Home Blog Page 691

बड़ी खबर : अब तक के सबसे निचले स्तर पर रुपया, देखें आजादी के बाद की स्थिति

0

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है। रुपये में यह अब तक कि सबसे बड़ी गिरावट है। आज भी रुपया एक नए निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा बाजार में भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82 के करीब पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 81.90 पर आ गया है। सोमवार को रुपया 81.6525 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छूने के बाद मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे बढ़कर 81.53 पर बंद हुआ था।

1664337738

आज 2010 के बाद पहली बार अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड 4% से ऊपर है। डॉलर इंडेक्स 114.68 की एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। ट्रेडर ने कहा, ‘डॉलर इंडेक्स और ट्रेजरी यील्ड को स्थिर किए बिना रुपये के लिए फ्लोर तय करना बेहद मुश्किल है। ट्रेडर्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में गिरावट के कारण डॉलर की बिक्री कर रहा है और संभावना है कि केंद्रीय बैंक ऐसा करना जारी रखेगा।

PFI पर सरकार ने लगाया बैन, 9 अन्य संगठनों पर भी लगा प्रतिबंध

0

नई दिल्ली : कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की आतंकी फंडिंग व अन्य गतिविधियों के चलते भारत में पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है। यूएपीए एक्ट के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है। बता दें कि PFI एक कट्टरपंथी संगठन है।

2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी। NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया।

इन संगठनों पर भी लगा बैन

  •  रिहैब इंडिया फाउंडेशन
  • कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया
  • ऑल इंडिया इमाम काउंसिल
  • नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन
  • नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट
  • एम्पावर इंडिया फाउंडेशन
  • रिहैब फाउंडेशन(केरल)
  •  जूनियर फ्रंट

उत्तराखंड: RSS कार्यकर्ता ने किया अंकिता के परिवार का अपमान, टिहरी में पुलिस से शिकायत

0

टिहरी: पहाड़ कि बेटी अंकिता की चिता की आग की तपिश अभी कम भी नहीं हुई थी कि उसके अपमान करने का मामला सामने आ गया। खुद को आरएसएस कार्यकर्ता बताने वाले ऋषिकेश के रायवाला निवासी विपिन कर्णवाल ने ना केवल देवभूमि की बेटी का अपमान किया। बल्कि, उसके पिता और भाई के लिए अपमानजनक टिप्पणी की है।

इस मामले के सामने आने के बाद से ही लोगों का गुस्सा और भड़क गया। अपमान करने वाले आरएसएस कार्यकर्ता के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। टिहरी में उसके खिलाफ पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

अंकिता प्रकरण से आज प्रदेश का आम जनमानस, माताएं, बहनें, नौजवान हर व्यक्ति बड़ा दुखी और आक्रोशित है। जनसैलाब सड़कों में उमड़ा हुआ है। लोग इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों को फांसी दिलाने की मांग कर रहे हैं और इस वक्त पर उक्त व्यक्ति द्वारा ऐसी टिप्पणी करना अंकिता और उसके परिवार के साथ साथ पहाड़ और पहाड़ियों का अपमान है।

जिसे पहाड़ का कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति बर्दाश्त नहीं कर सकता। उक्त व्यक्ति पर आज नई टिहरी के कांग्रेसजनो ने शहर अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल की तरफ से मुकदमा दर्ज करने की तहरीर नई टिहरी थाने में दी।

असली शिवसेना किसकी, उद्धव गुट को SC से झटका, ये है पूरा मामला

0

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र का सियासी घमासान कम होने के बजाय और तेज होने वाला है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (SC) की संविधान पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। उद्धव गुट की अर्जी को खारिज करते हुए शीर्ष अकालत ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले से एकनाथ शिंदे कैंप को राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग को यह निर्णय लेने की अनुमति दे दी कि शिवसेना का कौन सा धड़ा असली है और किसे शिवसेना का चुनावी चिन्ह दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए मामले में कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और साथ ही उद्धव ठाकरे खेमे की याचिका को खारिज कर दिया।

बता दें कि यहां मामले में दूसरे धड़े का नेतृत्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। शिंदे गुट का तर्क है कि शिवसेना के ज्यादातर विधायक और सांसद उनके खेमे का हिस्सा है। ऐसे में शिवसेना का चुनाव चिन्ह उन्हें दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना सुप्रीमो और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि उनकी टीम विद्रोही के खिलाफ कानूनी लड़ाई में विजयी होगी। शिंदे ने जून माह में भाजपा की मदद से उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी सरकार गिरा दी थी और 30 जून को CM पद की शपथ ली।

सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे और शिंदे के नेतृत्व वाले गुटों द्वारा दायर याचिकाओं को पांच-न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा था, जिसमें दलबदल, विलय और अयोग्यता से संबंधित कई संवैधानिक प्रश्न उठाए गए थे। ठाकरे के वकीलों ने पहले कहा था कि शिंदे के प्रति वफादार पार्टी विधायक किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय करके ही संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से खुद को बचा सकते हैं। जवाब में शिंदे समूह ने तर्क दिया था कि दलबदल विरोधी कानून उस नेता के लिए हथियार नहीं हो सकता जिसने अपनी ही पार्टी का विश्वास खो दिया हो।

आशा पारेख को सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान, मिलेगा दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड

0

नई दिल्ली : दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख को 2020 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने की। दादा साहब फाल्के पुरस्कार को भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। भारतीय सिनेमा जगत आज जिस मुकाम पर है इसे वहां तक लाने में आशा पारेख का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने घोषणा की कि इस साल दादा साहब फाल्के पुरस्कार बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख को दिया जाएगा। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने वाली वह 52वीं हस्ती होंगी। अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘आशा भोंसले, हेमा मालिनी, उदित नारायण झा, पूनम ढिल्लों और टीएस नागभरण की सदस्यता वाली दादा साहब फाल्के समिति ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में आशा पारेख को पुरस्कार देने का फैसला किया है।’

आशा पारेख अपने दौर की हाइएस्ट पेड ऐक्ट्रेसेज में से एक रही हैं। उन्होंने पंजाबी, गुजराती और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी भी लॉन्च की थी और टीवी शोज भी बनाए। उन्हें साल 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। अनुराग ठाकुर ने आशा के बारे में कहा, ‘उन्होंने 95 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और 1998 से 2001 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की अध्यक्ष रहीं।

ऐसे बनी सुपरस्टार 

आशा पारेख ने बतौर बाल कलाकार अपने करियर की शुरुआत की थी। तब इंडस्ट्री में लोग उन्हें बेबी आशा पारेख नाम से जानते थे। सिनेमा जगत में उनका सफर बहुत लंबा रहा है। आशा की जिंदगी तब बदली जब फेमस फिल्म डायरेक्टर बिमल रॉय ने उन्हें इवेंट में डांस करते देखा और उन्हें अपनी फिल्म मां (1952) में काम दिया। उस वक्त आशा सिर्फ 10 साल की थीं।

इसके बाद बिमल ने साल 1954 में आई फिल्म ‘बाप बेटी’ में आशा को मौका दिया लेकिन फिल्म हिट नहीं हुई तो वह निराश हो गए। आशा ने फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और सोलह साल की उम्र में उन्होंने लीड ऐक्ट्रेस के तौर पर शुरुआत की। कहते हैं कि विजय भट्ट की फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ में किए गए काम के लिए उन्हें खारिज कर दिया गया था।

फिल्ममेकर का दावा था कि आशा पारेख एक स्टार ऐक्ट्रेस बनने के काबिल नहीं थी। मगर ठीक 8 दिन बाद वो हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया। फिल्म निर्माता सुबोध मुखर्जी और लेखक-निर्देशक नासिर हुसैन ने उन्हें शम्मी कपूर के अपोजिट फिल्म ‘दिल देके देखो’ (1959) में साइन किया और फिस फिल्म ने आशा पारेक को स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने करियर में कभी मुड़कर नहीं देखा।

सुप्रीम कोर्ट से LIVE, घर बैठे देखें कार्रवाई

0

सुप्रीम कोर्ट में करीब चार साल पहले 2018 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसमें शीर्ष अदालत की कार्यवाहियों में ट्रांसपैरेंसी की मांग थी। अब इस मांग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई का LIVE प्रसारण किया गया।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में संविधान पीठों में होने वाली सुनवाई की आज से LIVE स्ट्रीमिंग शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जाकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई की LIVE स्ट्रीमिंग को देखा जा सकता है। बता दें कि आज तीनों संविधान पीठों की सुनवाई का सीधा प्रसारण हो रहा है।

आम जनता अब देश की सर्वोच्च अदालत में चल रही सुनवाई और दलीलों को घर बैठे ही देख पाएगी। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार है। जब सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की सुनवाई का लाइव प्रसारण किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे पहले 26 अगस्त को तत्कालीन CJI एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ की कार्यवाही का भी वेबकास्ट पोर्टल के जरिये लाइव प्रसारण किया जा चुका है। लेकिन यह एक औपचारिक कार्यवाही थी, क्योंकि जस्टिस रमणा उसी दिन सेवानिवृत्त हो रहे थे।

 

वायरल हुई इस वीडियो में दिखाई दिया नया फूड कॉम्बिनेशन, चॉकलेट को डीप फ्राई कर…

0

सोशल मीडिया पर आज कल कुछ अलग अलग ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। लेकिन फिलहाल सबसे ज्यादा फूड कॉबिनेशन ट्रेंड चल रहा है। जिसमें लोगों को कुछ अलग अलग कॉम्बिनेशन करते हुए देखा जा सकता है। लेकिन जो आज वीडियो हम आपके लिए लेकर आए हैं, उसको देख आप लोगों के होश उड़ जाएंगे। बता दें कि आप ये देखकर कभी भी कुछ नया कॉम्बिनेशन ट्राई करने से कराएंगे नहीं। ये कॉम्बिनेशन इतना अलग है कि आप कभी सोच भी नहीं सकते हैं।

आप लोगों ने पकौड़े तो खाए ही होंगे, आज तक हम लोग आलू और प्याज के पकौड़े खाते आए हैं, लेकिन वीडियो में दिख रही इस महिला ने तो अलग ही लेवल की सोच रखकर ये अनोखी रेसिपी बनाई है। बता दें कि इस महिला ने न तो आलू के पकौड़े बनाए और न ही प्याज के, इस महिला को वीडियो में चॉकलेट के पकौड़े बनाते हुए देखा जा सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं चॉकलेट के पकौड़े बनाने वाली इस महिला की। इस वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह से ये महिला चॉकलेट को बेसन में लपेट कर गर्म तेल में तल रही है।

IMG 20220927 121822

चॉकलेट को बेसन में तलने के बाद ये महिला उस पर थोड़ा मसाला डालकर, हरी चटनी के साथ परोसती है। सबसे ज्यादा मजेदार तो इस शख्स के रिएक्शन थे, जिसने ये पकौड़े खाए थे। वह इस तरह से रिएक्ट कर रहा था, जैसे उसको ये कॉम्बिनेशन काफी पसंद आया हो। बता दें कि इस वीडियो को आरजे रोहन ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। गोरतलब हैं कि इस वीडियो को अब तक एक लाख से ज्यादा रिव्यूज मिल चुके हैं।

शुरू हुआ जापान के पूर्व PM शिन्ज़ो आबे का अंतिम संस्कार, पीएम मोदी समेत…

0

जापान में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या कर दी गई थी। इस दौरान वह एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। बता दें कि ये मामला 8 जुलाई 2022 का है। जब वह जनसभा को संबोधित कर रहे थे तभी कुछ बदमाशों ने उनको गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। हालांकि वहां उनकी प्रोटेक्शन के लिए पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन वो भी इस हादसे को रोक नहीं पाई। गोरतलब हैं कि उनके निधन की बाद अब अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

शिंजो आबे के अंतिम संस्कार में कई देशों के राजनेता शामिल हो रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार आबे के अंतिम संस्कार में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रमुखों सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही बताया जा रहा है कि उनके अंतिम संस्कार में काफी ज्यादा खर्चा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उनके अंतिम संस्कार में करीब 1.7 बिलियन येन यानी करीब 12 मिलियन डॉलर का खर्चा आ रहा है। जिसको लेकर भी काफी हंगामा किया जा रहा है।

images 14 1

बता दें कि इस कार्यकर्म को रोकने के लिए कई सारी याचिकाएं दायर की गई हैं। जिनका सामना मौजूदा प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के रहे हैं। गोरतलब हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिंजो आबे के अंतिम संस्कार में पहुंचे हैं। उन्होंने उनके निधन पर कुछ बातें भी कहीं। उन्होंने कहा कि “ये दुःख की घड़ी में आज हम मिल रहे हैं। आज जापान आने के बाद मैं अपने-आपको ज्यादा शोकातुर अनुभव कर रहा हूं, क्योंकि पिछली बार जब मैं आया तो आबे सान से बहुत लम्बी बातें हुई थीं और कभी सोचा ही नहीं था कि जाने के बाद ऐसी खबर सुनने की नौबत आएगी।”

क्लीन गंगा का काम आंखों में धूल झोंकने वाला, मिशन केवल पैसा बांटने की मशीन : हाईकोर्ट

0

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा का काम आंखों में धूल झोंकने वाला है। कोर्ट ने कहा कि यह मिशन केवल पैसा बांटने की मशीन बनकर रह गया है। इसके बजट के पैसे से गंगा की सफाई हो रही है कि नहीं, इसकी न तो निगरानी हो रही है और न ही जमीनी स्तर पर कोई काम दिख रहा है।

कोर्ट ने पूछा कि इस मिशन के तहत गंगा सफाई के लिए खर्च किए गए करोड़ों रुपये के बजट से काम हुआ या नहीं तो इसका कोई जवाब नहीं मिला। इसके पूर्व सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने मिशन से जुड़े विभिन्न बोर्ड व विभागों के हलफनामों पर बारी बारी से जानकारी मांगी।

दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरीपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज ने किया दोनों नये शंकराचार्यों का अभिषेक

0
  • 12 सितम्बर को ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी के समक्ष हुए अभिषेक की हुई पुष्टि.

  • जगद्गुरु विधुशेखर भारती करेंगे ज्योतिर्मठ और द्वारकापीठ पर जाकर दोनो का अभिषेक.

  • आगे भी अनेक स्थानों पर होंगे दोनो नये शंकराचार्यों के अभिषेक.

  • ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य ने 2007 में आयोजित चतुष्पीठ सम्मेलन में ही अपने उत्तराधिकारीगणों को किया था प्रस्तुत.

दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरीपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य भारती तीर्थ महास्वामी ने 12 सितम्बर 2022 ई. को ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी के पांचभौतिक शरीर के समक्ष अभिषिक्त हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज का श्रृंगेरीपीठ की अधिष्ठात्री देवी शारदाम्बा के मन्दिर में वैदिक मन्त्रोच्चार के बीच अभिषेक किया।

अभिषेक करने से पूर्व उन्होंने दोनों जगद्गुरुओं के सिर पर अपना हाथ रखा और संस्कृत में उद्घोषणा की कि मैं ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वरत्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज के करकमलसंजात दण्डी संन्यासी उत्तराधिकारी शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती का ज्योतिष्पीठ पर और स्वामी सदानन्द सरस्वती का पश्चिमाम्नाय द्वारकापीठ पर अभिषेक कर रहा हू।

ज्ञात हो कि वर्ष 2007 ई. में ही बेंगलूरु में वेदान्त भारती संस्था द्वारा आयोजित चतुष्पीठ सम्मेलन में ही ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने इन दोनों को अपने उत्तराधिकारी के रूप में श्रृंगेरीपीठाधीश्वर जी महाराज के सभक्ष प्रस्तुत कर दिया था। उसी समय ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी महाराज ने यह भी बता दिया था कि मेरे ब्रह्मलीन हो जाने के पश्चात् आप इन दोनों के लिए अभिषिक्त हो जाने के बाद कै सभी आवश्यक धार्मिक कृत्य सम्पन्न कराएंगे।

उसी वचन का स्मरण एवं मान रखते हुए जैसे ही उनको द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु महाराज के ब्रह्मलीन होने का समाचार प्राप्त हुआ उन्होने अपने पीठ प्रशासक श्री वी आर गौरीशंकर जी को तत्काल भेजा और उनके अनुरोध का स्मरण करते हुए निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी से अभिषेक-तिलक आदि उनका पांचभौतिक देह के समक्ष ही 12 सितम्बर 2022 को विधिवत् सम्पन्न कराया था।

आज अपने कर-कमलों से दोनो पीठों पर दो नये शंकराचार्यों का अभिषेक करने के पश्चात् शृंगेरीपीठाधीश्वर भारती तीर्थ महास्वामी जी ने यह भी घोषणा किया कि 20 दिन पश्चात् शुभ मुहूर्त में उनके उत्तराधिकारी स्वामी विधुशेखर भारती जी महाराज द्वारकापीठ तथा ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय में जाकर जगद्गुरु पद पर आरूढ़ होने के पश्चात् के जो धार्मिक कृत्य किए जाते हैं उन सभी का विधि-विधान से सम्पादन करेंगे।

शृङगेरी महाराजश्री ने यह भी उद्घोषित किया कि वे एवं दोनो नये शंकराचार्य अर्थात् तीनों आम्नाय मठ एकजुट होकर सनातन धर्म का कार्य करेंगे। शृंगेरी महाराजश्री ने दोनों नवनियुक्त शंकराचार्यों को सस्नेह रजत कमण्डलु भी भेंट किया और दोनों ने उनके प्रति गुरुवत् सम्मान एवं भावों से सिक्त अपने हृदय के उद्गारों को व्यक्त किया तथा तीनों मठों के एकजुट रहने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दुहराया।

इस महनीय अवसर पर ब्रह्मचारी ध्यानानन्द, ज्योतिर्मयानन्द ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारी उद्धवस्वरूप, ब्रह्मचारी अचलानन्द, ज्योतिष्पीठ पण्डित आचार्य रविशंकर द्विवेदी शास्त्री, आचार्य पं राजेन्द्र द्विवेदी, भारत धर्म महामण्डल के आचार्य पं. परमेश्वर दत्त शुक्ल जी एवं काशी विद्वत् परिषद् के आचार्य पं कमलाकान्त त्रिपाठी, छत्तीसगढ से पं प्रकाश उपाध्याय, कैप्टन अरविन्द, आनन्द उपाध्याय जी, पं. शैलेष, कृष्ण पाराशर आदि जन सम्मिलित रहे। ज्ञातव्य है कि आगे भी अनेक स्थानों पर दोनो नये शंकराचार्यों के अनेक अभिषेक आयोजित किए जाएगे जो 12 सितम्बर को हुए अभिषेक की पुष्टि में होंगे।