अयोध्या विवाद पर मुख्तार अंसारी ने बयान दिया है. उन्होंने इस विषय में कहा कि अयोध्या पर आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय से आये फ़ैसले का हम स्वागत करते है। अब बेरोजगारों को हर साल दो करोड़ रोजगार, विकाश, शिक्षा और स्वास्थ्य को और बेहतर बनाने की दिशा में, सेना के जवानों को सम्मान,किसान की माली हालत सुधारने व उपज की दोगुनी कीमत देने , बुनकर भाईयों की समस्याओं को हल करने, महंगाई को कम करने और गरीबी को खत्म करने जैसे मुद्दों पर सरकार द्वारा किये गये वादों पर काम हो साथ ही साथ पिछड़े, अतिपिछड़े, दलित, अतिदलित भाईयों से किये गये वादों को पूरा करने की जरूरत है । देश में आपसी भाईचारा मजबूत हो इस पर सरकार मजबूती से पहल करें ।
ये हाथी का बच्चा है सबसे समझदार, अपने दोस्त के लिए किया
ऐसा कहा जाता है कि इस पृथ्वी पर इंसान ही सबसे समझदार प्राणी है। लेकिन कभी-कभी जानवर भी ऐसी क्रिया या प्रतिक्रिया कर जाते हैं, जो हम इंसानों को भी आश्चर्यचकित करने के साथ-साथ जीवन का बड़ा सबक भी दी जाती है। आपने देखा होगा कि सोशल मीडिया पर कई बार जानवरों के ऐसे आश्चर्यजनक वीडियो आते रहते हैं, जो हमें कुछ ना कुछ सीख दे जाते हैं। जैसे कि अभी कुछ दिन पहले एक बंदर का वीडियो सामने आया था। जिसमें वह एक नल बंद करता हुआ दिखाई दे रहा था। तो वहीं एक और इसी तरह का वीडियो जिसने सोशल मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थीं, वह था जहाँ एक कौवा प्लास्टिक की एक बोतल को डस्टबिन में डालता हुआ नज़र आ रहा है।
अब एक और बहुत ही खूबसूरत और दिल जीत लेने वाला वीडियो सोशल मीडिया में तेज़ी से वायरल हो रहा है। और बेतहाशा सुर्खियां बटोर रहा है। और वह एक हाथी के बच्चे और कछुए का है, जहां एक हाथी का बच्चा शायद इंसानों के ट्रैफिक रूल्स को जानता है या फिर शायद वह जानता है कि छोटे से कछुए की जान की परवाह न करते हुए कोई भी इंसान तेज़ी से गाड़ी चलाता हुआ उसे मार सकता है।
इसीलिए वह हाथी का बच्चा अपने कछुए दोस्त को कहता नज़र आ रहा है कि, ‘चल साइड हो जा यार’ यह वीडियो इन दिनों ट्विटर सर्वाधिक पसंद किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि बीच सड़क पर एक कछुआ आराम कर रहा था, कि वहां पर एक हाथी का बच्चा आया, और उसकी नज़र कछुए पर पड़ी, और उसने कछुए को एक पल देखा, और फिर उसे सड़क के किनारे करने की कोशिश करने लगा। इसके बाद कछुआ खुद ही सड़क किनारे चला जाता हुआ दिखाई दिया।
बता दें कि यह प्यारा सा वीडियो इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के ऑफिसर प्रवीण कासवान ने ट्विटर पर पोस्ट किया है। और यह वीडियो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। कुछ लोगों ने इस पर कमेंट किया है कि, छोटी-छोटी चीजें देखकर कितना अच्छा लगता है, हाथी भी इसके बाद मुस्कुरा दिया होगा। तो एक अन्य यूज़र ने लिखा है कि, मैं जानवरों में भी मानवता देखता हूं।
इतना फ़ास्ट होगा नेट कि चुटकियों में खुलेंगे मनचाहे पेज, इस्तेमाल कर सकते हैं
5G यानी भविष्य की टेक्नोलॉजी है। हमारा पड़ोसी देश चीन 5G टेक्नोलॉजी को लेकर बहुत गंभीर है। और इसे अपने देश में जल्द से जल्द लागू करने में लगा हुआ है। एक अनुमान के अनुसार 2020 तक चीन में 5G की टेक्नोलॉजी पूरी तरह से लागू हो जाएगी। अगर 5G टेक्नॉलॉजी की तुलना 4G से करें, तो 5G नेटवर्क की स्पीड 4G से हर स्तर पर बेहतर है। 5G टेक्नोलॉजी से मैसेज सेंड करने से रिसीवर तक पहुंचने में बहुत कम समय लगेगा। क्योंकि इंटरनेट की स्पीड 4G से कहीं ज़्यादा तेज़ होगी।
साथ ही हाई-बैंडविथ और अल्ट्रा-लो लेटेंसी से वह काम संभव है। जो पहले संभव नहीं था। 4G की लेटेंसी 10ms है तो 5G की लेटेंसी 1ms है। 4G का डेटा ट्रेफिक 7.2 एक्साबाईट/ महीना है तो 5G का डेटा ट्रेफिक 50 एक्साबाईट/महीना है।
4G का पीक डेटा रेट है 1GB/S तो 5G का पीक डेटा रेट 20Gb/S है। 4G का मौजूद स्पेक्ट्रम 3GHz है तो वहीं 5G का मौजूदा स्पेक्ट्रम 30GHz है। 4G का कनेक्शन घनत्व एक लाख है, तो 5G का कनेक्शन घनत्व दस लाख है।
4G का लेटेंसी 1.87 MB/S है। जबकि 5G का लेटेंसी 12.5 MB/S है। अगर तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें, तो 4G का स्पेक्ट्रम 3 गीगाहर्ट्ज़ पर मौजूद है, तो 5G का स्पेक्ट्रम 30 गीगाहर्टज़ होगा। 4G का पीक डेटा रेट जहां 1GB/सेकंड है, वहीं 5G का 20GB/ प्रति सेकंड होगा। 5G को भविष्य की तकनीक कहना ग़लत नहीं होगा। 5G का प्रयोग शुरु करने के बाद ऑपरेटर साइट से दूर, कहीं से भी हैवी मशीनें चला पाएंगे। जो ख़तरनाक वातावरण में जोखिम को कम करेगा। साथ ही साथ मैसेज के जल्दी पहुंचने से डॉक्टर रोबोट के ज़रिए सर्जरी कर सकेंगे। इसके साथ ही तेज़ स्पीड और कम लेटेंसी के चलते 5G कई डिवाइसों को एक साथ चलाने में सक्षम है। जब हम 5G की स्पीड की बात करते हैं, तो 5G के साथ 300 एमबी के 75 फोटो 2 सेकेंड में, 5GB की सीरीज़ 8 सेकंड में, और इसके अलावा इस 105 GB का बैकअप 60 सेकंड में, और 20GB का स्पेशल एडिशन 120 सेकंड में मिल सकेगा।
मास्टर ब्लास्टर सचिन की मानेंगे ये बात तो मैच में हो सकता है चमत्कार
टीम इंडिया के संकटमोचन माने जाने वाले, टीम इंडिया की जीत की गारंटी माने जाने वाले, साथ ही दर्शक दीर्घा में हलचल मचाए रखने वाले, टीम इंडिया के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि वनडे क्रिकेट को रोमांचक बनाए रखने के लिए इसमें लगातार बदलाव की ज़रूरत है। जिससे क्रिकेट के इस प्रारूप में लोगों की दिलचस्पी बनी रहे।
सचिन तेंदुलकर ने इसके लिए कुछ दिलचस्प सुझाव भी दिए हैं। सचिन का कहना है कि वनडे टीम को 50 ओवर की एक पारी खेलने की बजाय 25-25 ओवर की दो पारियां खेलनी चाहिए। यानी एक मैच में कुल 4 पारियाँ और हर पारी के बाद 15-15 मिनट का ब्रेक हो। सचिन ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर टीम A और टीम B के बीच 50 ओवर का एक मैच खेला जाना है, तो अगर टीम A पहले बल्लेबाज़ी के लिए मैदान में उतर रही है, तो वह पहले 25 ओवर तक बल्लेबाज़ी करेगी। उसके बाद टीम A 26 वें ओवर से जितने भी विकेट उसके पास बचे हैं।
पहले 25 ओवर खेलने के बाद के, उनके साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाएगी। इसी तरह से टीम B भी चौथी पारी को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए खेलेगी। सचिन के अनुसार अगर टीम A अपनी पहली पारी में ही ऑल-आउट हो जाती है, तो टीम B के पास अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए अपनी पहली पारी और एक ब्रेक और उसके बाद की दूसरी पारी होगी। सचिन ने बताया कि इस तरह के मैच में अगर देर शाम बारिश की भी संभावना होती है, तो टीम उसके अनुसार अपनी रणनीति भी बना सकती है। इससे खेल का परिणाम भी निकल सकता है।
सचिन का कहना है कि जब हम दिन-रात्रि का मैच खेलते हैं। तो उसमें ओस मुख्य समस्या बन जाती है। जिससे खेल प्रभावित होता है। और कई बार टीमों की हार-जीत का फ़ैसला इस ड्यू-फैक्टर की वजह से प्रभावित होता है। और अगर इस प्रारूप पर काम किया जाए, तो दोनों टीमों को उस में बल्लेबाज़ी करने के बराबर के अवसर मिलेंगे। टीम इंडिया के मास्टर ब्लास्टर अपने सुझावों को लेकर बहुत आश्वस्त हैं, कि यह सुझाव टी20 प्रारूप के आने के बाद से 50-50 ओवर की वनडे मैचों की बोझिलता को दूर करके इन्हें रोचक और एक नया रूप दे सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के विधायकों की अयोग्यता याचिका पर आया जवाब, राष्ट्रपति ने
आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव सन 2020 की तैयारियों में सभी राजनीतिक पार्टियां पूरे जी-जान से जुट गई हैं। और आम आदमी पार्टी ने निर्णय लिया है कि,सन 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का मुख्य चेहरा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही होंगे।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने साल 2014 और साल 2015 के चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी। और इसीलिए पार्टी उसी प्रदर्शन को दोहराने के लिए अपने काम के बल पर चुनावी मैदान में उतरने को लेकर आशान्वित है।
और दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले-पहले राष्ट्रपति की ओर से एक राहत भरी ख़बर भी आम आदमी पार्टी के लिए आई है। जिसके अनुसार देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आम आदमी पार्टी के 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है। बता दें कि आम आदमी पार्टी के विधायकों के ख़िलाफ़ याचिका लाभ के पद के मामले में दाखिल की गई थी। और देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस याचिका को चुनाव आयोग की सलाह पर ख़ारिज कर दिया है।
मार्च, 2017 में विवेक गर्ग नाम के व्यक्ति ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी को यह याचिका दी थी। जिसमें ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में सह अध्यक्ष होने की वजह से लाभ के पद के मामले में आम आदमी पार्टी के 11 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने की मांग की गई थी। जिसके बाद इस मामले को चुनाव आयोग के पास सलाह हेतु भेज दिया गया था। अब जबकि आम आदमी पार्टी के सभी 11 विधायकों के ख़िलाफ़ याचिका को ख़ारिज किया जा चुका है, तो आम आदमी पार्टी अब दोगुने उत्साह से और अपनी जीत के प्रति आशान्वित होकर विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गई है।
रजनीकांत का फूटा ग़ुस्सा भाजपा पर, कहा “न करें कोशिश..”
साउथ के बड़े स्टार रजनीकांत की फ़ैन फ़ालोइंग कितनी है इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक बार जब एक नेता की गाड़ी पास करने के लिए रजनीकांत की गाड़ी रोक दी गयी थी तो रजनीकांत अपनी गाड़ी से बाहर निकलकर पैदल चलने लगे थे और उस नेता की गाड़ी को पास करवाने के लिए भीड़ को क़ाबू करना मुश्किल हो गया था क्योंकि रजनीकांत को देखते ही उनके फ़ैन्स उनकी ओर लपकने लगे थे।
रजनीकांत को आया है बेहद ग़ुस्सा जिसके बारे में उन्होंने बयान देते हुए कहा कि कुछ लोग उनका नाम बेवजह भाजपा के साथ जोड़ रहे हैं और ये ख़बरें फैलायी जा रही हैं कि वो भाजपा में शामिल हो गए हैं जबकि ये सच नहीं है। इसी तरह पहले थिरुवल्लुवर(तमिल कवि) को भी भगवा रंग में रंगने की कोशिश की गयी थी। लेकिन न तो वो इस जाल में फँसे और न ही मैं इस जला में फँसने वाला हूँ।”
रजनीकांत के इस बयान के बाद भाजपा के एक मंत्री ने इस मामले पर सफ़ाई देते हुए कहा कि भाजपा की ओर से ऐसी कोई बात नहीं कही गयी है जिसमें रजनीकांत को भाजपा से जोड़ा गया हो। ये अफ़वाह कैसे फैली इस बारे में भाजपा को कोई ख़बर नहीं है। रजनीकांत साउथ और हिंदी फ़िल्मों के जाने- माने अभिनेता हैं जिनकी बहुत बड़ी फ़ैन फ़ालोइंग हैं जो उनकी हर फ़िल्म के पहले उनकी होर्डिंग को दूध से नहलाते हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में आया बड़ा मोड़, शरद पवार का बड़ा बयान..
महाराष्ट्र में चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही सरकार बनाने को लेकर उथलपुथल जारी है। जहाँ शिवसेना ढाई-ढाई महीने की सरकार का फ़ॉर्म्युला लाना चाहती है वहीं भाजपा देवेंद्र फडनवीस को आगे पाँच साल के लिए मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं। इस मुद्दे पर लगातार शिवसेना और भाजपा के बीच मतभेद रहा है।
इसी बीच देवेंद्र फडनवीस ने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को दे सौंप दिया है और अगर आज रात तक कोई भी पार्टी सरकार बनाने के लिए दावा पेश नहीं करती है तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है। शरद पवार ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “भाजपा और शिवसेना के को जनता ने चुना है और उन्हें चाहिए कि वो सरकार बनाएँ। यही बात मैंने और रामदास अठावले जी ने भी आपसी चर्चा में समझा है और हम इस बात पर सहमत हुए। लेकिन जिस तरह की देरी सरकार बनाने में हो रही है ये बात राज्य को आर्थिक और सामाजिक रूप से असर कर रही है”
अभी शरद पवार और संजय राउत की अहम बैठक चल रही है जिसके बाद इस मुद्दे पर बड़ा बदलाव आ सकता है। वहीं पिछले दिनों से शिवसेना ने अपने विधायकों को होटल रंगशारदा में ठहराया था जिन्हें आज मढ के होटल रीट्रीट में भेजा जाएगा। होटल रंगशारदा में आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने बारी- बारी से आकर अपने विधायकों से मुलाक़ात की।
अकोला के तारिक़ फ़ैज़ को एक गीत ने दिलायी वो प्रसिद्धि जिसका सपना देखते हैं लोग
ज़्यादातर लोग अपनी ज़िंदगी में कोई ऐसा काम करना चाहते हैं जो उन्हें लोगों के बीच प्रसिद्धि दिला दे लेकिन देखा जाए तो इस सोच के साथ किए गए काम से अक्सर प्रसिद्धि नहीं मिल पाती लेकिन जब बिना सोचे समझे लगातार समाज के लिए कोई काम करते जाते हैं या ये कहें कि अपना योगदान समाज के प्रति अपना योगदान देते हैं तो जाने- अनजाने में आप लोगों के लिए हीरो बन जाते हैं।
एक ऐसे ही शख़्स के बारे में हम आज आपको बताने वाले हैं जिन्होंने किया कुछ ऐसा कि देश भर के युवाओं के लिए पेश की एक मिसाल।हम जिनकी बात कर रहे हैं वो है महाराष्ट्र के अकोला शहर के निवासी तारिक़ फ़ैज़। तारिक़ फ़ैज़ जो MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं कि रुचि संगीत में बचपन से रही है और इस रुचि ने ही उन्हें दिलायी प्रसिद्धि। दरअसल तारिक़ ने एक ऐसा गीत लिखा जो लोगों के मन में मासिक चक्र को लेकर बसी रूढ़ियों को तोड़ने में कारगर होगा, क्योंकि ये गीत लिखा ही गया है मासिक चक्र पर। तारिक़ ने ये गीत वर्ल्ड मेस्ट्रुअल डे के अवसर पर एक NGO के कहने पर लिखा।
ऐसा करने से पहले तारिक़ भी ज़रा झिझके लेकिन एक तो समाज में जागरूकता लाने की सोच और उस पर डॉक्टरी की पढ़ाई दोनों की मदद मिली और कई दिन सोचने के बाद तारिक़ ने लिखी वो अद्भुत पंक्तियाँ जो मासिक चक्र के विषय में अलग सोच बनाने में मदद करेगी। तारिक़ ने लिखा ख़ू’न जि’स्म में बहे तो बस जा’न चले, ख़ू’न जि’स्म से निकले तो ये जहाँ चले”, मासिक चक्र से ही तो दुनिया में एक नन्हीं जान आ पाती है बस कुछ यही विचार इन पंक्तियों में तारिक़ ने पेश किया।
इस गीत के youtube में रीलिज़ होते ही लोगों ने उम्मीद से ज़्यादा पसंद किया और तो और उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने भी इस विचार की तारीफ़ करते हुए उनके इस गीत को शेयर किया जिसके बाद से इस गाने को सुनने और पसंद करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
हाई कोर्ट की फटकार के बाद नर्म पड़ी भाजपा सरकार, टीपू सुलतान जयंती पर ये..
कर्नाटक हाई कोर्ट ने टीपू सुल्तान जयन्ती कार्यक्रम को रद्द करने के बीजेपी सरकार के फैसले पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन सरकार को ये हिदायत दी कि 2 महीने के अंदर सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे। एक ख़बर के मुताबिक़, चीफ जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका और जस्टिस एस आर कृष्णकुमार की खण्डपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का ये फैसला प्रथम दृष्टया पक्षपातपूर्ण लगता है, कोर्ट ने कहा कि जो लोग 10 नवम्बर को टीपू जंयती का आचरण करेंगे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2020 के तीसरे सोमवार तक टाल दी और सरकार को कहा कि वो अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और इस बात का ध्यान रखे कि बाकी 28 हस्तियों की जयन्ती मनाने वाली सरकार को सिर्फ टीपू सुल्तान की जयन्ती मनाने पर ही क्यों आपत्ति है। बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार के इस फैसले को टीपू सुल्तान यूनाइटेड फ्रंट नामक संस्था ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

















