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एक गांव में जमीन के अंदर से आ रहीं आवाजें, ग्रामीण भयभीत

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मुंबई: मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए कई तरह की खबरें सामने आती रहती हैं। इनमें कई खबरें ऐसी भी होती हैं, जिनके बारे में सुनने और जानने के बाद लोग चौंक जाते हैं। ये खबरें लोगों को चौंका देती हैं। ऐसी ही एक चौंकाने वाली खबर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक गांव हसोरी में पिछले कुछ दिनों से जमीन के अंदर से आ रही आवाजों के कारण ग्रामीण भयभीत हैं। हालांकि भूगर्भशास्त्रियों ने किसी प्रकार के भूकंप की आशंका से इनकार किया है। यहां के ग्रामीण पिछले 15 दिनों में चार बार जमीन के नीचे से आजावें आने की बात कह रहे हैं।

लातूर के निलंगा तालुका के हसोरी गांव में पिछले 15 दिनों में चार बार जमीन के नीचे से आवाजें आने की बात कही जा रही है। इससे ग्रामीण इतने भयभीत हैं कि वे रात को घर के अंदर सो भी नहीं पा रहे हैं। लातूर की भूकंप वेधशाला के प्रभारी किशोर सिंह परदेशी के अनुसार, गत छह और आठ सितंबर को जमीन के अंदर से गड़गड़ाहट की आवाज आई थी।

लेकिन, यह किसी तरह का भूकंप नहीं था। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी गांव का दौरा कर ग्रामवासियों को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि किसी भूगर्भीय हलचल के कारण इस प्रकार की आवाजें आ रही होंगी, लेकिन भूकंप के कोई संकेत फिलहाल नहीं मिले हैं। फिर भी यहां के ग्रामीण पिछले कुछ दिनों से काफी भयभीत हैं।

1993 में गणपति विसर्जन की अगली सुबह ही लातूर और उसके पड़ोसी जिले उस्मानाबाद में बड़ा भूकंप आया था। इस भूकंप की चपेट में आने से करीब सात हजार लोग मारे गए थे। उस समय लातूर के जिस किल्लारी गांव को भूकंप से सर्वाधिक नुकसान हुआ था, वह इस हसोरी गांव से सिर्फ 28 किलोमीटर दूर है। हसोरी के लोगों ने करीब 30 साल पहले के उस भूकंप की विभीषिका देखी है। इसलिए वे जमीन के नीचे से आ रही आवाजों से और भयभीत हो रहे हैं।

बेंगलुरु के एक बड़े टेक पार्क ने कुबूल किया सच, बोले “हां, हमने नाले पर किया है अतिक्रमण…”

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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अभी हाल ही में बारिश और जलजमाव के बाद बेहाल हो गई थी। इंजीनियर से लेकर अधिकतर कर्मचारियों को ऑफिस जाने के लिए ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ा था। सरकार ने बारिश के बाद बेंगलुरु में बने हालात के लिए सीवेज और जल निकासी सिस्टम पर अतिक्रमण को बड़ी वजह बताई थी। जिसको देखते हुए अतिक्रमण के खिलाफ एक अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में कई क्षेत्रों में स्टॉर्म वाटर लाइन पर आने वाले अवैध ढांचे को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया।

इन ढांचों में कई बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। जारी की गई सूची के अनुसार बागमान टेक पार्क के अलावा विप्रो, प्रेस्टीज, इको स्पेस, कोलंबिया एशिया अस्पताल और दिव्यश्री विला भी लिस्ट में शामिल हैं। खबर मिली है कि एक बड़े टेक पार्क ने स्वीकारा है कि उसने नाले पर अतिक्रमण किया है लेकिन इसके लिए निकटवर्ती पूर्वा पार्क्रिज के निर्माता पूर्वांकर पर दोष मढ़ा है। इस पार्क को भी शहर के कुछ हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

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बागमाने के महाप्रबंधक जीपी चक्रवर्ती ने इस बात को कुबूल है। उन्होंने एक बयान में कहा है कि “हां, हमने नाले को स्लैब से ढक दिया है। हमने ऐसा केवल महादेवपुरा झील से पानी के वापस प्रवाह को रोकने के लिए किया था। अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो बागमाने में बाढ़ आ जाती।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “यहां मुख्य दोषी पूर्वांकर पुरवारिज विला हैं, जिन्होंने तूफान नाले को ढक दिया है।” ब्रृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने इलाके में पिछले महीने एक सर्वेक्षण किया था और अतिक्रमण का पता लगाया था।

हेमंत सोरेन सरकार के दो बड़े फैसले, झारखंड में बढ़ा OBC रिजर्वेशन….

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महाराष्ट्र की तरह अब झारखंड में भी सरकार गिरने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बता दें कि अपनी सरकार को बचाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने दो अहम फैसले लिए हैं। ये दो फैसले इस समय काफी अहम माने जा रहे हैं। इनमें एक फैसला स्थानीय नीति में 1932 का खतियान का प्रावधान करना है और दूसरा फैसला आरक्षण नीति में फेरबदल कर ओबीसी का कोटा बढ़ाना है। बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई। इस बैठक में इन दोनों फैसलों पर विचार हुआ। मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को हुई बैठक में 43 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है।

सूत्रों के मुताबिक इस बात की जानकारी कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने दी है। मंत्रिमंडल सचिव वंदना डाडेल ने बताया है कि “मंत्रिमंडल ने ‘स्थानीयता’ की नीति 1932 के खतियान के आधार पर तय करने और पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने समेत विभिन्न वर्गों के लिए कुल 77 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित करने के लिए अलग-अलग विधेयक राज्य विधानसभा में पेश किये जाने की स्वीकृति प्रदार की। राज्य मंत्रिमंडल ने दोनों फैस्लों से संबधित दोनों विधेयकों को विधानसभा से पारित कराने और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद केन्द्र सरकार के पास भेजने का भी निर्णय लिया।”

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उन्होंने आगे कहा कि “मंत्रिमंडल ने केन्द्र सरकार से यह अनुरोध करने का निर्णय लिया गया कि वह इन दोनों कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करे जिससे इन्हें देश की किसी अदालत में चुनौती न दी जा सके। स्थानीयता की नीति में संशोधन के लिए लाए जाने वाले नए विधेयक का नाम ‘झारखंड के स्थानीय निवासी की परिभाषा एवं पहचान हेतु झारखंड के स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा एवं परिणामी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य लाभों को ऐसे स्थानीय व्यक्तियों तक विस्तारित करने के लिए विधेयक 2022′ होगा।”

उत्तराखंड : घोटाला पुराना, चर्चा नई, आप भी जानें क्या है मामला?

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गोपेश्वर : उत्तराखंड में जब से भर्ती घोटालों की जांच शुरू हुई है, तब से आए दिन भ्रष्टाचार के नित नए मामले सामने आ रहे हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है,ऐसा कोई विभाग नहीं, ऐसा कोई संस्थान नहीं, जिस पर भ्रष्टाचार का साया न हो. ऐसा ही खेल, खेल विभाग में हुआ. मामला उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन और उसके तत्कालीन अध्यक्ष राजीव मेहता का भी प्रतीत होता है. इस मामले में कॉमरेड इनद्रेश मैखुरी ने जांच कि मांग कि है.

अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड शासन की जांच रिपोर्ट और सहायक निदेशक,कोषागार एवं वित्त सेवाओं की संपरीक्षा (ऑडिट) रिपोर्ट को देख कर स्पष्ट होता है कि 12 फरवरी 2004 से 18 फरवरी 2004 के मध्य राज्य में हुए प्रथम ओलंपिक खेलों के आयोजन के नाम पर उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजीव मेहता द्वारा किस तरह धन की बंदरबांट और गबन किया गया.

17 जुलाई 2004 की अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड की जांच रिपोर्ट के अनुसार 15 मार्च 2004 को उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के खाते से छह लाख रुपये की धनराशि राजीव मेहता के व्यक्तिगत खाते में हस्तांतरित की गयी और 16 मार्च 2004 को उनकी पत्नी दीपा मेहता के खाते में उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के खाते से पाँच लाख रुपए की धनराशि हस्तांतरित की गयी. अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि “यह एक गंभीर वित्तीय अनयमितता का प्रकरण है.” साथ ही उक्त जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि 29 मार्च 2004 को भी पचास हजार रुपए की धनराशि उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के खाते से निकाली गयी. कुल ग्यारह लाख पचास हज़ार रुपये के खर्च का कोई विवरण, जांच अधिकारी को नहीं मिला.

सहायक निदेशक, कोषागार एवं वित्त सेवाओं की नवंबर 2004 की विशेष ऑडिट रिपोर्ट के देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि जिस ग्यारह लाख पचास हज़ार रुपये की धनराशि के खर्च को अपर निदेशक,खेल ने वित्तीय अनियमितता माना, उसी धनराशि को ऑडिट के सामने राजीव मेहता और उनकी पत्नी दीपा मेहता द्वारा उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन को दिये गए ऋण के रूप में पेश किया गया और फिर उस ऋण का लौटाना भी दर्शा दिया गया. यह बेहद रोचक है कि उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता ने व्यक्ति राजीव मेहता व उनकी पत्नी से ऋण लिया, व्यक्ति राजीव मेहता और उनकी पत्नी ने उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता को ऋण दिया और फिर उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता ने व्यक्ति राजीव मेहता व उनकी पत्नी का ऋण लौटाया.

किसी संस्था के, व्यक्ति की जेबी संस्था बन जाना ऐसा ही होता होगा. यह गौरतलब है कि विशेष ऑडिट रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि उक्त ऋण से संबंधित पत्रावली ऑडिट के सामने पेश नहीं की गयी. ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दीपा मेहता एसोसिएशन के किसी पद पर नहीं थी. इनके द्वारा सीधे भुगतान का औचित्य स्पष्ट नहीं हो सका.” अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड की जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि 15-16 फरवरी 2004 को जिमनास्टिक प्रतियोगिता इंडियन पब्लिक स्कूल शिलाकी में आयोजित हुई. उत्तरांचल जिमनास्टिक संघ के तत्कालीन सचिव के अनुसार उक्त प्रतियोगिता के आयोजन पर बीस हजार तीन सौ रुपया खर्च हुआ और भुगतान केवल बाइस सौ रुपया किया गया.

जबकि राजीव मेहता द्वारा उक्त प्रतियोगिता पर त्रेसठ हजार दो सौ छियानबे रुपये खर्च दर्शाया गया. अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड की जांच रिपोर्ट में आशंका प्रकट की गयी थी कि अन्य खेलों में भी धनराशि इसी तरह बढ़ा-चढ़ा कर दिखाई गयी होगी. अपर निदेशक,खेल, की जांच रिपोर्ट और विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि राजीव मेहता द्वारा राज्य खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों, कोच एवं अन्य स्टाफ की फर्जी सूची के आधार पर फर्जी संख्या दर्शायी गयी.

उदाहरण के तौर पर देखें तो चमोली के तत्कालीन जिलाधिकारी को भेजी अपनी रिपोर्ट में चमोली जिले के तत्कालीन क्रिड़ा अधिकारी ने लिखा कि तायकोंडो के पुरुष एवं महिला टीम के तौर पर जिनका नाम अंकित किया गया है, उनमें से कोई खिलाड़ी, मैनेजर, कोच चमोली जिले से संबंधित नहीं है. इसी तरह महिला जिमनास्टिक टीम में भी जिन्हे चमोली जिले की सूची में दर्शाया गया, उनमें से कोई खिलाड़ी, मैनेजर, कोच चमोली जिले से संबंधित नहीं है.

टिहरी के तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि टिहरी जिले की बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी की सूची गलत है, इन प्रतियोगिताओं में जिले की टीमों ने हिस्सा नहीं लिया.तकरीबन हर जिले से इस तरह की फर्जी टीमों का उल्लेख जांच रिपोर्ट में है. इसके अलावा खिलाड़ियों की संख्या बढ़ा कर दिखाये जाने के मामलों का उल्लेख भी जांच रिपोर्ट में किया गया है.

सहायक निदेशक, कोषागार एवं वित्त सेवाओं की नवंबर 2004 की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में भी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले प्रतियोगियों को यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ता भुगतान करने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रतियोगियों की सूची प्रमाणित नहीं थी. अप्रमाणित सूची के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया. ऑडिट रिपोर्ट में विभिन्न मदों में अधिक भुगतान किए जाने का उल्लेख किया गया है. ऑडिट रिपोर्ट में उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के रोकड़ बही, लेजर आदि में गड़बड़ी एवं विभिन्न व्ययों में अनियमितता का उल्लेख किया गया.

उक्त तमाम बातों और जांच रिपोर्टों को देख कर स्पष्ट प्रतीत होता है कि राजीव मेहता के अध्यक्ष रहते उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन में भारी भ्रष्टाचार और धन की बंदरबांट हुई है. इस तरह के भ्रष्टाचार ने निश्चित ही राज्यों में खेलों के विकास की संभावनाओं को कुंद किया.

उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन में खेल के नाम पर हुए भ्रष्टाचार के खेल की भी एसआईटी या ऐसी ही जांच की आवश्यकता है. इस संदर्भ में यह भी अवगत कराना है कि इस प्रकरण की जांच के लिए गोपेश्वर के खेल प्रेमियों ने 7 सितंबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कोतवाली गोपेश्वर में प्रार्थना पत्र दिया गया. लेकिन एक हफ्ते बाद भी उक्त प्रार्थना पत्र पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIIR) दर्ज नहीं की गयी.

उत्तराखंड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 37 हजार अभ्यर्थियों को मिलेगा सीधा लाभ, ये है पूरा मामला

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नैनीताल: नैनताल हाईकोर्ट राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने उनको सहायक अध्यापक प्राथमिक की भर्ती परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। राज्य में 2648 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने राज्य सरकार के रोक संबंधी 10 फरवरी 2021 को जारी आदेश को भी निरस्त कर दिया है। कोर्ट के इस आदेश से एनआईओएस से डीएलएड प्रशिक्षण लेने वाले प्रदेश के करीब 37 हजार अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।

अभ्यर्थियों ने शासनादेश को चुनौती दी थी। नंदन सिंह बोहरा, निधि जोशी, गंगा देवी, सुरेश चंद्र गुरुरानी, संगीता देवी और गुरमीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने राज्य सरकार के 10 फरवरी 2021 के शासनादेश को चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि उन्होंने 2019 में एनआईओएस से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी इस डिग्री को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं एनसीटीई से मान्यता दी गई है।

सरकार ने फरवरी में काउंसलिंग से उनको बाहर कर दिया था। उनका कहना है कि 16 दिसम्बर 2020 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, 6 जनवरी 2021 को एनसीटीई और 15 जनवरी 2021 को शिक्षा सचिव ने उन्हें सहायक अध्यापक प्राथमिक में शामिल करने को कहा था, लेकिन 10 फरवरी 2021 को सरकार ने यह कहते हुए उन्हें काउंसलिंग से बाहर कर दिया कि सरकार के पास कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। जबकि इससे पहले याचिकाकर्ताओं के समस्त शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा हो चुके थे।

शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने कह कि डीएलएड भर्ती में 70 फीसदी से अधिक पदों पर चयन हो चुका है, अब कुछ पदों पर ही चयन होना है। कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद कुछ कहना संभव हो पाएगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता सीडी बहुगुणा ने कोर्ट में तर्क दिया कि राज्य सरकार और एनसीटीई के आदेश विपरीत होने के कारण निरस्त किए जाने योग्य है। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को सुनने के बाद अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया है।

डीएलएड मामले में कोर्ट ने सरकार पर लापरवाही बरतने पर दो हजार रुपया प्रति याचिकाकर्ता के हिसाब से अर्थदंड लगाया है। जो सरकार को याचिकाकर्ताओं को देना है। मामले में करीब 350 याचिकाकर्ता हैं, जिनको यह रकम सरकार को देनी होगी।

गोवा में कांग्रेस को बड़ा झटका, आठ विधायकों ने छोड़ी पार्टी

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गोवा में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. बुधवार को राज्य के आठ विधायकों ने कांग्रेस का हाथ छोड़ते हुए कमल का दामन थाम लिया. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माइकल लोबो समेत कांग्रेस के आठ विधायकों को सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल कराया गया.

इन विधायकों ने छोड़ी कांग्रेस

दिगंबर कामत, माइकल लोबो, देलिलाह लोबो, राजेश फलदेसाई, केदार नाइक, संकल्प अमोनकर, एलेक्सियो सेक्विएरा और रूडोल्फ फर्नांडिस.

इस मौके पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि कांग्रेस के छोड़ो यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. दूसरी तरफ विधायकों के छोड़कर जाने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि नहीं पता कि लोभ में या डर से बीजेपी गए हैं. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से बीजेपी की जमीन खिसक गई है. उन्होंने आगे कहा कि जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ वोट मांगा वो किस मुंह से बीजेपी में शामिल हो रहे हैं?

 

 

दरअसल, गोवा में 40 विधानसभा सीटें है और इस साल फरवरी महीने में चुनाव हुए थे. राज्य में बीजेपी गठबंधन के पास 25 विधायक हैं तो वहीं कांग्रेस के पास 11 विधायक हैं. इससे पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने यह दावा करते हुए कहा था कि कांग्रेस के आठ विधायक उनकी पार्टी में शामिल होंगे.

फरवरी के महीने में गोवा कांग्रेस ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि, गोवा फॉरवर्ड पार्टी गठबंधन के सभी 40 उम्मीदवार एकजुट और वफादार रहने के लिए #PledgeOfLoyalty लेते हैं. ये गोवा की पहचान को बेचने वाली किसी भी गतिविधि में कभी भी समर्थन या भाग लेने की प्रतिज्ञा नहीं करते हैं.

ये खबर उस वक्त आयी है जब कांग्रेस देशभर में भारत जोड़ो यात्रा निकाल रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में देशभर में 150 दिन की 3750 किलोमीटर की यात्रा निकाली जा रही है. ये यात्रा देश के 12 राज्यों से होकर गुजरेगी. आज भारत जोड़ो यात्रा का 8वां दिन है.

 

 

 

उत्तराखंड: चाय बागान मामले में हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

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नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट में देहरादून में चाय बागान की जमीन मामले में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने जमीन खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी। इस क्षेत्र में असम निवासी संतोष अग्रवाल पुत्र स्व. इद्वावती की भी संपत्ति थी। उन्होंने इस मामले में उन्होंने उनको हाईकोर्ट में पक्षकार बनाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर उनको पक्षकार बना गया।

चाय बगान

उन्होंने हाईकोर्ट में अपना पक्ष पेश किया। पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने संतोष अग्रवाल की संपत्ति खसरा संख्या 203, 204, 205 कोई हस्तक्षेप नहीं करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट से इस मामले में उनको बड़ी राहत मिली है। दरअसल, हाईकोर्ट ने संपत्ति को चाय बागान की संपत्ति मानते हुए उसकी खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी थी।

न्यायिक हिरासत में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और विधायक बच्चू काडू, ये है पूरा मामला

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मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और विधायक बच्चू कडू को गिरगांव की अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 2018 में राजनीतिक विरोध के दौरान बाधा डालने के मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद वह अदालत में पेश हुए। चुनावी हलफनामे में सूचनाएं छिपाने के लिए फरवरी, 2022 में एक स्थानीय अदालत ने महाराष्ट्र के तत्कालीन स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री बच्चू काडू को दो महीने के सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई थी। कोर्ट के सिविल जज एलसी वाडेकर ने काडू को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किए गए अपराध के लिए सजा सुनाई है।

प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता काडू को सजा सुनाए जाने के बाद ही कोर्ट से जमानत मिल गई है। जेल की सजा के अलावा कोर्ट ने उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में भाजपा नेता गोपाल तिरामरे ने काडू पर 2014 के विधानसभा चुनाव के लिए शपथ पत्र देते समय मुंबई में 43.46 लाख रुपये का फ्लैट होने की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है।

हालांकि, इन आरोपों से इनकार करते हुए काडू ने अदालत में कहा था कि उन्होंने कर्ज नहीं चुका पाने के कारण पहले ही फ्लैट बेच दिया था। दिसंबर, 2020 में केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता रावसाहेब दानवे ने कहा था कि किसानों के आंदोलन के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसानों का आंदोलन नहीं है, किसानों को भड़काया जा रहा है। बच्चू कडू ने उनके बयान पर गुस्सा जाहिर किया है। कडू ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने ऐसा बयान दिया था, तो हमने उनके घर का घेराव किया था। अब लग रहा है कि हमें उनके घर में जाकर उन्‍हें पीटना होगा।

रनवे पर धुआं-धुआं हो गया एयर इंडिया का विमान, इमरजेंसी में निकाले गए यात्री

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मस्कट अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर बुधवार को एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान से अचानक धुंआ निकलने लगे। कोचीन जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 442 के इंजन नंबर 2 से धुएं निकलने और आग लगने के बाद बुधवार को 140 से अधिक यात्रियों को इमरजेंसी में निकालना पड़ा।

ओमान स्थित लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में करीब 14 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यात्री विमान से धुआं निकलने के बाद स्लाइड पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान से यात्रियों को बाहर निकाला गया। अधिकारियों ने कहा कि यह विमान बुधवार की सुबह कोच्चि के लिए रवाना होने वाला था लेकिन उससे पहले ये हादसा हो गया। बता दें कि मस्कट ओमान की राजधानी है।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, “VT AXZ के तौर पर रजिस्टर्ड विमान, बी737-800 मस्कट में टेक-ऑफ के लिए तैयार था तभी उसमें धुंआ और इंजन नंबर 2 में आग लगने के बारे में पता चला। हालांकि सभी यात्रियों (141+4 शिशुओं) को सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया।” अधिकारी ने कहा, यात्रियों को टर्मिनल बिल्डिंग ले जाया गया है और उन्हें वापस लाने के लिए एक राहत उड़ान की व्यवस्था की जाएगी।

एयर इंडिया एक्सप्रेस की मस्कट-कोच्चि फ्लाइट जब उड़ान के दौरान रनवे पर थी तभी उसमें धुएं का पता चला। जिसके बाद इमरजेंसी में यात्रियों को स्लाइड के माध्यम से बाहर निकाला गया। जहाज पर 141 यात्री और छह चालक दल सवार थे। सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है और वे सभी सुरक्षित हैं।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने एक बयान में कहा कि यात्रियों के लिए “दूसरी फ्लाइट उपलब्ध कराई जाएगी।” नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के महानिदेशक, अरुण कुमार ने कहा, “हम जांच करेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे।” उड्डयन मंत्रालय के अधिकारियों ने एचटी को बताया कि एक जानकार ने इंजन में आग लगने की सूचना दी जिसके बाद सभी जरूरी एक्शन लिए गए और टैक्सीवे पर यात्रियों को निकालने के लिए स्लाइड्स तैनात की गईं।

उत्तराखंड में दिल दहलाने वाली दो घटनाएं, आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?

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ऋषिकेश/पिथौरागढ़: ऋषिकेश में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसके बारे में जानकार आप भी हैरान रह जाएंगे। राजकीय अस्पताल में 8 माह की बच्ची की बुधवार की सुबह आपातकालीन कक्ष में मौत हो गई। बच्ची के पिता ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने से पूरे मामले की शिकायत की है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने इस मामले में जांच की बात कही है। वहीं, पिथौरागढ़ का एक हृदय विदारक वीडियाे वायरल हो रहा है। यह वीडियो पूरे सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक बच्चे को लेकर उसका पिता जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचा है। लेकिन उपचार न मिल पाने के कारण गोद में ही बच्चे की मौत हो गई है। घटना का वीडियाेे इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

ऋषिकेश चंद्रेश्वर नगर, गली नंबर 19 निवासी राजकुमार ने बताया कि उसकी आठ माह की पुत्री निधि को मंगलवार को उल्टी की शिकायत हुई। उनकी पत्नी सीमा बच्ची को लेकर रात में राजकीय चिकित्सालय की इमरजेंसी में पहुंची। वहां डॉक्टर ने पीने के लिए कुछ दवाई दी और सुबह बाल बच्चों के डॉक्टर को दिखाने के लिए कह दिया।

बुधवार की सुबह सही वक्त पर अस्पताल पहुंच गए थे। करीब आधा घंटा लाइन में खड़ा होना पड़ा। बाद में बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्ची के परीक्षण के बाद उसे आपातकालीन सेवा में ले जाकर भर्ती कराने को कहा। सुबह ड्यूटी पर उपस्थित डॉ. सागर भट्ट ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ स्वयं बच्ची को आपातकालीन सेवा में लेकर आए। उसे उपचार देना शुरू कर दिया गया था, लेकिन उसकी मौत हो गई।

बच्ची की मां सीमा और पिता राजकुमार ने इमरजेंसी सेवा में बीती रात उपचार के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रात में ही यदि बाल रोग विशेषज्ञ को बुला लिया गया होता तो आज उनकी बच्ची जीवित होती। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीके चंदोला ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति सीएमओ को की जाएगी।

पिथौराग़ढ़ के वायरल वीडियो बीते शनिवार का पिथौरागढ़ के बीडी पांडे जिला अस्पताल का बताया जा रहा है। वीडियो बनाने वाला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए सुनाई दे रहा है। जिसमें बताया जा रहा है कि पिता गंभीर रूप से बीमार बच्चे को लेकर पिता पहले इमरजेंसी वार्ड में गया। लेकिन इमरजेंसी में देखने की बजाए उसे ओपीडी में भेज दिया गया है। इस दौरान बच्चे की मौत हो गई। वीडियो में अस्पताल परिसर में पिता कपड़े में लिपटे बेटे का शव गोद में लेकर बैठ कर रो रहा है। वीडियो में ही बाद में बच्चे को लेकर जाते हुए परिजन भी नजर आ रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन से बात की गई तो उनका कहना है कि बच्चे के उपचार में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई। इमरजेंसी में चेकअप के बाद जांच की गई, बच्चा रक्त संबंधी बीमारी से ग्रसित था। बीमारी से ही बच्चे की मौत हुई है। अस्पताल की व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवाल बेबुनियाद हैं।