कोल्हापुर : महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में पिछले पांच-छह दिनों से हो रही लगातार बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। भारी बारिश की वजह से पंचगंगा समेत ज़िले की लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
पंचगंगा नदी में ख़तरे से आगाह करने का निशान 39 फीट पर है, जबकि ख़तरे का निशान 43 फीट पर, लेकिन हफ्ते भर से हो रही बारिश से फिलहाल नदी 43 फीट 5 इंच के निशान को पार कर चुकी है। नदी के आसपास बने कई मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। जिले में पानी 72 बराज के ऊपर से बह रहा है।
कोल्हापुर से कोंकण जाने वाली सभी सड़कें भी पानी में डूब गई हैं। कोल्हापुर-रत्नागिरी, कोल्हापुर-गगणबावडा हाइवे पर पानी भरने से इन सड़कों को बंद करना पड़ा है। कोल्हापुर की 25 छोटी बड़ी सड़कें पानी में डूब गई हैं। कई निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया गया है। पंचगंगा नदी के पास स्थित सारे गांवों को हाइअलर्ट पर रखा गया है।
कोल्हापुर जिला प्रशासन ने हालात से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीम बुलाई है, जिसमें 40 जवान शामिल हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर अगले 48 घंटों में बारिश की रफ्तार नहीं थमीं तो लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
कोल्हापुर में बाढ़ से जनजीवन अस्तव्यस्त, नदियां खतरे के निशान से ऊपर
तरकारी पर तक़रार! महाराष्ट्र में सब्जियों-फलों के दाम आसमान पर
पूरे महाराष्ट्र में सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। थोक कारोबारी किसान से ग्राहक के बीच अपनी भूमिका खत्म करने के सरकारी फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में मंडी में सब्जियों की भारी किल्लत हो रही है।
मंगलवार को कृषि राज्य मंत्री सदाभाऊ खोत मंत्रालय छोड़ सीधे दादर मंडी पहुंचे। वे अपने साथ 300 ट्रकों में किसानों का काफिला लेकर ग्राहकों को सीधा सब्ज़ी बेचने पहुंचे। काराबोरियों की हड़ताल के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘आज मुझे बहुत खुशी है कि किसान सीधे ग्राहक के दरवाजे पर जाकर सामान बेच रहा है, ये ऐतिहासिक फैसला है। हम कारोबारियों की भी बात सुनेंगे, उन्हें जो दिक्कत है उसे दूर करेंगे, लेकिन अगर ग्राहकों या किसानों को तकलीफ पहुंचाने की कोशिश की गई तो फिर हम कड़ी कार्रवाई से नहीं हिचकेंगे।’
सरकार की पहल से किसान खुश हैं, उन्हें उत्पाद के दाम करीब 10 फीसद ज्यादा मिल रहे हैं। जुन्नर से दादर मंडी पहुंचे किसान श्रीराम गाडवे ने कहा, ‘सरकार की पहल से हम ग्राहक को दस फीसदी सस्ता सामान बेच सकते हैं। पहले हमें चेक नाकों पर बहुत तकलीफ होती थी, हमारा बहुत नुकसान होता था, लेकिन इस फैसले के बाद हमें नाकों पर कोई परेशानी नहीं हो रही है।
कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने फल-सब्जियों को बाजार समितियों के चंगुल से आज़ाद कर दिया, जिसका मतलब यह है कि किसान और ग्राहक के बीच से बिचौलिया गायब हो गया। अब मंडी में किसान सीधे माल बेच सकता है, राज्य के 4000 कारोबारी इस फैसले के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।
कारोबारियों की हड़ताल के कारण रोज़ मंडी में आने वाले 600 ट्रकों की तादाद बमुश्किल 100 रह गई है। नतीजा एशिया की सबसे बड़ी वाशी थोकमंडी में ताला लगा है। एपीएमसी के संचालक अशोक वालुंज ने कहा, ‘शासन के गलत फैसले की वजह से सामुदायिक छुट्टी पर गए हैं, बाहर के लोगों के लिए कानून नहीं, हमारे ऊपर कानून है। सरकार का कहना है कि ‘किसान टू ग्राहक फ्री ट्रेड’ किया है, किसान कहीं से भी माल लाकर कहीं बेच सकता है, लेकिन हम लोगों को बंधन रहेगा हम लोगों ने करोड़ों का निवेश किया है उसका क्या, 4 पीढ़ी से कर रहे हैं, हमारा क्या?’
वहीं एपीएमसी में फलों के कारोबारी मनोहर तोतलानी ने कहा, ‘सरकार का रवैया दादागिरी वाला है, जो एपीएमसी के बाहर धंधा करेगा, वो नियम मुक्त हम नियम में? हमारी मांग है कि हमें भी नियम मुक्त कर दो, आम आदमी को तकलीफ हो रही है। किसानों को यहां सभी सुविधाएं हैं, नीलाम गृह बना है। माल नहीं आने से महंगा हुआ है।’
इस हड़ताल की वजह से मुंबई के बाज़ारों में पत्ता गोभी 50 से 90 रुपये तक जा पहुंची है। फूल गोभी 70 से 120 रुपये हो गई, टमाटर 15 रुपये से सीधे 80 तक जा पहुंचा है। बैंगन भी 50 रुपये से 90 रुपये तक जा पहुंचा है। बीन्स 135 रुपये किलो था, जो अब 200 रुपये में बिक रहा है। आलू 20 रुपये की बजाय अब 30 में बिकने लगा है।
इससे लोगों का बजट बिगड़ रहा है, मंडी में खरीदारी करने आई कोमल ने कहा सब्जी का तिगुना दाम है, कुछ भी नहीं ले सकते आलू 40 रुपये, कांदा 30 रुपये है। वहीं भावेश का कहना था, ‘बहुत थोड़ा लिया है, मैं कोपरखैरणे से सानपाडा आया हूं, यहां भी सब्ज़ी अच्छी नहीं है, टमाटर 80 रुपये है, क्वॉलिटी भी अच्छी नहीं है।’
महाराष्ट्र में 1977 में बाजार समितियां बनी थीं, जिससे करीब एक लाख लोग सीधे वहीं 3-4 लाख परोक्ष रूप से रोज़ी कमाते हैं। व्यापारी कहते हैं कि थोक बाजार में 30 फीसदी उपज सीधे आती है, 70 प्रतिशत खरीदकर मंगाई जाती है ऐसे में किसान या ग्राहकों को लूटने के आरोप बेबुनियाद हैं।
एपीएमसी में हर साल लगभग 15000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जिस पर ज्यादातर एनसीपी को समर्थन देने वाले कारोबारियों का नियंत्रण है। वैसे यह भी सही है कि फल-सब्जी को डीलिस्टिंग करने का फैसला यूपीए सरकार के वक्त ही हुआ था, जिसे बीजेपी अपने शासन वाले राज्यों में ग्राहक और किसानों को फायदा पहुंचाने के नाम लागू कर रही है। ऐसे में एक बात याद रखने वाली है कि सब्जी का सियासी भाव सरकारें उखाड़ फेंकने की ताकत रखती हैं।
‘शक्तिमान’ की प्रतिमा पर उत्तराखंड में सियासत गरमाई
चार महीने पहले उत्तराखंड में सियासी तूफान का सबब बने राज्य पुलिस के घोड़े ‘शक्तिमान’ की राज्य विधानसभा के पास रिस्पना पुल पर प्रतिमा लगाने और फिर रातोंरात हटा देने से प्रदेश का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। उधर रिस्पना पुल पर लगी प्रतिमा पर हुई तीव्र प्रतिक्रिया के बाद पुलिस लाइंस में लगी घोडे की एक अन्य प्रतिमा का अनावरण करने से मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इनकार कर दिया है।
उत्तराखंड विधानसभा के पास रिस्पना पुल चौराहे पर दो दिन पहले लगाई गई शक्तिमान की मूर्ति हटा ली गई। माना जा रहा है कि ड्यूटी पर घायल होने के कारण मौत का शिकार हुए शक्तिमान की प्रतिमा लगाने के बाद सोशल मीडिया सहित जनता में हुई तीव्र प्रतिक्रिया की वजह से उसे हटा लिया गया। घोड़े की प्रतिमा के विरोध के कारण उसे लगाने और रातोंरात हटाने वाली संस्था मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने इसे हटाने का कोई कारण भी नहीं बताया है। इस बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि घोडेÞ की मूर्ति परीक्षण के लिए लगाई गई थी। इसमें रह गई कमियों को दूर कर इसे फिर से स्थापित कर दिया जाएगा। रिस्पना पुल चौराहे से शक्तिमान की मूर्ति हटाने को लेकर विपक्षी भाजपा ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने शक्तिमान की मूर्ति भाजपा को बदनाम करने के लिए लगाई थी। अब वह यह भी नहीं बता रही कि रातोंरात वह आखिर कहां चली गई। भट्ट ने घोड़े की मूर्ति लगाने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार केवल घोडेÞ पर सियासत करना चाहती है वरना वह इसकी जगह राज्य आंदोलन के दौरान प्राण गंवाने वाले आंदोलनकारियों की मूर्तियां लगाती। शक्तिमान की एक और प्रतिमा देहरादून पुलिस लाइंस में स्थापित की गई है। लेकिन रिस्पना पुल पर लगी प्रतिमा पर हुई प्रतिक्रिया को देखते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसका अनावरण करने से इनकार कर दिया है। जबकि पुलिस सूत्रों ने कहा कि पुलिस लाइंस में लगी प्रतिमा वहीं स्थापित रहेगी। उसे नहीं हटाया जाएगा।
प्रदेश के गृह मंत्री प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने शक्तिमान की मूर्ति लगाने का फैसला किया था लेकिन अब मुख्यमंत्री रावत ने उसके अनावरण का मसला अगली चुनी हुई सरकार पर छोड़ने का फैसला किया है। गत 14 मार्च को भाजपा की राजनीतिक रैली के दौरान पैर टूटने से घायल हुए शक्तिमान को लेकर प्रदेश में सियासी तूफान उठ गया था। राज्य पुलिस ने इस संबंध में मसूरी से भाजपा विधायक गणेश जोशी और दो अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी की थी। घायल शक्तिमान का उपचार कराया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। एक महीने से ज्यादा समय तक चोट से जूझने के बाद 20 अप्रैल को उसने दम तोड़ दिया।
'आप' के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी बेटी को बनाया एक बड़ी योजना का मुखिया
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के मंत्रियों पर फर्जी डिग्री से लेकर महिलाओं पर छेड़खानी तक के आरोप लगते आ रहे हैं। इस बीच केजरीवाल के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने अपनी बेटी को अपने विभाग में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सत्येंद्र जैन ने दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी मोहल्ला क्लिनिक योजना का मुखिया बनाया है। इतना ही नहीं उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का हेल्थ सेक्रेटरी कम मिशन डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी दी गई है।
सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को अपने इस नए काम को सुचारु ढंग से चलाने के लिए दिल्ली सचिवालय की नवीं मंजिल पर एक कमरा दिया है जिसमें उनकी पूरी टीम बैठेगी।
सौम्या की इस टीम में कुल सात लोग हैं जिसका नेतृत्व एक दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के एक डाक्टर कर रहे हैं। सचिवालय में सौम्या के विभाग को आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक मैनेजमेंट सेंटर का नाम दिया गया है।
अजीब बात ये है कि सौम्या की टीम में काम करने वाले ज्यादातर लोग वैतनिक हैं जबकि खुद सौम्या अपनी नई जिम्मेदारी के लिए सरकार से एक भी पैसा मेहनताने के तौर पर नहीं ले रही हैं।
जब सत्येंद्र जैन से इस बारे में पूछा गया कि आखिर क्यों उन्होंने अपनी बेटी को ही इस जिम्मेदारी के लिए चुना तो उनका जवाब था कि मेरी बेटी एक प्रमाणित आर्किटेक है और उसने ही मोहल्ला क्लिनिक की डिजाइन भी बनाई है।
अपने फैसले पर सफाई देते हुए सत्येंद्र जैन आगे कहते हैं कि दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक के उद्भव और विकास पर मेरी बेटी एक किताब भी लिख रही है। वो शुरु से ही इस प्रोजेक्ट से जुड़ी रही है और अब उसने इसे पूरी तरह अपना गोल बनाने का फैसला किया है।
स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि उनकी बेटी मोहल्ला क्लिनिक प्रोजेक्ट के पूरा होने तक इससे जुड़ी रहेगी। हालांकि इस काम के लिए उसे सरकार की ओर से एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
बता दें कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य राजधानी में एक हजार मोहल्ला क्लिनिक की स्थापना करना है जिसमें से अब तक केवल 100 मोहल्ला क्लिनिकों की ही स्थापना की गई है।
दिल्ली सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद गरीबों को कम पैसे पर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर के आस-पास ही मुहैया कराना है।
CBSE नए अध्यक्ष के नाम पर स्मृति ईरानी के प्रस्ताव को मोदी ने ठुकराया
स्मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्रालय हटाए जाने के एक हफ्ते बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीबीएसई के नए अध्यक्ष के चुनाव में उनकी पसंद को ठुकरा दिया है। इसके अलावा चयन की सभी प्रक्रिया से उन्हें हटा भी दिया गया है।
पीएम मोदी जो कि कैबिनेट की चयन समिति के अध्यक्ष हैं, ने सीबीएसई के अगले अध्यक्ष के तौर पर डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह के नाम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार मंगलवार को एचआरडी मंत्रालय को एक पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें कहा गया है कि सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत तमाम पदों पर होने वाली भर्ती संबंधित नियम को फिलहाल लंबित किया जाता है।
गौरतलब हो कि CBSE दिसंबर 2014 से बिना अध्यक्ष के है। इस पोस्ट के लिए जिस अधिकारी की तलाश है वह संयुक्त सचिव रैंक का होना चाहिए। रिक्रूटमेंट नियम के मुताबिक इस पद के लिए वही अधिकारी योग्य होगा जिसके पास शिक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में तीन साल का अनुभव हो।
अभी तक की चयन प्रक्रिया में पैनल ने तीन नाम पर चर्चा की है। इसमें डॉ. सर्वेंद्र का नाम स्मृति ईरानी की पसंदीदा सूची में था। इसकी जानकारी 15 जून को भेजी की चिट्ठी में भी दी गई थी। वर्तमान में सर्वेंद्र स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग के डायरेक्टर हैं।
यह दूसरा मौका है जब स्मृति ईरानी के पसंदीदा अधिकारी के नाम को ठुकरा दिया गया है। इससे पहले एसीसी ने अगस्त 2015 में भी सतबीर बेदी के नाम को भी ठुकरा दिया था।
अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल, राष्ट्रपति शासन रद्द
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने आज अहम फैसला सुनाते हुए केंद्र की बीजेपी सरकार को बड़ा झटका दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल करते हुए राष्ट्रपति शासन रद्द कर दिया। बता दें कि 26 जनवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था। यहां बता दें कि इसी साल मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रेजिडेंट रूल को हटा दिया था।
यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी सरकार को वापस किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम घड़ी की सुइयां वापस कर सकते हैं। कोर्ट ने राज्य में 15 दिसंबर 2015 वाली स्थिति बरकार रखने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्वनर को विधानसभा बुलाने का अधिकार नहीं था। यह गैरकानूनी था। 15 दिसंबर 2015 के बाद से सारे एक्शन रद्द कर दिए गए हैं।
हालांकि जस्टिस जे एस खेहर, जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस मदन लोकुर ने अलग अलग फैसले सुनाए। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह स्वत संज्ञान लेकर विधानसभा का सत्र बुला सकता है या नहीं।
नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार इस फैसले पर बहुत खुश है। तुकी ने NDTV से कहा- कोर्ट में हम लोगों की जीत हुई है। यह पूछे जाने पर कि विधायकों की शिकायत थी कि राहुल गांधी मुलाकात का वक्त नहीं देते और वे अलग थलग महसूस करते हैं, उन्होंने कहा- राहुल गांधी जनता के नेता हैं और वह उनसे भी मिल थे। उन्होंने गलत बोला था।
दरअसल अरुणाचल प्रदेश के स्पीकर नबम रेबिया ने सुप्रीम कोर्ट में ईटानगर हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें 9 दिसंबर को राज्यपाल जेपी राजखोआ के विधानसभा के सत्र को एक महीने पहले 16 दिसंबर को ही बुलाने का फैसले को सही ठहराया था।
इसके बाद 26 जनवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया और कांग्रेस की नबाम तुकी वाली सरकार परेशानी में आ गई क्योंकि 21 विधायक बागी हो गए। इससे कांग्रेस के 47 में से 26 विधायक रह गए। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को दूसरी सरकार बनने से रोकने की तुकी की याचिका नामंजूर कर दी। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही बागी हुए कालीखो ने 20 बागी विधायकों और 11 बीजेपी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की शपथ ले ली और सरकार बना ली थी।
बुरहान के बाद महमूद गजनवी को बनाया गया हिजबुल मुजाहिदीन का नया कमांडर
श्रीनगर: बुरहान वानी के मारे जाने के बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने कश्मीर में अपने कैडर को एकजुट रखने के लिए महमूद गजनवी को अपना ऑपरेशनल कमांडर नियुक्त किया है. हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के मुजफ्फराबाद में मंगलवार को हिज्ब की कमांड काउंसिल की बैठक बुलाई थी.
बैठक में बुरहान को श्रद्धांजलि देते हुए कमांडरों ने सर्वसम्मति से कश्मीर में महमूद गजनवी को ऑपरेशनल कमांडर नियुक्त करने का फैसला किया. सलाहुद्दीन ने फिलहाल पाक अधिकृत कश्मीर को अपना ठिकाना बना रखा है. बताया जा रहा है कि बुरहान सलाहुदीन का खासमखास था. मंगलवार को बुरहान के साथ उसके पोस्टर सड़कों पर लगे नज़र आए.
सैयद सलाहुद्दीन ने कहा, “हम बुरहान के बलिदान को बर्बाद करने की अनुमति नहीं देंगे. बुरहान के इस मिशन को उसके निष्कर्ष तक ले जाया जाएगा.’’ उन्होंने कहा, “हिज्ब 13 जुलाई को पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में एक कार्यक्रम का आय़ोजन करेगा. इसमें संयुक्त जिहाद परिषद और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता भी भाग लेंगे.”
हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के दौरान अबतक हिंसा में 33 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करीब 1400 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई गंभीर रूप से घायल हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर की हिंसा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. इसके साथ ही उन्होंने घाटी में शांति बनाए रखने की अपील की. पीएम ने भी घाटी में हिंसा को लेकर चिंता जताई है.
इस बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शाम को अपने एक वीडियो संबोधन में कश्मीरवासियों से हिंसा त्याग कर राज्य में अमन-चैन बहाल करने में मदद मांगी.
मुफ्ती ने कहा, “जैसे ही मैंने बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर सुनी विरोध प्रदर्शन का अनुमान लगाते हुए मैंने कर्फ्यू लगा दिया ताकि किसी और के जीवन को हम बचा सकें. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन्होंने अपनों को खोया है हम उनके साथ हैं और इस मामले की पूरी जांच होगी.’’
भारत के खिलाफ लड़ने वाले आतंकियों के बच्चों के लिए PAK के कॉलेजों में कोटा
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दोहरे रवैये का एक बार फिर पर्दाफाश हो गया है. एक समाचार पत्र को मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के कॉलेजों में भारत विरोधी आतंकवादियों के बच्चों को कोटा दिया जाएगा. इनमें हिजबुल मुजाहिदीन और कश्मीर में हिंसक हमलों में शामिल अन्य अलगाववादी संगठनों के नेता शामिल हैं.
पाकिस्तान ने यह कोटा उन आतंकियों के बच्चों को दिया है जो भारत के खिलाफ लड़ते हुए मर गए. उच्च अधिकारियों के मुताबिक इस योजना को लागू करवाने में हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सलाहुद्दीन का सबसे बड़ा योगदान है. इसके जरिए जम्मू-कश्मीर में लड़ रहे आतंकियों के परिजनों को स्कॉलरशिप दी जाएगी
सूत्रों के मुताबिक हिजबुल चीफ कमांडर सलाहुद्दीन यह सुझाव देता है कि किसे मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज में दाखिला देना चाहिए. इतना ही नहीं वह अपने सुझाव पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जरिए देता है.
पाकिस्तान ने यह योजना बनाई है कि जिन कश्मीरी किशोरों के रिश्ते आतंकवादियों और अलगाववादियों से हैं, जो भारतीय सेना के खिलाफ हैं, उनके लिए कॉलेजों में सीट आरक्षित की जाएगी.
भारतीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक इन बच्चों को पाकिस्तान में एमबीबीएस, बीडीएस, इंजीनियरिंग, ग्रैजुएशन, पोस्ट ग्रैजुएशन और अन्य सरकारी इंस्टीट्यूट्स में दाखिला दिया जाता है.
पाकिस्तानी अथॉरिटीज ने इन कश्मीरी छात्रों के लिए कोटा तीन कैटेगरी में बांटा है. इनमें से पहले वे हैं जो उनके मुताबिक शहीदों (जिन आतंकियों को भारतीय सेना ने मार गिराया) के बच्चे हैं, दूसरे एक्टिव मुजाहिद्दीन और फिर अलगाववादियों के बच्चे.
समाचार पत्र की इनवेस्टिगेशन टीम के पास कश्मीरी छात्रों की वह पूरी लिस्ट है जिनके नाम हायर एजुकेशन के लिए सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान को भेजे हैं. उदाहरण के लिए हिजबुल चीफ ने एस इमरान नाम के छात्र का नाम पीएचडी कोर्स के लिए रेफर किया. इसके साथ कहा कि यह कश्मीरी युवा सुरक्षा कारणों से अपनी रिसर्च पूरी नहीं कर पा रहा है.
सलाहुद्दीन ने ISI को लिखी चिट्ठी में बताया है कि इमरान को मुजफ्फराबाद के बेस कैंप में भेज दिया गया है. जानकारी के मुताबिक इमरान एस मोहियूद्दीन का बेटा है और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में रहता है. इमरान ने पंजाब से कंप्यूटर साइंस में एमएससी की और फिर मध्य प्रदेश से एम. फिल.
कश्मीर पर पाक का नया 'पैंतरा', इस बीच अमेरिकी सांसदों ने दिया है बड़ा झटका
कश्मीर हिंसा को लेकर पाकिस्तान हर बार नया पैंतरा खेल रहा है. पहले उसने आतंकी को मार गिराए जाने के लिए भारत की ‘निंदा’ कर दी. अब पाकिस्तान दुनिया के 5 बड़े देशों के सामने ‘शिकायत’ लेकर पहुंच गई है. पाक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के पांच स्थायी सदस्य देशों (पी-5) से कहा कि वे कश्मीर में तनावपूर्ण हालात का संज्ञान लें. इधर आतंकवाद मामले में अमेरिकी सांसदों एवं विशेषज्ञों ने पाक को बड़ा झटका दिया है.
इससे पहले पी-5 से पाक ने कहा है कि भारत से अपील करें कि वह हिंसा प्रभावित घाटी में लोगों के ‘मानवाधिकारों का सम्मान’ करे. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बयान दिया है कि विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के दूतों को कश्मीर के हालात की जानकारी दी. हालांकि, इससे पहले ही अमेरिका ने कह दिया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है.
पाकिस्तान के इन सब पैंतरों के बीच अमेरिकी सांसदों एवं विशेषज्ञों ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कटौती करने को कहा है. इसके साथ ही पाक को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के तौर पर सूचीबद्ध करने की अपील की है. विशेषज्ञों ने हा कि आतंकवादी तत्वों को समर्थन देने वाला और चीजों को जोड़ तोड़ कर पेश करने वाला यह देश(पाकिस्तान) अमेरिका को मूर्ख समझता रहा है.
सदन की विदेश मामलों की समिति की एशिया एवं प्रशांत उपसमिति के अध्यक्ष मैट सैल्मन ने कहा, ‘वे हमें मूर्ख बना रहे हैं. वे हमें मूर्ख समझते हैं. यह माफिया को धन देने की तरह है.’ पूर्ववर्ती बुश काल के शीर्ष राजनयिक जाल्मे खलीलजाद ने सांसदों से कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व ने किस प्रकार दशकों से अमेरिकी प्रणाली के साथ खेल खेला है.
उन्होंने कहा, ‘यदि मैं गैरराजनयिक शब्द का इस्तेमाल कर सकता हूं तो हम बहुत भोले भाले रहे हैं.’ सैल्मन ने खलीलजाद की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘भोले भाले मूर्ख अधिकतर अमेरिकी यह देख सकते हैं और हमारे तथाकथित नेताओं को यह बात अभी तक समझ नहीं आई.’
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के लॉन्ग वार जर्नल के वरिष्ठ संपादक बिल रोजियो ने खलीलजाद से अपील की कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कटौती की जाए. उसे आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के रूप में सूचीबद्ध किया जाए. रोजियो ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान खलीलजाद एवं अन्य विशेषज्ञों के साथ ‘पाकिस्तान: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र या दुश्मन’ विषय पर अपना पक्ष रखा.
उन्होंने कहा, ‘अंतत: वे हमें मूर्ख समझकर हमसे व्यवहार कर रहे हैं और हम पाकिस्तान को धन देने के लिए बहुत आतुर हैं.’ खलीलजाद ने बुश के शासनकाल में अफगानिस्तान में अमेरिकी राजदूत एवं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि समेत विभिन्न राजनयिक पदों की जिम्मेदारी संभालते हुए पाकिस्तान नेतृत्व के साथ हुए अनुभव को साझा किया.
उन्होंने जानकारी दी कि, ‘पाकिस्तान बहुत चालाकी से चीजों को तोड़ मरोड़कर पेश करके हमारा इस्तेमाल करता रहा है. मुझे यह कहना होगा.’ उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के विशिष्ट सदस्यों तक पहुंचते हैं. वे उन्हें यात्रा के लिए आमंत्रित करते हैं. वे उन्हें लुभाते हैं, वे एक बार फिर वादा करते हैं और हमारे बयानों का ऐसा निष्कर्ष निकालते हैं जो तथ्यों के सापेक्ष ‘हैरान करने वाले’ होते हैं.
यह पूछे जाने पर कि अमेरिका उसी नीति को क्यों अपनाता रहा है. खलीलजाद ने कहा कि अपने कृत्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की पाकिस्तान की क्षमता इसका एक कारण रही है. पूर्व शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ संबंधों का मेरा अनुभव यह है कि वे आपको तभी कुछ देंगे, जब उन्हें यह पता होगा कि उन्हें कुछ मिलने वाला है.’
कांग्रेस के सदस्य डाना रोहराबाचर ने कहा कि पाकिस्तान सरकार और सउदी अरब ने तालिबान एवं हक्कानी नेटवर्क बनाया. रोहराबाचर ने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान को मदद देना ‘मूखर्तापूर्ण’ है. उन्होंने कहा, ‘यह भ्रष्ट दमनकारी शासन बलूचिस्तान के लोगों को मार रहा है. बलूचिस्तान के लोगों को यह समझना चाहिए कि अमेरिका एक भ्रष्ट, आतंकवादी समर्थन शासन से उनकी स्वतंत्रता एवं स्वाधीनता के लिए उनके साथ है.’
उन्होंने कहा, ‘ऐसी ही स्थिति सिंधियों के साथ है. ऐसे ही हालात पाकिस्तान के अन्य समूहों के साथ हैं. यदि कोई शासन लोगों की जान लेता है, दमन करता है और भ्रष्ट है और इसके बावजूद हम उन्हें किसी प्रकार का समर्थन देना जारी रखते हैं.. तो यह वाकई बेतुका है.’ आतंकवाद, अप्रसार एवं व्यापार उपसमिति के रैंकिंग सदस्य विलियम कीटिंग ने पैनल के सदस्यों से सवाल किया कि क्या आईएसआईएस सरकार के भीतर एक सरकार है.
अमेरिकन यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर ट्रीसिया बैकन ने कहा, ‘यह पाकिस्तान के भीतर एक दुष्ट संस्था कतई नहीं है. यह स्वतंत्र रूप से या स्वयं संचालन नहीं करता. यह पाकिस्तानी सेना का एक हथियार है. यह पाकिस्तानी सेना की नीतियां लागू कर रहा है. यह पाकिस्तानी सेना की ओर से नीतियां लागू कर रहा है.’
बैकन ने कहा, ‘रोजियो ने कहा कि आईएसआई पाकिस्तानी सेना की एक शाखा है. यह पाकिस्तानी सेना की इच्छा को अंजाम दे रहा है जो वास्तव में पाकिस्तानी सरकार है. (चयनित) सरकार पाकिस्तानी सेना का केवल चेहरा है.’ खलीलजाद ने कहा, ‘मैं अपने सहकर्मी से सहमत हूं.’ सैल्मन ने कहा कि निजी रूप से उनका मानना है कि अमेरिका को पहले कदम के तौर पर पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए.
श्वेत पत्र में चीन का दावा, 2000 साल से दक्षिण चीन सागर पर उसका अधिकार
चीन ने आज संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायाधिकरण के उस फैसले के खिलाफ श्वेत पत्र जारी किया है, जिसने दक्षिण चीन सागर (एससीएस) में उसके ऐतिहासिक अधिकारों को निरस्त कर दिया है। श्वेत पत्र जारी करते हुए चीन ने कहा कि इस रणनीतिक क्षेत्र में बीजिंग का दावा 2000 साल पुराना है।
चीन को कूटनीतिक तौर पर एक बड़ा झटका देते हुए स्थायी मध्यस्थता अदालत ने कल रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर में इस कम्युनिस्ट देश के दावों को निरस्त कर दिया था।
हेग स्थित अदालत ने कहा है कि चीन ने फिलीपीन के संप्रभुता के अधिकारों का उल्लंघन किया है। उसने कहा कि चीन ने कृत्रिम द्वीप बनाकर मूंगे की चट्टानों वाले पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है।
श्वेत पत्र में कहा गया कि चीन का 2000 साल से दक्षिण चीन सागर पर दावा है और याचिका दायर करने वाला फिलीपीन चीनी क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है।
इसमें कहा गया कि दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन के बीच विवादों के मूल में वे क्षेत्रीय मुद्दे हैं, जो 1970 के दशक में शुरू हुई फिलीपीन की घुसपैठ और कुछ द्वीपों एवं चीन के नांशा कुंदाओ (नांशा द्वीपसमूहों) पर अवैध कब्जे के कारण पैदा हुए हैं।
चीन और फिलीपीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर उपजे प्रासंगिक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है चीन शीर्षक वाले दस्तावेज में कहा गया, फिलीपीन ने इस तथ्य को छिपाने के लिए और अपने क्षेत्रीय दावे बरकरार रखने के लिए कई बहाने गढ़े हैं।
स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस की ओर से जारी श्वेत पत्र में कहा गया कि फिलीपीन का दावा इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आधारहीन है।
पत्र में कहा गया कि इसके अलावा, समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून के विकास के साथ दक्षिण चीन सागर के कुछ नौवहन क्षेत्रों को लेकर चीन और फिलीपीन में नौवहन सीमा-निर्धारण संबंधी विवाद भी पैदा हो गया।
श्वेत पत्र में फिलिपीन पर हमला बोलते हुए कहा गया कि मनीला ने चीन और फिलीपीन के बीच के द्विपक्षीय सहमति को नजरअंदाज करते हुए बार-बार प्रासंगिक विवादों को जटिल करने वाले कदम उठाए हैं, जिससे वे बढ़े ही हैं।
इस श्वेत पत्र में कहा गया है कि फिलिपीन ने घुसपैठ और अवैध कब्जा करके चीन के नांशा द्वीपसमूह के कुछ द्वीपों पर सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं। उसने जानबूझकर चीन की ओर से लगाए गए सर्वेक्षण संकेतक नष्ट कर दिए और एक सैन्य वाहन को अवैध रूप से चलाकर चीन के रेनाई जियाओ द्वीप पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की।
इसमें कहा गया कि फिलिपीन चीन के हुआनग्यान दाओ के क्षेत्र पर भी दावा करता है। यह इसे अवैध रूप से कब्जाने की कोशिश कर चुका है और इसने जानबूझकर हुआनग्यान दाओ की घटना को अंजाम दिया था।
श्वेत पत्र के अनुसार, फिलिपीन ने बार-बार चीनी मछुआरों को प्रताड़ित किया और मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हमला किया।
पत्र में कहा गया है कि जनवरी 2013 में, फिलिपीन गणतंत्र की तत्कालीन सरकार ने एकपक्षीय तरीके से दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता शुरू कर दी थी। ऐसा करके उसने द्विपक्षीय वार्ता के जरिए विवादों को सुलझाने के चीन के साथ चल रहे समझौते का उल्लंघन किया।
इसमें कहा गया, फिलिपीन ने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा है, कानूनों की गलत व्याख्या की है और बहुत से झूठ गढ़े हैं ताकि दक्षिण चीन सागर में चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकार एवं हितों को नकारा जा सके।
आगे श्वेत पत्र में कहा गया है कि फिलिपीन के एकपक्षीय अनुरोध पर स्थापित न्यायाधिकरण का यह अधिकारक्षेत्र नहीं है और इसकी ओर से सुनाए गए फैसले अमान्य हैं और ये बाध्यकारी नहीं हैं। चीन ऐसे फैसलों को न तो स्वीकार करता है और न ही मान्यता देता है।







