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ज़हरीले प्रदूषण की समस्या से मिल सकती है निजात, वैज्ञानिकों ने..

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दिल्ली-एनसीआर इन दिनों “गैस चेंबर” बना हुआ है। वायु प्रदूषण की मार झेल रहे दिल्ली-एनसीआर की हवा इतनी अधिक ज़हरीली हो चुकी है कि, उसमें सांस लेना अपने जीवन को धीमी मौत की ओर लेकर जाना है। वहां की हवा में सांस लेने से फेफड़ों में संक्रमण का ख़तरा है। जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतों से लोग रोज़ जूझ रहे हैं। प्रदूषण की वजह से धुंध ने दृश्यता को बहुत कम कर दिया है। इस प्रदूषण का सबसे ज़्यादा और ख़तरनाक असर पड़ा है छोटे-छोटे बच्चों पर जो इस ज़हरीली हवा में साँस लेने को मजबूर हैं।

इस ज़हरीले प्रदूषण के लिए मुख्य वजह इन दिनों पंजाब-हरियाणा में जलाए जाने वाली पराली को माना जाता है। प्रदूषण की ऐसी ख़तरनाक स्थिति को देखते हुए हरियाणा सरकार ने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि किसानों का इस पर कहना है कि पराली को खेतों से बाहर निकालने पर होने वाले ख़र्चे से बचने के लिए ही वह इस में आग लगा देते हैं। लेकिन अब इस भयंकर स्थिति से निबटने के लिए ‘राष्ट्रीय जैविक खेती संस्थान’ के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा बनाई है, जो किसानों को इस पराली जलाने की समस्या से निजात दिला देगी। जिसकी वजह से पराली जलाने की समस्या की वजह से दिल्ली-एनसीआर के लोग इस प्रदूषित ज़हरीले वातावरण में जीवन के साथ संघर्ष करने पर मजबूर हैं। उन्हें उससे राहत मिल सकेगी।

सबसे ख़ास बात इस दवाई की यह है कि, यह महज़ 20 रुपये की कीमत में उपलब्ध है। यह दवा पराली को महज़ 10 से 12 दिन के भीतर ही ख़ाद में तब्दील कर देगी, इस दवा से किसानों को दो-दो बड़े फायदे होंगे। सबसे पहला तो उन्हें इस पराली जलाने की समस्या से छुटकारा मिलेगा और पराली जलाते पकड़े जाने पर जुर्माने आदि की समस्या से भी आसानी से छुटकारा मिल जाएगा। और दूसरा सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि, इस दवाई के प्रयोग से जब यह पराली 10 से 12 दिनों के भीतर खाद में बदल जाएगी, तब किसान इसका प्रयोग अपने खेतों में ख़ाद की तरह करके अपनी जमीन की उर्वरा क्षमता को बढ़ा भी सकते हैं। जो इस दवा की दूसरी बड़ी ख़ासियत है।

इस शख़्स के सामने सिर झुकाते हैं बड़े-बड़े फ़िल्मी सितारे, इनकी कहानी जानकर हो जाएँगे हैरान

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Shivaram Bhandare

जहाँ बॉलीवुड से जुड़ी हर बात लोगों के लिए आश्चर्य का विषय होती है वहीं बॉलीवुड में आने वाले लोगों की कहानी भी अक्सर फ़िल्मी कहानी से कम पेंचिदा नहीं होती। कुछ ऐसे ही कहानी है शिवाराम भंडारे की भी। शिवाराम भंडारे जिन्होंने बॉलीवुड में अपना ऐसा नाम कमाया है कि बड़े-बड़े स्टार उनके सामने अपना सिर झुकाते हैं। शिवाराम जिन्हें शिवा के नाम से जाना जाता है सेलेब्रेटी हेयरस्टाइलिस्ट हैं। उनकी एक बाद चेन भी चलती है जिसका नाम है शिवाज़।

शिवा की कहानी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। इसमें ऐसे-ऐसे उतार चढ़ाव हैं कि आपको लगेगा आप कोई फ़िल्म ही देख रहे हैं। बचपन में पिता को खो देने के कारण पढ़ाई छोड़कर माँ के साथ घर ख़र्च निकालने में जुट गए शिवा ने बहुत छोटी उम्र में ही दुनियादारी के सारे रंग देख लिए थे। साथ। ही पहचान लिया था मेहनत का महत्व भी, शिवा ने जो इतना बड़ा ब्राण्ड अपने नाम के साथ जोड़ा है वो पूरी तरह से उनकी अपनी मेहनत का नतीजा है।

एक ऐसी जगह से आने वाला बच्चा जिसे एक अच्छा बचपन तक नहीं मिल पाया, आज अपना ऐसा नाम बना पाया है तो उसका सबसे बड़ा कारण है लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करना और हार न मानते हुए परिस्थिति से लड़ते जाना। शिवा की ज़िंदगी किसी भी इंसान के लिए प्रोत्साहित करने वाली हो सकती है। शिवा के सामने कई तरह की मुश्किलें आयीं लेकिन उन्होंने हर बार सिर्फ़ और सिर्फ़ आगे बढ़ने का ही रास्ता चुना और उनकी मेहनत रंग लायी।

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The Journey Of Shiva

शिवा के जीवन की सारी बातों को समेटे एक किताब हाल ही में आयी है जिसका नाम है “The Journey Of Shiva”। इस किताब को लिखा है जयश्री शेट्टी ने। शिवा की कहानी तो सीखने के लिए बहुत कुछ देती ही है लेकिन उसे इतनी अच्छी तरह पेश करने का काम बख़ूबी किया है लेखिका जयश्री शेट्टी ने। शिवा का जीवन काफ़ी कुछ सीखने के लिए प्रेरित कर सकट अहै और ये बात भी बताता है कि अगर हुनर और मेहनत करने का जज़्बा हो तो कोई आपकी राह नहीं रोक सकता।

जो कहते हैं कि मेहनत से आजकल कुछ नहीं होता उन्हें ये किताब ज़रूर पढ़ना चाहिए। साथ ही जो लोग ये कहते हैं कि ग़रीबी से निकल के अमीर होना या नाम कमाना सिर्फ़ फ़िल्मों में होता है उन्हें भी इस किताब को पढ़ना चाहिए इससे उन्हें पता चलेगा कि फ़िल्में आम ज़िंदगी से ही प्रभावित होती हैं। एक बात और इस किताब से सीखी जा सकती है वो ये कि बॉलीवुड में नाम कमाना न आसान है न मुश्किल बस अपने पास कोई प्रतिभा होनी चाहिए और मन में एक हौसला होना चाहिए फिर हर मेहनत रंग लाती है।

देश के इस ख़ूबसूरत राज्य में लागू हुआ ये अनोखा नियम, जाने से पहले करना होगा..

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Meghalaya

सूत्रों से प्राप्त ख़बरों के अनुसार मेघालय में शुक्रवार को एक अध्यादेश जारी किया गया है। जिसके अनुसार राज्य में बाहर से आने वाले लोगों को 24 घंटे से ज़्यादा रुकने पर रेजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों को इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है। जहां केंद्र सरकार नागरिकता कानून के ज़रिए पलायन करके आए लोगों को वैध करने की कोशिश में है तो वहीं मेघालय इसके पुरज़ोर विरोध में है।

मेघालय डेमोक्रेटिक एलाइंस कैबिनेट से मेघालय रेजिडेंट सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट 2016 में संशोधन को स्वीकृति मिल चुकी है। मेघालय में अवैध रूप से पलायन कर्ताओं को आने से रोकने के लिए इनर लाइन परमिट सिस्टम लाने की बात बहुत समय पहले से चल रही थी। यह परमिट एक डॉक्यूमेंट होता है, जो केंद्र सरकार की तरफ से भारतीयों के लिए जारी किया जाता है। इनर लाइन परमिट एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है। जिसे भारत सरकार किसी भारतीय नागरिक को संरक्षित क्षेत्र में सीमित समय के लिए अंतरिक यात्रा की मंजूरी देने के लिए जारी किया जाता है।

मेघालय सरकार के अनुसार अधिनियम में हुए संशोधनों को जल्द ही अध्यादेश के माध्यम से प्रभाव में लाया जा सकेगा। अगले विधानसभा सत्र में उन्हें अधिनियमित किया जाएगा। मेघालय में यह परमिट केंद्र सरकार द्वारा नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाएगा। मेघालय सरकार जल्द ही एक अधिसूचना जारी करेगी, जिसमें आगंतुकों द्वारा जमा किए जाने वाले प्रपत्रों की सूची जारी की जाएगी। तथा इस प्रक्रिया को छोटा और सरल भी बनाया जाएगा। इस इनर लाइन परमिट की सेवा शर्तें और प्रतिबंध राज्यों की अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार लागू किए गए हैं।

सौरभ गांगुली ने विराट कोहली को लेकर कही ऐसी बात, फ़ैन्स का आया रीऐक्शन

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Saurabh Ganguli

सौरव गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष बनने के केवल एक हफ़्ते के अंदर भारतीय क्रिकेट बोर्ड के दृष्टिकोण में बदलाव करने में सफल रहे हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच 22 से 26 नवंबर तक खेले जाने वाला टेस्ट सीरीज़ का दूसरा टेस्ट मैच दिन-रात का होगा। गांगुली ने इस टेस्ट को गुलाबी गेंद से खेलने का प्रस्ताव बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के सामने रखा था। हालांकि, बांग्लादेशी खिलाड़ी पहले इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन कई दौर की बैठकों के बाद उन्होंने इसके लिए अपनी सहमति दे दी है।

गांगुली का कहना है कि यह एक अच्छी पहल है। और टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इस बात का भी ख़ुलासा किया कि बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दिन-रात्रि के टेस्ट मैच के लिए टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने सिर्फ़ 3 सेकेंड में ही अपनी सहमति जता दी थी। गांगुली ने बताया कि, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं पता कि वह क्या कारण थे, जो वो एडिलेड में दिन-रात्रि का टेस्ट मैच नहीं खेलना चाहते थे। मैंने उनसे एक घंटे तक बात की और मेरा पहला सवाल था, कि हमें दिन-रात्रि का टेस्ट खेलना होगा। और 3 सेकेंड में ही जवाब मिल गया कि आप ऐसा कर सकते हैं।”

 गांगुली का कहना था कि, “मैं नहीं जानता कि पूर्व में क्या हुआ। और इसके क्या कारण थे। लेकिन मैंने पाया कि उन्हें (विराट कोहली) दिन-रात का टेस्ट मैच खेलना स्वीकार्य है। बीसीसीआई अध्यक्ष गांगुली ने कहा, “मैं जानता हूं कि, टी-20 में प्रत्येक स्टैंड खचाखच भरा होता है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उचित प्रबंधन से दर्शकों की वापसी संभव हो सकती है। यह भारत के लिए एक शुरुआत है। मेरा मानना है कि इससे टेस्ट क्रिकेट के अच्छे दिन फिर से लौट आएंगे।

चैट लीक मामले में व्हाट्सएप की ओर से आया बड़ा बयान, कहा भारत सरकार के..

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प्रतीकात्मक तस्वीर

केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने बयान में कहा था कि भारत सरकार ‘मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर भारत के नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है।’ इस पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में व्हाट्सएप के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी सभी भारतीय नागरिकों की निजता की सुरक्षा की ज़रूरत के बारे में भारत सरकार के कड़े बयान से सहमत है।

प्रवक्ता का कहना है कि इसी वजह से हमने साइबर हमलावरों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही की है। व्हाट्सएप सभी उपभोक्ताओं के मैसेजेस की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। जबकि भारत के गृह मंत्रालय ने व्हाट्सएप विवाद पर एक अलग बयान जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि सरकार निजता के अधिकार सहित नागरिकों के मूल अधिकारों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। और उसके उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार किसी भी मध्यस्थ के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई के लिए भी प्रतिबद्ध है।

जबकि फ़ेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप के प्रवक्ता का कहना है कि, वो पूरी कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी यूज़र के डेटा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ ना हो सके। बता दें कि भारत सरकार को जासूसी मामले में व्हाट्सएप पर साजिश कराने का शक है। सूत्रों से प्राप्त ख़बरों के अनुसार, टेलीकॉम मंत्रालय लगातार व्हाट्सएप से मैसेज के सोर्सेज सुरक्षा एजेंसियों को डिस्क्लोज़ करने की मांग कर रहा है। लेकिन हर बार प्राइवेसी का हवाला देकर व्हाट्सएप ने सरकार की बात को नज़रअंदाज़ कर दिया था। इसके अलावा यूएस, यूके और ऑस्ट्रेलिया भी अब भारत की मांग के बाद व्हाट्सएप पर दबाव बना रहे हैं।

दिल्ली ने पछाड़ा दुनियाभर के शहरों को, इस सूची में आयी पहले नम्बर पर..

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Delhi

दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रदूषित 10 शहरों की सूची में आठ शहर एशिया के हैं। और इनमें भी भारत की राजधानी दिल्ली का पहला नंबर है। जबकि पाकिस्तान का लाहौर दूसरे नंबर पर है। जब नोएडा शहर की हवा अपने ख़तरनाक स्तर पर पहुंच गई, तब जाकर प्रशासन हरक़त में आया। और प्रशासन द्वारा सेक्टर 32 स्थित वेब सिटी के प्रोजेक्ट पर चल रहे निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मौक़े से 25 लोगों को गिरिफ्तार करके दो आरएमसी प्लांट बंद कराकर पोप्लेन को ज़ब्त कर लिया गया है।

दिल्ली की वायु के प्रदूषित होने का असर राजनेताओं पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रदूषण को लेकर हरियाणा सरकार के बचाव में उतरे उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि दिल्ली के सीएम केजरीवाल जो आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं वह तत्वों से बहुत दूर हैं। उनका कहना था कि केजरीवाल पहले दिल्ली में जलाए जा रहे कूड़े पर अंकुश लगाएं। और दिल्ली से लगते हुए सभी राज्यों के बैठक आयोजित करें। दुष्यंत चौटाला का कहना है कि केजरीवाल राजनीति से ऊपर उठकर प्रदूषण की समस्या का समाधान करवाएं।

वहीं दिल्ली एनसीआर में लगातार ज़हरीली होती जा रही हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गंभीर हो गया है। और इस मामले में पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) 4 नवंबर को वायु प्रदूषण को लेकर एक रिपोर्ट दाखिल करेगा। और अरुण मिश्रा की अगुवाई में पड़ोसी राज्यों पंजाब-हरियाणा में जलाई जा रही पराली को लेकर भी सुनवाई करेगा।

वहीं गैस चैंबर में तब्दील हो चुके दिल्ली-एनसीआर जहां की हवा में सांस लेना 40 सिगरेट पीने के बराबर हो चुका है, वहां के लोगों के लिए एक राहत भरी हल्की बयार चलने की ख़बर है। और हल्की हवा के साथ-साथ गुरूग्राम, फरीदाबाद समेत एनसीआर के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और नोएडा में हल्की बारिश की भी ख़बर है। भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक के.वी सिंह के अनुसार शनिवार शाम से हवा की गति में इज़ाफ़ा हो सकता है। और 6 नवंबर के बाद बारिश की संभावना है।

होने वाला है फ़ोन कॉल से जुड़ा ये बड़ा बदलाव, अब नहीं कर पायेंगे..

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प्रतीकात्मक तस्वीर

मोबाइल इन दिनों हर एक की आदत और ज़रूरत दोनों बन गया है ऐसे में फ़ोन से जुड़े बदलाव आम जनता के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अभी तक भारत में इनकमिंग कॉल्स के लिए घंटी बजने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई थी। लेकिन अब दूरसंचार विनियामक ट्राई ने फोन के इनकमिंग कॉल की घंटी बजने के समय सीमा को लेकर अपना फ़ैसला घोषित कर दिया है। अगर उसके अंदर कॉल रिसीव नहीं होती है, तो कॉल अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाएगी। कॉल रिंग ड्यूरेशन यानी वह समय सीमा जब तक आपके फोन की घंटी बजती रहती है। बहुत से लोग फोन की घंटी बजते ही तुरंत फोन रिसीव कर लेते हैं तो बहुत से रिजेक्ट भी कर देते हैं। जबकि बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जो तुरंत जवाब नहीं देते हैं और फोन की घंटी अपने आप बज-बजकर बंद हो जाती है।

जितनी देर तक हम सामने वाले के फोन की घंटी को बजाते रहते हैं। उतनी देर तक नेटवर्क दोनों के बीच में व्यस्त रहता है और इसमें हमारे रिसोर्स लगते हैं। साथ ही एनर्जी भी जाती है जो दिखाई नहीं पड़ती है लेकिन बर्बाद ज़रूर होती है। अगर कॉल पहले ही ख़त्म कर दी जाए, तो यह रिसोर्स बच जाएंगे और टेलीकम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर्स इस सेविंग को किसी दूसरे यूज़र के काम में इस्तेमाल कर सकते हैं।

अभी हमारे देश में मोबाइल की घंटी 30 से 45 सेकंड तक बजती है। जबकि लैंडलाइन पर 60 से 102 सेकेंड तक। अगर मोबाइल पर इस समय सीमा को घटाकर 20 सेकेंड कर दें, तो अगले 15 से 20 सेकेंड तक बर्बाद होने वाला रिसोर्स बच जाएगा। ट्राई ने बेसिक टेलीफोन सर्विस और सेल्यूलर मोबाइल टेलीफोन सर्विस के लिए सेवा के गुणवत्ता मापदंड में संशोधन करते हुए कहा कि इनकमिंग वॉइस कॉल के लिए घंटी बजने का समय, जब तक उपभोक्ता द्वारा उत्तर ना दिया जाए या उसे काटा ना जाए। मोबाइल के लिए 30 सेकंड और लैंडलाइन फोन के लिए 60 सेकंड होगा।

इस शख़्स का नाम है ऐसा कि लोग पूछते हैं दो बार, बनवाने पड़े कई दस्तावेज़

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Madhyprdesh singh with son Bhopal singh and Daughter Prkriti

नाम में बहुत प्रभाव होता है। शायद यही कारण रहा होगा, जो पुराने समय में लोग बड़े-बड़े और प्रभावशाली नाम रखते थे। जिससे उनके बच्चे का व्यक्तित्व नाम के प्रभाव से शानदार बने। ऐसे ही प्रभावशाली नामों का परिवार है, मनावर तहसील के ग्राम भमोरी के एक निवासी का। जिनके नाम में ही पूरा एक राज्य समाया हुआ है। और इनका नाम है मध्य प्रदेश सिंह।

मध्यप्रदेश सिंह बताते हैं कि उनके पिता ने उनका नाम मध्यप्रदेश सिंह रखा। और जब मध्य प्रदेश सिंह दसवीं कक्षा तक पहुंचे तो उन्होंने तय किया कि जब उनका बेटा होगा तो वह उसका नाम भोपाल सिंह रखेंगे। दरअसल, मध्यप्रदेश सिंह का मानना है कि अगर उनका नाम मध्यप्रदेश सिंह है, तो उनके बेटे का नाम तो भोपाल सिंह ही होना चाहिए। साधारण से किसान परिवार में जन्मे मध्यप्रदेश सिंह का नाम ही इतना प्रभावशाली और अनोखा है, कि इसे सुनते ही लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं।

ये बात भी रोचक है कि धार ज़िले के मध्य प्रदेश सिंह 5 सितंबर 1985 को शिक्षक दिवस के दिन जन्मे और वे झाबुआ चंद्रशेखर आजाद शासकीय महाविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। मध्यप्रदेश सिंह अपने 9 भाई बहनों में सबसे छोटे हैं उनका नाम परिवार के सभी बड़ों ने मिलजुल कर रखा था। उन्हें अपने नाम पर बहुत गर्व है। मध्य प्रदेश सिंह का विवाह उनके कॉलेज की एक मित्र के साथ हुआ है, जो भी उनके नाम के कारण उनकी ओर आकर्षित हुई थीं। मध्यप्रदेश ने अपनी बेटी का नाम प्रकृति रखा है और अपने बेटे के दुनिया में आते ही उसका नाम भोपाल रखा। उनका कहना है कि जब पिता प्रदेश है तो बेटा राजधानी ही होना चाहिए।

शिवसेना को समर्थन देगी कांग्रेस-एनसीपी? इस ख़बर से साफ़..

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मुंबई: महाराष्ट्र से बड़ी ख़बर आ रही है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार विधायकों से मीटिंग के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने जा रहे हैं. सोनिया गांधी से ये मुलाक़ात काफ़ी अहम् है. ऐसा माना जा रहा है कि इस मुलाक़ात के बाद एनसीपी-कांग्रेस ये एलान करेंगी कि वो शिवसेना को समर्थन करने जा रही है.

सरदार पटेल की जयंती पर बदली गयी बरसों पुरानी परम्परा..मोदी ने..

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Narendra MOdi

कल 31 अक्टूबर यानी लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती का दिन था और इस बार सरदार पटेल की 144 वीं जयंती का अवसर था। साल 1955 से लेकर अब तक एआईआर यानी ऑल इंडिया रेडियो भारत के प्रथम सूचना एवं प्रसारण मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में वार्षिक सरदार पटेल व्याख्यान की मेजबानी करता आया था। इस व्याख्यान को पहले ही रिकॉर्ड कर लिया जाता था और 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर आकाशवाणी के सभी केंद्रों द्वारा प्रसारित किया जाता था।

लेकिन इस साल के व्याख्यान का नियम बदल दिया गया। इस साल कोई व्याख्यान नहीं हुआ बल्कि इसकी जगह एक विशेष प्रसारण हुआ। इस प्रसारण के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिए जाने वाले भाषणों के अंश, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में की गई मन की बात के अंश, और इसके साथ ही आकाशवाणी के नए गीत एक भारत श्रेष्ठ भारत से एक खंड शामिल किया गया।

बता दें कि सरदार वल्लभभाई पटेल की 144 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने केवाडिया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सरदार पटेल को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। साथ ही साथ वहाँ उपस्थित सभी सरकारी कर्मचारियों को एकता की शपथ भी दिलाई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने एकता परेड को भी संबोधित करते हुए कहा कि, सरदार पटेल की प्रतिमा के पास आकर ऊर्जा मिलती है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट किया था, “महान सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि, देश के प्रति उनका योगदान स्मरणीय है।”