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उत्तराखंड : धामी कैबिनेट बैठक खत्म, इन फैसलों पर लगी मुहर

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देहरादून: धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई है। इस बैठक में कई प्रस्ताव चर्चा के लाए हुए जिनमें से 20 प्रस्तावों पर मुहर लगी।

कैबिनेट के मुख्य बिंदु…….

– सचिवालय सुरक्षा प्रशासन की सेवा नियमावली संशोधन को मिली मंजूरी।

– उत्तराखंड में कैदियों को पेरोल लिए जाने का अधिकार जिलाधिकारी को दिया गया।

– औद्योगिक विकास विभाग के तहत सिडकुल की पांच सड़को के निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी को दिया गया।

– पीडब्ल्यूडी के तकनीकी संवर्ग के पदों का पुनर्गठन प्रस्ताव को मिली मंजूरी।

– यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी रुड़की के नाम को बदलने पर लगी मुहर।

– उत्तराखंड परिवहन परिवर्तन कर्मचारी सेवा नियमावली के संशोधन प्रस्ताव को मिली मंजूरी।

– राजस्व परिषद के सेवा नियमावली का किया गया गठन।

– सेवा नियमावली 2022 को प्रख्यापित करने की मंजूरी।

– नवीन जल विद्युत नीति को मिली मंजूरी।

– केदारनाथ बद्रीनाथ के मास्टर प्लान की तर्ज पर ही जागेश्वर और महासू देवता का भी प्लान किया जाएगा तैयार।

– विधानसभा सत्र के सत्रावसान को मंत्रिमंडल की मंजूरी

– उत्तराखंड राज्य लॉजिस्टिक नियमावली को मिली मंजूरी।

उत्तराखंड : आठ रुपये किलो कौन बेचगा माल्टा? यहां माल्टे के स्वाद के साथ होगी माल्टे की बात

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देहरादून: माल्टा। पहाड़ा में रहने वाला शायद कोई ऐसा होगा, जिसने इसके स्वाद का आनंद ना लिया हो। माल्टे के जूस भी अब पैक्ड बोतलों में मिलने लगा है। माल्टे को अब तक जो छोटा-बड़ा बाजार मिला भी है, वह लोगों के खुद के प्रयासों से ही मिला है। सरकारी स्तर पर इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। प्रयास करना तो दूर की बात माल्टे की बागवानी करने वाले किसानों के साथ मजाक किया जा रहा है।

दरअसल, सरकार ने माल्टे का समर्थन मूल्य आठ रुपये प्रति किलो तय किया है। आठ रुपये प्रति किलो कौन किसान अपने माल्टे बेचेगा। जिस माल्टे को तैयार करने में हाड़तोड़ मेहनत और दवा छिड़काव से लेकर मजदूरी तक का खर्चा लगाता है, उसे आठ रुपये में कौन किसान बेचेगा? सवाल यह भी है कि ऐसे में कौन रिवर्स पलाायन करेगा। कौन शहरों को छोड़कर वापस पहाड़ों की ओर लौटेगा? क्या सरकार की पलायन रोकने की यही योजना है? क्या यह उसी योजना का हिस्सा है, जिसके लिए पलायन आयोग बनाया गया था?

समाजिक सरोकारों के क्षेत्र में सालों से काम कर रही धाद ने इसके लिए एक खास अभियान शुरू किया है। सरकार ने जिस माल्टे का आठ रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य घोषित किया है। उसे बागवानों के घर से 20 रुपये किलो खरीदा जा रहा है। देहरादून में पौड़ी से पहुंचने वाले माल्टे की कीमत यहां 30 रुपये प्रति किलो तय की गई है। इसके अलावा नारंगी का दाम भी 60 रुपये प्रति किलो तय किया गया है।

इतना ही नहीं माल्टे के स्वाद और के बात के लिए खास आयोजन किया जा रहा है। 25 दिसंबर को स्मृतिवन मालदेवता में होने वाले कल्यो फूड फेस्विल में जहां माल्टे को लेकर सरकार की उदासी और बेहतरी पर चर्चा होगी। वहीं, उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन भी लोगों को परोसे जाएंगे। अगर आप भी फूड फेस्टिबल में पहाड़ी खाने का आनंद लेना चाहते हैं, तो उसके लिए UPI ID- dhadddn@oksbi पर 200 रुपये जमा कराने होंगे।

मेन्यू 
1.गुड़ की कटकी वाली पहाडी़ जडीबुटी से निर्मित मसाला चाय।
2.सफेद तील की छाप वाले उड़द दाल के भीजे पकौड़े- (भीगी दाल पीसने की रस्म किसी शुभ कार्य से पहले पहाड़ में काफी रोचक होती है। सामूहिकता की भावना से ओतप्रोत यह परंपरा उत्सव और उल्लास में सहभागिता का प्रतीक है। उड़द की इस दाल से बने पकोड़े शुभत्व और मंगलकारी माने जाते हैं, इसीलिए सहभोज से सबसे पहले पत्तलों में दो-दो पकोड़ियां परोसी जाती हैं और बागदान, बारात, बारपैटा यानी दुणौज और सलाहपट्टा में ले जाई जाने वाली दही की परोठी पर दो पकोड़ियां बांधी जाती हैं।किसी शुभ कार्य के खत्म होने के बाद बांटे जाने वाले अरसे जैसे मीठे पकवानों में पकोड़ों का महत्व कलाई के साथ चूड़ी जैसा है। पहाड़ में पैंणा की पकोड़ी यानी शुभ कार्य के बाद पकवान बांटना अत्यंत सम्मान की भावना को दर्शाती है।) इसी सम्मान को सम्मानित करते हुए कल्यौ इस बार आपकी थाली में परौसेगा पारंपरिक उड़द दाल के भिजे पकौड़े-! इन पकौडों के स्वाद में बढोत्तरी करेगा – कुमाऊँ का पारंपरिक ष्पीला रायता।

3.पीला रायता- पहाड़ी पीला रायता, पीला इसलिए क्योंकि इतनी सारी हल्दी शायद ही किसी रायते में पूरी दुनिया में पड़ती होगी। हल्दी -यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरी, सौभाग्य और समृद्धि की सूचक! हल्दी के अलावा इस रायते में मिलाई जाती है बारीक राई जो तासीर में गर्म मानी जाती है, दही और खीरे की ठंडी तासीर को पहाड़ों के हिसाब से गरमा देती है। हल्दी का पीला रंग इसको समृद्धि का टच देता है। पीले रंग का तो एक पूरा फलक है पहाड़ में, जो फ्योंली के फूलों से लेकर रंगवाली पिछौड़े तक जाती है, पीले रंग की ये धमक। यूँ कुमाऊँ में पकौडों के साथ रैत खाने की परंपरा रही है! आज भी भवाली और दोबाटी में दोकानदार पहाड़ की रैत- पकोड़ की परंपरा को सहेजते हुए देश के अन्य भागों से आने वाले पर्यटकों को इस नायाब व्यंजन के स्वाद से परिचित करा रहे हैं। कुछ समय पहले तक पहाड़ के मेलों में ठेकी में रैत बिकने को भी आता था! केले या तिमले के पत्तों में पांच पैसे दस पैसे का मिला करता था! पांच पैसे का एक दोना अगर किसी की बहन या बेटी नजदीक के गांव में ब्याही हो तो उसकी भिटौली में रैत भी जाता था।

4.बूरा और घी-(पहाडी़ समाज, पारंपरिक भोजन के समय- पंगत को सबसे सर्वप्रथम मालू के पत्तों में बूरा और घी परोसते है, जैसे दक्षिण भारत केले को पत्तों में प्रथम क्रम में नमक परोसता है!बांग्ल बंधु शुक्तो।

5.फड़ की दाल( भड्डु) और जख्या भात-परम्परागत भाड्डू की दाल गढ़वाल हिमालय की लोकप्रिय रेसिपी है! हमारे देश में , दालों की रेसिपी, दालों के नाम पर रखने की प्रवृत्ति है! उदाहरण के लिए, मूंग की दाल (मूंग की दाल से बनी) और चने की दाल (चने से बनी)। लेकिन यहाँ भड्डू-दाल में भड्डू कोई दाल नही है, बल्कि भड्डू में पकाये जाने के कारण इस दाल को -भड्डू की दाल कहा जाता हैभड्डू एक बर्तन है जिसमें ठिठूरती सर्दी में उड़द की दाल को चावल या रोटी के साथ, गरमागरम परोसने से पहले घंटों तक धीमी गति से मिस- मिसी आंच में बांज और चीड़ की लकडियों से मिट्टी के चूल्हे में पकाया जाता है। पहले ब्याह बरात में फड़ लगती थी, जिसमें कयी चूल्हों वाले बडी़ भट्टी लगती, इस भट्टी में तीन- चार चूल्हे होते थे, और इन चूल्हों पर चढते थे दैग भड्डू व तौले, और बनता था फडु की दाल! इस दाल में कलछी (डाडू) से गाय के घी , हींग, जंबू, लाल मिर्ची का बघार डाला जाता था! कहीं- कहीं पर दाल में बघार बडे़ से कोयले से भी डाला जाता था।

6. भात-(पहाडी़ भोजन का नाम आते ही जो चीज सबसे पहले आती है वह है दाल-भात! यूं के पहाडियों की पहचान ही दालभात है। यहां शुभ अवसरों पर भी , जैसे बच्चे का नामकरण, महिलाओं की गणेश पूजा या बारात वापसी पर होने वाले भोजन को भी लोग। भात खाना ही कहते हैं। मसलन, किसी का बच्चा होने वाला हो या लड़का विवाह योग्य हो या विवाह के बाद महिला के रजस्वला होने पर लोग बाग पूछते हैं भात कब खिला रहे हो। किसी के यहां भात खाना सम्मान का प्रतीक होता था- खाने वाले के लिए भी और खिलाने वाले के लिए भी, हालांकि कुछ लोंगों ने इसे जातिगत ऊंच-नीच के तौर पर भी प्रयोग किया, इसे एक सामाजिक बुराई ही कहा जाऐगा! पहाडियों का भात थोड़ा गीला और ढेले वाला होता है, जिस के ऊपर दाल डालकर सपोडा़ जाता है, जैसे तमिलियन इडली- सांभर का गोला – अपनी जिह्वा को लंबा कर गटकते है, वैसे ही हम पहाडी़ दालभात को सपोड़ते है।)

7. ठुंगार- ( पालक का टपका और मूला, भूनी लाल मिर्ची)

8. मंडुवे और गहथ की लहसुनिया ढबाडी़ रोटी –(पहाडों में सर्दी की तासीर को कम करने के लिए चूल्हे की आंच पर मंडुवे ( कोदो) के आटे के अंदर उबली- गहथ की दाल को स्टफ कर ढबाडी़ रोटी बनाई जाती है, जिसे गाय के नौण व कच्चे टमाटर की लहसुन डली चटनी के साथ खाया जाता है, लिहाजा परंपरानुसार कल्यौ भी शीत ऋतु होने के कारण आपके लिए गहथ की ढबाडी़ रोटी को कच्चे टमाटर की चटनी के साथ परोसा जाएगा।

9. बाड़ी -( रागी मुद्दे)-बाड़ी को कोदा के आटे (जिसे चून या मंडुआ के आटे के रूप में भी जाना जाता है) से बनाया जाता है। बाड़ी को गहत की दाल या फाणु के साथ खाया जाता है। इसे बनाने के लिए मंडवे के आटे को गरम पानी के साथ मिलकार हलवे की तरह गाढ़ा पकाया जाता है। गढ़वाल में अधिकतार पकवान और व्यंजन बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल होता है वैसे ही बाड़ी को भी लोहे की कढ़ाई में बनाया जाता है। इसका लुत्फ़, गर्म- गर्म उड़द की दाल और आलु के झोल के साथ लिया जाता है।

10. चने और हरे प्याज का अदरकी फाणु-(उत्तराखंड जितना अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्द है, उतना ही अपने स्वाद के लिए भी प्रसिद्द है। इस बार हम कल्यो की थाली में आपके लिए उत्तराखंड के एक पारंपरिक व्यंजन को परोसने जा रहे हैं , जिसका स्थानीय नाम हैष् फाणु। यह उत्तराखंड का बहुत स्वादिष्ट और लोकप्रिय व्यंजन है। वैसे तो इसे आमतौर पर गहत की दाल से बनाया जाता है। लेकिन कई बार दूसरी दालों से भी बनाया जा सकता है। चने और हरे प्याज का अदरकी फाणु तिहरी जिले के लोरसी और दोगी क्षेत्र में बनाया जाता है! चने की पैदावार के कारण शायद इस क्षेत्र में चने का फाणु बनाया जाता होगा! उत्तराखंड की इस प्रसिद्ध रेसिपी को, जे.पी.होटल मसूरी द्वारा उत्तराखंड के सिगनेचर व्यंजन के तौर पर सर्व किया जाता है! स्वाद में बढोत्तरी के लिए इसमें हरे प्याज व अदरक का इस्तेमाल किया जाता है! लोंग व काली मिर्च की तासीर के सा थ!) इसका स्वाद आप बाडी़ व झंगौरे के साथ ले सकते हैं!

11. माल्टे का ष्घसेरी सलाद (सना सलाद) –उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलने वाला माल्टा स्वाद और सेहत का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। माल्टा एक गहरे नारंगी और लाल रंग का फल होता है, जिस उत्पादन भारत में उत्तराखंड की पहाड़ियों में की जाती है। यह दिखने में संतरे जैसा होता है, लेकिन उससे कई अधिक स्वादिष्ट और गुणकारी है। ब्रिटिश साम्राज्य के समय में इसे “माल्टीज़ ऑरेंज” के रूप में जाना जाता था। हम में से बहुत से लोग इस लोकप्रिय फल के पोषण मूल्य के बारे में नहीं जानते होंगे। सो इस फल को प्रमोट करने हेतु हम इस बार माल्टे काष् सना सलादष् कल्यौ की थाली में परोसेंगे।

माल्टा का सना सलाद पहाड में जाड़ों के दिनों में – धूप सेंकते हुए, घर के आंगन व तिबारियों में खाया जाता है! मूल रूप से, घास काटने गयी महिलाओं के द्वारा गीत गाते वक्त यह सलाद बनाया और खाया जाता है! माल्टे से बनाया गया यह व्यंजन जिसे माल्टा सानना भी कहते हैं। सर्दी के मौसम में सुनहरी धूप में बैठे कर इसे बनाने और खाने का मज़ा ही कुछ और है, जिसका आनंद केवल पहाड़ के लोगों को ही मालूम है।
इसको बनाने के लिए निम्न सामग्री प्रयुक्त होती है! माल्टा, गुड, भांग का नमक, दही, मूली, गाजर, हरी मिर्च, शहद, केला, अमरुद, अनार आदि मौसमी फल। इसके सेवन से एक ओर भूख बढ़ती है तो वहीँ, के विकारों से निजात मिलता है। आँखों की रोशनी बढ़ने के साथ ही घुटनों का दर्द भी कम होता है।

माल्टे का मोहितो (उर्फ़ – शरबत)
11 डेजर्ट-, लाप्सी) उर्फ़ लांगडू- लाप्सी, पहाड़ियों का एक लुप्तप्राय मीठा पकवान है, जिसे गेहूं के मोटे भूने हुए आटे, गुंड़ गाय के घी व अखरोट की गिरी, भैंस के ताजे दूध से तैयार किया जाता है। इस रेसिपी को सहेजने के लिए कल्यो भी इसे आपके लिए परौसेगा। इसे लिक्विड के तौर पर कांसे की कटोरियों में सुड़का जाता है।

शराब माफिया पर नकेल कसने गई पुलिस की टीम पर हमला, कई घायल

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बिहार : शराब के विरुद्ध छापेमारी अभियान में रामनगर थाना क्षेत्र के धंगड़ टोली में मंगलवार की सुबह पहुंची उत्पाद विभाग एवं पुलिस टीम पर शराब के धंधेबाजों ने ईंट पत्थर से हमला बोल दिया, जिसमें स्थानीय थाने के एक एएसआइ समेत चार पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। थाने की गाड़ी को भी धंधेबाजों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। जख्मी एएसआइ सुरेंद्र कुमार अरुण, राजकुमार सिंह, सिपाही राजा राम पंडित व उत्पाद विभाग के जवान तरुण कुमार का पीएचसी में इलाज चल रहा है।

थानाध्यक्ष अनंत राम ने बताया कि सभी की स्थिति बेहतर है। मामले में तीन महिला धंधेबाज और एक पुरुष को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। उल्लेखनीय है कि स्थानीय थाने से धंगड़ टोली महज चंद मिनट की दूरी पर है। बीते दो दिन पहले भी इस टोले में छापेमारी में पुलिस को 10 लीटर चुलाई शराब मिली थी। वहीं करीब चार सौ लीटर अर्द्ध निर्मित शराब को नष्ट किया गया था।

 राज्‍य के छपरा जिले में जहरीली शराब के सेवन के चलते मौतों का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक 74 लोग इसमें अपनी जान गंवा चुके हैं। छपरा के साथ-साथ बेगूसराय, सागर, सीवाण में भी मौतें हुई हैं। ऐसे में प्रदेश में शराबबंदी को सख्‍ती से लागू करने और अवैध शराब बिक्री पर नकेल कसने के लिए ही उत्पाद विभाग एवं पुलिस की टीम ने मिलकर छापेमारी की थी।

बड़ी खबर : LG का मुख्य सचिव को निर्देश, AAP से होगी इतने करोड़ की वसूली

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दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने मुख्य सचिव को राजनीतिक विज्ञापनों को सरकारी विज्ञापन के तौर पर प्रकाशित करने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) से 97 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश दिया है।

LG का ये आदेश 2015 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश, 2016 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और 2016 के CCRGA के आदेश के मद्देनजर आए हैं, जिसका दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है।

 

पांच राज्यों में शीतलहर का अलर्ट जारी, घने कोहरे से कई शहरों में विजिबिलिटी 25 मीटर से भी कम

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देश के कई राज्यों में ठंड का सितम बढ़ता ही जा रहा है। खासकर दिल्ली, पंजाब और हिमाचल समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान लगातार नीचे गिरता जा रहा है। मैदानी इलाकों में कोहरा इस कदर छाया है कि विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई है। सड़कों पर गाड़ियां रेंगती हुई दिखाई दे रही हैं। वहीं कुछ राज्यों में बारिश के भी आसार हैं।

देश में 21 दिसंबर से शीतलहर का प्रकोप देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग की माने को अगले पांच दिनों तक हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तरी राजस्थान में शीतलहर का असर देखने को मिल सकता है। सुबह के समय हवा की रफ्तार भी तेज होगी।

मौसम विभाग ने आज यानी 20 दिसंबर को कई शहरों की विजिबिलिटी रिपोर्ट साझा की है। दिल्ली के पालम में सुबह करीब 5.30 बजे विजिबिलिटी 25 मीटर रही वहीं सफदरजंग में 50 मीटर रही। पंजाब के भटिंडा में अत्यधिक घने कोहरे के कारण जीरो विजिबिलिटी रही। अमृतसर, पटियाला और लखनई में विजिबिलिटी 25 मीटर दर्ज गई है।

हिंसा की आग में धधक उठी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, पथराव-तोड़फोड़ और आगजनी के बीच चलीं गोलियां

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों की पिटाई के बाद सोमवार को जमकर बवाल हुआ। उग्र भीड़ ने पथराव, तोड़फोड़ के साथ आगजनी की। कार्यालयों के दरवाजे-खिड़कियों के साथ ही दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए। दो बाइकें व जनरेटर फूंकने के साथ कैंटीन को भी आग के हवाले कर दिया। आरोप है कि सुरक्षा गार्डों ने छात्रों की पिटाई के साथ ही फायरिंग की। इसमें आठ छात्र जख्मी हुए हैं। बवाल पूर्व छात्रनेता व कांग्रेस के प्रदेश सचिव विवेकानंद पाठक से अभद्रता से शुरू हुआ। वह यूनियन हॉल के पास स्थित एसबीआई शाखा में जा रहे थे। आरोप है कि सुरक्षा गार्डों ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया।

इसे लेकर नोकझोंक हुई तो एक असिस्टेंट प्रोफेसर के बीचबचाव पर मामला शांत हो गया और विवेकानंद भीतर चले गए। आरोप है कि कुछ देर बाद बड़ी संख्या में गार्ड डंडे व लोहे की रॉड व असलहों से लैस होकर आए और छात्रों को पीटना शुरू कर दिया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल।

निहत्थे छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। आरोप है कि विरोध पर फायरिंग भी की गई। इसकी जानकारी पर बड़ी संख्या में छात्र जुट गए और उन्होंने पथराव करते हुए गार्डों को खदेड़ लिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल। इसके बाद बवाल शुरू हो गया।

पथराव करते हुए आगे बढ़े छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक, रजिस्ट्रार समेत कई कार्यालयों के दरवाजे-खिड़कियां तोड़ दिए। पुलिस के खदेड़ने पर केंद्रीय पुस्तकालय की तरफ स्टैंड में खड़े शिक्षकों-कर्मचारियों के आठ वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए। इसके साथ ही परिसर में खड़ी तीन और यूनियन भवन रोड व बैंक रोड पर एक-एक कारों में भी तोड़फोड़ की।

चीन से फंडिंग पर कांग्रेस का पलटवार, विदेश मंत्री के बेटे को घेरा, लगाए गंभीर आरोप

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कांग्रेस ने भारत में चीन की घुसपैठ की कोशिश के मुद्दे पर चुप्पी साधने और राजीव गांधी फाउंडेशन पर गंभीर आरोप लगाने के लिए भारतीय जनता पार्टी पर जमकर हमला बोला। कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि यह सार्वजनिक डोमेन में है कि पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन द्वारा लिया गया था। संगठनों को इस तरीके से हर जगह से अनुदान प्राप्त होता है। जिस संगठन के लिए विदेश मंत्री के बेटे काम करते हैं उन्हें चीनी दूतावास से तीन बार अनुदान मिला है। हमने कोई आरोप नहीं लगाया क्योंकि इस तरह धन जुटाया जाता है।

विदेश मंत्री जयशंकर के बेटे को घेरा

दरअसल, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ)—जहां जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर काम करते हैं—को भारत में चीनी दूतावास से फंडिंग मिली है। खेड़ा ने कहा कि  फाउंडेशन की अमेरिका स्थित जिस यूनिट का नेतृत्व विदेश मंत्री के बेटे करते हैं, उसे चीनी दूतावास से एक बार, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार फंडिंग मिली है. यह हाल ही में हुआ है. सवाल उठता है यह फंडिंग क्यों मिली? इसका क्या कारण है?

क्या कारण है कि चीन के मसले पर भारत सरकार बार-बार चुप्पी साधे रखती है? खेड़ा ने कहा कि इंडिया फाउंडेशन के साथ संघ के तमाम लोग जुड़े हैं। फाउंडेशन चीन का इतनी बार दौरा क्यों करता है? चीन के साथ इसका क्या संबंध है? चीन के मुद्दे पर आगे घेरते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि आप जवाब दें पीएम मोदी चीन से क्यों डरते हैं? वह उनके सामने अपना मुंह क्यों नहीं खोलते? वह उन्हें क्लीन चिट क्यों देते हैं और हमारे ही जवानों के बलिदान को नकारते हैं और उनका अपमान करते हैं।

किसानों पर पुलिस का लाठीचार्ज, प्रदर्शनकारियों ने तोड़े बैरिकेड

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फिरोजपुर : पंजाब जीरा के गांव मंसूर वाला की शराब फैक्ट्री के बाहर जमा हो रहे किसान संगठनों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। इससे पहले सुबह एसएसपी कंवरदीप कौन ने धार्मिक समागम में किसी को ना रोकने की बात की थी। पुलिस ने किसानों पर किया लाठीचार्ज बता दें कि सोमवार को किसान संगठनों का धरने पर पहुंचना शुरु हुआ। इस दौरान किसानों ने सरकार का विरोध किया। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड गिरा दिए, इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

लक्खा सदाना ने किसानों को किया था, संबोधित इस दौरान मालब्रोज शराब फैक्ट्री के सामने धरने पर बैठे किसानों को लक्खा सदाना ने संबोधित किया। फैक्ट्री के बाहर अखंड पाठ चलता रहा और लोग उसमें शामिल भी हुए। एसएसपी कंवरदीप कौर मौके पर मौजूद रहीं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा धरना सिर्फ फैक्ट्री से दूर किया गया है। श्री अखंड पाठ में शामिल होने वालों को रोका नहीं जा रहा।

वहीं, वीडियो वायरल कर अफवाह फैलाई जा रही है कि पुलिस किसानों से धक्का कर धार्मिक समागम में पहुंचने नहीं दे रही है। इससे पहले पुलिस ने रविवार को केवल उन प्रदर्शनकारी किसानों पर कार्रवाई की, जिन्होंने बीच रास्ते में पुलिस की गाड़ियों को घेरा और कानून का उल्लंघन करने की कोशिश की। मौके पर हालात तनावपूर्ण हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने फैक्ट्री का एक गेट खुलवा दिया है और धरने को महज दूर किया है।

रविवार को जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद सोमवार को हालात गर्म रहे। रविवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का टेंट उखाड़ कर सामान हटा दिया था। उसके बाद शराब फैक्ट्री की ओर जाने वाली लिंक रेाड और हाइवे के चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात की गई। 250 अज्ञात पर मामला दर्ज पुलिस ने 27 प्रदर्शनकारियों का नामजद कर और 250 अज्ञात पर मामला दर्ज किया है और 4 गिरफ्तार किए था। जिसके खिलाफ किसान संगठनों का आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने सोमवार को जिला के गांव मंदसोरवाला में पहुंचने का आह्वान किया था। हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

दुनियाभर में ‘अवतार 2’ का तहलका, अब तक कमाये 3500 करोड़

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 जेम्स कैमरून की ‘अवतार द वे ऑफ वाटर’ ने दुनियाभर में शानदार कमाई की है और भारत में भी फिल्म जमकर दर्शक बटोर रही है। 13 साल बाद रिलीज हुए अवतार के इस सीक्वल से काफी उम्मीदें थीं और रिलीज के बाद फिल्म इन पर खरी भी उतरती नजर आ रही है। दुनियाभर में फिल्म ने ओपनिंग वीकेंड में ही 3500 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। वहीं, भारत में भी फिल्म ने पहली अवतार को पीछे छोड़ दिया है। जेम्स कैमरून ने एक वीडियो जारी करके फिल्म को पसंद करने पर दर्शकों का शुक्रिया अदा किया है।

अवतार द वे ऑफ वाटर भारत और अमेरिका में 16 दिसम्बर को रिलीज हुई थी। फिल्म ने नॉर्थ अमेरिका में 134 मिलियन डॉलर और 300 मिलियन डॉलर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जमा किये, जिसे मिलाकर अवतार 2 का वर्ल्डवाइड ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन 434.5 मिलियन डॉलर रहा, जिसे भारतीय मुद्रा में बदलने पर लगभग 3598 करोड़ रुपये बनते हैं। वहीं, भारत में भी फिल्म को बेहतरीन रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्मों में शामिल हो गयी है। रविवार को फीफा वर्ल्ड कप फाइनल होने के बावजूद अवतार 2 ने बॉक्स ऑफिस पर पकड़ बनाकर रखी।

शुरुआती कामयाबी से उत्साहित जेम्स कैमरून ने वीडियो जारी करके फैंस का धन्यवाद कहा। इस वीडियो में कैमरून कहते हैं कि यह फिल्म एक तरह से उनकी निजी यात्रा की तरह है। काफी लोग फिल्म को सिनेमाघरों में जाकर देख चुके हैं। उन सभी का इसके लिए शुक्रिया। अवतार 2 का दूसरा भाग 13 साल बाद आया है। फिल्म की कहानी पैंडोरा ग्रह पर रहने वाले लोगों और धरती से गये इंसानों के टकराव पर आधारित है। अवतार को जहां दुनियाभर में जबरदस्त रिव्यूज मिले थे, अवतार 2 को मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली है।

2009 में आयी अवतार फिलहाल दुनिया की सबसे अधिक कमाई (2.9 बिलियन डॉलर) करने वाली फिल्म है। अब दुनियाभर के फैंस और ट्रेड जानकारों की नजरें इस बात पर जमी हैं कि अवार 2 पहली फिल्म के बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड को तोड़ पाती है या नहीं। अवतार 4 और 5 का भविष्य इस फिल्म की सफलता पर टिका है। जेम्स कैमरून इंटरव्यूज में यह कह चुके हैं कि अगर अवतार 2 सफल नहीं रहती है तो वो इस फ्रेंचाइजी की तीसरे भाग पर ही खत्म कर देंगे। अवतार 2 को ब्रेक इवन होने के लिए 2 बिलियन डॉलर से अधिक कमाई दुनियाभर में करनी होगी।

भारत में रिलीज होने वाली हॉलीवुड फिल्मों में अब तक सबसे अधिक कलेक्शन करने का रिकॉर्ड मारवल की एवेंजर्स एंडगेम के नाम है, जिसने 373 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था। वहीं, ओपनिंग वीकेंड में फिल्म ने 157 करोड़ बटोरे थे। हालांकि, अवतार 2 का ओपनिंग वीकेंड में नेट कलेक्शन 140 करोड़ के आसपास रहा है। भारत में दूसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्म एवेंजर्स इनफिनिटी वार है, जिसने 227 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था। वहीं, तीसरे स्थान पर स्पाइडरमैन नो वे होम है, जिसने 2018 करोड़ नेट कलेक्शन इंडियन बॉक्स ऑफिस पर किया था।

विधानसभा में सावरकर की तस्वीर पर हंगामा, BJP ने कांग्रेस से पूछा- क्या दाऊद की फोटो लगाएं?

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कर्नाटक विधानसभा में वीर सावरकर की तस्वीर लगाने पर विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा हॉल में वीर सावरकर की तस्वीर लगाने के खिलाफ विपक्ष के नेता सिद्धारमैया और अन्य कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष के नेता सिद्धारमैया समेत कांग्रेस विधायकों ने वाल्मीकि, बासवन्ना, कनक दास, बीआर अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य कई लोगों के चित्र के साथ वीर सावरकर की तस्वीर लगाने का विरोध किया है। कांग्रेस विधायकों ने वीर सावरकर की तस्वीर को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विरोध जताया है।

कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख और विधायक डीके शिवकुमार ने विधानसभा में वीर सावरकर की तस्वीर लगाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि हमारी विधानसभा की कार्यवाही न चले। वे इसे बाधित करना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने इस फोटो को विधानसभा में लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है और वह जानते हैं कि हम उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मुद्दे को उठाने जा रहे हैं।

कर्नाटक विधानसभा में सावरकर की तस्वीर लगाए जाने को लकर विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कोई विरोध नहीं है, यह हमारी मांग है कि सभी राष्ट्रीय नेताओं और समाज सुधारकों के चित्र कर्नाटक विधानसभा हॉल में लगाए जाएं। विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा में वीर सावरकर की तस्वीर लगाने को लेकर एकतरफा फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि मैं किसी की तस्वीर लगाने के खिलाफ नहीं हूं। सरकार कानून और व्यवस्था जैसे वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है।

कर्नाटक विधानसभा में सावरकर की तस्वीर लगाने पर विवाद को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर की फोटो लगाने से इन्हें दुख हुआ है। सिद्धारमैया को पूछिए दाऊद इब्राहिम का लगाना है क्या फोटो? उनकी समस्या तुष्टीकरण की राजनीति है, जिसके कारण आज देश इस स्थिति में पहुंचा है। सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी हैं।

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम और उनके बलिदान में अपनी भूमिका के बारे में बात करती हैं, लेकिन अब की कांग्रेस और पहले वाली कांग्रेस एक जैसी नहीं है, अब हमारे पास जो कांग्रेस है वह डुप्लीकेट है। बता दें कि बेलगावी में आज से कर्नाटक विधानसभा सत्र शुरू हो गया है, जिसके चलते बेलगावी में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके अलावा बेलगावी पुलिस ने महाराष्ट्र एकीकरण समिति को अपना महामेला सम्मेलन आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। जिस स्थान पर महामेला होना है, वहां भारी पुलिस बल मौजूद है।