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2 बार PM बनते-बनते रह गए थे ‘नेता जी’, इन नेताओं ने लगाया था अड़ंगा

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मुलायम सिंह यादव असल कुश्ती के साथ ही राजनीति के अखाड़े के भी पहलवान कहे जाते थे। उन्हें अपने विरोधियों को चित करने में महारत हासिल थी। मुलायम उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। वह देश के रक्षा मंत्री भी बने। इस दौरान उनके जीवन में दो ऐसे मौके भी आये जब वे प्रधानमंत्री (PM) बनते-बनते रह गए। आज नेताजी का गुरुग्राम के अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। हम आपको वो किस्सा बताते हैं कि आखिर कैसे PM बनने का मुलायम का सपना पूरा न हो सका।

पहला मौका 1996 में आया, जब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी मात मिली थी। कांग्रेस के खाते में 141 सीटें आईं और BJP ने 161 सीटें जीती थीं। अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने का निमंत्रण मिला। वह प्रधानमंत्री तो बने लेकिन 13 दिनों बाद ही उनकी सरकार गिर गई। अब कांग्रेस के पास मौका था लेकिन वह खिचड़ी सरकार बनाने के मूड में नहीं थी। तब VP सिंह ने भी PM बनने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्‍होंने बंगाल के CM ज्‍योति बसु का नाम आगे बढ़ाया जिसे पोलित ब्‍यूरो ने नामंजूर कर दिया।

अब प्रधानमंत्री की रेस में मुलायम और लालू प्रसाद यादव का नाम सबसे आगे था। हालांकि, चारा घोटाले के चलते लालू इससे बाहर हो गए। सबको एक करने का काम वामदल के बड़े नेता हर किशन सिंह सुरजीत को सौंपा गया था। उन्‍होंने मुलायम के नाम की पैरवी की। बताते हैं कि उनके शपथ ग्रहण की तैयारियां भी कर ली गई थीं। हालांकि, लालू और शरद यादव इसके लिए तैयार नहीं हुए, जिससे बात नहीं बन पाई। इसके बाद एचडी देवगौड़ा को पीएम पद की शपथ दिलाई गई।

HD देवगौड़ा के नेतृत्व वाली मिली-जुली सरकार जल्द ही गिर गई। 1999 में फिर चुनाव हुआ। मुलायम सिंह ने संभल और कन्नौज दोनों ही सीटें जीत लीं। पीएम पद के लिए एक बार फिर उनका नाम आगे आया। एक बार फिर दूसरे यादव नेताओं ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। ऐसे में यह दूसरा मौका था जब मुलायम के पास आती पीएम की कुर्सी दूर हो गई। बाद में मुलायम ने एक रैली में कहा भी कि लालू प्रसाद यादव, शरद यादव, चंद्र बाबू नायडू और वीपी सिंह के चलते वह प्रधानमंत्री नहीं बन सके।

मुलायम सिंह यादव की प्रमुख उपलब्धियां
1939:
 उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में जन्म।
1967: राम मनोहर लोहिया की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया।
1968: चौधरी चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल में शामिल हुए। इस पार्टी का संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी में विलय हो गया और भारतीय लोक दल का गठन हुआ। आपातकाल (1975-1977) के बाद भारतीय लोक दल का जनता दल में विलय हो गया।
1977: पहली बार मंत्री बने।
1982-1985: विधान परिषद के सदस्य रहे और परिषद में विपक्ष के नेता बने।
1985-87: जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष बने।
1989-1991: पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
1992: समाजवादी पार्टी का गठन किया।
1993-95: दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
1996: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, रक्षा मंत्री बने।
1998: संभल से फिर से लोकसभा सदस्य बने।
1999: संभल से फिर से सांसद चुने गए।
2003: तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। पत्नी मालती देवी का निधन। साधना गुप्ता से विवाह किया।
2004: मैनपुरी से सांसद चुने गए।
2007: उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।
2009, 2014 और 2019 में सांसद बने।
10 अक्टूबर 2022 को निधन।

ऋषभ पंत की गर्लफ्रेंड इशा नेगी ने शेयर की रील, फैन्स ने उर्वशी रौतेला को किया ट्रोल

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विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत T-20 वर्ल्ड कप टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुकी है। टीम इंडिया के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला का भी पोस्ट आई कि वह ऑस्ट्रेलिया पहुंच गई हैं। उर्वशी और पंत के बीच सोशल मीडिया खुलेआम बहस हो चुकी है। अब जब पंत की गर्लफ्रेंड इशा नेगी ने इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की, तो फैन्स ने उर्वशी रौतेला को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

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इशा नेगी के रील पर फैन्स के कमेंट्स वायरल हो गए हैं। किसी ने लिखा कि जल्दी ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाओ, नहीं तो उर्वशी रौतेला पंत को ले उड़ेगी। टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को अपना पहला मुकाबला 23 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ खेलना है।

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82 साल की उम्र में हुआ यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री का निधन, कई दिनों से थे अस्पताल में भर्ती…

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पूरे उत्तर प्रदेश में आज दुखद माहोल बना हुआ है। पता चला है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के सरंक्षक मुलायम सिंह यादव अब हम लोगों के बीच नहीं रहे हैं। उनके निधन की खबर से हर कोई उदास है, बता दें कि मुलायम सिंह यादव ने अपने जीवन में 3 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया। वह देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। बता दें कि उनका निधन आज सोमवार के दिन सुबह 8:30 बजे करीब हुआ। उनके निधन की पुष्टि खुद उनके बेटे और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की है।

अखिलेश यादव ने एक ट्वीट के माध्यम से ये खबर लोगों तक पहुंचाई। उन्होंने अपने पिता के निधन की खबर देते हुए लिखा कि “मेरे आदरणीय पिजा जी और सबके नेता जी नहीं रहे।” आपको बता दें कि उनके निधन की खबर मिलने के बाद अब कई बड़े नेता उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। गोरतलब हैं कि मुलायम सिंह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। वह पिछले करीब 10 दिनों से वह आईसीयू में भर्ती थे। बता जा रहा था कि उनकी किडनी फेल हो चुकी हैं।

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बताते चलें कि मुलायम सिंह यादव को जब भर्ती किया गया था तब उन्हे सांस लेने में तकलीफ थी। साथ ही उनको लो ब्लड प्रेशर की शिकायत भी थी। इसका बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चला और आज सुबह उनका 82 साल की उम्र में निधन हो गया। मुलायम सिंह यादव का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए इटावा जिले के सैफई गांव ले जाया जाएगा। बता दें कि ये उनका जन्म स्थान है, जिसके कारण उनके शरीर को यहां लाया जा रहा है।

आप भी करते हैं इस तरह का कोई काम? तो हो जाए सावधान, बन सकता है कैंसर का कारण…

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पिछले कुछ सालों में कैंसर जैसे आम हो गया हो। पिछले कुछ सालों से कैंसर के इतने मामले सामने आए हैं, जिसको सुनने के बाद हर किसी के होश उड़ जाएं। हालांकि आज तक इसका पूरा इलाज नहीं मिल पाया है। डॉक्टर इसको ठीक करने का जिम्मा तो जरूर उठाते हैं, लेकिन वे इस बात की गारंटी नहीं लेते कि ये बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न तरह के कैंसर के कारण 2018 में 96 लाख लोगों की मौत हुई है। ये संख्या हर साल बढ़ती नजर आ रही है।

आज हम आपको बताने वाले हैं कि आप किस तरह कैंसर से बच सकते हैं। कैंसर का मुख्य कारण गलत खानपान है। आज कल लोग कुछ खाने से पहले सोचते नहीं हैं और ये ही कैंसर का कारण बन जाता है। गलत खानपान से लोगों का वजन बढ़ता है और ज्यादा चर्बी वाले इंसान में ट्यूमर बनने के चांस ज्यादा होते हैं। इसलिए हमेशा हेल्थी खाना ही खाए। इसके अलावा आज कल युवाओं में स्मोकिंग का भी ट्रेंड चला है। आप कहीं भी जाओ आपको कोई न कोई स्मोकिंग करता दिख ही जाएगा।

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बता दें कि स्मोकिंग भी कैंसर का मुख्य कारण हैं। स्मोकिंग के कारण 14 अन्य तरह के कैंसर होते हैं। इसके अलावा आपको बता दें कि अल्कोहल भी कैंसर के मुख्य कारणों में से एक है। युवाओं में अल्कोहल के कारण कैंसर के कई मामले आ चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक शराब पीने के कारण हर साल दुनिया में एक लाख लोगों को कैंसर होता है।

कैंसर का एक और मुख्य कारण है, जिसके बारे में शायद आपको पता भी नहीं होगा। तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में भी बताते हैं, कैंसर का एक मुख्य कारण यौन संबंध भी है। दरअसल, लोग इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन एचपीवी के कारण जननांग में छाले की तरह निकल आते हैं और ये ही कैंसर का एक मुख्य कारण बन जाता है। इसलिए हमेशा सुरक्षित यौन संबंध इससे बचने का सबसे बेहतर तरीका है।

बड़ी खबर : नहीं रहे मुलायम सिंह यादव, मेदांता अस्पताल में ली आखिर सांस

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया है। उन्होंने आज सुबह 8.16 पर अंतिम सांस ली। वह 82 साल के थे। मुलायम सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में वह वेंटिलेटर पर थे। पिछले रविवार से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद सपा कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई।

 

पहलवान और शिक्षक रहे मुलायम ने लंबी सियासी पारी खेली। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। उन्हें बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी जाना जाता है।

 

22 अगस्त को मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया था। मुलायम सिंह को एक अक्तूबर की रात को आइसीयू में शिफ्ट किया गया था। मुलायम सिंह यादव का मेदांता के एक डॉक्टरों का पैनल इलाज कर रहा था।

 

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और परिवार के अन्य सदस्य उनके साथ ही हैं। दिल्ली से उनका शव लखनऊ लाने की तैयारी है। यहां से फिर इटावा ले जाया जाएगा।

उत्तराखंड : कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा को जान से मारने की साजिश, मुकदमा दर्ज

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सितारगंज: उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से अपराध अचानक से बढ़ने लगे हैं। छोटे-मोटे अपराध नहीं, बल्कि अंकिता हत्याकांड और केदार हत्याकांड जैसे मामले सामने आ चुके हैं। अब एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है, जो चौंकने और हैरान करने वाला है।इस बार निशाना कोई आम व्यक्ति नहीं। बल्कि, कैबिनेट मंत्री की हत्या की साजिश रची जा रही थी। इस मामले में मंत्री के स्टाफ ने पुलिस से शिकायत की है।

 

कैबिनेट मंत्री एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा की हत्या की साजिश का मामला सामने आया है सितारगंज कोतवाली में केबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा की हत्या की साजिश करने के मामले में चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।

 

कोतवाली पुलिस को दी गई तहरीर में कहा गया है कि हीरा सिह पुत्र चम्बाराम निवासी कोटाफार्म सिसौना थाना सितारगंज जो थाना सितारगंज से गेहूं चोरी के मामले में जेल गया था। बताया जा रहा है कि वो अवैध खनन का कार्य भी करता है। हीरा सिह गेहूं चोरी वाले मामले में उसको को जेल भिजवाने का जिम्मेदार कैबिनेट मंत्री  सौरभ बहुगुणा को मानता है।

 

तहरीर के अनुसार उसने जेल में सतनाम सिह पुत्र बलविन्दर सिह निवासी सिरसाफार्म थाना बहेडी जो थाना किच्छा से अफीम के मामले मे जेल गया था को अपनी घटना बताकर कि मंंत्री सौरभ बहुगुणा ने मुझे जेल भिजवाया है। उनको मारना है चाहे जितना रूपया खर्चा हो जाय।

 

सतनाम सिह अपने दोस्त मो. अजीज उर्फ गुड्डू निवासी किच्छा का नाम लेकर कहता था कि वह बड़ अपराधी है। उसके सम्बन्ध उत्तरप्रदेश के शूटरों के साथ है वह उनसे बात कर लेगा व काम करा देगा। जब तुम बाहर निकलोगे तो हरभजन सिह तुम्हें गुड्डु से मिलवा देगा इस प्रकार हीरा सिह मंत्री की हत्या करने हेतु षडयंत्र कर रहा था।

 

यह बात की जानकारी मंत्री के मंत्री के साथियो को जब मिली तो उन्होंने जानकारी जुटानी शुरू कर दी, जब से हीरा सिह जेल से छूटा तब से उस पर नजर रखते थे इस बीच जब मंत्री सितारगंज में 2 अक्टूबर को आये थे उनके विधानसभा भ्रमण के दौरान कुछ स्थानों पर उसे देखा पुलिस को दी तहरीर में उमाशंकर ने कहा की मै व मेरे साथी लोग जो मंत्री के पास काम करते है उस पर नजर रख रहे थे।

 

उसका कहना है कि इस दौरान उनको जानकारी हुई कि सतनाम सिह पैरोल पर आया है। हीरा सिंह उससे मिल रहा है और हीरा सिंह ने सतनाम सिंह उसके दोस्त हरभजन सिह और एक अन्य व्यक्ति मो. अजीज उर्फ गुड्डू निवासी किच्छा जिसके उत्तर प्रदेश में अपराधियो से सम्पर्क है,के साथ मिलकर अपने षड्यंत्र को अन्तिम रूप देने की योजना बना रहे है।

 

तत्काल उनको गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह कोई अप्रिर्य घटना को अंजाम दे सकते हैं। इनके साथ अन्य लोग भी षड्यंत्र में शामिल हो सकते हैं। सीओ सितारगंज ने बताया कि पुलिस ने हीरा सिह, सतनाम सिह, हरभजन सिहं व मो. अजीज उर्फ गुड्डु के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

ईशा कोप्पिकर और फ्रेडी दारूवाला स्टारर सुरंगा की रिलीज डेट अनाउंस

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मुंबई : जिस वेब सिरीज का ईशा कोप्पिकर और फ्रेडी दारूवाला के फैंस को इंतजार था आखिरकार उसकी रिलीज डेट अनाउंस हो गई है। वेब सिरीज “सुरंगा” में अभिनेता ईशा कोप्पिकर और फ्रेडी दारूवाला मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह एक बैंक चोरी की रीयल स्टोरी पर आधारित है। सुरंगा का ट्रेलर ओटीटी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अतरंगी ने जारी किया था।

एक सहायक बैंक प्रबंधक दक्षिणानी के रूप में ईशा कोप्पिकर और एक पुलिस अधिकारी के रूप में फ्रेडी दारूवाला, जो बैंक डकैती के पीछे के रहस्यों और तकनीकों को उजागर करने के लिए बाहर निकलते हैं। कलाकारों में राकेश बेदी, सचिन वर्मा, राहुल जेटली, संजीव त्यागी, मेघा प्रसाद, अशोक कालरा और पीयूष रानाडे भी शामिल हैं। सुरंगा बी एम गिरिराज द्वारा निर्देशित है और सर्वा प्रोडक्शन स्टूडियो और शशि सुमीत प्रोडक्शंस द्वारा सह-निर्मित है।

खोजी थ्रिलर सुरंगा एक डकैती की वास्तविक घटना पर आधारित है। चोरों ने सोनीपत जिले के एक बैंक में 125 फीट लंबी सुरंग खोदी और नकदी, आभूषण और अन्य कीमती सामानों के साथ 77 लॉकरों को तोड़ दिया।

इसके लिए रोहतक में सेट तैयार किया गया था। सुरंगा उस पूरी कहानी को दर्शाती है कि कैसे डकैती की साजिश रची गई और उसे अंजाम दिया गया। डकैती के बाद, शहर का निरीक्षक मामले की जांच के लिए जिम्मेदार होता है, लेकिन उसकी निराशा और घटनाओं के अचानक मोड़ के कारण, उसे पता नहीं चलता कि घटना के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। शो का उत्पादन मूल्य सर्वोत्कृष्ट है।

ईशा कोप्पिकर ने कहा कि उन्हें “श्रृंखला की शूटिंग करना बहुत अच्छा लगा।” फ्रेडी ने कहा कि उन्होंने “हरियाणवी लहजे में आसानी से ढलने में महारत हासिल कर ली है”।

निर्माता भारत नौटियाल, सुमीत मित्तल, जितेंद्र सिंगला और कौशिक इज़ारदार ने उन पर विश्वास करने और उन्हें बेहतरीन शो देने के लिए मंच का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया है। सुरंगा विभु अग्रवाल और अतरंगी द्वारा निर्मित है।

चुनाव आयोग ने लगाई ‘धनुष-बाण’ पर रोक, जाने अब क्या होगा उद्धव ठाकरे का चुनाव चिन्ह.?

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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार को गिरे हुए काफी समय हो गया, लेकिन अभी तक एकनाथ शिंदे और ठाकरे गुट एक दूसरे के खिलाफ लगातार वार कर रहे हैं। बता दें कि अभी तक इस बात का भी फैसला नहीं हो पाया है कि आखिर असल शिवसेना कौनसी पार्टी है, किस पार्टी को ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह मिलेगा। कोर्ट ने इस फैसले को पूरी तरह से चुनाव आयोग पर छोड़ दिया था। जिसके बाद से लगातार इसको लेकर कई खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में सामने आई खबर के अनुसार अब ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह दोनों में से कोई भी गुट इस्तेमाल नहीं करेगा।

बता दें कि 3 नवंबर को अंधेरी ईस्ट असेंबली सीट पर चुनाव होना है। जिसको लेकर तैयारी पूरी की जा चुकी हैं। लेकिन अभी तक न तो दोनों गुटों के पार्टी के नाम सामने आए हैं और न ही चुनाव चिन्ह। ऐसे में चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को आदेश दिया है कि वह जल्द से जल्द अपने चुनाव चिन्ह चुनें। मिली जानकारी के अनुसार इस मुद्दे को लेकर दोनों ही गुट आज एक बैठक करने वाले हैं। जहां एकनाथ शिंदे अपने खेमे के साथ शाम 7 बजे वर्षा बंगले पर बैठक करेंगे। तो वहीं उद्धव ठाकरे अपने विधायकों और नेताओं के साथ दोपहर 12 बजे मातोश्री में बैठक करेंगे।

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इस बीच एक और बड़ी जानकारी प्राप्त हुई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि ‘धनुष-बाण’ की जगह उद्धव ठाकरे बाघ के चेहरे को अपना चुनाव चिन्ह बना सकते हैं। इस बात का अनुमान तब लगाया गया जब उनके गुट के सदस्य और उनके करीबी मिलिंद नार्वेकर ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बाघ के चेहरे की एक तस्वीर शेयर की और साथ में लिखा कि “हमारा चिन्ह उद्धव बालासाहेब ठाकरे।” अब देखते हैं कि क्या सच में उद्धव ठाकरे का चुनाव चिन्ह बाघ होगा..?

10 साल के शौर्यजीत के फैसले ने जीता लोगों का दिल, खुद प्रधानमंत्री ने किया…

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किसी बच्चे के सिर से अगर उसके पिता का साया उठ जाए तो वह अपनी उम्मीदें छोड़ देता है। अगर बच्चा छोटा हो फिर तो उसके लिए संभालना और भी ज्याद मुश्किल होता है। लेकिन गुजरात के 10 साल के शौर्यजीत ने इस मुश्किल काम को भी आसान कर दिखाया। इस बच्चे ने न सिर्फ पिता के गम को झाला, बल्कि अपनी किस्मत को भी चमकाया। इस बच्चे ने इस उम्र में भी अपने पिता के सपने को पूरा कर दिखाया। बता दें कि इस बच्चे के पिता का सपना था कि वह गुजरात में चल रहे 36वें नेशनल गेम्स में उतरे और उनने जीत हासिल करें।

गोरतलब हैं कि शौर्यजीत के पिता रंजीत कुमार का निधन 30 सितंबर को हुआ था। जिसके बाद अब शौर्यजीत ने मलखंब के खेल में हिस्सा लेकर सबको हैरान कर दिया। 10 साल के शौर्यजीत ने अपने प्रदर्शन से सबको मुरीद बना लिया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शौर्यजीत का वीडियो शेयर किया और उन्हें स्टार बताया है। पहले राउंड में ही शौर्यजीत ने शानदार प्रदर्शन किया।

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लोगों द्वारा हौसला अफजाई किए जाने पर उन्होंने कहा कि “जिस तरह लोगों ने मेरा हौसला बढ़ाया, वो देखकर काफी गर्व महसूस हुआ। यह मेरे पिता का सपना था कि मैं नेशनल गेम्स में हिस्सा लूं और स्वर्ण पदक जीतूं। मैं इसे जरूर पूरा करूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि “मेरे पिता ने मुझे मलखंभ से जोड़ा। मैं पिछले 6 साल से ट्रेनिंग कर रहा हूं। मुझे शुरू में यह बहुत मुश्किल लगा लेकिन धीरे-धीरे मैं इस खेल से प्यार करने लगा।”

बता दें कि इस दौरान कोच जीत सपकाल ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि “शौर्यजीत को नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने के लिए मनाना बहुत मुश्किल था। उसकी मां ने उसे समझाया कि वह अपने पिता की इच्छा को पूरी करने का मौका चूक जाएगा। यह शौर्यजीत की मानसिक मजबूती ही है कि वो न सिर्फ इन खेलों में हिस्सा लेने आया, बल्कि अच्छा प्रदर्शन भी किया।”

“शिवसेना बालासाहेब ठाकरे…” क्या यही होगा शिवसेना का नया नाम?

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चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे धड़े ने मुंबई के अंधेरी ईस्ट में आगामी उपचुनाव के लिए तीन नामों और प्रतीकों की एक सूची आयोग को सौंपी है। इससे पहले आयोग की तरफ से 197 नामों और चिह्नों की सूची में से कोई एक नाम सौंपा गया था।

जानकारी मिली है कि उद्धव गुट की अपनी पहली पसंद ‘शिवसेना बालासाहेब ठाकरे’ है। जबकि दूसरी पसंद में उद्धव खेमे ने ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ नाम सुझाया है।

दरअसल, शनिवार शाम को पूर्व मंत्री और उद्धव खेमे के वरिष्ठ नेता अनिल परब ने कहा था कि हमारे समूह को चुनाव आयोग द्वारा 197 प्रतीक और नामों की सूची उपलब्ध कराई गई थी। जिसमें से तीन पर विचार किया जा रहा है। बता दें कि शिवसेना के दोनों धड़ों को नाम और चुनाव चिह्न के अपने तीन अंतिम विकल्प सोमवार दोपहर 1 बजे तक चुनाव आयोग को भेजने हैं।

इन नामों पर उद्धव कर रहे विचार

उद्धव ठाकरे गुट ने तीन नामों पर अपनी प्रारंभिक सहमति जताई है। सूत्रों का कहना है कि आज दोपहर को मीटिंग में नाम फाइनल हो सकता है। इसमें दो पसंदीदा नाम शिवसेना बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे है।

उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुटों के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच शनिवार को चुनाव आयोग ने शिवसेना के नाम और उसके ‘धनुष और तीर’ के चिह्न पर रोक लगा दी है। दोनों को तीन नामों और प्रतीकों की एक सूची देने के लिए कहा था। जिसके लिए आयोग ने उन्हें 197 नामों की लिस्ट सौंपी थी।

चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के अनुसार दोनों समूहों को अब नए नामों का चयन जल्द से जल्द करना होगा। उन्हें अलग-अलग प्रतीक आवंटित किए जाएंगे, जिन्हें वे उपलब्ध मुफ्त प्रतीकों की सूची में से चुन सकते हैं।