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टूरिस्ट बस की ट्रक से हुई टक्कर, हादसे में 10 की मौत, 35 घायल

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मुंबई: महाराष्ट्र में शुक्रवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। मिली जानकारी के अनुसार मुंबई से शिर्डी आ रही टूरिस्ट बस की नासिक-शिर्डी हाईवे पर आमने-सामने की टक्कर हो गई। इस बस में कुल 45 यात्री सवार थे। 10 की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में 7 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। वहीं हादसे में 35 लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को नजदीकी साईंबाबा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन से आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। बस में मुंबई के अंबरनाथ के यात्री सवार थे, जो शिर्डी दर्शन के लिए जा रहे थे। हादसा पाथेर गांव के पास हुआ जो सिन्नर-शिरडी हाईवे पर पड़ता है। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक टक्कर इतनी तेज थी कि बस और ट्रक दोनों ही बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। पुलिस मौके पर मौजूद है।

उत्तराखंड : आज होगी कैबिनेट बैठक, जोशीमठ पर होंगे फैसले!

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देहरादून: जोशीमठ संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन, अब तक कई अहम फैसले लिए जाने हैं, जिसके लिए सरकार आज सीएम धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक करने जा रही है। इसमें जोशीमठ को लेकर अहम फैसलों पर मुहर लग सकती है।

भूधंसाव से अस्तित्व संकट का सामना कर रहे जोशीमठ को बचाने और स्थानीय नागरिकों के पुनर्वास को सरकार ने रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। धंसाव के लिए अब तक बड़े कारण के रूप में अलकनंदा नदी से जोशीमठ की तलहटी में हो रहे कटाव (टो इरोजन) को आंका गया है।

पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल की शुक्रवार को होने वाली बैठक में टो इरोजन रोकने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा। साथ में क्षेत्र में असुरक्षित हो गए भवनों के निवासियों के अस्थायी एवं स्थायी पुनर्वास के साथ ही उन्हें तत्काल राहत के रूप में मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी मंत्रिमंडल की मुहर लगेगी। केंद्र को भेजे जाने वाले लगभग एक हजार करोड़ के राहत पैकेज को भी स्वीकृति दी जाएगी।

उत्तराखंड: कांग्रेस नेताओं को कोर्ट से बड़ी राहत, सरकार और कैबिनेट मंत्री के बेटे के जवाब तलब

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  • कांग्रेसी नेताओं- जयेंद्र रमोला, अभिनव थापर व गरिमा दसौनी- पर पुलिस मुकदमें में हाईकोर्ट से बड़ी राहत।

नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे की ओर से दर्ज मुकदमे में कांग्रेस नेताओं जयेंद्र रमोला, अभिनव थापर और गरिमा महराज दसोनी के मुकदमे ख़ारिज करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए गंभीर आदेश दिए हैं।

प्रदेश के वित्त मंत्री प्रेम चंद्र अग्रवाल के पुत्र पीयूष अग्रवाल ने अभिनव थापर, जयेंद्र रमोला व गरिमा दसोनी पर कोतवाली, देहरादून में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया कि इन तीन कांग्रेसी नेताओं ने इनके व इनके पिता वित्त मंत्री का सार्वजनिक अपमान किया।

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पीयूष व इनके पिता वित्त मंत्री की मानहानि कर कांग्रेस नेताओ ने कांग्रेस मुख्यालय, देहरादून में 28.12.2022 को प्रेस करके फर्जी तथ्यों के साथ पीयूष अग्रवाल पर राजस्व चोरी व सरकारी धन के लूट के आरोप लगाए। इस राजनैतिक FIR के विरुद्ध अभिनव थापर, जयेंद्र रमोला और गरिमा दासोनी तीनों कांग्रेसी नेताओं ने माननीय हाईकोर्ट नैनीताल में याचिका दायर की गई जिस पर आज सुनवाई हुई।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में मुख्य बिंदु थे कि जयेंद्र रमोला ने प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ा व उनके चुनाव को खारिज करने हेतु हाई कोर्ट में इलेक्शन पिटीशन भी दाखिल की गई है तथा अभिनव थापर ने विधानसभा भर्ती घोटाले को हाईकोर्ट के पटल पर खोला हैै, जिसके पूर्व स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल मुख्य आरोपियों में से एक है।

इसलिए उनके बेटे ने इनपर राजनीतिक रंजिश के तहत यह मुकदमा पुलिस से करवाया। यह भी बताया कि जो प्रेस वार्ता की गई वह सरकारी सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर की गई और कोई अनर्गल आरोप नहीं लगाये।

सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय मिश्रा ने सरकार को गंभीर आदेश देते हुए तीनों कांग्रेसी नेताओ के खिलाफ पूरी पुलिस जांच को stay (स्थगन) कर दिया। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया की 4 हफ्ते के अंदर पुलिस और पीयूष अग्रवाल ये बताए की यह FIR इन कांग्रेसी नेताओ पर किन तथ्यों के आधार पर दर्ज कराई गई थी और समस्त याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया, इस हाई-प्रोफाइल राजनैतिक मामले में कांग्रेसी नेताओ के लिए हाईकोर्ट से यह बड़ी राहत की खबर है।

मुख्य अपीलकर्ता अभिनव थापर के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि जस्टिस संजय मिश्रा की बेंच ने यह आदेश दिए है कि पुलिस जांच स्थगित की जाए व 4 हफ्ते में सरकार को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

हाईकोर्ट के इस कड़े निर्णय से प्रथम दृष्टया यह लगता है कि पीयूष अग्रवाल की कांग्रेसी नेताओं के विरुद्ध यह FIR बिना किसी तथ्यों के व जल्दबाजी में सत्ता के जोर से कांग्रेसी नेताओ पर करवाई गयी थी ।

उत्तराखंड : विनाशकारी NTPC परियोजना, रिपोर्ट में खुलासा, नूतन सवेरा ने 2010 में किया था आगाह

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चमोली: प्रख्यात पर्यावरणविद डॉ. रवि चोपड़ा ने NTPC और L&T के आंकड़ों के आधार पर लिखे गए एक शोध पत्र के हवाले से कहा कि आज जो कुछ जोशीमठ में घटित हो रहा है, उसका सीधा संबंध अतीत में NTPC के कामों से है. उन्होंने कहा कि 2009 में तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना में TBM के फंसने के साथ ही पानी का रिसाव हुआ था.

उस पानी के दबाव के चलते नई दरारें चट्टानों में बनी और पुरानी दरारें और चौड़ी हो गई. इसी के कारण टनल के अंदर से पानी का बाहर भी रिसाव हुआ. वे चट्टानें बहुत ही कमजोर और संवेदनशील हैं. उन्होंने शोध पत्र के हवाले से कहा कि उस वक्त कंपनी को उपचार के उपाय सुझाए गए थे, लेकिन उन सुझावों पर काम नहीं किया.

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डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि इस सब को पढ़ कर वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि टनलिंग (सुरंग बनाने की प्रक्रिया) की वजह से यहां के भू-जल के तंत्र पर प्रभाव पड़ा. उन्होंने कहा कि टनल में पानी का जितना रिसाव हुआ। उससे कई गुना अधिक पानी 7 फरवरी 2021 को सुरंग में घुसा. उससे चट्टानों में नई दरारें बनी और पुरानी दरारें चौड़ी हो गई, जिसका प्रभाव अत्याधिक व्यापक होगा.

इस बात को कहने के पर्याप्त आधार हैं कि हम आज जो झेल रहे हैं, वह NTPC की सुरंग निर्माण प्रक्रिया का परिणाम है. उन्होंने कहा कि नियंत्रित विस्फोट करने का NTPC का दावा खोखला है। क्योंकि साइट पर विस्फोट करते समय कोई वैज्ञानिक नहीं बल्कि ठेकेदार रहता है, जो अपना काम खत्म करने की जल्दी में होता है.

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने सिलसिलेवार तरीके से बताया कि पिछले 14 महीने से संघर्ष समिति निरंतर सरकार को जोशीमठ पर मंडराते खतरे के प्रति आगाह कर रही थी. इसके लिए प्रशासन के जरिये सरकार को ज्ञापन भिजवाए, स्वयं पहल करके भू-वैज्ञानिकों से सर्वे करवाया। सरकार की विशेषज्ञ कमेटी के सर्वे में भी सहयोग किया. आपदा प्रबंधन सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक से बात की, लेकिन किसी ने स्थितियों के बिगड़ने तक मामले को गंभीरता से नहीं लिया.

उन्होंने कहा कि तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना के लिए हुए सर्वे से पहले ही वे जिस बात की आशंका प्रकट कर रहे थे और इस मामले में 2003 में वे भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिख चुके थे, आज वे आशंकाएं सच सिद्ध हुई हैं.

उन्होंने कहा कि 2009 में सुरंग से रिसाव के बाद जोशीमठ के पानी के लिए 16 करोड़ रुपये की व्यवस्था के अलावा घरों का बीमा करना भी NTPC ने करने का लिखित समझौता किया था, जो इस बात की स्वीकारोक्ति थी कि NTPC की परियोजना से जोशीमठ को नुकसान पहुंच सकता है.

Joshimath Crisis: मलारी इन और माउंट व्यू होटल तोड़ने की कार्रवाई शुरू

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जोशीमठ: मलारी इन और माउंट व्यू होटल को चरणबद्ध तरीके से गिराया जाएगा। ये होटल टेड़े हो गए हैं। इसे तोड़ना जरूरी है क्योंकि इसके नीचे भी कई घर और होटल हैं और अगर ये ज्यादा धंसेगा तो कभी भी गिर सकता है। शहर में असुरक्षित भवनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक कुल 678 भवन चिह्नित किए जा चुके हैं। सीबीआरआई की टीम ने सोमवार को मलारी इन और माउंट व्यू होटल का सर्वे किया था। आज बृहस्पतिवार को होटल माउंट व्यू को ढहाया जा रहा है। इन होटलों को अत्यधिक क्षति पहुंची है।

जिलाधिकारी हिमांश खुराना ने जोशीमठ आपदा अधिनियम 2005 की धारा 34 टी के तहत होटल मलारी इन व माउंट व्यू को आम जन मानस की सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल ध्वस्त किए जाने के आदेश जारी किए थे। जोशीमठ में होटल को तोड़ने जाने की कार्रवाई शुरू गई है। जोशीमठ में बीते मंगलवार को ही होटल माउंट व्यू और मलारी इन को ध्वस्त किया जाना था, लेकिन होटल स्वामियों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक मूल्यांकन नहीं किया गया, साथ ही नोटिस तक नहीं दिए गए।

विरोध बढ़ने पर प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े। हालांकि अधिकारियों का कहना कुछ और ही था। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ.रंजीत सिन्हा ने कहा कि ऊंचे भवनों को तोड़ने के लिए क्रेन की आवश्यकता है, जो वहां नहीं मिल पाई। इसलिए देहरादून से क्रेन भेजी गई।

जोशीमठ में असुरक्षित भवनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को 45 भवन और चिन्हित किए गए। इस तरह से अब तक कुल 723 भवन चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें से 86 भवनों को पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर लाल निशान लगा दिए गए हैं। जल्द ही इन भवनों को ढहाने की कार्रवाई शुरू होगी।

बिहार के शिक्षा मंत्री की जीभ काटने वाले को दूंगा 10 करोड़, महंत ने किया ऐलान

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बिहार: शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर द्वारा रामचरितमानस पर दिए विवादित बयान पर हंगामा हो रहा है। अयोध्या के महंत जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जहिर की है। उन्होंने चंद्रशेखर को मंत्री के पद से बर्खास्त करने की मांग की है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “बिहार के शिक्षा मंत्री ने जिस तरह से रामचरितमानस ग्रंथ को नफरत फैलाने वाली किताब बताया है, उससे पूरा देश आहत है। उनका यह बयान सभी सनातनियों का अपमान है। मैं इस बयान पर शिक्षा मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करता हूं। उन्हें पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

जगद्गुरु ने आगे कहा कि चंद्रशेखर को एक हफ्ते के भीतर माफी मांगनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो मैं बिहार के शिक्षा मंत्री की जीभ काटने वाले को 10 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा करता हूं। परमहंस ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रामचरितमानस तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला ग्रंथ है। रामचरितमानस मानवता की स्थापना करने वाला ग्रंथ है। यह भारतीय संस्कृति का स्वरूप है, यह हमारे देश का गौरव है। रामचरितमानस पर इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने बुधवार को नालंदा यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह के दौरान विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मनुस्मृति, रामचरितमानस और बंच आफ थॉट्स जैसी किताबों को जला देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन किताबों ने नफरत फैलाई है और लोगों को सदियों पीछे धकेलने का काम किया है। इतना ही नहीं, शिक्षा मंत्री ने ये भी कहा कि रामचरितमानस में कहा गया है कि निचली जाति के लोग शिक्षा हासिल कर जहरीले हो जाते हैं, जैसे एक सांप दूध पीकर हो जाता है।

CM अरविंद केजरीवाल को रिकवरी नोटिस पर बिफरे सिसोदिया, लगाये ये आरोप

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नई दिल्ली : राजनीतिक विज्ञापनों की आड़ में दिल्ली सरकार के खाते से 163 करोड़ रुपये के व्यय पर मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को सरकारी नोटिस भेजे जाने पर उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया  ने आपत्ति जताई है। उन्होंने आज गुरुवार को प्रेस वार्ता कर एलजी पर शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।

सिसोदिया ने कहा कि अधिकारियों का उपयोग जनता के काम कराने में किया जाना चाहिए, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को नोटिस देने में नहीं। भाजपा की सरकारें भी यही कर रही हैं। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सिसोदिया ने कहा, “दिल्ली में अफसरों पर असंवैधानिक नियंत्रण का नाजायज इस्तेमाल देखिए – बीजेपी ने दिल्ली सरकार की सूचना विभाग सचिव ऐलिस वाज (IAS) से नोटिस दिलवाया है कि वर्ष 2017 से दिल्ली से बाहर राज्यों में दिये गए विज्ञापनों का खर्चा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से वसूला जाएगा। उन्होंने यह बातें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही हैं।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “दिल्ली के अखबारों में बीजेपी के तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों के विज्ञापन छपते हैं, पूरी दिल्ली में इनके सीएम के फोटो वाले सरकारी होर्डिंग लगे हैं। क्या इनका खर्चा बीजेपी मुख्यमंत्रियों से वसूला जाएगा? क्या बीजेपी इसीलिए दिल्ली के अफसरों पर असंवैधानिक कब्जा करके रखना चाहती है? दिल्ली प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मनीष सिसोदिया के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि एक समय नादिरशाह ने दिल्ली को लूटा था। अब सत्ता में बैठकर आम आदमी पार्टी लूट रही है।

AAP से राजनीतिक विज्ञापन के पैसे वसूली के नोटिस पर मनीष सिसोदिया गलत बयानबाजी कर रहे हैं। कह रहे हैं अधिकारी पर दबाव डाल कर पत्र लिखवाया गया। यह बात बोलकर वह संवैधानिक पद का अपमान कर रहे हैं। नोटिस से आप मे बौखलाहट है। जनता को सुविधाएं देने की जगह 163 करोड़ रुपये आप का चेहरा चमकाने पर खर्च किया। यह खजाने की लूट है। इस मामले में आप हाई कोर्ट भी गई थी। स्टे नहीं मिलने पर दिल्ली सरकार द्वारा वसूली का नोटिस भेजा गया।

उत्तराखंड : 4 दिन पहले हुई पटवारी परीक्षा का लीक हुआ था पेपर! जांच शुरू

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देहरादून: उत्तराखंड में पेपर लीक मामला अब भी ठंडा नहीं हुआ है। 2022 में हुए UKSSSC मामले की अब भी जांच चल रही है। इस बीच परीक्षाओं की जिम्मेदारी लोक सेवा आयोग को सौंपी गई। दावे भी किए गए कि नकल माफिया किसी भी तरह से सफल नहीं हो पाएंगे। लेकिन, अब जो सवाल उठ रहे हैं। उसने एक बार फिर से नकल माफिया के फिर से पेपर लीक कराने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन बातों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन, मीडिया रिपोर्टों में इसका दावा किया गया है।

तीन दिन पहले हुई पटवारी परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने की बात सामने आई है। जिस से हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले में कनखल थाने में दोपहर तक FIR कराने की तैयारी भी शुरू हो गई है। उत्तराखंड STF मामले की छानबीन में जुटी हुई है। इस मामले में लोक सेवा आयोग उत्तराखंड के सभी बड़े जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है।

लोक सेवा आयोग परिसर में किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही हैं और अध्यक्ष राकेश कुमार और सचिव गिरधारी सिंह रावत फोन पर बात नहीं कर रहे हैं। पूरे लोक सेवा आयोग में हड़कंप मचा हुआ है, कोई कुछ बोलने या बताने को तैयार नहीं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग राज्य के 13 जिलों के परीक्षा केंद्रों में 8 जनवरी 2023 को यूकेपीएससी पटवारी/लेखपाल 2022 परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा में हजारों की संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आयोग द्वारा 29 दिसंबर 2022 को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट – psc.uk.gov.in पर जारी किये गए थे।

UKPSC ने 391 पटवारी पदों के लिए भर्तियां जारी की थी। जिसमें अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, नैनीताल, पौढ़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टेहरी, उत्तरकाशी, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिले शामिल हैं।

पंजाब के दोराहा से आगे बढ़ी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, उमड़ा समर्थकों का हुजूम

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राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ अपने पंजाब चरण के तहत गुरूवार को सुबह दोराहा से आगे बढ़ी और इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इसमें शामिल हुए. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का पंजाब चरण बुधवार को फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद से शुरू हुआ था.

गुरूवार को सुबह यात्रा में कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद अमर सिंह, गुरजीत सिंह औजला, पूर्व विधायक गुरकीरत कोटली, पंजाब युवा कांग्रेस के प्रमुख ब्रिंदर सिंह ढिल्लों और पार्टी के कई अन्य नेता राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए. इस दौरान पार्टी के कई कार्यकर्ता राष्ट्रीय ध्वज थामकर चलते दिखाई दिए.

पंजाब चरण की शुरुआत से पहले राहुल ने गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब में मत्था टेका था. उन्होंने पूर्व सैन्य कर्मियों और पंजाब के इतिहासकारों, अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों और कृषि विशेषज्ञों के एक पैनल से संवाद भी किया था. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ अपने पंजाब चरण के तहत लुधियाना, गोराया, फगवाड़ा, जालंधर, दसुआ और मुकेरियां से होकर गुजरेगी. यात्रा के जम्मू-कश्मीर में दाखिल होने से पहले कांग्रेस 19 जनवरी को पठानकोट में एक रैली आयोजित करेगी.

WHO की चेतावनी, बच्चों को न पिलाएं भारतीय कंपनी की ये कफ सिरप

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उज्बेकिस्तान में कथित तौर से भारतीय कफ सिरप पीने से 19 बच्चों की मौत के मामले को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) उज्बेकिस्तान के कई बड़े अधिकारियों के संपर्क में है और इस पूरे मामले को लेकर डब्ल्यूएचओ की ओर से जानकारी ली जा रही है. WHO ने कहा है कि नोएडा स्थित कंपनी मैरियन बायोटेक की ओर से बनाए गए दो कफ सिरप का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

उज्बेकिस्तान की सरकार ने बच्चों की मौत के लिए नोएडा स्थित मैरियन बायोटेक के कफ सिरप ‘डॉक-1 मैक्स’ को जिम्मेदार ठहराया था. बताया गया है कि अब तक मैरियन बायोटेक ने इन उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता पर डब्ल्यूएचओ को गारंटी नहीं दी है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार (11 जनवरी) को सिफारिश की है कि उज्बेकिस्तान में बच्चों के लिए दो भारतीय कफ सिरप- एम्ब्रोनोल और डॉक-1 मैक्स का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि मैरियन बायोटेक से निर्मित कफ सिरप ऐसे उत्पाद हैं जो गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते हैं. लैब विश्लेषण में पाया गया कि दोनों उत्पादों में दूषित पदार्थों के रूप में डायथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल की अस्वीकार्य मात्रा शामिल है.

उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्लेषण करते हुए दावा किया था कि भारतीय कफ सिरप में एक जहरीला पदार्थ, एथिलीन ग्लाइकॉल होता है. बताया जाता है कि बच्चों के लिए मानक से अधिक मात्रा में खुराक दिया जाना बेहद खतरनाक है. उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि उनके देश में बच्चों ने नोएडा स्थित मैरियन बायोटेक के कफ सिरप ‘डॉक-1 मैक्स’ का सेवन किया था. इसके बाद उन बच्चों की मौत हो गई.

क्या भारत में हो रही है सिरप की बिक्री?

उज्बेकिस्तान में 19 बच्चों की हुई मौत को नोएडा स्थित दवा निर्माता की सिरप से जोड़ने के दावे के बाद भारत सरकार इसकी जांच करवा रही है.  सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के सूत्रों ने बताया था कि इस खास सिरप को फिलहाल भारतीय मार्केट में नहीं बेचा जा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया था कि यूपी ड्रग कंट्रोलर औऱ केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन  ने जांच शुरू कर दी थी. सिरप के सैंपल चंडीगढ़ भेजे गए थे.

गाम्बिया में भी आया था सिरप से मौत का मामला

डॉक -1 मैक्स सिरप में एथिलीन ग्लाइकोल की उपस्थिति को दिखाया गया है. इसमें वही खतरनाक केमिकल हैं जिसे गाम्बिया में मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. साल 2022 में अक्टूबर में अफ्रीकी देश गाम्बिया में भारत में निर्मित कफ सिरप से 60 से अधिक बच्चों की मौत का दावा किया गया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी. हालांकि अभी तक सिरप से मौत की पुष्टि नहीं की गई है.