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गढ़वाल से कांग्रेस का ‘आस्था संग अभियान’, बदरीनाथ-केदारनाथ से चुनावी रणनीति की शुरुआत

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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर आस्था और रणनीति का संगम देखने को मिल रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गढ़वाल मंडल से अपने अभियान की शुरुआत करने का फैसला किया है। पार्टी इस पहल की शुरुआत केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम से करेगी, जिसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा 6 मई से गढ़वाल क्षेत्र के दौरे पर रहेंगी। उनका यह कार्यक्रम केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी जनसंपर्क बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। गढ़वाल के धार्मिक स्थलों का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव व्यापक होने के कारण कांग्रेस यहां से राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है। अब तक राज्य में धार्मिक और आस्था से जुड़े मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। हालांकि, कांग्रेस का यह कदम संकेत देता है कि पार्टी अब उसी मैदान में उतरकर राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

दौरे के तहत कुमारी शैलजा 6 मई को ऋषिकेश पहुंचेंगी। 7 मई को श्रीनगर में जिला कांग्रेस कमेटी के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति की समीक्षा करेंगी। 8 मई को वह केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करेंगी और अगस्त्यमुनि व रुद्रप्रयाग में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी। 9 और 10 मई को उनका कार्यक्रम चमोली जिले में रहेगा, जहां वह बदरीनाथ धाम में दर्शन के साथ जोशीमठ में कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगी।

इसके बाद 11 मई को टिहरी गढ़वाल के चंबा में बैठक के साथ यह दौरा संपन्न होगा। इस दौरान पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी जैसे जिलों में संगठन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस दौरे को संगठन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से अभियान की शुरुआत कर कांग्रेस न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ाव दिखाना चाहती है, बल्कि यह संदेश भी देना चाहती है कि वह परंपरा और जनता की भावनाओं के साथ खड़ी है। इससे राज्य की सियासत में मुकाबला और रोचक होने की संभावना जताई जा रही है।

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