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विधानसभा में सवालों की बौछार, विभागीय मंत्रियों को घेरा

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उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में चल रहे बजट सत्र में स्वास्थ्य योजना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। विपक्षी विधायकों ने राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड योजना) के अंशदान आधारित ढांचे पर सवाल उठाए, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनरों से मासिक अंशदान लिया जाता है, लेकिन इलाज पर होने वाला खर्च इससे कहीं अधिक है।

विपक्ष ने सदन में पूछा कि योजना के लिए कितनी धनराशि की व्यवस्था की गई है, कर्मचारियों का कितना योगदान आ रहा है, और तकनीकी कारणों से लंबित भुगतान वाले कितने कर्मचारियों/दावों का अभी तक निपटारा नहीं हो सका तथा उसके लिए कितनी राशि का प्रावधान है। मंत्री जवाब देने में टालमटोल करते दिखे, जिसके बाद विपक्ष बार-बार सटीक और स्पष्ट उत्तर मांगता रहा। यह चर्चा सत्र के दौरान काफी गरमाई।

योजना की वर्तमान स्थिति
यह योजना सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को सूचीबद्ध अस्पतालों में असीमित कैशलेस इलाज प्रदान करती है। प्रदेश में लगभग 5.16 लाख गोल्डन कार्ड धारक हैं। योजना के तहत अब तक भर्ती इलाज पर 641 करोड़ रुपये से अधिक और ओपीडी पर 300 करोड़ रुपये का खर्च हो चुका है।

हालांकि, कर्मचारियों से प्राप्त अंशदान इस खर्च की तुलना में कम रहा है, जिससे अस्पतालों के बकाया भुगतान में देरी हो रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अंशदान से अधिक खर्च होने के कारण योजना पर वित्तीय दबाव बढ़ा है और तकनीकी/प्रशासनिक कारणों से कई दावों का भुगतान लंबित है।

गैरसैंण को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना
सत्र के दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के सपने पर भी चर्चा हुई। सरकार ने गरैसैंण को स्मार्ट सिटी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर जोर दिया। अवस्थापना विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन स्थायी राजधानी के पूर्ण साकार होने में अभी काफी समय लगेगा।

ईरान युद्ध की आंच दून की रसोई तक, गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों पर लंबी कतारें

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देहरादून: अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब देहरादून की रसोई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। शहर में एलपीजी गैस की किल्लत से उपभोक्ता परेशान हैं और गैस एजेंसियों व गोदामों के बाहर सिलेंडर लेने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

बुधवार को राजधानी के कई गैस गोदामों और एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ देखने को मिली। लोग सुबह से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े रहे। उपभोक्ताओं का कहना है कि मोबाइल से गैस बुकिंग भी नहीं हो पा रही है। बुकिंग नंबर पर लगातार कॉल करने के बावजूद कॉल कनेक्ट नहीं हो रही, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

नया गांव स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर सुबह आठ बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग गई थी। दोपहर बाद तक करीब 320 उपभोक्ताओं को सिलेंडर वितरित किए गए, लेकिन इसके बाद स्टॉक खत्म हो गया। परिणामस्वरूप 60 से अधिक लोगों को बिना सिलेंडर के वापस लौटना पड़ा। इसी तरह की स्थिति शहर की अन्य एजेंसियों पर भी देखने को मिली।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब गैस की बुकिंग ही नहीं हो पा रही है तो सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। इससे लोग एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

रेस्टोरेंट और ढाबों पर संकट के बादल

घरेलू उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में गैस आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों जैसे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट को गैस नहीं मिल पा रही है। जिले में 19 हजार से अधिक वाणिज्यिक गैस कनेक्शन हैं और हर महीने करीब 40 हजार से ज्यादा सिलेंडरों की खपत होती है।

गैस आपूर्ति बाधित होने से रेहड़ी-पटरी, होटल और ढाबा संचालकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि जल्द गैस उपलब्ध नहीं हुई तो कारोबार बंद करने की नौबत आ सकती है।

प्रशासन ने किया इनकार

जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने गैस संकट की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जिले में गैस की आपूर्ति निरंतर जारी है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने उपभोक्ताओं से गैस बुकिंग कर इंतजार करने की अपील करते हुए कहा कि एजेंसियां घर तक सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

उत्तराखंड में खाद्य एवं रसद आपूर्ति पर कड़ी नजर: सीएम धामी के निर्देश पर SEOC में विशेष तैनाती

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देहरादून: वैश्विक स्तर पर उत्पन्न मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य में खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश पर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC), देहरादून में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की तत्काल विशेष तैनाती की गई है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और आगे के आदेश तक जारी रहेगी।

सरकारी आदेश के मुताबिक, इन अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश भर में खाद्यान्न, एलपीजी, चीनी, नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, आपूर्ति श्रृंखला और वितरण व्यवस्था की निरंतर निगरानी करना है। तैनात टीम प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा करेगी, संबंधित सूचनाओं का संकलन और विश्लेषण करेगी तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। रोस्टर के अनुसार अधिकारी SEOC में मौजूद रहेंगे और किसी भी संभावित कमी या समस्या पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में कहा, “राज्य सरकार प्रदेशवासियों को हर हाल में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न, एलपीजी या अन्य जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति प्रभावित न हो। हम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।”

सीएम धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में उत्तराखंड में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं का भंडार पर्याप्त है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। राज्य सरकार सभी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है ताकि आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे मौसम, व्यापार या अन्य कारकों) के मद्देनजर यह पूर्व सतर्कता वाला कदम सराहनीय है। इससे न केवल日常 आपूर्ति सुचारू रहेगी, बल्कि किसी संभावित आपात स्थिति में भी त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी। यह पहल उत्तराखंड को खाद्य सुरक्षा के मामले में और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

ड्रग्स-फ्री देवभूमि अभियान: देहरादून में STF की बड़ी कार्रवाई, 144 ग्राम हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार

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देहरादून : उत्तराखंड के ड्रग्स-फ्री देवभूमि अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने थाना बसंत विहार पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन में एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने 144 ग्राम अवैध हेरोइन बरामद कर एक नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान गुफरान पुत्र स्वर्गीय फुरकान के रूप में हुई है। वह आजाद कॉलोनी, थाना पटेल नगर, देहरादून का निवासी है और मूल रूप से ग्राम कोट खादर, थाना रायपुर सादत, बिजनौर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने यह हेरोइन तरुण पाल उर्फ चिंटू (पटेल नगर, देहरादून निवासी) से प्राप्त की थी। इसे वह फुटकर में जरूरतमंदों को बेचने वाला था। बरामद हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 42 लाख रुपये है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह के निर्देश पर राज्य भर में नशा तस्करों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के ड्रग्स-फ्री देवभूमि अभियान के अंतर्गत युवाओं में बढ़ते नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जारी है।

थाना बसंत विहार में आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी द्वारा बताए गए अन्य व्यक्ति की जांच जारी है।

एसएसपी अजय सिंह ने जनता से अपील की है कि नशे से दूर रहें और किसी भी लालच में नशा तस्करी न करें। नशा तस्करों की सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन या एसटीएफ/एएनटीएफ उत्तराखंड को दें। अभियान के तहत कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

महान क्रांतिकारी कमला दास गुप्ता को 119वीं जयंती पर किया याद, स्वतंत्रता आंदोलन यादगार समिति ने दी श्रद्धांजलि 

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  • प्रशांत वाजपेयी

: आज भारत की स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अदम्य साहस और समर्पण के लिए जानी जाने वाली महान क्रांतिकारी कमला दास गुप्ता की 119वीं जन्म जयंती मनाई जा रही है। 11 मार्च 1907 को ढाका (वर्तमान बांग्लादेश) के बिक्रमपुर में एक सम्मानित बंगाली वैद्य परिवार में जन्मीं कमला दास गुप्ता ने अपने जीवन को देश की आजादी और महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। वे 19 जुलाई 2000 को कोलकाता में परलोक सिधार गईं, लेकिन उनकी विरासत आज भी लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

कमला जी ने बैथ्यून कॉलेज, कोलकाता से इतिहास में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में जब युवा राष्ट्रवाद की लहर में डूबे हुए थे, कमला जी भी इसमें शामिल हो गईं। उन्होंने महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम जाने की इच्छा जताई, लेकिन पारिवारिक कारणों से वह संभव नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने उग्रवादी युगांतर पार्टी से जुड़कर क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।

1930 के दशक में कमला जी ने गरीब महिलाओं के छात्रावास में प्रबंधक के रूप में काम करते हुए क्रांतिकारियों के लिए बम बनाने की सामग्री एकत्र की और उसे गुप्त रूप से पहुंचाया। कई बार बम विस्फोटकों से जुड़े मामलों में उनकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन सबूतों के अभाव में ब्रिटिश सरकार उन्हें रिहा करने पर मजबूर हुई।

एक महत्वपूर्ण घटना में, क्रांतिकारी बीना दास ने फरवरी 1932 में बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन पर गोली चलाई थी—यह रिवॉल्वर कमला दास गुप्ता ने ही उपलब्ध कराया था। इस घटना के बाद भी उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन वे फिर रिहा हो गईं। 1933 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 1936 में नजरबंद कर दिया गया।

1938 में युगांतर पार्टी का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय होने के बाद कमला जी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सामाजिक और राहत कार्यों में योगदान दिया। 1942-43 में बर्मी शरणार्थियों तथा 1946-47 के सांप्रदायिक दंगों (विशेषकर नोआखाली में) में घायलों की मदद के लिए राहत शिविरों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन शिविरों में महात्मा गांधी का आगमन उनके लिए और अन्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी कमला जी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम जारी रखा। उन्होंने ‘कांग्रेस महिला शिल्प केंद्र’ और ‘दक्षिणेश्वर नारी स्वावलंबी सदन’ में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए। वे महिला पत्रिका “मदिर” की संपादक रहीं और बंगाली में दो महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं—

“रक्तेर अक्षर” (1954) – उनका आत्मकथात्मक संस्मरण

“स्वाधीनता संग्रामें नारी” (1963) – स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका पर

कमला दास गुप्ता का जीवन भारत माता की आजादी और नारी शक्ति के लिए एक जीवंत उदाहरण है। उनकी जयंती पर पूरा देश उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने दी पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति, जाने कौन हैं हरीश?

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नई दिल्ली: देश को भावुक कर देने वाले हरीश राणा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। पिछले 13 वर्षों से कोमा की स्थिति में जीवन-रक्षक मशीनों के सहारे जीवित हरीश राणा को अदालत ने पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी है। अदालत का यह फैसला चिकित्सा विशेषज्ञों की रिपोर्ट और परिवार की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए दिया गया।

गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा वर्ष 2013 में पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र थे। उस समय वे एक पीजी में रहते थे। इसी दौरान वे चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और वे कोमा में चले गए। तब से अब तक वे पूरी तरह अचेत अवस्था में हैं और उनका जीवन केवल कृत्रिम पोषण और चिकित्सा उपकरणों पर निर्भर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उनके स्वस्थ होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि जब किसी मरीज के स्वस्थ होने की संभावना नगण्य हो और जीवन केवल मशीनों पर टिका हो, तो उसे गरिमा के साथ मृत्यु का अधिकार मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि हरीश के माता-पिता ने 13 वर्षों तक जिस धैर्य और समर्पण के साथ अपने बेटे की देखभाल की, वह सराहनीय है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरीश राणा को एम्स के पल्लिएटिव केयर सेंटर में भर्ती किया जाए और चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत मानवीय तरीके से क्लिनिकली एडमिनिस्टर्ड न्यूट्रिशन (सीएएन) तथा जीवन-सहायक उपचार हटाए जाएं। पूरी प्रक्रिया गरिमा और सावधानी के साथ पूरी करने को कहा गया है।

हरीश के पिता अशोक राणा ने बेटे की हालत को देखते हुए अदालत से पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी। उन्होंने बताया कि पिछले 13 वर्षों में उन्होंने बेटे के इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लाखों रुपये खर्च किए और लगातार उम्मीद बनाए रखी, लेकिन अब सुधार की कोई संभावना नहीं बची है।

मामले की जांच के लिए गठित दो मेडिकल बोर्ड प्राथमिक और द्वितीयक ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि हरीश राणा के ठीक होने की संभावना बेहद कम है और इलाज जारी रखने से केवल शरीर की जैविक प्रक्रिया चलती रहेगी, जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है।

भारत में इच्छामृत्यु दो प्रकार की मानी जाती है। सक्रिय इच्छामृत्यु, जिसमें मृत्यु को जानबूझकर तेज करने के लिए कदम उठाए जाते हैं, कानूनन अवैध है। वहीं निष्क्रिय इच्छामृत्यु, जिसमें जीवन-रक्षक उपचार हटाया जाता है, कड़ी शर्तों के साथ वैध है। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के अरुणा शानबाग मामले और 2018 के कॉमन कॉज फैसले में इसे गरिमा के साथ जीने और मरने के अधिकार का हिस्सा माना था।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की बजट बैठक: 121 करोड़ से अधिक का बजट पारित, गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव स्वीकृत

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देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की महत्वपूर्ण बजट बैठक आज मंगलवार को देहरादून स्थित केनाल रोड कार्यालय के समीप बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में आगामी चारधाम यात्रा सत्र 2026-27 के लिए कुल 121 करोड़ 7 लाख 99 हजार 501 रुपये (121,07,99,501 रुपये) का अनुमानित बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया।

इसमें श्री बदरीनाथ धाम के लिए 57 करोड़ 47 लाख 39 हजार 601 रुपये तथा श्री केदारनाथ धाम के लिए 63 करोड़ 60 लाख 59 हजार 900 रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित आय के मुकाबले व्यय 99 करोड़ 45 लाख 36 हजार 651 रुपये अनुमानित है।

बैठक में सबसे चर्चित प्रस्ताव श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिरों में गैर-सनातनियों (नॉन-संनातनी) के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाने का रहा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। यह निर्णय मंदिरों की धार्मिक पवित्रता एवं परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि चारधाम यात्रा अप्रैल माह में शुरू हो रही है। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल, श्री केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल तथा श्री गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया यानी 19 अप्रैल को खुलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार केदारनाथ पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बदरीनाथ में कार्य तेजी से चल रहे हैं।

उन्होंने जोर दिया कि बीकेटीसी का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल एवं सुगम दर्शन कराना है। बजट में यात्रा व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, आधारभूत ढांचे मजबूत करने, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, विश्राम गृह, ऑनलाइन पूजा व्यवस्था, वेबसाइट सुधार आदि के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। सभी तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित

  • ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में मंदिर समिति शिविर कार्यालय स्थापित करना.
  • धामों में निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन प्रतिबंधित करना.
  • बीकेटीसी अधिनियम में संशोधन.
  • रावल नियुक्ति नियमावली एवं परंपराओं पर विचार.
  • पूजा-दर्शन व्यवस्था सुधार.
  • कर्मचारियों की पदोन्नति, वेतन विसंगति दूर करना, मानदेय बढ़ाना.
  • बदरी मंदिर को बीकेटीसी में शामिल करना.
  • पूजा सामग्री खरीद, मर्कंटेश्वर मंदिर सभा मंडप पुनर्निर्माण.
  • कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के लिए रिवॉल्विंग फंड गठन.
  • यात्रा एवं दर्शन एसओपी, मंदिर परिसर मरम्मत, रेलिंग सुधार, रंग-रोगन आदि.

समिति पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि इन प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन से आगामी यात्रा में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धामों की व्यवस्थाएं और मजबूत होंगी।

बैठक में उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, विजय कप्रवाण, सदस्य धीरज मोनू पंचभैया, महेंद्र शर्मा, प्रह्लाद पुष्पवान, देवी प्रसाद देवली, राजेंद्र प्रसाद डिमरी, डॉ. विनीत पोस्ती, नीलम पुरी, दिनेश डोभाल, राजपाल जड़धारी, राजकुमार तिवारी, रजनीश भट्ट सहित मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, वित्त अधिकारी मनीष उप्रेती, विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड : गुलदार का आतंक फिर बढ़ा, 48 वर्षीय व्यक्ति को बनाया निवाला, क्षेत्र में दहशत

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पौड़ी : जनपद के कोट विकासखंड के अंतर्गत घुड़दौड़ी क्षेत्र के पास स्थित जामला गांव में एक बार फिर गुलदार (तेंदुआ) ने कहर बरपाया है। कल शाम गुलदार ने 48 वर्षीय स्थानीय निवासी पर घात लगाकर अचानक हमला कर दिया, जिससे व्यक्ति को बचने का कोई मौका नहीं मिल सका और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल छा गया है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर व्याप्त है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से पौड़ी गढ़वाल के विभिन्न इलाकों में गुलदार की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने गुलदार को पकड़ने, ट्रैप करने या प्रभावित क्षेत्र से हटाने की अपील की है, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।

वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर चुकी है। अधिकारी पगमार्क, कैमरा ट्रैप और अन्य सबूतों के आधार पर गुलदार की पहचान और ट्रैकिंग कर रहे हैं। यदि यह आदमखोर साबित होता है, तो इसे मार गिराने या कैद करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

पौड़ी गढ़वाल में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बन चुका है, जहां पिछले कुछ समय में कई हमले दर्ज हो चुके हैं। ग्रामीणों ने जागरूकता अभियान, बेहतर निगरानी और मुआवजे की व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग भी की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और जल्द ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

उत्तराखंड: बचा डेढ़ से दो दिन का स्टॉक, 25 दिन बाद ही बुक होगा अगला LPG सिलेंडर, कमर्शियल गैस सप्लाई रोकी!

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देहरादून: ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर LPG (रसोई गैस) की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी दिख रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल के अनुसार, शहर में फिलहाल घरेलू रसोई गैस का बैकलॉग (स्टॉक) केवल डेढ़ से दो दिन का बचा हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोई तत्काल कमी नहीं है और सप्लाई लगातार जारी है।

पूर्ति विभाग के अतिरिक्त आयुक्त पी.एस. पांगती ने बताया कि राज्य में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों (नीले वाले) की पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण सख्त कदम उठाए गए हैं। वर्तमान वैश्विक संकट के बीच अब केवल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) को ही कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसे आवश्यक क्षेत्र प्रभावित न हों।

यह निर्णय मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध से उपजे वैश्विक एलपीजी आपूर्ति संकट के कारण लिया गया है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने कमर्शियल सिलेंडरों की सामान्य सप्लाई पर अस्थायी रोक लगाई है, जबकि घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

पांगती ने स्पष्ट किया कि यह कदम अस्थायी है और जरूरी सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए उठाया गया है। होटल-रेस्तरां संचालकों को वैकल्पिक व्यवस्था करने की सलाह दी जा रही है, जबकि स्थिति सामान्य होने पर सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। राज्य में घरेलू गैस की आपूर्ति पर भी नजर रखी जा रही है, जहां पहले से ही बुकिंग अंतराल 25 दिनों तक बढ़ा दिया गया है।

केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रिफाइनरियों को अधिकतम एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और इसे मुख्य रूप से घरेलू उपयोग के लिए प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही होर्डिंग और कालाबाजारी रोकने के लिए बुकिंग नियम सख्त किए गए हैं। अब हाल ही में सिलेंडर बुक कराने वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग ब्लॉक कर दी गई है। ऑनलाइन या मोबाइल ऐप से नई बुकिंग का विकल्प बंद कर दिया गया है। ऐसे उपभोक्ताओं को अगले सिलेंडर के लिए कम से कम 25 दिनों तक इंतजार करना होगा, जबकि पहले यह अवधि कम थी।

यह कदम पैनिक बाइंग और जमाखोरी को रोकने के लिए उठाया गया है, क्योंकि युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से आयात में देरी हो रही है। केंद्र ने पहले ही आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल या अन्य औद्योगिक उपयोग के बजाय एलपीजी पूल में गैस डायवर्ट करने का आदेश दिया है।

देहरादून में लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं और संकट की आशंका से पहले से ही सिलेंडर भरवा रहे हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि राष्ट्रीय स्तर पर स्टॉक पर्याप्त है और घरेलू उपभोक्ताओं को कोई समस्या नहीं होगी। यदि सप्लाई में और देरी हुई तो बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, जिससे घरेलू रसोई के अलावा कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ने से रेस्तरां और होटलों में खाने-पीने की थाली महंगी हो सकती है।

वर्तमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में ₹60 की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कमर्शियल में और अधिक। उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने महंगाई और गैस दामों के खिलाफ प्रदर्शन किया है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं, लेकिन सरकार घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देकर संकट से निपटने की कोशिश में जुटी है।

पूर्ति विभाग के अतिरिक्त आयुक्त पी.एस. पांगती ने बताया कि राज्य में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों (नीले वाले) की पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण सख्त कदम उठाए गए हैं। वर्तमान वैश्विक संकट के बीच अब केवल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) को ही कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसे आवश्यक क्षेत्र प्रभावित न हों।

यह निर्णय मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध से उपजे वैश्विक एलपीजी आपूर्ति संकट के कारण लिया गया है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने कमर्शियल सिलेंडरों की सामान्य सप्लाई पर अस्थायी रोक लगाई है, जबकि घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

पांगती ने स्पष्ट किया कि यह कदम अस्थायी है और जरूरी सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए उठाया गया है। होटल-रेस्तरां संचालकों को वैकल्पिक व्यवस्था करने की सलाह दी जा रही है, जबकि स्थिति सामान्य होने पर सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। राज्य में घरेलू गैस की आपूर्ति पर भी नजर रखी जा रही है, जहां पहले से ही बुकिंग अंतराल 25 दिनों तक बढ़ा दिया गया है।

उत्तराखंड बजट सत्र का आज दूसरा दिन: सदन में उठे जनहित के सवाल, सड़कों पर कांग्रेसियों का हल्ला बोल

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गैरसैंण (चमोली)। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में पांच दिवसीय बजट सत्र का दूसरा दिन जारी है। सदन में कई महत्वपूर्ण अध्यादेश पटल पर रखे जाने की उम्मीद है। प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें पर्यटन, सड़क निर्माण और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के चार वर्षों में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है। कुल 5867 पंचायत भवनों में से 1134 जीर्ण-शीर्ण थे, जिन्हें ठीक करने का अभियान चलाया गया। पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने सदन को यह जानकारी दी। इसी तरह लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों पर मानसून से पहले 3134 किलोमीटर और नवंबर तक कुल सात हजार से अधिक किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया। हरिद्वार जिले में अकेले 313 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें सुधारी गईं।

पर्यटन मंत्री ने विधानसभा में बताया कि तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर रोपवे पीपीपी मोड में संचालित हो गया है। चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी, उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री, गौरीकुंड से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे निर्माणाधीन हैं।

सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। हल्द्वानी के आईएसबीटी और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की खामियों को लेकर कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश सहित कई विधायक विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे। जंगलचट्टी बैरियर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी पुलिसबल के बीच हंगामा किया और बैरियर तोड़ने की कोशिश की। चोरड़ा से भराड़ीसैंण मोटर मार्ग की मांग को लेकर चोरड़ा की महिलाएं विधानसभा पहुंचीं, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर अस्थायी जेल ले गई।

प्रश्नकाल में मानव-वन्यजीव संघर्ष और केदारनाथ वन्यजीव क्षेत्र में वन्यजीव हमलों पर सवाल उठे। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने तत्काल मुआवजे की व्यवस्था होने की बात कही। सत्र की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने दिवंगत उक्रांद नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि दी।