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कृषि कानूनों पर लिया यूटर्न, कंगना रनौत ने मांगी माफी

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Kangna

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने तीनों कृषि कानून को फिर से लागू करने के लिए केंद्र सरकार से मांग की थी। कंगना के इस बयान के बाद से विवाद होने लगा है। विपक्षी नेता कंगना के इस बयान को लेकर लगातार भाजपा पर हमला बोल रहे हैं। कंगना ने अपने इस बयान के लिए अब माफी मांग ली है। मंडी सांसद ने कहा कि कृषि कानून को लेकर दिए गए बयान से अगर किसी को ठेस पहुंचा है तो वह अपने शब्द वापस लेती हैं।

कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर वीडियो शेयर कर कहा कि पिछले कुछ दिनों में मीडिया ने मुझसे कृषि कानूनों को लेकर कई सवाल किए और मैंने ये सुझाव दिया कि किसानों को तीनों कृषि कानूनों को वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से निवेदन करना चाहिए। मेरी इस बात से बहुत सारे लोगों को निराशा हुई।

कंगना ने कहा कि जब कृषि कानूनों को लागू किया गया था तो हम बहुत सारे लोगों ने उसका समर्थन किया था। लेकिन बड़ी ही संवेदनशीलता और सहानुभूति से हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिए थे। ऐसे में हम सब कार्यकर्ताओं का कर्तव्य बनता है कि हम उनके शब्दों की गरिमा रखें।

मंडी सांसद ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि उन्हें पता है कि उनके इस बयान के बाद से विरोध होगा। लेकिन फिर भी उनका मानना है कि देश के किसानों को तीनों कृषि कानूनों को फिर से वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि देश के विकास में किसानों की अहम भूमिका है और वो किसानों का दर्द समझती हैं।

कंगना के बयान के बाद से पूरे देश में उनका विरोध हो रहा है। मंडी सांसद के बयान को लेकर विपक्षी नेता लगातार हमला बोल रहे हैं। कंगना के बयान के बाद भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर वीडियो शेयर कर कहा कि भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।

यह बयान उन तीन कृषि कानूनों से संबंधित है, जिन्हें भाजपा सरकार ने रद्द कर दिया था। ऐसे में, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह बयान यह कंगना रनौत के व्यक्तिगत विचारों को दर्शाता है। उनका यह बयान भाजपा के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करता है।

केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर हादसा, 14 लोग थे सवार

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केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर गौरी कुंड के समीप हादसा हो गया। यहां एक वाहन दुर्घटना ग्रस्त हो गया है। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF, SDRF और DDRF की टीमें मौके पहुंची। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि प्राथमिक सूचना के अनुसार वाहन में 14 लोग सवार थे।

जिनमें से 13 को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचा दिया गया है। जबकि एक की तलाश अभी जारी है। सभी लोगों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है। दुर्घटना में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।

श्रद्धांजलि : ताउम्र पहाड़ को समर्पित रहे पहाड़ पुत्र बीपी नौटियाल

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देहरादून: ताउम्र पहाड़ के लिए समर्पित रहने वाले पहाड़ पुत्र बीपी नौटियाल का कल निधन हो गया। बागवानी विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. बीपी नौटियाल पहाड़ की माटी और थाती के लिए हमेशा ही समर्पित योद्धा थे। वह एक बेहद ईमानदार अधिकारी रहे।

शिक्षक पिता परमानंद शास्त्री की सीख को जीवन भर गांठ में समेटे डॉ. भगवती प्रसाद नौटियाल ने कलम से पहाड़ लिखा और मन, क्रम, वचन से पहाड़ को जिया। उनको रिटायरमेंट के बाद भी हमेशा ही पहाड़ की चिन्ता सताती रही। उनकी सोच में ही पहाड़ रचा-बसा था।

उनका मानना था कि पहाड़ पर बागवानी और नगदी फसलों को प्रमुखता देनी होगी। काश्तकारों को बाजार उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने अपनी पीएचडी के लिए तुंगनाथ जैसे ऊंचे इलाके में फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को चुना। उन्होंने बाद में तुंगनाथ में पालीहाउस में टमाटर, मटर और बीन्स उगाने के प्रयास किये।

1979 में डॉ. नौटियाल जब गढ़वाल विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तो वो हिमालय पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा के बेहद करीबी युवा समर्थक थे। लेकिन, जब बात पहाड़ की आई तो उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा के राजनीतिक कद की परवाह किए बगैर पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा को चुना। इससे साबित होता है कि पहाड़ के प्रति उनका कितना गहरा लगाव था।

डॉ. बीपी नौटियाल ने सुंदरलाल बहुगुणा के साथ में आराकोट से शिमला तक की कागज बचाओ पदयात्रा की। लगभग 500 किलोमीटर की पदयात्रा थी। इसमें पांच लोग शामिल थे। श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय में फारेस्टी डिपार्टमेंट शुरू करने का श्रेय भी डॉ. बीपी नौटियाल की जाता है। नाबार्ड में वो विभिन्न पदों पर रहे और पूरी ईमानदारी से पहाड़ के लिए काम करते रहे।

2008 में उन्होंने नाबार्ड के महाप्रबंधक पद से वीआरएस लिया। उन्हें बागवानी विभाग का निदेशक बनाया गया और फिर गलत काम करने को कहा, लेकिन वो भ्रष्ट नेताओं और नौकरशाहों के लिए गले की फांस बन गये। उन्हें हटाने के लिए षडयंत्र रचा गया तो वह हाईकोर्ट पहुंच गये। तीन साल के कार्यकाल के बाद ही यह पद छोड़ा।

2013 में वो भरसार विश्वविद्यालय के डीन बने। 2017 में माजरीग्रांट में फूड प्रोसेंसिंग यूनिट की जिम्मेदारी संभाली। साथ ही वह शिल्पी का प्रकाशन भी करने लगे। पहाड़ के युवाओं को स्वरोजगार और बागवानी के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि पहाड़ के युवाओं को नौकरशाहों के तौर पर तैयार करना होगा। पीसीएस और आईएफएस को एलबीएस या हैदराबाद में ट्रेनिंग देनी होगी।

डॉ. नौटियाल बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। कालेज के समय से वह नाटक लिखते और उनका मंचन करते थे। 1974 में लिखा उनो नाटक खून का दाग खूब सराहा गया। इतिहास का पन्ना और अमर पुष्प् नाटक भी चर्चित रहे। अमर पुष्प श्रीदेव सुमन पर आधारित नाटक था। इतना ही नहीं, उनको जटरोफा पर शोध और कई लेख प्रकाशित हुए।

उत्तराखंड में इनको बिजली के बिलों में मिलेगी 50% की सब्सिडी, शासनादेश जारी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिनांक 16 सितम्बर, 2024 को की गयी घोषणा के क्रम में राज्य के घरेलू श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत टैरिफ में सब्सिडी प्रदान करने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत टैरिफ में सब्सिडी निम्नानुसार प्रदान की जायेगी।

हिम-आच्छादित क्षेत्र (Snow bound area) के घरेलू श्रेणी के ऐसे विद्युत उपभोक्ता जिनका मासिक विद्युत उपभोग 200 यूनिट तक है, को लागू विद्युत दरों (विद्युत कर सहित) में 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जायेगी। हिम-आच्छादित क्षेत्र (Snow bound area) का निर्धारण प्रचलित नियमों के अनुसार सम्बन्धित क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई के आधार पर करते हुए ही योजना का लाभ प्रदान किया जायेगा।

अन्य क्षेत्रों के घरेलू श्रेणी के ऐसे उपभोक्ता जिनका अनुबन्धित विद्युत भार 1 किलोवाट तक और मासिक विद्युत उपभोग 100 यूनिट तक है, को विद्युत दरों (विद्युत कर सहित) में 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जायेगी ये सब्सिडी 01 सितम्बर, 2024 से की गई विद्युत खपत पर अनुमन्य होगी।

राज्य सरकार जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। बिजली के बिल में सब्सिडी का निर्णय राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे राज्य के नागरिकों पर वित्तीय बोझ कम होगा और ऊर्जा के उचित उपभोग को प्रोत्साहन मिलेगा। पर्वतीय हिमाच्छादित क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को विशेष रूप से राहत मिलेगी।

बदरी-केदार दर्शन को पहुंची बालीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला

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श्री बदरीनाथ – केदारनाथ दर्शन को पहुंची बालीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला।

श्री बदरीनाथ/ केदारनाथ: 24 सितंबर। बालीवुड अभिनेत्री तथा मिस इंडिया यूनिवर्स उर्वशी रौतेला ने पारिवारिक सदस्यों के साथ आज श्री बदरीनाथ धाम तथा श्री केदारनाथ धाम के दर्शन किये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम तथा केदारनाथ धाम के दर्शन से वह अविभूत है। उन्होंने श्रद्धालुओं से चारधाम यात्रा पर आने की हेतु भी कहा। उल्लेखनीय है
कि कोटद्वार उत्तराखंड की मूलनिवासी वर्तमान में मुंबई में निवास कर रही बालीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने “सिंह साब द ग्रेट” “सनम रे”सहित कई फिल्मों तथा धारावाहिकों में अभिनय किया है इससे पहले उन्होंने कई ब्यूटी कांटेस्ट के खिताब भी जीते है।अभी बालीवुड में उनकी अभिनय यात्रा जारी है।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा हरीश गौड़ ने बताया कि आज मंगलवार प्रात: बालीवुड अभिनेत्री पहले श्री केदारनाथ धाम पहुंची मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की ,भगवान केदारनाथ का जलाभिषेक किया। उनके साथ उनकी माता मीरा रौतेला तथा भाई यशराज रौतेला भी दर्शन को पहुंचे।

पूजा-अर्चना पश्चात बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बालीवुड अभिनेत्री तथा परिजनों को भगवान केदारनाथ का प्रसाद भेंट किया।

ये फर्जीवाड़ा है… मेडिकल एडमिशन में NRI कोटे पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फटकार

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मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में अप्रवासी भारतीयों (NRI) के दूर के रिश्तेदारों को भी आरक्षण दिए जाने को धोखाधड़ी बताते हुए पंजाब सरकार की फटकार लगाई है। SC ने साफ शब्दों में कहा कि यह फर्जीवाड़ा है और इसे बंद करना होगा। पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है और भगवंत मान मुख्यमंत्री हैं। मान सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा बढ़ाने की याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

अब हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी रिजेक्ट हो गई। SC ने इस बात पर जोर दिया कि NRI के दूर के रिश्तेदारों को एडमिशन में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि यह धोखाधड़ी बंद होनी चाहिए। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15% NRI कोटा शुरू करने पर जोर दे रही है।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया था जिसमें राज्य भर के मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटा से एडमिशन की शर्तों में संशोधन किया गया था। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की पीठ ने फैसला सुनाया कि राज्य की 20 अगस्त की अधिसूचना, जिसमें दूर के रिश्तेदारों को शामिल करने के लिए एनआरआई उम्मीदवारों की परिभाषा को व्यापक बनाया गया था, ‘पूरी तरह अनुचित’ थी।

अदालत ने कहा कि NRI कोटा मूल रूप से वास्तविक NRI और उनके बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए था, जिससे उन्हें भारत में शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिले। हालांकि, चाचा, चाची, दादा-दादी और चचेरे भाई-बहनों जैसे रिश्तेदारों को NRI श्रेणी में शामिल करने के सरकार के कदम ने नीति के मूल उद्देश्य को कमजोर कर दिया। अदालत ने कहा, ‘परिभाषा को व्यापक बनाने से संभावित दुरुपयोग का द्वार खुल जाता है, जिससे नीति के उद्देश्य से बाहर के व्यक्ति इन सीटों का लाभ उठा सकते हैं, जो संभावित रूप से अधिक योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर सकते हैं।’ अदालत ने 28 अगस्त को गीता वर्मा और अन्य उम्मीदवारों की याचिका प्राप्त करने के बाद पहले ही नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी।

उन्होंने तर्क दिया कि मेडिकल प्रवेश के लिए एक प्रॉस्पेक्टस 9 अगस्त को जारी किया गया था, लेकिन सरकार ने 20 अगस्त के नोटिफिकेशन से एडमिशन क्राइटेरिया बदल दिया जो स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने नए प्रावधान की अस्पष्टता की आलोचना की, जो दूर के रिश्तेदारों को केवल यह दावा करके अभिभावक के रूप में अर्हता प्राप्त करने की अनुमति देता है कि उन्होंने एक छात्र की देखभाल की है।

इसने रेखांकित किया कि इससे हेरफेर के रास्ते खुल गए, जिससे व्यक्तियों को एनआरआई कोटे के तहत प्रवेश प्राप्त करने के एकमात्र उद्देश्य के लिए अभिभावक होने का दावा करने की अनुमति मिल गई। पीठ ने तर्क दिया कि यह योग्यता आधारित प्रवेश प्रक्रिया को कमजोर करता है, जिससे अधिक शैक्षणिक रूप से योग्य छात्रों को अनुचित रूप से नुकसान होता है।

मुख्यमंत्री धामी के अधिकारियों को सख्त निर्देश, 15 अक्टूबर तक गड्ढा मुक्त करें सड़कें

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देहरादून: सभी सड़कें 15 अक्टूबर तक गड्ढ़ा मुक्त की जाएं। राज्य में अतिवृष्टि से प्रभावित सभी क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किये जाएं। सचिव, विभागाध्यक्ष एवं सभी जिलाधिकारी पुनर्निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करें। जो कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं, उनका भौतिक सत्यापन किया जाए, जो सड़कें अभी बंद हैं, उन्हें यथाशीघ्र सुचारू किया जाए।

आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर सड़कों के स्थाई ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश मंगलवार को आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में सभी स्थितियां सामान्य बनाई जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि जन सामान्य को किसी भी प्रकार से परेशानी न हो। इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर समस्याओं का समाधान करें। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का आंकलन कर मानकों के अनुसार क्षतिपूर्ति की जाए।

सभी जिलाधिकारी अपने जिलों को आदर्श जनपद बनाने की दिशा में कार्य करें। जिन गांवों से लोगों को विस्थापित करना है, विस्थापन की कार्यवाही भी जल्द की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि वे नियमित जनपदों की विभिन्न व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षा काल के बाद होने वाली जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। जल जनित रोगों से बचाव के लिए मुख्यमंत्री ने नियमित जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिये हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं कि सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

अस्पतालों में सफाई व्यवस्था के साथ ही मरीजों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। उन्होंने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में आंतरिक मार्गों की मरम्मत एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये हैं।

प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए कुल 427.87 करोड़ रूपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है। इसमें राज्य आपदा मोचन निधि से 386.87 करोड़ रूपये, राज्य सेक्टर न्यूनीकरण मद से 15 करोड़ और राज्य सेक्टर नॉन एसडीआरएफ मद से 26 करोड़ रूपये अवमुक्त किये गये हैं।

राज्य आपदा मोचन निधि के पुर्स्थापना और पुनर्वास मद के लिए विभागों को 95 करोड़ की धनराशि और दी जा रही है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को 50 करोड़, पीएमजीएसवाई को 15 करोड़, पेयजल निगम को 20 करोड़ एवं यूपीसीएल को 10 करोड़ रूपये की धनराशि दी जा रही है।

खूनी संघर्ष : धारदार हथियार से एक की हत्या, तीन घायल

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रुड़की : खेत की मेढ को लेकर हुए मामूली विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। आमखेड़ी गांव में दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर धारदार हथियार से हमला कर एक ग्रामीण की हत्या कर दी। हमले में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से दो को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

मंगलौर कोतवाली पुलिस के अनुसार, क्षेत्र के गांव आमखेड़ी में मंगलवार की सुबह सुंदर पक्ष के लोग गांव के ही पास खेत पर गए थे। इस बीच खेत की मेढ को लेकर दूसरे पक्ष ने सुंदर पक्ष से विवाद कर दिया। बताया जा रहा है कि मामला शांत होने के बाद दोनों पक्ष गांव में आ गए।

आरोप है कि दूसरे पक्ष ने सुंदर पक्ष पर धारदार हथियार से हमला बोल दिया। जिसमें आजाद, सुंदर, सेवाराम उर्फ शिवाजी और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन आननफानन में चारों को रुड़की सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने आजाद को मृत घोषित कर दिया। जबकि सेवाराम और  सुंदर की गंभीर हालत देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया।

पुलिस गांव और सिविल अस्पताल पहुंची और घटना की जानकारी ली। उधर, खूनी संघर्ष में दूसरे पक्ष के लोग भी घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव में दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए गांव में पुलिसतैनात की गयी है। पुलिस मामले की जांच की जा रही है।

बदरीनाथ धाम में नदी में बहे दो लोग, एक को बचाया, दूसरे की तलाश जारी

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चमोली: बदरीनाथ धाम में दर्शन करने आए दो लोग घाट के पास नदी में बह गए। वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह एक को बचा लिया, जबकि एक लापता हो गया। उसकी तलाश जारी है।

जानकारी के अनुसार बदरीनाथ धाम के गांधी घाट के पास नदी में एक व्यक्ति के बहने की सूचना मिली। इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति ने भी नदी में छलांग लगा दी। एसडीआरएफ ने एक व्यक्ति को करीब 200 मीटर की दूरी पर जाकर स्थानीय व्यक्तियों की मदद से बचा लिया।

बताया जा रहा है कि बहने वाले दोनों पिता-पुत्र थे। पिता सुरेश चंद्र (60) को रेस्क्ूय कर लिया गया है। जबकि, उनका बेटा डॉक्टर बल्लभ शेट्टी (40वर्ष) निवासी मलेशिया, लापता है। वो अपने परिवार के चार अन्य लोगों के साथ चारधाम यात्रा पर आए थे।

NIA का बड़ा एक्शन, 11 जगहों पर चल रही छापेमारी

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दुनियाभर के कई देशों में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (Hizb ut-Tahrir Organization) के खिलाफ आज (24 सितंबर) राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की। NIA ने आतंकी साजिश मामले में तमिलनाडु भर में हिज्ब-उत-तहरीर के 11 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

NIA ने हिज्ब उत-तहरीर संगठन से जुड़े लोगों के घरों पर तलाशी ली। चेन्नई पुलिस विभाग में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर में लोगों की भर्ती करने का मामला दर्ज किया गया। इस संगठन पर लोगों का ब्रेनवाश करने का आरोप है। संगठन युवाओं का ब्रेनवॉश कर उनसे देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का काम करती है।

यह संगठन युवाओं को जिहाद के लिए तैयार करती है। वहीं आतंकियों को जैविक हथियार बनाने की भी ट्रेनिंग देता है। इससे पहले मध्य प्रदेश में हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़े 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।