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ऐश्वर्या और रणबीर के यह बोल्ड फोटो मचा देंगे हलचल

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बॉलीवुड गलियारों में इन दिनों फिल्ममेकर करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को लेकर चर्चा तेज है। रणबीर कपूर के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन का रोमांस लगातार सुर्खियां बटोर रहा है।
फिल्म में फवाद खान और अनुष्का शर्मा भी नजर आएंगे। मगर सबसे ज्यादा चर्चा ऐश और रणबीर के रोमांस की है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि दोनों के बीच कुछ बोल्ड सीन भी फिल्माए गए हैं।
फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। इससे पहले रिलीज हुए दो सॉन्ग में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला है। शनिवार को सोशल मीडिया पर कुछ फोटोज वायरल हुए।
इनमें ऐश्वर्या राय बच्चन और रणबीर कपूर रोमांटिक अंदाज में नजर आ रहे हैं। यह फोटो देखकर फैन्स निश्चित रूप से हैरान हो जाएंगे। ऐश्वर्या एक अंतराल के बाद ऐसे बोल्ड अंदाज में नजर आ रही हैं।
धर्मा प्रोडक्शन और फॉक्स स्टूडियो के बैनर तले यह फिल्म इस दीवाली पर रिलीज होगी। फिलहाल आप इन फोटो का लुत्फ उठाइए।

पाकिस्तानी कलाकारों को भारत छोड़ने की धमकी

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मुंबई। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पाकिस्तानी कलाकारों को 48 घंटे के अंदर भारत छोड़ने की चेतावनी दी है। शिवसेना भी मनसे के सुर में सुर मिलाती दिख रही है।
कश्मीर के उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच मनसे की चित्रपट सेना के नेता अमेय खोपकर ने चेतावनी दी है कि यदि भारत में रह रहे पाकिस्तानी कलाकारों ने 48 घंटे के अंदर देश नहीं छोड़ा तो मनसे उन्हें अपने तरीके से देश छोड़ने को मजबूर कर देगी।
खोपकर का कहना है कि यदि पाकिस्तानी कलाकार भारत छोड़कर नहीं गए तो वह तो मार खाएंगे ही, यहां उनको काम देनेवाले निर्माता-निर्देशक भी मार खाएंगे। शिवसेना सांसद संजय राऊत ने भी कहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ किसी प्रकार का संबंध नहीं रखना चाहिए।
राऊत सवाल करते हैं कि हम पाकिस्तान के साथ बात करते ही क्यों हैं? हमें उनके साथ कूटनीतिक संबंध रखने ही नहीं चाहिए। एक राष्ट्र के रूप में भारत को पाकिस्तान के साथ अपने सभी संबंध तुरंत खत्म कर देने चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान एक देश नहीं, बल्कि आतंकवादियों का अड्डा है।
शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पहली बार पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध नहीं कर रही हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध अच्छे होने पर भी ये संगठन पाकिस्तानी कलाकारों एवं क्रिकेटरों का विरोध करते रहे हैं।
कुछ माह पहले शिवसेना ने पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली के शो का विरोध किया था। इस कारण मुंबई में उनका शो नहीं हो सका था। भारत की नागरिकता पा चुके पाकिस्तानी मूल के गायक अदनान सामी का भी अक्सर विरोध हुआ करता है।
शिवसेना के विरोध के कारण पाकिस्तान के साथ होनेवाले क्रिकेट मैच भी कई बार रद करने पड़े हैं। बता दें कि उड़ी में हुए आतंकी हमले में भारत के 18 जवान मारे गए थे। इस कारण पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है।

उरण में संदिग्धों के लिए घर-घर जाकर तलाशी

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मुंबई। मुंबई के निकट उरण कस्बे में गुरुवार को देखे गए चार-पांच हथियारबंद संदिग्ध लोगों की तलाश शुक्रवार को भी जारी रही। नवी मुंबई पुलिस ने दो प्रत्यक्षदर्शी छात्र-छात्राओं की निशानदेही पर दो संदिग्धों के स्केच भी जारी किए हैं।
मुंबई से करीब 47 किलोमीटर दूर उरण एवं उसके पड़ोसी कारंजा कस्बे में एनएसजी एवं महाराष्ट्र पुलिस के विशेष बल फोर्स वन की टीमें घर-घर जाकर तलाशी अभियान चलाती रहीं। नौसेना के सीकिंग हेलीकॉप्टर शुक्रवार को भी दोपहर तक आसमान में चक्कर लगाते देखे गए।
छोटे से कस्बे उरण में स्टेशन से स्कूल, कोर्ट एवं बाजार तक कदम-कदम पर हथियारबंद पुलिस बल सुरक्षा में तैनात दिखाई दिए। कस्बे के स्कूल आज भी बंद रहे। नौसेना ने गुरुवार से ही अपने जवानों को उच्चस्तरीय अलर्ट पर रखा है।
उरण, कारंजा सहित मुंबई में भी जगह-जगह नाकेबंदी कर वाहनों की तलाशी ली जा रही है। गुरुवार की सुबह 6.30 बजे उरण एजूकेशन सोसायटी स्कूल में पढ़नेवाले नौवीं कक्षा के एक छात्र ने सबसे पहले काले पठान सूट में एक हथियारबंद व्यक्ति को देखा था।
इसके करीब 20 मिनट बाद उसी स्कूल में पढ़नेवाली दसवीं की एक छात्रा ने भी काले पठान सूट में ही पीठ पर बैग लादे पांच हथियारबंद लोगों को देखा। लड़की के अनुसार इन व्यक्तियों ने नकाब बांध रखा था और स्कूल एवं ओएनजीसी का नाम ले रहे थे।
संदेह होने पर छात्रा ने व्यक्तियों के बारे में अपनी क्लास टीचर को सूचित किया। क्लास टीचर ने प्राचार्या को बताया।
बच्चों से सूचना मिलने के बाद ही नेवी ने उच्चस्तरीय अलर्ट जारी कर दिया था एवं तटीय सुरक्षा से संबंधित सभी एजेंसियों ने चौकसी बरतनी शुरू कर दी थी। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सतीश माथुर सभी एजेंसियों से बराबर संपर्क में रहे।
आज उन्हें अपनी रिपोर्ट राज्य के अतिरिक्त गृह सचिव के.पी.बख्शी को सौंपनी थी। हालांकि खबर लिखे जाने तक यह रिपोर्ट नहीं सौंपी गई थी।

लाखों मराठा प्रदर्शनकारियों का नेता नहीं ढूंढ पा रही फडणवीस सरकार

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महाराष्ट्र के सोलापुर समेत और भी कई हिस्सों में में सड़कों पर उतरे लाखों प्रदर्शनकारियों के नेता को फड़नवीस सरकार ढूंढ नहीं पा रही इसकी वजह से सरकार किसी से बात नहीं कर पा रही.
मराठा प्रदर्शनकारी सोलापुर के लगभग साढ़े छह एकड़ के होम ग्राउंड पर जमा हुए थे और इनकी गाड़ियों लगभग इतने ही बड़े पार्किंग में खड़ी की गई थीं.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस प्रदर्शन में लगभग 10 लाख लोगों ने भाग लिया, हालांकि आयोजक संख्या को इससे कहीं अधिक मानते हैं. प्रदर्शनकारियों का जुलूस लगभग 12 किलोमीटर लंबा था. इस प्रदर्शन का नेतृत्व पांच लड़कियां कर रही थीं जिन्होंने अपनीं मांगे जिलाधीश को सौंपीं.
मराठों की मुख्य मांग कोपरडीह गांव में मराठा लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के अभियुक्त के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज करने और त्वरित जांच की है. दूसरी मांग मराठा लोगों को अति पिछड़ा ओबीसी वर्ग में शामिल कर नौकरी और शिक्षा में आरक्षण देने की है. प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों में किसानों के लिए पेंशन और किसान आत्महत्याओं को रोकने के लिए नए प्रावधान बनाने को लेकर है.
मराठा समाज के लोग सभी राजनीतिक मतभेद भुलाकर इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं. शुक्रवार को अहमदनगर के आंदोलन में कांग्रेस नेता व विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखेपाटील भी शामिल हुए. इससे पहले नांदेड के आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, अकोला में गृह राज्य मंत्री डॉ. रणजीत पाटील के अलावा सरकार में शामिल कई मंत्री भी आंदोलन में भाग ले चुके हैं.
मराठा क्रांति आंदोलन का अगला पड़ाव आज नाशिक में होगा। उसके बाद पुणे और वाशिम में 25 सितंबर, बुलडाणा व नंदुरबार में 26 सितंबर, सांगली में 27 सितंबर, धुले में 28 सितंबर, बारामती में 29 सितंबर और सातारा में 3 अक्टूबर को आंदोलन की तारीख तय की गई है.

पतंजलि पिछड़े क्षेत्रों को भी अपनी इकाइयों से जोड़ें : गिरिराज

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केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपदनाइक और केंद्रीय लघु उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज किशोर पतंजलि योगपीठ पहुंचे और विभिन्न प्रकल्पों का भ्रमण कर आचार्य बालकृष्ण से कई विषयों पर चर्चा की। इस दौरान राज्यमंत्री गिरिराज किशोर ने अनुरोध किया कि वह अति पिछडे़ क्षेत्रों को भी अपनी इकाइयों से जोड़ें।
शुक्रवार सुबह पहुंचे दोनों मंत्रियों का पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपदनाइक ने देश-विदेशों में पैदा होने वाली आयुर्वेदिक व औषधीय जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में आचार्य बालकृष्ण के प्रयासों की सराहना की। उम्मीद जताई कि पतंजलि की आयुर्वेदिक अनुसंधानपरक योजनाओं के माध्यम से देश के करोड़ों लोगों को स्वस्थ बनाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय लघु उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज किशोर ने कहा कि आज देशभर में लोग पतंजलि अभियान को रोजगार, समृद्धि, स्वास्थ्य, प्रमाणिकता, राष्ट्रभक्ति, ऋषि संस्कृति आदि के पर्याय रूप में जान रहे हैं। उन्होंने आचार्य बालकृष्ण से देश के अति पिछड़े एवं उद्योग विहीन क्षेत्रों को पतंजलि की लघु स्वावलंबन इकाइयों से जोड़ने और वहां के गरीब लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि बाबा रामदेव के मार्गदर्शन में देश के किसानों को वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों, फूलों, फलों के उत्पादन से जोड़ने के लिए पतंजलि अभियान चलाएगी। इससे स्थानीय नागरिकों की गरीबी, तंगहाली दूर होगी, आर्थिक, आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध एवं स्वस्थ भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।

आसान नहीं है 'सिंधु जल समझौता' तोड़ना, चीन से है भारत को डर

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जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आतंकवादी हमले और उसके बाद 18 जवानों के शहीद होने के बाद से भारत में रोष है। देश में पाकिस्तान को सबक सिखाने और उचित कार्रवाई करने की मांग उठी रही है। इसी बीच पाकिस्तान से हुए ‘सिंधु जल समझौता’ को तोड़ने की भी मांग शुरू हो गई है।
भारत की तरफ से ‘सिंधु जल समझौता’ को तोड़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन, यह इतना आसान भी नहीं है। भारत की तरफ से उठाया गया कोई भी कदम चीन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ जल बंटवारे की व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

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भारत ने पाकिस्तान के अलावा चीन से भी एक समझौता किया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, चीन ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी तट राज्य और भारत निचला नदी तट राज्य है। ऐसी स्थिति में भारत चीन के साथ जलसमझौता करना चाहता है। यदि भारत ‘सिंधु जल समझौता’ के तहत निचला नदी तट राज्य पाकिस्तान से समझौता तोड़ता है तो उसे चीन के साथ समझौते में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
ऊपरी तट नदी राज्य में स्थित चीन हाइड्रोलॉजिकल सूचनाएं रोकने के अलावा निचले तट नदी राज्य में नदी के बहाव में अवरोध खड़ा कर सकता है। बताते चलें कि इस मुद्दे पर चीन पहले भी ज्यादा भरोसेमंद नहीं रहा है और हाइड्रोप्रोजक्ट्स की जानकारी देने से इनकार कर चुका है।

वहीं, दूसरी ओर देखें तो 1960 में हुए सिंधु जल समझौते में वर्ल्ड बैंक मध्यस्त की भूमिका में थी। ऐसे में वह इसमें तीसरा पक्ष है। वहीं, यह भी माना जाता है कि इस समझौते की वजह से ही दूसरी नदी प्रोजेक्ट्स पर बातचीत हो रही है। इसकी मदद से भारत को जम्मू-कश्मीर में बगलिहार डैम के लिए हरी झंडी मिल चुकी है।
बताया जाता है कि सिंधु जल समझौते के आधार पर किशनगंगा प्रॉजेक्ट में भारत को पॉवर जेनरेशन के लिए पानी डायवर्ट करने का अधिकार मिला था। यह मामला हेग की इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में चला था और सिंधु जल समझौते के मार्फत ही यह फैसला भारत के पक्ष में आया था।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में जबरदस्त बारिश, 13 लोगों की मौत

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हैदराबाद। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जबरदस्त बारिश से 13 लोगों की जान चली गई है। आंध्रप्रदेश में बारिश की वजह से आज चार और मौतें होने की खबर है। इसके बाद मरने वालों की संख्या नौ हो गई है। गुंटूर में छह और विशाखापत्तनम में तीन लोगों की मौत हुई है। पड़ोसी तेलंगाना के मेडक जिले में बारिश के चलते चार व्यक्तियों की मौत हो गई जबकि छह अन्य जख्मी हो गए। कई जगहों पर सड़कों के ध्वस्त होने की भी खबर है।
आंध्रप्रदेश में गुंटूर और कृष्ण नदी के उपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अधिक बारिश होने की वजह से केएल राव सागर जलाशय तकरीबन पूरा भर गया है। इसकी कुल क्षमता 45.77 टीएमसी फीट की है और इसमें अभी 30 टीएमसी फीट पानी है। केएल राव सागर जलाशय से 1.51 क्यूसेक बाढ़ का पानी छोड़ा जा रहा है जो विजयवाड़ा में कृष्णा नदी पर बने प्रकाशम बांध में पहुंच रहा है। गुंटूर और सिकंदराबाद के बीच लगातार दूसरे दिन भी रेल सेवा स्थागित रही क्योंकि छोटी नदियों के अधिक भर जाने की वजह से सत्तेनपल्ली के पास दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी की पटरियां बह गई हैं।
हैदराबाद में लगातार जारी बारिश के बाद तेंलगाना सरकार ने आईटी कंपनियों के कर्मचारियों को घर से ही काम करने की सलाह दी है। सरकार ने कुछ इलाकों में बचाव अभियान के लिए सेना की मदद मांगी है। राज्य सरकार ने ग्रेटर हैदराबाद इलाके में दो दिन के लिए शैक्षिक संस्थान में छुट्टी का ऐलान किया हुआ है।

गरीव सवर्णों को आरक्षण गुजरात सरकार के गले की हड्डी बना

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गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के मसले पर गुजरात सरकार बुरी तरह से उलझती दिख रही है. वह न तो इससे पीछे हट पा रही है और न ही आगे बढ़ पा रही है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सरकार ने शुक्रवार को पहले यह नोटिफिकेशन जारी किया कि गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने वाले अध्यादेश को लागू नहीं किया जाएगा. लेकिन, कुछ ही घंटे भीतर यह नोटिफिकेशन वापस ले लिया गया. देर रात को सरकार का बयान आया कि उसने पुनर्विचार करते हुए दिन में जारी नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है. यह अध्यादेश एक मई को आया था. इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए शिक्षा और नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था. माना जा रहा था कि यह कवायद राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण की मांग कर रहे पाटीदार समुदाय को शांत करने के लिए की है.
हालांकि, अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. गुजरात सरकार ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसे सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ के सुपुर्द कर दिया गया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि अध्यादेश पर रोक के चलते इसके तहत आठ अगस्त तक शैक्षणिक संस्थानों में हुए दाखिलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. चार अगस्त को गुजरात हाईकोर्ट ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने वाले अध्यादेश को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि इससे आरक्षण की अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन हो रहा है. गुजरात में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा व नौकरियों में 49 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू है.
पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने सरकार के पहले फैसले को तीन करोड़ सवर्णों को मूर्ख बनाने की चाल बताया है. उन्होंने कहा कि भाजपा को आने वाले चुनाव में इसका जवाब मिलेगा. हार्दिक पटेल ने अध्यादेश का पहले भी विरोध किया था. उधर कांग्रेस नेता शंकर सिंह वाघेला ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि सरकार ने संवैधानिक जटिलताओं को जानने के बावजूद जानबूझकर लोगों को धोखा दिया है.

PAK का आतंकी चेहरा बेनकाब, कयूम ने कबूला- मिली थी फौजी ट्रेनिंग

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जम्मू-कश्मीर के अखनूर में बॉर्डर के पास से घुसपैठ की कोशिश करते पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल कयूम ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं. कयूम ने माना है कि उसे पाकिस्तान में आर्मी ट्रेनिंग दी गई थी, इसके अलावा उसने लश्कर के लिए फंड जुटाने की बात भी स्वीकार की है. कयूम से मिली जानकारी से आतंकवाद को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के नापाक प्लान का खुलासा हुआ है.
अखनूर में पकड़े गए अब्दुल कयूम ने स्वीकार किया है कि वह लश्कर के कैंप में भी ट्रेनिंग ले चुका है. अब्दुल कयूम की उम्र 30 साल है.
बीएसएफ ने भारत में घुसपैठ करते वक्त शुक्रवार को इंटरनेशनल बॉर्डर से कयूम को गिरफ्तार किया था. अलार्म बजने के बाद उसके चार अन्य साथी भाग खड़े हुए. सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही बीएसएफ के जवानों की नजर पड़ी, उसको घेर लिया गया. लेकिन फेन्स पर आतंकी को बिजली का करंट लग गया जिससे वह बेहोश हो गया. इलाज कराने के बाद अब उससे पूछताछ हो रही है. पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए है.
गिरफ्त में आए आतंकी ने बीएसएफ को बताया कि वह पाकिस्तान के सियालकोट का रहने वाला है. पाकिस्तान के शेखुपुरा जिले के मुरीदके में उसकी ट्रेनिंग हुई है. गौरतलब है कि जमात-उत-दावा का ट्रेनिंग हेडक्वार्टर मुरीदके में ही है. आतंकी से बीएसएफ की पूछताछ जारी है.
आतंकी ने लश्कर के लिए 50 लाख रुपये जुटाने का दावा किया है. लश्कर के लिए वह प्रचार भी करता था. उसने बताया कि वह आतंकी हाफिज सईद और सलाउद्दीन को भी जानता है. इसके अलावा कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को भी जानता है. आतंकी ने बताया कि उसे 2004 में पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई थी. आतंकी से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह अपने गुनाहों को स्वीकार करता दिख रहा है.
जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना के ऊपर हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद आर्मी ने बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी है. कई जगहों पर घुसपैठ की कोशिशों को भी सेना ने नाकाम किया है. उरी में घुसपैठ की कोशिश कर रहे 15 आतंकियों पर सेना ने फायरिंग की थी जिसमें से 10 आंतकी मारे गए थे बाकी 5-6 आतंकी वापस भाग गए थे. जम्मू-कश्मीर के पुंछ में अल्लाहपीर इलाके में रविवार को सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में 7 आतंकियों को मार गिराया गया था. उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं. वहीं, एलओसी से लगे कुपवाड़ा में भी मुठभेड़ में तीन आतंकी ढेर हो गए थे.

मनमोहन सिंह ने पूछा लाभ का पद तो नहीं है शिक्षण कार्य, पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाएंगे

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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जल्द ही पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रों को अर्थशास्त्र पढ़ाते हुए नजर आएंगे। दरअसल, मनमोहन सिंह ने लाभ के पद से संबंधित संसदीय समिति से सवाल किया था कि क्या शिक्षण का काम लाभ का पद, तो नहीं माना जाता है।
वह जानना चाह रहे थे कि उनके आर्थिक लाभ वाले शिक्षक के पद को धारण करने से कहीं सासंद के पद से उन्हें इस्तीफा तो नहीं देना होगा। इस पर संबंधित संसदीय समिति ने गुरुवार को फैसला किया कि सांसद रहते हुए अस्थायी शिक्षण से संबंधित कार्यों को लाभ के पद के दायरे में नहीं माना जा सकता।
पैनल के प्रमुख भाजपा सांसद सत्य पाल सिंह ने कहा कि हमने इस बारे में स्थिति साफ कर दी है। मनमोहन सिंह के द्वारा किए जाने वाले शिक्षण के काम को लाभ के पद के दायरे में नहीं लाया जाएगा।
पैनल ने इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और कानून मंत्रालय से राय मांगी थी। वहां से लिखित प्रतिक्रिया मिलने के बाद में यह फैसला कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि मनमोहन सिंह को डेली अलाउंस के रूप में 5000 रुपए दिए जाएंगे, जो कि फिक्स्ड सैलेरी नहीं है।
उनका पद भी स्थाई नहीं है इसलिए यह काम लाभ के पद के दायरे में नहीं आएगा। गौरतलब है कि पंजाब यूनिवर्सिटी ने इस साल अप्रैल में घोषणा की थी कि पूर्व पीएम मनमोहन यूनिवर्सिटी में खाली पड़े जवाहर लाल नेहरू चेयर को हेड करेंगे। सिंह ने यूनिवर्सिटी की इस पेशकश को स्वीकार भी कर लिया था।
पूर्व पीएम सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में 1954 में एमए किया था और 1957 में बतौर प्रवक्ता अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 1963 में यहीं प्रोफेसर बने। आरबीआई के गवर्नर और दस साल तक देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब वह फिर से पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों को पढाएंगे।