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उत्तराखंड: मिशन ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’, अधिकारियों को प्लान तैयार करने के निर्देश

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2025 तक ड्रग्स फ्री देवभूमि के लिए मिशन मोड में काम किया जाए। इसके लिये सभी संबंधित विभाग मिलकर काम करें। मुख्यमंत्री सचिवालय में नार्काे कॉर्डिनेशन की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम धामी ने अधिकारियों को भले ही निर्देश दे दिए हों, लेकिन क्या अधिकारी सीएम धामी के फैसले को धरातल पर उतार पाएंगे। उसकी सबसे बड़ा कारण यह है कि नशा तस्करों के तार मैदान से लेकर पहाड तक फैले हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड को नशामुक्त करने के लिए सभी को जिम्मेदारी और समन्वय से कार्य करना है। वर्ष 2025 तक ड्रग्स फ्री देवभूमि का लक्ष्य हासिल करना है। एक ओर जहां ड्रग्स सप्लायर्स पर कङा प्रहार करना है, वही दूसरी ओर बच्चों और युवाओं को ड्रग्स की चपेट में आने से बचाना है। ड्रग्स सप्लाई की चेन को तोडने के लिए पुलिस विभाग मुखबिर तंत्र को और मजबूत करे। ड्रग्स नेटवर्क को तोडने के लिए पुलिस, आबकारी व ड्रग्स कंट्रोलर मिलकर काम करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रग्स लेने वाले बच्चों और युवाओं की सही तरीके से काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कॉलेजो में एडमिशन के समय विशेष काउंसिल की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रग्स लेते हुए पकङे जाने वाले बच्चों के साथ अपराधियों की तरह बर्ताव न करके उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाए। कालेजों में पेरेन्ट्स टीचर्स मीटिंग नियमित रूप से की जाएं। समाज कल्याण व अन्य विभाग युवाओं की जागरूकता पर फोकस करें। इसके लिये सोशल मीडिया व अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में दो सरकारी नशामुक्ति केंद्र बनाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाए। सभी संबंधित विभागों को लेते हुए एंटी ड्रग्स टास्कफोर्स को एक्टिव किया जाए। निजी नशामुक्ति केंद्रों के लिए सख्त गाइडलाइन बनाकर उस पर फालोअप किया जाए। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूङी को ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिये। जिला स्तर पर डीएम भी लगातार मॉनिटरिंग करे।

उत्तराखंड में डेंगू का डंक, यहां मिला पहला केस

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देहरादून : उत्तराखंड में डेंगू ने दस्तक दे दी है। इस साल का पहला मामला राजधानी देहरादून में मिला है। एक प्रिवेट स्कूल के टीचर में डेंगू बुखार की पुष्टि हुई है। शिक्षक की हालत सामान्य बताई जा रही है। वह स्कूल परिसर में ही उपचार ले रहे हैं। कोरोना  के बढ़ते मामलों के साथ ही अब डेंगू बुखार की दस्तक ने दी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गयी है।

इंदिरानगर स्थित डे-बोर्डिंग एशियन स्कूल के 51 वर्षीय शिक्षक को कुछ दिन पहले बुखार आया था। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने एक निजी लैब से डेंगू की एलाइजा जांच कराई। जांच में डेंगू की पुष्टि होने पर स्कूल ने शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। जिले में डेंगू का मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और आशा वर्कर की टीम ने बृहस्पतिवार को स्कूल व आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

स्कूल में किसी और शिक्षक, स्टाफ या छात्र में बुखार की शिकायत नहीं मिली है। नगर निगम की टीम ने स्कूल और आसपास मच्छर, लार्वानाशक रसायनों का छिड़काव किया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने लार्वा सोर्स का भी पता किया। जिला वेक्टर जनित रोग अधिकारी सुभाष जोशी ने बताया कि स्कूल में मच्छर का लार्वा नहीं मिला है। मरीज की स्थिति सामान्य है और वह स्कूल परिसर में ही उपचार ले रहे हैं। स्कूल के विजिटिंग डॉक्टर उनकी जांच कर रहे हैं।

एक्सक्लूसिवः बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की दास्तान, सड़कें बनी लेबर रूम, कंधे बने एंबुलेंस…कौन है जिम्मेदार ?

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हरिद्वार: उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था हमेशा से ही सवालों के घेर में रही है। राज्य में पलायन का भी यह एक बहुत बड़ा कारण है। बावजूद, स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है। सीएम से मंत्री तक केवल हवाई दावे कर रहे हैं। महिलाएं बच्चों को सड़क पर जन्म देने के लिए मजबूर हैं। वैसे तो हमेशा ही लोग परेशानी में रहते हैं, लेकिन बरसात में समस्या और बढ़ जाती है। सरकार इस बात को जानती भी है। फिर कुछ करने के बजाया समीखा बैठकों में केवल आदेश और निर्देश ही जारी किए जा रहे हैं। उन आदेशों और निर्देशों को कहीं कोई असर नजर नहीं आ रहा है।

पिछले कुछ दिनों से कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिन घटनाओं ने बदहाल स्वास्थ्य व्यवसथाओं की पोल खोलकर रख दी। लेकिन, हैरानी की बात है कि स्वास्थ्य मंत्री हर बार यह दावा करते हैं कि स्वास्थ्य व्यवसथाएं चाकचौबंद हैं। देहरादून में दिए गए निर्देश शायद ना तो अधिकारियों के कानों तक पहुंच पा रहे हैं और ना ही कर्मचारियों तक पहुंच रहे हैं।

दूसरा यह है कि स्वासथ्य मंत्री के सख्त निर्देश केवल हवाई हैं। उनके निर्देशों को ना तो कर्मचारी गंभीरता से ले रहे हैं और ना अधिकारी ही कुछ अमल कर रहे हैं। ताजा मामला हरिद्वार का है। यहां महिला सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस एक घंटे बाद भी नहीं पहुंची। यह घटना देर रात की है, लेकिन इसका खुलासा आज सुबह हुआ।

देर रात एक गरीब गर्भवती महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के पिता ने अपनी कमीज उतारकर बच्चे को ओढ़ाया। मामला बिलकेश्वर रोड ब्लड बैंक के नजदीक का है। फोन करने के एक घंटे बाद एम्बुलेंस मौके पर आई। एंबुलेंस के पहुंने के बाद जच्‍चा-बच्‍चा को महिला राजकीय महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मिहिला का पति मजदूरी करता है। यह परिवार बिहार का रहने वाला है।

यह कोई पहली घटना नहीं है। राजधानी देहरादून से महज 15 किलोमीटर दूर भी एक महिला ने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया था। उससे टिहरी में भी इस तरही की घटना सामने आई थी। जबकि कुद दिनों पहले पिथौरागढ़ में परिजन हेलीकॉप्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन हेली दो घंटे देरी से पहुंचा। तब तक नवजात बच्चा दम तोड़ चुका था।

उससे पहले गैरसैंण में भी एक मामला सामने आया था। डॉक्रों ने गर्भवती को यह कहकर रेफर कर दिया था कि उसका बच्चा उल्टा है। पैर बाहर निकल चुके हैं और बच्चे की धड़कन भी बंद हो चुकी है। लेकिन, उसी महिला की एक फार्मसिस्ट ने सुरक्षित डिलीवरी कराई थी। हाल ही में एक और मामला रुद्रप्रयाग में सामने आया था। एक नाबालिग ने अस्पताल के बाथरूम में बच्चे को जन्द दिया था, जहां दोनों की मौत हो गई। उससे पहले उन्होंने डॉक्टर को दिखाया था। लेकिन, डॉक्टर को यह पता नहीं चला कि नाबालिग नौ माह की गर्भीवती है।

इन तमाम मामलों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि, हल्द्वानी में असपताल के गेट पर बच्चे के जन्म होने के मामले में डॉक्टर और नर्सिंग अधिकारी को जरूर सस्पेंड किया गया था। इतनी सारी समस्याओं के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री केवल आदेश और निर्देश देने में ही व्यस्त हैं। सीएम धामी ने भी इन मामलों में कोई संज्ञान नहीं लिया।

बीमार लोगों को कंधों पर अस्पताल पहुंचाने की तस्वीरें आए दिन सामने आती रहती हैं। बावजूद, मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दावा करते हैं कि सबकुछ ठीक चल रहा है। लोगों को पूरा इलाज मिल रहा है। सवाल उठता है कि आखिर ये कैसा इलाज, जिसमें लोगों को एंबुलेंस तक नहीं मिल पा रही है।

बीते दिनों देहरादून के सौंग घाटी के घुत्तू क्षेत्र में एक गर्भवती ने चिकित्सा और यातायात सुविधा के अभाव में रास्ते में ही बच्चे को जन्म दिया था। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। मामला बीती 25 जुलाई का है। सुबह ग्राम पंचायत श्हल्द्वाड़ीश् के गंधकपानी (सेरा) की एक गर्भवती संगीता देवी पत्नी दिनेश सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायपुर के लिए स्वजन के साथ निकली। कुछ किलोमीटर चलने के बाद ही गर्भवती को प्रसव पीड़ा हुई। इस दौरान महिला ने बच्चे को रास्ते में जन्म दे दिया।

बारिश पहाड़ों आफत बन कर टूटती है। ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हो जाते हैं। इससे ग्रामीणों को जूझना पड़ रहा है। बीते मंगलवार को चमोली जिले के दशोली ब्‍लॉक के दूरस्थ इराणी गांव की बीमार महिला बिमला देवी को ग्रामीणों ने डंडी-कंडी के सहारे पैदल चलकर जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया।

अपने ही घर से बाहर हुआ मकान मालिक, किराएदार ने किया…

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सही कहा जाता है आज कल भलाई का जमाना नहीं है। अगर कोई शख्स किसी दूसरे शख्स के साथ अच्छा करता है तो उसके साथ वह बुरा ही करता है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अपने घर को एक जरूरतमंद को किराए पर दिया, लेकिन उसने मकान मालिक को ही घर से बेघर कर दिया। ये मामला ग्रेटर नोएडा का है, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थित स्काई गार्डन सोसाइटी में इस शख्स का एक फ्लैट है, उसने ये मकान एक शख्स को किराए पर दिया और अपने काम से महाराष्ट्र में शिफ्ट हो गया। लेकिन जब वह वापस अपने घर लौटा तो उस महिला किराएदार ने उसको घर के अंदर ही नहीं घुसने दिया।

मिली जानकारी के अनुसार मकान मालिक महाराष्ट्र में जॉब करता था और अपने रिटायरमेंट के बाद वह नोएडा वापस आया। वापस आने पर जैसे ही वह अपने घर में गया, वहां किराए पर रह रही महिला किराएदार ने घर खाली करने से इंकार कर दिया और उसे घर में भी नहीं घुसने दिया। जिसके बाद उस शख्स के परिवार वालों ने सीढ़ियों पर ही अपना डेरा जमा लिया। जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी शेयर की गई थी।

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इस तस्वीर को शेयर करते हुए मकान मालिक सुनील कुमार की पत्नी राखी गुप्ता ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि “कितनी बदनसीबी है कि हमारे खुद के घर में ही किराएदार की वजह से हम घुस नहीं पा रहे।” मीडिया द्वारा जब इस मामले पर जोर दिया गया तो पुलिस ने एक्शन लेते हुए उस महिला किराएदार को घर से निकालकर, मकान मालिक को घर में एंट्री दिलवाई। हालांकि इस दौरान किराएदार ने मकान मालिक के खिलाफ कई आरोप भी लगाए। जिसकी जांच की जा रही है।

शराब से हुई मौतों को लेकर राहुल गांधी का सवाल, “कौन-सी सत्ताधारी ताकतें इनको..”

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गुजरात को देश भर में ड्राई स्टेट के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां शराब पूरी तरह से बैन है। अगर ऐसा है तो फिर अचानक से राज्य में 100 से भी अधिक लोग किस तरह जहरीली शराब का शिकार हो सकते हैं,? ये सवाल आज हर भारतीय की जुबान पर है। कई लोग और कई नेता आज गुजरात सरकार से इस सवाल का जवाब चाहते हैं। बता दें कि राज्य के कई छोटे छोटे गांवों को मिलाकर अब तक राज्य में कुल 42 लोगों की मौतें हो चुकी हैं और इन सभी लोगों की मौत का कारण एक ही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जहरीली शराब पीने से इन लोगों की मौत हुई है और करीब 100 से अधिक लोग अभी भी मौत और जिंदगी के बीच अस्पताल में लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मामले पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि “ड्राई स्टेट’ गुजरात में ज़हरीली शराब पीने से कई घर उजड़ गए। वहां लगातार अरबों की ड्रग्स भी बरामद हो रही है। ये बेहद चिंता की बात है, बापू और सरदार पटेल की धरती पर, ये कौन लोग हैं, जो धड़ल्ले से नशे का कारोबार कर रहे हैं? इन माफिया को कौन सी सत्ताधारी ताक़तें संरक्षण दे रही हैं?”

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सिर्फ राहुल ही नहीं बल्कि देश की जनता का ये ही सवाल है। हालांकि गुजरात पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार ये वही लोग जिन्होंने ये जहरीली शराब बनाई है और इसका कारोबार किया है। हालांकि अभी इसकी जांच जारी है। बताया जा रहा है कि इस शराब को ‘मिथाइल अल्कोहल’ और पानी की मदद से बनाया गया है, जो किसी जहर से कम नहीं है।

उत्तराखंड : इन कर्मचारियों का इंतजार खत्म, आखिर जारी हो गए आदेश

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देहरादून : सरकार ने राज्य के सार्वजनिक निकायों, निगमों और उपक्रमों में तैनात कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। इन कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की गयी है। सातवां, छठा और पांचवां वेतनमान ले रहे कार्मिकों व पेंशनर के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सभी को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता एक जनवरी, 2022 से दिया जाएगा। इसका लाभ राज्य के करीब 50 हजार से अधिक कर्मचारियों को मिलगा।

इस सम्बन्ध में आदेह्श भी ज्जारी कर दिया गया है। आदेश में प्रत्येक सार्वजनिक निगम और उपक्रमों को उनके बोर्ड से प्रस्ताव पारित कर व वित्तीय स्थिति का आकलन कर महंगाई भत्ता देने को कहा गया है। सातवां वेतनमान ले रहे कार्मिकों को तीन प्रतिशत की वृद्धि के बाद अब 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा।

छठा वेतनमान के अंतर्गत कार्मिकों व पेंशनरों के महंगाई भत्ते में सात प्रतिशत की वृद्धि की गई है। उन्हें अब 196 प्रतिशत के स्थान पर 203 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। इसी तरह पांचवां वेतनमान लेने वाले कार्मिकों और सेवानिवृत्त कार्मिकों के महंगाई भत्ते में 13 प्रतिशत की बढोतरी की गई है। उन्हें 368 प्रतिशत के स्थान पर अब 381 प्रतिशत प्रतिमाह महंगाई भत्ता मिलेगा।

औद्योगिक विकास सचिव डॉ.पंकज कुमार पांडेय ने उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक को भी निगम के पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर को पुनरीक्षित महंगाई भत्ता देने के आदेश दिए हैं। यह महंगाई भत्ता उन्हें एक जनवरी, 2022 से अथवा बाद की तिथि से देने के संबंध में निर्णय निगम बोर्ड लेगा।

उत्तराखंड: और कितने भर्ती घोटाले, होमगार्ड को भी नहीं छोड़ा….

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देहरादून: सरकारें आती हैं और जाती हैं। लेकिन, उत्तराखंड में भर्ती घोटालों की रफ्तार नहीं थमती है। एक के बाद एक कई भर्ती घोटाले उत्तराखंड में सामने आ चुके हैं। आखिर उत्तराखंड को भर्ती घोटालों का राज्य कौन बना रहा है और कौन बनाने वालों को छूट दे रहा है। दरअसल, अब तक जिन भर्ती घोटालों की जांच हुई है, उनके खुलासे और जांच के लिए या तो युवाओं को आंदोलन करना पड़ा या फिर हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा।

नैनीताल हाईकोर्ट ने भी युवाओं से जुड़ा मसलों को गंभीरता से सुना और उनके हक में सही फैसले भी दिए। हाईकोर्ट के दखल के बाद ही कई युवाओं को नौकरी मिल पाई है। अब एक और भर्ती घोटाले मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख दिखाते हुए सरकार को नोटिस जारी करने के साथ ही होमगार्ड भर्ती चयन प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगा दी।

होमगार्ड भर्ती में करीब डेढ़ करोड़ रुपये लेकर अयोग्य अभ्यर्थियों के चयन की शिकायत की गई है। कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार व अधिकारियों से पूछा है कि दोषियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? कोर्ट ने मामले के गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगे के साथ ही भर्ती प्रक्रिया की जारी सूची पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी।

मामले के अनुसार, हरिद्वार निवासी योगेंद्र सैनी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हरिद्वार में वर्ष 2017-18 में होमगर्ड भर्ती में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई अयोग्य अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर कंपनी कमांडेंट व जिला कमांडेंट ने होमगार्ड की भर्ती की। जबकि योग्य अभ्यर्थियों को इससे वंचित किया गया।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि, उसने एसएसपी, नागरिक सुरक्षा मुख्यालय देहरादून, उच्च अधिकारियों समेत राज्यपाल से भी इसकी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली। सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए दस्तावेजों में पुष्टि हुई है कि, तत्कालीन जिला कमांडेंट गौतम कुमार के खाते में एक लाख रुपये सुखदेव हरिद्वार, दो लाख रुपये नीरज चौधरी श्रीनगर गढ़वाल और चार लाख 31 हजार रुपये अन्य सात लोगों से प्राप्त हुए हैं।

इस भर्ती घोटाले में तत्कालीन कंपनी कमांडेंट राकेश कुमार का शामिल होना भी बताया गया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि होमगार्ड भर्ती घोटाले में शामिल सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। गुरुवार को सुनवाई में कोर्ट ने होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया की जारी सूची पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी। याचिकाकर्ता के अधिक्वता ने कोर्ट को बताया कि भर्ती प्रक्रिया नियमों को दरकिनार करके की गई है। ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जो फिजिकली अयोग्य थे।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई। मामले में कोर्ट ने सरकार व कमांडेंड जनरल होम गार्ड से पूछा है कि दोषियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई क्यों नही की गई। दो सप्ताह में जवाब दें। कम्पनी कमांडेंड होमगार्ड्स राकेश कुमार व जिला कमांडेंड होमगार्ड्स हरिद्वार को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तिथि तय की है।

सवाल यह है कि आखिर याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट की शरण में क्यों जाना पड़ा जब वो पहले ही सरकार के हर स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज करा चुका था। लेकिन, उसकी बात कहीं नहीं सुनी गई। हर जगह से निराशा मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने उसकी बात को गंभीरता से सुनते हुए भर्ती की चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

सुचिता और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का दावा करने वाली भाजपा की पोल इन भर्ती घोटालों ने खोल कर रख दी है। जिन भर्ती घोटालों का खुलासा हुआ है। सभी भर्तियां भाजपा सरकार के कार्यकाल की हैं। इससे भाजपा के दावों पर सवाल खड़े होते हैं। यह भी बड़ा सवाल है कि आखिरी ये घोटाले हो कैसे रहे हैं। इनके पीछे कौन-कौन लोग हैं। बगैर विभागीय अधिकारियों के किसी भी भर्ती में गड़बड़ी संभव नहीं है। बावजूद, आज तक एक भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

उत्तराखंडः इन 6 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी, करीब 200 सड़कें बंद

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देहरादून: राज्य में मानसून की बारिश लगातार आफत बनकर बरस रही है। भारी बारिश के चलते प्रदेशभर में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ से मैदान तक बारिश लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी कर रही है। मौसम विभाग ने एक बाद फिर से 6 जिलों के लिए बहुत भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में पहले से ही परेशान लोगों को कुछ और दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, भारी बारिश के कारण जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के कारण कई मार्ग बंद हैं।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान एक फिर सटीक सबित हुआ। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार देहरादून जिले के कुछ हिस्सों में बारिश शुरू हो गई है। मसूरी में सुबह से झमाझम बारिश हो रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, पौड़ी, नैनीताल समेत अन्य जिलों में भी कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि 31 जुुलाई तक मैदान से लेकर पहाड़ तक झमाझम बारिश की संभावना है। भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए संबंधित जिलों के अधिकारियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन के अधिकारियों को लोगों को सतर्क करने की भी सलाह दी गई है।

वहीं, भारी बारिश के कारण प्रदेशभर में सड़कें बंद हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में मलबा आने से अब भी 193 मार्ग बंद हैं। दूसरी ओर खटीमा में निर्माणाधीन मकान के क्षतिग्रस्त होने से मकान में दो लोग दब गए, जबकि अल्मोड़ा जिले के छांतरिया रेंज कार्यालय पर चीड़ का पेड़ गिरने से कार्यालय भवन का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया।

उत्तराखंड: ये कांवड़ियों का कूड़ा है…हर तरफ लगे हैं ढेर

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हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेला संपन्न होने के बाद जो स्थिति नजर आ रही है। उसे देखकर आपको भी धर्मनगरी की चिंता होने लगेगी। धर्मनगरी में धर्म का काम करने आए कांवड़िए तो लौट गए, लेकिन अपने साथ लाई गंदगी यहीं छोड़ गए। पीने के पानी की बोतलों से लेकर कपड़े ओर प्लास्टिक के ढेर हर कहीं नजर आ रहे हैं। अब नगर निगम इन गंदगी के ढेरों को साफ करने के लिए अभियान चलाने की तैयारी में हैं।

गंदगी को लेकर हरिद्वार के डीएम का कहना है कि जहां करोड़ों लोग एक साथ जमा होते हैं। वहां, इस तरह की गंदगी कोई नई बात नहीं है। उनका कहना है कि अगले एक-दो दिनों के भीतर गंदगी को साफ कर लिया जाएगा। गंदगी के ढेर गंगा घाटों से लेकर रोड़ीबेलवाला, पंतद्वीप और दूसरी जगहों पर भी लगे हैं। लोगों को दुर्गंध से बुरा हाल है। संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा पैदा हो गया है।

जिस तरह से पहले से ही इस बात का अंदाजा था कि इस बार कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंच सकते हैं। उस अनुपात में व्यवस्थाएं नहीं की गई। शौचालय तक पर्याप्त नहीं थे। जिसका नतीजा यह हुआ कि कांवड़िए खुले में ही शौच कर रहे थे। अब उनकी गंदगी लोगों के लिए संकट बन गई है।

हरिद्वार में आम स्नान पर्वों में करीब 500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हरिद्वार में इस वक्त कितना कूड़ा जमा होगा। लोग कैसे गंदगी से उठ रही दुर्गंध के बीच रह रहे होंगे। अधिकारी दावे जरूर कर रहे हैं, लेकिन जिस तरहर से गंदगी के ढेर जमा हैं। उससे लगता नहीं है कि अगले एक-दो दिनों भीतर सबकुछ साफ हो जाएगा।

उत्तराखंड : आसमान से बरसेगी “आग”, ये है वजह

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नैनीताल: इन दिनों बारिश का दौर चल रहा है। लेकिन, इस बीच एक खगोलीय घटना होने वाली है। यह खगोलीय घटना असमान में बहुत ही आकर्षक नजर आती है। यह खगोलीय घटना जुलाई महीने की समाप्ति पर होती है। आसमान से होने वाला उल्कापात गुरुवार से शुक्रवार की रात को अपने चरम पर होता है। यह बेहद चमकीला होगा।

लेकिन, यह खगोलीय घटना इस बात पर निर्भर करेगा कि बादलों की स्थिति कैसी है। उल्का बौछार तब होती है जब पृथ्वी धूमकेतु की ओर से छोड़े गए मलबे की एक धारा से होकर गुजरती है। जैसे ही मलबे की धारा में स्थित चट्टान और धूल के टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं, वे जल जाते हैं और आकाश में आग की धारियां जैसी बनाते हैं।

विभिन्न धूमकेतु सूर्य के करीब 14 लाख किलोमीटर के भीतर अपने निकटतम होने पर नजर आते हैं। डेल्टा एक्वेरिड उल्का बौछार के उत्पादन के लिए जिम्मेदार मूल धूमकेतु के बारे में अब भी अनिश्चितता है। अब तक माना जाता था वे यह उल्का बौछार मार्सडेन और क्रैच सनग्रेजिंग धूमकेतु के टूटने से उत्पन्न हुई है।

हालांकि अब वैज्ञानिक धूमकेतु 96 पी मैकोल्ज नामक एक अन्य सनग्रेजिंग धूमकेतु तो इस उल्का बौछार के संभावित स्रोत के रूप में मानने लगे हैं। 1986 में डोनाल्ड मैकहोल्ज के खोजे गए इस धूमकेतु का अनुमानित व्यास करीब 6.4 किलोमीटर है और सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करने में इसे पांच साल लगते हैं।

आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान, एरीज के वैज्ञानिकों ने बताया कि जैसे ही धूमकेतु सूर्य की ऊर्जा से गर्म होता है। धूमकेतु में बर्फ वाष्पीकृत हो जाती है। इससे चट्टान और धूल के छोटे-छोटे टुकड़े ढीले हो जाते हैं जो मलबे की धारा बनाते हैं और डेल्टा एक्वेरिड्स उल्का बौछार का उत्पादन करते हैं।