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आज मकर संक्रांति पर बन रहे हैं कई शुभ योग, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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आज 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जो देवताओं का दिन माना जाता है।

इस वर्ष यह पर्व विशेष रूप से शुभ है क्योंकि कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग (सुबह 7:15 बजे से अगले दिन सुबह 3:03 बजे तक), साथ ही षटतिला एकादशी का संयोग और सूर्य-शुक्र की युति। इन योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना पुण्य प्रदान करता है।

शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण समय (अगस्त/उत्तर भारत के अनुसार, स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें):

ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए सर्वोत्तम): सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक।

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति मोमेंट): दोपहर लगभग 3:07 से 3:13 बजे के आसपास।

पुण्य काल / महा पुण्य काल (स्नान-दान का मुख्य समय): दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे या 5:45 बजे तक (कुछ स्रोतों में शाम 5:46 बजे तक)। इस दौरान स्नान, सूर्य अर्घ्य, दान और पूजा विशेष फलदायी होती है।

कुछ परंपराओं में पुण्य काल सुबह से शुरू होकर शाम तक माना जाता है, लेकिन मुख्य महा पुण्य काल संक्रांति के बाद का होता है।

स्नान-दान का महत्व और विधि:

मकर संक्रांति पर पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना) में स्नान से पाप नाश होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि नदी संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के दौरान तिल युक्त जल का उपयोग करें और मंत्र जपें:

स्नान मंत्र: ॐ आपो हि ष्ठा मयोभुवः… (या सूर्य मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः)।

दान का विशेष महत्व है – तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र, अन्न, तेल आदि दान से अक्षय पुण्य मिलता है। दान पुण्य काल में करें, जरूरतमंदों या ब्राह्मण को दें।

पूजा विधि (सूर्य देव की उपासना):

प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।

सूर्य देव की ओर मुख करके जल, अक्षत, फूल, गुड़-तिल से अर्घ्य दें।

सूर्य मंत्र जप: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (108 बार या जितना संभव)।

सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

खिचड़ी बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें (तिल-गुड़ मिलाकर)।

परिवार सहित दान-पुण्य करें और पतंग उड़ाएं (उत्तर भारत में लोकप्रिय)।

सैनिक स्कूल के एकेडमिक ब्लॉक में लगी भीषण आग, समय पर दमकल पहुंचने से टला बड़ा हादसा

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हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित प्रतिष्ठित सुजानपुर टिहरा सैनिक स्कूल में मंगलवार दोपहर अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। आग की लपटें और घना धुआं देखकर स्कूल प्रशासन और आसपास के लोग घबरा गए, लेकिन दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया। घटना में किसी की जान-माल को नुकसान नहीं पहुंचा, हालांकि स्कूल भवन के एक हिस्से को काफी क्षति हुई है।

जानकारी के अनुसार, आग स्कूल के एकेडमिक ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर लगी। दोपहर करीब 1 बजे के आसपास भवन से धुआं उठता देख स्कूल प्रबंधन ने तुरंत अलर्ट किया और पुलिस, प्रशासन तथा दमकल विभाग को सूचना दी। देखते ही देखते आग ने एक हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां रखा सामान और ढांचा प्रभावित हुआ।

सूचना मिलते ही सुजानपुर दमकल विभाग की टीम फायर ब्रिगेड वाहनों के साथ मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया और इसे अन्य हिस्सों में फैलने से रोक दिया। यदि आग फैलती तो पूरे स्कूल परिसर को भारी नुकसान हो सकता था। पुलिस और दमकल ने क्षेत्र को सुरक्षित किया, जबकि आसपास के लोग भी घटनास्थल पर पहुंचे। घटना के दौरान स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

सुजानपुर दमकल विभाग के इंचार्ज राकेश कुमार ने बताया, “सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण कर लिया। फिलहाल नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आग लगने के कारणों की जांच जारी है। पुलिस और स्कूल प्रबंधन संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं।

प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि आग लगने वाले भवन में मरम्मत और रिपेयरिंग का कार्य चल रहा था, जिसके दौरान तकनीकी खराबी या किसी चूक से आग लगी होगी। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। राहत की बात यह रही कि इन दिनों सैनिक स्कूल में छुट्टियां चल रही हैं, इसलिए परिसर में छात्र मौजूद नहीं थे। यदि कक्षाएं चल रही होतीं तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को दी कड़ी चेतावनी, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी जारी

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नई दिल्ली : भारतीय सेना ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि सीमा पर किसी भी गलत हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कॉन्फ्रेंस में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर बात की और पाकिस्तान को ललकारा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अभी भी जारी है और भारत की सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी कैंपों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, जनरल द्विवेदी ने कहा, “हमारे पास उपलब्ध खुफिया जानकारी के आधार पर, पाकिस्तान में करीब 8 सक्रिय आतंकी कैंप हैं, जिनमें से 2 इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) सेक्टर में और 6 लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) सेक्टर में स्थित हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सेनाएं इन कैंपों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी कर रही हैं और किसी भी खतरे का तुरंत जवाब दिया जाएगा।

जनरल द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को तीनों सेनाओं, थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सैन्य रणनीति का एक शानदार उदाहरण है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को दर्शाता है। ऑपरेशन की सफलता पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इसे बेहद सटीकता से प्लान और क्रियान्वित किया गया। ऑपरेशन की कुल अवधि 88 घंटे रही, जिसमें शुरुआती 22 मिनट में ही मुख्य हमले शुरू हो गए थे।

सेना प्रमुख ने आगे कहा, “इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को गहराई तक क्षति पहुंचाई है और पाकिस्तान की पुरानी परमाणु धमकी की हवा निकाल दी है। भविष्य में यदि पाकिस्तान की ओर से कोई भी उकसावेपूर्ण कार्रवाई की गई, तो भारत इसका कड़ा जवाब देगा।” उन्होंने पाकिस्तान को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हुई है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की खबरें लगातार आ रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने न केवल आतंकी नेटवर्क को कमजोर किया है, बल्कि भारत की सैन्य तैयारियों को भी मजबूत किया है। जनरल द्विवेदी की यह टिप्पणी पाकिस्तान को एक मजबूत संदेश देती है कि भारत किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त, मौत हुई तो देना होगा भारी मुआवजा

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्ते के काटने से किसी बच्चे, बुजुर्ग, कमजोर व्यक्ति या किसी भी नागरिक की मौत या गंभीर चोट लगने पर संबंधित राज्य सरकार को भारी मुआवजा चुकाना पड़ सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई।

पीठ ने कहा, “पिछले 75 वर्षों से सरकारों ने आवारा कुत्तों की समस्या पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। हर कुत्ते के काटने से हुई मौत या चोट के लिए हम राज्य सरकारों पर भारी मुआवजा लगा सकते हैं।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकारें “पूरी तरह असफल” रहीं हैं, जिससे समस्या हजार गुना बढ़ गई है।

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी, जो पशु कल्याण संगठनों की ओर से पेश हुईं, ने कहा कि कुत्तों का हमला एक “भावनात्मक मुद्दा” है और स्टेरिलाइजेशन (नसबंदी) तथा मानवीय व्यवहार ही प्रभावी समाधान हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नियामक संस्थाएं अपना काम ठीक से नहीं कर रही हैं और फंड का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा। गुरुस्वामी ने खुद कुत्ते के हमले का शिकार होने का जिक्र किया।

इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने पलटवार करते हुए कहा, “कुत्तों को खिलाने वाले लोग भी जिम्मेदार हैं। अगर आप उन्हें पालना चाहते हैं तो अपने घर में रखें। उन्हें सड़कों पर क्यों घूमने दें, कूड़ा फैलाने और लोगों को डराने-काटने दें, जिससे मौत हो जाती है?” न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि कुत्ते डरने वाले इंसान को सूंघकर हमला कर सकते हैं, और भावनाएं केवल कुत्तों के लिए नहीं, इंसानों के लिए भी होनी चाहिए।

पीठ ने मौखिक रूप से पूछा कि जब कुत्ता प्रेमी संगठन कुत्तों को खाना खिलाते हैं और नौ साल के बच्चे की मौत हो जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? कोर्ट ने कहा, “क्या हमें आंखें बंद करके चीजों को होने देना चाहिए?” पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से गंभीर सवाल पूछने की बात कही और कहा कि जानवरों से इंसानों को होने वाले दर्द पर भी विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने इस मामले में आगे सुनवाई जारी रखने का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी आवारा कुत्तों के प्रबंधन में सख्त नीति अपनाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है, जिसमें नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम्स के साथ-साथ फीडर्स की जवाबदेही भी शामिल हो।

2026 में भारतीय सिनेमा में बायोपिक का धमाका : भगवान परशुराम से लेकर PM मोदी तक के जीवन पर रिलीज होंगी फ़िल्में

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नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा इस साल बायोपिक्स के जरिए असल जिंदगी की प्रेरणादायक कहानियों को बड़े पर्दे पर ला रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों की मशहूर हस्तियों, माइथोलॉजिकल फिगर से लेकर वैज्ञानिक, संगीतकार, राजनीतिक नेता, पुलिस अधिकारी और आध्यात्मिक गुरु पर आधारित ये फिल्में ड्रामा, इमोशन और जानकारी का शानदार मिश्रण पेश करेंगी। ये सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानियां बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने के लिए तैयार हैं, जहां दर्शक न केवल मनोरंजन पाएंगे बल्कि प्रेरणा भी लेंगे। 2026 की इन बायोपिक्स में से कुछ पहले ही शूटिंग पूरी कर चुकी हैं, जबकि अन्य पोस्ट-प्रोडक्शन या प्री-प्रोडक्शन स्टेज में हैं। आइए एक नजर डालते हैं इस साल की सबसे चर्चित बायोपिक्स पर:

महावतार विक्की कौशल भगवान परशुराम के रूप में नजर आएंगे इस माइथोलॉजिकल एपिक में। अमर कौशिक द्वारा निर्देशित और दिनेश विजन की मद्दॉक फिल्म्स प्रोडक्शन वाली यह VFX से भरपूर फिल्म मूल रूप से क्रिसमस 2026 पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन शूटिंग, पोस्ट-प्रोडक्शन और विजुअल इफेक्ट्स की वजह से इसमें देरी की संभावना जताई जा रही है। मेकर्स की ओर से अभी कोई आधिकारिक अपडेट नहीं आया है, लेकिन फैंस इस एक्शन-पैक्ड धार्मिक ड्रामा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

इलैयाराजा दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा की बायोपिक में धनुष ‘संगीत के राजा’ का किरदार निभा रहे हैं। कमल हासन द्वारा 2024 में घोषित इस फिल्म का निर्देशन अरुण माथेश्वरन कर रहे हैं। प्री-प्रोडक्शन स्टेज में चल रही यह फिल्म इलैयाराजा के संगीतमय सफर को दिखाएगी। रिलीज डेट अभी कन्फर्म नहीं है, लेकिन 2026 में आने की उम्मीद है।

कलाम: द मिसाइल मैन ऑफ इंडिया पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की बायोपिक में धनुष लीड रोल में हैं। 2025 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में घोषित इस फिल्म का निर्देशन ओम राउत कर रहे हैं। वैज्ञानिक से राष्ट्रपति बने कलाम के जीवन, मिसाइल प्रोग्राम और प्रेरणादायक सफर पर फोकस रहेगा। प्रोड्यूसर्स अभिषेक अग्रवाल और टी-सीरीज के भूषण कुमार हैं। रिलीज की उम्मीद 2026 में है, हालांकि आधिकारिक तारीख का इंतजार है।

मां वंदे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक ‘मां वंदे’ उनके 75वें जन्मदिन पर 2025 में घोषित हुई थी। सिल्वर कास्ट क्रिएशंस प्रोडक्शन वाली इस फिल्म में मलयालम अभिनेता उन्नी मुकुंदन मोदी का किरदार निभा रहे हैं। निर्देशक क्रांति कुमार सी.एच. हैं। फिल्म मोदी के बचपन से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर पर फोकस करेगी, खासकर उनकी मां हीराबेन से रिश्ते पर। शूटिंग शुरू हो चुकी है और 2026 में रिलीज की उम्मीद है।

मारिया आईपीएस (राकेश मारिया बायोपिक) जॉन अब्राहम और रोहित शेट्टी की पहली फिल्म, जो पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के जीवन पर आधारित है। 1993 बॉम्बे ब्लास्ट और 26/11 हमलों की जांच में उनकी भूमिका को दिखाएगी। शूटिंग चल रही है, जिसमें इंटरोगेशन सीन शामिल हैं। 2026 में रिलीज की संभावना मजबूत है।

वी शांताराम: द रिबेल ऑफ इंडिया सिनेमा महान फिल्ममेकर वी. शांताराम की बायोपिक में सिद्धांत चतुर्वेदी टाइटल रोल में हैं, जबकि तमन्नाह भाटिया जयश्री (शांताराम की दूसरी पत्नी) का किरदार निभा रही हैं। अभिजीत शिरीष देशपांडे निर्देशित यह फिल्म शांताराम के सिनेमा में योगदान और इनोवेशन को दिखाएगी। अक्टूबर-नवंबर 2026 में रिलीज की संभावना है।

व्हाइट विक्रांत मैसी आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का किरदार निभा रहे हैं। मोंटू बस्सी निर्देशित यह राजनीतिक थ्रिलर श्री श्री रविशंकर के कोलंबिया पीस प्रोसेस में योगदान पर फोकस करेगी। शूटिंग पूरी हो चुकी है और 2026 में विश्वव्यापी रिलीज के लिए तैयार है।

उत्तराखंड : रिटायर्ड साइंटिस्ट से साइबर ठगों ने की लाखों की ठगी, APK फाइल से मोबाइल हैक कर लगाया चूना

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देहरादून: देहरादून में साइबर अपराधियों ने एक 82 वर्षीय रिटायर्ड साइंटिस्ट को अपना शिकार बनाया है। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP), देहरादून से वरिष्ठ साइंटिस्ट पद से सेवानिवृत्त डॉ. पीसी सेमवाल (प्रेम बल्लभ सेमवाल) के साथ ठगों ने ऑनलाइन पेमेंट समस्या के बहाने लाखों रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित के बेटे संजय सेमवाल ने जोगीवाला निवासी होने के नाते थाना नेहरू कॉलोनी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले की जांच में जुटी हुई है।

शिकायत के अनुसार, 23 दिसंबर को डॉ. सेमवाल के ऑनलाइन पेमेंट ऐप (गूगल पे) में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण उनका अकाउंट निष्क्रिय हो गया था। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने गूगल पर हेल्पलाइन नंबर सर्च किया। कुछ ही मिनटों में एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल की और खुद को एसबीआई बैंक का कार्यकारी अधिकारी बताया।

ठग ने पेमेंट समस्या दूर करने का दावा करते हुए एक APK फाइल शेयर की, जिसे इंस्टॉल करने के निर्देश दिए। डॉ. सेमवाल को इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने फाइल इंस्टॉल कर ली। इसके बाद ठगों ने उनके मोबाइल को रिमोटली हैक कर बैंक खाते से 3.39 लाख रुपये निकाल लिए।

थाना नेहरू कॉलोनी के प्रभारी संजीत कुमार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी फर्जी हेल्पलाइन, लोकलुभावने ऑफर, निवेश स्कीम, टिकट बुकिंग या धन दोगुना करने के प्रलोभन में न आएं।

  • गूगल से कभी भी कस्टमर केयर नंबर सर्च न करें, बल्कि आधिकारिक बैंक वेबसाइट या ऐप से ही संपर्क करें।
  • अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर दोस्ती या बातचीत न करें।
  • किसी भी अनजान कॉल पर लालच में न आएं, कॉलर की पहचान की जांच करें।
  • ऑनलाइन जॉब, निवेश या सब्सक्रिप्शन से पहले संबंधित कंपनी की वेबसाइट वेरिफाई करें।
  • शक होने पर तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें।
  • वित्तीय साइबर अपराध होने पर 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत कॉल करें।
  • पुलिस का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे इन्वेस्टमेंट और टेक्निकल सपोर्ट स्कैम में लोग छोटे इनाम देकर भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ऐंठते हैं।
  • ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

उत्तराखंड : BJP में संगठनात्मक फेरबदल की हलचल तेज़, दागदार चेहरों से बना सकती है दूरी 

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देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब राज्य इकाई में भी नेतृत्व और प्रमुख पदाधिकारियों में फेरबदल की कवायद तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनावों (2027) को ध्यान में रखते हुए ऐसे चेहरों से दूरी बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिनकी जनता के बीच छवि विवादास्पद या नकारात्मक मानी जाती है।

भाजपा का स्पष्ट मकसद है कि चुनाव प्रचार के दौरान कोई विवादित नेता फ्रंटलाइन पर न दिखे। इसके बजाय पार्टी बेदाग छवि वाले, लोकप्रिय और साफ-सुथरे नेताओं को आगे लाने पर जोर दे रही है। उत्तराखंड में 2017 से सत्ता में काबिज भाजपा अब लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है। हाल ही में सभी सात मोर्चों (युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा) की प्रदेश टीमों की घोषणा के बाद संगठन को हर मोर्चे पर मजबूत दिखाने की कोशिश और तेज हो गई है।

पार्टी अब उन नेताओं की भूमिका सीमित करने या बदलने की दिशा में काम कर रही है, जो हाल के वर्षों में या पहले किसी विवाद में घिरे रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व की मंशा यही है कि चुनावी मैदान में कोई अनावश्यक विवाद न उभरे। इस फेरबदल की प्रक्रिया में युवा नेताओं को खास तवज्जो दी जा रही है—जैसा कि हाल के संगठनात्मक फैसलों में साफ नजर आ रहा है।

दूसरी पंक्ति के ऊर्जावान और युवा चेहरों को प्रमोट करके भाजपा दोहरे मकसद को साधना चाहती है, एक तरफ युवा वर्ग और नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ना, दूसरी तरफ भविष्य की मजबूत नेतृत्व पंक्ति तैयार करना। यह रणनीति न केवल संगठन को और मजबूत बनाएगी, बल्कि जनता के बीच पार्टी की सकारात्मक और आधुनिक छवि को भी मजबूती देगी।

सूत्रों की मानें तो जल्द ही प्रदेश स्तर पर कई प्रमुख पदों पर नए और युवा चेहरों की घोषणा हो सकती है। यह बदलाव उत्तराखंड में भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई गति देगा और लगातार तीसरी जीत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।

उत्तराखंड के बड़कोट में भालू का हमला, महिला गंभीर रूप से घायल, हायर सेंटर रेफर

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बड़कोट (उत्तरकाशी): उत्तराखंड के अपर वन प्रभाग बड़कोट के रवांई रेंज में आज एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। ग्राम बड़कोट के नोनीयाली नामक तोक में अमरा देवी पत्नी गजेंद्र सिंह पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। इस हमले में महिला बुरी तरह घायल हो गईं।

 

स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़कोट पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। डॉक्टरों की सलाह पर महिला की स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) रेफर करने की प्रक्रिया जारी है। वन विभाग के अनुसार, उनका उपचार जारी है और आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

 

वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई है। क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की अपील की गई है। अभी तक घायल महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन हमले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जा रहा है।

 

उत्तराखंड में हाल के महीनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है, खासकर भालुओं के हमलों में। जलवायु परिवर्तन, भोजन की कमी और हाइबरनेशन चक्र में बदलाव के कारण भालू गांवों के नजदीक आ रहे हैं। वन विभाग ने ऐसे क्षेत्रों में जागरूकता अभियान और सुरक्षा उपाय तेज कर दिए हैं।

 

प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि जंगल या घने इलाकों में अकेले न जाएं, बच्चों और महिलाओं पर विशेष नजर रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग या स्थानीय पुलिस को दें।

उत्तराखंड में डोली धरती, यहां आया 3.5 तीव्रता का भूकंप

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बागेश्वर: उत्तराखंड की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से डोली। बागेश्वर जिले में आज सुबह 7:25 बजे रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जबकि इसका केंद्र अक्षांश 29.93 N और देशांतर 80.07 E पर रहा।

यह झटका इतना मजबूत था कि स्थानीय निवासियों ने इसे साफ महसूस किया। कई लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए, हालांकि अभी तक किसी तरह के नुकसान, जान-माल की हानि या भूस्खलन की कोई खबर नहीं मिली है।

उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां के अधिकांश जिले जोन-5 में आते हैं। बागेश्वर भी इसी उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में छोटी-मोटी भूकंपीय गतिविधियां आम हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों को सतर्क रहने की याद दिलाती हैं।

प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही, भूकंप के दौरान सुरक्षित जगह पर पहुंचने, भारी सामान से दूर रहने और आपातकालीन नंबरों पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड ने NDMA को सौंपी PDNA रिपोर्ट: 2025 की आपदाओं से ₹15,103 करोड़ का आर्थिक प्रभाव

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देहरादून: उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने 2025 में राज्य में आई भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन वाली पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भारत सरकार को भेज दी है।

यह रिपोर्ट राज्य की पर्वतीय भौगोलिक स्थिति, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और मानसून की तबाही को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उत्तराखंड पूरे देश में पहला राज्य बन गया है जहां पूरे प्रदेश स्तर पर एक समग्र PDNA किया गया।

कुल आर्थिक प्रभाव

  • रिपोर्ट में आपदाओं से राज्य पर कुल ₹15,103.52 करोड़ का समग्र आर्थिक प्रभाव (Total Economic Impact) अनुमानित किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
  • प्रत्यक्ष क्षति (Damages): ₹3,792.38 करोड़
  • आर्थिक हानि (Losses): ₹312.19 करोड़
  • पुनर्वास, पुनर्निर्माण एवं ‘बिल्ड बैक बेटर’ आवश्यकता: ₹10,998.95 करोड़।

सामाजिक क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित

  • सामाजिक क्षेत्र (Social Sector) में कुल ₹4,966.85 करोड़ का प्रभाव दर्ज हुआ।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र: ₹2,579.47 करोड़ (सबसे ज्यादा प्रभावित)।
  • आवास: ₹2,005.48 करोड़।
  • शिक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित रही।

अवसंरचना पर भारी असर

  • अवसंरचना क्षेत्र (Infrastructure Sector) में कुल ₹6,225.69 करोड़ का नुकसान आंका गया।
  • जलापूर्ति: ₹4,048.88 करोड़ (सर्वाधिक प्रभावित)।
  • सड़कें: ₹1,963.29 करोड़।
  • विद्युत: ₹213.52 करोड़।
  • उत्पादक क्षेत्र में पर्यटन सबसे ज्यादा प्रभावित।
  • उत्पादक क्षेत्र (Productive Sector) में कुल ₹893.94 करोड़ का प्रभाव पड़ा।
  • पर्यटन: ₹744.94 करोड़ (सबसे बड़ा नुकसान)
  • कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य और वानिकी भी प्रभावित हुए।

भविष्य के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण

क्रॉस-कटिंग सेक्टर (Cross Cutting Sector) में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के तहत ₹3,017.04 करोड़ की पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण आवश्यकता बताई गई है। इससे भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

सरकार का लक्ष्य: सुरक्षित और सुदृढ़ उत्तराखंड

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि रिपोर्ट का उद्देश्य सिर्फ नुकसान गिनाना नहीं, बल्कि ‘बिल्ड बैक बेटर’ सिद्धांत पर आधारित मजबूत पुनर्वास और पुनर्निर्माण का रोडमैप तैयार करना है। इससे राज्य को अधिक सुरक्षित, आपदा-रोधी और जलवायु-अनुकूल बनाया जा सकेगा।

इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार केंद्र से विशेष वित्तीय सहायता की उम्मीद कर रही है, ताकि प्रभावित इलाकों में जल्द पुनर्बहाली, आजीविका संरक्षण और बुनियादी ढांचे का मजबूत पुनर्निर्माण हो सके।