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BJP सांसद मनोज तिवारी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- लोगों को साफ हवा में सांस लेने दें

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नई दिल्ली : राजधानी में दिल्ली सरकार के दीपावली पर पटाखों पर बैन का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। BJP सांसद मनोज तिवारी ने दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में त्योहारी सीजन के दौरान पटाखों की बिक्री और खरीद और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली भाजपा सांसद मनोज तिवारी की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। तत्काल सुनवाई के अनुरोध को ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने दें।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी में कहा कि वायु प्रदूषण के मद्देनजर दिल्ली में पटाखों के फोड़ने पर प्रतिबंध 1 जनवरी तक जारी रहेगा। राष्ट्रीय राजधानी में 1 जनवरी 2023 तक पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के दिल्ली सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से दिल्ली हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया।

माफिया बोला : CM योगी आदित्यनाथ बहादुर और ईमानदार मुख्यमंत्री

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प्रयागराज में इलाहाबाद पश्चिम से बहुजन समाज पार्टी के विधायक रहे राजू पाल की हत्या के मामले में पूर्व सांसद माफिया अतीक अहमद पर गुरुवार को आरोप तय होंगे। हत्या तथा अन्य मामलों में गुजरात के अहमदाबाद के साबरमती जेल में बंद अतीक अहमद को आज लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट मे पेश किया गया है।

हाई कोर्ट लखनऊ बेंच के पुराने प्रांगण में एमपी/एमएलए कोर्ट में पेशी पर जाते प्रिजन वैन में सवार बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद से पूछा गया कि इस केस के बारे में आपको क्या कहना है तो उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बहादुर और ईमानदार मुख्यमंत्री हैं। वह काफी मेहनत भी कर रहे हैं।

लखनऊ मेें कोर्ट पर पेशी पर जाते समय अतीक अहमद ने बड़ा बयान दिया है। अतीक ने कहा कि सीएम योगी बहादुर और ईमानदार मुख्यमंत्री हैं। अतीक अहमद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। गैंगस्टर अतीक अहमद प्रयागराज में बसपा विधायक रहे राजू पाल की हत्या का मुख्य आरोपित है। वह इस समय साबरमती जेल में सजा काट रहा है। अतीक अहमद पर आज इस केस में आरोप तय होंगे।

अतीक को गुजरात की साबरमती जेल से बुधवार को कड़ी सुरक्षा में लखनऊ लाया गया। लखनऊ में उसे जिला कारागार में रखा गया। इसके बाद आज दोपहर में उसे पेशी पर सीबीआइ कोर्ट लाया गया। पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में अतीक अहमद का भाई अशरफ भी आरोपित है।

उत्तराखंड : राज्य कर्मियों को दीपावली गिफ्ट, बोनस और DA पर CM धामी की मुहर

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य कर्मचारियों को दीवाली को तोहफा दे दिया है। सीएम धामी ने राज्य कर्मियों को दीवाली बोनस की सौगात दी है। सीएम ने दीवाली बोनस और डीए पर मुहर लगा दी है।

प्रदेश के लगभग सवा लाख अधिकारी व कर्मियों को दीवाली बोनस मिलेगा। शासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बीते दिवस कैबिनेट ने बोनस व महंगाई भत्ते के लिए सीएम धामी को अधिकृत किया था। सीएम ने गुरुवार को राज्य कर्मियों के लिए दीवाली बोनस पर मुहर लगा दी।

मुंबई के जाने-माने बिल्डर ने की आत्महत्या, 23वीं मंजिल से लगाई छलांग

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के एक बड़े बिल्डर पारस पोरवाल ने आत्महत्या करके जान दे दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिल्डर ने इमारत की 23वीं मंजिल से छलांग लगाई थी जिसके बाद मौके पर उसकी मौत हो गई । वह दक्षिण मुंबई के भायखला में रहते थे।

जांच अधिकारी ने बताया कि बिल्डर पारस पोरवाल द्वारा उठाए गए अतिवादी कदम के कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। अधिकारी के अनुसार यह घटना मध्य मुंबई के कालाचौकी इलाके में सुबह हुई जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।

वंशवाद की राजनीति : BJP का यू-टर्न, हिमचाल में मंत्री और नेताओं के बेटों को टिकट

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BJP ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। जिस तरीके BJP ने टिकट बंटवारा किया है, उससे यह प्रतीत होता है कि उसने वंशवाद की राजनीति पर यू-टर्न ले लिया है। आपको बता दें कि BJP ने मौजूदा कैबिनेट मंत्री और दो पूर्व नेताओं के बेटों को टिकट दिया है।

BJP ने जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के बेटे रजत ठाकुर को धर्मपुर से, पूर्व मंत्री नरिंदर बरागटा के बेटे चेतन ब्रगटा को जुब्बल-कोटखाई से और भोरंज से पूर्व मंत्री आईडी धीमान के बेटे अनिल धीमान को मैदान में उतारा है। BJP के मंडी सदर उम्मीदवार अनिल शर्मा पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुख राम के बेटे हैं। भाजपा ने 62 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है।
ऐसी भी संभावना है कि बीजेपी कुल्लू से पार्टी के पूर्व अध्यक्ष महेश्वर सिंह के बेटे हितेश्वर सिंह को मैदान में उतार सकती है। भाजपा ने 2021 के विधानसभा उपचुनावों के लिए जुब्बल-कोटखाई से चेतन को टिकट देने से इनकार कर दिया था। उनके पिता नरिंदर ब्रगटा के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।  वंशवाद की राजनीति के डर से BJP ने उन्हें टिकट नहीं दिया था।

एकनाथ शिंदे ने उड़ाई उद्धव ठाकरे की नींद, शरद पवार के साथ किया…

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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिरने के बाद से लगातार शिंदे और ठाकरे एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। इस बीच दोनों गुटों के नेता भी एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। लेकिन इस दौरान एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को एक बड़ा झटका दिया है। हाल ही में एकनाथ शिंदे ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे ठाकरे गुट की आंखे फट गई हैं। गोरतलब हैं कि हाल ही में एकनाथ शिंदे को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के साथ देखा गया। जिसको लेकर शिंदे ने एक बयान भी दिया।

दरअसल, जब शिंदे ने बयान दिया तब उनके साथ मंच पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी मौजूद थे और साथ ही उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और आशीष शेलार भी मौजूद थे। शिंदे ने मंच पर खड़े होकर एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने इन तीनों दिग्गज नेताओं के साथ होने का जिक्र किया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सबको साथ देख किसी की रातों की नींद उड़ गई होगी। हालांकि इस बीच उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका ये बयान उद्धव ठाकरे के लिए थे।

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उन्होंने अपने बयान में कहा कि “पवार, फडणवीस और शेलार एक ही मंच पर इससे कुछ लोगों की रातों की नींद उड़ सकती है। लेकिन यह राजनीति करने की जगह नहीं है। हम सभी खेल के प्रशंसक और समर्थक हैं। इसलिए हम अपने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद खेल के विकास के लिए साथ आए हैं।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुंबई क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों के पांच पदों, एमसीए के 9 पार्षदों और टी -20, मुंबई की सामान्य परिषद के दो प्रतिनिधियों के लिए मतदान 20 अक्टूबर को होने हैं। जिससे पहले एक स्पेशल डिनर रखा गया था, जिसमें इन सभी नेताओं को बुलाया गया था।

राहुल गांधी के इस बयान पर उठे सवाल, बचाव में उतरे जयराम रमेश…

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कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव हो चुका है। दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारी मतों के अंतर से शशि थरूर को मात दी है। गोरतलब हैं कि चुनाव के नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया था। बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल गांधी से उनकी भूमिका को लेकर सवाल किया गया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि इस बारे में नए अध्यक्ष खड़गे जी से पूछिए। अपने इस बयान को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

जब मीडिया द्वारा राहुल गांधी से उनकी भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “नए अध्यक्ष मेरी भूमिका तय करेंगे। आप खड़गे जी और सोनिया जी से पूछिए।” जब इस बयान पर सवाल उठने लगे तो अब कांग्रेस नेता जयराम रमेश, राहुल गांधी के बचाव में उतरे हैं। उन्होंने एक ट्वीट कर इस बात को साफ किया है कि मीडिया राहुल गांधी के बयान को गलत तरह से दिखा रही है। उन्होंने एक ट्वीट कर मीडिया रिपोर्ट के आलोचना की।

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राहुल गांधी के बचाव में उन्होंने ट्वीट में लिखा कि “कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के नतीजे घोषित होने से बहुत पहले मतदान की दिशा से ही यह स्पष्ट हो गया था कि कौन अध्यक्ष बनने जा रहा है।” आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे भारी मत हासिल किए हैं। उन्होंने इस दौरान 7897 वोट हासिल किए। वहीं, शशि थरूर को केवल 1072 मत प्राप्त हुए। 24 साल के बाद कोई गैर गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा है।

उत्तराखंड: भाजपा प्रभारी का बयान, मंदिर में लड़कियां छेड़ने जाते हैं कांग्रेसी, अब दे रहे सफाई

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देहरादून: भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी के बयान पर कांग्रेस में भारी आक्रोश है। कांग्रेस ने कहा कि सत्ता ही हनक में भाजपा नेता कुछ भी कहने और करने पर उतारू हैं। सत्ताधारी दल के नेताओं को अपने भीतर झांकना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि ऐसी सोच भाजपा की ही हो सकती है।

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया के बाद दुष्यंत कुमार गौतम अपनी बात से पलट तो गए, लेकिन बयान वापस लेने के बजाय अपने ही बयान को फिर से घुमाफिराकर पेश कर दिया और इस बार राहुल गांधी को निशाने पर लिया। गौतम ने कहा कि उन्होंने तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का उद्धरण दिया था, न कि अपनी राय रखी थी। मंदिर जाने की नीयत पर कांग्रेसियों को अपने नेता से मंशा पूछनी चाहिए।

उन्होंने कहा था कि कांग्रेस कोई भी प्रयोग करे हमें कोई दुख नहीं है। दुख इस बात का है कि कांग्रेस की विचारधारा सनातन धर्म का विरोध करना है। मंदिरों में लड़कियों को छेड़ने जाते हैं। भगवान राम के अस्तित्व को नकारते हैं। अब उसी परिपाटी का अध्यक्ष ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, जो कहते हैं कि सनातन धर्म आ जाएगा तो देश में हाहाकार मच जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी और सुजाता पाल ने गौतम के बयान पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपाइयों ने उत्तराखंड को कई बार शर्मसार किया है। भाजपा प्रभारी गौतम का यह बयान उनकी बौखलाहट बताता है। यह भाजपा की मानसिक विकृति को भी साफ करने वाला बयान है। यह विवादास्पद बयान सोची-समझी रणनीति के तहत सरकार के भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए दिया गया है। उन्होंने गौतम के इस्तीफे की मांग की है।

कांग्रेस के हमलावर रुख अख्तियार करने पर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री गौतम ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पूर्व में दिए गए बयान का उद्धरण देते हुए उनकी सोच पर टिप्पणी की थी। बेहतर होगा कि कांग्रेसी इसका जवाब अपने नेता से पूछें कि वह किस उद्देश्य से मंदिर जाते हैं ।

गौतम ने कहा कि राहुल गांधी ने पूर्व में मंदिर जाने वालों को लड़की छेडऩे वाला बताया था। इसी का उल्लेख उन्होंने किया, न कि अपनी निजी राय रखी। उन्होंने कांग्रेस के विरोध पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उनकी दिनचर्या और जीवनशैली सनातन है। हमारा पूर्ण विश्वास है कि मंदिर में लोग पवित्र विचार लेकर जाते हैं।

कांग्रेसियों को राहुल गांधी को बताना चाहिए कि वे मंदिर में गलत उद्देश्य से नहीं जाते हैं। राहुल को ही शक है कि मंदिर में लोग लड़कियां छेडऩे जाते हैं। गौतम ने कहा कि जो लोग भगवान राम को नहीं मानते, उनके जन्मस्थान को नहीं मानते, रामसेतु को काल्पनिक बताते हैं, कोर्ट में हलफनामा देते हैं, उनमें मंदिर की पवित्रता का ज्ञान होने की उम्मीद रखना बेमानी है।

उत्तराखंड: हाईकोर्ट का फैसला, अपने पदों पर काम करेंगे विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारी

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नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त किये गए कर्मचारीयों की बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ दायर 71 से अधिक कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई की। मामले को सुनने के बाद न्यायमुर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए विधान सभा सचिवालय के आदेश दिनांक 26 ,27 ,28 सितम्बर के बर्खास्तगी पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। विधान सभा सचिवालय व सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ये कर्मचारी अपने पदों पर कार्य करते रहगें। सचिवालय चाहे तो रेगुलर नियुक्ति की प्रक्रिया चालू कर सकती है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ये कर्मचारी भविष्य में होने वाली नियुक्ति प्रक्रिया को बाधित नहीं करेंगे और कार्य ग्रहण करने से पहले शपथपत्र पेस करेंगे। अपनी बर्खास्तगी के आदेश को मीनाक्षी शर्मा व 71 अन्य ने चुनोती दी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश थपलियाल ने कोर्ट को अवगत कराया कि विधान सभा अध्यक्ष के द्वारा लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं 26, 27, 28 सितम्बर को समाप्त कर दी। बर्खास्तगी आदेश मे उन्हें किस आधार पर किस कारण की वजह से हटाया गया कहीं इसका उल्लेख नही किया गया न ही उन्हें सुना गया । जबकि उनके द्वारा सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य किया जा रहा था। परन्तु उनको किस आधार पर बर्खास्त किया गया। बर्खास्तगी के आदेश में नही लिखा है।

याचिका में कहा गया है कि 2014 तक हुई तदर्थ रूप से नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई। जबकि नियमानुसार छः माह की नियमित सेवा करने के बाद उन्हें नियमित किया जाना था। विधान सभा सचिववालय का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विजय भट्ट द्वारा कहा गया कि इनकी नियुक्ति बैकडोर के माध्यम से हुई है और इन्हें काम चलाऊ व्यवस्था के आधार पर रखा गया था उसी के आधार पर इन्हें हटा दिया गया। ये इन कर्मचारियों की नियुक्ति 2021 में हुई है।

CRPF के DIG को कर दिया था जबरन रिटायर, कोर्ट ने जारी किया नोटिस

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केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल, ‘CRPF’ के DIG को उसके तय रिटायरमेंट से कई वर्ष पहले ही सेवा से हटाने का आदेश जारी किया गया था। उस आदेश के खिलाफ डीआईजी रविंद्र सिंह रौतेला हाई कोर्ट में चले गए। हालांकि ऐसे मामले में राहत की गुंजाइश काफी कम रहती है। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों में भी समय से पूर्व अधिकारियों और कर्मियों को जबरन रिटायरमेंट दी जाती रही है।

CRPF में आपसी तालमेल के अभाव के कारण सरकारी वकील को तय समय पर केस से जुड़े तमाम तथ्यों से अवगत नहीं कराया गया। इसके चलते कोर्ट को वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं दी जा सकी। नतीजा, मणिपुर उच्च न्यायालय ने इस मामले में विभाग यानी सीआरपीएफ को नोटिस जारी कर दिया है। बल को अब काउंटर शपथ पत्र जमा कराना है।

जुलाई में DIG रेंज ‘इंफाल’ आरएस रौतेला को जबरन रिटायरमेंट देने के आदेश जारी किए गए थे। आरोप थे कि रौतेला ने कई जगहों पर अपनी मनमानी की है। उन्होंने फोर्स के नियमों का कथित तौर से उल्लंघन किया है। रौतेला को कई बार चेताया गया, लेकिन वे अपनी मनमर्जी से काम करते रहे। नतीजा, बल मुख्यालय ने उन्हें तीन माह का नोटिस देकर घर भेजने के आदेश जारी कर दिए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे बल की एक सामान्य प्रक्रिया बताया था। अगर कोई अधिकारी या जवान, तय नियमों के मुताबिक काम नहीं करेगा तो उसे समय पूर्व सेवानिवृति दे दी जाती है। डीआईजी पर आरोप है कि उन्होंने कभी भी टीम भावना से काम नहीं किया। सीआरपीएफ में केवल एक जगह पर नहीं, बल्कि उनकी तैनाती वाले कई स्थानों से नकारात्मक रिपोर्ट मिली थी।

CRPF द्वारा जबरन रिटायरमेंट का आदेश जारी करने के बाद डीआईजी रौतेला ने हाई कोर्ट की शरण ली। उन्होंने अपना प्रतिवेदन दिया और बल की कार्रवाई पर सवाल उठाया। विभाग को प्रतिवेदन पर जवाब देना चाहिए था, जो समय पर नहीं दिया गया। सरकारी वकील DSGY समरजीत सिंह, बल की तरफ से कोर्ट में पेश हुए। वहां बड़ी विचित्र स्थिति पैदा हो गई। प्रतिवेदन को लेकर बल ने क्या किया, क्या नहीं किया, ये सब जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सकी। कोर्ट में यह भी नहीं बताया जा सका कि आखिर प्रतिवेदन में क्या हुआ है।

केस से जुड़े सभी तथ्य कोर्ट के सामने नहीं आ सके। इसके कई कारण हो सकते हैं। संभव है कि DIG को बचाने के लिए डीएसजीआई को समय रहते जानकारी नहीं प्रदान की गई हो। जब उन्हें कुछ नहीं मालूम तो वे अदालत में विभाग का मजबूत पक्ष कैसे रख सकते थे। हाई कोर्ट ने रौतेला की याचिका स्वीकार करते हुए अंतरिम आर्डर पास कर दिया है। अब विभाग को काउंटर शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब देना है।