Home Blog Page 1125

कुंबले 'सर' ने बनाए कड़े नियम, देरी से आए तो लगेगा जुर्माना

0

टीम इंडिया के नए कोच अनिल कुंबले पूरी तन्मयता से अपने काम में जुट गए हैं और खिलाड़ियों के लिए कड़े नियम भी बना दिए हैं। कुंबले इस समय भारतीय टीम के साथ वेस्टइंडीज के दौरे पर हैं।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच 4 मैचों की टेस्ट सीरीज 21 जुलाई से शुरू हो रही है। सीरीज शुरू होने से पहले भारत बृहस्पतिवार से 3 दिवसीय अभ्यास मैच खेलेगा। यह सीरीज चुनौतीपूर्ण होने जा रही है इसलिए कोच ने खिलाड़ियों के वास्ते अभ्यास के कड़े रूटीन बनाए हैं।
वैसे भी कुंबले को अपने काम को लेकर बेहद सख्त माना जाता है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कुंबले ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट तय कर दिए हैं जिसमें सबसे खास यह है कि टीम बस के लिए या किसी भी कार्यक्रम में देरी से आने वाले खिलाड़ियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
मुख्य कोच अनिल कुंबले ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लिए नए नियम बनाते हुए यह तय कर दिया है कि जो भी खिलाड़ी टीम बस पर आने में देरी करेगा उस पर 50 डॉलर (3357 रुपये) का जुर्माना लगा दिया जाएगा। साथ ही किसी भी जगह देर से पहुंचने पर भी जुर्माना लगा दिया जाएगा।
साथ ही कुंबले ने यह भी तय कर दिया है कि हर 4 दिन पर एक आधिकारिक बैठक होगी। इसके अलावा कोई भी खिलाड़ी जब चाहे तब उनसे मिल सकता है और किसी भी समस्या पर बात कर सकता है।
टीम में शामिल युवा खिलाड़ियों में अनुशासन लाने के लिए कुंबले ने कोच बनने के साथ ही कुछ दिशा-निर्देश तय कर दिए थे क्योंकि इन खिलाड़ियों को वेस्टइंडीज के लंबे दौरे के लिए जाना था।
उन्होंने वेस्टइंडीज में खिलाड़ियों के साथ पहली बैठक में सपोर्ट स्टाफ की भूमिका को सरल बनाने की कोशिश की थी। उदाहरण के तौर पर मसाज के लिए एक समय तय कर दिया। खिलाड़ी अब मसाज के नाम पर लंबे समय तक रूके नहीं रह सकते।
टीम के साथ जुड़े एक सूत्र ने बताया कि हर चीज व्यवस्थित है और कुंबले चाहते हैं कि खिलाड़ी अनुशासन की महत्ता समझे और उसी समय खुद को फ्री भी महसूस करें। उन्हें मालूम है कि कौन सी चीज कब बनानी है। आने वाले दिनों में टीम इंडिया के खिलाड़ियों को स्कूबा डाइविंग के लिए जाना है। यह सब छोटी-छोटी चीजें खिलाड़ियों का तनाव कम करने का प्रयास है।

सलमान की बहन को तलाक से पहले ही यामी से शादी की तैयारी में पुलकित!

0

पुलकित सम्राट अपनी फ्लॉप फिल्मों से ध्यान हटाते हुए थोड़ा समय पर्सलन जिंदगी पर दे रहे हैं। उन्होंने अभी अपनी पत्नी श्वेता रोहिरा को तलाक नहीं दिया है। श्वेता सलमान की मुंहबोली बहन हैं। बताया जाता है कि गर्लफ्रेंड यामी गौतम को माता-पिता से मिलवा दिया है। उनके माता-पिता यामी को देख कर खुश हैं।
सूत्रों की मानें तो यामी परेशान हैं कि उन्हें पुलकित के पत्नी से अलगाव की वजह माना जा रहा है। वह चाहती हैं कि पुलकित के नाम के साथ श्वेता का नाम जल्दी से जल्दी हट जाए। चर्चा गर्म है कि यामी पुलकित पर श्वेता से तलाक के कागजात जल्दी फाइल करने का दबाव डाल रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि यामी-पुलकित चाहते हैं कि अपने रिश्ते को नया नाम दें। यही वजह है कि पिछले दिनों यामी के कहने पर पुलकित ने उन्हें अपने परिवार से मिलवाया। दिल्ली में पूरा दिन यामी सनम रे के को-स्टार के परिवार के साथ रहीं। यामी ने पुलकित के माता-पिता को एक रेस्तरां में डिनर पार्टी भी दी।
बताया जा रहा है कि पुलकित के घर का माहौल एक खुशनुमा परिवार की तरह था। माना जाता है कि पुलकित का परिवार कभी श्वेता के साथ नहीं था। पुलकित ने उनकी मर्जी के खिलाफ श्वेता से शादी की थी। साफ दिख रहा है कि यामी के मामले में ऐसा नहीं होगा।

'सुल्तान' की कहानी को लेकर सलमान खान पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

0

सलमान खान को धोखेबाज बताते हुए बिहार के एक शख्स ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला सलमान खान की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘सुल्तान’ से जुड़ा है। बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी साबिर अंसारी उर्फ साबिर बाबा के अनुसार, सुल्तान की कहानी उनकी जिंदगी की कहानी है। साबिर ने 2010 में सलमान को ये कहानी सुनाई थी और सलमान ने उनकी कहानी पर फिल्म बनाने के बदले उन्हें 20 करोड़ रुपये की रॉयल्टी देने का वादा किया था।
साबिर खान के वकील सुधीर कुमार ओझा का कहना है कि 2010 मे साबिर ने सलमान को अपनी जिंदगी की कहानी सुनाई तो उसपर सुपरस्टार ने फिल्म बनाने की बात कही। सलमान ने साबिर को 20 करोड़ रुपये देने की भी बात कही। सलमान ने इस फिल्म पर 2016 में काम किया और ईद पर फिल्म रिलीज भी हो गई। फिल्म कमाई के रिकॉर्ड भी तोड़ रही है लेकिन साबिर को अपने 20 करोड़ का इंतजार है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, साबिर से किया वादा जब सलमान ने नहीं निभाया तो उन्होंने मुजफ्फरपुर के सीजीएम कोर्ट में इसको लेकर 8 जुलाई को केस फाइल किया। सीजीएम रामचन्द्र प्रकाश ने इस मामले ज्यूजिशियल मजिस्ट्रेट एस के त्रिपाठी के यहां ट्रांसफर कर दिया। एस के त्रिपाठी ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख दी है।
सलमान खान के साथ फिल्म की अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और निर्देशक अली अब्बास जफर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति के वितरण के उत्प्रेरण), 406 (आपराधिक विश्वास हनन के लिए सजा), 504 (इरादे से जानबूझकर अपमान शांति भंग भड़काने के लिए), 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) के तहत केस दर्ज हुआ है।

आदर्श ग्राम योजना के लिए 95 सांसदों ने अब तक अपना गांव ही नहीं चुना है

0

11 अक्टूबर, 2014 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी. तब से अब तक 21 महीने गुजर गए लेकिन अब तक कई सांसदों ने इस योजना के तहत किसी भी गांव को गोद ही नहीं लिया है. जबकि दोनों सदनों के सांसदों में से कई ऐसे भी हैं जो इस योजना के दूसरे चरण के लिए भी अपने-अपने गांव चुन चुके हैं.
सांसद आदर्श ग्राम योजना का मकसद गांवों के मूलभूत ढांचे में सुधार लाना और उनमें ऐसे मूल्यों को स्थापित करना है जिससे वे आदर्श गांव बन जाएं. इस योजना के तहत लोकसभा के सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक गांव की पहचान करके 2016 तक उसे आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करना था. राज्यसभा के सांसदों को, जिस राज्य से वे आते हैं, वहां का कोई गांव गोद लेकर उसे आदर्श ग्राम बनाना था. इसके बाद 2019 तक कम से कम दो और गांवों का विकास इसी तर्ज पर हर सांसद को करना है. इसका मतलब यह हुआ कि वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में हर लोकसभा और राज्यसभा सांसद को कम से कम तीन गांवों को आदर्श ग्राम बनाना है.
अब इस योजना का दूसरा चरण शुरू हो चुका है. हालांकि इसकी शुरुआत भी कोई खास उत्साह जगाने वाली नहीं है लेकिन अब तक 82 सांसदों ने अपने पहले गांव का काम पूरा कराकर दूसरे गांव को गोद ले लिया है. इनमें लोकसभा के 66 और राज्यसभा के 16 सांसद शामिल हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव को पहले चरण में गोद लिया था. अब उन्होंने दूसरे चरण के लिए अपने संसदीय क्षेत्र में नागेपुर गांव को गोद लिया है.
दूसरे चरण की शुरुआत हो जाने के बावजूद अब तक 95 सांसदों ने पहले चरण के तहत भी कोई गांव गोद नहीं लिया है. इनमें 44 सांसद लोकसभा के हैं और 51 राज्यसभा के जिनमें ज्यादातर सांसद विपक्षी दलों के हैं. इनमें कई दिग्गज नेता भी शामिल हैं जो किसी एक दल के नहीं हैं. जिन सांसदों ने पहले चरण के तहत कोई गांव नहीं चुना है, उनमें से कई ऐसे भी हैं जो शहरी संसदीय क्षेत्र से चुनकर आते हैं. लेकिन इस योजना में यह व्यवस्था है कि वे अपने क्षेत्र के नजदीक के क्षेत्र के किसी गांव का चयन करके उसे आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित कर सकते हैं.
जिन लोगों ने अभी तक अपने लिए किसी गांव का चयन नहीं किया है उनमें वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश भी शामिल हैं. यह कुछ लोगों को हैरान कर सकता है क्योंकि वे पिछली यूपीए सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हुआ करते थे. लेकिन वे अकेले नहीं है. कांग्रेस में ऐसे कई और दिग्गज नेता और हैं जिन्होंने इस योजना के तहत कोई गांव चुनना जरूरी नहीं समझा. इनमें दिग्विजय सिंह, कर्ण सिंह, आनंद शर्मा, सत्यव्रत चतुर्वेदी, बीके हरिप्रसाद और अधीर रंजन चौधरी शामिल हैं.
वाम दलों के सीताराम येचुरी, डी राजा, तपन कुमार सेन और मोहम्मद सलीम जैसे नेताओं ने भी इस योजना के तहत किसी गांव का चयन करना जरूरी नहीं समझा. समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव और जनता दल यूनाइटेड के महासचिव केसी त्यागी भी इस सूची में शामिल हैं. हर मुद्दे पर अपनी राय देते रहने वाले एआईएमआईएम के सांसद असदुदीन ओवैसी ने भी अब तक इस योजना के तहत कोई गांव गोद नहीं लिया है.
इस सूची में हैरान करने वाला एक नाम सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी से भी है. यह नाम है केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन का. वे दिल्ली के चांदनी चौक से लोकसभा का चुनाव जीते हैं. जाहिर है कि उनके लिए अपने संसदीय क्षेत्र में कोई गांव तलाशना आसान नहीं है. लेकिन योजना के प्रावधानों के मुताबिक वे अपने पास के किसी संसदीय क्षेत्र का कोई गांव गोद लेकर उसे आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित कर सकते थे. उनके अलावा भाजपा में कई सांसद ऐसे हैं जो इस योजना से जुड़ना तो नहीं चाहते लेकिन मजबूरी में जुड़े हुए हैं.
यही वजह है कि इस साल की शुरुआत में पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह को एक पत्र लिखकर सभी सांसदों से गांव गोद लेने के लिए अनुरोध करना पड़ा था. सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोल से बातचीत में राजस्थान के एक भाजपा सांसद कहते हैं, ‘उस योजना को जारी रखने का क्या मतलब जिससे होना-जाना कुछ नहीं है और आप अपने क्षेत्र के लोगों के बीच मूर्ख साबित हो जाएं.’ दसअसल इस योजना के लिए सांसदों को अलग से कोई पैसा सरकार से नहीं मिलता है बल्कि उन्हें अपने एमपीलैड के पैसे को ही गांव के विकास के लिए इस्तेमाल करना होता है. ऐसे में सांसदों को लगता है कि अगर वे इसका एक बड़ा भाग एक गांव पर ही खर्च कर देंगे तो इसका असर बाकी क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा और उन्हें वहां रहने वाली जनता की भारी नाराजगी झेलनी पड़ेगी.

पंकजा मुंडे के विभाग का फैसला कोर्ट ने पलटा, 6300 करोड़ के ठेके रद्द

0

औरंगाबाद: मुंबई हाईकोर्ट के औरंगाबाद खंडपीठ ने अपने अहम फैसले को सुनाते हुए महाराष्ट्र सरकार के बड़े ठेके रद्द किए हैं। राज्य के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत 6300 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए थे। बीजेपी सरकार के फैसले को इस तरह से पहली बार पलटा गया है। बीजेपी नेता पंकजा मुंडे इस विभाग की मंत्री हैं।
पंकजा के अधीन महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने राज्यभर की आंगनवाड़ियों के जरिये गर्भवती महिला और 6 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए प्रोटीनयुक्त खाना खिलाने की मुहिम के टेंडर निकाले थे। इस तहत कुल 7 साल के लिए ठेके दिए गए। जिसकी कीमत 6300 करोड़ रुपये आंकी गई। इन फैसलों का लाभ राज्य के केवल 3 ठेकेदारों को मिलता देख उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सरकारी आदेश के खिलाफ 7 याचिका दायर हुई थी।सोमवार को हाईकोर्ट ने ठेके दिलाने के सरकारी नियम को गलत करार दिया।
याचिकाकर्ताओं के वकील ज्ञानेश्वर बागुल ने औरंगाबाद में मीडियाकर्मियों को बताया कि कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया के तहत राज्य को 70 ब्लॉक्स में विभाजित करने का फैसला गलत करार दिया है। सरकार ने इसी के तहत टेंडर दिए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह राज्य में इस काम को करने लायक योग्य संस्थाओं का सर्वे कर अगली कार्रवाई करें।
कोर्ट के इस आदेश के बाद उस विभाग की मंत्री पंकजा मुंडे विपक्ष के निशाने पर हैं। वैसे पंकजा का विवादों से पुराना नाता है। इस से पहले वे चिक्की स्कैम के आरोप झेल चुकी हैं। हाल ही में उनके विभागों में फेरबदल कर मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनके पर कतर दिए। जिसके बाद वे सार्वजनिक रूप से टि्वटर पर मुख्यमंत्री से भिड़ गई। सिर्फ इतना ही नहीं, पंकजा समर्थकों ने बीड़ में मुख्यमंत्री फडणवीस का पुतला फूंक दिया।
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता अनंत गाडगिल ने कहा कि कांग्रेस के किसी नेता को लेकर ऐसा फैसला आता तो पार्टी उसे तुरंत उसके पद से दूर कर देती। ऐसे में नैतिकता के आधार पर बीजेपी को फैसले लेने होंगे। लेकिन यहाँ गत दो साल से एक के बाद एक आरोप झेल चुके लोगों को हटाने के बजाए मौजूदा सरकार में पहले से विवादित लोगों को शामिल किया जा रहा है।
बहरहाल कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देने के लिए पंकजा मुंडे उपलब्ध नहीं हो सकी। उनके सिंगापुर में होने की वजह से उनके विभाग ने एक प्रेस रिलीज के जरिए दावा किया है कि मीडिया की खबरें गलत हैं और कोर्ट ऑर्डर प्राप्त होने के बाद विभाग के द्वारा इस मुद्दे पर तफसीलवार खुलासा किया जाएगा।

कोल्हापुर में बाढ़ से जनजीवन अस्तव्यस्त, नदियां खतरे के निशान से ऊपर

0

कोल्हापुर : महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में पिछले पांच-छह दिनों से हो रही लगातार बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। भारी बारिश की वजह से पंचगंगा समेत ज़िले की लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
पंचगंगा नदी में ख़तरे से आगाह करने का निशान 39 फीट पर है, जबकि ख़तरे का निशान 43 फीट पर, लेकिन हफ्ते भर से हो रही बारिश से फिलहाल नदी 43 फीट 5 इंच के निशान को पार कर चुकी है। नदी के आसपास बने कई मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। जिले में पानी 72 बराज के ऊपर से बह रहा है।
कोल्हापुर से कोंकण जाने वाली सभी सड़कें भी पानी में डूब गई हैं। कोल्हापुर-रत्नागिरी, कोल्हापुर-गगणबावडा हाइवे पर पानी भरने से इन सड़कों को बंद करना पड़ा है। कोल्हापुर की 25 छोटी बड़ी सड़कें पानी में डूब गई हैं। कई निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया गया है। पंचगंगा नदी के पास स्थित सारे गांवों को हाइअलर्ट पर रखा गया है।
कोल्हापुर जिला प्रशासन ने हालात से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीम बुलाई है, जिसमें 40 जवान शामिल हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर अगले 48 घंटों में बारिश की रफ्तार नहीं थमीं तो लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

तरकारी पर तक़रार! महाराष्ट्र में सब्जियों-फलों के दाम आसमान पर

0

पूरे महाराष्ट्र में सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। थोक कारोबारी किसान से ग्राहक के बीच अपनी भूमिका खत्म करने के सरकारी फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में मंडी में सब्जियों की भारी किल्लत हो रही है।
मंगलवार को कृषि राज्य मंत्री सदाभाऊ खोत मंत्रालय छोड़ सीधे दादर मंडी पहुंचे। वे अपने साथ 300 ट्रकों में किसानों का काफिला लेकर ग्राहकों को सीधा सब्ज़ी बेचने पहुंचे। काराबोरियों की हड़ताल के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘आज मुझे बहुत खुशी है कि किसान सीधे ग्राहक के दरवाजे पर जाकर सामान बेच रहा है, ये ऐतिहासिक फैसला है। हम कारोबारियों की भी बात सुनेंगे, उन्हें जो दिक्कत है उसे दूर करेंगे, लेकिन अगर ग्राहकों या किसानों को तकलीफ पहुंचाने की कोशिश की गई तो फिर हम कड़ी कार्रवाई से नहीं हिचकेंगे।’
सरकार की पहल से किसान खुश हैं, उन्हें उत्पाद के दाम करीब 10 फीसद ज्यादा मिल रहे हैं। जुन्नर से दादर मंडी पहुंचे किसान श्रीराम गाडवे ने कहा, ‘सरकार की पहल से हम ग्राहक को दस फीसदी सस्ता सामान बेच सकते हैं। पहले हमें चेक नाकों पर बहुत तकलीफ होती थी, हमारा बहुत नुकसान होता था, लेकिन इस फैसले के बाद हमें नाकों पर कोई परेशानी नहीं हो रही है।
कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने फल-सब्जियों को बाजार समितियों के चंगुल से आज़ाद कर दिया, जिसका मतलब यह है कि किसान और ग्राहक के बीच से बिचौलिया गायब हो गया। अब मंडी में किसान सीधे माल बेच सकता है, राज्य के 4000 कारोबारी इस फैसले के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।
कारोबारियों की हड़ताल के कारण रोज़ मंडी में आने वाले 600 ट्रकों की तादाद बमुश्किल 100 रह गई है। नतीजा एशिया की सबसे बड़ी वाशी थोकमंडी में ताला लगा है। एपीएमसी के संचालक अशोक वालुंज ने कहा, ‘शासन के गलत फैसले की वजह से सामुदायिक छुट्टी पर गए हैं, बाहर के लोगों के लिए कानून नहीं, हमारे ऊपर कानून है। सरकार का कहना है कि ‘किसान टू ग्राहक फ्री ट्रेड’ किया है, किसान कहीं से भी माल लाकर कहीं बेच सकता है, लेकिन हम लोगों को बंधन रहेगा हम लोगों ने करोड़ों का निवेश किया है उसका क्या, 4 पीढ़ी से कर रहे हैं, हमारा क्या?’
वहीं एपीएमसी में फलों के कारोबारी मनोहर तोतलानी ने कहा, ‘सरकार का रवैया दादागिरी वाला है, जो एपीएमसी के बाहर धंधा करेगा, वो नियम मुक्त हम नियम में? हमारी मांग है कि हमें भी नियम मुक्त कर दो, आम आदमी को तकलीफ हो रही है। किसानों को यहां सभी सुविधाएं हैं, नीलाम गृह बना है। माल नहीं आने से महंगा हुआ है।’
इस हड़ताल की वजह से मुंबई के बाज़ारों में पत्ता गोभी 50 से 90 रुपये तक जा पहुंची है। फूल गोभी 70 से 120 रुपये हो गई, टमाटर 15 रुपये से सीधे 80 तक जा पहुंचा है। बैंगन भी 50 रुपये से 90 रुपये तक जा पहुंचा है। बीन्स 135 रुपये किलो था, जो अब 200 रुपये में बिक रहा है। आलू 20 रुपये की बजाय अब 30 में बिकने लगा है।
इससे लोगों का बजट बिगड़ रहा है, मंडी में खरीदारी करने आई कोमल ने कहा सब्जी का तिगुना दाम है, कुछ भी नहीं ले सकते आलू 40 रुपये, कांदा 30 रुपये है। वहीं भावेश का कहना था, ‘बहुत थोड़ा लिया है, मैं कोपरखैरणे से सानपाडा आया हूं, यहां भी सब्ज़ी अच्छी नहीं है, टमाटर 80 रुपये है, क्वॉलिटी भी अच्छी नहीं है।’
महाराष्ट्र में 1977 में बाजार समितियां बनी थीं, जिससे करीब एक लाख लोग सीधे वहीं 3-4 लाख परोक्ष रूप से रोज़ी कमाते हैं। व्यापारी कहते हैं कि थोक बाजार में 30 फीसदी उपज सीधे आती है, 70 प्रतिशत खरीदकर मंगाई जाती है ऐसे में किसान या ग्राहकों को लूटने के आरोप बेबुनियाद हैं।
एपीएमसी में हर साल लगभग 15000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जिस पर ज्यादातर एनसीपी को समर्थन देने वाले कारोबारियों का नियंत्रण है। वैसे यह भी सही है कि फल-सब्जी को डीलिस्टिंग करने का फैसला यूपीए सरकार के वक्त ही हुआ था, जिसे बीजेपी अपने शासन वाले राज्‌यों में ग्राहक और किसानों को फायदा पहुंचाने के नाम लागू कर रही है। ऐसे में एक बात याद रखने वाली है कि सब्जी का सियासी भाव सरकारें उखाड़ फेंकने की ताकत रखती हैं।

‘शक्तिमान’ की प्रतिमा पर उत्तराखंड में सियासत गरमाई

0

चार महीने पहले उत्तराखंड में सियासी तूफान का सबब बने राज्य पुलिस के घोड़े ‘शक्तिमान’ की राज्य विधानसभा के पास रिस्पना पुल पर प्रतिमा लगाने और फिर रातोंरात हटा देने से प्रदेश का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। उधर रिस्पना पुल पर लगी प्रतिमा पर हुई तीव्र प्रतिक्रिया के बाद पुलिस लाइंस में लगी घोडे की एक अन्य प्रतिमा का अनावरण करने से मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इनकार कर दिया है।
उत्तराखंड विधानसभा के पास रिस्पना पुल चौराहे पर दो दिन पहले लगाई गई शक्तिमान की मूर्ति हटा ली गई। माना जा रहा है कि ड्यूटी पर घायल होने के कारण मौत का शिकार हुए शक्तिमान की प्रतिमा लगाने के बाद सोशल मीडिया सहित जनता में हुई तीव्र प्रतिक्रिया की वजह से उसे हटा लिया गया। घोड़े की प्रतिमा के विरोध के कारण उसे लगाने और रातोंरात हटाने वाली संस्था मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने इसे हटाने का कोई कारण भी नहीं बताया है। इस बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि घोडेÞ की मूर्ति परीक्षण के लिए लगाई गई थी। इसमें रह गई कमियों को दूर कर इसे फिर से स्थापित कर दिया जाएगा। रिस्पना पुल चौराहे से शक्तिमान की मूर्ति हटाने को लेकर विपक्षी भाजपा ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने शक्तिमान की मूर्ति भाजपा को बदनाम करने के लिए लगाई थी। अब वह यह भी नहीं बता रही कि रातोंरात वह आखिर कहां चली गई। भट्ट ने घोड़े की मूर्ति लगाने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार केवल घोडेÞ पर सियासत करना चाहती है वरना वह इसकी जगह राज्य आंदोलन के दौरान प्राण गंवाने वाले आंदोलनकारियों की मूर्तियां लगाती। शक्तिमान की एक और प्रतिमा देहरादून पुलिस लाइंस में स्थापित की गई है। लेकिन रिस्पना पुल पर लगी प्रतिमा पर हुई प्रतिक्रिया को देखते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसका अनावरण करने से इनकार कर दिया है। जबकि पुलिस सूत्रों ने कहा कि पुलिस लाइंस में लगी प्रतिमा वहीं स्थापित रहेगी। उसे नहीं हटाया जाएगा।
प्रदेश के गृह मंत्री प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने शक्तिमान की मूर्ति लगाने का फैसला किया था लेकिन अब मुख्यमंत्री रावत ने उसके अनावरण का मसला अगली चुनी हुई सरकार पर छोड़ने का फैसला किया है। गत 14 मार्च को भाजपा की राजनीतिक रैली के दौरान पैर टूटने से घायल हुए शक्तिमान को लेकर प्रदेश में सियासी तूफान उठ गया था। राज्य पुलिस ने इस संबंध में मसूरी से भाजपा विधायक गणेश जोशी और दो अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी की थी। घायल शक्तिमान का उपचार कराया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। एक महीने से ज्यादा समय तक चोट से जूझने के बाद 20 अप्रैल को उसने दम तोड़ दिया।

'आप' के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी बेटी को बनाया एक बड़ी योजना का मुखिया

0

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के मंत्रियों पर फर्जी डिग्री से लेकर महिलाओं पर छेड़खानी तक के आरोप लगते आ रहे हैं। इस बीच केजरीवाल के स्वास्‍थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने अपनी बेटी को अपने विभाग में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ‌सत्येंद्र जैन ने दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी मोहल्ला क्लिनिक योजना का मुखिया बनाया है। इतना ही नहीं उन्हें राष्ट्रीय स्वास्‍थ्य मिशन का हेल्‍थ सेक्रेटरी कम मिशन डायरेक्‍टर की जिम्मेदारी भी दी गई है।
सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को अपने इस नए काम को सुचारु ढंग से चलाने के लिए दिल्ली सचिवालय की नवीं मंजिल पर एक कमरा दिया है जिसमें उनकी पूरी टीम बैठेगी।
सौम्या की इस टीम में कुल सात लोग हैं जिसका नेतृत्व एक दिल्ली सरकार के स्वास्‍थ्य विभाग के एक डाक्‍टर कर रहे हैं। सचिवालय में सौम्या के विभाग को आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक मैनेजमेंट सेंटर का नाम दिया गया है।
अजीब बात ये है कि सौम्या की टीम में काम करने वाले ज्यादातर लोग वैतनिक हैं जबकि खुद सौम्या अपनी नई जिम्मेदारी के लिए सरकार से एक भी पैसा मेहनताने के तौर पर नहीं ले रही हैं।
जब सत्येंद्र जैन से इस बारे में पूछा गया कि आखिर क्यों उन्होंने अपनी बेटी को ही इस जिम्मेदारी के लिए चुना तो उनका जवाब था कि मेरी बेटी एक प्रमाणित आर्किटेक है और उसने ही मोहल्ला क्लिनिक की डिजाइन भी बनाई है।
अपने फैसले पर सफाई देते हुए सत्येंद्र जैन आगे कहते हैं कि दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक के उद्भव और विकास पर मेरी बेटी एक किताब भी लिख रही है। वो शुरु से ही इस प्रोजेक्ट से जुड़ी रही है और अब उसने इसे पूरी तरह अपना गोल बनाने का फैसला किया है।
स्वास्‍थ्य मंत्री का कहना है कि उनकी बेटी मोहल्ला ‌क्‍लिनिक प्रोजेक्ट के पूरा होने तक इससे जुड़ी रहेगी। हालांकि इस काम के लिए उसे सरकार की ओर से एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
बता दें कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य राजधानी में एक हजार मोहल्ला क्लिनिक की स्‍थापना करना है जिसमें से अब तक केवल 100 मोहल्ला क्लिनिकों की ही स्थापना की गई है।
दिल्ली सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद गरीबों को कम पैसे पर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्‍थ्य सुविधाएं उनके घर के आस-पास ही मुहैया कराना है।

CBSE नए अध्यक्ष के नाम पर स्मृति ईरानी के प्रस्ताव को मोदी ने ठुकराया

0

स्मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्रालय हटाए जाने के एक हफ्ते बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीबीएसई के नए अध्यक्ष के चुनाव में उनकी पसंद को ठुकरा दिया है। इसके अलावा चयन की सभी प्रक्रिया से उन्हें हटा भी दिया गया है।
पीएम मोदी जो कि कैबिनेट की चयन समिति के अध्यक्ष हैं, ने सीबीएसई के अगले अध्यक्ष के तौर पर डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह के नाम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार मंगलवार को एचआरडी मंत्रालय को एक पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें कहा गया है कि सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत तमाम पदों पर होने वाली भर्ती संबंधित नियम को फिलहाल लंबित किया जाता है।
गौरतलब हो कि CBSE दिसंबर 2014 से बिना अध्यक्ष के है। इस पोस्ट के लिए जिस अधिकारी की तलाश है वह संयुक्त सचिव रैंक का होना चाहिए। रिक्रूटमेंट नियम के मुताबिक इस पद के लिए वही अधिकारी योग्य होगा जिसके पास शिक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में तीन साल का अनुभव हो।
अभी तक की चयन प्रक्रिया में पैनल ने तीन नाम पर चर्चा की है। इसमें डॉ. सर्वेंद्र का नाम स्मृति ईरानी की पसंदीदा सूची में था। इसकी जानकारी 15 जून को भेजी की चिट्ठी में भी दी गई थी। वर्तमान में सर्वेंद्र स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग के डायरेक्टर हैं।
यह दूसरा मौका है जब स्मृति ईरानी के पसंदीदा अधिकारी के नाम को ठुकरा दिया गया है। इससे पहले एसीसी ने अगस्त 2015 में भी सतबीर बेदी के नाम को भी ठुकरा दिया था।