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उत्तराखंड बजट सत्र का आज दूसरा दिन: सदन में उठे जनहित के सवाल, सड़कों पर कांग्रेसियों का हल्ला बोल

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गैरसैंण (चमोली)। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में पांच दिवसीय बजट सत्र का दूसरा दिन जारी है। सदन में कई महत्वपूर्ण अध्यादेश पटल पर रखे जाने की उम्मीद है। प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें पर्यटन, सड़क निर्माण और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के चार वर्षों में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है। कुल 5867 पंचायत भवनों में से 1134 जीर्ण-शीर्ण थे, जिन्हें ठीक करने का अभियान चलाया गया। पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने सदन को यह जानकारी दी। इसी तरह लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों पर मानसून से पहले 3134 किलोमीटर और नवंबर तक कुल सात हजार से अधिक किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया। हरिद्वार जिले में अकेले 313 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें सुधारी गईं।

पर्यटन मंत्री ने विधानसभा में बताया कि तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर रोपवे पीपीपी मोड में संचालित हो गया है। चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी, उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री, गौरीकुंड से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे निर्माणाधीन हैं।

सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। हल्द्वानी के आईएसबीटी और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की खामियों को लेकर कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश सहित कई विधायक विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे। जंगलचट्टी बैरियर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी पुलिसबल के बीच हंगामा किया और बैरियर तोड़ने की कोशिश की। चोरड़ा से भराड़ीसैंण मोटर मार्ग की मांग को लेकर चोरड़ा की महिलाएं विधानसभा पहुंचीं, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर अस्थायी जेल ले गई।

प्रश्नकाल में मानव-वन्यजीव संघर्ष और केदारनाथ वन्यजीव क्षेत्र में वन्यजीव हमलों पर सवाल उठे। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने तत्काल मुआवजे की व्यवस्था होने की बात कही। सत्र की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने दिवंगत उक्रांद नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि दी।

LPG संकट के बीच देशभर में ECA लागू, क्या है यह एक्ट?

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे भारत सहित कई देशों में LPG (रसोई गैस) की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है।

5 मार्च 2026 को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन (LPG के मुख्य घटक) की धाराओं का अधिकतम उपयोग एलपीजी उत्पादन के लिए करें। इन धाराओं को अब पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य औद्योगिक उपयोग के लिए डायवर्ट नहीं किया जा सकेगा।

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आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि उत्पादित LPG को केवल तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL)को उपलब्ध कराया जाए, जो इसे केवल घरेलू उपभोक्ताओं (रसोई गैस) के लिए वितरित करेंगी।

क्यों लिया गया यह कदम?

सरकार का कहना है कि एलपीजी घरेलू स्तर पर खाना पकाने के लिए एक आवश्यक ईंधन है, जिसकी निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना सार्वजनिक हित में है। भारत की अधिकांश एलपीजी मांग आयात से पूरी होती है, और 80% से अधिक आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आता है, जहां वर्तमान संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। इससे स्टॉक में कमी आई है (कुछ रिपोर्ट्स में 25 दिनों के स्टॉक का जिक्र)। इस कदम से घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है और संभावित कमी को रोका जा सकेगा।

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आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (ESMA) क्या है?

यह कानून आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, भंडारण, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करता है। सरकार स्टॉक सीमा तय कर सकती है, जमाखोरी और कालाबाजारी रोक सकती है। उल्लंघन पर 3 महीने से 7 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। यह कानून पहले भी खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कमी के समय लागू किया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश अस्थायी है और घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई गैस की सुरक्षा के लिए लिया गया है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में व्यावसायिक (कमर्शियल) एलपीजी की आपूर्ति पर भ्रम की बात कही गई, लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक आपूर्ति पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, अन्य स्रोतों से जारी रहेगी।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में मंगलवार को भी तनावपूर्ण माहौल रहा। सोमवार को ईरान-इज़राइल युद्ध (या पश्चिम एशिया संकट) पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा हुआ था, जिससे दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित हुई। आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही भारी हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

लोकसभा में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पेश किया। इस प्रस्ताव पर विपक्ष के 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। आरोप है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने की इजाजत नहीं देकर “पक्षपातपूर्ण” व्यवहार किया।

सूत्रों के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करेंगे। भाजपा की ओर से अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, रविशंकर प्रसाद और भर्तृहरि महताब अपनी दलीलें रखेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान भी सदन को संबोधित करेंगे।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि स्पीकर को हटाने की मांग वाले प्रस्ताव के पक्ष में अपनी बात रखेंगे। बजट सत्र 28 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला, जबकि दूसरा चरण 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

पश्चिम एशिया संकट: भारत में LPG आपूर्ति पर असर

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है, जिसकी मार अब भारत की होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर साफ दिख रही है। देशभर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की शिकायतें तेज हो गई हैं, जिससे कई शहरों में रेस्टोरेंट और होटल अपनी रसोई चलाने में असमर्थ हो रहे हैं।

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने इस संकट को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। FHRAI के महासचिव जैसन चाको ने पत्र में बताया कि जमीनी स्तर पर गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भारी रुकावट आ रही है। कई डिस्ट्रीब्यूटर 5 मार्च 2026 के एक कथित सरकारी आदेश का हवाला देकर कमर्शियल सिलेंडर देने से इनकार कर रहे हैं। संगठन ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट निर्देश जारी करे कि हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है, और सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

इसी तरह, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने भी गंभीर चिंता जताई है। NRAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सप्लायर रेस्टोरेंट्स की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। संगठन ने सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण और हस्तक्षेप की अपील की है। NRAI का कहना है कि भोजन उपलब्ध कराना एक आवश्यक सेवा है, इसलिए गैस की कमी का असर आम नागरिकों तक भी पहुंच सकता है।

यह संकट मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में चल रहे संघर्ष से जुड़ा है, जहां से भारत की अधिकांश एलपीजी आयात होती है। हाल के दिनों में सरकार ने घरेलू उपभोग को प्राथमिकता देते हुए रिफाइनरियों को अधिक उत्पादन का आदेश दिया है और घरेलू सिलेंडरों के लिए बुकिंग गैप 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है, ताकि जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सके। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल सिलेंडरों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।

बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में कई होटल और रेस्टोरेंट पहले से ही अपने स्टॉक बचाने के लिए ऑपरेटिंग घंटे कम कर रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं। उद्योग का अनुमान है कि यदि स्थिति सुधरी नहीं तो बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जिसका असर पर्यटन और रोजमर्रा के भोजन पर भी पड़ेगा।

उत्तराखंड: बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल शुरू, विपक्ष ने की कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग

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उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन (10 मार्च 2026) की कार्यवाही शुरू हो गई है। सदन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जहां विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों से सवाल पूछे जाएंगे।

विधानसभा अध्यक्ष को पक्ष और विपक्ष के विधायकों से कुल 600 से अधिक सवाल प्राप्त हुए हैं। इन सवालों पर आज प्रश्नकाल के दौरान विस्तृत चर्चा और जवाब मांगे जाएंगे, जिससे सदन में गरमागरम बहस की उम्मीद है।

कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तत्काल चर्चा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने नियम 58 के तहत इस मांग को सुनने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

सदन के पटल पर कई महत्वपूर्ण अध्यादेश रखेंगे

  • उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) (संशोधन) अध्यादेश, 2025
  • उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025
  • उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2025
  • उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 – यह UCC में हालिया संशोधनों को वैधानिक रूप देने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार शामिल हैं।

बता दें कि सत्र का पहला दिन (9 मार्च) ऐतिहासिक रहा, जब मुख्यमंत्री धामी ने 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो पिछले बजट से लगभग 10-11% अधिक है। आज का दिन प्रश्नकाल और अध्यादेशों के कारण और भी महत्वपूर्ण होने वाला है।

आज लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी बहस, हंगामे के आसार

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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज (10 मार्च 2026) दूसरा दिन है। कल (9 मार्च) पहले दिन विपक्ष की ओर से ईरान-इज़राइल संघर्ष (पश्चिम एशिया युद्ध) पर चर्चा की मांग को लेकर दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ, जिससे कार्यवाही बाधित रही और सदन स्थगित हो गए।

आज लोकसभा में हंगामे की आशंका बनी हुई है, क्योंकि विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) लाने के लिए संकल्प प्रस्ताव पेश कर सकता है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें आरोप है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न देकर “खुला पक्षपात” किया। यह मामला मुख्य रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उठा था, जब राहुल गांधी को बोलने से रोका गया था।

सूत्रों के अनुसार, सदन की अनुमति मिलने पर प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा की शुरुआत करेंगे। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, रविशंकर प्रसाद और भर्तृहरि महताब सरकार पक्ष से अपनी दलीलें रखेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान भी सदन को संबोधित कर सकते हैं।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज दोनों सदनों में 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों (सेकंड बैच) पर बयान पेश करेंगी।

लोकसभा में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्टैंडिंग कमेटी की चौथी रिपोर्ट में सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर बयान देंगे, जो 2024-25 की अनुदान मांगों से जुड़ा है।

राज्यसभा में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा फिर शुरू होगी, जिसमें मंत्री कल भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देंगे। कार्यसूची के मुताबिक, ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला, जबकि दूसरा चरण 2 अप्रैल तक चलेगा। संसद में जारी तनाव से विधायी कार्य प्रभावित होने की आशंका है, जबकि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।

NCERT ने कक्षा 8 की विवादित सामाजिक विज्ञान पुस्तक ली वापस, न्यायपालिका अध्याय पर मांगी सार्वजनिक माफी

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ (भाग-2) को पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया है। साथ ही, पुस्तक में शामिल विवादास्पद अध्याय ‘The Role of Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका) के लिए एनसीईआरटी ने बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगी है।

यह कदम सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और स्वत: संज्ञान के बाद उठाया गया है। पुस्तक के अध्याय-IV में न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे मामलों का भारी बैकलॉग, जजों की कमी और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों का जिक्र किया गया था, जिसे कोर्ट ने संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना।

एनसीईआरटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अध्याय में ‘अनुचित टेक्स्टुअल सामग्री’ और ‘निर्णय में त्रुटि’ अनजाने में शामिल हो गई थी। परिषद ने स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को कम करने का उनका कोई इरादा नहीं था। एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्यों ने इस गलती के लिए “बिना शर्त और अयोग्य माफी” मांगी है। पुस्तक अब उपलब्ध नहीं है और सभी प्रतियां वापस ली जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने पुस्तक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित है।

एनसीईआरटी ने प्रभावित छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है तथा सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना की है। परिषद ने आगे कहा कि अध्याय की समीक्षा और पुनर्लेखन उचित विशेषज्ञों के साथ किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें देश भर के केंद्रीय और राज्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं, इसलिए ऐसे बदलावों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। आने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए अद्यतन पाठ्यक्रम और पुस्तकों पर परिषद से स्पष्ट निर्देश जारी होने की उम्मीद है।

उत्तराखंड बजट 2026-27: सरकार का दावा ‘संतुलन’ के इन आठ मूल मंत्रों से होगा विकास

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गैरसैंण: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में पेश 1,11,703.21 करोड़ रुपये के बजट को ‘संतुलन’ (SANTULAN) के आठ अक्षरों पर आधारित अनूठे मॉडल से सजाया है। प्रत्येक अक्षर एक मूल मंत्र का प्रतिनिधित्व करता है, जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित, समावेशी और तीव्र विकास की दिशा तय करता है। यह बजट न केवल आंकड़ों का संग्रह है, बल्कि 2047 तक विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव रखने वाली दूरदर्शी सोच है।

 प्रमुख प्रावधान

  1. S – समावेशी विकास (Inclusive Development) समाज के हर वर्ग, विशेषकर कमजोर तबकों को मुख्यधारा में लाने पर फोकस। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं को मजबूत किया गया।
    • सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं: ~1,327.73 करोड़ रुपये.
    • अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना: 600 करोड़ रुपये.
    • सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0: ~598.33 करोड़ रुपये.
    • ईडब्ल्यूएस आवास अनुदान: 25 करोड़ रुपये.
    • मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट, आंचल अमृत, वात्सल्य योजना, महिला पोषण योजना आदि: कुल कई सौ करोड़ों में प्रावधान.
    • प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना: ~14.13 करोड़ रुपये.
  2. A – आत्मनिर्भर उत्तराखंड (Self-Reliant Uttarakhand) स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार, कृषि, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा।
    • पशुपालन स्वरोजगार योजनाएं: ~42.02 करोड़ रुपये.
    • मिशन एप्पल: 42 करोड़ रुपये.
    • ट्राउट प्रोत्साहन योजना: ~39.90 करोड़ रुपये.
    • उच्च मूल्य फल (कीवी, ड्रैगन फ्रूट): ~30.70 करोड़ रुपये.
    • चाय विकास, सगंध पौधा केंद्र: 25-24 करोड़ रुपये.
    • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: 60 करोड़ रुपये.
    • स्टार्टअप वेंचर फंड: 25 करोड़ रुपये.
    • सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम सहायता: 75 करोड़ रुपये.
    • इको-टूरिज्म: ~18.50 करोड़ रुपये.
  3. N – नई सोच (New Thinking) नवाचार, तकनीक, शिक्षा और आधुनिकता को अपनाने पर जोर।
    • संस्कृत पाठशालाएं: 28 करोड़ रुपये.
    • खनन सर्विलांस: 24.50 करोड़ रुपये.
    • छात्रवृत्तियां (विद्यालयी/उच्च शिक्षा/खेल): 15-13.50 करोड़ रुपये.
    • राज्य डाटा सेंटर सुदृढ़ीकरण: 65 करोड़ रुपये.
    • सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना: ~47.50 करोड़ रुपये.
    • साइबर सिक्योरिटी: 15 करोड़ रुपये.
    • एआई एवं इमर्जिंग टेक्नोलॉजी: ~11.50 करोड़ रुपये.
    • यूनीफॉर्म सिविल कोड: 5 करोड़ रुपये.
  4. T – तीव्र विकास (Rapid Development) बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश।
    • पीएमजीएसवाई (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना): 1,050 करोड़ रुपये.
    • गड्ढा मुक्त सड़क अभियान: 400 करोड़ रुपये.
    • नागरिक उड्डयन विभाग: ~52.50 करोड़ रुपये.
    • नंदा देवी राजजात यात्रा: 25 करोड़ रुपये.
  5. U – उन्नत शहर एवं गांव (Advanced Cities & Villages) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का संतुलित उन्नयन।
    • विकसित भारत @2047: ~705.25 करोड़ रुपये.
    • ग्रामीण विकास विभाग पूंजीगत: 1,642.20 करोड़ रुपये.
    • वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: 40 करोड़ रुपये.
    • शहरी निकाय: 1,814 करोड़ रुपये.
    • पंचायती राज संस्थाएं: 1,491 करोड़ रुपये.
    • आवास विकास अवसंरचना: 130 करोड़ रुपये.
  6. L – लोक सहभागिता (Public Participation) जनता की भागीदारी से योजनाओं का क्रियान्वयन।
    • आईटीडीए अनुदान/सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ीकरण: 25 करोड़ रुपये.
    • राज्य डाटा सेंटर: 40 करोड़ रुपये.
    • एआई मिशन एसपीवी: 25 करोड़ रुपये.
    • विज्ञान केंद्र चंपावत: 10 करोड़ रुपये.
  7. A – आर्थिक शक्ति (Economic Strength) आर्थिक मजबूती के लिए निवेश और उद्योग प्रोत्साहन।
    • रिस्पना बिंदाल एलिवेटेड यूटिलिटी: 350 करोड़ रुपये.
    • टिहरी रिंग रोड: 10 करोड़ रुपये.
    • स्टार्टअप, एमएसएमई, मेगा इंडस्ट्रियल नीति: 25-75 करोड़ रुपये.
    • इको-टूरिज्म और निवेश प्रोत्साहन: 18.50-30 करोड़ रुपये.
  8. N – न्यायपूर्ण व्यवस्था (Just System) कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और न्याय पहुंच को मजबूत करना।
    • पुलिस आवास: 100 करोड़ रुपये.
    • इंडिया रिजर्व वाहिनी: 10 करोड़ रुपये.
    • स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स: 10 करोड़ रुपये.
    • जेल निर्माण/भूमि क्रय: 25 करोड़ रुपये.
    • फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट (रेप एवं पॉक्सो): 3.42 करोड़ रुपये.
    • उत्तराखंड न्यायिक अकादमी: 6.96 करोड़ रुपये.

ज्ञान मॉडल से समग्र विकास का रोडमैप, गरीब-युवा-किसान-महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प GYAN मॉडल के माध्यम से राज्य के समग्र विकास को आगे बढ़ाना है। इस मॉडल में गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी सशक्तिकरण को विकास के चार प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दृष्टि से बजट में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान
गरीब वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। अन्नपूर्ति योजना के लिए ₹1300 करोड़, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए ₹298.35 करोड़ और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए ₹56.12 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए ₹25 करोड़, परिवहन निगम की बसों में निर्धारित श्रेणी के यात्रियों को निःशुल्क यात्रा सुविधा के लिए ₹42 करोड़ तथा रसोई गैस पर अनुदान के लिए ₹43.03 करोड़ रखे गए हैं। साथ ही दिव्यांग, तीलू रौतेली और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए ₹167.05 करोड़ तथा आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास
प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी कई योजनाओं को मजबूती दी गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए ₹60 करोड़, पलायन रोकथाम योजना के लिए ₹10 करोड़ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए ₹62.29 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैर सरकारी महाविद्यालयों को सहायता के लिए ₹155.38 करोड़, शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए ₹10 करोड़ तथा मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के लिए ₹10 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई योजनाओं को बजट में शामिल किया गया है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए ₹39.90 करोड़, मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़, दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए ₹32 करोड़ तथा दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए ₹42.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए ₹160.13 करोड़, मिलेट मिशन के लिए ₹12 करोड़ तथा किसान पेंशन योजना के लिए ₹12.06 करोड़ भी निर्धारित किए गए हैं।

महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता
महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। नंदा गौरा योजना के लिए ₹220 करोड़, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए ₹47.78 करोड़ और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना, महिला पोषण योजना, आंचल अमृत योजना और स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण जैसी योजनाओं के लिए भी बजट रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान मॉडल के माध्यम से गरीबों के उत्थान, युवाओं के सशक्तिकरण, किसानों की समृद्धि और महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी तथा उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेश किया 1.11 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट

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गैरसैंण (चमोली): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज (9 मार्च 2026) विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। यह बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 10.41 प्रतिशत अधिक है और राज्य के समग्र विकास को तेज करने के साथ मजबूत वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित है।

यह ऐतिहासिक बजट प्रस्तुति है, क्योंकि पहली बार राज्यपाल के अभिभाषण के ही दिन मुख्यमंत्री (जो वित्त मंत्री का प्रभार भी संभाल रहे हैं) ने बजट सदन में रखा। बजट में एफआरबीएम अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया गया है, जिससे वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनी रहे।

मुख्य वित्तीय संकेतक

  • राजस्व अधिशेष: 2,536.33 करोड़ रुपये–राज्य की आय राजस्व व्यय से अधिक होने से मजबूत वित्तीय स्थिति का प्रमाण।
  • राजकोषीय घाटा: जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रखा गया।
  • लोक ऋण: जीएसडीपी के 32.50 प्रतिशत की तय सीमा के अंदर नियंत्रित।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार विकास परियोजनाओं को गति देते हुए भी ऋण प्रबंधन, राजकोषीय अनुशासन और वित्तीय संतुलन पर विशेष ध्यान दे रही है। राजस्व अधिशेष, सीमित घाटा और नियंत्रित ऋण से भविष्य की विकास योजनाओं को स्थिर और मजबूत आधार मिलेगा।

बजट सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में 13 मार्च तक चलेगा। बजट में राज्य के विकास, पर्यटन, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कृषि, आधारभूत ढांचा और 2047 तक विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे ‘सभी वर्गों के लिए समावेशी बजट’ बताया है।