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उत्तराखंड: यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में 24 गुना उछाल, बना देश का पहला राज्य

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनकर इतिहास रच दिया है। इस क्रांतिकारी कानून के लागू होने के बाद आम लोगों में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता में भारी वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, पुराने अधिनियम की तुलना में अब प्रतिदिन विवाह पंजीकरण की संख्या में 24 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया था। सत्ता में आने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही इसकी घोषणा की गई। व्यापक जनमत संग्रह और सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून प्रदेश में प्रभावी हो गया। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और सभी नागरिकों – खासकर महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना है।

यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप सहित सभी महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। विवाह की आयु पुरुष-महिला दोनों के लिए समान निर्धारित की गई है। बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर पूर्ण रोक लगाई गई है और तलाक की प्रक्रिया सभी धर्मों के लिए एकसमान एवं कठोर बनाई गई है।

आंकड़ों में यूसीसी का असर:

  • यूसीसी लागू होने के बाद (27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक) मात्र 6 महीनों में 3 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हो चुके हैं।
  • पुराने अधिनियम (2010 से 26 जनवरी 2025 तक) के तहत कुल 3 लाख 30 हजार 64 विवाह पंजीकरण हुए थे।
  • प्रतिदिन औसत: पुराना कानून – 67 पंजीकरण, यूसीसी के बाद – 1634 पंजीकरण (24 गुना वृद्धि)।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। यह कानून किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देने के लिए है। विवाह पंजीकरण में आई यह अभूतपूर्व वृद्धि साबित करती है कि जनता ने यूसीसी को दिल से स्वीकार किया है और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देख रही है। उत्तराखंड ने पूरे देश के लिए नई दिशा दिखाई है और मुझे पूरा विश्वास है कि अन्य राज्य भी जल्द ही इस मॉडल को अपनाएंगे।

उत्तराखंड से बड़ी खबर : किसान आत्महत्या मामले में चौकी प्रभारी समेत 10 पुलिसकर्मी एक साथ सस्पेंड

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रुद्रपुर। उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर जिले में किसान सुखवंत सिंह की फेसबुक लाइव पर गोली मारकर आत्महत्या के मामले में पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों के बाद बड़ा एक्शन हुआ है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने 12 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर थानाध्यक्ष आईटीआई कुंदन सिंह रौतेला और कोतवाली आईटीआई के उप निरीक्षक प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन का कारण मृतक सुखवंत सिंह के प्रकरण में बरती गई घोर लापरवाही और उदासीनता बताया गया है।

सुखवंत सिंह (निवासी पैगा, काशीपुर) ने मरने से पहले फेसबुक लाइव वीडियो में 4 करोड़ रुपये की भूमि ठगी का आरोप लगाते हुए ऊधमसिंहनगर पुलिस पर उत्पीड़न, धन मांगने और मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने वीडियो में एसएसपी मणिकांत मिश्रा, कुंदन सिंह रौतेला, प्रकाश बिष्ट और अन्य पुलिसकर्मियों के नाम लिए और कहा कि उनके शरीर के अंग बेचकर मिलने वाले पैसे इन्हें बांट दिए जाएं। यह घटना 11 जनवरी 2026 की सुबह नैनीताल के होटल में हुई, जहां सुखवंत ने खुद को गोली मारी।

  • दोनों अधिकारियों को निलंबन अवधि में अर्ध औसत वेतन के बराबर जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
  • महंगाई भत्ता केवल अवकाश वेतन पर देय होगा, अन्य प्रतिकर भत्ते वास्तविक व्यय के प्रमाण पर।
  • भुगतान के लिए प्रमाण-पत्र देना होगा कि वे किसी अन्य रोजगार/व्यापार में नहीं लगे हैं।
  • निलंबन के दौरान दोनों को पुलिस लाइन, रुद्रपुर में रहना अनिवार्य।

एसएसपी ने एसपी क्राइम को निर्देश दिए हैं कि प्रकरण में गहन प्रारंभिक जांच कर 2 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दें। अपर पुलिस अधीक्षक (क्षेत्राधिकारी काशीपुर) को आदेश की प्रति देकर प्राप्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा, 10 अन्य पुलिसकर्मियों (उपनिरीक्षक/चौकी प्रभारी जीतेन्द्र कुमार से लेकर आरक्षी संजय कुमार तक) को भी तत्काल पुलिस लाइन रुद्रपुर आमद करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई सुखवंत सिंह के परिवार के अल्टीमेटम और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जबकि परिवार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर: LoC पर पाकिस्तानी ड्रोन की संदिग्ध घुसपैठ, भारतीय सेना ने फायरिंग कर भगाया

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जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के नौशेरा-राजौरी सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास रविवार शाम को कई संदिग्ध ड्रोन दिखाई दिए, जिनके पाकिस्तान से आने का मजबूत शक जताया जा रहा है। भारतीय सेना ने तुरंत काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम (काउंटर-ड्रोन उपाय) अपनाए और मीडियम-लाइट मशीन गन से फायरिंग की, जिसके बाद ये ड्रोन वापस पाकिस्तानी इलाके की ओर लौट गए।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:35 बजे राजौरी सेक्टर के गनिया-कलसियां गांव के ऊपर ड्रोन की हलचल देखी गई। इसके बाद सेना के जवानों ने फायरिंग शुरू की। उसी दौरान राजौरी के टेरियथ में खब्बर गांव के ऊपर टिमटिमाती रोशनी वाला एक और ड्रोन कलाकोट के धर्मसाल गांव की दिशा से आता हुआ दिखा, जो भरख की ओर बढ़ा। शाम करीब 7:15 बजे चक बबरल के ऊपर भी एक ड्रोन कई मिनट तक मंडराता रहा। पुंछ के मनकोट सेक्टर में टैन से टोपा की ओर भी इसी तरह की संदिग्ध उड़ान देखी गई।

इन घटनाओं के बाद भारतीय सेना ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और जमीन पर तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया गया है। हथियारों का जखीरा भी बरामद इससे एक दिन पहले शनिवार को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सांबा जिले के पालूरा गांव के पास सीमा से सटे इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था।

इस दौरान चीन में बनी 9 एमएम पिस्टल (दो मैगजीन सहित), एक ग्लॉक 9 एमएम पिस्टल (एक मैगजीन सहित), एक चीनी हैंड ग्रेनेड (APL HGR 84) और कुल 16 राउंड 9 एमएम कारतूस बरामद किए गए थे। सुरक्षा बलों का मानना है कि ये ड्रोन गतिविधियां और हथियारों की तस्करी आतंकवादियों को सप्लाई करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती हैं। सेना और बीएसएफ ने पूरे LoC और IB पर अलर्ट जारी कर दिया है और निगरानी बढ़ा दी गई है।

देहरादून में शीतलहर के चलते स्कूलों का समय बदला, अब 8:30 बजे के बाद खुलेंगे

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देहरादून जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड, पाला और घने कोहरे के बीच जिला प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। जिला अधिकारी सविन बंसल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कक्षा 12 तक के सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन अब प्रातः 8:30 बजे के बाद ही किया जाएगा। यह व्यवस्था 31 जनवरी 2026 तक लागू रहेगी।

भारत मौसम विभाग (IMD), देहरादून के पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में जिले के अधिकांश इलाकों में सुबह के समय पाला पड़ने और उथला से मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना है। इससे आम जनमानस, स्कूली बच्चे, छात्र-छात्राएं और आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले छोटे बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आदेश की मुख्य बातें:

  • सभी शैक्षणिक संस्थान और आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 8:30 बजे से पहले नहीं खुलेंगे।
  • यह निर्णय आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 (धारा 30 (2) की उपधारा 5 व 18) के तहत जारी किया गया है।
  • मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संस्थानों में इस आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।

प्रशासन ने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधनों से अपील की है कि वे बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर भेजें और सुबह के समय ठंड से बचाव के उपाय अपनाएं। यह कदम उत्तर भारत में जारी शीतलहर के बीच बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उठाया गया है, जहां कई जिलों में समान फैसले देखने को मिल रहे हैं।

ISRO ने 2026 का पहला मिशन सफलतापूर्वक अंजाम दिया: PSLV-C62 से EOS-N1 (अन्वेषा) उपग्रह सहित 15 अन्य उपग्रह कक्षा में स्थापित

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श्रीहरिकोटा/नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। यह 2026 का भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें मुख्य पेलोड DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह EOS-N1 (कोडनेम: अन्वेषा) शामिल है। इस मिशन में कुल 16 उपग्रह (1 मुख्य + 15 सह-उपग्रह) सफलतापूर्वक सूर्य तुल्यकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit) में स्थापित किए गए हैं।

यह PSLV का 64वां उड़ान मिशन है और पिछले साल (मई 2025 में PSLV-C61 की असफलता के बाद) PSLV की वापसी को चिह्नित करता है। मिशन की अवधि लगभग 1 घंटा 48 मिनट रही, जिसमें सभी चार चरणों ने सामान्य रूप से कार्य किया।

मुख्य विशेषताएं और महत्व:

अन्वेषा (EOS-N1): DRDO द्वारा विकसित यह ~400 किलोग्राम वजनी हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह सैकड़ों संकीर्ण तरंगदैर्ध्य बैंड्स में पृथ्वी की सतह की इमेजिंग कर सकता है। यह दुश्मन ठिकानों, छिपे हुए सैन्य संसाधनों, सीमा निगरानी, कृषि मूल्यांकन, शहरी मानचित्रण और पर्यावरण निगरानी के लिए अत्यंत उपयोगी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह “आकाश में आंख” की तरह काम करेगा, जिससे छिपकर रहना मुश्किल हो जाएगा।

निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका: इस मिशन में भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियों ने अभूतपूर्व योगदान दिया। हैदराबाद की Dhruva Space ने 7 उपग्रह भेजे, जबकि अन्य स्टार्टअप जैसे OrbitAID (AayulSAT – भारत का पहला ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग डेमो), TakeMe2Space (MOI-1 – AI इमेज लैब), और विभिन्न विश्वविद्यालयों (जैसे Assam Don Bosco University का LACHIT-1) के उपग्रह शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग: स्पेन, नेपाल, थाईलैंड, ब्राजील, फ्रांस, यूके सहित कई देशों के उपग्रह। स्पेनिश स्टार्टअप का Kestrel Initial Demonstrator (KID) कैप्सूल PSLV के चौथे चरण से अलग होकर नियंत्रित री-एंट्री का प्रदर्शन करेगा, जो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन करेगा।

ISRO के चेयरमैन और वैज्ञानिकों ने इस सफलता को PSLV की विश्वसनीयता और भारत के बढ़ते कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम की जीत बताया। न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा संचालित यह 9वां डेडिकेटेड कमर्शियल मिशन है।

भीषण अग्निकांड: अर्की बाजार में आग से बच्चे की मौत, कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका

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File Photo

शिमला/सोलन: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की बाजार में रविवार देर रात (11 जनवरी की रात करीब 2:30 बजे) भीषण आग लग गई, जिसमें एक मासूम बच्चे की जान चली गई और 7-9 अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर गया है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत एक नेपाली मूल के परिवार के घर से हुई, जहां परिवार द्वारा रात के समय जलती हुई अंगीठी को घर के अंदर ले जाने के कारण आग भड़क उठी। इसके बाद 6-7 एलपीजी सिलेंडरों के फटने से आग ने भीषण रूप धारण कर लिया और तेजी से आसपास के मकानों व दुकानों तक फैल गई। आग ने पुराने बस स्टैंड के पास यूसीओ बैंक बिल्डिंग सहित कई दुकानों और आवासीय मकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

इस दर्दनाक हादसे में एक 7-8 साल के बच्चे (कुछ रिपोर्टों में 8 साल की बच्ची) का शव बरामद किया गया है। बच्चा जिंदा जलकर मारा गया। बचाव दल अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। अर्की, सोलन, नालागढ़, बोईलुगंज (शिमला) और अम्बुजा प्लांट से कई दमकल गाड़ियां बुलाई गईं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी राहत-बचाव कार्यों में सहायता के लिए तैनात किया गया है। स्थानीय विधायक संजय अवस्थी भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

आग पर अब काफी हद तक काबू पा लिया गया है, लेकिन प्रभावित परिवारों का सब कुछ जलकर राख हो चुका है। कई परिवार बेघर हो गए हैं और इलाके में शोक का माहौल है।

प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने और जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है। आग लगने के सटीक कारणों की जांच जारी है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में सिलेंडर विस्फोट और अंगीठी से जुड़े लापरवाही को मुख्य वजह बताया जा रहा है।

नैनीताल के धारी ब्लॉक में तेंदुए के हमले से महिला की मौत, ग्रामीणों में आक्रोश

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नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक अंतर्गत खुटियाखाल क्षेत्र में रविवार दोपहर एक तेंदुए के भीषण हमले में एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान गंगा देवी (पत्नी जीवन चंद्र) के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीण वन विभाग के खिलाफ भारी गुस्से में हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तेंदुआ बार-बार दिखाई दे रहा था और लोगों ने कई बार वन विभाग को इसकी सूचना दी थी, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रविवार दोपहर गंगा देवी घर के पास काम कर रही थीं, तभी अचानक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें घायल कर मौत के घाट उतार दिया।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। धारी एसडीएम अंशुल भट्ट ने पुष्टि की है कि महिला की मौत तेंदुए के हमले से हुई है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक और वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की यह घटना कोई नई नहीं है, लेकिन बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। वे वन विभाग से मांग कर रहे हैं कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर तेंदुए को पकड़ने या स्थानांतरित करने की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि आगे ऐसी दुखद घटनाएं रोकी जा सकें।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है और कैमरा ट्रैप तथा अन्य उपायों से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड में बंद का मिश्रित असर, सीबीआई जांच की घोषणा के बावजूद जारी विरोध

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देहरादून: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया गया था, जिसमें सामाजिक संगठनों, विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सीपीआई आदि ने समर्थन दिया। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा शुक्रवार को सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद कुछ व्यापारी संगठनों ने बंद का विरोध किया, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसका असर मिश्रित रहा।

ऋषिकेश में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के महामंत्री प्रतीक कालिया शर्मा ने बंद का विरोध करते हुए कहा कि जब सीएम धामी ने पीड़ित माता-पिता की सीबीआई जांच की मांग को मान लिया है, तो अब बंद का कोई औचित्य नहीं रह गया। उन्होंने व्यापारियों से अपने प्रतिष्ठान खुले रखने की अपील की।

श्रीनगर गढ़वाल में बंद का अच्छा असर दिखा, जहां सुबह साढ़े नौ बजे तक बाजार नहीं खुला। गणेश बाजार, वीर चंद्र सिंह गढ़वाल मार्ग, काला रोड, अपर बाजार, भक्तियांना, बिल्केदार और श्रीकोट क्षेत्रों में दुकानें बंद रहीं। सामाजिक संगठनों ने सीबीआई जांच को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग को लेकर यह बंद बुलाया था।

रुड़की में भी बंद का प्रभाव देखा गया, जहां पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। कुछ संगठनों से वार्ता के बाद प्रशासन उन्हें मनाने में सफल रहा, लेकिन कांग्रेस ने बंद में भाग लिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला और दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पुतला दहन किया। क्षेत्राधिकारी नरेंद्र पंत ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात है।

नई टिहरी में भू-भूम्याल जागृति मंच के संयोजक और राज्य आंदोलनकारी मंच के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत बंद का निर्णय यथावत रखा। मंच के पदाधिकारी और स्थानीय व्यापारी सुबह 10:30 से 11 बजे के बीच हनुमान चौक पर एकत्रित होंगे, जहां से शहर के आंतरिक मार्गों से होते हुए बौराड़ी बाजार तक विरोध प्रदर्शन और जुलूस निकाला जाएगा।

राज्य में पुलिस ने बंद को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में भारी बल तैनात किया है। गढ़वाल रेंज के आईजी राजीव स्वरूप ने लोगों से अपील की कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करें और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री न फैलाएं। मुख्यमंत्री धामी की सीबीआई जांच की घोषणा के बावजूद कई संगठन मांग कर रहे हैं कि जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो और कथित VIP की भूमिका की पूरी जांच हो।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़: पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर दर्ज FIR अब सवालों के घेरे में, क्या यह CBI जांच को भटकाने की कोशिश?

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देहरादून: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP संलिप्तता और सबूत मिटाने के आरोपों की जांच अब CBI के हाथों में जाने वाली है, लेकिन पर्यावरणविद् एवं पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर आधारित नई FIR ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस महानिरीक्षक (IG) राजीव स्वरूप ने शनिवार को प्रेस वार्ता में पुष्टि की कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने प्रकरण की फाइल CBI को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

डॉ. जोशी ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक को दी शिकायत में सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं, वायरल ऑडियो-वीडियो क्लिप्स का हवाला देते हुए अज्ञात “VIP” की संलिप्तता और साक्ष्यों को छिपाने या नष्ट करने के आरोप लगाए। इस आधार पर बसंत विहार थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें मुख्य फोकस उन VIP पर है जिन्हें सोशल मीडिया में चर्चित किया जा रहा है, साथ ही सबूत नष्ट करने के दावों पर।

हालांकि, यह FIR कई पक्षों से विवादास्पद साबित हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि FIR पीड़ित अंकिता के माता-पिता या परिवार द्वारा क्यों नहीं दर्ज की गई? उन्होंने इसे सरकार की मंशा पर संदेह का विषय बताया और दावा किया कि यह कदम पुराने केस में पहले से दर्ज FIR को दरकिनार कर नए सिरे से जांच को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. जोशी की तहरीर, जो मुख्य रूप से सोशल मीडिया अफवाहों पर आधारित है, CBI जांच के लिए मजबूत आधार नहीं बन सकती, क्योंकि मूल हत्याकांड की जांच SIT द्वारा पूरी हो चुकी है और तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि मूल जांच में पूरी गहनता बरती गई थी, जिसमें वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में SIT गठित की गई थी। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और कोई जमानत नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने स्वयं अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए CBI जांच की सिफारिश की है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई संदेह न रहे।
IG स्वरूप ने जनता से अपील की कि सोशल मीडिया की अफवाहों पर विश्वास न करें और यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं तो वे सीधे जांच एजेंसी को सौंपें।

फिलहाल, यह नई FIR और CBI को फाइल भेजने की प्रक्रिया ने मामले में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है। क्या डॉ. जोशी की तहरीर सच को उजागर करेगी या यह केवल राजनीतिक विवाद को बढ़ावा दे रही है? उत्तराखंड में जनता और राजनीतिक दल इसकी बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

उत्तराखंड : दीपक बिजल्वाण के खिलाफ कौन रच रहा साजिश?

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देहरादून : विधानसभा सीट को लेकर भाजपा के अंदर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही पार्टी के कुछ कार्यकर्ता और नेता हाल ही में भाजपा में शामिल हुए दीपक बिजल्वाण के खिलाफ दुष्प्रचार में जुटे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह विवाद मुख्य रूप से टिकट की दावेदारी से जुड़ा है, जहां बिजल्वाण की मजबूत लोकप्रियता पुराने दावेदारों के लिए चुनौती बन रही है।

दीपक बिजल्वाण पूर्व में उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट ने सभी मामलों में उन्हें क्लीन चिट दे दी है। इसी आधार पर 2025 के पंचायत चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल किया था। पार्टी सूत्र बताते हैं कि बिजल्वाण का स्थानीय स्तर पर अच्छा जनाधार है, जिससे यमुनोत्री सीट पर उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

हालांकि, उनके भाजपा में आते ही कुछ मौजूदा टिकट दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यमुनोत्री से दावेदारी कर रहे कुछ नेता अपनी स्थिति कमजोर होते देख बिजल्वाण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ताजा विवाद प्रसिद्ध समाजसेवी रोशन रतूड़ी से जुड़ा है। रतूड़ी को कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुराने घोटाले के अधूरे दस्तावेज भेजे, जिसके आधार पर उन्होंने एक वीडियो बनाया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे सबसे पहले पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ताओं ने शेयर किया।

इससे बिजल्वाण के विरोधियों को मौका मिला और उन्होंने इसे भुनाने की कोशिश की। लेकिन रोशन रतूड़ी ने मामले की गहराई से जांच की तो हाईकोर्ट का क्लीन चिट वाला आदेश सामने आया। इसके बाद रतूड़ी ने दूसरा वीडियो जारी किया, जिसमें उत्तरकाशी भाजपा जिला अध्यक्ष नागेंद्र सिंह के लेटरहेड पर लिखा एक पत्र भी दिखाया गया, जो बिजल्वाण की निर्दोषता की पुष्टि करता है।

पार्टी के अंदर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दीपक बिजल्वाण के आने से किसे परेशानी हो रही है? क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है या चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर करने की कोशिश? भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि इस मामले की पार्टी स्तर पर जांच हो रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है, जिसमें निलंबन या निष्कासन शामिल है।