स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो के चोटिल होकर पहले ही हाफ में बाहर होने के बाद उम्मीदें खो चुकी पुर्तगाल की टीम ने अतिरिक्त समय में स्थानापन्न खिलाड़ी एडर के शानदार गोल की बदौलत उतार चढ़ाव भरे बेहद ही रोमांचक फाइनल मुकाबले में मेजबान फ्रांस को 1-0 से हराते हुए यूरो कप खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
मैच के निर्धारित 90 मिनटों में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी और मुकाबला गोल रहित रहा। इसके बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में चला गया। 15 मिनट के पहले अतिरिक्त समय में भी कोई टीम गोल नहीं कर सकी लेकिन 15 मिनट के दूसरे अतिरिक्त समय में पुर्तगाल ने गोल स्कोर कर मैच को रोमांचक मोड़ पर ला दिया।
पुर्तगाल के स्थानापन्न खिलाड़ी एडर ने 109वें मिनट में 25 मीटर की दूरी से लाजवाब गोल दाग कर टीम को बढ़त दिला दी। खेल की समाप्ति तक फ्रांस की टीम इस गोल की बराबरी नहीं कर सकी और पुर्तगाल ने मुकाबला 1-0 से जीत लिया।
यह पुर्तगाल के फुटबॉल इतिहास का पहला अंतर्राष्ट्रीय खिताब है। इससे पहले टीम को साल 2004 के यूरो कप के फाइनल में यूनान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
मैच की शुरुआत में ही पुर्तगाल को झटका लग गया जब स्टार स्ट्राइकर रोनाल्डो आठवें मिनट में ही फ्रांस के मिडफील्डर दिमित्री पाएट से टकराकर चोटिल हो गए। देश को पहली बार चैंपियन बनाने का सपना लिए रोनाल्डो चोट के बावजूद डटे रहे लेकिन 24वें मिनट में उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद रोनाल्डो की आंखों से आंसू निकल पड़े और स्टेडियम में मौजूद पुर्तगाली समर्थकों के चेहरे पर निराशा फैल गई। रोनाल्डो पूरे मैच में बाहर ही रहे।
इसके बाद नानी ने पुर्तगाल की कमान संभाल ली। फ्रांस ने निर्धारित समय में पुर्तगाल के गोल पर कई आक्रमण किए लेकिन पुर्तगाल के गोलकीपर लुइस पेट्रीश्यो ने शानदार कीपिंग के जरिए फ्रांस के हर मौके को बेकार कर दिया। मैच के दौरान एंटोएन ग्रिजमेन के एक शानदार हेडर पर पेट्रिश्यो ने बेहतरीन बचाव किया। निर्धारित समय के अंतिम क्षणों में भी फ्रांस के जीनिएक ने एक शॉट लिया जो पोस्ट से टकराकर बाहर आ गया। 90 मिनट की समाप्ति तक मुकाबला गोलरहित रहा।
इसके बाद अतिरिक्त समय का पहला हाफ शुरू हुआ जहां दोनों टीमों ने अपना दबदबा बनाने का प्रयास जारी रखा लेकिन किसी को सफलता हाथ नहीं लगी। दोनों टीमों ने विपक्षी पोस्ट पर आक्रमण जारी रखा। कप्तान रोनाल्डो के बिना खेल रही पुर्तगाल की टीम को पेनल्टी शूटआउट तक मैच ले जाने के लिए बस 15 मिनट और निकालने थे लेकिन इसके बाद अचानक स्थानापन्न खिलाड़ी एडर ने सबको हैरान करते हुए गोल कर दिया। एडर ने बॉक्स के बाहर तकरीबन 25 मीटर दूरी से शानदार ग्राउंड किक जड़ी और मेजबान गोलकीपर व कप्तान ह्यूगो लॉरिस को छकाते हुए गोल कर दिया।
अंतिम सीटी बजने तक यह बढ़त कायम रही और इसके साथ ही 95 वर्षों से फुटबॉल खेल रही पुर्तगाल की टीम ने इतिहास रच दिया। पुर्तगाल के खिलाड़ी अपनी भवनाओं पर काबू नहीं कर सके और मैदान पर जश्न में सराबोर हो गए। वहीं दूसरी तरफ तीसरी बार यूरो कप जीतने का सपना चकनाचूर होने से फ्रांस के खिलाड़ी और प्रशंसक निराशा में डूब गए।
फ्रांस को हरा पुर्तगाल बना यूरो कप चैंपियन
रितिक ने बताया ये है 'मोहनजोदड़ो' में उनका पसंदीदा सीन
बॉलीवुड अभिनेता रितिक रोशन आगामी फिल्म ‘मोहनजोदड़ो’ को लेकर खासा उत्साहित हैं. आशुतोषा गोवारिकर की इस फिल्म में रितिक रोशन और पूजा हेगड़े ने मुख्य भूमिका निभाई है. हाल ही में रितिक ने इस बात का खुलासा किया है कि फिल्म में उन्हें सबसे पसंदीदा सीन कौन सा लगा ?
फिल्म में मारधाड़ वाले सीन्स को लेकर निर्देशकों ने बेहतरीन काम किया है. वहीं रितिक का कहना है कि फिल्म में क्लाईमैक्स वाला सीन उनका फेवरेट है.
उन्होंने कहा,’ हम इस पर (मारधाड़ वाले सीन) पर काफी मेहनत करते हैं. इसमें खतरा है और चोटें भी इसका हिस्सा है. लेकिन जब यह सामने आया तो अच्छा लगा. मेरा सबसे पसंदीदा सीन फिल्म का क्लाईमैक्स सीन है.’
रितिक फिल्म में खतरनाक एक्शन करते दिखाई देंगे. फिल्म का ट्रेलर शानदार है और रिलीज होते ही यह हिट हो गया. ट्रेलर में रितिक मगरमच्छ दो-दो हाथ करते नजर आये थे. फिल्म में वे पहली बार पूजा हेगड़े संग रोमांस करते नजर आयेंगे. फिल्म सिंधु घाटी सभ्यता की पृष्ठभूमि पर आधारित है. फिल्म 12 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है.
बुरहान वानी में ऐसा क्या था कि उसकी मौत ने सरकार की चिंता खत्म करने के बजाय बढ़ा दी है
मुजफ्फर अहमद वानी की खुशी उस दिन आसमान पर थी. आठवीं के इम्तिहान में उनके बेटे बुरहान वानी के 90 फीसदी से भी ज्यादा नंबर आए थे. दक्षिण कश्मीर में त्राल के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल मुजफ्फर वानी को यकीन था कि उनका बेटा आगे खूब नाम कमाएगा.
वही हुआ है. लेकिन उस तरह से नहीं जैसे उन्होंने सोचा होगा. अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों के साथ चली एक लंबी मुठभेड़ में मारे गए बुरहानी वानी का नाम कश्मीर में आज सबकी जुबान पर है. हिजबुल मुजाहिदीन के इस स्थानीय कमांडर पर 10 लाख रु का ईनाम था. 22 साल का बुरहान कश्मीरी आतंकवाद का नया चेहरा बन गया था इसलिए उसकी मौत को सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
लेकिन यह कामयाबी अपने साथ चिंताएं लेकर भी आई है. कश्मीर घाटी में हालात पहले से ही बिगड़े हुए हैं और सुरक्षा एजेंसियों को अब फिक्र सता रही है कि कहीं बुरहान की मौत इन्हें काबू से बाहर न कर दे. इस मौत पर विरोध प्रदर्शन शुरू भी हो चुके हैं. श्रीनगर सहित घाटी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लागू हो चुका है और एहतियात के तौर पर अमरनाथ यात्रा भी रोक दी गई है. कई जगहों पर मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की भी खबर है.
बीते कुछ समय के दौरान बुरहान वानी का नाम पूरे कश्मीर में मशहूर हो गया था. बताया जाता है कि कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से उसने दर्जनों नौजवानों को हिजबुल में भर्ती करवाया. इनमें से कुछ मारे गए हैं लेकिन, कई अब भी सक्रिय हैं. सुरक्षा एजेंसियों के लिए बुरहान वानी बड़ा सिरदर्द बन गया था. इस्लामिक स्टेट की तर्ज पर वह नए रंगरूटों की भर्ती के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता था. इंटरनेट पर अपलोड किए गए उसके जेहादी वीडियो से प्रभावित होकर कई कश्मीरी युवा हिंसा के रास्ते पर चल पड़े थे.
बुरहान वानी के बारे में कहा जाता था कि उसके शब्द जादू सा असर रखते हैं. जींस-टीशर्ट पहने और धाराप्रवाह कश्मीरी में नौजवानों से आतंक के रास्ते पर चलने की अपील करते बुरहान ने पुलिस की नींद उड़ा रखी थी. बताया जाता है कि 16 साल की उम्र से ही उसने इस काम के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू कर दिया था. लड़ाकू वेशभूषा में राइफलों के साथ उसकी तस्वीरें खूब वायरल हुईं. फेसबुक और वाट्सएप की आज व्यापक पहुंच है और एक स्मार्ट लड़का आपको जिहाद के लिए न्योता दे रहा हो तो जानकारों के मुताबिक कश्मीर जैसे इलाके में इसका काफी असर पड़ता है. आलम यह है कि आतंक का महिमामंडन करते उसके फेसबुक पेजों को ब्लॉक करवाने के लिए पुलिस को अदालत की शरण लेनी पड़ी.
एक तरह से देखा जाए तो बुरहान उस पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी का हिस्सा था जो कश्मीर में 2010 के आंदोलन के बाद आतंकवाद की तरफ मुड़ी है. उसके परिवार को जानने वाले लोग बताते हैं कि पढ़ाई और क्रिकेट में होशियार बुरहान तब आतंकवाद की तरफ मुड़ गया जब 2010 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने उसके बड़े भाई खालिद को बुरी तरह पीटा. बताते हैं कि 10 वीं के बोर्ड एक्जाम से दस दिन पहले ही बुरहान ने पढ़ाई छोड़ दी थी. एक अखबार से बात करते हुए मुजफ्फर अहमद वानी कहते हैं, ‘उसने किसी से कुछ नहीं कहा. वह रोज की तरह बाहर गया और फिर लौटकर नहीं आया.’
बुरहान के भाई खालिद की भी बीते साल मौत हो चुकी है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि खालिद मुठभेड़ में मारा गया. परिवार का आरोप है कि उसे सिर्फ इसलिए यातनाएं देकर मारा गया कि वह बुरहान का भाई था.
बुरहान वानी आतंकी हमलों में कभी कभार ही हिस्सा लेता था लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक कई हमले उसी के दिमाग की उपज थे. कुछ समय पहले सुरक्षा बलों पर किए गए एक हमले से पहले उसने आसपास के इलाके में घूम-घूमकर स्थानीय लोगों से कहा था कि वे किसी भी वर्दीवाले से ज्यादा से ज्यादा दूरी पर रहें. एजेंसियों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात से थी कि बुरहान जिन्हें बरगला रहा था वे पढ़े-लिखे युवा हैं. माना जा रहा था कि बुरहान वानी और उसके असर की कोई काट नहीं ढूंढी गई तो कश्मीर 90 के दशक वाले आतंक के दौर में लौट सकता है.
हालांकि वह चिंता अब भी खत्म नहीं हुई है. 90 के दशक में कश्मीर घाटी में जब अलगाववाद भड़का तो शुरुआती दौर के बाद इसकी कमान बाहर या दूसरे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान से आए लड़ाकों के हाथ में आ गई थी. हिजबुल जैसे संगठनों के ये लोग घाटी में अक्सर दूसरे नामों के साथ सक्रिय रहते थे और स्थानीय जनता इनसे कोई खास जुड़ाव महसूस नहीं करती थी. इसलिए इनके सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने पर भी कोई हलचल नहीं होती थी.
लेकिन बुरहान वानी ने यह समीकरण बदल दिया. उसके उभार के बाद जो कश्मीरी नौजवान पहले आतंकियों के खबरी या कूरियर का काम करने तक सीमित थे वे सीधे हथियार उठाने लगे. जानकारों के मुताबिक पहले ऐसे युवा ट्रेनिंग के लिए सीमा पार जाते थे लेकिन, बुरहान के आने के बाद यह स्थिति बदल गई. बताया जाता है कि इस समय घाटी में 60 से भी ज्यादा ऐसे युवा हैं जिनकी ट्रेनिंग यहीं हुई है.
स्थानीय समाज भी इन नौजवानों से सहानुभूति रखता है. यह भी एक वजह है कि कश्मीर घाटी में इन दिनों जहां भी कोई मुठभेड़ होती है वहां भारी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं और सुरक्षा बलों पर पथराव करने लगते हैं ताकि अलगाववादियों को बचकर भागने का मौका मिल जाए. कुछ समय से मुठभेड़ में मारे गए अलगाववादियों के जनाजे में भारी भी भीड़ उमड़ने लगी है. ऐसा कश्मीर में 90 के दशक में ही दिखता था. उस दौरान महिलाएं अलगाववादियों की तारीफ में पारंपरिक गीत गाती थीं, मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से आजादी और पाकिस्तान समर्थक संदेश गूंजते थे. बुरहान वानी की मौत के बाद भी कई मस्जिदों की लाउडस्पीकरों पर उसके ऑडियो संदेश बजाए गए.
यही वजह है कि बुरहान वानी की मौत के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं. एक अखबार से बातचीत में कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं कि बुरहान वानी ने जो प्रक्रिया शुरू की वह उसकी मौत के बाद और तेज हो सकती है. वे कहते हैं, ‘मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि उसकी मौत से युवाओं में बहुत गुस्सा पैदा होगा और आतंकी संगठनों को मिलने वाले स्थानीय रंगरूट बढ़ेंगे.’ उनके मुताबिक बुरहान एक प्रतीक के रूप में कश्मीरी युवाओं की नई पीढ़ी के लिए कुछ वैसा ही काम कर सकता है जैसा 1990 में मारे गए जेकेएलएफ के कमांडर इशफाक मजीद ने किया था. मजीद के इर्द-गिर्द बुनी गई बहादुरी की कहानियों ने बड़ी संख्या में कश्मीरी युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया था.
मुंबई लोकल में स्टंटबाजों को समझाने के लिए पुलिसवालों की अनोखी पहल
मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन में स्टंटबाजों को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल अब आरोपियों के हाथों में हथकड़ी पहनाने के बजाय उन्हें फूल दे रहे हैं। कोशिश है ट्रेन की छत पर सफर करने वाले, स्टंट दिखाने वालों को मार नहीं बल्कि प्यार से समझाया जाए।
मुंबई में सेंट्रल रेलवे के हाबर्र और मध्य रेल लाइन के स्टेशनों पर ये मुहिम शुरू की गई है। जहां पुलिस के जवान बन्दूक या राइफल लेकर स्टंट बाजों को डराने के बजाय हार पहना कर हाथ जोड़ कर स्वागत कर रहे हैं। ये पहल इसलिए ताकि नौजवान अपनी जान जोखिम में डाल कर ट्रेन के छत पर चढ़कर यात्रा ना करें।
शुक्रवार को ईद के मौके पर मुम्बई लोकल ट्रेन एक्सीडेंट में मरने और घायलों का आंकड़ा पूरे साल में सबसे अधिक रहा। उस दिन 15 लोगों की जान गयी और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे जिनमें से ज्यादातर मरनेवालों में नौजवान थे और स्टंट करते हुए गिरे। मुंबई की लोकल ट्रेनों में रोज़ाना 75 लाख मुसाफिर सफर करते हैं, औसतन हर दिन 10 मुसाफिर शहर की लाइफ लाइन में सफर के दौरान हादसों का शिकार होते हैं।
पीएम से मिलेंगे सीएम तो बजट की भी होगी बात
राष्ट्रपति भवन में 16 जुलाई को होने वाली चीफ मिनिस्टर काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी। इस मौके पर प्रदेश को बजट देने की बात भी मुख्यमंत्री रावत प्रधानमंत्री से कर सकते हैं। काउंसिल की बैठक में विभिन्न प्रदेशों को संसाधन के बंटवारे के संबंध में निर्णय लिए जाते हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत चीफ मिनिस्टर काउंसिल की बैठक में शिरकत करेंगे। इस मौके पर केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान सरीखे दूसरी राष्ट्र स्तर पर चल रही मुहिम के संबंध में राज्यों की स्थिति के बारे में चर्चा की जाएगी। उत्तराखंड का बजट वैसे तो बैठक के एजेंडा का हिस्सा नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि जब मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से मिलेंगे तो वर्तमान में प्रदेश के बजट के सबसे अहम मुद्दे पर चर्चा जरूर करेंगे।
आपदा प्रभावित प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड में चल रहीं विभिन्न परियोजनाओं का मसला भी उठाया जा सकता है। नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा स्वच्छता अभियान में प्रदेश की कई परियोजनाओं का फंड केंद्र में अटका हुआ है।
इससे काम शुरू नहीं हो पा रहा है और एनजीटी प्रदेश शासन पर लगातार दबाव बनाए हुए है। इस संबंध में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। माना जा रहा है कि जब आमने-सामने मुलाकात होगी तो मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री से बात कर सकते हैं।
सितंबर में राहुल गांधी आएंगे उत्तराखंड
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने बाजार, बूथ और ग्राम कमेटियों का गठन कर जिलावार कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली है। जिला सम्मेलनों की शुरुआत सोमवार को हल्द्वानी से हो जाएगी। जुलाई में आठ और अगस्त में 21 जिला सम्मेलन होने के बाद सितंबर में एक वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी शिरकत करेंगे।
यह जानकारी रविवार को कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय द्वारा बाजार, बूथ और ग्राम कमेटियों का गठन किया गया है। इनके लिए जिलावार सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हल्द्वानी के बाद 18 जुलाई को पुरोला, 19 जुलाई को उत्तरकाशी, 20 जुलाई को रुद्रप्रयाग, 26 जुलाई को कोटद्वार, 27 जुलाई को पौड़ी, 28 जुलाई को गजा, टिहरी गढ़वाल और 29 जुलाई को नई टिहरी में बाजार, बूथ एवं ग्राम कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
इन सम्मेलनों में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी, जिला/शहर प्रभारी व सह प्रभारी, विधानसभा प्रभारी, ब्लाक/नगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी और सभी अनुषांगिक संगठनों एवं प्रकोष्ठों के जिला/ब्लाक स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन ‘कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं के सम्मान का विनम्र प्रयास’ के रूप में किया जा रहा है।
उत्तराखंड के इस मंदिर में चार सदी बाद चली सामाजिक बदलाव की बयार
उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में सामाजिक बदलाव की बयार के बीच कालसी तहसील स्थित सिमोग मंदिर का चार सदी पुराना इतिहास बदल गया। जिस किसी ने भी इस मामले के बारे में सुना उसने यहां के लोगों की सोच को सलाम किया।
रविवार को मंदिर की देव पालकियों ने जैसे ही दलित गांव सराड़ी में प्रवेश किया, पूरा गांव देवताओं के उद्घोष से गूंज उठा। हजारों स्थानीय लोग इस अलौकिक पल के साक्षी बने।
गांव में एक साथ तीन-तीन देव पालकी देख गांव के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जातपात का भेदभाव भूलकर सभी ने देवताओं की स्तुति की और आशीर्वाद लिया। सराड़ी गांव में धार्मिक अनुष्ठान में खत विशायल, बाना और सिलगांव के लोग शामिल हुए।
रविवार को सिमोग मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद शिलगुर, विजट और चूड़ू महाराज की पालकी ने दोपहर 12 बजे दलित गांव सराड़ी के लिए प्रस्थान किया। पालकियों के साथ सैकड़ों पदयात्री भी चल रहे थे।
कोटा, डिमऊ, रुपऊ और मुंडवाण गांव में देव पालकियों की भव्य अगवानी की गई। छह किमी की पैदल दूरी नापने के बाद शाम करीब साढ़े तीन बजे देव पालकियां सराड़ी गांव की प्रधान मकतूला देवी के घर एक दिन प्रवास पर पहुंचीं।
बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोग देव दर्शन को जुटे। देव पालकियां देख गांव के दलित परिवार झूम उठे और मारे खुशी के उनकी आंकों से आंसू छलक गए। देर रात तक लोग देवता की स्तुति में झूमते रहे।
देहरादून पुलिस लाइन में दीक्षांत परेड, पुलिस का हिस्सा बने 327 दारोगा
सोमवार को पुलिस लाइन में उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, प्लाटून कमांडर, अभिसूचना की दीक्षांत परेड का आयोजन किया गया। जिसमें 327 दारोगा उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बन गए।
दीक्षांत समारोह के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा कूच के दौरान घायल होने के बाद मरे पुलिस के घोड़े की प्रतिमा का अनावरण करना था, लेकिन रावत ने प्रतिमा का लोकार्पण नहीं किया।
रावत ने कहा कि वह शक्तिमान के मामले पर राजनीति नहीं करना चाहते हैं। शक्तिमान की प्रतिमा पर अगली सरकार फैसला लेगी। यह प्रतिमा पुलिस लाइन में लगाई गई है।
यह कार्यक्रम सुबह करीब 08.40 बजे से शुरू हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और परेड का निरीक्षण किया। राज्य गृहमंत्री प्रीतम सिंह सहित पुलिस महानिदेशक एमए गणपति व अन्य पुलिस अधिकारी इस परेड में मौजूद रहे।
बताया गया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीएम हरीश रावत द्वारा पुरस्कार वितरण, ऑपरेशन स्माईल पत्रिका का विमोचन, पुलिस कार्य में जन सहभागिता संबंधी कार्ययोजनाओं का शुभारंभ किया।
जेल से रिहा होते ही यूपी में भाजपा का खेल बिगाड़ेंगे हार्दिक पटेल?
देशद्रोह का आरोप झेल रहे हार्दिक पटेल अब यूपी में बीजेपी का खेल बिगाड़ेंगे। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक हार्दिक पटेल अगले 6 महीने तक यूपी में रहकर कुर्मी समुदाय का समर्थन जुटाएंगे।
यूपी चुनाव में भी अब कम वक्त बचा है, अगले ही साल चुनाव होना है। अभी से सभी पार्टियां जोर शोर से वोटरों का ध्यान खींचने में लगी हैं। खासकर बीजेपी इस बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के लिए अभी से पूरा जोर झोंक रही है। ऐसे में मोदी और बीजेपी को निशाने पर रखने वाले हार्दिक पटेल यूपी में कुर्मियों का समर्थन जुटाकर बीजेपी के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। कहा जा रहा है कि आरक्षण आंदोलन के लिए हार्दिक यूपी में कुर्मियों की सभा को संबोधित करेंगे।
हार्दिक के यूपी में रहने के पीछे बड़ी वजह अदालत की शर्त है। दरअसल, अदालत ने उन्हें अगले 6 महीने तक गुजरात से बाहर रहने की शर्त पर जमानत दी है।
उधर गुजरात का पटेल और पट्टीदार समुदाय उनके जोरदार स्वागत की तैयारी कर चुका है। लोगों को मैसेज कर हार्दिक के स्वागत के लिए इकट्ठा होने की इत्तला कर दी गई है।
सूत्रों की मानें तो सूरत सेंट्रल जेल से बाहर आते ही जेल के बाहर मौजूद उनके समुदाय के लोग उनका जोरशोर से स्वागत करेंगे और ट्रक में बैठाकर शहर में घुमाएंगे। हार्दिक एक रात ही गुजरात में गुजार सकेंगे। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि हार्दिक यूपी के अलावा महाराष्ट्र भी जा सकते हैं।
रमन सरकार का फैसला, 5 लाख तक लोन पर किसानों को नहीं देना होगा ब्याज
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि राज्य में किसानों को पांच लाख रुपए तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में फर्जी चिटफंड कंपनियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कठोर कानून बनाया है।
सिंह ने कहा कि आकाशवाणी से प्रसारित मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ में कहा कि राज्य के किसानों को खेती के लिए पांच लाख रुपए तक ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ब्याज अनुदान की पात्रता के लिए प्रति हेक्टेयर, असिंचित भूमि पर 20 हजार रुपए और सिंचित भूमि पर 25 हजार रुपए की पूर्व प्रचलित ऋण सीमा को समाप्त कर दिया गया है।
सिंह ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार के ये दोनों फैसले किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएंगे। मुख्यमंत्री की रेडियो वार्ता राज्य में स्थित आकाशवाणी के सभी केंद्रों से एक साथ प्रसारित की गई।
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए बारिश के इस मौसम के मंगलमय होने की कामना की। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि विभाग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर सही समय पर बुवाई करें और खाद व बीज भी सही अनुपात में डालें।
उन्होंने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भी लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि इस योजना के बारे में जानने और खरीफ 2016 के लिए उसमें भागीदारी करने का यह सही समय है। किसान यह ध्यान रखें कि इस योजना में शामिल होने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है।
मुख्यमंत्री ने जनता को विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार फर्जी बैंकिंग और फर्जी चिटफंड कंपनियों से निपटने के लिए सतर्क है। इसके लिए राज्य सरकार ने कानून भी बनाया है, जिसके तहत उन वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और दोषियों को कड़ी सजा देने का प्रावधान है, जो आम नागरिकों को ठग कर उनका पैसा हड़प लेते हैं।
सिंह ने बताया कि इस कानून के तहत कलेक्टर को सूचना दिए बिना कोई भी कंपनी अपना वित्तीय कारोबार नहीं कर सकती। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी कंपनी में पैसा जमा करने के पहले अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लें।







