राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान की दूसरी सालगिरह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को स्वभाव बनाने पर जोर दिया. इसके लिए कई तरह के किस्से सुनाए. विज्ञानभवन में मौजूद लोगों को हंसाया लेकिन गंभीर संदेश भी दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि गंदगी से सबको नफरत है लेकिन स्वच्छता को स्वभाव हम नहीं बना पाए, जरूरत इसी की है तभी ये अभियान सफल होगा.
उन्होंने उम्मीद जताई कि जब से बच्चों और महिलाओं ने साफ-सफाई के इस अभियान की कमान संभाली है तब से उनको ये भरोसा हो गया है कि उनकी कोशिश रंग लाएगी. देश साफ जरूर होगा और लोगों के स्वभाव में सफाई जरूर आयेगी.
स्वच्छता और पेयजल मंत्रालय के साथ शहरी विकास मंत्रालय के साझा कार्यक्रम इंडोसैन यानी इंडिया सैनिटेशन का उद्घाटन करते हुए अपने लगभग 40 मिनट लंबे भाषण में मोदी ने कई व्यावहारिक बातों की ओर सबका ध्यान खींचा. मोदी ने कहा कि अपने 20 साल पुराने स्कूटर को रोज लोग रगड़-रगड़ कर साफ करते हैं भले ही उसका पुर्जा पुर्जा नया लग गया हो सब कुछ घिस गया हो. लेकिन जब बस में बैठते हैं और टाइम पास नहीं होता तो बस की सीट में उंगली घुसा-घुसा कर छेद कर देते हैं. दो घंटे के सफर में तीन इंच का फोम तो जरूर निकाल देंगे, क्योंकि मन में ये रहता है कि स्कूटर अपना और बस सरकार की. ये भावना बदलने की जरूरत है.
रिसाइकिलिंग और रियूज हमें पश्चिमी देशों से सीखने की जरूरत नहीं है, ये तो हमारे स्वभाव में हैं. हमारी माएं दादियां सदियों से बड़े बच्चों के कपड़े छोटे बच्चों को पहनाती आ रही हैं, फिर उनके दूसरे भी कई इस्तेमाल हैं, सिर्फ कपड़े ही नहीं बल्कि और चीजों में भी ऐसा है तो हम इस स्वभाव को साफ सफाई में भी अपना सकते हैं.
वेंकैया नायडू ने कहा कि पिछले दो साल से मोदी देश की स्वच्छता का प्रतीक हैं. ये पीएम मोदी नहीं बल्कि मूड ऑफ डेवलपिंग इंडिया का सोच है. मोदी ने इस कार्यक्रम के दौरान एनसीसी कैडेट्स के सफाई अभियान, पुणे के कचरा उठाने और ठिकाने लगाने वालों के सहकारी संगठन का साथ मंडी जिले और मैसूर शहर को खुले में शौच से मुक्त और सबसे स्वच्छ जिले का पुरस्कार भी दिया.
इसके अलावा देहरादून के केंद्रीय विद्यालय, सिंधुदुर्ग जिला को भी पुरस्कार दिया। गुजरात में पाटन की हजार साल पुरानी रानी की वाव को सबसे स्वच्छ पर्यटन और सांस्कृतिक स्थल, सूरत रेलवे स्टेशन, चंडीगढ़ शहर, सिक्किम की राजधानी गैंगटोक को स्वच्छ पर्यटन शहर का पुरस्कार भी दिया, पीजीआई चंडीगढ़ सबसे स्वच्छ अस्पताल का अवॉर्ड ले गया.
स्वच्छता अभियान को लेकर पीएम मोदी ने दिया संदेश
उरी हमले में चूक पर बड़ी कार्रवाई, ब्रिगेड कमांडर को जांच पूरी होने तक हटाया गया
नई दिल्लीः उरी हमले में सुरक्षा में चूक पर बड़ी कार्रवाई की गई है. उरी में सेना के 20 जवानों की शहादत के पीछे बड़ी चूक के जिम्मेदार माने जा रहे सेना अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की गई है. इसी के तहत उरी ब्रिगेड के कमांडर अपने पद से हटा दिए गए हैं. रक्षा सूत्रों ने बताया कि ब्रिगेडियर के. सोमशेखर को संवेदनशील ब्रिगेड से हटा दिया गया है. उन्होंने बताया कि सेना की 28 माउंटेन डिवीजन के एक अधिकारी उरी ब्रिगेड के कमांडर के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं.
बताया जा रहा है कि जब तक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी पूरी नहीं होती तब तक वो पद पर नहीं रहेंगे. उरी पर हमले को सुरक्षा इंतजाम के पर्याप्त ना होने को भी वजह माना जा रहा है और इसकी वजह से ही उरी ब्रिगेड के कमांडर को अपने पद से हटाया गया है. इस घटनाक्रम पर टिप्पणी मांगने पर सेना के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया.
एबीपी न्यूज के मुताबिक उरी में जहां पर कैंप लगाया गया वहां पर सुरक्षा में चूक हुई जिसकी वजह से आंतकी इतना बड़ा हमला करने और 20 सैनिकों को मौट के घाट उतारने में सफल हो गए. उरी में जहां कैंप था वहां सैनिकों की पेट्रोलिंग ठीक से नहीं की जा रही थी जिसकी वजह से आतंकी कैंप में आग लगाने में कामयाब हुए. हमले में अब तक 20 जवान शहीद हो चुके हैं. सेना की जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटाया गया है.
आज सेना प्रमुख दलबीर सिंह ने नियंत्रण रेखा पर सैन्य तैयारी की समीक्षा के लिए जम्मू कश्मीर में उत्तरी कमान का दौरा किया है और उनके आने से पहले उरी के ब्रिगेड कमांडर को हटाया गया है. उनकी जगह पर नए ब्रिगेडियर इंचार्ज ने पद संभाल लिया है.. उन्हें जांच पूरी तक ऊधमपूर हैडक्वार्टर भेज दिया गया है और जांच होने तक उन्हें कोई अतिरिक्त पदभार नहीं दिया जाएगा और वो ऊधमपुर ऑफिस में रहेंगे. यानी जांच पूरी होने तक उन्हें सेना के कामकाज से अलग कर दिया गया है. सिक्योरिटी एजेंसियों के मुताबिक पठानकोट हमले के बाद से सेना को सुरक्षा के मोर्चे पर ठीक से ध्यान देने के लिए कहा गया था लेकिन इसके बावजूद उरी जैसा हमला सुरक्षा में खामियां दिखाता है और इसी का जिम्मेदार ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी को माना गया है.
चीन ने खड़ी की भारत के लिए मुश्किलें, ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी को रोका
नई दिल्ली। चीन ने एक बार फिर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी करनी शुरू कर दी हैं। चीन ने अपनी सबसे बड़ी परियोजना हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी को बंद कर दिया है। चीन के इस कदम से भारत के असम, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में पानी की आपूर्ति में कमी आ सकती है।
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने यह जानकारी दी। ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे चीन के इस हाइड्रो प्रोजेक्ट पर करीब 7 हजार 400 करोड़ डॉलर की लागत आ रही है। इसी के चलते चीन ने इस नदी को रोक दिया है।
बता दें कि उरी हमले के बाद भारत सिंधु जल समझौता को रद्द करने पर विचार कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ चीन ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों को रोककर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। हालांकि चीन ने भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव को लेकर किसी का पक्ष नहीं लिया है और बातचीत से मामले का हल निकालने की अपील की है।
ब्रह्मपुत्र नदी का पानी असम, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में पहुंचता है। एक सहायक नदी को बंद किए जाने से इन राज्यों में पानी की आपूर्ति में कमी आ सकती है। बता दें कि पाकिस्तान धमकी दे चुका है कि अगर भारत ने सिंधु नदी का पानी रोका तो वह चीन के जरिए ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रुकवा देगा।
हाफिज सईद की धमकी, भारत को बताएंगे क्या होता है सर्जिकल स्ट्राइक
मुंबई हमले के मास्टर माइंड और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भारत को धमकी दी है। उसने कहा, ‘नरेंद्र मोदी को हम बताएंगे कि सर्जिकल स्ट्राइक क्या होता है। मैं इंडियन मीडिया को बताना चाहता हूं कि आप जल्द देखोगे कि पाकिस्तानी जवान कैसे सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देते हैं। अमेरिका भी आपकी मदद नहीं कर पाएगा।’
दुर्दांत आतंकवादी का यह बयान लाइन ऑफ कंट्रोल के उस पार आतंकवादी लॉन्च पैड पर भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन बाद आया है। सईद ने कहा, ‘मुंहतोड़ जवाब देने की बारी अब पाकिस्तान की है। नरेंद्र मोदी को अब सर्जिकल स्ट्राइक का सही मतलब पता चल जाएगा।’
इस बीच पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक का असर दिखने लगा है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स से पता चला है कि मुजफ्फराबाद के पास पाक सेना ने करीब दर्जन भर आतंकवादी कैंपों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट करने में मदद की है।
गुरुवार को भारतीय सेना ने पीओके में आतंकवादियों के सात लॉन्चिंग पैड्स को तबाह कर दिया था। पीओके में आतंकवादी कैंपों को अपनी सीमा में शिफ्ट करने के पीछे पाकिस्तान सेना की मंशा यह है कि आतंकवादियों और उनके सामान को कोई नुकसान न हो, लेकिन हाफिज सईद गीदड़ भभकी देने से बाज नहीं आ रहा।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद खौफ में आतंकी, 24 ट्रेनिंग कैंपों को ISI ने खाली कराया
इंडियन आर्मी द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पीओके में आतंकी खौफ में हैं. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आतंकी ट्रेनिंग कैंपों से आतंकी भागने लगे हैं. पीओके में 24 आतंकी कैंपों को खाली करा लिया गया है. बुघवार-गुरुवार की रात भारतीय सेना के कमांडोज ने पीओके में घुसकर सर्जिकल ऑपरेशन किया था और 50 से अधिक आतंकियों को मार गिराया था. उनके बचाव में आए पाकिस्तानी सेना को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा था.
अब इस कार्रवाई का असर दिखने लगा है. खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक से पहले पीओके में ट्रेनिंग कैंपों में 500 से ज्यादा आतंकी थे. अब सिर्फ 200 के करीब हैं. ये आतंकी लॉन्चिंग पैड के तबाह किए जाने का असर है. आतंकवादी भारतीय सेना के खौफ में हैं. ISI ने पहले ही 16 से 17 आतंकी ट्रेनिंग कैंपों को सैनिक ठिकानों में शिफ्ट शिफ्ट कर दिया था. लेकिन बाकी बचे 24 ट्रेनिंग कैंप को आतंकियों ने खाली कर लिया है.
खाली किये गए आतंकी कैंपों में मुज़फ़्फ़राबाद के नज़दीक का लश्कर का मानशेरा का वो कैंप भी है जिसमें 26/11 के आतंकियों को ट्रेनिंग मिली थी. ख़ुफ़िया एजेंसियों की जानकारी के मुताबिक आतंकियों में यह खौफ है कि अगला सर्जिकल स्ट्राइक कहीं उनके कैंप पर ना हो जाए और वह बेवजह मारे जाएं इसलिए ट्रेनिंग कैंप को खाली कर दिया है.
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पीओके में ट्रेनिंग कैंपों को खाली कर आतंकी या तो अपने घरों में लौट गए हैं या फिर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उन्हें पीओके में ही सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा दिया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक जैश, लश्कर और हिजबुल के 200 से ज्यादा आतंकी ट्रेनिंग के बाद घुसपैठ के लिए तैयार बैठे थे.
दरअसल जिस तरीके से सर्जिकल हमले में सात लॉन्चिंग पैड तबाह हुए हैं. आतंकियों में और उन्हें पनाह देने वाले पाकिस्तानी सुरक्षाबलों में खौफ का माहौल है. ऐसे में जिन आतंकियों को सैन्य ठिकानों में शिफ्ट किया गया है उन्हें भी पाकिस्तान की सेना रोक रही है.
'PAK-चीन बॉर्डर पर भारत तैनात करेगा न्यूक्लियर क्षमता वाला राफेल फाइटर'
चीन ने आशंका जताई है कि भारत न्यूक्लिअर हथियार की क्षमता वाले 36 राफेल फाइटर जेट्स को चीन और पाकिस्तान के बॉर्डर पर तैनात करेगा. इन राफेल जेट्स को भारत फ्रांस से खरीदने वाला है. चीन की स्टेट मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि इसके जरिए भारत विरोधियों पर दबाव बढ़ाएगा.
ग्लोबल टाइम्स ने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के हवाले से यह भी लिखा है कि भारत दुनिया में हथियार खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है. अखबार का कहना है कि मध्य पूर्व में अस्थिर सुरक्षा माहौल और चीन की क्षमता बढ़ने की वजह से एशिया में हथियारों की खरीद बढ़ रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल फाइटर प्लेन न्यूक्लिअर हथियार ले जा सकते हैं. इससे भारत की न्युक्लिअर हथियार के इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी. साउथ एशिया स्टडीज के डायरेक्टर झाओ गंचेंग के हवाले से बताया गया है कि फ्रांस ने भारत को राफेल टेक्नोलॉजी देने से मना कर दिया है. इससे ऐसा लगता है कि फ्रांस भारत के मिलिट्री इंडस्ट्रियल सिस्टम को बेहतर करने में मदद नहीं करना चाहता.
ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि फ्रांस के साथ राफेल खरीद की डील होने से पहले भारत अमेरिका निर्मित F-16 जेट खरीदने की सोच रहा था. रक्षा क्षेत्र में भारत की जरूरतों को देखते हुए रूस, इजरायल और अमेरिका का मार्केट भी अपने हथियार भारत को बेचने की कोशिश कर रहा है.
PAK को झटका, मालदीव भी सार्क बैठक से हटा, कहा- क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म बड़ा खतरा
आतंकवाद के मामले पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की रणनीति कामयाब होती दिख रही है. अब मालदीव ने भी इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन से खुद को दूर कर लिया है. भारत ने आतंकी संगठनों के मददगार पाकिस्तान में सार्क बैठक के बहिष्कार का ऐलान किया था. इसके बाद बांग्लादेश, भूटान, अफगानिस्तान, श्रीलंका ने भी सार्क बैठक से दूरी बना ली थी. अब मालदीव ने भी साफ कर दिया है कि वो इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा.
मालदीव सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सार्क के कई सदस्य देशों ने इस्लामाबाद में नवंबर में होने वाले सम्मेलन से अपना नाम वापस ले लिया है वह भी उनके साथ है. इन देशों ने पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को मिल रही मदद और उससे उत्पन्न खतरे और क्षेत्रीय अशांति को इसका कारण बताया है. मालदीव ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की है और कहा कि सीमापार आतंकवाद क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति के लिए खतरा है.
अब भारत समेत 6 देशों की ओर से सार्क सम्मेलन का बहिष्कार किए जाने के बाद पाकिस्तान आखिरकार घुटनों के बल आ गया है. पाकिस्तान ने शुक्रवार को ऐलान किया कि सम्मेलन फिलहाल स्थगित किया जा रहा है और नई तारीखों का ऐलान जल्द किया जाएगा.
श्रीलंका ने शुक्रवार को ही सार्क समिट में शामिल नहीं होने का फैसला किया था. इससे पहले भारत, बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान भी इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन में जाने से मना कर चुके हैं. उरी अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सार्क की बैठक में शामिल होने से मना कर दिया था.
दरअसल भारत के सार्क में शामिल होने से इनकार करने के बाद ही कई देशों ने भारत का समर्थन करते हुए इस्लामाबाद के सम्मेलन में शिरकत करने से मना किया. लेकिन श्रीलंका का सार्क में न जाने का फैसला ठीक उस वक्त आया है जब श्रीलंका के पीएम रनिल विक्रमेसिंघे भारत का दौरा करने वाले हैं. 4 से 6 अक्टूबर को श्रीलंका के पीएम भारत में होंगे.
आठ सदस्यीय सार्क का मौजूदा अध्यक्ष नेपाल है और इस लिहाज से नेपाली मीडिया की इस खबर की अहमियत भी है. भारत ने अपने फैसले से नेपाल को अवगत करा दिया है कि पीएम नरेंद्र मोदी नवंबर में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने इस्लामाबाद नहीं जाएंगे. नियमों के मुताबिक सम्मेलन में सभी सदस्य देशों की मौजूदगी जरूरी है. अगर एक भी सदस्य सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेता है तो इसे स्थगित करना पड़ता है या रद्द करना पड़ता है. साल 1985 में बने इस गुट में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल हैं.
1985 के बाद ये पहला मौका होगा जब भारत ने सार्क सम्मेलन का बायकॉट करने का फैसला लिया है. भारत के अलावा सार्क के अन्य तीन सदस्य देशों ने भी पाकिस्तान पर आंतक को पनाह देने का आरोप लगाते हुए सम्मेलन का बहिष्कार करने का ऐलान किया है. वहीं, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भारत के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है.
UN सैन्य समूह को LoC पर सीधे तौर पर कोई गोलीबारी नहीं दिखी, भारत ने कहा ऐसे कैसे नहीं दिखी
संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी विवाद सुलझाने में उनकी मदद करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने परमाणु हथियार सम्पन्न दोनों पड़ोसी देशों से क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया. बान के प्रवक्ता ने एक बयान जारी किया‘महासचिव हालिया घटनाओं, विशेष तौर पर 18 सितंबर को उरी में भारतीय सैन्य अड्डे पर हमले के बाद संघर्ष विराम के उल्लंघन की खबरों के मद्देनजर दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव को लेकर बहुत चिंतित हैं.’ बयान में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने दोनों देशों से ‘अधिकतम संयम बरतने’ और ‘तनाव कम करने के लिए तुरंत कदम उठाने’ का आग्रह किया है.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा था कि इन दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे उसके मिशन को नियंत्रण रेखा पर सीधे तौर पर कोई फायरिंग नजर नहीं आई.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टेफेन दुजार्रिक ने संवाददाताओं से कहा, ‘भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य निगरानी दल (UNMOGIP) को नई घटनाओं के संबंध में नियंत्रण रेखा के पार से सीधे तौर पर कोई फायरिंग नजर नहीं आई.’ उनसे जब इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा गया कि भारत ने कहा है कि उसने नियंत्रण रेखा के पार लक्षित हमला किया तो UNMOGIP को कैसे कोई फायरिंग नजर नहीं आई, तब उन्होंने दोहराया कि UNMOGIP को सीधे तौर पर कोई फायरिंग नजर नहीं आई.
बान ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से कश्मीर समेत आपसी मसलों को ‘कूटनीति एवं वार्ता के जरिये शांतिपूर्ण’ तरीके से सुलझाने की अपील की है. उन्होंने दोनों देशों से कहा कि यदि दोनों पक्ष स्वीकार करते हैं तो वह मध्यस्थता के लिए उपलब्ध हैं. बता दें कि भारत ने 28 और 29 सितंबर की दरम्यानी रात एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइकल किये जाने का दावा किया है. भारतीय सेना ने कश्मीर के उरी स्थित सैन्य अड्डे पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हमले के बाद यह कार्रवाई की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि हमलावर सजा से बच नहीं पाएंगे और जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र भारत और पाकिस्तान के बीच विवादास्पद क्षेत्र में लंबे समय से अपनी संस्थागत उपस्थिति बनाये हुये है. गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1971 के प्रस्ताव 307 के जनादेश के अनुसार भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र का सैन्य पर्यवेक्षक समूह दोनों देशों के बीच कामकाजी रेखा और नियंत्रण रेखा पर और उसके पार संघषर्विराम उल्लंघनों पर नजर रखता है और इसकी सूचना देता है.
भारत को परमाणु हमले की धमकी पर पाक से नाखुश अमेरिका
वॉशिंगटन। अमेरिका ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा दी गई परमाणु हमले की धमकियों पर कड़ी आपत्ति जताई है और इस संबंध में पाकिस्तान को अपनी नाखुशी के बारे में सूचित किया है। विदेश मंत्रालय ने एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हमने इसके बारे में (परमाणु हमले की धमकी पर अमेरिका की आपत्ति) उन्हें (पाकिस्तान को) स्पष्ट कर दिया गया है। हमने बार-बार ऐसा किया है। अधिकारी ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर यह जानकारी दी, हालांकि उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि पाकिस्तान को यह संदेश किस स्तर पर भेजा गया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पिछले 15 दिनों में दो बार यह कहा है कि उनका देश भारत के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। अधिकारी से जब आसिफ के इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा है कि यह बहुत चिंताजनक है। यह गंभीर बात है।
आसिफ ने अपने ताजा साक्षात्कार में एक पाकिस्तानी समाचार चैनल से कहा था कि यदि भारत हमसे युद्ध करने की कोशिश करता है तो हम उसे नष्ट कर देंगे। पाकिस्तान की सेना भारत के किसी भी दुस्साहस का उत्तर देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था कि हमने परमाणु हथियार दिखाने के लिए नहीं रखे हैं। यदि ऐसी स्थिति पैदा होती है तो हम इसका (परमाणु हथियारों) इस्तेमाल करेंगे और भारत को नष्ट कर देंगे। इस बयान से ओबामा प्रशासन की भौंहे तन गई हैं और इसे शीर्ष पाकिस्तानी नेतृत्व का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार माना जा रहा है।
अधिकारी ने कहा कि अमेरिका सामूहिक विनाश करने वाले इन हथियारों की सुरक्षा पर करीबी नजर रख रही है। उन्होंने कहा है कि इन हथियारों की सुरक्षा हमेशा हमारी चिंता का विषय रहा है। उन्होंने इस विशेष मामले में जो कहा है, उसके अलावा भी हम इन हथियारों की सुरक्षा पर हमेशा नजर रखते हैं।
इस बीच रक्षा मंत्रालय के उप प्रवक्ता मार्क टोनर ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परमाणु सक्षम देशों की कि यह बहुत स्पष्ट जिम्मेदारी है कि वह परमाणु हथियारों एवं मिसाइल क्षमताओं को लेकर संयम बरतें। इस बीच अमेरिका ने भारत एवं पाकिस्तान से अपील की कि वह उरी आतंकवादी हमले के बाद बढ़े तनाव को कम करने के लिए कदम उठाएं।
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इसके साथ ही हमने यह बिल्कुल स्पष्ट किया है कि भारतीय सैन्य अड्डे (उरी) पर जो हुआ वह आतंकवादी कृत्य था। विभाग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि सभी जानते हैं कि उरी हमले को अंजाम देने वाले कहां से आए थे।
टोनर ने अपने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका स्थिति पर बहुत निकटता से नजर रखे हुए था। उन्होंने कहा है कि हमारे दृष्टिकोण से हम दोनों पक्षों से शांति-संयम की अपील करते हैं। हम समझते हैं कि पाकिस्तानी- भारतीय सेनाएं के बीच संवाद जारी है और हमारा मानना है कि उनके बीच जारी संवाद तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
टोनर ने कहा है कि मेरा मानना है कि हम निश्चित रूप से तनाव बढ़ते हुए और संवाद में किसी प्रकार की रुकावट नहीं देखना चाहते। हमने क्षेत्र में सीमा पार से पैदा हो रहे आतंकवाद के खतरे को लेकर बार-बार और लगातार चिंता व्यक्त की है और निश्चित रूप से इन हालिया हमलों में उरी का हमला भी शामिल है। उन्होंने कहा- हम लश्कर-ए-तैयबा, हक्कानी नेटवर्क और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी समूहों से निपटने और उन्हें अवैध घोषित करने की अपील लगातार करते रहे हैं।
फरहान के साथ काम करना मुश्किल नहीं होगा: कृति सैनन
मुंबई: अभिनेत्री कृति सैनन फरहान अख्तर के साथ अपनी आने वाली फिल्म ‘लखनउ सेंट्रल’ में काम करने को लेकर उत्साहित है। उन्होंने कहा कि अभिनेता फिल्मकार के साथ मिलकर काम करना सहज होगा।
निखिल आडवाणी ‘लखनउ सेंट्रल’ के निर्माता हैं और इस फिल्म के जरिए उनके सहायक रंजीत तिवारी निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं। पहली बार कृति फरहान के साथ स्क्रीन पर नजर आएंगी।
कृति ने कहा, ‘मैं उनसे (फरहान) औचारिक मौकों पर मिली हूं क्योंकि वह ‘रॉक ऑन 2’ में मसरूफ हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वह एक अच्छे व्यक्ति लगते हैं। मुझे नहीं लगता है कि उनके साथ काम करना मुश्किल होगा। जब आप अलग अलग अभिनेताओं के साथ काम करते हैं तो आप अलग अलग प्रतिक्रिया देते हैं। मैं इसे लेकर (फरहान के साथ काम करने को लेकर) उत्साहित हूं।’







