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उत्तराखंड : विधानसभा भर्ती घोटाला, चहेतों कि जांच कौन कराएगा?

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देहरादून: उत्तराखंड में स्नातक स्तरीय भर्ती घोटाले के खुलासे के बाद अब कई भर्तियों के मामले जोर पकड़ने लगे हैं। सोशल मीडिया में उत्तराखंड विधानसभा भर्ती में मंत्रियों के चहेतों की नौकरी की लिस्ट वायरल है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इस मामले में सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। सोशल मीडिया में वायरल लिस्ट और कांग्रेस के दावों को सही मानें तो आम आदमी के लिए कहीं जगह ही नहीं बची है। हर कहीं बस नेता, मंत्री, विधायक और अधिकारियों के परिवालों से ही सीटें फुल हैं। लोग राज्य में अब तक हुई सभी भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल के समय हुई 129 पदों पर भर्ती मामले को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने उठा तो दिया, लेकिन यह नहीं जाना कि क्या इनमें तत्कालीन नेतापक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व सीएम हरीश रावत का कोई आदमी भर्ती किया गया या नहीं? यह भी पता चला है कि प्रेमचंद अग्रवाल ने जो भर्तियां की, उनकी वित्त से स्वीकृति नहीं मिली थी। वित्त सचिव अमित नेगी ने तीन महीने बाद स्वीकृति दी। इसके बाद ही इन्हें वेतन मिला।

 विधानसभा सचिवालय हाईप्रोफाइल लोगों के लिए अपने लोगों की भर्ती करने और पैसे लेकर लगाने का बैक डोर है। सच यही है विधानसभा में कई पत्रकारों और नेताओं की पत्नियां या रिश्तेदार समीक्षा अधिकारी से लेकर अनुसचिव तक काम कर रहे हैं। उनकी योग्यता है पालिटिकल अप्रोच। बाकी जो हैं, उनमें से अधिकांश को या स्पीकर की अनुकंपा पर नियुक्ति दी गयी या फिर पैसों का खेल हुआ। 70 विधानसभा सीटों वाली छोटी सी विधानसभा के पास 560 कर्मचारी हैं जबकि बताया जा रहा है कि यूपी विधानसभा सचिवालय में 543 ही कर्मचारी हैं।

गोविंद सिंह कुंजवाल, यशपाल आर्य और दिवंगत प्रकाश पंत के कार्यकाल में भी ऐसी ही बैक डोर से भर्ती हुई हैं। यानी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। इन भर्तियों में हुआ यह है कि कांग्रेस सत्ता में रही तो उसके स्पीकर ने विपक्ष के एक-दो लोगों के रिश्तेदारों को नौकरियां दे दी और ऐसा ही भाजपा ने भी किया। कुछ खुरचन पत्रकारों के हिस्से भी आ गयी। यानी नेता, अफसर, दलाल और पत्रकार मिल गये और हो गया भर्ती कांड। आखिर वह कौन सा नियम है जिसके तहत विधानसभा में सीधी भर्ती का अधिकार है? आयोग या किसी भर्ती एजेंसी की मदद क्यों नहीं ली जाती? इस भारी-भरकम फौज पर होने वाला खर्च गरीब राज्य कैसे उठाता होगा?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यदि आयोग की भर्तियों पर जांच बिठा सकते हैं तो ये बड़ा सवाल है कि विधानसभा में हुई भर्तियों की जांच भी करवाएं? यह बड़ा साहस का कार्य है। इसमें पक्ष-विपक्ष की पोल खुलेगी। क्या धामी सरकार में इतना साहस है कि वह इन भर्तियों की जांच करवाएंगे?

केवल विधानसभा ही नहीं। 2022 में हुई प्रवक्ता भर्ती परीक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया में लगातार इस तरह की पोस्टें वायरल हो रही हैं। जिस तरह से अब तक के मामलों में सोशल मीडिया के वायरल पोस्टें सही साबित हुई हैं। उससे तो लग रहा है कि प्रवक्ता भर्ती की जांच भी करा लेनी चाहिए।

 कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का बयान, मैं पार्टी का सदस्य हूं, किरायेदार नहीं 

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नई दिल्ली: राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी के नाम पांच पन्नों की चिट्ठी लिखकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस सियासी घटना के बाद राज्यसभा सांसद मनीष तिवारी ने अपनी पार्टी को फिर एकबार नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि जी-23 ने जो कांग्रेस सुप्रीमो को पार्टी की स्थिति को लेकर चिट्ठी लिखी थी, अगर उसपर ध्यान दिया गया होता तो आज ऐसी स्थिति नहीं आती। साथ ही अपनी स्थिति साफ करते हुए उन्होंने कहा कि मैं इस पार्टी का किरायेदार नहीं, बल्कि सदस्य हूं।

उन्होंने कहा कि दो साल पहले हम में से 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था और कहा था कि पार्टी की स्थिति चिंताजनक है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उस पत्र के बाद कांग्रेस सभी विधानसभा चुनाव हार गई। अगर कांग्रेस और भारत एक जैसे सोचते हैं तो लगता है कि दोनों में से किसी एक ने अलग सोचना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि 1885 से मौजूद कांग्रेस पार्टी और भारत के बीच समन्वय में दरार आ गई है। आत्मनिरीक्षण की जरूरत थी। मुझे लगता है कि 20 दिसंबर 2020 को सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक में सहमति बन गई होती तो यह स्थिति नहीं आती। कहा कि गुलाम नबी आजाद के पत्र के गुण-दोष में मैं नहीं जाना चाहता। वह इसके बारे में समझाने की सबसे अच्छी स्थिति में होंगे।

मनीष तिवारी ने कहा कि जिस व्यक्ति की हैसियत एक वार्ड चुनाव लड़ने की भी नहीं है, जो व्यक्ति कभी कांग्रेस नेताओं का चपरासी हुआ करता था, वह जब पार्टी के बारे में ज्ञान देता है तो हंसी आती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैंने इस पार्टी को 42 साल दिए हैं। मैं यह पहले भी कह चुका हूं कि हम इस संस्था यानी कांग्रेस के किरायेदार नहीं हैं, हम पार्टी के सदस्य हैं। अब अगर आप हमें बाहर निकालने की कोशिश करेंगे तो यह दूसरी बात है। तब देखा जाएगा।

सोनाली फोगाट केस: पुलिस की कार्रवाई जारी, पब मालिक और ड्रग्स पैडलर गिरफ्तार

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गोवा: हरियाणा भाजपा नेता सोनाली फोगट मौत मामले में एक क्लब मालिक और एक ड्रग तस्कर सहित दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने क्लब के वॉशरूम से ड्रग्स भी बरामद किया है। गोवा पुलिस ने कहा कि मालिक को इसलिए गिरफ्तार किया गया, क्योंकि क्लब से ड्रग्स बरामद किए गए थे। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने ड्रग तस्कर दत्तप्रसाद गांवकर को गिरफ्तार किया है। उसने आरोपी सुखविंदर सिंह को ड्रग्स सप्लाई की थी। पुलिस ने कल दो आरोपियों सुखविंदर सिंह और सुधीर सांगवान को इस केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। इससे पहले गोवा पुलिस ने कहा था कि सोनाली फोगाट के ड्रिंक में उनके दो सहयोगियों ने एक पार्टी के दौरान नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया था। संभवतरू इसके चलते फोगाट की मौत हुई। यह दोनों फोगाट श्हत्याकांडश् में आरोपी हैं।

गोवा पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फोगाट की हत्या के पीछे की वजह आर्थिक हित हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों (सुधीर सांगवान और सुखविंदर सिंह) को गिरफ्तार कर लिया गया है ताकि वे सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकें।

पुलिस महानिरीक्षक ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि दोनों आरोपी पेय पदार्थ में कुछ रासायनिक पदार्थ मिलाते देखे गए थे, जिसे अंजुना के रेस्तरां में हुई पार्टी में फोगाट को पिलाया गया। सांगवान और सिंह 22 अगस्त को फोगाट के साथ गोवा गए थे। बिश्नोई ने बताया कि आरोपियों ने पुलिस पूछताछ के दौरान उत्तरी गोवा में अंजुना के रेस्तरां में फोगाट को जानबूझकर नशीला पदार्थ पिलाने की बात स्वीकार की है। यह घटना 22-23 अगस्त की मध्यरात्रि की है।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच अधिकारी ने रेस्तरां की सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की, जिसमें पाया गया कि सांगवान ने कथित तौर पर जबरन फोगाट को पेय पदार्थ पिलाया। उन्होंने कहा कि 23 अगस्त को तड़के करीब साढे़ चार बजे दोनों आरोपी फोगाट को वॉशरूम ले गए थे, जहां तीनों लोग दो घंटे तक अंदर ही रहे थे। बिश्नोई ने कहा कि हिरासत में पूछताछ के बाद ही यह पता चल पाएगा कि उन दो घंटे के दौरान क्या हुआ था।

जस्टिस यूयू ललित बने देश के 49वें CJI

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नई दिल्ली : जस्टिस उदय उमेश ललित ने आज देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वो दो महीने दो हफ्ते यानी कुल 75 दिन तक सुप्रीम कोर्ट की अगुआई करेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। जस्टिस उदय उमेश ललित भारत के प्रधान न्यायाधीश बने। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित को भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) पद की शपथ दिलाई। जस्टिस ललित भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश बने हैं।

महाराष्ट्र के ललित के परिवार को कानून में 102 साल की विरासत है। जस्टिस यूयू ललित के दादा रंगनाथ ललित भारत की आजादी से बहुत पहले सोलापुर में एक वकील थे। शनिवार को जब जस्टिस यूयू ललित सीजेआइ के रूप में शपथ ली, तो इस समय तीन पीढ़ियां मौजूद रहीं। जस्टिस यूयू ललित ने न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में अपने 74 दिनों के कार्यकाल के दौरान तीन क्षेत्रों पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट में कम से कम एक संविधान पीठ साल भर काम करे।

शनिवार को 49वें CJI बनने वाले जस्टिस ललित ने कहा कि अन्य दो क्षेत्र हैं शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए मामलों को सूचीबद्ध करना और जरूरी मामलों को मेंशन करना। जस्टिस ललित ने कहा कि जिन क्षेत्रों में वह काम करना चाहते हैं उनमें से एक संविधान पीठों के समक्ष मामलों की सूची और विशेष रूप से तीन जजों की पीठ को भेजे गए मामलों के बारे में है। मामलों की लिस्टिंग करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, अतिआवश्यक मामलों को मेंशन करने के संबंध में वह निश्चित रूप से गौर करेंगे।

जस्टिस उदय उमेश ललित क्रिमिनल लॉ के स्पेशलिस्ट हैं। उन्हें 13 अगस्त 2014 को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। इसके बाद उन्हें मई 2021 में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सभी 2G मामलों में CBI के पब्लिक प्रोसिक्यूटर के रूप में ट्रायल्स में हिस्सा ले चुके हैं। वे दो कार्यकालों के लिए सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

जस्टिस यूयू ललित महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। वह जून 1983 में बार में शामिल हुए थे और 1986 से शीर्ष अदालत में प्रैक्टिस करना शुरू किया। उन्होंने 1986 से 1992 तक पूर्व अटार्नी जनरल, सोली जे. सोराबजी के साथ काम किया। 9 नवंबर 1957 को जन्में जस्टिस ललित जून 1983 में एक वकील के रूप में नामांकित हैं। उन्होंने दिसंबर 1985 तक बाम्बे उच्च न्यायलय में प्रैक्टिस की। जनवरी 1986 से उन्होंने दिल्ली में प्रैक्टिस शुरू कर दी। अप्रैल 2004 में वह सर्वोच्च न्यायालय के कानूनी सेवा समिति के सदस्य बने और 13 अगस्त 2014 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए।

सरकार का बड़ा फैसलसा, इन बसों में मुफ्त सफर कर सकेंगे ये लोग

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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एक तरफ मुफ्त की घोषणाओं पर बहस छिड़ी हुई है। दूसरी और भाजपा और एकनाथ शिंदे सरकार ने महाराष्ट्र में एक मुफ्त की घोषणा का ऐलान कर दिया। हालांकि, यह योजना केवल बुजुर्गों के लिए लिए है। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) ने कहा कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक शुक्रवार से एमएसआरटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। यह सुविधा MSRTC की सिटी बसों के लिए उपलब्ध नहीं है। यह राज्य की सीमा के भीतर यात्रा के लिए होगी।

MSRTC की एक विज्ञप्ति में राज्य द्वारा संचालित परिवहन उपक्रम के उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक शेखर चन्ने के हवाले से कहा गया कि इस मुफ्त यात्रा योजना के लिए 26 अगस्त से पहले टिकट बुक करने वाले पात्र लोगों को किराया वापसी मिलेगी। 65 से 75 वर्ष की आयु के लोगों को उपक्रम द्वारा संचालित चुनिंदा RPT प्रकार की बस सेवाओं पर टिकट किराए में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।

आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड आदि जैसे पहचान दस्तावेज दिखाकर मुफ्त यात्रा सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। यह सुविधा MSRTC की सिटी बसों के लिए उपलब्ध नहीं है। यह राज्य की सीमा के भीतर यात्रा के लिए होगी। नई सुविधा की घोषणा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ दिन पहले राज्य विधानसभा में की थी। एमएसआअीसी के पास 16,000 से अधिक बसों का बेड़ा है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के तंज का जवाब देते हुए कहा था कि हां मैं ठेके पर मुख्यमंत्री हूं, लेकिन मैं जनता के विकास का ठेका लेने वाला मुख्यमंत्री हूं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र विधान भवन परिसर में शिंदे गुट के विधायक गुरुवार को भी आक्रामक नजर आए। ये विधायक आदित्य ठाकरे पर निशाना साधते दिखे।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने एक भाषण में ठेके पर काम करने वाले बिजली कर्मचारियों की समस्या पर कहा था कि इनकी समस्याएं वह मुख्यमंत्री क्या सुलझाएगा, जो खुद ही ठेके पर हो। उसे तो यह भी पता नहीं कि वह कब तक मुख्यमंत्री है।

उत्तराखंड : नवजात बच्चे की निर्मम हत्या से सनसनी, धारदार हथियार से काटकर फेंका शव!

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देहरादून: नवजात बच्चों के शव मिलने कोई नई बात नहीं है। लेकिन, देहरादून-मसूरी रोड पर एक नवजात बच्चे का शव मिला, जिससे देखकर पुलिस भी दंग रह गई। पुलिस की मानें तो ऐसा मामला पहली बार सामने आया है, जिसमें किसी बच्चे के शव को काटरकर इस तरह से फेंका गया। यह मामला शुक्रवार का है। बताया जा रहा है कि शव को किसी धारदार हथियार से काटा गया है। नीले रंग की चादर में लिपटे शव के सिर और दोनों हाथ गायब हैं।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। सीसीटीवी फुटेज और अस्पतालों में पूछताछ के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे सूचना पुलिस को सूचना मिली थी। शव को इस तरह कटा हुआ देखकर पुलिस भी सकते में आ गई। नवजात बालक अभी एक-दो दिन पहले ही जन्मा हुआ लग रहा था। गर्भनाल भी ठीक से नहीं सूखी थी। प्रथमदृष्टया उसकी हत्या की आशंका जताई जा रही है, लेकिन नवजात की इस तरह से हत्या की बात भी समझ से परे है।

पुलिस सीसीटीवी कैमरों की मदद से इस रास्ते पर आने-जाने वालों को देखा जा रहा है। मगर, बीते दो दिनों से क्षेत्र में घना कोहरा है तो फुटेज भी साफ नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में पुलिस के पास दूसरा रास्ता अस्पतालों में जाकर चेक करने का है। एसपी सिटी सरिता डोबाल ने बताया कि हाल के दिनों में जिन-जिन अस्पतालों में प्रसव हुए हैं, उनकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही आशाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी गर्भवती महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

शव जिस चादर में लिपटा था, ऐसी चादर अस्पताल में ही इस्तेमाल होती हैं। प्राथमिक पड़ताल में लग रहा है कि उसे सर्जिकल ब्लेड से काटा गया हो, लेकिन किसी भी सर्जरी या इलाज में इस तरह से काटे जाने की बात भी गले नहीं उतर रही है। यदि कोई शिकायत करता है तो पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी। हालांकि, शिकायत न आने के बाद भी पुलिस अपनी ओर से मुकदमा दर्ज करती है। पुलिस के अनुसार, इस तरह से किसी बच्चे का शव पहली बार देखा गया है। आमतौर पर किसी वयस्क का इस तरह से शव मिलता है तो इसे हत्या ही माना जाता है।

डिजिटल पेमेंट पर चार्ज को लेकर वित्त मंत्री का बयान, “अभी सही समय…”

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कोरोना काल से ही देश को पूरी तरह डिजिटल बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। अगर देखा जाए तो देश में पहले के मुकाबले बहुत से काम अब डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं और कई ऐसा काम भी हैं जिनको डिजिटल करने पर जोर दिया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल डिजिटल पेमेंट पर काम किया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट को चार्जेबल बनाया जा रहा है। लेकिन देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फिलहाल ऐसा करने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि फिलहाल ऐसा करना सही नहीं।

शुक्रवार को इसको लेकर बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि “हम डिजिटल पमेंट को पब्लिक गुड के तौर पर देखते हैं। लोगों को इसे स्वतंत्र रूप से एक्सेस करने में सक्षम होना चाहिए ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण आकर्षक हो। इसके अलावा, डिजिटलीकरण के माध्यम से, हम पारदर्शिता का एक ऐसा स्तर प्राप्त करते हैं, जिसकी काफी आवश्यकता है।” उन्होंने आगे कहा कि “हमें अभी भी लगता है कि इसे चार्जेबल बनाने का यह सही समय नहीं है।”

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मंत्री ने बयान को जारी रखते हुए आगे कहा कि “हम अधिक से अधिक खुले डिजिटल लेनदेन, डिजिटलीकरण और प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं जो लोगों के आसानी से पेमेंट करने को सक्षम कर सकते हैं।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले हफ्ते ही भारत सरकार द्वारा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस सेवाओं पर एक घोषणा की गई थी। जिसके अनुसार यूपीआई सेवाओं पर कोई भी शुल्क नहीं लगाए जाने की बात की गई थी।

झारखंड के सीएम ने किया भाजपा हमला, बोले “शैतानी ताकतें हमारी सरकार…”

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पिछले कुछ समय से कई राज्यों की सरकार भाजपा के खिलाफ बयानबाजी कर रही है। ऐसे में अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी भाजपा के खिलाफ बयानबाजी पर उतर गए हैं। उन्होंने भाजपा पर कई आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को दिए हुए एक बयान में उन्होंने भाजपा को शैतानी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि “भाजपा वाले पिछले पांच माह से मुझे सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे खिलाफ हर तरह के हथियार चला रहे हैं, ये मेरी गर्दन पर आरी तक चलाने का प्रयास किये लेकिन हर औजार ही टूट जा रहा है।”

हेमंत सोरेन ने कहा कि वह इन शैतानी ताकतों से अपने खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि “मैं आदिवासी का बेटा हूं, झारखंड का बेटा हूं। कोई इतना आसानी से मुझे नहीं तोड़ सकता है। राजनीतिक रूप से हमारे साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं, हमारे प्रतिद्वंद्वी संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे हमारी सरकार को अस्थिर करने के लिए ईडी, सीबीआई, लोकपाल और आयकर विभाग का दुरुपयोग कर रहे हैं। लेकिन हम इसके बारे में चिंतित नहीं हैं। हमें जनादेश विरोधियों द्वारा नहीं बल्कि लोगों द्वारा मिला है।”

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उन्होंने आगे कहा कि “राज्य दो साल तक कोविड-19 से प्रभावित रहा। अब, जब हमने अपने विकास की गति को तेज किया है, तो शैतानी ताकतें हमारी गति को रोकने के लिए अपने बिल से बाहर आ गई हैं। ऐसी ताकतें कुछ भी कर सकती हैं लेकिन मुझे अपने लोगों के लिए काम करने से वे कभी नहीं रोक सकती हैं।” उन्होंने अपने इस बयान में भाजपा को पूरी तरह निशाना बनाया।

वह आगे कहते हैं कि “बाहरी ताकतों का एक गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने पिछले 20 वर्षों से राज्य को तबाह करने का काम किया था। 2019 में जब उन्हें सत्ता से बेदखल किया गया, तो साजिशकर्ता इसे बर्दाश्त नहीं कर सके. अगर हम यहां रहते हैं, तो उनके लिए आगे मुश्किल समय आने वाला है। हम सत्ता के भूखे नहीं हैं। हम यहां सिर्फ लोगों के कल्याण के लिए, काम करने के लिए एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत हैं। क्या कभी किसी ने सोचा था कि हर बूढ़ी, विधवा और एकल महिला को पेंशन मिलेगी? यह आपके सबके आशीर्वाद से संभव हुआ है।”

उत्तराखंड: UKSSSC पेपर लीक मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, इस कंपनी का मालिक गिरफ्तार

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देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग (UKSSSC) पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने नकल माफिया को गिरफ्तार करने के बाद STF ने एक बड़ा एक्शन लिया है।

STF ने अधीनस्थ चयन सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए प्रिंटिंग प्रेस से पेपर छापने वाली कंपनी और आउट सोर्स कंपनी के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। यह पेपर लीक मामले में बड़ी कार्यवाही मानी जा रही।

 

UKSSSC पेपर लीक मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। आरआईएमएस (RIMS) कंपनी लखनऊ का मालिक राजेश चौहान को STF उत्तराखंड ने पेपर लीक करने और केंद्रपाल और अन्य के माध्यम से सौदा करने के साक्ष्य के आधार पर गिरफ्तार कर लिया है।

उत्तराखंड: UKSSSC मामले में यूपी का नकल माफिया अरेस्ट, अब तक 24 गिरफ्तार

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देहरादून: पेपर लीक मामले में एक और नकल माफिया को गिरफ्तार कर लिया है एसटीएफ ने इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार केंद्रपाल धामपुर नकल सेंटर का केंद्रबिंदु था।

केंद्रपाल निवासी धामपुर को गहन पूछताछ बाद एसटीएफ उत्तराखंड ने गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश का नकल माफिया का गड़जोड उत्तराखंड के सरकारी नौकरियों के सौदागरों से था कनेक्शन। हाकम सिंह, चंदन मनराल, जगदीश गोस्वामी, ललित से गहरे संबंध थे।

केंद्रपाल अपने विभिन्न संपर्क के माध्यम से पेपर लीक की करता था व्यवस्था, मोटी रकम लेकर की जाती थी डील

एसटीएफ उत्तराखंड के रडार पर उत्तर प्रदेश के अन्य नकल माफिया गड़जोड की तह तक जल्दी पहुंचने और पूरे गैंग की अंतिम कड़ी का पर्दाफाश शीघ्र होने की उम्मीद है।