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उत्तराखंड : शरू हुआ एक्शन, 40 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी

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देहरादून: विधानसभा बैकडोर भर्ती घोटाले में एक्शन शुरू हो गया है। विधानसभा में मंत्री, विधायक और अपने चहेतों की नौकरी लगाने के मामले का जो विरोध हुआ तो ऐसा जोर पकड़ा कि भर्तियां रद्द होने के साथ ही समाप्त हुआ। जिन लोगों को पहले बेरोजगारों के हकों पर डाका मारकर नियुक्ति पत्र दिए गए थे। उनको अब नौकरी से निकाले जाने की चिट्ठी थमाई जा रही है। विधानसभा सचिवालय में हुए भर्ती घपले में निरस्त की गईं 228 नियुक्तियों के मामले में विधानसभा ने 40 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया है।

विधानसभा में हुई नियुक्तियों का मामला तूल पकडऩे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर इसकी जांच कराने और विवादित नियुक्तियों को निरस्त करने का आग्रह किया था। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने जांच के लिए सेवानिवृत्त आइएएस डीके कोटिया की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेषज्ञ जांच समिति गठित की।

समिति से 22 सितंबर को जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अगले दिन विधानसभा में हुई 228 तदर्थ नियुक्तियों को निरस्त करने का एलान किया। इनमें वर्ष 2016 की 150, वर्ष 2020 की छह और वर्ष 2021 की 72 नियुक्तियां शामिल हैं।

बताया गया कि समिति ने जांच में पाया कि इन नियुक्तियों में नियम-कानूनों का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा विधानसभा में उपनल के माध्यम से रखे गए 22 आउटसोर्स कर्मियों को भी उपनल को वापस लौटा दिया गया था। साथ ही सचिव विधानसभा मुकेश सिंघल को निलंबित कर दिया गया था।

विधानसभा अध्यक्ष ने निरस्त की गई नियुक्तियों के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गयाा। मुख्यमंत्री ने 23 सितंबर की रात ही इसे अनुमोदित कर दिया था। शासन की ओर से विधानसभा को इस बारे में सूचित किया गया। अब इस मामले में विधानसभा सचिवालय द्वारा संबंधित कार्मिकों को सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए जा रहे हैं।

40 आदेश जारी किए गए, जिन्हें मार्शल के माध्यम से संबंधित कर्मियों को हस्तगत कराया गया। बताया गया कि मंगलवार और बुधवार तक निरस्त की गई शेष नियुक्तियों के संबंध में भी आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

उत्तराखंड: क्या मंत्रीमंडल में जल्द होने वाला है बदलाव, कौन होंगे नए चेहरे?

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देहरादून: उत्तराखंड मंत्रीमंडल में बड़े बदलाव की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही हैं। लेकिन, अब तक वो बदलाव देखने को नहीं मिला है। अब विधानसभा बैकडोर भर्तियां रद्द होने के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल की कुर्सी का जाना तय माना जा रहा है। लेकिन, इस बीच जो चर्चाएं और खबरें हैं, उनके अनुसार कैबिनेट में बड़ा बदलाव हो सकता है।

सूत्रों की मानें तो पिछले साल केंद्र में हुए बड़े मंत्रिमंडल विस्तार की तर्ज पर ही राज्य में भी बड़ा विस्तार किया जा सकता है जिसमें कई दिग्गजों की छुट्टी हो सकती है और नये चेहरों को एंट्री मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार भाजपा आलाकमान मंत्रिमंडल विस्तार की योजना को अंतिम रूप देने की तैयारियों में जुटा है।

सूत्रों के अनुसार अगले माह के शुरू में मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है। इस बारे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट से अलग-अलग फीडबैक भी लिया गया है। सूत्रों के अनुसार आलाकमान राज्य में सरकार के कामकाज में सुधार लाने और हाल की घटनाओं से बिगड़ी छवि को बदलने के लिए बड़ा बदलाव कर सकता है। कोशिश यह है कि मंत्रिमंडल का चेहरा बदलकर सरकार को लेकर जनता में अच्छा संकेत दिया जाए।

सूत्रों की मानें तो जिस प्रकार पिछले साल केंद्र में कैबिनेट विस्तार में अनेक बड़े चेहरों को बदल दिया गया था, वैसा ही कुछ नजारा उत्तराखंड में देखने को मिल सकता है। कई बड़े चेहरों की छुट्टी हो सकती है। जबकि मंत्रियों के तीन खाली पदों को भरा जाएगा। राज्य में कुल 12 मंत्री बन सकते हैं जबकि अभी महज नौ हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुमाऊं से जहां एक ब्राह्मण को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं गढ़वाल क्षेत्र से लगे मैदानी इलाके को प्रतिनिधित्व देने की भी संभावना है। ऐसे में हरिद्वार से मदन कौशिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहां पंचायत चुनाव भी होने हैं। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भी हरिद्वार सीट महत्वपूर्ण है। कुमाऊं में क़रीब 40 फ़ीसदी ब्राह्मण आबादी है। कुल दो ब्राह्मण विधायक हैं। दूसरे बंसीधर भगत हैं जो पूर्व में मंत्री रह भी चुके हैं।

नैनवाल के लिए संघ की पैरवी!
प्रमोद नैनवाल वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के गांव मोहनरी के करीब भतरोंजखान के निवासी हैं। यह रानीखेत विधानसभा सीट है। नैनवाल ने वहाँ से रावत के साले और मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा को हराया। करण माहरा ने केंद्र में मंत्री अजय भट्ट को दो बार हराया था। खबर है कि नैनवाल की पैरवी संघ की तरफ से भी हुई है।

इसी प्रकार लालकुआं सीट पर मोहन सिंह बिष्ट ने हरीश रावत को भारी मतों से हराया था। यदि ठाकुर चेहरे को भी मंत्रिमंडल में लिया जाता है तो फिर बिष्ट को भी मौक़ा मिल सकता है। इन दोनों चेहरों को आगे बढ़ाकर पार्टी राज्य में कांग्रेस को भी सख्त संकेत दे सकती है।

कुमाऊं क्षेत्र में ब्राह्मणों एवं ठाकुर मतदाताओं का प्रतिशत बहुत ज़्यादा है। दोनों मिलाकर 80 फ़ीसदी से भी ज़्यादा हैं। इसलिये मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय समीकरणों को साधना ज़रूरी हो गया है क्योंकि पार्टी लोकसभा चुनाव में फिर से पांचों सीट जीतकर हैट्रिक बनाना चाहती है। अभी यदि मुख्यमंत्री धामी को छोड़ दिया जाए तो इन वर्गों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

सितारगंज से विधायक सौरभ बहुगुणा मंत्री जरूर हैं लेकिन मुख्यत वह गढ़वाल के निवासी हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे हैं। यही कारण है कि पार्टी पर कुमाऊं के ब्राह्मण चेहरे को शामिल करने का दबाव है। बता दें कि कुमाऊं से दो अन्य मंत्रियों में सोमेश्वर से रेखा आर्य और बागेश्वर से चंदनरामदास हैं। जो आरक्षित वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करते हैं।

CUET-PG का परीक्षा का परिणाम जारी, यहां चेक करें अपना स्कोरकार्ड

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राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी/NTA ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट/CUET PG 2022 के परिणाम को जारी कर दिया है। परिणाम आज 26 सितंबर, 2022 को ऑनलाइन मोड में जारी किए गए हैं। जो भी उम्मीदवार विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित इस प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अपने परिणाम को अब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।

इससे पहले UGC के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने भी रविवार को एलान किया था कि सीयूईटी पीजी परीक्षा के परिणाम को 26 सितंबर को जारी कर दिया जाएगा।

कब हुई थी परीक्षा?

CUET PG परीक्षा का आयोजन 01 सितंबर, 2022 से लेकर 12 सितंबर, 2022 तक किया गया था। परीक्षा देशभर के विभिन्न केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की गई थी। परीक्षा की अंतरिम उत्तर कुंजी को 16 सितंबर, 2022 को जारी कर दिया गया था। उम्मीदवारों को 18 सितंबर, तक का समय उत्तर कुंजी पर आपत्ति के लिए दिया गया था। इसके बाद एनटीए ने 24 सितंबर को परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी भी जारी कर दी थी।

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इतने छात्र हुए थे शामिल

  • CUET PG 2022 परीक्षा के लिए 3.6 लाख छात्रों ने अपना पंजीयन कराया था। रिपोर्ट के अनुसार परीक्षा में करीब
  • 55 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति दर्ज की गई थी।
  • करीब दो लाख छात्र इसमें शामिल हुए थे। आज इन लाखों छात्रों का इंतजार खत्म हो गया है।
  • अब विभिन्न विश्वविद्यालयों की ओर से छात्रों को उनके सीयूईटी स्कोरकार्ड के आधार पर उन्हें स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा।
  • सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट- cuet.nta.nic.in पर जाएं।
  • यहां दिखाई दे रहे CUET PG के परिणाम से संबंधित लिंक पर क्लिक करें।
  • अब आप एक नए पेज पर आ जाएंगे।
  • यहां मंगी जा रही जानकारी एप्लीकेशन नंबर, जन्म तिथि और सुरक्षा पिन आदि को दर्ज कर के सबमिट करें।
  • अब परिणाम आपके सामने की स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी।
  • इसे चेक करें, डाउनलोड करें और आगे के संदर्भ के लिए प्रिंट आउट रख लें।

गहलोत पर उल्टा पड़ेगा दांव, नाराज हो गई सोनिया गांधी

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राजस्थान : अशोक गहलोत का दांव अब उन्हीं पर उलटा पड़ता दिख रहा है। हाईकमान की ओर विधायक दल की बैठक के लिए दूत बनाकर भेजे गए अजय माकन ने मीडिया के सामने खुलकर कहा है कि जो कुछ हुआ वह अनुशासनहीनता है। ऐसे में संकेत यह भी मिल रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष का रुख सख्त हो सकता है और गहलोत को लेनी की देनी पड़ सकती है। अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी भी अपने पास रखने की उनकी कोशिश ने उनके दोनों ही पदों को खतरे में डाल दिया है।

रविवार रात मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ मिलकर विधायकों से बात करने और गहलोत कैंप को मनाने की कोशिश में नाकाम रहे अजय माकन ने दिल्ली लौटने से पहले मीडिया के सामने सारी बातें खुलकर रखीं। उन्होंने बताया कि किस तरह गहलोत कैंप के तीन विधायकों ने उनके सामने आकर तीन शर्तें रखीं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विधायकों से अलग-अलग बात नहीं करने दिया गया।
माकन ने बताया कि उनके सामने तीन शर्तें रखी गईं थीं और प्रस्ताव में इन्हें शामिल करने को कहा गया था। माकन ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री की सहमित से बुलाई गई थी। स्थान और समय भी उन्होंने तय किया था। जो विधायक नहीं आए, उनसे हम एक एक करके बात करना चाहते थे। कोई फैसला नहीं हो रहा है, आपकी बात दिल्ली पहुंचाएंगे। शांति धारीवाली और डॉ जोशी और प्रताप खाचरियावास हमारे पास आए।उन्होंने तीन शर्तें रखीं।
माकन ने कहा कि पहली बात उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पर फैसला छोड़ने का प्रस्ताव पास करना है तो करिए लेकिन इसमें लिखा हो कि 19 अक्टूबर के बाद फैसला होगा। हमने कहा कि जब वह 19 अक्टूबर को अध्यक्ष बन जाएंगे तो अपने ही प्रस्ताव पर फैसला करेंगे तो इससे बड़ा हित का टकराव नहीं हो सकता है। दूसरा जब हमने कहा कि एक एक करके बात करेंगे तो उन्होंने कहा कि नहीं ग्रुप में आकर बात करेंगे। तीसरी शर्त उन्होंने रखी कि जो 102 विधायक उस समय गहलोत के वफादार थे उनमें से ही बनाया जाए, सचिन पायलट या उनके साथ रहे लोगों को नहीं बनाया जाए।

 

दिल्ली जाकर सोनिया गांधी को रिपोर्ट देने की बात कहते हुए माकन ने कहा, ”वे अड़े रहे कि प्रस्ताव में तीनों शर्तों को शामिल किया जाए। हमने कहा कि यह कांग्रेस की परंपरा नहीं रही है। इसमें हित का टकराव भी नहीं होना चाहिए। हमने उन्हें इसके लिए मना किया। सबकी बात सुनकर ही कांग्रेस अध्यक्ष फैसला करेंगी। हम इंतजार करते रहे वे लोग नहीं आए। अब हम अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी जी को सौंपेंगे। क्या यह अनुशासनहीनता है? इसके जवाब में माकन ने कहा, ”पहली नजर में तो यह अनुशासनहीनता ही है, जब एक आधिकारिक बैठक बुलाई गई थी और उसी के समानांतर दूसरी बैठक बुलाई जाए तो यह अनुशासनहीनता तो है, आगे देखते हैं इस पर क्या कार्रवाई होती है।”

गहलोत पर होगा ऐक्शन?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो अब तक गांधी परिवार के बेहद भरोसेमंद कहे जाते रहे गहलोत के ताजा रुख से कांग्रेस हाईकमान भी हैरान और परेशान है। जिस तरह गहलोत के समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध किया और मुख्यमंत्री चुपचाप सब देखते रहे उसके बाद सोनिया और राहुल गांधी के भी नाराज होने की बात कही जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उनपर कोई ऐक्शन लेती है या नहीं।

वकीलों के बीच वकीलों जैसे कपड़ों में ‘छुपते’ हुए निकलीं जैकलीन

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Jaiklin

सुकेश चंद्रशेखर केस में बुरी तरह फंसी जैकलीन फर्नांडिस कभी पुलिस तो कभी अदालतों के चक्कर लगा रही हैं। इस मामले में सोमवार को उन्हें बड़ी राहत तब मिली जब कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी। जैकलीन फर्नांडिस दिल्ली के पटियाला कोर्ट में पेश हुई थीं।

200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अभिनेत्री को कोर्ट ने समन किया था। जिसके बाद उनके वकीलों ने याचिका दायर की थी। जैकलीन को 50 हजार के निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दे दी गई है। कोर्ट से निकलते हुए अब उनकी तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

वकीलों से घिरीं जैकलीन

इस दौरान जैकलीन ने वकीलों जैसे कपड़े पहने हुए थे। साथ ही चेहरे पर मास्क लगा रखा था। उनका ड्रेसअप वकीलों की तरह होने की वजह से एकबारगी वह उन्हीं के बीच जैसे घुल मिल गईं। जैकलीन कोर्ट से निकलते ही तेजी से आगे बढ़ती नजर आती हैं।

यूजर्स ने कपड़ों को किया नोटिस

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उनके ड्रेसअप को भी नोटिस किया। एक यूजर ने लिखा, ‘आखिरकार व्हाइट ड्रेस, इस बार टेक्निक सही है तुम्हारी।‘ एक यूजर ने कहा, ‘व्हाइट यानी प्योर यानी निर्दोष lol.’ सभी लोगों के बीच केवल जैकलीन ने ही मास्क लगा रखा था। इस पर एक यूजर ने कहा, ‘कोरोना है क्या?’

गुलाम ने किया नई पार्टी का ऐलान, ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ रखा नाम

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जम्मू-कश्मीर : काँग्रेस से आजाद होने के बाद गुलाम नबी आजाद ने आज अपनी नई पार्टी के नाम की घोषणा कर दिया है। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ रखा है। आजाद ने 26 अगस्त को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने कहा था जल्द वह नई पार्टी के नाम की घोषणा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी पार्टी की विचारधारा आजाद होगी। बता दें कि रविवार को ही गुलाम नबी आजाद श्रीनगर पहुंचे हैं। वह 27 सितंबर तक यहां रहेंगे। इसके बाद वह दिल्ली जाने वाले हैं।

गुलाम नबी ने कहा था कि उनकी पार्टी में धर्म निरपेक्ष लोग ही शामिल हो सकते हैं। उन्होंने जनता से पार्टी के नाम को लेकर सुझाव भी मांगे थे। श्रीनगर दौरे के समय भी उन्होंने समर्थकों के साथ पार्टी के नाम को लेकर मंथन किया और इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नई पार्टी की घोषणा कर दी।

गुलाम नबी आजाद ने अपनी पार्टी के झंडे का भी अनावरण किया है। उन्होंने कहा, झंडे का पीला रंग रचनात्मकता, एकता और विविधता को दर्शाता है। सफेद रंग शांति और नीला रंग स्वतंत्रता, खुले विचार, कल्पना और सागर की गहराई से आकाश की ऊंचाई तक को दिखाता है। आजाद ने कहा, लोगों ने उर्दू, संस्कृति, हिंदी में नाम सुझाए थे। हालांकि हम ऐसा नाम चाहते थे जिसमें डेमोक्रेटिक, शांति और स्वतंत्र तीनों बाते हों।

गुलाम नबी आजाद ने 26 अगस्त को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा उन्होंने सोनिया गांधी को लंबा चौड़ा पत्र भी लिखा था और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा था। बता दें कि गुलाम नबी आजाद जी-23 नेताओं में शामिल थे। उनके पार्टी छोड़ने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला ने भी उन्हें ऑफर दिया था और कांग्रेस की आलोचना की थी।

गहलोत खेमे से कांग्रेस नेतृत्व नाराज, विधायकों का बैठक में न आना अनुशासनहीनता

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राजस्थान : कांग्रेस में जारी सियासी घमासान के बीच गहलोत खेमे के इस्तीफों पर कांग्रेस नेतृत्व ने नाराजगी प्रकट की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने कहा है कि विधायकों का विधायक दल की बैठक में नहीं आना  अनुशासनहीनता है। इसे लेकर कार्रवाई हो सकती है।

अजय माकन ने कहा, ‘विधायकों का विधायक दल की बैठक में न आना और अलग बैठक करना अनुशासनहीनता है, ये विधायक हमारी एक बात नहीं सुन रहे थे, हम वापस जाकर सोनिया गांधी को रिपोर्ट देंगे।

माकन ने कहा कि हम दिल्ली जा रहे हैं। हमें उम्मीद है हम बात करेंगे और हल निकालेंगे। माकन ने कहा कि प्राथमिक दृष्टि से शांति धारीवाल के घर पर हुई मीटिंग एक अनुशासनहीनता है। यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
माकन से कहा कि यह साफ नहीं हैं कि कितने विधायकों ने इस्तीफा दिया है।

रिजोल्यूशन एक लाइन का होता है। उन्होंने कहा कि कल जो कुछ भी घटनाक्रम हुआ उसका पूरा ब्योरा सोनिया गांधी को देंगे। हम विधायकों से वन टू वन बातचीत के लिए आए थे, लेकिन हमारी किसी से बात नहीं हो पाई। मुख्यमंत्री पद पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ।

कांग्रेस छोड़ने के बाद अपनी पार्टी बनाकर सुर्खियों में आए आज़ाद, आज करने जा रहे हैं…

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सत्ता से निकलने के बाद से कांग्रेस पार्टी का काफी नुकसान हुआ है। अब तक कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी की बिगड़ती हालत को देखते हुए पार्टी को छोड़ चुके हैं। हाल ही में एक और बड़े नेता ने पार्टी से इस्तीफा दिया था। हम बात कर रहे हैं, कांग्रेस के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद की, उन्होंने हाल ही में पार्टी की हालत को देखते हुए पार्टी को छोड़ दिया था और इस सबका जिम्मेदार उन्होंने राहुल गांधी को ठहराया था। बता दें कि पार्टी से अलग होने के बाद गुलाम नबी आजाद ने खुद की पार्टी बना ली है।

मिली जानकारी के अनुसार वह आज ही अपनी नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। नई पार्टी की जानकारी देते हुए उन्होंने मीडिया से भी बातचीत की थी। अपने दिल्ली आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि “मैं पार्टी के शुभारंभ से पहले कल (सोमवार) मीडिया को आमंत्रित कर रहा हूं। मैं यहां कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलने आया हूं।” गुलाम नबी आजाद के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री के एक करीबी ने इस मामले पर खुलकर बातचीत की और इसके बारे में बताया।

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उन्होंने कहा कि “आजाद सीनियर्स और दूसरे पायदान के नेताओं के साथ दो अलग-अलग बैठकें कर रहे हैं। आजाद 27 सितंबर को श्रीनगर का दौरा करेंगे। आजाद 25 और 26 सितंबर को जम्मू में रहेंगे, 27 सितंबर को वे श्रीनगर के दौरे पर जाएंगे। 28 सितंबर को दिल्ली रवाना होंगे। नई पार्टी के नाम और झंडे को अंतिम रूप दे दिया गया है और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य पर नई पार्टी के हकीकत बनने में अब एक या दो दिन का समय है।”

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्मदिन, PM मोदी समेत कई दिग्गजों ने किया ट्वीट…

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देश के सबसे बड़े नेताओं में एक नाम कांग्रेस पार्टी पर दिग्गज नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हैं। वह भारत के सबसे बड़े नेताओं में शुमार हैं, कांग्रेस हो या विपक्ष हर पार्टी के नेता उनकी इज्जत करते हैं। आपको बता दें कि आज उनका 90वें जन्मदिन है। उनके जन्मदिन के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उनको बधाई दी और साथ ही उनकी बेहतर सेहत की प्रार्थना की। मनमोहन सिंह पिछले करीब 31-32 सालों से जनता की सेवा करते आए हैं।

वह दो बार देश के प्रधानमंत्री भी रहे हैं, उन्होंने अपनी जिंदगी के 10 साल एक प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा में गुजारे हैं। हालांकि इससे पहले वह 1991-96 के दौरान पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार में भारत के वित्त मंत्री भी थे। उन्होंने अपने इस पद पर से भी जनता की सेवा की। पीएम मोदी ने उनके जन्मदिन पर एक ट्वीट करते हुए उनको शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने उनके लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना की।

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बता दें कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उनको जन्मदिन की बधाई दी। राहुल ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “भारत के सबसे बेहतरीन राजनेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। वह मेरे और करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा हैं। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशी के लिए प्रार्थना करता हूं।” राहुल के अलावा कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट करते हुए कहा कि वह एक ऐसे इंसान है जो कम बोलने और ज्यादा करने में विश्वास रखते हैं।

बताते चलें कि कांग्रेस पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बधाई देते हुए ट्वीट किया गया। इसमें लिखा गया कि “दूरदर्शी नेतृत्व और समर्पण परिभाषित करते हैं कि भारत के लिए डॉ. मनमोहन सिंह का क्या मतलब है। वे भारत के आर्थिक सुधारों के निर्माता हैं। यह उनकी शानदार दृष्टि थी, जिसने भारत की आर्थिक कहानी को अगले स्तर तक पहुंचाया।”

उत्तराखंड : सबूत सेफ, लेकिन बुलडोजर किसने चलाया?

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देहरादून: अंकिता मर्डर केस (#AnkitaMurderCase) में सबूत मिटाए जाने की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। उससे बड़ी चर्चा इस बात की है कि आखिर पुलकित आर्य के रिसॉर्ट पर बुलडोजर किसने चलाया। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि पौड़ी जिले के DM डॉ. विजय कुमार जोगदंडे और डीजीपी अशोक कुमार के बयान अलग-अलग हैं। सरकार ने भी साफतौर पर बुलडोजर चलाने की बात स्वीकार नहीं की है। CM धामी ने अवैध रिसॉर्ट्स को सील करने का निर्देश जरूर दिया।

पुलकित आर्या के रिसॉर्ट में रात के अंधेरे में हुए बुलडोजर एक्शन पर DM विजय जोगदंडे के बयान से कहानी में नया मोड़ आ गया है। अब सवाल यह उठ रहा कि जब ध्वस्तीकरण का कोई लिखित आदेश नहीं था और प्रशासन रिसॉर्ट को पहले ही सील कर चुका था फिर बुल्डोजर क्यों चलाया गया और किसने चलाया।

Ankita Murder Case : साक्ष्य नष्ट करने का आरोप। File Photo

उत्तराखंड पुलिस के आधिकारिक ट्वीट में साफतौर पर कहा गया है कि बुलडोजर मुख्यमंत्री के आदेश पर चलाया गया। लेकिन, पौड़ी जिले के डीएम का कहना है कि उन्होंने रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने का कोई आदेश नहीं दिया था। डीएम का बयान इसलिए भी सही माना जा सकता है कि जब रिसॉर्ट को पहले सील कर दिया गया था, फिर बुलडोजर क्यों चलाया जाता।

बुलडोजर चलाने के मामले में लोगों की गुस्से का शिकार हो चुकी विधायक रूणु बिष्ट डीएम, पुलिस और सरकार के अलावा तीसरा किरदार हैं। जिस वकत रिसॉर्ट पर जेसीबी चलाई जा रही थी भाजपा विधायक रेणु बिष्ट रात को मौके पर ही मौजूद थी। लोग सवाल कर रहे हैं कि रेणु बिष्ट वहां इतनी रात को जेसीबी के साथ क्या रही थी? यह भी कहा जा रहा है कि विधायक ने ही बुलडोजर चलावाया होगा!

बुलडोजर चलने से कमरे के भीतर मलबे के साथ बिखरा अंकिता का सामान बिखरा हुआ था। इन्हीं बातों को लेकर लोग कह रहे हैं कि आखिर बुलडोजर क्यों चलावा गया। अंकिता के कमरे में कई सबूत नष्ट हो सकते हैं। लेकिन, पुलिस का कहना है कि कमरे से सभी तरह के सबूत पहले ही जुटा लिए गए थे। कमरे की वीडियोग्राफी भी की गई है। DIG पी. रेणुका देवी ने बताया कि रिसॉर्ट में सभी साक्ष्य सुरक्षित हैं। कोई भी साक्ष्य नष्ट नहीं हुआ है।