चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरीडोर का गिलगित-बाल्टिस्तान में विरोध

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गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) का विरोध हो रहा है. समाचार एजेंसी एनएनआई के मुताबिक स्थानीय लोग इसे संसाधनों की लूट के तौर पर देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि इससे उनके हिस्से में कोई खास लाभ नहीं आने वाला है. 3,000 किमी. लंबे इस कॉरीडोर के जरिए पश्चिमी चीन को दक्षिणी पाकिस्तान से जोड़ने की योजना है. इसमें चीन लगभग 40 अरब डॉलर निवेश कर रहा है.
कहा जा रहा है कि यह योजना इस इलाके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में व्यापक बदलाव ले आएगी. लेकिन, स्थानीय निवासी परियोजना बनाने से पहले उनसे बात न किए जाने को अपने खिलाफ धोखेबाजी मान रहे हैं. कश्मीर नेशनल पार्टी के नेता मोहम्मद नईम खान का कहना है, ‘सीपीईसी परियोजना के तहत 60 आर्थिक क्षेत्र बनाए जाने हैं लेकिन इनमें से एक भी आर्थिक क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद कश्मीर में नहीं बनाया जाना है.’ उन्होंने कहा कि सीपीईसी इस इलाके से गुजरेगा लेकिन यहां केवल कॉरीडोर की सुरक्षा के लिए सैन्य मुख्यालय ही बनाया जाएगा.
स्थानीय पत्रकार अब्दुल रहमान बुखारी का कहना है कि लोग चाहते हैं कि उन्हें परियोजना के बारे में बताया जाए और उन्हें भरोसे में लिया जाए, ताकि वे जान सकें कि भविष्य में उनको किस तरह से लाभ मिलने वाला है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस परियोजना से इस इलाके में पर्यावरण असंतुलन पैदा हो जाएगा. वे इस कॉरीडोर के निर्माण में लगे चीन के श्रमिकों का भी विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके चलते स्थानीय आबादी को रोजगार नहीं मिल रहा है.