Home Blog Page 1152

सोनिया वाराणसी में आज रोड शो का नेतृत्व करेंगी, विश्वनाथ मंदिर भी जाएंगी

0

वाराणसी : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मंगलवार को यहां पार्टी द्वारा आयोजित एक रोड शो का नेतृत्व करने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करेंगी।
अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रदेश कांग्रेस प्रमुख राज बब्बर और गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद, श्रीप्रकाश जायसवाल, प्रमोद तिवारी, रीता बहुगुणा जोशी, जफर अली, संजय सिंह, राणा गोस्वामी, राजेश मिश्रा, अजय राय, राजेशपति त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ नेता इसमें भाग लेंगे।
भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा को पार्टी नेताओं द्वारा माला पहनाए जाने के बाद दोपहर 12 बजे कचहरी से रोड शो शुरू होगा और तीन घंटों में यह आठ किलोमीटर की दूरी तय करेगा।
यह इंग्लिशिया लाइन में खत्म होगा जहां सोनिया के एक संक्षिप्त भाषण देने और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री कमलपति त्रिपाठी की प्रतिमा को माला पहनाए जाने की उम्मीद है।
शीला ने कहा कि यह रोड शो पार्टी के ‘27 साल, यूपी बेहाल’ अभियान का हिस्सा है। बुलंदशहर में कुछ दिन पहले हुई सामूहिक बलात्कार की घटना को लेकर उन्होंने राज्य में सत्तारूढ़ सपा पर हमला बोला।’
उन्होंने कहा कि सपा के तहत राज्य में कानून व्यवस्था बदतर हो गई है और बुलंदशहर की घटना काफी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य को सपा, बसपा और भाजपा के 27 साल के कुशासन से निजात दिलाना और इसे विकास की पटरी पर लाना चाहती है।
खुद के यूपी वाला होने का दावा करने वाली शीला ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह जनहित में काम करना चाहती हैं। ‘मैं 60 साल की आयु में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी। तब भी लोग मेरी उम्र के बारे में बातें करते थे लेकिन मैंने करीब 15 साल सेवा की।’ उन्होंने कहा, ‘मैं अपने राज्य उत्तर प्रदेश की सेवा का मौका पाकर खुद को भाग्यशाली समझूंगी।

आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद सीएम की रेस में नितिन पटेल और विजय रुपानी सबसे आगे

0

नई दिल्ली: गुजरात सरकार के उत्तराधिकारी का नाम तय करने के लिए बीजेपी संसदीय बोर्ड की आज बैठक होने जा रही है. इस बैठक में गुजरात के नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो सकता है. यह बैठक गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे देने के फैसले के बाद हो रही है.
माना जा रहा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री की रेस में नितिन पटेल सबसे आगे हैं. वहीं गुजरात के बीजेपी अध्यक्ष विजय रुपानी का नाम भी रेस में है, क्योंकि विजय रुपानी की संगठन में पकड़ अच्छी है हालांकि नए मुख्यमंत्री के नाम का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.कल आनंदीबेन पटेल ने इस्तीफा देने का ऐलान किया था.
गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आनंदीबेन का इस्तीफा मिलने की पुष्टि की है.वहीं आनंदीबेन ने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि नवंबर में वह 75 साल की हो जाएंगी, ऐसे में दो महीने पहले ही उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए. आनंदीबेन के इस्तीफे के फ़ैसले से साफ़ है कि गुजरात की सड़कों पर उमड़े दलितों के गुस्से और पटेल आंदोलन से निपटने में नाकामी का वह शिकार हुई हैं. भारत की राजनीति में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा सोशल मीडिया पर स्टेट्स डाला है.
आनंदीबेन ने तो इस्तीफ़ा दे दिया है, लेकिन अब सवाल यह है कि वह जाएंगी तो उनकी जगह कौन लेगा.सूत्रों की माने तो दो नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं. एक हैं विजय रुपानी और दूसरे हैं नितिन पटेल।
नितिन पटेल का उत्तरी गुजरात में जनाधार है और पटेल समाज में उनकी अच्छी पकड़ है. गुजरात के पटेल आंदोलन के दौरान उन्होंने सरकार की ओर से बातचीत में अहम भूमिका निभाई. ज़मीन से जुड़े नेता नितिन पटेल पीएम नरेंद्र मोदी के क़रीबी हैं.
दूसरे दावेदार विजय रुपानी साफ़ सुथरी छवि के नेता हैं.वह अमित शाह के क़रीबी हैं.विजय रुपानी की सौराष्ट में अच्छी पकड़ है, वह सबसे समन्वय बनाकर चलते हैं. जैन हैं इसलिए उन पर पटेल, दलित विवाद का दबाव कम होगा. विजय रुपानी गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष होने के साथ-साथ गुजरात सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री भी हैं. आलाकमान ने उन्हें ‘एक व्यक्ति एक पद’ से छूट दी है.

सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में अमित शाह को सुप्रीम कोर्ट से राहत

0

सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इस मामले में निचली अदालत द्वारा अमित शाह को बरी करने का फैसला रद्द करने की मांग की थी. इस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एसए बोबडे और अशोक भूषण ने मामले को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि जब कोई मामले से सही मायने में जुड़ा होता है तो बात अलग होती है और जब वह मामले से दूर-दूर तक नहीं जुड़ा होता और मामले को दोबारा चलाना चाहता है तो यह अलग बात होती है.
2005 में गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था. लेकिन आरोप लगे कि पुलिस ने सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी को बस से उतारकर गोली मार दी थी. तब अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे. उन पर मुठभेड़ के नाम पर हत्या की साजिश रचने और सबूत मिटाने के आरोप लगे थे. 30 दिसंबर 2014 को मुंबई की सीबीआई अदालत ने अमित शाह को बरी कर दिया. अदालत का कहना था कि इस मामले में अमित शाह की भूमिका के कोई सबूत नहीं हैं और उनका नाम इसमें राजनीतिक कारणों से शामिल किया गया.

पाकिस्तान में राजनाथ को राष्ट्रपति के स्तर की सुरक्षा, 200 कमांडो संभालेंगे मोर्चा

0

इस्लामाबाद। जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद की चेतावनी के बाद पाकिस्तान सरकार ने फैसला किया कि भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ‘राष्ट्रपति स्तर की’ सुरक्षा दी जाएगी। राजनाथ सिंह 3-4 अगस्त को सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं।
राजनाथ को अगर राष्ट्रपति के स्तर की सुरक्षा दी जाती है तो इसका मतलब है कि उनके साथ 200 सुरक्षाकर्मियों का दस्ता रहेगा जिसमें पाकिस्तान की स्पेशल फोर्स के कमांडो भी शामिल रहेंगे। एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से खबर है कि राजनाथ की सुरक्षा का फैसला पीएम नवाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक हाई लेवल मीटिंग में लिया गया।
नवाज की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासिर खान जंजुआ, आईएसआई डीजी रिटायर्ड जनरल रिजवान अख्तर, इंटेलिजेंस ब्यूरो डीजी आफताब सुल्तान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
आमतौर पर, किसी भी गृह मंत्री को पाक आने पर मंत्री के स्तर की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है लेकिन भारत ने पाकिस्तान से आतंक की आहट के बाद अपने समकक्षों को सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा था। सूत्रों के मुताबिक, राजनाथ जिस लग्जरी होटल में ठहरेंगे वह हाई सिक्यॉरिटी जोन में है, जहां पीएम ऑफिस, फॉरेन मिनिस्ट्री, और प्लोमेटिक एंक्लेव एक किलोमीटर के रेडियस में ही स्थित हैं।
सार्क गृह मंत्रियों की बैठक भी इसी जगह होने की संभावना है। यहां उसके लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सूत्र बता रहे हैं कि स्नाइपर्स और एरियल कवर की सुरक्षा देने पर भी विचार किया जा रहा है। राजनाथ की सुरक्षा को खतरे का अंदेशा हाफिज सईद की चेतावनी के बाद बढ़ गया था।
सईद ने एक बयान में कहा कि मैं पाकिस्तान सरकार से कहना चाहता हूं कि बेगुनाह कश्मीरियों की मौत के लिए जिम्मेदार राजनाथ का स्वागत करके वह कश्मीरियों के जख्मों का अपमान करेंगे। 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड ने कहा कि अगर 3 अगस्त को सिंह इस्लामाबाद आते हैं तो जेयूडी देशभर में विरोध करेगा ताकि दुनिया को यह बताया जा सके कि पाकिस्तान के हुक्मरान की कश्मीरियों के हत्यारों की अगवानी करने की कोई मजबूरी हो सकती है, लेकिन पाकिस्तान की जनता जुल्म के शिकार कश्मीरियों के साथ है।

चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरीडोर का गिलगित-बाल्टिस्तान में विरोध

0

गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) का विरोध हो रहा है. समाचार एजेंसी एनएनआई के मुताबिक स्थानीय लोग इसे संसाधनों की लूट के तौर पर देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि इससे उनके हिस्से में कोई खास लाभ नहीं आने वाला है. 3,000 किमी. लंबे इस कॉरीडोर के जरिए पश्चिमी चीन को दक्षिणी पाकिस्तान से जोड़ने की योजना है. इसमें चीन लगभग 40 अरब डॉलर निवेश कर रहा है.
कहा जा रहा है कि यह योजना इस इलाके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में व्यापक बदलाव ले आएगी. लेकिन, स्थानीय निवासी परियोजना बनाने से पहले उनसे बात न किए जाने को अपने खिलाफ धोखेबाजी मान रहे हैं. कश्मीर नेशनल पार्टी के नेता मोहम्मद नईम खान का कहना है, ‘सीपीईसी परियोजना के तहत 60 आर्थिक क्षेत्र बनाए जाने हैं लेकिन इनमें से एक भी आर्थिक क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद कश्मीर में नहीं बनाया जाना है.’ उन्होंने कहा कि सीपीईसी इस इलाके से गुजरेगा लेकिन यहां केवल कॉरीडोर की सुरक्षा के लिए सैन्य मुख्यालय ही बनाया जाएगा.
स्थानीय पत्रकार अब्दुल रहमान बुखारी का कहना है कि लोग चाहते हैं कि उन्हें परियोजना के बारे में बताया जाए और उन्हें भरोसे में लिया जाए, ताकि वे जान सकें कि भविष्य में उनको किस तरह से लाभ मिलने वाला है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस परियोजना से इस इलाके में पर्यावरण असंतुलन पैदा हो जाएगा. वे इस कॉरीडोर के निर्माण में लगे चीन के श्रमिकों का भी विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके चलते स्थानीय आबादी को रोजगार नहीं मिल रहा है.

आम सहमति के खिलाफ जाकर चीन ने पाकिस्तान को उपलब्ध कराए परमाणु रिएक्टर्स

0

चीन ने पाकिस्तान को परमाणु संयंत्र मुहैया कराकर एनपीटी रिव्यू कांफ्रेंस में बनी आम सहमति का उल्लंघन किया है। ‘आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन’ की ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। चीन ने एनपीटी का हवाला देकर न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत के प्रवेश का विरोध किया है जबकि उसने खुद एनपीटी रिव्यू कांफ्रेंस में बनी आम सहमति का उल्लंघन किया है। एसीए की ताजा रिपोर्ट में परमाणु अप्रसार पर प्रगति की समीक्षा की गई है।
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने 2013 में चस्मा-3 रिएक्टर के लिए पाकिस्तान के साथ की गई डील से एनपीटी के सहमति दस्तावेजों का उल्लंघन हुआ है। इस सहमति पत्र में नए सिरे से कहा गया है कि जिस भी देश को न्यूक्लियर मटीरियल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी, उसे आईएईए के मानकों को स्वीकार करना होगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान अंतररराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग (आईएईए) के सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता है। चीन ने एनएसजी में भारत के प्रवेश पर यह कहते हुए आपत्ति की थी कि भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और गैर-एनपीटी देशों को एनएसजी में शामिल करना नियमों का उल्लंघन होगा जबकि एसीए की इस रिपोर्ट की मानें तो उसने खुद नियमों का उल्लंघन किया है।
चीन ने पाकिस्तान को अभी तक छह परमाणु रिएक्टर उपलब्ध कराए हैं। चीन को वर्ष 2004 में एनएसजी सदस्यता मिली। चीन का कहना है कि उसने पाकिस्तान के साथ 2003 में हुई डील के तहत उसे रिएक्टर्स उपलब्ध कराए हैं।

सीरिया में विद्रोहियों ने रूसी हेलिकॉप्टर गिराया, पांच की मौत

0

सीरिया में विद्रोहियों ने रूसी सेना का एक हेलिकॉप्टर मार गिराया है. हेलिकॉप्टर में सवार पांचों रूसी नागरिक मारे गए हैं. इसमें तीन अधिकारी हैं और दो चालक दल के सदस्य. रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि सेना के एमआई-8 परिवहन हेलिकॉप्टर को उत्तरी सीरिया के इडलिब प्रांत में निशाना बनाया गया.
खबरों के अनुसार यह हेलिकॉप्टर अलेप्पो प्रांत में नाकेबंदी वाले शहरों में फंसे लोगों को मदद पहुंचाकर लौट रहा था. हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इस हेलिकॉप्टर को निशाना बनाने में कौन सा गुट शामिल है. खबरों के मुताबिक जेहादी तत्वों और विद्रोही गुटों के समूह की इडलिब प्रांत में पकड़ काफी मजबूत है.
सितंबर 2015 में सीरिया सरकार के समर्थन में उतरने के बाद रूसी विमानों को निशाना बनाए जाने की यह तीसरी घटना है. जुलाई में पलमाइरा शहर में भी एक हेलिकॉप्टर मार गिराया गया था. इस हमले में दो रूसी पायलटों की मौत हो गई थी. इस हमले के पीछे कइयों ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) का हाथ होने की आशंका जताई थी. इसके अलावा पिछले साल नवंबर में तुर्की ने रूस के एक लड़ाकू विमान को मार गिराया था.
सीरिया और रूस समर्थित सेना ने अलेप्पो प्रांत की घेराबंदी कर रखी है. इसके खिलाफ रविवार से विद्रोही समूह ने जवाबी कार्रवाई शुरू की है. लोगों का कहना है कि विद्रोहियों की यह सबसे बड़ी जवाबी कार्रवाई है.

भाजपा को वफादारी से आगे भी देखना चाहिए

0

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल का कुर्सी छोड़ने का फैसला न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि इससे चौतरफा सवाल उठने भी तय हैं. अपने इस फैसले की वजह बताते हुए उनका कहना था कि जल्द ही वे 75 साल की हो जाएंगी सो उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए. लेकिन यह बात शायद ही किसी को हजम होगी. एक दशक से भी ज्यादा समय तक आनंदीबेन गुजरात में वरिष्ठ मंत्री रहीं. इसके बाद जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने तो मोदी ने गुजरात की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्हें चुना था. हालांकि उनका इस्तीफा अनौपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है लेकिन आखिरी फैसला भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा.
आनंदीबेन के लचर प्रशासन और गुजरात को ठीक से न संभाल पाने के चलते उनके जाने की भूमिका तैयार हो चुकी थी. बची कसर बीते महीने ऊना की घटना ने पूरी कर दी जिसमें एक दलित परिवार के सदस्यों को सरेआम कोड़ों से मारा गया. इसकी प्रतिक्रिया में दलितों का विरोध प्रदर्शन व्यापक हो चुका है और इस मुद्दे पर सरकारी उदासीनता का आरोप लगाकर कई युवकों ने खुदकुशी की कोशिश की है. राज्य की मशीनरी पर आनंदीबेन की कमजोर पकड़ तब भी दिखी थी जब पाटीदार आंदोलन के चलते गुजरात सरकार का विकास का एजेंडा पटरी से उतरने के कगार पर आ गया था. उस आंदोलन के चरम को करीब साल भर हो चुका है. इसके बावजूद राज्य की 15 फीसदी पटेल समुदाय के बीच उसकी अनुगूंज अब भी है जो सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग कर रहा है. इसका नुकसान तब दिखा जब बीते साल कांग्रेस ने ग्रामीण गुजरात में भाजपा के गढ़ों में सेंध लगाते हुए 31 जिला पंचायतों में से 21 और 230 तालुका पंचायतों में से 110 अपने झोली में डाल लीं.
नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी के राष्ट्रीय राजनीति में व्यस्त रहने के बीच आनंदीबेन प्रकरण भाजपा में प्रतिभा के संकट का भी संकेत है. उनका इस्तीफा उस गुजरात मॉडल पर भी सवाल खड़े करेगा जिसे भाजपा ने लोकसभा चुनाव जीतने की अपनी कवायद में एक झांकी के तौर पर दिखाया था. भाजपा के लिए इस समस्या का समाधान यह है कि वह वास्तव में प्रतिभावान लोगों को खोजे. ऐसे लोग जिन्हें इसका कुछ अंदाजा हो कि एक आधुनिक समाज और समावेशी विकास के एजेंडे के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. आनंदीबेन का उत्तराधिकारी चुनते हुए पार्टी अगर सिर्फ राजनीतिक और वैचारिक वफादारी को आधार नहीं बनाना चाहिए.

रियो ओलंपिक से पहले भारत को झटका, स्पेन से दूसरा मैच भी हारा

0

स्पेन दौरे के अपने पहले मैच में बड़ी शिकस्त झेलनी वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम को दूसरे मैच में भी 3-2 से हार का सामना करना पड़ा।
अगले महीने पांच अगस्त से शुरू हो रहे खेलों के महाकुंभ रियो ओलंपिक से पहले भारतीय टीम को स्पेन दौरे में दो अभ्यास मैच खेलने थे लेकिन दोनों ही मुकाबलों में हार से टीम की तैयारियों को करारा झटका लगा है।
पहले मुकाबले में करारी शिकस्त झेलने वाली भारतीय टीम ने इस मुकाबले में बेहतर खेल दिखाया और शुरुआत से ही मेजबान टीम को कड़ी टक्कर दी। पहले क्वार्टर में स्पेन ने एक पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया लेकिन भारतीय गोलकीपर ने इसको विफल कर दिया। इसके बाद कड़े संघर्ष के बीच स्पेन को पहले हाफ के समाप्त होने के पांच मिनट पहले अपना खाता खोलने में सफलता मिली जब जोसेप रोमेऊ ने मिले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर दिया। पहले हाफ में स्पेन को 1-0 की बढ़त थी।
दूसरे हाफ में दोनों ही टीमों ने अपने खेल में और तेजी लाते हुये आक्रामक खेल दिखाया। भारत को 38वें मिनट में पहली सफलता मिली जब मनप्रीत सिंह ने शानदार मैदानी गोल जड़ते हुये टीम को बराबरी दिला दी। हालांकि स्पेन ने इसके चार मिनट बाद ही एक अन्य पेनल्टीकॉर्नर पर पाऊ क्वेमादा के गोल की मदद से 2-1 की बढ़त बना ली।
अंतिम क्वार्टर में मेजबान टीम की तरफ से सल्वाडोर पिएरा ने 53वें मिनट में गोल कर टीम को 3-1 से आगे कर दिया। भारत ने 57वें मिनट में रमनदीप के गोल की बदौलत स्कोर 2-3 कर दिया। हालांकि इसके बाद भारत की बराबरी की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं और स्पेन ने यह मुकाबला 3-2 से अपने नाम कर लिया।

राहुल हैं 'बैटिंग मशीन' : जानिए विराट कोहली के सामने क्या है मुश्किल

0

नई दिल्ली: केएल राहुल ने जमैका में टेस्ट करियर का तीसरा शतक जड़ा। तीसरा शतक उन्होंने छक्के के साथ पूरा किया और वीरेंद्र सहवाग की याद दिला दी। इस शॉट को देख वीरू भी ट्विटर पर चहक उठे। सहवाग ने ट्वीट किया कि “सर्वश्रेष्ठ दबंगगिरी जारी है। बीते महीने छक्के के साथ वनडे शतक पूरा किया। अब छक्के के साथ टेस्ट शतक पूरा किया। तीनों टेस्ट शतक विदेशी ज़मीन पर।”
वैसे राहुल ने सहवाग की तरह बल्लेबाजी ही नहीं की बल्कि उनकी तरह मैच के बाद बयान भी दिया। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केएल राहुल ने कहा कि अगर गेंद मारने वाली होती है तो मैं मारता हूं। यह रणनीति हर फॉर्मेट में मेरे लिए काम करती है और बदलती नहीं है।
छठे टेस्ट मैचों में राहुल के नाम अब तीन शतक हो गए हैं। वह पिछले 3-4 महीनों से गजब की फ़ॉर्म में हैं। जमैका में उन्होंने 158 रनों की पारी खेली, इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 3 छक्के लगाए। ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका में वह टेस्ट शतक लगा चुके हैं। ज़िम्बाब्वे के दौरे पर उन्होंने 196 की औसत से रन बनाए। पिछला IPL का सीज़न भी उनके लिए अच्छा गया।
केएल राहुल के मुताबिक, जमैका में मेरे लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था, मैंने शुरुआत से ही गेंद को मारना शुरू कर दिया था। मैं चीज़ों को सरल रखता हूं, जो गेंद मारने के लिए होती है मैं उस पर रन बनाने की कोशिश करता हूं।”
राहुल के शतक से कप्तान कोहली की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि मुरली विजय के चोटिल होने के कारण उन्हें टीम में जगह मिली थी, अब विजय के फ़िट होने के बाद राहुल को कहां और कैसे फिट किया जाए यह फैसला आसान नहीं होगा।