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अकेले भ्रमण करना उन्मुक्तता का अहसास दिलाता है: कल्कि कोचलिन

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अभिनेत्री कल्कि कोचलिन का कहना है कि जब भी वे अकेले भ्रमण पर निकलती हैं तो वह अनुभव उन्हें उन्मुक्तता का अहसास दिलाता है। जब वे 18 वर्ष की थीं तब पहली बार अकेले भ्रमण पर निकली थीं।
32 वर्षीय कल्कि ने बताया, ‘यह बहुत जरूरी है कि महिलाएं अकेले यात्रा करें। यह आपको सशक्त होने का अहसास दिलाता है। आप अपने लिए चुनना सीखते हैं। आपको जानकार और समझदार होना चाहिए। यह संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है।’ उनके मुताबिक देश के उत्तरी क्षेत्र के मुकाबले दक्षिणी इलाका पर्यटकों के लिए ज्यादा मित्रवत है। उन्होंने बताया कि किसी भी स्थल की खूबसूरती का आनंद उठाने के लिए वे यात्रा पर अपने फोन को लेकर नहीं जाती हैं।
फिलहाल वे फॉक्स लाइफ के लिए एक यात्रा कार्यक्रम कर रही हैं जिसका नाम है ‘कल्किज ग्रेट एस्केप’। इस शो में पूर्वोत्तर क्षेत्र का उनका यात्रा वृतांत दिखाया जाएगा। इस शो में उनके पिता जोएल कोचलिन भी नजर आएंगे। इसके लिए पिता और पुत्री ने असम, मेघालय और अरूणाचल प्रदेश की यात्रा की है। कल्कि ने कहा, ‘पूर्वोत्तर की सबसे अच्छी बात वहां के लोगो का खुलापन है। वहां का समाज महिलाओं के प्रति काफी उदार है।

‘बरेली की बर्फी’ में ठेठ गंवई अंदाज में दिखाई देंगे आयुष्मान खुराना

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मुंबई: आने वाली फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ में अभिनेता आयुष्मान खुराना ठेठ गंवाई अंदाज में दिखाई देंगे और शारीरिक रूप से हिष्ट-पुष्ट किरदार को निभाएंगे।
आयुष्मान ने कहा, ‘फिल्म में मेरा हुलिया गंवई होगा। मुझे मसल्स दिखाने होंगे। ‘मेरी प्यारी बिंदु’ के लिए मैंने वजन घटाया था।’ उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि में बन रही इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में 32 वर्षीय आयुष्मान एक प्रकाशक के किरदार में दिखाई देंगे।
उन्होंने कहा, ‘फिल्म का किरदार एक मजबूत आदमी का है। कई बार आप इस तरह के लोगों से मिलते हैं।’’आयुष्मान के मुताबिक उन्होंने फिल्म के किरदार को अदा करने के लिए उस तरह के लोगों से मुलाकात की। फिल्म का निर्देशन अश्विनी अय्यर तिवारी ने किया है जिसमें कृति सैनोन और राजकुमार राव भी मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे।

धोनी की बायोपिक फिल्म रचेगी इतिहास ?

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मुंबई: देश के सफल क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘एम एस धौनी : द अन्टोल्ड स्टोरी’ बड़े पैमाने पर 60 देशों के 4,500 स्क्रीन्स पर रिलीज होगी। फिल्म के निर्माता व फॉक्स स्टार स्टूडियोज के सीईओ विजय सिंह ने अपने बयान में कहा, ‘एम एस धौनी : द अन्टोल्ड स्टोरी’ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भारत में किसी भी भारतीय फिल्म के लिए बड़े पैमाने पर रिलीज होने वाली फिल्म बनने जा रही है। यह बड़े पैमाने पर तमिल और तेलुगू (डब करके) में रिलीज होने वाली भी पहली हिंदी फिल्म होगी।

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उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर में फिल्म की अभूतपूर्व मांग और निश्चित समय में विभिन्न भाषाओं में प्रिंट उपलब्ध कराने की मजबूरी के चलते फिल्म पंजाबी और मराठी भाषा में रिलीज नहीं हो सकेगी। फिल्म अभी से ही सुर्खियां बटोर रही है, जिससे फिल्म के निर्माता अरुण पांडे और निर्देशक नीरज पांडे बेहद खुश हैं। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत धौनी की भूमिका में हैं। इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक ‘एम एस धौनी : द अन्टोल्ड स्टोरी’ 30 सितम्बर को रिलीज होगी।

फ़रिश्ते निकले : देवी और पतिव्रता स्वरूप को खारिज करके भी महिला नायिका बन सकती है

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किताब – फ़रिश्ते निकले
लेखिका – मैत्रेयी पुष्पा
प्रकाशन – राजकमल
कीमत – 935 रुपये

स्त्री को चूंकि प्रेम और सौन्दर्य से ही जोड़कर देखा जाता है इसलिए उनसे प्रेम और सौन्दर्य के इर्द-गिर्द ही बेहतर रचने की भी अपेक्षा की जाती है. लेकिन अनुभव के विस्तार ने बहुत सारी लेखिकाओं को प्रेम से इतर विषयों पर लिखने को भी प्रेरित किया है. मैत्रेयी पुष्पा हिन्दी साहित्य की एक ऐसी ही लेखिका हैं जिनके लेखन में प्रेम तो रहा लेकिन महिलाओं का गुस्सा, सपने, संघर्ष और सवाल भी उसी तीव्रता के साथ दर्ज हुए हैं. मैत्रेयी का नया उपन्यास ‘फ़रिश्ते निकले’ ऐसी ही नायिका बेला बहू की कहानी है जो प्रेम में तबाह होकर ऐसी ऊंचाई पर पहुंचती है कि दूसरों का आसरा बन सके.
यह उपन्यास मूलतः बेला बहू नाम की नायिका के ‘फूलन देवी’ जैसी शख्सियत बनने के इर्द-गिर्द घूमता है. मैत्रेयी अनेक उदाहरणों से साबित करती हैं कि उपन्यास में आए सभी मुख्य पात्र, जो कि समाज की नजरों में हत्यारे, डकैत और अपराधी हैं, असल में फरिश्ते हैं. संभवतः इसी कारण उपन्यास का नाम ‘फरिश्ते निकले’ रखा गया होगा. मैत्रेयी की लगभग सभी कथा-कहानियों के महिला पात्र एक तरह से बागी होते हैं. उनके लेखन की कुछ खासियतों में से एक यह है कि उनके गांव-देहात की महिला पात्र शहरी महिला पात्रों से कहीं ज्यादा आधुनिक, सशक्त और प्रगतिशील होती हैं. जैसे इस उपन्यास की मुख्य पात्र बेला बहू एक स्थान पर कहती है, ‘सब पुराने बखेड़ा हैं. पंडित, पुजारी और बाबा-सन्तन के तमाम जाल फैले हैं. पूरे बारह साल भक्ति करके देख ली. समझो कि साधु-सन्त और पुजारी महराजों में बरबाद भए. पुन्न-धरम के तमाम टटरम करते-करते बिलात जमा-पूंजी बहा दी. देवी जागरण, साधु सेवा, बरत उपास और तुम्हारे जन्तर-मन्तर सब धोखाधड़ी लगे हमें तो.’
महिला के ऊपर जो नैतिकता के एकतरफा दबाव हैं, मैत्रेयी बहुत साफ-सीधे तरीके से उनकी चीर-फाड़ करती हैं – ‘बेला बहू! परिवार की पोल खुलेगी लेकिन तुम्हारा चाल-चलन तो जितना भी खुलेगा, लोगों की दिलचस्पी की चीज होगी. समाज हो, या साहित्य या कि राजनीति, इनमें आनेवाली स्त्री ‘कैची पॉइंट’ मानी जाती है. मर्दों के चरित्र को कौन देखता है.’
इतिहास में जिन महिला पात्रों या घटनाओं का बहुत महिमामंडन किया गया है और जिन्हें बहुत हेय नज़र से देखा गया है, मैत्रेयी ने दोनों ही तरह की घटनाओं और पात्रों का पुनर्पाठ किया है. वे समाज द्वारा परिभाषित किए गए महिलाओं के देवी और पतिव्रता स्वरूपों को सिरे से खारिज करती हैं – ‘ राजा दशरथ अपना प्रण भूल गए मगर कैकेयी भी भूल जाती यह जरूरी था क्या? बात तो यहीं आकर खटकती है कि वे भी अपने हक को क्यों नहीं भूलीं?… आत्मा की आवाज पर रानी ने राजा की योजना का विरोध किया. पति एवं राजा की विरोधिनी स्त्री अच्छी नारी कैसे मानी जा सकती है? न मानी जाए,… बिन्नू, हम तो जो कुछ समझे हैं, जिन्दगानी ने समझा ही दिया है. अब तो तुम समझो कि हम जिन्दगी को क्या-क्या समझा चुके हैं. दुनिया को बता चुके हैं कि खिताब-मिताब हमारे काम के नहीं. सती, देवी, पतिव्रता, आज्ञाकारिणी, अर्धांगिनी और अनुगामिनी जितने भी ‘अच्छे-अच्छे’ नाम हमने किताबों में पढ़े हैं, सब फरेबी हैं.’
मैत्रेयी के इस उपन्यास में मर्दों की नजर से महिलाओं को भोग की वस्तु समझी जानेवाली छवि कहीं-कहीं बिल्कुल मंटो से मिलती है. यहां तक कि कई जगह पत्नियों के वर्णन पढ़ते-पढ़ते मंटो के वैश्याओं के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द ‘गोश्त’ की याद आ जाती है – ‘मगर खातिरदारी अब बेला की हो रही थी. दूध छुहारे औटाकर, बादाम का हलुआ बनाकर, घी में मखाने तलकर वैद्यजी ने खुराक के रूप में देने के लिए कहा था, जिसके लिए एक औरत का इन्तजाम किया गया. खुराक नहीं खाएगी तो देह पूरी जवान कैसे होगी?… शुगर सिंह जब न तब देह की नाप-तोल करता. वह बकरा, मुर्गा और सुअर की तरह शरीर पर गोश्त चढ़ने के लिए पाली जा रही थी.’
मंटो ने जैसे वैश्याओं की भयंकर दास्तान को दर्ज किया मैत्रेयी ने देश के गांव-देहात की हर दबी-कुचली महिला की तकलीफ, दमन, दैहिक और भावनात्मक शोषण को जबान दी है – ‘बेला बहू, यह खबर हमें भी झूठी नहीं लगी क्योंकि हम ऊंटेरे हैं, जहां भी जाते हैं, ऐसी अनहोनी, घिनौनी और भयानक खबरें सुनते हैं. लगता है, पूरा मुलक लड़कियों, जनानियों और बेहोश देहों और लाशों से पटा पड़ा है जिनके आसपास चील-गिद्ध मंडरा रहे हैं.’
‘जो सदा रौंदी गई बेबस समझकर, वही मिट्टी एक दिन मीनार बनती है’ यह पंक्ति मैत्रेयी की नायिकाओं पर सटीक बैठती है. लेखिका के बाकी उपन्यासों और कहानियों की तरह इस उपन्यास की नायिका भी प्रेम में वैसे ही महकती है जैसे मिट्टी पहली बारिश में सौंधी खुशबू बिखेरती है. लेकिन प्रेम की आड़ में किए गए छल और दमन में ऐसी नायिकाएं मरती-खपती नहीं बल्कि बेला बहू जैसी बागी बनती हैं. इन्हें समाज तो नहीं अपनाता लेकिन ये समाज के लिंगभेद, जातिभेद, वर्गभेद और इंसानियत पर किसी भी तरह के जुल्म के खिलाफ अपनी ही तरह से आवाज उठाती हैं – ‘जो बच्चे हैं या पन्द्रह-सोलह साल के किशोर हैं, वे बड़े होकर दौलत कमाने, दहशत दिखाने या दलबन्दी करके राजनीति पर कब्जा जमाने वाले नहीं होंगे. वे बेला बहू के स्कूल में लाए जाएंगे, सिखाए जाएंगे कि अपने वतन के लिए अच्छे-से-अच्छे सपने क्या होते हैं, कि भाईचारा क्या होता है, कि लड़की और लड़के में समानता जरूरी है. वह तुम्हारी साथी है, शिकार नहीं. डर दहशत जैसे भयानक भावों के लिए जगह नहीं बचेगी.’
इस उपन्यास में चंबल की महिला बागियों की जीवन कथा भी है और लोहापीटाओं का ऐतिहासिक और सामाजिक वर्णन भी. उपन्यास कई मसलों पर समाज और सरकार के दोहरे रवैये की कलई भी खोलता है. कैसे समाज महाराणा प्रताप पर तो गर्व करता है लेकिन महाराणा प्रताप के वंशज लोहापीटाओं को अपराधी मानता है.
उपन्यास पढ़ते-पढ़ते कई जगह पाठकों को फिल्म ‘पानसिंह तोमर’ की सहज ही याद हो आएगी. उपन्यास कई जगह बेहद त्रासद यथार्थ से गुजरने के बाद भी आशा और उम्मीद का रास्ता नहीं छोड़ता. साथ ही पाठकों के मन में समाज को ज्यादा मानवीय दिशा की तरफ ले जाने की छटपटाहट भी पैदा करने की कोशिश करता है. यह मैत्रेयी की सशक्त लेखनी का बल है कि वे कई जगह मंटो का आधुनिक महिला संस्करण लगती हैं. कुल मिलाकर ‘फ़रिश्ते निकले’ एक पठनीय उपन्यास है.

किताब किसे पढ़नी चाहिए –

1. जो समाज में बागी बनी लड़कियों और लोहापीटाओं की जिंदगी की मुश्किलें जानना चाहते हों.
2.उन लड़कियों को खासतौर से जो प्रेम में धोखा खाई हैं या बलात्कार की शिकार हुई हैं, ताकि वे जान सकें कि इसके बाद भी जीवन में आगे बढ़ने के बहुत रास्ते हैं.

उत्तराखंड: कैबिनेट का फैसलाः संविदा पर नियुक्त होंगे उपनल कर्मचारी

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देहरादून स्थित सचिवालय में रविवार देर रात तक चली राज्य कैबिनेट की बैठक में 18 हजार से अधिक उपनल कर्मचारियों को विभागीय संविदा पर रखने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई।
प्राविधिक शिक्षा परिषद की नियमावली बनाने के साथ ही शिक्षा प्रेरकों का मानदेय तीन हजार करने के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया गया। मैराथन चली बैठक में पर्यटन, वन, समाज कल्याण, गृह, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, आबकारी समेत तमाम विभागों से जुड़े प्रस्ताव रखे गए। दोपहर तीन बजे शुरू हुई बैठक देर रात 12 बजे समाप्त हुई। बैठक में रखे गए प्रस्तावों में चुनावी वर्ष की झलक साफ दिखाई दी।
आपदा में प्रभावित वाहनों को अगले आठ साल तक रोड टैक्स में 25 फीसदी रियायत का प्रस्ताव भी कैबिनेट में पेश किया गया। इसके अलावा सरकारी खरीद का गेहूं एक रुपये प्रति किलो कम करने, मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने के संबंधी नियमावली, वनकर्मियों को दिया जाने वाला धुलाई भत्ता पुलिस के बराबर करने, इको सेंसिटिव जोन में दी गई रियायतों से संबंधी, नगर निगम व्यावसायिक नियमावली संबंधी और एससी-एसटी अवस्थापना विकास योजनाओं संबंधी प्रस्ताव कैबिनेट में रखे गए।
पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से एक अहम प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में आया, जिसके तहत पर्यटन के क्षेत्र में दस करोड़ तक के निवेश को जिला स्तर पर ही मंजूरी दी जा सकेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत के अलावा कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह पंवार, मंत्री प्रसाद नैथानी, मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह समेत तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल और पीडीएफ कोटे से कैबिनेट मंत्री बने दिनेश धनै बैठक शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही चले गए।

तीन दिन देहरादून में रहेंगे राष्ट्रपति, परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर

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राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी मंगलवार से तीन दिन तक देहरादून में रहेंगे। पुलिस प्रशासन ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर पुलिस ब्रीफिंग में अफसरों ने कहा कि बॉडी गार्ड स्थित आवास से लेकर राष्ट्रपति के हर कार्यक्रम में सुरक्षा पुख्ता रखी जाएगी। तीन दिनों तक आवास पूरी तरह से छावनी में तब्दील रहेगा। इसकी सुरक्षा के लिए तीन घेरे बनाए गए हैं। इस दौरान पुलिस और सेना की वर्दी में भी कोई संदिग्ध लगे तो पुख्ता पूछताछ कर अफसरों को तत्काल जानकारी देने का निर्देश जारी हुआ है।
रविवार को पुलिस लाइन में आयोजित ब्रीफिंग के दौरान एडीजी अनिल रतूड़ी ने जौलीग्रांट से लेकर आशियाना, राजभवन और हरिद्वार हरकी पैडी तक सुरक्षा को पुख्ता करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कहीं भी कोई चूक न हो इसके लिए अफसर पहले से व्यवस्था जांच लें। सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस और प्रशासनिक अफसर गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ तीन दिनों तक व्यवस्था संभालें।
वीवीआईपी ड्यूटी के दौरान समय से पहुंचकर ड्यूटी स्थल के आस-पास के स्थान को भली-भांति चेक कर लिया जाए। सभी पुलिसकर्मी अपने साथ आई कार्ड/ड्यूटी कार्ड अवश्य रखें। नोडल पुलिस अधिकारी अपने साथ वर्दी एवं सादे कपड़ों में लगने वाले समस्त पुलिस अधिकारी, कर्मचारियों की पहचान कर उनको ड्यूटी के संबंध में भली-भांति ब्रीफ कर लें।
इसके अतिरिक्त महामहिम के कार्यक्रम के दौरान मौसम खराब होने पर लागू होने वाले कंटिंजेंसी प्लान के संबंध में सभी को अवगत कराया गया। इस मौके पर आईजी संजय गुंज्याल, डीआईजी पुष्पक ज्योति, डीएम रविनाथ रमन, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते, मुख्तार मोहसिन, एसपी सिटी अजय सिंह आदि मौजूद रहे।

उत्तराखंड में कांग्रेस की जड़ें उखाड़ने को BJP ने बिछाई अब ये बिसाद

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भाजपा हाईकमान ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रकाश पंत और पूर्व विधायक और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुबोध उनियाल को भाजपा राष्ट्रीय परिषद में शामिल कर लिया है। केरल कोझीकोड में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया।
भाजपा राष्ट्रीय परिषद की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी चर्चा हुई। फोन पर हुई बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रकाश पंत और सुबोध उनियाल को राष्ट्रीय परिषद में शामिल कर लिया है।
इस बारे में जब प्रकाश पंत और सुबोध उनियाल से बातचीत की गई तो दोनों ने कहा कि पार्टी ने जो दायित्व सौंपा है, उसे पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि भाजपा राष्ट्रीय परिषद में पंत और उनियाल के नाम जुड़ने के बाद इसमें उत्तराखंड के सदस्यों की संख्या 25 से बढ़कर 27 हो गई है।
केरल के कोझीकोड में भाजपा राष्ट्रीय परिषद की बैठक वैसे तो गरीब समर्थक व्यापक एजेंडे और उरी आतंकी हमले के मद्देनजर पाकिस्तान से निपटने की भविष्य की रणनीति को अंतिम आकार देने के लिए हो रही है। पर इन सबके केंद्र में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव भी हैं।
यही वजह है कि आलाकमान ने पूर्व विधानसभाध्यक्ष प्रकाश पंत और पूर्व विधायक सुबोध उनियाल को राष्ट्रीय परिषद में जगह देकर कुमाऊं और गढ़वाल वाद को खत्म करने की कोशिश की है, वहीं कांग्रेस का हाथ छोड़कर कमल थामने वाले विधायकों को आश्वस्त किया है कि उनके राजनीतिक हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।
परिषद की बैठक के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों की रिपोर्टिंग हुई। इस दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब की रिपोर्टिंग संयुक्त संगठन महासचिव शिवप्रकाश ने ली। बैठक में इलाहाबाद में हुई कार्यकारिणी के दौरान संगठन के स्तर पर तय किए गए लक्ष्य की समीक्षा भी हुई।
खासतौर पर बूथ स्तर पर समितियों के गठन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी गई। इसी के बाद प्रकाश पंत और सुबोध उनियाल को राष्ट्रीय परिषद में शामिल होने की खबर आई। खबर की पुष्टि होते ही इसके राजनीतिक निहितार्थ निकाले जाने लगे।
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो पार्टी ने प्रकाश पंत को यह जिम्मेदारी देकर कुमाऊं क्षेत्र में कांग्रेस पर बढ़त लेने की कोशिश की है। वहीं सुबोध उनियाल को शामिल करके एक ओर गढ़वाल को खुश किया है तो दूसरी ओर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दस पूर्व विधायकों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनका भाजपा में शामिल होने का फैसला गलत नहीं है।
इनमें से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत को पार्टी पहले ही संगठन में अहम पद दे चुकी है। हालांकि प्रकाश पंत को जिम्मेदारी के पीछे कुछ लोग इसे पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी से जोड़कर देख रहे हैं। जो भी हो, पार्टी ने दोनों को दायित्व सौंपकर उन्हें आगामी चुनाव में उनकी अहमियत और जिम्मेदारी की याद दिला दी है।

उत्तराखंड : DD किसान चैनल में नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट डीडी किसान चैनल में नौकरी के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। किसान चैनल में नियुक्ति के नाम पर बेरोजगार युवकों को झांसा देकर उनसे रुपये मांगे जा रहे हैं। ऐसा ही एक नियुक्ति पत्र देहरादून के पंडितवाड़ी में रहने वाले गुरप्रीत सिंह के पास आया है। इसमें चैनल के लोगो के साथ प्रधानमंत्री की फोटो लगी है और 32,500 रुपये मासिक वेतन दिए जाने का जिक्र है।
हालांकि एक शर्त दी हुई है कि नियुक्ति से पहले प्रशिक्षण शुल्क एवं सिक्योरिटी राशि के रूप में 11,500 रुपये बैंक खाते में जमा करने होंगे। इसी से इसके जाली होने का संदेह हो रहा है। पंडितवाड़ी निवासी एसएस संधू को शक तब गहराया जब बेटे गुरप्रीत सिंह ने उनसे कहा कि मैंने तो किसान चैनल में आवेदन किया ही नहीं।
इस पर उन्होंने छानबीन करने के लिए दिए हुए फोन नंबर 08527013648 पर काल किया तो उधर से बताया गया कि दिल्ली दूरदर्शन से बोल रहा हूं। लेकिन पूछताछ शुरू करते ही फोन काट दिया। बकौल संधू अगले दिन दोबारा फोन किया तो फोन उठाने वाले शख्स से रुपये जमा करने के लिए खाता नंबर समेत तमाम सवाल किए गए तो पहले वह टालमटोल करने लगा, बाद में बोला पैसे जमा करने की तारीख निकल गई है। अब कुछ नहीं हो सकता।
संचार माध्यम से ठगों का यह गिरोह रिक्रूटमेंट करने वाले वेबसाइट से बेरोजगार युवाओं की डिटेल चुराता है। बाद में उनसे संपर्क करके ऑनलाइन आवेदन मांगा जाता है। आवेदन के बाद परीक्षा या साक्षात्कार के बजाय सीधे नियुक्ति पत्र युवकों के घर के पते पर भेज दिया जाता है।
नियुक्ति पत्र पर दर्ज फोन नंबर पर संपर्क करने की बात लिखी होती है और फोन करते ही नौकरी के लिए प्रशिक्षण एवं जमानत राशि के रूप में 11,500 रुपये मांगे जाते हैं। कई लोग झांसे में आकर पैसा जमा भी करवा चुके हैं।
इस तरह के फर्जीवाड़े पर आकाशवाणी न्यूज के एक दशक तक उत्तराखंड हेड रहे प्रकाश थपलियाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास भी एक युवक जानकारी के लिए आया था। उन्होंने देखा तो नियुक्ति पत्र में 10 गलतियां थीं, यहां तक कि प्रसार भारती की स्पेलिंग भी गलत लिखी थी। इस पर युवक से कहा कि ऐसे झांसे में ना आए और सीधे पुलिस के पास जाएं। वहीं दूरदर्शन देहरादून के रिटायर्ड असिस्टेंट डायरेक्टर पीएस रावत ने कहा कि उनके कार्यकाल में भी कई मामले ऐसे आए और उन्होंने भी युवकों को पुलिस में जाने की सलाह दी। दूरदर्शन के सीनियर कैमरामैन ओमप्रकाश जमलोकी का कहना है कि युवक फेक कॉल और फर्जी वेबसाइट के झांसे में न आएं।

बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर

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नई दिल्ली : राजद के विवादास्पद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को मिली जमानत के खिलाफ एक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिस मामले में शहाबुद्दीन को जमानत मिली है उसमें उसे पहले ही उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है।
जमानत रद्द करने की मांग करने वाली याचिका दायर करने वाली महिला के तीन युवा बेटों को शहाबुद्दीन के एक वफादार ने बर्बरता से मौत के घाट उतार दिया था। महिला के दो बेटों की हत्या के चश्मदीद तीसरे बेटे को बाद में कथित तौर पर शहाबुद्दीन की शह पर मारा गया था। महिला ने पटना उच्च अदालत के इस साल दो मार्च को आए फैसले को चुनौती दी है जिसमें अदालत ने शहाबुद्दीन को अपील लंबित रहने के दौरान स्थायी जमानत दी थी।
सिवान की सत्र अदालत ने दोहरे हत्याकांड में शहाबुद्दीन को फिरौती के लिए अपहरण और हत्या का दोषी पाया था और उसे उम्रकैद की सजा दी थी जबकि चश्मदीद युवक की मौत के मामले में मुकदमा चल रहा है। कलावती देवी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उच्च अदालत ने इस तथ्य पर ‘जरा भी गौर नहीं किया’ है कि शहाबुद्दीन एक खतरनाक अपराधी है जिसे कानून की जरा भी परवाह नहीं है। इसमें आगे कहा गया है कि हत्या, अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के दोषी को जमानत भी दे दी गई जबकि उसके खिलाफ कई और मामलों में मुकदमे अभी चल ही रहे हैं, यह तो न्याय का उपहास करने के समान है। कलावती के पति चंद्रकेश्वर प्रसाद की ओर से दायर एक अलग याचिका में 19 सितंबर को शीर्ष अदालत ने शहाबुद्दीन से जवाब मांगा था। इस याचिका में प्रसाद ने अपने तीसरे बेटे की हत्या के मामले में पटना उच्च अदालत की ओर से शहाबुद्दीन को दी गई जमानत को चुनौती दी थी।
इसके अलावा शीर्ष अदालत मारे गए पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी की ओर से दायर मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका की सुनवाई भी कर रही है। पत्रकार को भी कथित तौर पर शहाबुद्दीन के इशारे पर ही मारा गया था।
कलावती देवी ने बिहार सरकार द्वारा शीर्ष अदालत में दिए गए हलफनामे के हवाले से अपनी याचिका में कहा है कि नवंबर 2014 तक शहाबुद्दीन के खिलाफ कम से कम 38 मामलो में मुकदमे लंबित थे। ये मामले हत्या, हत्या की कोशिश, खतरनाक हथियार से दंगा करना, वसूली करने समेत कई गंभीर अपराधों से संबंधित हैं। उनकी याचिका पर संभवत: सोमवार को सुनवाई होगी।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण के जरिए दायर की गई इस याचिका में देवी ने कहा है कि उनके दो बेटे गिरीश और सतीश को शहाबुद्दीन के वफादारों ने अगवा कर लिया था। पहले तो उनकी बुरी तरह पिटाई की गई और बाद में एसिड डालकर उनकी हत्या कर दी गई। दोनों के शवों को नमक से भरे बोरे में बंद करके दफना दिया गया। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि देवी के तीसरे बेटे राजीव रोशन को भी अगवा किया गया लेकिन वह उनके चंगुल से भाग निकलने में कामयाब रहा। वह अपने दोनों भाईयों की हत्या का चश्मदीद गवाह था। देवी ने दावा किया कि दोहरे हत्याकांड मामले के लंबित रहने के दौरान जून 2014 को रोशन की भी कथित तौर पर शहाबुद्दीन के कहने पर हत्या कर दी गई।
पटना उच्च अदालत ने एक अन्य मामले में सात सितंबर को शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी जिसके बाद 10 सितंबर को उसे भागलपुर जेल से रिहा कर दिया गया। दर्जनभर मामलों के कारण वह पिछले 11 साल से जेल में था।

इस्राइल ने सुझाया एक उपाय जिससे कावेरी विवाद सुलझ सकता है

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बेंगलुरू: पिछले कई सालों से कर्नाटक और तमिलनाडु, कावेरी के पानी को लेकर आमने सामने है. दशकों से चला आ रहा यह विवाद तब और गंभीर हो गया जब इस साल मॉनसून में भारी कमी देखी गई. लेकिन इसके साथ ही जानकारों ने यह चिंता भी जताई है कि बारिश में लगातार कमी के बावजूद इन राज्यों में उन फसलों को उगाया जा रहा है जिसमें पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है.
गौरतलब है कि कर्नाटक में गन्ना उगाया जाता है, वहीं तमिलनाडु में धान के खेत हैं. दोनों में ही पानी जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होता है. पिछले चालीस सालों में जौ उगाना किसानों ने लगभग बंद कर दिया है. राज्य सरकार ने अपनी ओर से किसानों को नकदी फसल उगाने के प्रति जागरुक करने की कोई कोशिश नहीं की है.
हालांकि हाल ही में बेंगलुरू में हुए एक कार्यक्रम में इस्राइल ने इस संकट से निपटने का एक तरीका सुझाया है. “Open a door to Israel” नाम के इस सम्मेलन में इस्राइल के वाणिज्यदूतावास ने दिखाया कि किस तरह ‘माइक्रो ड्रिप इरिगेशन’ के माध्यम से इस देश ने सिंचाई में पानी की खपत को 50 प्रतिशत तक कम किया है. इज़राइलियों का दावा है कि इस तकनीक को उपजाऊ बनाने के तरीके से जोड़कर गन्ने की उपज 133 प्रतिशत बढ़ सकती है.
बता दें कि इस्राइल को उसकी बंजर ज़मीन के लिए जाना जाता था लेकिन उसने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया. अब इस देश का दावा है कि उनके पास जरूरत से ज्यादा पानी है. ड्रिप सिंचाई, खराब पानी की रिसाइक्लिंग और समुद्र के पानी से नमक हटाने की तकनीक से यह मुमकिन हो सका है. वैसे इन सभी तकनीकों को पैराग्वे और अमेरिका के कैलिफोर्निया जैसे सूखाग्रस्त इलाकों में भी अपनाया गया है.
इस्राइल की सरकार का कहना है कि उन्होंने जल संरक्षण योजना में भारत सरकार को मदद देने का प्रस्ताव दे दिया है. इस्राइल के वाणिज्यदूतावास की डिप्टी प्रमुख शाल्वी ने एनडीटीवी से कहा कि वह स्थापित श्रेष्ठ केंद्रों के ज़रिए इस क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं.
उन्होंने कहा अगर आप अपने खेत को लबालब कर देंगे तो इससे काफी पानी बर्बाद होगा. लेकिन अगर खेत में सिर्फ उतना ही पानी रिसाया जाए जितनी उस फसल को जरूरत है तो बात बन सकती है. यह प्रक्रिया काफी गुणकारी है और दुनिया भर में सफल भी है.
इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को आदेश दिया था कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े. तमिलनाडु में बारिश की कमी की वजह से पानी की भारी मार है और कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में काफी हिंसक प्रदर्शन हुए. ऐसा अनुमान है कि कर्नाटक में सिंचाई के लिए कावेरी के पानी का 65 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने के आदेश के बाद कर्नाटक में कई जगहों पर विरोध ने हिंसक रूप ले लिया जहां लोगों ने ‘हम अपना खून देंगे, कावेरी का पानी नहीं’ जैसे नारे लगाए.