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संविधान के अनुच्छेद 35ए पर अब अगले साल जनवरी में होगी सुनवाई

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 35ए पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने अगले साल जनवरी तक स्थगित कर दी है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने सुनवाई स्थगित करने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने आगामी निकाय चुनावों (शहरी निकाय और पंचायत चुनाव) को देखते हुए इसपर सुनवाई स्थगित करने की मांग की थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2019 को होगी।

केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए एजी केके वेणुगोपाल ने मांग की थी कि सारी सुरक्षा एजेंसियां राज्य में स्थानीय चुनावों की तैयारियों में जुटी हुई हैं। आर्टिकल 35ए के मुद्दे को लेकर जम्मू-कश्मीर का माहौल भी गरमाया हुआ था। अलगाववादियों ने गुरुवार को कश्मीर घाटी में बंद का आह्वान कर रखा था। जम्मू कश्मीर में नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसी मुख्य पार्टियां भी सुनवाई का विरोध कर रही थीं। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने इस अनुच्छेद की वैधानिकता को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी।

आर्टिकल 35-ए को वर्ष 1954 राष्ट्रपति आदेश के जरिए संविधान में जोड़ा गया था। अनुच्छेद 35-ए जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार देता है और राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करने वाली महिला से संपत्ति का अधिकार छीनता है। साथ ही, कोई बाहरी शख्स राज्य सरकार की योजनाओं का फायदा भी नहीं उठा सकता है और न ही वहां सरकारी नौकरी पा सकता है। 6 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि क्या ये मामला संविधान पीठ में जाना चाहिए या नहीं, उन्होंने कहा कि हमें ये तय करना होगा कि क्या ये मामला 5 जजों की बेंच के पास भेजें या नहीं।

संविधान बनाने के बाद जोड़े गए इस अनुच्छेद 35ए की वैधानिकता को चुनौती देते हुए अश्विनी उपाध्याय ने सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में संविधान के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है जो जम्मू-कश्मीर के बाहर के व्यक्ति से शादी करने वाली महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित करता है। इस तरह महिला को संपत्ति के अधिकार से वंचित करने वाला प्रावधान उसके बेटे पर भी लागू होता है। वकील बिमल रॉय के जरिए दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा है कि अगर कोई महिला जम्मू-कश्मीर के बाहर के व्यक्ति से शादी करती है तो वह संपत्ति के अधिकार के साथ ही राज्य में रोजगार के अवसरों से भी वंचित हो जाती है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के अस्थायी निवासी प्रमाणपत्र धारक लोकसभा चुनाव में तो मतदान कर सकते हैं, लेकिन वे राज्य के स्थानीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते। दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी संगठन वी द सिटीजन्स ने भी संविधान के अनुच्छेद 35ए को चुनौती दे रखी है।

भाजपा अटल का अपमान कर रही है : ममता बनर्जी

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नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद बीजेपी ने जिस तरह से उनकी अस्थिकलश – यात्रा को एक बड़े इवेंट में बदला है। उसे लेकर खूब आलोचना हो रही है। इस बार बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर अटल की अस्थियों को लेकर राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही ये भी कहा कि ये अटल का अपमान है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने कहा है कि ‘मैं अटल जी का बहुत सम्मान करती हूं। लेकिन बीजेपी अस्थियों के साथ क्या कर रही है? ऐसे हथकंडे अपनाकर वो कुछ और नहीं कर रहे हैं, बल्कि अटल जी का अपमान कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी मौत का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए’ अटल बिहारी वाजपेयी जब एम्स में गंभीर हालत में भर्ती थे तो ममता बनर्जी उन्हें देखने गईं थीं। उन्होंने कहा कि उनके लिए अटल जी पार्टी लाइन से ऊपर हैं।
भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुए सभी विपक्षी दल एक सुर में कहते नजर आ रहे हैं कि अटल के निधन के बाद हंसी ठिठोली करते भाजपा नेताओं की तस्वीरें देखकर लग रहा है कि अटल के नाम पर लोगों की भावनाएं भुनाकर भाजपा चुनावी माहौल बना रही है।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त को दिल्ली के एम्स अस्पताल में हुआ था। लेकिन बीजेपी ने अपनी ही पार्टी के सबसे बड़े और सर्वमान्य नेता के निधन के बाद उन्हें राजनीति का मोहरा बना दिया है।

हो जाएं ज़ोरदार तालियां

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 हो जाएं ज़ोरदार तालियां

– किशन शर्मा

 

मैं टेलीविज़न के सामने कभी बैठता नहीं, और शायद इसीलिये शांत और प्रसन्न रहता हूं । परंतु कभी कभी मजबूरी में कोई कार्यक्रम देखना पड जाता है जब मैं किसी मित्र के घर गया होऊं और वहां सब लोग टी0 वी0 देख रहे हों । ऐसी ही मजबूरी में मुझे एक घंटे का एक कार्यक्रम देखना पडा, और मैं झुंझलाता रहा । जो महिला और पुरुष कुछ फ़िल्मी सितारों के समक्ष कुछ नये गायकों का गायन प्रस्तुत करवा रहे थे, वे हर थोडी सी देर में एक ही वाक्य अवश्य दोहराते जा रहे थे, “हो जाएं ज़ोरदार तालियां”। कभी कभी वाक्य बदलते हुए वे कह रहे थे, “इनके लिये ज़ोरदार तालियां बजनी चाहियें” । एक अन्य स्थान पर फ़िल्म पुरस्कारों का पूरी तरह से पूर्व लिखित, निर्देशित, और कई बार रिहर्स किया हुआ तथा एडिट किया हुआ नाटकीय कार्यक्रम बडे चाव और तल्लीनता के साथ देखा जा रहा था । उसमें भी बार बार यही वाक्य दोहराया जा रहा था, “हो जाएं ज़ोरदार तालियां” या “पुट योअर हैंड्स टुगैदर टु वैलकम दिस ग्रेट अर्टिस्ट” । फ़िर पूर्व रिकौर्ड की हुई तालियां और सीटी की एक जैसी आवाज़ें सुनाई देती जा रही थीं । आमतौर पर दर्शक यह मानने को तैयार नहीं होते कि ऐसे सारे कार्यक्रम पूर्व नियोजित, निर्देशित, कई कई बार रिहर्स और शूट होने के बाद भी एडिट करके दिखाये जाते हैं । किसको कब हंसना है, कैसे हंसना है; कब रोना है, कैसे रोना है; पूर्व निर्धारित और निश्चित स्थान पर बैठे हुए परिवार के सदस्य कब, कहां और कैसे अपनी प्रतिक्रिया देंगे; निर्णायक कहे जाने वाले कलाकार कब क्या बोलेंगे या कैसी प्रतिक्रिया दर्शायेंगे; बिना किसी कारण ज़ोर ज़ोर से हंसेंगे; यह सब कुछ लिखित और निर्देशित ढंग से ही होता रहता है । कभी कभी गाने के साथ सभी दर्शकों को हाथ हिलाते, या गर्दन हिलाते भी दिखाया जाता है, जो वास्तव में किसी निर्देशक के इशारों पर ही करवाया जाता है । दर्शकों की ऐसे कार्यक्रमों को टी0 वी0 पर देखने की तल्लीनता को देखकर मैं अचंभित रह जाता हूं । एक बार मैंने अपने एक मित्र से पूछ लिया कि कार्यक्रम को दिखाने वाला कैमरा उसी समय किसी उस व्यक्ति पर कैसे घूम गया जब उसने हाथ या गर्दन को हिलाया था; तो वे कुछ क्षण सोचने के बाद कहने लगे, “यार सच है, कैमरामैन को कैसे पता चल गया कि उस क्षण कौन, कैसी प्रतिक्रिया देने वाला है । यह सब नाटक ही है” । मैं पिछले लगभग 58 वर्ष से विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का मंच संचालन करता चला आ रहा हूं, विभिन्न गांव, कस्बे, नगर, महानगर, और विदेश में भी । मुझे याद नहीं आता कि मैंने कभी भी किसी भी कलाकार या नेता या अतिथि के लिये तालियों की “भीख” नहीं मांगी है । पुरस्कार समारोहों में भी पुरस्कृत व्यक्ति के लिये तालियां ज़बरदस्ती बजवाना मुझे पसंद नहीं रहा है । यह दर्शकों-श्रोताओं की इच्छा है कि वे कब, कहां और कैसे अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें; परंतु बार बार तालियां बजाने के लिये कहना मुझे उस व्यक्ति का अनादर करने जैसा लगने लगता है, जिसके लिये मैं तालियों की भीख मांग रहा हूं । कितना बडा अनादर तब उस व्यक्ति का हो जाता है जब मंच से कहा जाता है कि ज़ोरदार तालियों से स्वागत कीजिये, या ज़ोरदार तालियां बजाइये; और या तो एक-दो व्यक्ति ही ताली बजाएं, या कोई भी ताली न बजाये । मेरा ऐसा मानना है कि मंच संचालक हर व्यक्ति को इस तरह प्रस्तुत करे कि श्रोता-दर्शक अपने आप तालियां बजाएं । अनेक बार श्रोता-दर्शक किसी व्यक्ति के ऊब कर भी तालियां बजाने लगतए हैं । यह स्थिति मंच पर नहीं आनी चाहिये, इसका ध्यान मंच पर आने वाले हर व्यक्ति को रखना चाहिये । मैं यह समझ ही नहीं पाता हूं कि अधिकतर मंच संचालक बार बार तालियां बजाने के लिये क्यों कहते रहते हैं । किसी विशेष परिस्थिति में एक बार तालियां बजाने का आग्रह किया जा सकता है, परंतु हर थोडी देर में “हो जाएं ज़ोरदार तालियां” कहना मंच संचालक की शब्द-भाषा की बहुत कम जानकारी और धाराप्रवाह बोलने की अक्षमता को ही दर्शाता है । मुझे याद है कि मैंने एक विशेष कार्यक्रम में एक बार तालियां बजाने का अनुरोध किया था, जब राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह साहब के समक्ष संगीत का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था । राष्ट्रपति महोदय की उपस्थिति में राज्यपाल, मुख्य मंत्री, अन्य मंत्रीगण, उच्च अधिकारियों आदि ने न तो कलाकारों के परिचय के समय तालियां बजाईं, और न गायक द्वारा प्रस्तुत पहली रचना की समाप्ति पर ही तालियां बजाईं । मैंने बडी विनम्रता के साथ निवेदन किया, “महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी; आपकी अनुमति के बिना यहां उपस्थित कोई भी व्यक्ति कलाकार की प्रस्तुति के सम्मान में ताली भी नहीं बजा पा रहा है । मेरा आपसे बहुत ही विनम्रता के साथ यह अनुरोध है कि कृपया यहां उपस्थित सभी सम्माननीय व्यक्तियों को कम से कम हर रचना की समाप्ति पर अगर वो रचना पसंद आई हो तो तालियां बजाने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करदें; क्योंकि हर कलाकार, श्रोताओं-दर्शकों से तालियों की ही आशा लगाए रहता है” । राष्ट्रपति महोदय मुस्कुरा दिये और स्वयं तालियां बजाकर सबकी तरफ़ ताली बजाने का इशारा भी कर दिये । आपातकाल के दौरान एक संगीत कार्यक्रम में प्रधान मंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी जी की उपस्थिति में भी मुझे यह कहने पर मजबूर होना पडा था, “परम आदरणीय प्रधान मंत्री जी, आजकल सभी नेता, अधिकारी, नागरिक आपकी स्वीकृति के बिना संगीत की रचना की प्रशंसा में ताली बजाने में भी झिझक रहे हैं । क्या मैं विनम्रता पूर्वक आपसे यह निवेदन कर सकता हूं कि सब को निर्भीक होकर कम से कम ताली बजाने की अनुमति प्रदान करने की कृपा कर दें” । प्रधान मंत्री जी तुरंत अपने स्थान पर खडी हो गईं और सभी उपस्थितों की ओर मुडकर स्वयं ताली बजाने लगीं । फ़िर तो सारा सभागार तालियों की आवाज़ से गूंज उठा । लेकिन मैंने कभी भी हर कलाकार, नेता, विद्वान के लिये हर कार्यक्रम में बार बार तालियों की भीख मांगते हुए, ज़ोर ज़ोर से चिल्लाकर और शब्दों को अनावश्यक रूप से लंबा खींचकर यह नहीं कहा है –- “हो जाएं ज़ोरदार तालियां” ।

 

पता :
901, केदार
यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर
नागपुर – 440015 (महा.) मोबाइल – 8805001042

हिन्दू अदालत में मनुस्मृति से होगा न्याय, किसी अपराध में नहीं होगी जेल

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नई दिल्ली। पिछले दिनों मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित नेता कन्हैया कुमार ने देश में मनुस्मृति को थोपे जाने की बात कही थी उनकी यह बात सच साबित होती नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में मुस्लिम शरिया कोर्ट की तर्ज पर पहला हिंदू कोर्ट खोला गया है, जिसमे मनुस्मृति को आधार बनाकर न्याय किया जायेगा।

इस पहले हिंदू कोर्ट की जज डॉ पूजा शकुन पांडे हैं जो मनुस्मृति के आधार पर न्याय करेंगी। यह वही पूजा पांडे हैं जो पहले भी एक बार गांधी को लेकर विवादित बयान दे चुकीं हैं। अब पूजा शकुन पांडे का कहना है कि वह मुनस्मृति को आधार मानकर न्याय करेंगी। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि, देश में अंग्रेजों की लिखी किताब से न्याय व्यवस्था चलाई जा रही है। मनुस्मृति से अगर न्याय किया जाएगा तो उससे देश में यूनिटि बढ़ेगी। हमारे न्याय का पौराणिक तरीका है जो अपराधी को आध्यात्म के जरिए सुधार की ओऱ ले जाएगा। हमें निर्णय लेने में भी आसानी होगी। सनातन न्याय व्यवस्था में दंड नहीं दिया जाता।

पूजा पांडे ने बताया कि, हम अपराधी का हृदय परिवर्तन करेंगे। उससे अपराध कबूल करवाएंगे कि उसने खून किया है। उन्होंने कहा कि, हम उस व्यक्ति से कहेंगे कि वो स्वीकार करे कि उसने ऐसा अपराध किया है। अपराध स्वीकार करने के बाद उसे पीड़ित परिवार की देख-रेख करने के लिए कहेंगे। अगर पीड़ित पक्ष हमारे न्याय से संतुष्ट नहीं है तो वो सरकारीअदालतों में जा सकता है। हम किसी को नहीं रोकेंगे। हम वो केस अपने हाथ में लेंगे ही नहीं जो हमारे दायरे से बाहर होंगे। पूजा पांडे ने बताया कि हिंदू अदालत के सारे नियम कायदे 2 अक्टूबर तक जारी कर दिए जाएंगे।

इससे पहले पूजा पांडे ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा था कि , मैं गर्व से कहती हूं कि अगर नाथू राम गोडसे से पहले मैं पैदा होती तो मैं ही गांधी को मार देती। गांधी ने देश का बंटवारा कर के ठीक नहीं किया, अगर आज भी कोई कोई गांधी पैदा होगा जो देश बांटने की बात करेगा तो नाथू राम गोडसे भी इसी पुण्य भूमि पर पैदा होगा।

इसी बीच इस हिंदू अदालत के लेकर विवाद भी शुरू हो गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पश्चिमी यूपी में हिंदू कोर्ट के गठन पर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले पर जानकारी मांगी है। इसके साथ ही डीएम मेरठ और हिंदू कोर्ट की कथित जज पूजा शकुन पांडे को पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए भी नोटिस जारी किया है।

मुंबई के 16 मंजिला टॉवर में लगी भीषण आग, अब तक 4 की मौत, 16 घायल

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मुंबई के परेल इलाक़े में हिंदमाता सिनेमा के पास 16 मंज़िला क्रिस्टल टावर में भीषण आग लगी है। आग इमारत की तेरहवीं मंजिल पर सुबह 8 बजेलगी जो लेवल 2 से लेवल 3 में तब्दील हो गई है। फ़ायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियां मौक़े पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश में जुटी हैं।

इमारत के अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए क्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक 4 लोगों के मौत की खबर है और 16 घायल बताए जा रहे हैं। आग लगने के कारणों का पता अभी नहीं चल सका है।

हादसे में घायल लोगों को उपचार के लिए केईएम अस्पताल लाया गया है। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक 16 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल में लाया गया, जिनमें से 2 की मौत हो गई। अन्य की हालत स्थिर है। मुंबई दमकल विभाग के प्रमुख पी. एस. रहांगदले ने बताया कि आग लगने के कारण उठा धुंआ तेजी से फैला और इमारत में रहने वाले लोग सीढ़ियों आदि पर फंस गये। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पाने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश जारी है।

मुंबई : कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुरुदास कामत का हार्ट अटैक से निधन

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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गुरुदास कामत का आज सुबह दिल का दौरा पड़ने से यहां निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे। कामत को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद सुबह करीब सात बजे चाणक्यपुरी के प्राइमस अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गयी। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने अस्पताल पहुंचकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।

सूत्रों ने बताया कि कामत ने सुबह सांस लेने में दिक्कत होने की बात कही। उनका ड्राइवर उन्हें तुरंत अस्पताल ले गया। सुबह वह वसंत एन्क्लेव स्थित अपने निजी आवास पर अकेले ही थे। उनका पार्थिव शरीर लाने के लिए मुंबई से परिजन रवाना हो चुके हैं।

कामत के यूं अचानक चले जाने से कांग्रेस में शोक की लहर है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनके असामयिक निधन पर शोक जताया है। मुखर्जी ने ट्वीट किया, ‘‘श्री गुरुदास कामत के अचानक और असामयिक निधन से शोकाकुल हूं। सरकार और पार्टी में वर्षों तक वह सहकर्मी रहे, इस अवस्था में उनका जाना दुखदायी है।’’

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता गुरुदास कामत के अचानक निधन से दुखी हूं। वह एक अनुभवी नेता थे जिन्होंने गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री के तौर पर अपनी सेवा दी थी। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं।’’

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘कांग्रेस नेता श्री गुरुदास कामत जी के अचानक निधन की सूचना पाकर बहुत आहत और दुखी हूं। इस क्षति को बता सकने योग्य शब्द नहीं हैं। उनके परिजनों, मित्रों और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। दिवंगत की आत्मा को शांति मिले।’’

पेशे से वकील कामत मुंबई से पांच बार सांसद रहे। वह 1976 से 1980 तक एनएसयूआई के अध्यक्ष भी रहे थे। इसके अलावा वह 2009 से 2011 तक केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री रहे। उनके पास संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था। जुलाई, 2011 में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वह मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे।

दुर्गापूजा रोकी तो BJP कार्यकर्ता सचिवालय की ईंट से ईंट बजा देंगे : अमित शाह

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कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कोलकाता में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर अगली बार दुर्गापूजा को रोका गया तो भाजपा के कार्यकर्ता ममता बनर्जी के सचिवालय की ईंट से ईंट बजा देंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन बंद कर दिया गया, स्कूलों में सरस्वती पूजा रोक दी गई. अगर बीजेपी की सरकार आई तो हर हाल में इन्हें किया जाएगा।

अमित शाह ने ममता बनर्जी पर जमकर बरसते हुए कहा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल की विरोधी कैसे हो सकती है, जबकि हमारी पार्टी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल से ही थे। उन्होंने कहा कि बीजेपी बंगाल विरोधी नहीं, ममता विरोधी है। रैली की भीड़ इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी का शासन खत्म होने जा रहा है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ममता बनर्जी या राहुल गांधी की कोशिशों से एनआरसी की प्रकिया नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा कि एनआरसी घुसपैठियों को भगाने के लिए है। असम में न्यायिक तरीके से इसे लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले घुसपैठियों का वोट कम्युनिस्ट पार्टियों को मिलता था तो ममता बनर्जी घुसपैठियों का विरोध करती थीं, लेकिन जब उन्हें इससे वोट मिलने लगे तो अब वह एनआरसी का विरोध कर रही है और उन्होंने पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बना दिया है।

अमित शाह ने कहा कि एनआरसी को असम अकॉर्ड के तहत बनाया गया है, जो पूर्व पीएम राजीव गांधी ने किया था. तब कांग्रेस ने इसका विरोध नहीं किया, आज वोटबैंक के लिए कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। घुसपैठिये ही पश्चिम बंगाल में विस्फोट करते हैं। हमारी पार्टी इस राज्य में हिंदू शरणार्थियों को भरोसा देना चाहती है कि हम ही सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल 2016 लेकर आए हैं, जिसमें उनको नागरिकता दी जाएगी।

शाह ने कहा कि ममता सरकार जब से आई है, चारों ओर भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है, कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं, कारखाने बंद हो रहे हैं और बम बनाने के कारखाने खुल रहे हैं, अपराध के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। बीजेपी की सरकार आई तो ईमानदार, सख्त कानून व्यवस्था वाली और पश्चिम बंगाल को पुरानी सांस्कृतिक पहचान दिलाने का काम होगा।

अमित शाह ने कहा कि हाल में हुए पंचायत चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को उतरने ही नहीं दिया गया और उम्मीदवारों का निर्विरोध चुने जाने का भी रिकॉर्ड बना दिया. पार्टी के 65 कार्यकर्ताओं को मार दिया गया, इसके बावजूद पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियां या तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल की जनता ने मौका दिया लेकिन ये राज्य का विकास नहीं कर सके. बीजेपी को मौका मिला तो ही राज्य का विकास हो सकेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से दिए गए हजारों करोड़ रुपये के पैकेज को ‘भतीजे और सिंडिकेट की सरकार’ ने गांव के लोगों तक नहीं पहुंचने दिया।

 

दक्षिण की राजनीति के पितामह M. KARUNANIDHI का निधन

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द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सुप्रीमो एम करुणानिधि का आज मंगलवार की शाम 6. 40 बजे निधन हो गया। दक्षिण की राजनीति के मुख्य स्तंभ और तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि ने लंबी बीमारी के बाद मंगलवार शाम 6:10 बजे अंतिम सांस ली।

94 वर्षीय एम् करुणानिधि को पिछले महीने ब्लड प्रेशर का स्तर गिरने के कारण चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले उनका इलाज घर पर ही चल रहा था। लेकिन बाद में तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तब कावेरी अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया था कि बढ़ती उम्र के कारण ही करुणानिधि की तबीयत बिगड़ी है। कावेरी अस्पताल की ओर से 6:40 बजे जारी किए गए प्रेस रिलीज के अनुसार, करुणानिधि ने 6:10 बजे अंतिम सांस ली।

एम. करुणानिधि की हालत नाज़ुक, अस्पताल के बाहर जुटी समर्थकों की भीड़

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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि की हालत में सुधार होने की बजाय लगातार नाजुक होती जा रही है। चेन्नई के कावेरी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करुणानिधि की तबियत कल सोमवार को देर शाम अचानक बिगड़ गई जिसके बाद अस्पताल के बाहर उनके समर्थकों की भीड़ एकत्रित हो गई। देर शाम को ही अस्पताल की ओर से जारी की गई मेडिकल बुलेटिन के अनुसार,अगले 24 घंटे उनकी तबियत के लिए काफी अहम हैं।

अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि करुणानिधि की उम्र के हिसाब से उनके शरीर के सभी ऑरगन्स को सही तरीके से फंक्शन कराने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। डॉक्टर्स उन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और एक्टिव मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है। इलाज के दौरान उनका रिस्पान्स ही आगे का उपचार का रास्ता तय करेगा।

आपको बता दें कि 5 बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा मुलाकात कर चुके हैं।

इसी साल 3 जून को करुणानिधि ने अपना 94वां जन्मदिन मनाया। ठीक 50 साल पहले 26 जुलाई को ही उन्होंने डीएमके की कमान अपने हाथ में ली थी। लंबे समय तक करुणानिधि के नाम हर चुनाव में अपनी सीट न हारने का रिकॉर्ड भी रहा है।

पांच बार मुख्यमंत्री और 12 बार विधानसभा सदस्य रह चुके करुणानिधि अभी तक जिस भी सीट पर चुनाव लड़े हैं, उन्होंने हमेशा जीत दर्ज की है। करुणानिधि ने 1969 में पहली बार और 2003 में आखिरी बार मुख्यमंत्री बने थे।

मराठा आरक्षण आंदोलनः हिंसक आंदोलन के बाद 5 हजार मराठा आंदोलनकारियों पर केस दर्ज

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पुणे। मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर पुणे में हिंसक प्रदर्शन करने वाले 5 हज़ार प्रर्दशनकारियों पर केस दर्ज किया गया है। सोमवार को आंदोलनकारियों ने पुणे में जमकर बवाल मचाया और सैकड़ों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को बुरी तरह छतिग्रस्त भी कर दिया।

पुणे के चाकन नामक इलाके में इसका भयावह प्रभाव देखने को मिला है। प्रशासन की ओर से करीब 5 हजार आंदोलकारियों पर केस दर्ज किया गया है। इसके बाद भी मंगलवार को आंदोलन का प्रभाव देखने को मिला है।

बता दें कि मराठा क्रांति मोर्चा की ओर से मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया गया है। क्रांति मोर्चा का कहना है कि जबतक सरकार अध्यादेश नहीं लाती है आंदोलन बंद नहीं होगा। सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में मराठा आरक्षण की मांग हो रही है।

हालांकि इसको लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सर्वदलीय बैठक की थी। साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पेशल एसेंबली सेशन की मांग को लेकर अपने विधायकों के साथ सोमवारो को बैठक की थी। आरक्षण को लेकर बांबे हाईकोर्ट में मामला लंबित पड़ा है।