिलहाल ठप हो गई है। मार्ग को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं

बदरीनाथ हाईवे गुरुवार सुबह पागल नाला में मलबा और बोल्डर आने से बंद हो गया है। जिसके चलते बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा रुकी हुई है। बदरीनाथ हाईवे के खुलने पर यात्रा शुरु होगी। बारिश से चमोली जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों की 40 सड़कें बंद हैं। ग्रामीणों को गांव तक जाने के लिए लंबी दूरी नापनी पड़ रही है। वहीं, सड़कें बंद होने से बीमार और स्कूली छात्र-छात्राओं को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य से बदरीनाथ हाईवे कई जगहों पर सुगम तो हो गया है लेकिन पागल नाला में हाईवे आज भी बदहाल है। यहां हल्की बारिश होने पर ही मलबा हाईवे पर आ रहा है जिससे यातायात बाधित हो रहा है। नाले में अभी भी बोल्डर अटके हैं जो कभी भी हाईवे को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं।

ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत एनएचआईडीसीएल ने पागल नाला में पुल निर्माण का प्रस्ताव रखा है लेकिन इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। पीपलकोटी से करीब नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित पागल नाला टंगणी गांव के पास है। 2016 से यहां भूस्खलन हो रहा है। तब हाईवे बीआरओ के पास था।

बीआरओ ने हाईवे सुचारु करने के लिए नाले के मलबे को टंगणी गांव के खेतों में डाल दिया। अब ये खेत भी भूस्खलन की चपेट में हैं। यहां हल्की बारिश होने पर भी पागल नाला में मलबा और बोल्डर आ रहे हैं। हाईवे बंद होने से सेना, तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी को लेकर पार्टी प्रवक्ता का बड़ा बयान, “हम सभी के लिए अपमान है…”

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शिक्षक बहाली मामले में कथित घोटाले में जांच के दौरान पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता और मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद अब पार्टी ने भी सख्त रूप अपना लिया है। दरअसल, इस जांच के दौरान मंत्री की करीबी अर्पिता घोष के घरों में 50 करोड़ रुपए बरामद हुए हैं। इसके साथ ही उनके दो घरों में 5 किलो से ज्यादा सोना भी बरामद हुआ है। जिसको देखते हुए पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने बयान जारी किया हैं। उनका कहना है कि ये पूरी तृणमूल कांग्रेस के लिए शर्म की बात है।

उन्होंने कहा कि “ये कार्रवाई चिंतन का विषय है। ऐसी घटनाएं पार्टी और पार्टी नेताओं के लिए अपमान और शर्मिंदगी लेकर आईं हैं। वे (पार्थ चटर्जी) ये कह रहे कि मंत्री पद से वो इस्तीफा नहीं देंगे। लेकिन वे पब्लिक डोमेन में ये क्यों नहीं कह रहे कि वो निर्दोष हैं। ऐसा करने से उन्हें क्या रोक रहा है। वे ममता कैबिनेट में कई पदों पर हैं, ऐसे में उन्हें बताना चाहिए कि वे एक प्रभावशाली व्यक्ति होने का टैग कैसे त्यागेंगे।”

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इसके साथ ही उन्होंने बताया कि “पार्थ वाणिज्य और उद्योग, संसदीय मामलों, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स, सार्वजनिक उद्यम और औद्योगिक पुनर्निर्माण मंत्री हैं। उन्हें प्रवर्तण निदेशालय ने कोलकाता कोर्ट में प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में वर्णित किया है।” गोरतलब हैं कि अभी तक पार्थ चटर्जी ने अपना जुर्म कबूल नहीं किया है और न ही अब तक खुद को निर्दोष साबित कर पाए हैं। वह अपनी गिरफ्तारी के बाद से लगातार एक ही बात बोल रहे हैं। उनका कहना है कि दोष सिद्ध होने तक पार्टी उन्हें मंत्री या अन्य किसी भी पद से नहीं हटाएगी।

CM केजरीवाल की ‘Z+ सुरक्षा’ पर उठाया कांग्रेस MLA ने सवाल, पंजाब सरकार से की ये मांग…

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जिस तरह से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लोगों में अपनी पकड़ मजबूत करते जा रहे हैं, वैसे वैसे उनके विरोधी भी बढ़ते जा रहे हैं। पंजाब में जीत हासिल करने के बाद से ही उनके विरोधियों ने इजाफा हो गया। बता दें कि विपक्षी दलों के नेताओं ने अब केजरीवाल पर हमला करना शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘Z plus’ सुरक्षा दी हुई है। जिसके खिलाफ कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने केजरीवाल को घेरने की कोशिशों में जुट गए हैं। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए पंजाब सरकार से केजरीवाल की जेड प्लस सुरक्षा को वापस लेने की मांग की है।

बुधवार को मीडिया को संबोधित करते वक्त उन्होंने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि “केजरीवाल को पंजाब पुलिस का जेड प्लस सुरक्षा कवर दिया गया है। पंजाब पुलिस के कमांडो पंजाब के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास दिल्ली के कपूरथला हाउस में तैनात थे।” उन्होंने बताया कि केजरीवाल को पहले से ही केंद्र द्वारा जेड प्लस सुरक्षा दी हुई है। उन्होंने इस दौरान एक लिस्ट भी पेश की जिसमें जेड प्लस सुरक्षा हासिल लोगों के नाम शामिल हैं। जिनमें से एक अरविंद केजरीवाल भी हैं।

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गोरतलब हैं कि उनके इस दावे पर पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने बयान दिया है। उनका कहना है कि “खैरा ने जिस दस्तावेज का हवाला दिया है, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी द्वारा दायर एक रिट याचिका का एक हिस्सा है। ये संलग्न दस्तावेज किसी भी तरह से पंजाब पुलिस के आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। कथित सूची को देखने से साफ जाहिर है कि यह एक टाइप किया हुआ दस्तावेज है, जिसमें कहीं भी कोई हस्ताक्षर, ऑफिशियल स्टैंप या आधिकारिक प्रमाणीकरण नहीं है।”

अब केवल तीन दिन बाकी, अब भी नहीं किया ये जरूरी काम, तो अटक सकते हैं पैसे

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सरकार कई तरह की योजनाएं चलाती है। लेकिन, उन योजनाओं का लाभ लेने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। ऐसी ही एक योजना पीएम किसान सम्मान निधि योजना है। किसान सम्मान निधि की 12वीं किस्त जारी होने वाली है। लेकिन, उससे पहले किसानों को केवाईसी अपडेट करनी चरूरी है।

6 हजार रुपये दिए जाते हैं

सालाना पात्र किसानों को 6 हजार रुपये दिए जाते हैं। इन पैसों को हर 4 महीने के अंतराल पर 2-2 हजार रुपये की तीन किस्तों में सीधे पात्र किसानों के बैंक खाते में भेजा जाता है। वहीं, अब 11वीं किस्त के बाद सभी किसानों को 12वीं किस्त के पैसों का इंतजार है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि पहले आप एक जरूरी काम कर लें क्योंकि अगर ये काम नहीं हुआ तो आपके पैसे अटक सकते हैं। तो चलिए इस काम के बारे में जानते हैं।

अटक सकते हैं पैसे 

अगर आपको भी किसान सम्मान निधि की 12वीं  क़िस्त के पैसे चाहिए तो, इसके लिए जरूरी है कि आप ई-केवाईसी जरूर करवा लें। इसकी आखिरी तारीख 31 जुलाई 2022 है जो अब बेहद पास है, और इसमें 3 दिन बचे हैं। अगर आप ई-केवाईसी आखिरी तारीख तक नहीं करवाते हैं, तो 12वीं किस्त के पैसे अटक सकते हैं।

ऐसे करें अपडेट 

अगर आप चाहते हैं कि आपको 12वीं किस्त के पैसे मिले, तो इसके लिए जरूरी है कि आप ई-केवाईसी करवा लें। आपको इसके लिए पीएम किसान पोर्टल के आधिकारिक लिंक https://pmkisan.gov.in/ पर जाना है।

फिर आपको ‘फॉर्मर कॉर्नर’ वाले ऑप्शन पर क्लिक करके ‘ई-केवाईसी’ के विकल्प को चुनना है। इसके बाद आपके सामने एक नया पेज ओपन होगा।

यहां पर अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करके ‘सर्च’ पर क्लिक करें। फिर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। अब ‘ओटीपी सब्मिट’ पर क्लिक करके ओटीपी को दर्ज करें। ऐसा करते ही आपकी ई-केवाईसी पूरी हो जाएगी।

उत्तराखंड: कैबिनेट के इस फैसले ने आसान कर दी राह, सिर्फ 15 मिनट में दून से मसूरी

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देहरादून: धामी कैबिनेट के एक फैसले ने देहरादून से मसूरी के बीच के सफर को सिर्फ 15 मिनट करने की राह आसान कर दी है। देहरादून-मसूरी रोप-वे को लेकर लंबे समय से प्रयास हो रहे थे। लेकिन, निर्माण में नियम अड़चन बन रहे थे। नियमानुसार अधिक ऊंचाई के कारण रोप-वे नहीं बन रहा था। अब उस अड़चन को सरकार ने दूर कर दिया है।

धामी सरकार ने कैबिनेट में मसूरी रोप-वे को लेकर आ रही समस्या को दूर कर दिया है। सारी अड़चनें दूर होने के बाद रोप-वे के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। कैबिनेट बैठक में निर्माण के बायलॉज में राहत देते हुए टर्मिनल को निर्धारित ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति दे दी गई।

देहरादून और मसूरी के बीच रोप-वे निर्माण को सरकार के स्तर से सभी अनुमति हो चुकी है। ऊंचाई और रोप-वे की लंबाई की वजह से इसमें ऊंचे-ऊंचे टर्मिनल बनाए जाने हैं। बायलॉज के हिसाब से इतनी ऊंचाई पर टर्मिनल का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसके चलते रोप-वे निर्माण में रुकावट आ रही थी।

अब रुकावट को दूर कर ली गया है। देहरादून-मसूरी के बीच बनने वाला रोप-वे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोप-वे होगा। रोप-वे के बनने से जहां पर्यटकों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

उत्तराखंड: टेलीग्राम से लीक किया था पेपर, क्या अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई?

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देहरादून: UKSSSC की परीक्षा में लगातार गड़बड़ी की शिकायतें होती रहती हैं। ये बात अलग है कि गड़बड़ियों की जांच के आदेश जरूर दिए गए। लेकिन, कभी जांच नहीं हो पाई। इस बार बेरोजगार संगठन की मांग पर जांच हुई तो पूरा सच सामने आ गया। मामले में STF अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। UP से गिरफ्तार कंपनी के कर्मचारी ने पूछताछ में खुलाया किया है।

UKSSSC की आउटसोर्स कंपनी RMS सॉल्यूशन के कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है। पेपर लीक मामले के बाद हालांकि आयोग ने कर्मचारियों को गोपनीय कामों से हटा दिया है, लेकिन कंपनी को नहीं हटाया गया। साथ ही आयोग के अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पकड़े गए कंपनी के शातिर कर्मचारी ने तीनों पालियों के एक-एक सेट को टेलीग्राम एप के माध्यम से अपने साथियों को भेज दिया। इस काम के लिए उसे 36 लाख रुपये मिले थे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसकी जांच STF को सौंपी गई। इस क्रम में रविवार को एसटीएफ ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को न्यायालय ने दो आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड भी मंजूर की थी, लेकिन इससे पहले ही एसटीएफ के रडार पर प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा कर्मचारी भी आ गया था।

इस बीच पता चला कि RMS सॉल्यूशन कंपनी में काम करने वाले अभिषेक वर्मा नाम के युवक ने कुछ दिनों में काफी पैसा खर्च किया है। गाड़ी खरीदी और गांव के मकान में भी अच्छा-खासा पैसा खर्च किया है। पूछताछ में उसने बताया कि अभिषेक वर्मा नौ लाख रुपये की कार खरीदी। साढ़े नौ लाख रुपये अपने मकान की मरम्मत में खर्च किए। बाकी बचा पैसा उसने अपने परिजनों के खातों में जमा करा दिया।

उत्तराखंड ब्रेकिंग : धामी कैबिनेट में 36 प्रस्तावों पर चर्चा, लिए ये महत्वपूर्ण फैसले

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देहरादून: धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न हो गई है बैठक में 36 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। चर्चा के बाद सरकार ने कुछ बड़े फैसले लिए। मुख्य सचिव एसएस संधू ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।

  • योजना आयोग की नियमावली पर संशोधन के प्रस्ताव पर मुहर।
  • लैब टैक्निशियन की नियुक्ति की नियमावली में संशोधन पर कैबिनेट की मंजूरी।
  • नैनीताल में लैंड यूज चेंज करने को मंजूरी।
  • मंत्रीमंडल में भी ई ऑफिस प्रणाली लागू करने पर कैबिनेट ने लगाई मुहर।
  • सेवा का अधिकार आयोग प्रतिवेदन को मंजूरी।
  • विधानसभा सत्र के सत्रावसान को कैबिनेट की मंजूरी।
  • 2019 में कलेक्ट्रेट कर्मियों के 6 दिन के हड़ताल के पैसों क़ो देने का फैसला।
  • एमएसएमई  में भू-खंडो के आवंटन की नियमावली में बदलाव, अब सर्किल रेट के हिसाब से दिया जाएगा।
  • कौशल विकास विभाग की नियमावली स्वीकृति की गई।
  • अनुदेशक नियमावली में संशोधन।
  • केदारनाथ में JSR निर्माण कार्य कर रही है, सोनप्रयाग में भी उसी कम्पनी को काम करने का फैसला लिया गया।
  • चीनी मिल गदरपुर की भूमि किसी क़ो नहीं दी जाएगी।
  • उत्तराखंड ट्रांसफरेबल डेवलेपमेंट राइट की नियमावली क़ो मिली मंजूरी।
  • एम्स किच्छा में खोला जाएगा, 100 एकड़ भूमि निशुल्क केंद्र सरकार क़ो दी जाएगी।
  • देहरादून रोप-वे क़ो लेकर नियमों क़ो शिथिलीकरण करने को मंजूरी दी गई।
  • दूरसंचार कंपनियों क़ो राहत दिया गया नॉमिनल चार्ज किए गए प्राधिकारण इलाके में 50 हज़ार
  • ग्रामीण इलाकों में 25 हज़ार।
  • इलेक्ट्रीनिक मीडिया की नियमावली क़ो 6 महीने आगे बढाया गया।

है ना गजब! 13 दिन, पौने 4 करोड़ कांवड़िए और 1907 कोरोना सैंपल…

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हहरिद्वार: हाल ही में सरकार ने एक एसओपी जारी की थी। उसमें लिखा गया था केंद्र सरकार के निर्देशों पर कोरोना के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए कोरोना जांच में तेजी लाई जाए। कोरोना के नियमों का पालन किया जाए। शहर से गांव तक कहीं भी कोरोना के किसी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। आदेश जारी करने वाले और नियम बनाने वाले खुद भी नियमों का पालन करते नजर नहीं आ रहे हैं।

अब आपको एक ऐसा सच बताते हैं, जो आपको चौंकाने वाला तो होगा ही। सरकार के दोवों और आदेशों की हकीकत से भी आपको रू-ब-रू कराएगा। इन दिनों हरिद्वार में कांवड़ यात्रा चल रही थी। हालांकि, यात्रा का अब समापन हो चुका है। कांवड़ यात्रा के दौरान ही सरकार ने एसओपी भी जारी की थी। लेकिन, सरकार जो आंकड़े खुद ही जारी कर रही है। वही, स्वास्थ्य मंत्री और उनके नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, स्वास्थ्य रोजाना कोरोना टेस्टिंग की रिपोर्ट जारी करता है। उसी रिपोर्ट में सरकार के दावों का पूरा सच है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो साफ हो जाता है कि 13 दिनों के भीतर हरिद्वार में जब पौने चार करोड़ कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का दावा सरकार ने ही किया और कोरोना जांच का आदेश भी सरकार ही था। सवाल यह है फिर ऐसी कौन से अड़चन आई, जो स्वास्थ्य विभाग कोरोना जांच नहीं करा पाया।

13 जुलाई तक जिले में कोराना जांच सैंपल का कुल आंकड़ा 2624745 था। ठीक 13 दिन बाद 26 जुलाई को यही आकंड़ा 2626652 पहुंची। अब 13 जुलाई के आंकड़े को 26 जुलाई वाले आंकड़े कम कर दें तो पिछले 13 दिनों में केवल ओर केवल 1907 सैंपल लिए गए। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार अपने आदेशों के पालन और कोरोना की रोकथाम को लेकर कितनी गंभीर है।