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रोमांटिक और कॉमेडी फिल्में कर चुकी सोनाक्षी सिंहा की एक्शन फिल्म ‘अकीरा’

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सोनाक्षी सिंहा इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘अकीरा’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं. अब तक रोमांटिक और कॉमेडी फिल्में कर चुकी सोनाक्षी सिंहा की
आने वाली ये फिल्म एक एक्शन फिल्म होगी.
‘अकीरा’ जैसी एक्शन फिल्म करने को लेकर सोनाक्षी ने कहा, मैं एक्शन फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हूं. बड़े-बड़े एक्शन स्टार्स के एक्शन को बहुत करीब से देखा है. उन्हें देख कर थोड़ा बहुत सीख गई थी, और जैसे ही मुझे ‘अकीरा’ का ऑफर आया मैंने झट से उसके लिए हां कर दिया.”
सोनाक्षी ने कहा, मुझे बड़े बड़े एक्टर्स की तरह एक्शन करने की ख्वाहिश थी. जैसे बड़े एक्शन स्टार्स एक्शन करते हैं वैसे ही इस फिल्म में मुझे एक्शन करने का मौका मिला है.
‘अकीरा’ फिल्म के डायरेक्टर के बारे में बताते हुए सोनाक्षी कहती हैं कि, ”मुर्गदॉस ने देश के बड़े-बड़े एक्शन स्टार्स के साथ काम किया है. बहुत बड़े-बड़े ब्लॉकबस्टर्स भी दिए हैं. जब वो मेरे पास आए और उन्होंने ये कहा कि ‘मैं ये फिल्म बनाना चाहता हूं और आपको इस फिल्म में लीड कैरेक्टर के तौर पर कास्ट करना चाहता हूं.’ उस दौरान मुझे काफी गर्व हुआ और मैंने इस फिल्म के लिए हांमी भर दी.”
इस फिल्म में डायरेक्टर अनुराग कश्यप भी अहम भूमिका में हैं. एक डायरेक्टर के साथ एक्टिंग करने के अनुभव को बांटते हुए सोनाक्षी ने कहा, ”अनुराग कश्यप ने इस फिल्म में बिलकुल भी डायरेक्टर बनने की कोशिश नहीं की. वो इस फिल्म में एक एक्टर की हैसियत से थे. उन्होंने इस फिल्म जो एक्टिंग की है वो बहुत ही अच्छी है. जब आप ये फिल्म देखेंगे तब आपको पता चलेगा कि अनुराग शानदार डायरेक्टर होने के साथ एक बेहतरीन एक्टर भी हैं.”
आपको बता दें की सोनाक्षी सिंहा की फिल्म ‘अकीरा’ 2 सितंबर को सिनेमा घरों में रिलीज की जाएगी. इस फिल्म का डायरेक्टर एआर मुर्गदॉस ने किया है. सोनाक्षी सिंहा के साथ इस फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा और अनुराग कश्यप भी नजर आएंगे.

दही हांडी की ऊंचाई के आगे बौना दिखा सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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मुंबई। मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके परदही हांडी उत्सव की रंगारंग शुरूआत हुई। कुछ ‘मंडलों’ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करते हुए कथित रूप से 20 फुट से भी ऊंचे मानव पिरामिड का निर्माण किया। कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट तौर पर कहा था कि समूचे महाराष्ट्र राज्य में कोई भी मानव पिरामिड 20 फुट से अधिक ऊंचा नहीं बनाया जा सकता।
बहरहाल, इससे सटे ठाणे जिला में आज सुबह 49 फुट की ऊंचाई पर एक ‘‘दही हांडी’’ लटकाई गई, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानक से दो गुना से भी अधिक ऊंची थी। इसका आयोजन राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने किया था। ठाकरे ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा था कि भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव को उसी अंदाज में मनाया जाना चाहिए जिसके लिए इसे जाना जाता है। मुंबई के उपनगर दादर में कुछ दही हांडी मंडल के सदस्य जमीन पर लेट गए और उन्होंने भी अदालत के तय मानक की अवहेलना करते हुए 20 फुट से अधिक लंबी मानव पिरामिड बनाई। गौरतलब है कि यह मानव पिरामिड जमीन पर लेटकर बनाई गई ।
पारंपरिक ‘हांडी’ को तोड़ने के लिए एक अन्य मंडल ने सीढ़ी का इस्तेमाल किया और महोत्सव के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए काले झंडे भी दिखाए। सुप्रीम कोर्ट की इस रोक के खिलाफ अपने आखिरी प्रयास के तहत ‘जय जवान क्रीड़ा मंडल गोविंदा पथक’ ने शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर की है ।

कॉन्स्टेबल ने मांगे कागजात, डंडा लेकर टूट पड़े बाइक सवार

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मुंबई। मुंबई में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को बाइक सवार के लाइसेंस और कागजात की जांच करना इतना महंगा पड़ गया कि बाइक सवार लाइसेंस और गाड़ी के कागजात दिखाने के बजाय कांस्टेबल पर टूट पड़े। बाइक सवार ने डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया जिससे कॉन्स्टेबल को सिर में गंभीर चोटें आईं। फिलहाल कॉन्स्टेबल की हालत नाजुक बनी हुई है।
ये पूरा वाकया मुंबई के खार इलाके के पेट्रोल पंप पर हुआ। ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल विलाश शिंदे दिन में करीब सवा तीन बजे मुंबई के खार इलाके के इसी पेट्रोल पंप के पास अपनी ड्यूटी कर रहे थे और ड्यूटी दौरान उन्होंने एक बाइक चालक से उसका लाइसेंस और बाइक के दस्तावेज मांगे जिसके बाद दोनों में विवाद शुरू हो गया।
विवाद शुरू हुआ ही था कि बाइक पर पीछे बैठे शख्स ने डंडे से कॉन्स्टेबल विलाश शिंदे के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया जिससे कॉन्स्टेबल को गंभीर चोटें आईं और वह बेहोश हो गए। शिंदे को पास के ही लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
इस हादसे के बाद बाइक सवारों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि दूसरा साथी फरार हो गया। लेकिन इस वारदात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुंबई में हमलावरों के हौसले कितने बुलंद हैं। हलाकि जहां ये पूरी वारदात हुई वहां पास में सीसीटीवी लगा हुआ है जिसकी पुलिस जांच कर रही है।

दाऊद के मोहल्ले में आधी रात को हंगामा, 24 गाड़ियां चकनाचूर

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मुंबई। दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा इलाके में बीती रात अचानक दहशत मच गई। जिस गली में कभी डॉन दाऊद इब्राहिम खेल कूदकर बड़ा हुआ, वहां दो ग्रुप में हुई आपसी बहसबाजी के बाद कुछ बाइक सवारों ने सड़क पर खड़ी 24 गाड़ियों को अपना निशाना बनाया और पत्थर डंडे मारकर गाड़ियों के शीशे को चकनाचूर कर दिया।
नागपाड़ा इलाके में सड़क पर खड़ी गाड़ियों को निशान बनाया गया। मामूली बात पर कुछ लोग इस कदर गुस्सा हुए कि सड़क पर खड़ी गाड़ियों पर ही हमला बोल दिया और एक के बाद एक 24 गाड़ियों को चकनाचूर कर दिया। मुंबई के अतिसंवेदनशील इलाकों में से एक नागपाड़ा के डंकन रोड उर्फ मौलाना आजाद रोड पर गाड़ियों के चकनाचूर शीशे घटना की कहानी सुना रहे हैं। गाड़ियों की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पत्थरों और डंडों से किस कदर इन्हें निशाना बनाया गया है।
पुलिस की मानें तो बुधवार की रात कुछ लोगों का ग्रुप कबाड़ी का व्यापार करने वालों की मार्केट में गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गाड़ियों से जो बैटरी चोरी होती है, उसे यहां कबाड़ का व्यापार करने वाले लोग ही चोरी करते हैं और ये घटना इस कदर बढ़ गई है कि अब ये आम बात हो गई है। ऐसे में आए दिन इस तरह की होने वाली घटनाओं से परेशान लोगों ने मार्केट में जाकर लोगों से चोरी हो रहे बैटरी की घटनाओं के बारे में पूछताछ करनी चाही लेकिन बात बिगड़ गई जिसके बाद कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
बावजूद इसके, बाइक पर आए युवकों ने एक नहीं सुनी और उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में एक बाद एक 24 कार और टेंपो में जमकर तोड़फोड़ की। फिलहाल ये इलाका बड़ा सवेदनशील है और ऐसे में पुलिस की मौजूदगी में हुए इस घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया जबकि कुछ लोग भागने में कामयाब हो गए। जिस इलाके में ये पूरी घटना हुई है, वही से चांद कदम की दूरी पर दाऊद का परिवार रहता है।

प्राकृतिक आपदा से उत्तराखंड में गई 90 जान, 650 करोड़ का नुकसान

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उत्तराखंड में पिछले दो महीने से भूस्खलन, बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे लोगों के लिए यह खबर और परेशानी में डालने वाली है।
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से कराए गए हालिया सर्वे में पूरे राज्य में 235 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जो प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से खतरनाक हैं।
दूसरी ओर सर्वे में यह बात सामने आई है कि प्राकृतिक आपदाओं में अब तक विभिन्न इलाकों में 90 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 लोग लापता है, जिनकी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तलाश कर रही है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 650 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
आपदा प्रबंधन विभाग के उपसचिव संतोष बडोनी के मुताबिक इस वर्ष मानसून के दौरान आई आपदाओं में 90 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 10 लोग लापता हैं।
आपदाओं के चलते अवस्थापना सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। जिलों एवं विभागों से भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक 650 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
बकौल उप सचिव बडोनी विभाग की ओर से पूरे राज्य में आपदा के लिहाज से 235 खतरनाक जोन चिह्नित किए गए हैं, जहां आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय पहलू यह है कि ज्यादातर खतरनाक जोन चारधाम यात्रा मार्गों पर चिह्नित किए गए हैं। उप सचिव के मुताबिक आपदा से प्रभावित 341 गांव में से 100 गांव का सर्वे करा लिया गया है।
इन गांवों के ग्रामीणों को आपदा राहत सहायता पहुंचाई जा रही है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जानमाल का नुकसान न हो, इसके लिए नदी के आसपास के क्षेत्रों में निगरानी के लिए जिला प्रशासन को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है।
नदी के किनारे जल पुलिस को तैनात करने के साथ ही बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। आपदाओं के चलते कई राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर यातायात बाधित है। जिसे दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि यातायात बहाल किया जा सके।

उत्तराखंड: बरसात में केंद्र की टीम जानने पहुंची सूखे के हालात

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उत्तराखंड में वर्ष 2015-16 में सामान्य से 75 प्रतिशत कम बारिश होने पर रबी की फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ था। सूखे से कृषि/बागवानी फसलों को हुई का क्षति का आंकलन करने के लिए फरवरी, मार्च, अप्रैल में केंद्र सरकार की टीमों को आना था।
केंद्रीय टीमें तब तो नहीं आईं, लेकिन अब जबकि मानसून सीजन का अंतिम पड़ाव चल रहा है, पहाड़ों में बारिश ने खूब तबाही मचाई है, कई हेक्टेयर कृषि भूमि आपदा की भेंट चढ़ चुकी है, तब केंद्रीय टीम सूखे के हालातों का जायजा लेने पहुंची है।
24 अगस्त को केंद्र सरकार के अधिकारी जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचे और वहां से देहरादून रवाना हुए। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव आरबी सिन्हा की ओर से उत्तराखंड के कृषि निदेशालय को 22 अगस्त को टीमों के दौरों के संबंध में पत्र भेजा गया था।
केंद्र सरकार की तीन टीमें प्रदेश में रबी 2015-16 के सूखाग्रस्त इलाकों का 25 अगस्त से दौरा करेगी। तीन टीमों के प्रदेश भ्रमण के दौरान उनके मार्ग-निर्देशन एवं आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है।
नीति आयोग के एडवाइजर जेपी मिश्रा के नेतृत्व में पहली टीम का गठन किया गया है। टीम के मार्ग-निर्देशन के लिए अपर कृषि निदेशक गढ़वाल मंडल डा. परमाराम और संयुक्त कृषि निदेशक जैविक डा. अजय कुमार वर्मा की तैनाती की गई है। यह टीम बुधवार को नई दिल्ली से देहरादून पहुंच चुकी है। टीम 25 अगस्त को गढ़वाल मंडल के सूखाग्रस्त जनपदों का भ्रमण करेगी।
डा. आरबी सिन्हा संयुक्त सचिव (आईएमसीटी) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के नेतृत्व में दूसरी टीम का गठन किया गया है। टीम में उत्तराखंड से मुख्य कृषि अधिकारी ऊधमसिंह नगर पीके सिंह और मुख्य कृषि अधिकारी नैनीताल धनपत कुमार की तैनाती की गई है। टीम बुधवार को नैनीताल पहुंच चुकी है। 25 अगस्त को टीम नैनीताल और अल्मोड़ा जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेगी।
विजय ठाकरे शस्य वैज्ञानिक (चारा) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के नेतृत्व में तीसरी टीम गठित की गई है। टीम के सहयोग के लिए उत्तराखंड से डा. अभय कुमार सक्सेना मुख्य कृषि अधिकारी पिथौरागढ़ और रामलाल प्रभारी मुख्य कृषि अधिकारी चंपावत को तैनात किया गया है। टीम बुधवार को हल्द्वानी पहुंच चुकी है। 25 अगस्त को टीम चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों में जाएगी।

जन्माष्टमी पर थी देश को दहलाने की साजिश, विस्फोटकों के जखीरे के साथ 6 अरेस्ट

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उत्तर प्रदेश एटीएस और कानपुर अपराध शाखा ने संयुक्त अभियान में गुरुवार (25 अगस्त) को शहर के ग्रामीण क्षेत्र घाटमपुर से हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। इसमें 30 हजार डेटोनेटर, 20 हजार जिलेटिन राड और 600 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट शामिल है। इस मामले के सिलसिले में कानपुर के घाटमपुर से पांच लोगों और झांसी जिले के मोठ से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में एटीएस और क्राइम ब्रांच की कार्रवाई अभी चल रही है, अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं साथ ही और विस्फोटक बरामद होने की उम्मीद है। पकड़े गए पांच लोग बिहार के रहने वाले हैं। एटीएस की एक टीम बिहार भी भेजी जा रही है। भारी संख्या में विस्फोटक किसलिए इकट्ठा किया गया था इसका पता लगाने की कोशिश हो रही है।
उत्तर प्रदेश एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि इस साल ईद पर कानपुर में कुछ विस्फोटक पदार्थ बरामद किए गए थे जिसके बाद एटीएस और कानपुर अपराध शाखा मिलकर विस्फोटक पदार्थों को बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने में लगी थी। गुरुवार (25 अगस्त) तड़के घाटमपुर से गिरफ्तार किए गए पांच लोगों से जब पूछताछ की गई तो इन्होंने बताया कि यह लोग यह विस्फोटक सामग्री झांसी के मोठ के चरण सिंह के पास से लाते थे और इसे पूरे देश में आपूर्ति करते थे। इस पर एक टीम तुरंत झांसी के मोठ रवाना की गई और वहां से चरण सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से भी कुछ विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है।
कानपुर के एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि ईद के समय कानपुर में कुछ विस्फोटक मिलने के बाद से ही पुलिस सर्तक थी और गिरोह के लोगों की तलाश में थी। उन्होंने कहा कि घाटमपुर में पकड़े गये पांच लोग बिहार के रोहतास के रहने वाले हैं और इनके खिलाफ घाटमपुर में एफआईआर दर्ज की जा रही है। एक दूसरी एफआईआर झांसी के मोठ में भी लिखी जा रही है। घाटमपुर तथा झांसी में पकड़े गए लोगों को आमने सामने बिठाकर पूछताछ की जाएगी। उन्होंने बताया कि घाटमपुर में पकड़े गए लोगों ने बताया कि वे झांसी से यह विस्फोटक सामग्री लाते थे। उन्होंने कहा कि पुलिस अभी भी छापेमारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी इस मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार है और इस संबंध में एटीएस देर शाम प्रेस कांफ्रेस कर सकती है।

आरएसएस पर कहे अपने हर शब्द पर कायम हूं': राहुल

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नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को फिर कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को लेकर कहे गए अपने हर शब्द पर कायम हैं। साथ ही वह संघ के ‘घृणास्पद और विभाजनकारी एजेंडे’ से लड़ना कभी नहीं छोड़ेंगे।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि वह अपने उस बयान पर कायम हैं, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या को लेकर आरएसएस के लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘मैं आरएसएस के घृणित और विभाजनकारी एजेंडे के खिलाफ हमेशा लड़ता रहूंगा। मैं अपने हर एक शब्द पर आज भी कायम हूं।’ राहुल ने इस ट्वीट के साथ ही 2014 में मुंबई के भि‍वंडी में अपने भाषण का छोटा सा वीडियो भी शेयर किया है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी का यह ट्वीट ऐसे समय आया है जब बुधवार को राहुल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में बयान पर सफाई देते हुए कहा- आरएसएस नहीं बल्कि इससे जुड़ा एक व्यक्ति उनकी हत्या के लिए जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि अदालत यह मानती है कि राहुल ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए आरएसएस संस्था को हत्यारा नहीं कहा था। सिर्फ संघ से जुड़े लोगों के लिए राहुल ने ऐसा कहा था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में आरएसएस के लिए मानहानि की बात नहीं लगती। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में एक सितंबर को होगी। कोर्ट उसी दिन केस रद्द करने के आदेश दे सकती है।
बुधवार की सुनवाई के बाद कांग्रेस और आरएसएस के बीच चल रहे राजनीतिक वाकयुद्ध का पटाक्षेप होता दिख रहा है लेकिन गुरुवार को एक बार फिर से राहुल के ट्वीट के बाद इस मामले के और तूल पकड़ने के आसार बन गए हैं। संघ और भाजपा इस मुद्दे को फिर से सियासी जामा पहनाकर हंगामेदार बना सकती है।
राहुल गांधी ने 2014 में लोकसभा चुनाव दौरान भिवंडी में एक सभा के दौरान कहा था, ‘आरएसएस के लोगों ने गांधीजी को गोली मारी और आज उनके लोग गांधीजी की बात करते हैं। सरदार पटेल कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने आरएसएस के बारे में साफ लिखा है। उनके संगठन के बारे में बहुत साफ लिखा है और आज कांग्रेस पार्टी के नेताओं को कहते हैं कि अरे वो तो हमारे नेता थे। तो सोच हम देते हैं, नेता हमारे होते हैं, उनका वो विरोध करते हैं और फिर अपना बता देते हैं।’

स्कॉर्पीन पनडुब्बियों से जुड़े दस्तावेज़ भारत से नहीं हुए लीक

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नई दिल्ली: मुंबई स्थित मझगांव डॉक पर तैयार की जा रही स्कॉर्पीन पनडुब्बियों से जुड़े बेहद गोपनीय दस्तावेज़ लीक होने के मामले में जांच शुरू किए जाने के 24 घंटे के भीतर ही भारत इस निष्कर्ष पर पहुंच गया है कि लीक भारत से नहीं हुआ. यह बात शीर्ष रक्षा सूत्रों ने NDTV से कही.
सरकार ने इस लीक पर फ्रांसीसी निर्माता डीसीएनएस से रिपोर्ट तलब की है, जिसके साथ ऐसी छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियां बनाने का सौदा 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर में किया गया है. लीक हुए दस्तावेज़ में इन पनडुब्बियों की युद्धक प्रणालियों से जुड़ी अहम सूचनाएं भी शामिल हैं.
बुधवार को नौसेना सूत्रों ने इस बात पर पूरा भरोसा जताया था कि समाचारपत्र ‘द ऑस्ट्रेलियन’ द्वारा प्रकाशित ख़बर में जिन 22,000 से ज़्यादा पृष्ठों का ज़िक्र है, वे यहां (भारत में) मौजूद सूत्रों ने लीक नहीं किए. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि इस लीक से दुनिया के सबसे बड़े रक्षा संबंधी प्रोजेक्टों में शुमार किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट की गोपनीयता खतरे में नहीं पड़ी. हालांकि इस दूसरे दावे पर विशेषज्ञों की राय जुदा है, और उनका कहना है कि जो सूचनाएं लीक हो गई हैं, उनसे भारत को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
नौसेना सूत्रों ने बुधवार को कहा था कि लीक हुए दस्तावेज़ों में जिन प्रणालियों और खासियतों का ज़िक्र है, वे 2011 के हैं, और अब सब बदल चुका है.
फ्रांसीसी डीसीएनएस ने कहा है कि यह लीक ‘आर्थिक जंग’ का परिणाम हो सकती है, क्योंकि उनकी प्रतियोगी कंपनियां इस बात से आहत थीं कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया से लगभग 38 अरब डॉलर कीमत में 12 पनडुब्बियों का सौदा मिला. लीक हुए दस्तावेज़ों में ऑस्ट्रेलियन डिज़ाइन की कोई जानकारी शामिल नहीं है.
रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस लीक को ‘हैकिंग’ बताया था, और इसके बारे में बुधवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रीफिंग भी दी थी.
इस बीच, समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, भारतीय नौसेना ने भी कहा है, हमने स्कॉर्पीन पनडुब्बी से जुड़े दस्तावेज़ लीक होने का मुद्दा फ्रांसीसी आयुध महानिदेशालय के समक्ष उठाया है, और हमने फ्रेंच सरकार से इस घटना की अविलंब जांच कराने और अपने तथ्यों को भारतीय पक्ष के साथ साझा करने का अनुरोध किया है. भारतीय नौसेना ने यह भी कहा है कि इस बात का पता लगाने के लिए कि कहीं सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता तो नहीं किया गया है, एक आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया भी शुरू की गई है.
उधर, मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने भी गुरुवार को कहा कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी से संबंधित अहम जानकारियां उसकी ओर से लीक नहीं हुई हैं और वह इस मामले की जांच में नौसेना की सहायता कर रही है. एमडीएल के एक अधिकारी ने बताया, “जांच में हम नौसेना की मदद कर रहे हैं. हम यह पक्के तौर पर मानते हैं कि हमारी ओर से कोई जानकारी लीक नहीं हुई.” एमडीएल के प्रमुख रीयर एडमिरल राहुल शरावत टिप्पणियों के लिए उपलब्ध नहीं हो सके.
गौरतलब है कि इन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में से पहली ‘आईएनएस कलवरी’ इसी साल के अंत तक सेना में शामिल होने जा रही है, और शेष पनडुब्बियों की आपूर्ति 2020 तक किए जाने की संभावना है.

महबूबा मुफ्ती ने आपा खोया,अचानक ही प्रेस वार्ता खत्म कर दी

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श्रीनगर : जम्मू कश्मीर के हालात पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित किया. इस प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान उस वक्त अजीब स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब गृह मंत्री राजनाथ सिंह को रोककर महबूबा मुफ्ती बोलने लगीं. राजनाथ ने बार-बार महबूबा को शांत करने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने बोलना जारी रखा. उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में हिंसक तरीकों की कोई जगह नहीं है और यदि आप किसी मुद्दे को बदनाम करना चाहते हैं तो हिंसा करते रहिए.’ एक पत्रकार ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि महबूबा ने सत्ता में वापसी के बाद से अपना रुख बदल लिया है. साल 2010 में हुए प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष की नेता के तौर पर महबूबा ने गिरफ्तारियों और अलगाववादी नेताओं को नजरबंद किए जाने पर उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना की थी, लेकिन अब सत्ता में आकर उन्हीं तौर-तरीकों को अपना रही है.
इस पर मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, ‘‘आपका विश्लेषण गलत है. साल 2010 में एक वजह थी. मछिल में एक फर्जी मुठभेड़ हुई थी जिसमें तीन आम लोग मारे गए थे. इसके बाद शोपियां में दो महिलाओं के बलात्कार और उनकी हत्या कर दिए जाने के आरोप थे. कहने का मतलब यह है कि लोगों के गुस्से की एक वजह थी.’ उन्होंने कहा, ‘‘इस साल एक मुठभेड़ हुई. तीन आतंकवादी मारे गए. सरकार का क्या कसूर था?’ कश्मीर के 95 फीसदी लोगों द्वारा विरोध-प्रदर्शन का समर्थन न करने की अपनी पहले की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मेरे कहने का मतलब यह था कि लोग मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं. लेकिन हिंसा में शामिल पांच फीसदी लोगों ने मुद्दे को हथिया लिया है. सुरक्षा बलों के शिविरों पर हमलों के लिए उपद्रवियों की ओर से उन्हें इस्तेमाल किया जा रहा है. वे लोग चाहते हैं कि गरीब और नौजवान लोग मारे जाएं, उनकी आंखों की रोशनी चली जाए. क्या आपको यह बात समझ में नहीं आती?’
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आज अपना आपा खो दिया और अचानक ही वह प्रेस वार्ता खत्म कर दी. इस प्रेस वार्ता को महबूबा और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह संबोधित कर रहे थे. दरअसल, महबूबा उस वक्त बिफर पडीं जब राज्य के मौजूदा संकट से निपटने में उनकी भूमिका से जुड़े सवाल पूछे गए. एक सवाल का जवाब देने के बाद महबूबा अचानक से उठ खड़ी हुईं और पत्रकारों को ‘‘शुक्रिया’ कहा, जबकि राजनाथ वहां बैठे ही रहे. इसके बाद राजनाथ भी हिचकिचाते हुए उठे और महबूबा के आवास पर आयोजित यह प्रेसवार्ता खत्म कर दी गयी. सवालों के जवाब देते हुए महबूबा ने पत्थरबाजी और पिछले 47 दिनों में कश्मीर में हुई हिंसा के अन्य स्वरूपों की निंदा की. उन्होंने कहा कि जब हिंसा पर उतारु भीड़ सुरक्षा बलों के शिविरों, पुलिस पिकेटों और पुलिस थानों पर हमले करेगी तो कुछ नुकसान तो होगा ही.
महबूबा ने अपनी पहले की एक टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए कहा कि कश्मीर के महज पांच फीसदी लोग हिंसक विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके कहने का मतलब यह है कि 95 फीसदी लोग समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं और पांच फीसदी लोगों ने हिंसा में शामिल होकर पूरे मुद्दे को ‘‘हथिया लिया’ है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, ‘‘मैं कश्मीर मुद्दे के समाधान के पक्ष में हूं. वार्ता होनी चाहिए. लेकिन पत्थरबाजी करके और शिविरों पर हमला करके कोई मुद्दा नहीं सुलझने वाला. हम मुद्दे को दरकिनार नहीं कर रहे. हम समाधान चाहते हैं.’
मुख्यमंत्री ने पिछले कुछ दिनों में हुए नुकसान, खासकर नौजवानों की मौत और उनके घायल होेने के तरीकों को विस्तार से समझाने की कोशिश की. कश्मीर में नौजवानों की मौत और उनके घायल होने पर सरकार को काफी आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है. महबूबा ने कहा, ‘‘मारे गए लोगों में से 95 फीसदी, जिसमें ज्यादातर नौजवान हैं, जवाबी कार्रवाई में उस वक्त मारे गए जब वे सुरक्षा इकाइयों पर हमले कर रहे थे.’ उन्होंने कहा, ‘‘लोग सड़कों पर उतर आए. हमने कर्फ्यू लगाया. क्या बच्चे सेना के शिविरों में टॉफियां खरीदने गए थे?
दक्षिण कश्मीर के दमहाल हांजीपुरा में पुलिस थाने पर हमला करने वाला 15 साल का लड़का वहां दूध लेने गया था?’ महबूबा ने यह भी कहा कि उन्होंने ऐसे सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया जो इस महीने की शुरुआत में पुलवामा जिले के ख्रयू इलाके में एक लेक्चरर के मारे जाने के मामले में शामिल थे. उन्होंने कहा, ‘‘लेक्चरर का एक मामला है. इसमें जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा दी जानी चाहिए. मैं इसका समर्थन करती हूं.’
जब पत्रकार संकट के हालात में महबूबा की भूमिका के बारे में सवाल पूछते रहे तो राजनाथ ने बीच में दखल देते हुए कहा, ‘‘महबूबा जी आपमें से ही एक हैं.’ बहरहाल, महबूबा पूरी तरह बिफरी हुई थीं. उन्होंने तपाक से कहा, ‘‘वे मुझसे क्या बोलेंगे? मैंने दक्षिण कश्मीर के नौजवानों को टास्क फोर्स (पुलिस का विशेष अभियान समूह) से बचाया है. मैंने उन लोगों को चाकुओं से बचाया है, जब उन्हें बंधुआ मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था.’