उत्तराखंड : घोटाला पुराना, चर्चा नई, आप भी जानें क्या है मामला?

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गोपेश्वर : उत्तराखंड में जब से भर्ती घोटालों की जांच शुरू हुई है, तब से आए दिन भ्रष्टाचार के नित नए मामले सामने आ रहे हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है,ऐसा कोई विभाग नहीं, ऐसा कोई संस्थान नहीं, जिस पर भ्रष्टाचार का साया न हो. ऐसा ही खेल, खेल विभाग में हुआ. मामला उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन और उसके तत्कालीन अध्यक्ष राजीव मेहता का भी प्रतीत होता है. इस मामले में कॉमरेड इनद्रेश मैखुरी ने जांच कि मांग कि है.

अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड शासन की जांच रिपोर्ट और सहायक निदेशक,कोषागार एवं वित्त सेवाओं की संपरीक्षा (ऑडिट) रिपोर्ट को देख कर स्पष्ट होता है कि 12 फरवरी 2004 से 18 फरवरी 2004 के मध्य राज्य में हुए प्रथम ओलंपिक खेलों के आयोजन के नाम पर उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजीव मेहता द्वारा किस तरह धन की बंदरबांट और गबन किया गया.

17 जुलाई 2004 की अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड की जांच रिपोर्ट के अनुसार 15 मार्च 2004 को उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के खाते से छह लाख रुपये की धनराशि राजीव मेहता के व्यक्तिगत खाते में हस्तांतरित की गयी और 16 मार्च 2004 को उनकी पत्नी दीपा मेहता के खाते में उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के खाते से पाँच लाख रुपए की धनराशि हस्तांतरित की गयी. अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि “यह एक गंभीर वित्तीय अनयमितता का प्रकरण है.” साथ ही उक्त जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि 29 मार्च 2004 को भी पचास हजार रुपए की धनराशि उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के खाते से निकाली गयी. कुल ग्यारह लाख पचास हज़ार रुपये के खर्च का कोई विवरण, जांच अधिकारी को नहीं मिला.

सहायक निदेशक, कोषागार एवं वित्त सेवाओं की नवंबर 2004 की विशेष ऑडिट रिपोर्ट के देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि जिस ग्यारह लाख पचास हज़ार रुपये की धनराशि के खर्च को अपर निदेशक,खेल ने वित्तीय अनियमितता माना, उसी धनराशि को ऑडिट के सामने राजीव मेहता और उनकी पत्नी दीपा मेहता द्वारा उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन को दिये गए ऋण के रूप में पेश किया गया और फिर उस ऋण का लौटाना भी दर्शा दिया गया. यह बेहद रोचक है कि उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता ने व्यक्ति राजीव मेहता व उनकी पत्नी से ऋण लिया, व्यक्ति राजीव मेहता और उनकी पत्नी ने उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता को ऋण दिया और फिर उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता ने व्यक्ति राजीव मेहता व उनकी पत्नी का ऋण लौटाया.

किसी संस्था के, व्यक्ति की जेबी संस्था बन जाना ऐसा ही होता होगा. यह गौरतलब है कि विशेष ऑडिट रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि उक्त ऋण से संबंधित पत्रावली ऑडिट के सामने पेश नहीं की गयी. ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दीपा मेहता एसोसिएशन के किसी पद पर नहीं थी. इनके द्वारा सीधे भुगतान का औचित्य स्पष्ट नहीं हो सका.” अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड की जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि 15-16 फरवरी 2004 को जिमनास्टिक प्रतियोगिता इंडियन पब्लिक स्कूल शिलाकी में आयोजित हुई. उत्तरांचल जिमनास्टिक संघ के तत्कालीन सचिव के अनुसार उक्त प्रतियोगिता के आयोजन पर बीस हजार तीन सौ रुपया खर्च हुआ और भुगतान केवल बाइस सौ रुपया किया गया.

जबकि राजीव मेहता द्वारा उक्त प्रतियोगिता पर त्रेसठ हजार दो सौ छियानबे रुपये खर्च दर्शाया गया. अपर निदेशक,खेल, उत्तराखंड की जांच रिपोर्ट में आशंका प्रकट की गयी थी कि अन्य खेलों में भी धनराशि इसी तरह बढ़ा-चढ़ा कर दिखाई गयी होगी. अपर निदेशक,खेल, की जांच रिपोर्ट और विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि राजीव मेहता द्वारा राज्य खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों, कोच एवं अन्य स्टाफ की फर्जी सूची के आधार पर फर्जी संख्या दर्शायी गयी.

उदाहरण के तौर पर देखें तो चमोली के तत्कालीन जिलाधिकारी को भेजी अपनी रिपोर्ट में चमोली जिले के तत्कालीन क्रिड़ा अधिकारी ने लिखा कि तायकोंडो के पुरुष एवं महिला टीम के तौर पर जिनका नाम अंकित किया गया है, उनमें से कोई खिलाड़ी, मैनेजर, कोच चमोली जिले से संबंधित नहीं है. इसी तरह महिला जिमनास्टिक टीम में भी जिन्हे चमोली जिले की सूची में दर्शाया गया, उनमें से कोई खिलाड़ी, मैनेजर, कोच चमोली जिले से संबंधित नहीं है.

टिहरी के तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि टिहरी जिले की बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और हॉकी की सूची गलत है, इन प्रतियोगिताओं में जिले की टीमों ने हिस्सा नहीं लिया.तकरीबन हर जिले से इस तरह की फर्जी टीमों का उल्लेख जांच रिपोर्ट में है. इसके अलावा खिलाड़ियों की संख्या बढ़ा कर दिखाये जाने के मामलों का उल्लेख भी जांच रिपोर्ट में किया गया है.

सहायक निदेशक, कोषागार एवं वित्त सेवाओं की नवंबर 2004 की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में भी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले प्रतियोगियों को यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ता भुगतान करने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रतियोगियों की सूची प्रमाणित नहीं थी. अप्रमाणित सूची के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया. ऑडिट रिपोर्ट में विभिन्न मदों में अधिक भुगतान किए जाने का उल्लेख किया गया है. ऑडिट रिपोर्ट में उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन के रोकड़ बही, लेजर आदि में गड़बड़ी एवं विभिन्न व्ययों में अनियमितता का उल्लेख किया गया.

उक्त तमाम बातों और जांच रिपोर्टों को देख कर स्पष्ट प्रतीत होता है कि राजीव मेहता के अध्यक्ष रहते उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन में भारी भ्रष्टाचार और धन की बंदरबांट हुई है. इस तरह के भ्रष्टाचार ने निश्चित ही राज्यों में खेलों के विकास की संभावनाओं को कुंद किया.

उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन में खेल के नाम पर हुए भ्रष्टाचार के खेल की भी एसआईटी या ऐसी ही जांच की आवश्यकता है. इस संदर्भ में यह भी अवगत कराना है कि इस प्रकरण की जांच के लिए गोपेश्वर के खेल प्रेमियों ने 7 सितंबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कोतवाली गोपेश्वर में प्रार्थना पत्र दिया गया. लेकिन एक हफ्ते बाद भी उक्त प्रार्थना पत्र पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIIR) दर्ज नहीं की गयी.