दार ए सलाम: संसाधनों की प्रचुरता वाले तंजानिया के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर देते हुए भारत ने रविवार को उस देश की विकास जरूरतों को पूरा करने में उसे भरपूर सहयोग देने का वादा करते हुए पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिसमें जल संसाधन के क्षेत्र में 9.2 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा प्रदान करने संबंधी समझौता शामिल है।
तंजानिया की विकास प्राथमिकताओं को पूरा करने में भारत को एक विश्वसनीय साझेदार बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति जॉन पांबे जोसफ मागुफुली के साथ अपनी संपूर्ण रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को, खासतौर पर नौवहन क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ाने पर सहमति जताई।
मोदी ने राष्ट्रपति मागुफुली के साथ अपनी द्विपक्षीय मुलाकात के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, “क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर हमारी गहन चर्चा समान हित और समान चिंताओं के मुद्दों पर हमारे साझा रुख को प्रदर्शित करता है।”
उन्होंने कहा ‘‘तंजानिया के साथ भारत का सहयोग हमेशा आपकी जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप होगा।’’ दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन के दोहरे खतरे से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की ।
संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा की और कहा कि किसी भी तरह के आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने 2016 के प्रारंभ में आतंकवाद के खिलाफ द्विपक्षीय विचार विमर्श करने पर संतोष प्रकट किया। दोनों पक्षों ने एक समझौते पर दस्तखत किए, जिसके तहत भारत जांजीबार की जल आपूर्ति व्यवस्था के पुनर्वास और सुधार के लिए 9.2 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता प्रदान करेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत को बताया तंजानिया का विश्वसनीय साझेदार
रूस की मदद से 'सुपर सुखाई' बनाएगा भारत
दुश्मनों को धूल चटाने के लिए भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब जल्द ही ‘सुपर सुखोई’ शामिल होगा. भारत रूस के साथ इस रुके हुए प्रोजेक्ट पर बातचीत आगे बढ़ाने की तैयारी में है. इसके तहत भारत 5वीं जनरेशन के लिए लड़ाकू विमानों और सुखोई जेट (30MKI) को सुपर सुखोई में बदलने के लिए रूस से समझौता करेगा.
दूसरी ओर, भारत और फ्रांस के बीच अब जल्द ही गोलीबारी करने वाले 36 जेट के लिए करीब 7.8 बिलियन यूरो की डील करने जा रहा है, लेकिन रक्षा मंत्रालय का मानना है कि देश की अभेद सुरक्षा के लिए 36 लड़ाकू विमान काफी नहीं हैं. भारतीय वायुसेना के पास अभी 33 लड़ाकू विमान हैं, जबकि इनमें से 11 बहुत पुराने हो चुके हैं. मिग-21 और मिग-27 अब दस्ते से रिटायर होने के कगार पर हैं.
अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुताबिक, ऐसे में हमें चीन और पाकिस्तान का माकूल जवाब देने के लिए कम से कम 42 लड़ाकू विमानों की जरूरत है. हिंदुस्तान आसमान में अपनी क्षमता बढ़ाने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है. तेजस के बाद अब देश में दूसरे लड़ाकू विमानों को भी लॉन्च करने की तैयारी है. इसमें अमेरिकन एफ ए-18 और एफ-16 के साथ ही स्वीडिश ग्रिपन ई को भारत में बनाने की तैयारी है. यानी अब इन्हें मेड इन इंडिया टैग के साथ लॉन्च किया जाएगा.
अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस समय भारत लड़ाकू विमानों की तकनीक और कीमत संबंधी मुद्दों से निपटने की तैयारी कर रहा है. रूस भी भारतीय वायुसेना के पायलट को प्रोटोटाइप उड़ाने की अनुमति देने को तैयार है. भारत और रूस के बीच सबसे पहले 2007 में लड़ाकू विमानों की शुरुआती डिजाइन के लिए 295 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ था. बाद में इसे 2010 के लिए बढ़ा दिया गया था.
भारत अब 5वीं जनरेशन के फाइटर प्लेन के निर्माण को लेकर तैयारी में है. इस डिजाइन कॉन्ट्रैक्ट के करीब छह साल बाद भारत और रूस अब प्रोटोटाइप डवलपमेंट, टेस्टिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए करीब 4 बिलियन डॉलर की डील करने जा रहे हैं. यह एक सिंगल सीट लड़ाकू विमान होगा. ऐसे 127 विमान बनाने के लिए करीब 25 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा.
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बताया कि देश के लिए सुखोई की उपयोगिता 60 फीसदी तक बढ़ गई है, जबकि यह पहले 46 फीसदी ही थी. उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य इसकी उपयोगिता को 75 फीसदी तक करना है.’ सुखोई को बेहतर बनाने के लिए रूस, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स और भारतीय वायुसेना मिलकर काम करेंगे. सभी मिलकर सुपर सुखोई बनाएंगे.
सुपर सुखोई में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार और लॉन्ग रेंज स्टैंड ऑफ मिसाइल जैसी एडवांस तकनीक होगी. इसके लिए तकनीकी जरूरतों को इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा.
कश्मीर हिंसा: तीसरे दिन भी तनाव बरकरार, मृतकों की संख्या हुई 23
नई दिल्ली: हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में उत्पन्न हुए तनाव के बीच सुरक्षा की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में आंतरिक सुरक्षा पर चर्चा होगी।
इस बीच कश्मीर में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। शुक्रवार को एक मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से कर्फ्यू जैसे हालातों और अलगाववादियों की ओर से आयोजित बंद के कारण लगातार तीसरे दिन घाटी में सामान्य जनजीवन बाधित है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘कल कुलगाम जिले में हिंसा की एक घटना में दो लोग मारे गए और इनकी पहचान फिरोज अहमद मीर (22) तथा खुर्शीद अहमद मीर (38) के रूप में हुई है।’ उन्होंने कहा कि दक्षिण कश्मीर जिले में संचार की सुविधा ‘अपर्याप्त’ होने के कारण इन युवाओं की मौत की जानकारी कल नहीं मिल सकी थी।
सुरक्षाबलों के साथ झड़प में वानी के मारे जाने के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाने पर शुक्रवार शाम से दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में मोबाइल सेवाएं निलंबित हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में मारे जाने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। मारे जाने वालों में एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। हिंसा के चलते 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं और घाटी में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
श्रीनगर के कुछ भागों और घाटी के विभिन्न हिस्सों में कर्फ्यू जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। कल शाम को झड़पों में श्रीनगर में एक मौत हुई थी। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में और घाटी के अन्य स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि जान-माल के किसी भी नुकसान को रोकने के लिए सख्ती के साथ प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।
शनिवार के बाद से मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं और अलगाववादियों की ओर से आयोजित बंद के कारण सामान्य जनजीवन अब भी बाधित है। अधिकारियों ने कहा कि दुकानें, निजी दफ्तर, कारोबारी प्रतिष्ठान और पेट्रोल पंप बंद हैं जबकि सरकारी दफ्तरों और बैंकों में गिने-चुने लोग ही देखे गए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन के साधन पूरी तरह सड़कों से नदारद हैं जबकि प्रतिबंध से मुक्त कुछ स्थानों पर निजी कारें और ऑटोरिक्शा चलते हुए पाए गए।
गर्मियों की छुट्टियों के चलते घाटी के शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। सेंट्रल कश्मीर यूनिवर्सिटी, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और जम्मू एंड कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने मौजूदा हालात के कारण परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक समेत अधिकतर अलगावादी नेताओं को या तो हिरासत में ले लिया गया है या फिर घर में ही नजरबंद कर दिया गया है।
उत्तर कोरिया की धमकी, कहा- अमेरिका की मिसाइल रोधी प्रणाली के खिलाफ करेंगे कार्रवाई
सोल। प्योंगयोंग से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया में एक अमेरिकी मिसाइल रोधी रक्षा प्रणाली की तैनाती संबंधी वॉशिंगटन एवं सोल की घोषणा के मद्देनजर उत्तर कोरिया ने कार्रवाई करने की धमकी दी।
दक्षिण कोरिया एवं अमेरिका ने उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल एवं परमाणु परीक्षणों के बाद दक्षिण कोरिया में टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (थाड) तैनात करने के अपने निर्णय का शुक्रवार को खुलासा किया था। दोनों सहयोगियों ने अभी इस बात का खुलासा नहीं किया है कि प्रणाली कब और कहां तैनात की जाएगी लेकिन उन्होंने यह कहा था कि संभावित स्थल का चयन अंतिम चरण में है।
आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार उत्तर कोरियाई सेना के आर्टिलरी ब्यूरो ने कहा कि डीपीआरके दक्षिण कोरिया में मिसाइल रोधी अमेरिकी प्रणाली ‘थाड’ की तैनाती की जगह और स्थान की पुष्टि होते ही इसे पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए जवाबी कार्रवाई करेगा। उसने कहा कि उत्तर कोरिया की सेना के पास आक्रामक हमले के लिए पर्याप्त नए माध्यम हैं और सेना थाड तैनात करके युद्ध भड़काने की अमेरिकी इच्छा के खिलाफ अधिक निर्मम एवं शक्तिशाली आवश्यक कदम लगातार उठाएगी। उत्तर कोरिया ने यह चेतावनी भी दी कि थाड प्रणाली तैनात करके दक्षिण कोरिया अपने ही विनाश की ओर बढ़ेगा।
बयान में कहा गया है कि हम शत्रुओं को एक बार फिर चेतावनी देते हैं कि आदेश जारी होते ही दक्षिण कोरिया को तहस नहस करने के लिए निर्मम जवाबदेही कार्रवाई करना केपीए की दृढ़ इच्छाशक्ति है। सोल ने उत्तर कोरिया की मूखर्तापूर्ण धमकियों की निंदा की है।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मून सांग ग्यून ने संवाददाताओं से कहा कि उत्तर कोरिया को यह बात समझनी चाहिए कि कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और स्थिरता के लिए खतरा कौन पैदा कर रहा है और उसे पहले अपनी भड़कावे की कार्रवाई के लिए माफी मांगनी चाहिए।
ब्रिटेन के पूर्व उप प्रधानमंत्री ने कहा- गैर कानूनी था इराक युद्ध
लंदन। टोनी ब्लेयर के प्रधानमंत्रित्व काल में ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री (डिप्टी पीएम) रहे जॉन प्रेस्कॉट ने कहा कि ब्रिटेन का 2003 का इराक युद्ध गैर-कानूनी था। ब्रिटेन के इराक युद्ध में शामिल होने के दौरान देश के उप-प्रधानमंत्री रहे प्रेस्कॉट ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब पिछले बुधवार को जारी सर जॉन शिलकॉट रिपोर्ट ने इस युद्ध में ब्रिटेन की भूमिका के खिलाफ टिप्पणी की थी।
हालांकि, 2003 में ब्रिटेन ने जब इराक युद्ध में शामिल होने का फैसला किया था, उस वक्त लेबर पार्टी के कद्दावर नेता प्रेस्कॉट ने इस फैसले का समर्थन किया था। अब प्रेस्कॉट का कहना है कि उन्हें इस तकलीफदेह फैसले के साथ ताउम्र रहना होगा। प्रेस्कॉट ने ‘संडे मिरर’ में लिखा है, ‘एक भी दिन ऐसा नहीं बीतता जब मैं युद्ध में जाने के हमारे फैसले के बारे में नहीं सोचता..देश के लिए अपनी जान देने वाले या जख्मी हुए ब्रिटिश सैनिकों के बारे में नहीं सोचता…सद्दाम हुसैन को हटाकर हमने जो मुश्किलों की पोटली खोली थी उसकी वजह से मारे गए 175,000 लोगों के बारे में नहीं सोचता।’
इस हफ्ते की शुरुआत में ब्लेयर ने अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह देश को युद्ध में झोंकने के अपने फैसले पर कायम हैं। करीब सात साल तक इराक युद्ध के मामले की जांच करने के बाद बीते बुधवार को शिलकॉट रिपोर्ट जारी की गई थी। प्रेस्कॉट ने कहा कि मार्च 2003 में इराक पर हमले से महीनों पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को ब्लेयर की ओर से भेजा गया यह संदेश ‘तबाह करने वाला’ था कि ‘मैं आपके साथ हूं, चाहे जो हो’। शिलकॉट रिपोर्ट में कहा गया कि 1997 से 2007 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे ब्लेयर ने शांति के विकल्पों का इस्तेमाल किए बगैर आखिरकार 45,000 ब्रिटिश सैनिकों को लड़ाई में भेज दिया था।
विंबलडन टूर्नामेंट: सेरेना विलियम्स फाइनल में पहुंची
दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी और छह बार की चैंपियन सेरेना विलियम्स ने गैरवरीय रूसी खिलाड़ी इलेना वेसनिना को केवल 48 मिनट में करारी शिकस्त देकर विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनायी, जहां उनकी भिड़ंत जर्मनी की एंजेलिक कर्बर से होगी।
ओपन युगल में 22 ग्रैंडस्लैम जीतने के रिकार्ड की बराबरी करने की कवायद में लगी 34 वर्षीय सेरेना ने अपनी 50वीं रैकिंग की प्रतिद्वंद्वी को 6-2, 6-0 से हराया। मौजूदा चैंपियन अब फाइनल में चौथी वरीय केरबर से भिड़ेंगी जिसने इस अमेरिकी खिलाड़ी की बड़ी बहन और पांच बार की चैम्पियन वीनस को दूसरे सेमीफाइनल में 71 मिनट में 6-4 , 6-4 से शिकस्त दी।
सेरेना इस साल जनवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन में केरबर से हार गयी थी, जिससे जर्मनी की इस खिलाड़ी ने अपना पहला ग्रैंडस्लैम खिताब जीता था। अब केरबर दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी के रिकार्ड 22वें ग्रैंडस्लैम खिताब की बराबरी हासिल करने में रूकावट पैदा करने की कोशिश करेगी। सेरेना फ्रेंच ओपन में गर्बाइन मुगुरूजा से हार गयी थी।
अपना 32वां ग्रैंडस्लैम सेमीफाइनल खेल रही सेरेना ने सेंटर कोर्ट पर अपनी प्रतिद्वंद्वी वेसनिना पर शुरू से ही हावी हो गयी। तब प्रिंस विलियम की पत्नी केट भी रायल बाक्स से उनका मैच देख रही थी। सेरेना ने 11 ऐस और 28 विनर्स जमाये और अपनी तरफ से केवल सात गलतियां की।
उन्होंने पांच बार वेसनिना की सर्विस तोड़ी और 28वीं बार ग्रैंडस्लैम फाइनल में जगह बनायी।सेरेना ने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं। मैं वास्तव में आज पूरी तरह से एकाग्र होकर खेली। इससे पहले हमने कुछ कड़े मैच खेले थे और मैं जानती थी कि इस कोर्ट पर भी वह हावी हो सकती है। मैच आसान नहीं था। आपको हर अंक के लिये जूझना पड़ता है।’
उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि मैं यहां फाइनल में पहुंच गयी हूं। इस साल अभी तक मैं कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीत पायी और इसलिए यहां जीतने के लिये प्रतिबद्ध हूं।’ सेरेना ने 29 वर्षीय रूसी खिलाड़ी वेसनिना पर शुरू में ही 4-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। वेसनिना ने इसके बाद दो अंक बनाये लेकिन सेरेना ने सातवें ऐस से 28 मिनट में सेट अपने नाम कर दिया। दूसरा सेट तो केवल 20 मिनट में ही सेरेना ने अपने नाम करके मैच जीत लिया। उन्होंने पहले, तीसरे और पांचवें गेम में ब्रेक प्वाइंट लिया।
केरबर ने वीनस को हराने के बाद कहा, ‘वीनस यहां इतनी बार खिताब जीत चुकी हैं और अच्छा खेल रही थी। इसलिये मैं बहुत खुश हूं कि मैं अपने पहले विम्बलडन फाइनल में पहुंची। यह बहुत अच्छा अहसास है। मैं अपने टेनिस का लुत्फ उठा रही हूं।’
मजहब के नाम पर आतंक ना फैलाएं': आमिर
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ईद के मौके पर मीडिया से मुखातिब हुए. मिस्टर परफेक्शनिस्ट विवादित इस्लामिक धर्म प्रचारक जाकिर नाइक के विरोध में सामने आ गए हैं. आमिर ने नाइक को बैन करने के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग आतंकवाद फैलाते हैं उनका मजहब से कोई लेना देना नहीं है.
आमिर ने सलमान की फिल्म ‘सुल्तान’ की जमकर तारीफ की. इसके साथ ही मिस्टर परफेक्शनिस्ट अपनी आने वाली फिल्म ‘दंगल’ के बारे में भी चर्चा करते नजर आए.
आमिर ने सलमान की फिल्म ‘सुल्तान’ के बारे में कहा, ‘मैंने ‘सुल्तान’ देखी, यह बहुत शानदार फिल्म है. फिल्म में मुझे कोई कमी नजर नहीं आई. यह एक प्रेरणादायक फिल्म है. फिल्म के सेकंड हॉफ में मैं बहुत रोया और कहीं-कहीं हंसा भी. फिल्म बहुत इमोशनल है.’ इसके साथ ही आमिर ने यह भी कहा कि ‘सुल्तान’ मेरी फिल्म ‘पीके’ सारे रिकॉर्ड भी तोड़ सकती है.
इसके अलावा आमिर से जब आमिर से देश में फैल रहे आतंकवाद के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘जो लोग धर्म के नाम पर कट्टरता फैला रहे हैं वो कितना भी कहे कि वो ये सब धर्म के लिए कर रहे हैं आखिर में गलत ही साबित होते हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसे लोग मजहब को मानते होते तो प्यार-मोहब्बत की बात करते, क्योंकि मजहब तो यही सिखाता है.
रिलीज के साथ ही सुल्तान ने तोड़े ये 6 रिकॉर्ड्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’को धमाकेदार ओपेनिंग मिली है. पहले से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि ये फिल्म कमाई के मामले में सारे रिकॉर्ड्स तोड़ देगी. ‘सुल्तान’ ने पहले दिन कुल 36 करोड़ की कमाई की है.
1. ये फिल्म इस साल की सबसे बड़ी ओपेनर फिल्म है और इसने इसी साल रिलीज हुई सुपरस्टार शाहरूख खान की फिल्म ‘फैन’ ने करीब 19 करोड़ की कमाई की थी और अब इस फिल्म को पछाड़ ‘सुल्तान’ नंबर वन हो गई है.
2. ईद पर रिलीज होने वाली फिल्मों में भी पहले दिन कमाई के मामले में ये फिल्म नंबर वन हो गई है. इससे पहले ईद पर रिलीज होने वाली फिल्मों में नंबर पर शाहरूख खान की फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ काबिज थी. ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ ने कुल 33.1 करोड़ की कमाई की थी. लेकिन अब ‘सुल्तान’ ने इसका रिकॉर्ड तोड़ दिया है. (हालांकि अब भी शाहरूख खान की फिल्म हैपी न्यू ईयर के नाम पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई का रिकॉर्ड है, जिसने पहले दिन करीब 44 करोड़ कमाई की थी.)
3. ‘सुल्तान’ ने रिलीज से पहले ही एक रिकॉर्ड बना लिया था. इस फिल्म के रिलीज होने से तीन दिन पहले से ही एडवांस बुकिंग शुरू हो गई थी. रिलीज से पहले ही इस फिल्म ने एडवांस बुकिंग से करीब 20 करोड़ कमा लिए थे. ये बुकिंग सलमान की बाकी फिल्मों ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘किक’ से बहुत ज्यादा है.
4. स्पोर्टस पर बनने वाली फिल्मों की बात की जाए तो ये फिल्म भी उस लिस्ट में सबसे ऊपर दर्ज हो गई है. स्पोर्ट्स पर बनी फिल्म ‘भाग मिल्का भाग’ ने पहले दिन करीब 9 करोड़ और ‘मैरी कॉम’ ने करीब 8.4 करोड़ की कमाई की थी.
5. सलमान खान ने अपनी फिल्मों की कमाई का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. सलमान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ ने भी पहले दिन 33 करोड़, ‘बजरंगी भाईजान’ ने 27.25 करोड़ और ‘किक’ ने 26.52 करोड़ की कमाई की थी. ये तीनों फिल्में भी ईद पर ही रिलीज हुई थीं.
6. सलमान की अब तक दो फिल्में बुधवार को रिलीज हुई हैं. एक तो ‘सुल्तान’ है और दूसरी ‘एक था टाइगर’. इस कैटगरी में भी सुल्तान नंबर वन पर काबिज हो गई है. बता दें कि ‘एक था टाइगर’ ने पहले दिन करीब 33 करोड़ की कमाई की थी.
आपको बता दें कि इस फिल्म में सलमान खान के अपोजिट अनुष्का शर्मा हैं. समीक्षकों ने भी इस फिल्म को अच्छा बताया है. समीक्षकों के मुताबिक ‘सुल्तान’ सलमान ख़ान के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है. इसमें उनके अभिनय, उनकी ट्रेनिंग, उनके शानदार फाइट सीन्स में उनकी मेहनत साफ़ झलकती है.
जैसी व्यवस्था है उसमें एवरेस्ट फतह के और भी दावे फर्जी निकल जाएं तो अचरज कैसा?
संसार का सबसे ऊंचा हिमशिखर माउंट एवरेस्ट हमेशा से मनुष्य के साहस, संकल्प और उसकी शारीरिक-मानसिक क्षमता के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. एवरेस्ट को उससे जुड़े कीर्तिमानों के लिए भी जाना जाता है. कई बार तो एवरेस्ट शब्द का इस्तेमाल ही किसी बड़ी उपलब्धि को छूने के संदर्भ में किया जाता है.
एवरेस्ट से जुड़े तमाम रिकार्ड अलग-अलग उपलब्धियों की कहानी बयां करते हैं. आपा शेरपा और पूर्वा ताशी शेरपा का 21 बार एवरेस्ट को जीतना, आंग रीता शेरपा का 10 बार बिना आक्सीजन के इस चोटी तक पहुंचना, बाबू चिरी शेरपा का शिखर पर 21 घंटों तक रुकने में कामयाब होना, पेंबा दोर्जी का आठ घंटे 10 मिनट में बेस कैंप से चोटी पर जा पहुंचना, जापान के युचिरो मिउरा का 80 वर्ष और 224 दिन की उम्र में एवरेस्ट आरोहण करना और नेत्रहीन इरिक वेनमायर का अतुलनीय शिखर आरोहण कुछ ऐसे ही रिकार्ड हैं. ये दूसरों की प्रेरणा बनते हैं और नए पर्वतारोहियों को कुछ अधिक करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं.
29 मई 1953 को जब शेरपा तेनजिंग और एडमंड हिलेरी ने पहली बार एवरेस्ट पर कदम रखा तो वह रिकार्ड अपने आप में उस समय तक मानव के साहस और संकल्प की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया था. इस विजय से एक और रिकार्ड भी जुड़ा था. तेनजिंग नोर्गे की उम्र उस समय 39 वर्ष थी जो सामान्यतः पर्वतारोहण के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती थी. सबसे बुजुर्ग पर्वतारोही के रूप में एवरेस्ट फतह करने का उनका यह रिकार्ड 10 वर्ष से भी ज्यादा समय तक बरकरार रहा. एवरेस्ट आरोहण ने भारत के लिए भी गर्व कर सकने के कई मौके पैदा किए.
मगर 2016 में दो भारतीयों ने एवरेस्ट विजय के नाम पर एक बड़ी धोखाधड़ी करके भारतीय पर्वतारोहियों को शर्म से सर झुकाने के लिए मजबूर कर दिया है. महाराष्ट्र पुलिस के दिनेश चन्द्रकान्त राठौड़ और उनकी पत्नी तारकेश्वरी ने पांच जून को प्रेस कांफ्रेस कर दावा किया था कि उन्होंने 23 मई को 8848 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल की और ऐसा करने वाले वे पहले दंपत्ति बने हैं. राठौड़ दंपत्ति ने इस दावे की पुष्टि के लिए शिखर पर अपने फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए. नेपाल सरकार के पर्यटन विभाग ने इन साक्ष्यों के आधार पर इस दंपत्ति को एवरेस्ट विजय का प्रमाण पत्र भी दे दिया.
लेकिन 10 जून को इस विजय पर सवालिया निशान लग गया. बेंगलुरू के एक पर्वतारोही सत्यरूप सिद्धार्थ ने दावा किया कि राठौड़ दंपत्ति ने जो तस्वीरें सबूत के तौर पर प्रस्तुत की थीं वे ‘डॉक्टर्ड’ थी. ये तस्वीरें 21 मई को सत्यरूप और उनके साथियों द्वारा की गई एवरेस्ट विजय की तस्वीरों के साथ हेरा-फेरी करके बनाई गई थीं.
आठ अलग-अलग लोगों द्वारा की गयी इन शिकायतों की जानकारी जब नेपाल के पर्यटन विभाग को हुई तो उसने मामले की जांच शुरू कर दी. शुरुआती जांच में विभाग ने राठौड़ के अभियान का संचालन करने वाली कंपनी ‘मकालू एडवेंचर’ से भी पूछताछ की है और उनके साथ जाने वाले फुरबा और फुरसेम्बा नाम के शेरपाओं से भी.
पुणे के ही एक पर्वतारोही सुरेंद्र शल्कि ने भी राठौड़ के दावे को इस आधार पर फर्जी बताया था कि शिखर अभियान के दौरान वे अलग रंग के कपड़े पहने दिखते हैं और तस्वीरों में उनके बूटों का रंग भी अलग-अलग दिख रहा है. पर्वतारोहण के जानकारों का मानना है कि एवरेस्ट की ऊंचाइयों पर ‘विंड चिल फैक्टर’ के बाद अमूमन यह संभव नही होता कि कोई पर्वतारोही अपने कपड़े बदल सके. फिर उनके शिखर आरोहण और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच के अंतराल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि यह सब इतनी जल्दी कैसे हो गया.
शुरुआती जांच के बाद नेपाल के पर्यटन विभाग के प्रमुख सुदर्शन प्रसाद ढकाल का कहना है कि मामला संदिग्ध लग रहा है और अगर अंतिम रूप से दोनों को झूठा दावा करने का दोषी पाया गया तो उन पर नेपाल में भविष्य में किसी भी पर्वतारोहण अभियान के लिए आने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. फिलहाल विभाग ने अपने यहां के संस्कृति और पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिख कर राठौड़ दंपत्ति पर 10 साल तक नेपाल में पर्वतारोहण करने पर प्रतिबंध लगाने और उनके एवरेस्ट आरोहण के प्रमाणपत्र को रद्द करने की सिफारिश की है.
ऐसी स्थिति में राठौड़ दंपत्ति से एवरेस्ट विजय का प्रमाण पत्र तो वापस लिया ही जायेगा उनके विरुद्ध भ्रष्ट आचरण और धोखाधड़ी का मुकदमा भी चलाया जाएगा. नेपाल पर्यटन विभाग अभियान की संचालक पर्वतारोहण कंपनी और अभियान दल के लायजन अफसर के विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए कहा जा रहा है.
राठौड़ दंपत्ति के इस फर्जीवाड़े के खिलाफ पुणे पुलिस ने भी एक जांच शुरू कर दी है. उधर सत्यरूप सिद्धार्थ इस मामले में राठौड़ दंपत्ति के खिलाफ कोलकाता के साइबर क्राइम सेल में आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने जा रहे हैं. उनका कहना है कि शिखर आरोहण के बाद बेस कैंप में उनके लैपटाप से कई शेरपाओं ने तस्वीरें वट्सऐप के जरिए शेयर की थीं जिनमें से संभवत: कुछ तस्वीरें राठौड़ दंपत्ति ने भी हासिल की होंगी.
कुछ और बातें भी राठौड़ दंपत्ति के दावे पर सवाल उठाती हैं. नेपाल पर्यटन विभाग के रिकार्ड के मुताबिक 23 मई को राठौड़ दंपत्ति सहित कुल 15 लोगों ने एवरेस्ट पर आरोहण किया था. लेकिन तिब्बत के उत्तरी मार्ग से शिखर तक पहुंचे पर्वतारोहियों का दावा है कि उन्होंने उस दिन दोपहर को नेपाल की ओर वाले दक्षिणी मार्ग से किसी भी पर्वतारोही को शिखर की ओर बढ़ते नहीं देखा था. कुछ अन्य पर्वतारोहियों का कहना है कि राठौड़ 10 मई तक खुम्भू ग्लेशियर में भी नही पहुंच सके थे. उनका सवाल है कि अगर 10 मई तक उन्होंने ‘एक्लेमेटाइजेशन’ (स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से शरीर का अनुकूलन) भी शुरू नहीं किया था तो वे 23 मई को शिखर पर कैसे पहुंच सकते थे?
पर्वतारोहण के क्षेत्र में झूठे दावे पहले भी किये जाते रहे हैं. कई बड़ी उपलब्धियों पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं. भारत सरकार द्वारा इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन से अनुमोदित पर्वतारोहण अभियानों के लिए वर्ष में एक महीने विशेष अवकाश दिया जाता है. इस अवकाश को पाने के लिए भी अनेक झूठे दावे पहले भी चर्चा में आ चुके हैं. इसी बेईमानी के बाद भारत सरकार को विशेष अवकाश के नियमों में बदलाव करने पड़े थे.
बहरहाल, माउंट एवरेस्ट पर पुलिसगिरी दिखाने का राठौड़ दंपत्ति का यह करतब अब एक बड़ा दाग बन गया है जो उनके दामन पर तो लगा ही है, महाराष्ट्र पुलिस और भारतीय पर्वतारोहण प्रेमियों को भी शर्मसार कर रहा है.
राठौड़ मामले ने नेपाल के पर्वतारोहण व्यवसाय में लायजन अफसरों की भूमिका को भी सवालों के घेरे में ला दिया है. ये अधिकारी नेपाल में 6500 मीटर से ऊंची चोटियों के आरोहण का प्रयास करने वाली हर टीम के साथ पर्यटन विभाग की सहमति से नियुक्त किये जाते हैं. इनका काम बाहरी अभियान दलों और स्थानीय शेरपाओं, पर्वतारोहण से जुड़ी एजेंसियों और नेपाल सरकार के बीच सामंजस्य बनाने का होता है. पर्वतारोहण का प्रशिक्षण पाये हुए और विदेशी भाषाओं के जानकार युवाओं को ही यह जिम्मेदारी दी जाती है. इनको बेस कैम्प तक अनिवार्य रूप से जाना होता है और वहां रहना होता है. इनकी रिपोर्ट के बाद ही अभियान दल की उपलब्धि को स्वीकार किया जाता है. इन्हें अच्छा मेहनताना भी मिलता है और टीम के सफल होने पर ईनाम आदि भी.
राठौड़ मामले की जांच में इन्हीं लायजन आफिसरों का गड़बड़झाला भी पकड़ में आ गया है. जांच में पता चला है कि इस वर्ष नेपाल से हुए 33 एवरेस्ट अभियानों में से 16 के लायजन आफिसर तो बेस कैंप तक गए ही नहीं. कुछ ने वहां जाकर कुछ तस्वीरें खींची और फिर वापस आ गए. कम से कम 15 लायजन आफिसर ऐसे हैं जिन्होंने बिना बेस कैंप गए ही अपनी टीमों के सफल एवरेस्ट आरोहण की पुष्टि कर दी. जांच के बाद अब मंत्रालय को दागी लायजन आफिसरों पर प्रतिबन्ध लगाने के साथ भविष्य के लिए कड़ी निगरानी की योजना भी बनाने की सलाह दी गयी है. नेपाल के पर्वतारोहण संघ ने भी इस प्रकरण की निंदा करते हुए इसे नेपाली पर्वतारोहण परंपरा पर बड़ा दाग बताया है.
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल का विस्तार,आयोजन में उद्धव शामिल नहीं हुए
मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर 11 नए मंत्रियों का शामिल किया. इनमें से 10 नए चेहरे हैं. इस विस्तार में शिवसेना के किसी नेता को कैबिनेट दर्जा नहीं मिलने से पार्टी नाराज बताई जा रही है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल में तो शिवसेना की सिरे से उपेक्षा की गई थी. लेकिन, फडणवीस ने शिवसेना के दो विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है. बहरहाल, बीजेपी ने शिवसेना के किसी नेता को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की पार्टी की मांग को नहीं माना.
आज सुबह विधानभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की गैरमौजूदगी से पार्टी की नाराजगी बिलकुल स्पष्ट थी. छह विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के बतौर शपथ ली उनमें से एक राम शिंदे को गृह राज्यमंत्री (ग्रामीण) के पद से पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.
शिवसेना के मराठवाड़ा क्षेत्र के जालना से विधायक अजरुन खोतकर और उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव से विधायक गुलाबराव पाटिल को कनिष्ठ मंत्री बनाया गया है. पाटिल बीजेपी के पूर्व मंत्री एकनाथ खड़से के गृह नगर जलगांव से हैं. जबकि खोतकर बीजेपी की राज्य इकाई के अध्यक्ष रावसाहब दानवे के गृह जिल जालना से हैं.
बीजेपी की चुनाव पूर्व सहयोगी स्वाभिमानी पार्टी के सादाभाउ खोत और राष्ट्रीय समाज पार्टी (आरएसपी) के महादेव जानकर ने भी शपथ ली है. जानकर कैबिनेट मंत्री बने हैं. कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले बीजेपी के विधायकों में राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष पांडुरंग फुंडकर, डौंडेचा (धुले) से विधायक जयकुमार रावल, निलांगा से सांभाजी पाटिल निलांगेकर और सोलापुर से विधायक सुभाष देशमुख शामिल हैं.
बीजेपी के विधायक रविंद्र चव्हाण और मदन येरावर ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली है. इसके साथ ही बीजेपी से 6, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन और राष्ट्रीय समाज पक्ष से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं. शपथ ग्रहण के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे.
मंत्री बनने के संभावितों की लिस्ट में पहले से ही कुछ लोगों के नाम चल रहे थे. इनमें लातूर से संभाजीराव निलंगेकर, धुले से जयकुमार रावल, सोलापुर दक्षिण से सुभाष देशमुख, विधान परिषद सदस्य पांडूरंग फुंडकर, डोंबिवली से रवींद्र चव्हाण, यवतमाल से मदन येरावर, जलगांव से शिवसेना विधायक गुलाबराव पाटिल जालना से शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर, स्वभिमानी शेतकरी संगठन के विधान परिषद सदस्य सदाभाऊ खोत और राष्ट्रीय समाज पक्ष के विधान परिषद सदस्य महादेव जानकर शामिल हैं.
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस मंत्रिपरिषद में आज होने वाले विस्तार में पहले ही साफ हो गया था कि शिवसेना के दो विधायक बतौर मंत्री शामिल किए जाएंगे. इससे इन अटकलों पर विराम लग गया था कि दोनों सत्ताधारी साझेदारों के रिश्तों में बढ़ती खटास के बीच क्या उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी मंत्रिपरिषद विस्तार की कवायद में शामिल होगी.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने कोटे से राज्य मंत्री बनाए गए सभी मौजूदा मंत्रियों को कैबिनेट रैंक में तरक्की देने की शिवसेना की मांग खारिज कर दी थी. क्योंकि पार्टी के दो नए विधायकों को मंत्री पद दिए जाने का फैसला हुआ था. शपथ से पहले इस बाबत अटकलों का बाजार गर्म रहा कि मंत्रिपरिषद विस्तार में शिवसेना हिस्सा लेगी कि नहीं. ये अटकलें इसलिए लगाई जा रही थीं क्योंकि पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विस्तार के दौरान पार्टी को एक भी मंत्री पद नहीं दिया गया था.







