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बड़ी खबर : केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, ये 7 यूट्यूब चैनल को ब्लॉक

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने IT एक्ट 2021 के तहत 7 भारतीय और एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को ब्लॉक कर दिया है। इन यूट्यूब चैनल के व्यूज 114 करोड़ से भी अधिक थे ब्यूज़ और सब्सक्राइबर्स की संख्या 85 लाख 73 हजार से भी अधिक थी।

इनको किया गया ब्लॉक

  1. Loktantra Tv- 23,72,27,331 व्यूज, 12.90 लाख सब्सक्राइबर
  2. URV TV- 14,40,03291 व्यूज, 10.20 लाख सब्सक्राइबर
  3. AM Razvi- 1,22,78,194 व्यूज, 95,900 सब्सक्राइबर
  4. Gouravshall Pawan Mithilanchal- 15.99.32,594 व्यूज, 7 लाख सब्सक्राइबर
  5. Sep TOpSTH- 24,83,64,997 व्यूज, 33.50 लाख सब्सक्राइबर
  6. Sarkari Update- 70,11,723 व्यूज, 80,900 सब्सक्राइबर
  7. Sab Kuch Dexho- 32,86,03,227 व्यूज, 19.40 लाख सब्सक्राइबर
  8. News ki Dunva (पाकिस्तानी)-  61,69,439 व्यूज, 97,000 सब्सक्राइबर

इससे पहले पिछले महीने ही सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि सरकार ने वर्ष 2021-22 के दौरान फेक न्यूज फैलाने के आरोप में 94 यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगाया है।

इसके साथ ही 19 सोशल मीडिया अकाउंट और 747 यूआरएल को भी प्रतिबंधित किया है। राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए ठाकुर ने कहा कि ये कार्रवाई सूचना तकनीक एक्ट 2000 की धारा 69ए के तहत की गई है।

भाजपा से अलग होने के बाद शुरू हुई बगावत, जेडीयू की इस MLA ने लगाए मंत्री पर आरोप..

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बिहार में सियासी तापमान काफी बढ़ा हुआ है। राज्य से एक के बाद एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भाजपा से अलग होने के बाद जेडीयू ने राजद के साथ मिलकर सरकार बना तो ली, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नीतीश सरकार में मंत्रियों के पद की भी भर्ती की जा चुकी है। कैबिनेट विस्तार के बाद अब एक और भी खबर सामने आ रही है। जिससे नीतीश की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि जेडीयू में बगावत की आवाज बुलंद हो चुकी है।

जेडीयू नेता अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार बिहार की पूर्व मंत्री और जेडीयू की विधायक बीमा भारती ने राज्य की खाद्य मंत्री लेसी सिंह को मंत्री पद से हटाने की मांग की है और कहा है कि अगर नीतीश ऐसा नहीं करते हैं तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगी। इसके साथ ही उन्होंने लेसी सिंह पर वसूली और मर्डर जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। आपको बता दें कि दोनों के बीच काफी पुरानी लड़ाई है, जिसका हर्जाना अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भुगतना पढ़ेगा।

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बताते चलें कि लेसी सिंह के पति बूटन सिंह एक बाहुबली थे और लालू-राबड़ी राज में उनकी हत्या कर दी गई थी। वहीं, बीमा भारती के पति अवधेश मंडल भी बाहुबली हैं। दोनों के पतियों का नाम इलाके के बाहुबलियों में शुमार किया जाता रहा है और ये ही वजह है कि दोनों के बीच हमेशा से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। फिलहाल जेडीयू में बगावत के पहली आवाज बीमा भारती की है, लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि जल्दी ही कई और नेता भी अपनी आवाजें बुलंद करेंगे।

36 से 40 घंटे के सफर के बाद मुम्बई से द्वारिका पहुंचा करते थे लोग, भारतीय नागरिक को मुश्किल से मिलती थी एंट्री…

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आज कल देश में सफर करना कितना आसान हो गया है। लोग रोड के जरिए, रेल के जरिए कभी भी और कही भी आ जा सकते हैं। इसके लिए उनको कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन ऐसा समय ऐसा था जब भारतीय नागरिक को देश में ही सफर करने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। ये समय आजादी के पहले का है। बता दें कि भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रेल 1853 को मुम्बई और ठाणे के बीच चली थी। इस दौरान भारतीयों को तीसरी श्रेणी में ही यात्रा की अनुमति थी। इस बात कर जानकारी सूरत निवासी एक चिकित्सक ने दी है।

वह बताते हैं कि “मुम्बई से द्वारिका जाने के लिए 36 से 40 घंटे का सफर तय करना पड़ा था, लेकिन अब यह दूरी 17-18 घंटे पूरी होती है।” इसके अलावा जब मुम्बई निवासी डॉ. भानुचन्द्र एम. गोकाणी से मीडिया की बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि “मैं ट्रेन से समय-समय पर अपने गांव द्वारिका जाया करता था। लेकिन ट्रेन पर्याप्त नहीं थी और जो ट्रेन थीं उनकी गति काफी धीमी होती थी। आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 को चर्चगेट स्टेशन यात्रियों से खचाखच भरा हुआ था।”

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उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि “प्लेटफार्म पर पैर रखे बिना धक्के खाते हुए कब बाहर पहुंच गए पता ही नहीं चला। पहले ट्रेन में प्रथम, द्वितीय, इंटर और तृतीय श्रेणी होती थी। इसमें भारतीयों को तृतीय श्रेणी कोच में ही यात्रा की अनुमति होती थी। उच्च श्रेणी वाले कोचों में देश के लोगों को ही प्रवेश नहीं दिया जाता था। इसके अलावा स्टेशन के अच्छे वेटिंग हॉल या शहर के बड़े रेस्तरां में भी देश के लोगों को जाने नहीं दिया जाता था।”

मस्जिद में बम धमाका, 30 लोगों कि मौत, 40 की हालत गंभीर

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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की मस्जिद में हुए बम धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। जबकि इस विस्फोट में 40 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। रक्षा विभाग के सूत्र के हवाले से मीडिया ने बताया कि विस्फोट में मारे गए लोगों की सूची में प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान आमिर मोहम्मद कबाली शामिल हैं। इस हमले के बाद पहले सही संख्या नहीं बताई जा सकी थी।

दरअसल, तालिबान का दावा है कि उनका अफगानिस्तान पर पूर्ण नियंत्रण है लेकिन इस्लामिक स्टेट आतंकवादी समूह (आईएस) के आतंकवादी देश भर में नागरिकों और पुलिस पर हमला करना जारी रखे हुए है। अभी दो हफ्ते पहले ही काबुल में हुए दो घातक विस्फोटो में 10 मारे गए थे जबकि 40 अन्य घायल हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामिक स्टेट ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी ली है।

उत्तरी काबुल की मस्जिद में यह धमाका धमाका तब हुआ जब लोग शाम की इबादत के लिए इकट्ठा हुए थे। काबुल पुलिस के प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया था कि मस्जिद के अंदर धमाका हुआ था। धमाका बहुत ही जोरदार था। मस्जिद के आसपास के घरों के शीशे भी धमाके की वजह से टूट गए थे। तालिबान के खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। मरने वालों में मस्जिद के इमाम भी शामिल हैं।

वहीं काबुल के इमरजेंसी अस्पताल की तरफ से पहले बताया गया था कि कुछ लोग ही घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है। इसमें एक सात साल का बच्चा भी है। घटना के तुरंत बाद मौके पर सुरक्षाकर्मी और ऐंबुलेंस पहुंच गई थी। यह हमला तब हुआ है जब तालिबान अपना विजय सप्ताह बना रहा है। 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था।

बता दें कि इससे पहले पिछले सप्ताह एक मदरसे में मौलवी की भी हत्या कर दी गई थी। वह मौलवी आईएस को लेकर काफी आक्रामक भाषण दिया करता था। गुरुवार को मदरसे में आत्मघाती हमले में वह मारा गया। जिहादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

उत्तराखंड : इयरफोन लगाकर सुन रहा था गाना, तभी आ गई ट्रेन…और

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देहरादून : इयरफोन लगाकर रेलवे ट्रैक पर संगीत सुन रहा युवक ट्रेन की चपेट में आ गया। युवक की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना अजबपुर रेलवे फाटक के पास की है। इंस्पेक्टर नेहरू कॉलोनी मुकेश त्यागी ने बताया कि बुधवार को एक युवक के ट्रेन की चपेट में आने की सूचना मिली थी।

मौके पर जाकर देखा तो युवक वहां पर लहूलुहान हालत में पड़ा था। युवक की पहचान मजर (22) निवासी मच्छी बाजार, नजीबाबाद, जिला बिजनौर के रूप में हुई। पता चला कि वह अपने परिचित के साथ अजबपुर क्षेत्र में आया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ने इयरफोन लगाए हुए थे।

यही कारण रहा कि वह ट्रेन की आवाज को नहीं सुन पाया। मजर रायपुर क्षेत्र के भगत सिंह कॉलोनी में रहता था। यहां वह सेटरिंग का काम करता था। ऐसा हादसा आपके साथ भी हो सकता है। ऐसे में इस तहर की लापरवाही से सभी को बचना चाहिए।

दही-हांडी पर भी सियासत, BJP ने मार लिया मैदान, अब क्या करेगी शिव सेना?

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मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कल यानी 19 अगस्त को होने वाला दही-हांडी उत्सव भी सियासत में उलझता हुआ नजर आ रहा है। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के चुनाव क्षेत्र में जहां अब तक शिवसेना की दही-हांडी लगती थी, इस बार उसी जांबोरी मैदान पर भाजपा की दही-हांडी लगी दिखाई देगी।

वह पिछली महाविकास आघाड़ी सरकार में पर्यावरण मंत्री भी रह चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव उन्होंने शिवसेना का गढ़ समझे जाने वाले वरली क्षेत्र से लड़ा और जीता था। इस क्षेत्र में शिवसेना का वर्चस्व माना जाता है, इसीलिए आदित्य ठाकरे को शिवसेना ने यहां से चुनाव लड़वाया था। इस समय भी न सिर्फ आदित्य ठाकरे, बल्कि शिवसेना के कई और वरिष्ठ नेता भी वरली का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हाल ही में इस क्षेत्र के एक दिग्गज नेता सचिन अहीर को शिवसेना ने विधान परिषद में भेजा है। लेकिन दही-हांडी उत्सव स्थल को लेकर शिवसेना इस बार पिछड़ती दिखाई दे रही है। वरली के जिस जांबोरी मैदान पर अब तक शिवसेना की दही-हांडी लगती रही है, वह मैदान इस बार दही-हांडी के लिए भाजपा ने बुक कर लिया है। न सिर्फ मैदान बुक कर लिया है, बल्कि इस प्रतीकात्मक जीत को भाजपा भुनाने में भी पीछे नहीं है।

मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार ने एक बयान में कहा है कि जांबोरी मैदान तो झांकी है, अभी बहुत कुछ बाकी है। मुंबई में इसी साल मुंबई महानगरपालिका के चुनाव भी होने हैं। चुनावी वर्ष में राजनीतिक दल यहां के युवाओं को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर दही-हांडी, गणेशोत्सव व नवरात्र जैसे उत्सवों को प्रायोजित करती हैं और उन्हें आर्थिक मदद भी देती हैं। यही युवा उनके पक्ष में माहौल बनाने का काम करते हैं।

युवाओं को ही लुभाने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी दही-हांडी उत्सव में हिस्सा लेने वाले युवकों के लिए 10 लाख रुपये के बीमा की घोषणा कर दी है। ऊंची-ऊंची दही-हांडी फोड़ने के लिए हर साल युवाओं के एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर काफी ऊंचाई तक जाते हैं। इसमें कई बार उन्हें दुर्घटनाओं का भी शिकार होना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए ही मुख्यमंत्री ने इस बार बीमा की घोषणा की है।

उत्तराखंड: इस दिन मिलेगा “टीचर्स ऑफ द ईयर अवार्ड”, आप भी कराएं आवेदन

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देहरादून: उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, दिव्य हिमगिरि और सोसाइटी फ़ॉर रिसर्च एंड डेवेलपमेंट इन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एग्रीकल्चर की ओर से प्रत्येक साल शिक्षा में बेहतरीन कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। इस साल भी सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगां

यह सम्मान समारोह 5 सितंबर, 2022 को उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित करने का फैसला लिया गया है। अवॉर्ड के लिए नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इस अवॉर्ड के लिए टीचर ऑफ द ईयर-2022, प्रिंसिपल ऑफ द ईयर-2022 (प्रिंसिपल/डीन/डायरेक्टर के लिए) और एक्सीलेंस इन रिसर्च ऑफ द ईयर-2022 श्रेणियों में नामांकन किया जा सकता है। नामांकन की अंतिम तिथि 20 अगस्त है।

  • नामांकन का लिंक: http://bit.ly/teacher-nomination-2022.
  • नामांकन की अंतिम तिथि: 20 अगस्त, 2022.
  • चयनित अध्यापकों की अंतिम सूची का प्रकाशन: 31 अगस्त, 2022.
  • अवॉर्ड सम्मारोह: 05 सितंबर, 2022.
  • अधिक जानकारी के लिए संपर्क सूत्र: 8755196688/99271 00304/9410353164.

 

उत्तराखंड: हाकम के आकाओं का नंबर कब आएगा सरकार?

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देहरादून: हाकम सिंह रावत। भाजपा का जिला पंचायत सदस्य। जब से उत्तराखंड अधीनस्त चयन सेवा आयोग में पेपर लीक का मामला सामने आया है, तब से ही यह नाम चर्चाओं में है। पेपर लीक कांड का मुख्य सरगना इसे ही माना जा रहा है। हालांकि, इस मामले में जांच अभी चल रही है। हाकम सिंह को एसटीएफ सलाखों के पीछे से रिमांउ पर बाहर लगाकर फिर से पूछताछ की तैयारी में है। पूछताछ के बाद कुछ बड़े खुलासे हो सकते हैं। इन खुलासों में क्या निकलकर आता है, उसका इंतारी सभी को है।

लेकिन, एक बात साफ है कि अब तक जो बातें चर्चाओं में हैं, उनके अनुसार हाकम केवल नेताओं का चेहता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के कई आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारियों का भी खास रहा है। उनमें उत्तराखंड पुलिस के मुखिया भी शामिल हैं। सोशल मीडिया में उनके तमाम फोटो वायरल हैं।

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अब सवाल यह है कि क्या भाजपा और सरकार इस मामले में उतनी ही सख्ती बरत पाएंगे, जितनी अब तक बरती गई है। सरकार की ढिलाई का नमूना यह है कि इस मामले जिन दो अपर निजी सचीवों को पिछले दिनों गिरफ्तार किया गया था। उनको अब तक स्सपेंड तक नहीं किया गया है। जबकि, बाद में अरेस्ट हुए शिक्षक को शिक्षा विभाग ने सस्पेंड कर दिया है।

हाकम के भी कई चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। एक डीएम के घर में वर्तन मांजने वाले हाकम की विदेशों तक संपत्ति बताई जा रही है। खुद को किंग ऑफ जखोल कहने वाले हाकम सिंह का एक आलिशान रिसॉर्ट है, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ बताई जा रही है। जबकि, एक और कंकरीट का होटल भी उसने वहां खड़ा किया है।

सवाल यह कि उसने पहले कितनी भर्तियों में गड़बड़ी की? कितने लोग गलत तरीके से नौकरी लग चुके हैं? कितनी संपत्ति हाकम ने गलत कामों के जरिए बनाई? इन तमात बातों को लेकर सरकार और एसटीएफ क्या प्लान कर रही है? क्या पिछले मामलों की भी जांच होगी या नहीं? अदरअसल, यह सवाल इसलिए भी है क्योंकि फिलहाल एसटीएफ की जांच मौजूदा भर्ती पर ही केंद्रित है।

भाजपा ने संसदीय बोर्ड में किया बड़ा बदलाव, नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान बाहर

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नई दिल्ली: भाजपा ने पार्टी ने अपने संसदीय बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान को इससे बाहर कर दिया है। इसके अलावा कुछ और नामों को इससे हटाया गया है। भाजपा संसदीय बोर्ड में अब किसी भी मुख्यमंत्री को नहीं रखा गया है।

संसदीय बोर्ड में कुल 11 सदस्यों को रखा गया है, इनमें पार्टी अध्यक्ष के नाते जेपी नड्डा शामिल हैं और वह इसके अध्यक्ष भी हैं। उनके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया भी इसके सदस्य हैं। वहीं पार्टी के संगठन महामंत्री बीएल. संतोष को भी इसका सदस्य बनाया गया है।

भाजपा की ओर से नई चुनाव समिति का भी गठन किया गया है। इस समिति में कुल 15 सदस्यों को शामिल किया गया है और पार्टी अध्यक्ष होने के नाते जेपी नड्डा ही इसके मुखिया हैं। इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, बीएस येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, ओम माथुर, बीएल संतोष और वनथी श्रीनिवास को इसमें शामिल किया गया है।

भाजपा की ओर से किए गए इस बदलाव में सबसे चौंकाने वाली बात नितिन गडकरी को संसदीय बोर्ड से बाहर किया जाना है। वह मोदी सरकार के दोनों कार्यकालों में बेहद चर्चित मंत्री रहे हैं। उनके सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के कामकाज की काफी चर्चा रही है।

इसके अलावा पार्टी के पूर्व अध्यक्षों को संसदीय बोर्ड में बनाए रखने की परंपरा रही है, जो लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को बाहर किए जाने के बाद ही खत्म हो गई थी। लेकिन, नितिन गडकरी जैसे सक्रिय और मजबूत नेता को यहां से हटाया जाना चौंकाने वाला है। हालांकि भाजपा ने बैलेंस बनाते हुए नितिन गडकरी की जगह पर देवेंद्र फडणवीस को प्रमोशन दिया है और उन्हें केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल किया है।

उत्तराखंड : 38 साल बाद घर पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी

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हल्द्वानी :38 साल पहले सियाचिन में शहीद हुए लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर आज उनके हल्द्वानी स्थिति आवास में पहुंच गया है। उनके पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही 38 साल से सूखी आंखों में आंसुओं का सैलाब आ गया। इतने सालों से सीने में दबाया दर्द छलक पड़ा। वहां मौजूद लोगों की आखें भी नम हो गई।

सियाचिन में “ऑपरेशन मेघदूत” के दौरान आए एवलॉन्च में शहीद हुए लांस नायक चंद्रशेखर हर्बाेला का पार्थिव शरीर उनके घर पर पहुंच गया है। पार्थिव शरीर के घर पर पहुंचते ही पूरा माहौल गमगीन सा हो गया, शहीद चंद्रशेखर हर्बाेला की पत्नी शांति देवी अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर फफक-फफक कर रो पड़ी।

29 मई 1984 को सियाचिन में “ऑपरेशन मेघदूत” के दौरान लांसनायक चंद्रशेखर हरबोला एवलॉंच में शहीद हो गए थे और 38 साल बाद सेना ने उनके पार्थिव शरीर को खोज निकाला है और आज उनके आवास पर सेना जब पार्थिव शरीर लेकर पहुंची। तो वहां मौजूद हजारों की संख्या में लोगों ने शहीद चंद्रशेखर तेरा यह बलिदान याद रखेगा हिंदुस्तान के नाम से गुंजायमान हुआ।