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उत्तराखंड: लोक सूचना अधिकारी एवं अपीलीय अधिकारी सम्मानित

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IMG 20260109 WA0048उत्तराखंड:सूचना का अधिकार जन सशक्तिकरण 

•आरटीआई अधिनियम के तहत सराहनीय कार्य करने वाले लोक सूचना तथा अपीलीय अधिकारियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया सम्मानित 

 देहरादून :: 9 जनवरी मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में आरटीआई अधिनियम (सूचना का अधिकार कानून) के लागू होने के 20 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में आरटीआई अधिनियम के तहत सराहनीय कार्य करने वाले 5 लोक सूचना अधिकारियों तथा 5 अपीलीय अधिकारियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने जिन अधिकारियों को सम्मानित किया उनमें जिलाधिकारी बागेश्वर  आकांक्षा कोंडे (तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार),  अभिनव शाह मुख्य विकास अधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी  आयुष अग्रवाल, लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड के उपसचिव डॉ. प्रशांत, उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा  एस.एस. चौहान, उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अनु सचिव,/ वर्तमान में श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली, पिथौरागढ़ ललित मोहन जोशी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामनगर वन प्रभाग कमला शर्मा, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा, से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी से  लियाकत अली खान और जिला विकास अधिकारी हरिद्वार  वेद प्रकाश शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है और पारदर्शी शासन व्यवस्था की आधारशिला है। इस अधिनियम ने शासन और नागरिकों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही का एक नया अध्याय खोला है। उन्होंने कहा कि इस क़ानून ने प्रत्येक नागरिक को शासन की नीतियों, निर्णयों और कार्यप्रणाली को समझने, प्रश्न पूछने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की शासन व्यवस्था में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस, ऑनलाइन पोर्टल, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और जन-सुनवाई जैसे माध्यमों ने शासन और जनता के बीच संबंध को और मजबूत बनाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी शासन व्यवस्था की दिशा में सतत कार्य कर रही है। राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है और अधिकांश सरकारी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे नागरिकों को जानकारी और सेवाओं की उपलब्धता में सुगमता आई है। मुख्यमंत्री ने आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल और आयोग की हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे न्याय प्रक्रिया और भी सुलभ हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक राज्य सूचना आयोग में 13 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में केवल 700 प्रकरण लंबित हैं, जो आयोग की दक्षता का प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिक अधिकारों की रक्षा में प्रशंसनीय भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही इसके उपयोग में जिम्मेदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में इस अधिनियम का दुरुपयोग देखा गया है, जिस पर रोक लगाने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विभाग उन सूचनाओं को अपनी वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रदर्शित करे जिनकी बार-बार मांग की जाती है, ताकि नागरिकों को स्वतः जानकारी मिल सके और पारदर्शिता बढ़े।

इस अवसर पर मुख्य सूचना आयुक्त  राधा रतूड़ी, राज्य सूचना आयुक्त  देवन्द्र कुमार आर्य,  दलीप सिंह कुंवर कुशलानंद, उत्तराखण्ड अवस्थापन अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष  विश्वास डाबर आदि मौजूद रहे।

        (समाचार रिपोर्ट देहरादून से डा. हरीश गौड़, ) 

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड: CBI जांच सिफारिश पर कांग्रेस नेता धस्माना बोले- यह न्याय की शुरुआत का पहला कदम, कोर्ट की निगरानी जरूरी

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देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में राज्य सरकार द्वारा CBI जांच की सिफारिश किए जाने पर कांग्रेस ने इसे आंदोलन का असर बताया, लेकिन जांच की विश्वसनीयता के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी की मांग को दोहराया।

एआईसीसी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से राज्य भर में चल रहे आंदोलन का ही प्रभाव है कि आज सरकार को केंद्र को CBI जांच की सिफारिश भेजनी पड़ी। उन्होंने इसे अंकिता की आत्मा को न्याय दिलाने की लड़ाई का पहला कदम करार दिया।

धस्माना ने आगे कहा, “केंद्र सरकार द्वारा राज्य की सिफारिश स्वीकार करना और CBI जांच को न्यायिक निगरानी में कराने का आदेश ही असली सफलता होगी। अन्यथा आज देश में CBI पर किसी का भरोसा नहीं है। इसलिए कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में जांच कराने के आदेश तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में संलिप्त VIP और साक्ष्य मिटाने वालों का पता लगाने के लिए कोर्ट की देखरेख में जांच आवश्यक है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अंकिता के परिजनों की मांग पर मामले की CBI जांच की सिफारिश की है। परिजनों ने हाल ही में CM से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में CBI जांच की मांग की थी। मामले में पहले SIT जांच के बाद तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है, लेकिन हालिया ऑडियो क्लिप्स और VIP एंगल के आरोपों ने फिर विवाद खड़ा कर दिया है। अब केंद्र सरकार इस सिफारिश पर अंतिम फैसला लेगी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: पीड़ित परिवार की मांग पर CM धामी ने की CBI जांच की सिफारिश

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देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच कराने की सिफारिश कर दी है। यह निर्णय स्वर्गीय अंकिता के माता-पिता के अनुरोध और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में अंकिता के परिजनों से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग रखी थी।

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य शुरू से ही निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने कहा, “घटना की जानकारी मिलते ही सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया। सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया और प्रभावी पैरवी के कारण उन्हें जमानत नहीं मिली। SIT की गहन जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।”

CM धामी ने भावुक होते हुए कहा, “अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थीं, वह हमारी बहन और बेटी थीं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार किसी भी साक्ष्य या तथ्य की अनदेखी नहीं करेगी। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं और उनकी जांच जारी है।

यह मामला 2022 में सामने आया था, जब रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। तीन आरोपियों को पहले ही सजा हो चुकी है, लेकिन हालिया विवादों और परिवार की मांग के बाद CBI जांच की सिफारिश की गई है। अब इस पर केंद्र सरकार का अंतिम निर्णय होगा।

सफलता: TEER तकनीक से 65 वर्षीय बुजुर्ग का बिना सर्जरी इलाज

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ऋषिकेश: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग ने हृदय रोग के इलाज में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के चिकित्सकों ने अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) तकनीक का उपयोग कर 65 वर्षीय बुजुर्ग के हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज को सफलतापूर्वक ठीक किया, जिससे उनकी हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी।

रुड़की तहसील के मोहनपुर जट गांव निवासी जगत वीर सिंह वर्ष 2023 में हृदय में स्टेंट डलवाने के बाद फिर से सांस फूलने और चलने-फिरने में भारी दिक्कत महसूस कर रहे थे। हरिद्वार के विभिन्न अस्पतालों में जांच के बाद उनके माइट्रल वाल्व में सीवियर रिगर्जिटेशन (गंभीर लीकेज) पाया गया और ओपन हार्ट सर्जरी की सलाह दी गई। हालांकि, उम्र अधिक होने और पहले सर्जरी के इतिहास के कारण मामला जोखिमभरा था।

एम्स के एडिशनल प्रोफेसर और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बरुण कुमार के नेतृत्व में टीम ने 30 दिसंबर 2025 को टीईईआर प्रक्रिया अपनाई। टीम में डॉ. सुवेन कुमार, वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी और एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार शामिल थे। डॉ. बरुण कुमार ने बताया कि सामान्य हृदय पंपिंग क्षमता 60 प्रतिशत होती है, लेकिन मरीज की मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। यह बिना सर्जरी की इन्टरवेंशनल प्रक्रिया है, जो उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई।

इलाज के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उन्हें सांस फूलने, थकान और दैनिक गतिविधियों में कठिनाई जैसे लक्षणों से राहत मिली। बुजुर्ग को तीन दिन पहले अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

टीईईआर तकनीक क्या है?

यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें छाती खोले बिना जांघ की नस से कैथेटर के माध्यम से एक छोटी क्लिप हृदय तक पहुंचाई जाती है। यह क्लिप माइट्रल वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को जोड़कर रक्त के पिछड़े प्रवाह को रोकती है, जिससे हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए आदर्श है जो ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अनुपयुक्त होते हैं।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राजकीय इंटर कॉलेज प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान पुनर्निर्धारण पर लगाई रोक

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नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य के राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं के चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान के पुनर्निर्धारण पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में निर्धारित की गई है। यह फैसला न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सुना। याचिका दायर करने वाले प्रवक्ताओं में सुशील तिवारी, धीरेंद्र मिश्रा, विनोद पैन्यूली और शंकर बोरा सहित 400 से अधिक शिक्षक शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं का मुख्य दावा

याचिकाकर्ताओं ने उत्तराखंड सरकारी सेवक वेतन नियमावली (प्रथम संशोधन) 2025 और 18 दिसंबर 2025 को वित्त सचिव द्वारा जारी पुनर्निर्धारण आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि:

  • 2016 की मूल वेतन नियमावली के अनुसार चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान मिलने पर एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट (Granted one increment) देय था।
  • सरकार ने प्रथम संशोधन 2025 के जरिए इस इंक्रीमेंट को समाप्त कर दिया और इसे 1 जनवरी 2016 से भूतलक्षी प्रभाव से लागू कर दिया।
  • यह संशोधन केवल शैक्षणिक संवर्ग (प्रवक्ता और एलटी ग्रेड शिक्षकों) पर लागू किया गया है, जबकि अन्य राज्य कर्मचारियों को यह लाभ जारी है।
  • सरकार भूतलक्षी प्रभाव से पहले से मिल चुका इंक्रीमेंट वापस नहीं ले सकती। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है तथा सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के विरुद्ध है।

सरकार का आदेश क्या था?

18 दिसंबर 2025 को जारी वित्त सचिव के आदेश में निर्देश दिए गए थे कि चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान का पुनर्निर्धारण नए संशोधित नियमों के अनुसार किया जाए। इससे हजारों प्रवक्ताओं के वेतन में कमी आ सकती थी, जिसके खिलाफ शिक्षकों ने तुरंत हाईकोर्ट का रुख किया।

कोर्ट का फैसला

सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सरकार के 18 दिसंबर 2025 के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि मामले की गहराई से जांच जरूरी है और सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

यह फैसला उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत प्रवक्ताओं के लिए बड़ी राहत है। शिक्षक संगठनों ने इसे अपनी जीत बताया है और कहा है कि यह शिक्षकों के हक की रक्षा करेगा। मामले की अगली सुनवाई में सरकार का जवाब तय करेगा कि क्या संशोधन नियम वैध हैं या नहीं।

पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड का आरोपी श्रीकांत पंगारकर यहां से लड़ रहा चुनाव

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जालना (महाराष्ट्र)। पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश की 2017 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में आरोपी श्रीकांत पंगारकर 15 जनवरी को होने वाले जालना नगर निगम चुनाव में वार्ड 13 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतर गए हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा और अन्य दलों के उम्मीदवार हैं, जबकि एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस वार्ड से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। पंगारकर ने नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन सार्वजनिक विरोध के बाद पार्टी ने उनकी सदस्यता को स्थगित कर दिया था।

गौरी लंकेश की 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने देशभर में व्यापक चर्चा और बहस को जन्म दिया था। पंगारकर को इस मामले में अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, वे 2018 में महाराष्ट्र एटीएस द्वारा नल्लासोपारा हथियार बरामदगी मामले में भी आरोपी हैं, जिसमें विस्फोटक अधिनियम, यूएपीए सहित गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। कर्नाटक हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में उन्हें जमानत दे दी थी।

पंगारकर का राजनीतिक सफर पुराना है। वे 2001 से 2006 तक अविभाजित शिवसेना के सदस्य के रूप में जालना नगर परिषद के पार्षद रह चुके हैं। 2011 में शिवसेना द्वारा टिकट न मिलने के बाद वे दक्षिणपंथी संगठन हिंदू जनजागृति समिति से जुड़ गए थे।

चुनाव अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कानूनी रूप से केवल दोषी ठहराए गए व्यक्ति ही चुनाव लड़ने से वंचित होते हैं, इसलिए आरोपी होने मात्र से उनकी उम्मीदवारी वैध है। हालांकि, विपक्षी दलों ने ऐसे गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति के चुनाव मैदान में उतरने की आलोचना की है।

उत्तराखंड : प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, घंटाघर के पास अवैध मजार पर चला बुलडोजर

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देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी है। बीती रात देहरादून के घंटाघर के पास एचएनबी कॉम्प्लेक्स में बने अवैध मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

नगर निगम, एमडीडीए और नगर प्रशासन की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। मौके पर नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम हरिगिरि, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्रवाई में मजार का मलबा और टीन शेड पूरी तरह हटा दिया गया।

नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पहले इस अवैध संरचना का सर्वे किया गया था। एमडीडीए ने भूमि और निर्माण संबंधी दस्तावेज मांगने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। संरचना हटाने के दौरान कोई अवशेष नहीं मिले।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में देहरादून जिला प्रशासन की बैठक में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के काम को तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। शहर और आसपास सरकारी भूमि पर बने दो दर्जन से अधिक अवैध मजारों की पहचान की गई है।

राज्यव्यापी अभियान के तहत धामी सरकार ने अब तक करीब 11 हजार एकड़ सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया है। साथ ही 573 अवैध मजारों को हटाया जा चुका है। कुछ मामलों में इन अवैध निर्माणों को वक्फ बोर्ड में भी दर्ज कराने की कोशिश की गई थी।

सरकारी नौकरी: 312 पदों पर निकली भर्ती, इस दिन तक कर सकेंगे आवेदन

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सरकारी नौकरी: भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने मिनिस्टीरियल और आइसोलेटेड कैटेगरी के तहत कुल 312 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती सेंट्रलाइज्ड एम्प्लॉयमेंट नोटिस (CEN) नंबर 08/2025 के तहत की जा रही है।

इस भर्ती में सबसे ज्यादा 202 पद जूनियर ट्रांसलेटर (हिंदी) के लिए हैं। इसके अलावा चीफ लॉ असिस्टेंट के 22 पद, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के 7 पद, सीनियर पब्लिसिटी इंस्पेक्टर के 15 पद, स्टाफ एंड वेलफेयर इंस्पेक्टर के 24 पद शामिल हैं। तकनीकी कैटेगरी में साइंटिफिक असिस्टेंट (ट्रेनिंग) के 2 पद, लैब असिस्टेंट ग्रेड-3 (केमिस्ट एंड मेटलर्जिस्ट) के 39 पद और साइंटिफिक सुपरवाइजर का 1 पद रखा गया है।

योग्यता मानदंड

  • पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग है:
  • जूनियर ट्रांसलेटर (हिंदी): हिंदी या अंग्रेजी में मास्टर डिग्री, साथ ही ट्रांसलेशन में डिप्लोमा/सर्टिफिकेट या संबंधित अनुभव।
  • चीफ लॉ असिस्टेंट और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर: मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से लॉ डिग्री, साथ ही वकालत का अनुभव।
  • तकनीकी पदों के लिए: विज्ञान स्ट्रीम में डिग्री या डिप्लोमा।
  • विस्तृत योग्यता के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें।

आयु सीमा

  • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष।
  • अधिकतम आयु: पद के अनुसार 30 से 40 वर्ष तक (01 जनवरी 2026 के आधार पर)।
  • आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/EWS/PwBD) को सरकारी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।

वेतनमान

  • चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार आकर्षक सैलरी मिलेगी:
  • अधिकांश पदों पर बेसिक पे 35,400 रुपये प्रति माह।
  • उच्च पदों जैसे चीफ लॉ असिस्टेंट पर 44,900 रुपये तक।
  • इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य रेलवे सुविधाएं शामिल होंगी।

आवेदन शुल्क

  • सामान्य/OBC/EWS: 500 रुपये।
  • SC/ST/महिला/Ex-Servicemen/PwBD: 250 रुपये।
  • परीक्षा देने पर जनरल कैटेगरी को 400 रुपये और आरक्षित को पूरा 250 रुपये रिफंड मिलेगा।

आवेदन कैसे करें

  • आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है:
  • आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाएं।
  • न्यू रजिस्ट्रेशन करें और अकाउंट बनाएं।
  • लॉगिन करके फॉर्म भरें, दस्तावेज अपलोड करें।
  • शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट करें।
  • प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।

महत्वपूर्ण तारीखें:

  • आवेदन शुरू: 30 दिसंबर 2025।
  • अंतिम तिथि: 29 जनवरी 2026 (रात 11:59 बजे तक)।
  • शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि: 31 जनवरी 2026।

चयन प्रक्रिया में सिंगल स्टेज कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT), ट्रांसलेशन/स्किल टेस्ट (जहां लागू), दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षा शामिल होगी। इच्छुक उम्मीदवार जल्द से जल्द आवेदन करें और आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें। अधिक जानकारी के लिए RRB की क्षेत्रीय वेबसाइट्स या http://rrbapply.gov.in विजिट करें।

जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता नियुक्त हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश

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नैनीताल: केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की गई है।

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जस्टिस गुप्ता वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र की 9 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्ति के बाद पदभार ग्रहण करेंगे। जस्टिस नरेंद्र आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके बाद जस्टिस गुप्ता जल्द ही शपथ लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पिछले महीने इस नियुक्ति की सिफारिश की थी। जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता 12 अप्रैल 2013 से इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं और उनका व्यापक न्यायिक अनुभव है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड : ज्योति अधिकारी गिरफ्तार, 4 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल

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हल्द्वानी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शनों में सक्रिय हल्द्वानी की महिला यूट्यूबर ज्योति अधिकारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन पर कुमाऊंनी महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अभद्र टिप्पणियां करने तथा उत्तराखंड की संस्कृति और देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक बयान देने का आरोप लगा है।

स्थानीय निवासी जूही चुफाल की शिकायत पर मुखानी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया है कि ज्योति अधिकारी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सार्वजनिक स्थान पर दरांती लहराते हुए भद्दी और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। इन बयानों से उत्तराखंड की प्राचीन हिंदू परंपराओं, धार्मिक भावनाओं तथा पर्वतीय महिलाओं का अपमान हुआ है।

मुखानी थाना प्रभारी सुशील जोशी ने बताया कि शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर ज्योति अधिकारी को नोटिस जारी किया गया। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट में पेशी के बाद ज्योति को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

ज्योति अधिकारी (पति गोपाल सिंह अधिकारी, निवासी हरिपुर लालमणि, किशनपुर घुड़दौड़ा, हल्द्वानी) हाल ही में अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शनों में सक्रिय रही थीं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।