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उत्तराखंड: ब्लैकलिस्टेड कंपनी से कराई थी परीक्षा, पहले ही कर चुकी थी बड़ा भर्ती घोटाला

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देहरादून: वन दरोगा भर्ती परीक्षा पर बेरोजगार संगठन ने सवाल खड़े किए थे। तब युवाओं ने परीक्षा कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्टेड बताया था। लेकिन, आयोग ने उनकी बात मानने के बजाय, उल्टा युवाओं के खिलाफ ही कार्रवाई की धमकी दी थी।

यह कंपनी पहले ही ऑनलाइन परीक्षा व्यवसायिक परीक्षा मंडल, मध्य प्रदेश (व्यापम) ने ब्लैकलिस्टेड किया था। NSEIT लिमिटेड कंपनी को इस परीक्षा से एक महीने पहले सितंबर 2021 में मध्य प्रदेश सरकार ने ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था। कंपनी की तीन और परीक्षाओं की वहां छह महीने पहले से जांच चल रही थी। बावजूद इसके आयोग ने इसके बारे में कोई जानकारी नहीं जुटाई।

अब तक हुए खुलासे में आयोग की घोर लापरवाही सामने आ रही है। आयोग के अधिकारियों ने परीक्षाएं कराने का जिम्मा कंपनियों को दिया और खुद गहरी नींद सो गए। स्नातक स्तरीय परीक्षा में RMS टेक्नो सॉल्यूशन और अब वन दरोगा ऑनलाइन परीक्षा में NSEIT , दोनों का ही रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है।

NSEIT कंपनी के माध्यम से मध्य प्रदेश में प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने कृषि विस्तार अधिकारी, नर्सिंग और ग्रुप दो की सहायक संप्रेक्षक समेत 10 परीक्षाएं ऑनलाइन कराई थीं। ये परीक्षाएं जनवरी से फरवरी 2021 के बीच कराई गई थीं। इन पर सवाल उठे तो मध्य प्रदेश सरकार ने जांच कराई।

साइबर पुलिस ने जांच के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी, नर्सिंग और ग्रुप दो की सहायक संप्रेक्षक की परीक्षा में धांधली पाई। इसके बाद इन परीक्षाओं को रद्द कर कंपनी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। एसटीएफ के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह बात जांच में सामने आ चुकी है।

MP में जब जांच हुई तो पता चला कि परीक्षा केंद्रों पर पेपर को गलत तरीके से डाउनलोड कराया गया था। विस्तृत जांच में पाया गया था कि परीक्षा के लिए 10 फरवरी 2021 को दोपहर 1.30 लॉग हुआ। पेपर डाउनलोड पीईबी यानी व्यापम के कंप्यूटर से नहीं बल्कि किसी और मशीन से हुआ फिर जमकर नकल हुई। इन तीनों परीक्षाओं में मध्य प्रदेश के तीन लाख से ज्यादा अभ्यर्थी बैठे थे। इसी तरह की गड़बड़ी वन दरोगा भर्ती परीक्षा में भी हुई है।

AIIMS में नहीं मिलता सही खाना, चिकन करी और पनीर टेस्टिंग में फेल

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देश के सबसे बड़े अस्पताल AIIMS के मेस में जो खाना मिलता है उसकी क्वालिटी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेस से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा इकट्ठा किए गए सात सैंपल में से चार कथित तौर पर मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। FSSAI की आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया है कि चिकन करी, पनीर और चटनी के सैंपल टेस्टिंग में फेल रहे।

FSSAI की जांच के कुछ दिनों बाद एम्स हॉस्टल के मेस को शिकायतों के आधार पर बंद कर दिया गया था। आपको बता दें कि कैंटीन में के खानों में कीड़े मिलने की शिकायत की गई थी। एम्स प्रशासन ने हॉस्टल नंबर सात में मेस और हॉस्टल नंबर पांच में एक कैफेटेरिया को बंद करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों, उपयोक्ता संगठनों के कार्यकारी सदस्यों एवं खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों द्वारा विभिन्न मेसों का औचक निरीक्षण किया गया। इसके बाद मेस और कैंटीन को 30 अगस्त 2022 से उसे बंद कर दिया गया।  एम्स के डॉक्टरों ने अस्पताल के एक मेस के खाने को लेकर सवाल उठाया था।

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने यह भी दावा किया कि एफएसएसएआई द्वारा निरीक्षण के बाद 10 अगस्त को हॉस्टल मेस को बंद करने का निर्देश देने के बावजूद खआने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ और मेस भी फिर से खोल दिया गया।

दिल्ली सरकार पर एक और मुसीबत, शराब नीति मामले में दर्ज हुआ मनी लॉन्ड्रिंग केस, शुरू हुई…

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दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच चल रही इस सियासी लड़ाई में भाजपा लगातार आप पर हावी हो रही है। भाजपा लगातार कुछ ऐसा कर रही है, जिससे आम आदमी पार्टी को मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शराब नीति को लेकर आम आदमी पार्टी को लगातार घेरा जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार ईडी ने आप की एक और परेशानी बढ़ा दी है। खबरों के अनुसार अब ईडी ने शराब नीति मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया है और 30 जगहों पर छापेमारी भी शुरू कर है। हालांकि अभी तक इन 30 जगहों का खुलासा नहीं हो पाया है।

लेकिन ये खबर पक्की है कि अब तक इस मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर छापामारी शुरू नहीं की गई है। भाजपा एक दिन आम आदमी पार्टी पर तरह तरह के आरोप लगा रही है। शराब नीति को लेकर तो आम आदमी पार्टी को लगातार घेरा जा रहा है। बताते चले कि ये नीति पहले ही वापस ली जा चुकी है। लेकिन भाजपा फिर भी इस नीति को लेकर ही पार्टी पर हमलावार है। सोमवार को बीजेपी ने एक स्टिंग जारी करके केजरीवाल के ऊपर निशाना साधा था।

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बीजेपी प्रवक्ता, संबित पात्रा ने कहा था कि “स्टिंग मास्टर का ही स्टिंग हो गया, घोटाले के एक आरोपी के पिता ने खोल दी पोल।” इसके बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसका जवाब दिया और बीजेपी पर हावी हो गए। उन्होंने कहा कि “बीजेपी बहुत दिन से चिल्ला रही है कि घपला हो गया। कभी कहते हैं 1300 करोड रुपए, कभी 8,000 करोड़ रुपये, कभी 500, कभी 144 करोड़, कभी 30 करोड़. फिर सीबीआई से FIR कराई तो सीबीआई ने ढूंढ-ढूंढ कर दूर से कहीं से खींच कर दो कंपनी के बीच में हो रही वाइट डीलिंग को जबरदस्ती मेरे ऊपर थोपने की कोशिश की। वह भी सूत्रों के हवाले से। उसके आधार पर मेरे घर पर छापा डलवा दिया, उसमें कुछ नहीं मिला।”

ईडी के डायरेक्टर का कार्यकाल बढ़ाने पर बवाल, केंद्र ने दाखिल किया हलफनामा…

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प्रवर्तन निदेशालय के मौजूदा निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल पूरा होने वाला है। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाने की बात सामने आ रही है। लेकिन विपक्ष इसके खिलाफ है, जिसके चलते विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी मांग है कि संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को आगे न बढ़ाया जाए। जिसको देखते हुए केंद्र सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र का कहना है कि विपक्ष की याचिकाएं सुनवाई के काबिल नहीं हैं।

केंद्र ने कहा कि “ये याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं. कार्यकाल के विस्तार को चुनौती देने वाली याचिकाएं राजनीति से प्रेरित हैं. याचिकाकर्ता उन राजनीतिक दलों से संबंधित हैं जिनके नेता वर्तमान में ED की जांच के दायरे में हैं। याचिकाकर्ता जया ठाकुर, साकेत गोखले, रणदीप सिंह सुरजेवाला और महुआ मोइत्रा या तो कांग्रेस पार्टी या तृणमूल कांग्रेस के हैं, जिनके शीर्ष नेताओं की जांच ED द्वारा की जा रही है। ज्यादातर मामलों में सक्षम अदालतों ने या तो मामले का संज्ञान लिया है या संवैधानिक अदालतों ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया है।”

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केंद्र ने आगे कहा कि “याचिकाकर्ता को केवल तभी यह भरोसा होगा कि ये एजेंसियां ​​​​स्वतंत्र हैं, यदि ये एजेंसियां ​​​​राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा किए गए अपराधों से आंखें मूंद लें।” केंद्र ने आगे कहा कि “यह विस्तार इसलिए किया गया कि विशेषज्ञता वाली प्रमुख एजेंसी को प्रशासित किया जाना एक सतत प्रक्रिया है और संगठन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का कार्यकाल 2 से 5 वर्ष का होना चाहिए।” सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई 12 सितंबर में करेगी।

दिल्ली-NCR सहित कई राज्यों में ED की छापेमारी, 30 से ज्यादा ठिकानों पर सर्च जारी

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नई दिल्ली : नई आबकारी नीति को लेकर उपजा विवाद थमता नहीं नजर आ रहा है। ताजा मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम दिल्ली में कथित शराब घोटाले को लेकर कई शराब कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ईडी की ओर से यह छापेमारी अभियान दिल्ली-NCR और अन्य राज्यों में 30 ज्यादा ठिकानों पर चलाया जा रहा है। इसमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई शहर शामिल हैं।

दिल्ली की नई आबकारी नीति को लेकर बवाल मचा हुआ है। दरअसल, दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति के जरिये शराब खरीदने का अनुभव पूरी तरह से बदल देना चाहती थी। नई आबकारी नीति में होटलों के बार, क्लब्स और रेस्टोरेंट्स को रात 3 बजे तक खोले रखने की छूट दी गई थी।

इसमें शराब परोसने के लिए छत समेत अन्य स्थानों की अनुमति थी। बता दें कि इससे पहले तक खुले में शराब परोसने पर पाबंदी थी। इसके अलावा बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम किया जा सकता है।

शिवसेना सांसद संजय राउत की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए और बढ़ी

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मुंबई : मुंबई की एक ‘चॉल’ के पुनर्विकास में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले में यहां की एक विशेष अदालत ने सोमवार को शिवसेना सांसद संजय राउत की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी है।

संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 1 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत उपनगरीय गोरेगांव में पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें सोमवार को न्यायिक रिमांड की समाप्ति पर विशेष PMLA न्यायाधीश MG देशपांडे के समक्ष पेश किया गया।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। पात्रा चॉल केस में जेल में बंद शिवसेना सांसद संजय राउत की मुसीबत और बढ़ गई है। अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिन आगे यानी 19 सितंबर तक बढ़ा दी है। बता दें कि 1 अगस्त को संजय राउत को ED ने मुंबई के उत्तरी उपनगरों में एक पुनर्विकास परियोजना से संबंधित कथित धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया था।

 इससे पहले कोर्ट ने 21 अगस्‍त को उनकी न्‍यायिक हिरासत 5 सितंबर तक के लिए बढ़ायी थी। संजय राउत पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। मामला मुंबई के पात्रा चॉल के जमीन पर बने फ्लैटों की जगह नए घर बनाने को लेकर हुई गड़बड़ी का है। ईडी का कहना है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर अवैध तरीकों से रुपयों का लेन-देन किया गया है।

BJP विधायक की हार्ट अटैक से मौत, पांचवीं बार दर्ज की थी जीत

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लखीमपुर : लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्ण नाथ सीट से पांचवीं बार जीत दर्ज करने वाले विधायक अरविंद गिरि की मंगलवार सुबह आर्ट अटैक से मौत हो गई। खास बात यह है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ थे और लखीमपुर से लखनऊ जा रहे थे। अरविंद गिरि मंगलवार की सुबह करीब छह बजे अपने गोला स्थित आवास से लखनऊ के लिए रवाना हुए थे। विधायक की गाड़ी अटरिया के पास पहुंची थी, तभी उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी।

विधायक के सीने में तेज दर्द शुरू हो गया था। उन्होंने ड्राइवर को अपनी तबियत के बारे में अवगत कराया। ड्राइवर ने तत्काल किसी को जानकारी दी। लेकिन, जब तक अरविंद गिरि को अस्पताल पहुंचाया जाता तब तक उनकी सांस थम चुकी थी।  यह सूचना पूरे जिले में सनसनी की तरह फैल गई। लोगों का हुजूम विधायक निवास पहुंचने लगा।

अभी  एक दिन पहले ही गोला की छोटी काशी के कारिडोर बनने को लेकर विधायक अरविंद गिरि बहुत उत्साहित दिख रहे थे। इस कार्य के लिए उन्होंने शासन-प्रशासन को भी आभार जताया था। बताया जाता है कि वह छोटी काशी के कारिडोर के सिलसिले में ही लखनऊ जा रहे थे, लेकिन उससे पहले ही विधायक का सफर खत्म हो गया। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अरविंद गिरि की मौत पर दुख व्यक्त किया है।

उत्तराखंड ब्रेकिंग: यूनिवर्सिटी ने पहले कराई परीक्षाएं, अब कर दीं रद्द

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देहरादून: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय अक्सर चर्चाओं में रहता है। अब एक और मामले को लेकर यूनिवर्सिटी फिर चर्चा में है। यूनिवर्सिटी ने पूर्व में हुई कुछ परीक्षाओं के प्रश्न पत्र पाठ्यक्रम के अनुरूप न होने पर इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। परीक्षाएं अब दोबारा से 10 सितंबर 2022 को आयोजित की जाएंगी।

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित परीक्षा के बाद कुछ परीक्षार्थियों की ओर से विश्वविद्यालय को शिकायत की गई थी कि परीक्षा में प्रश्न पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं हैं। जिसकी जांच कराए जाने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से इन विषयों की परीक्षाओं को फिर से कराए जाने का निर्णय लिया गया है।

परीक्षा नियंत्रक प्रो.सोमेश कुमार के मुताबिक तीन अगस्त को आयोजित एमए शिक्षा शास्त्र, 30 अगस्त को आयोजित एमएससी रसायन विज्ञान, पांच सितंबर को आयोजित एमए समाजशास्त्र की परीक्षाओं को रद कर दिया गया है। इन परीक्षाओं को अब 10 सितंबर को पूर्व निर्धारित परीक्षा केंद्रों में सुबह 9 से 11 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

उत्तराखंड: क्या जल्द बनने वाला है भू-कानून, समिति ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट

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देहरादून: राज्य में भू – कानून के अध्ययन व परीक्षण के लिए गठित समिति ने आज प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने प्रदेश हित में निवेश की संभावनाओं और भूमि के अनियंत्रित क्रय – विक्रय के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपनी 23 संस्तुतियां सरकार को दी हैं।

 

आज मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में समिति के अध्यक्ष व प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव  सुभाष कुमार, समिति के सदस्य व बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य अजेंद्र अजय, पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण ढौंडियाल व श्री डी.एस.गर्व्याल और समिति के पदेन सदस्य सचिव के रूप में हाल तक सचिव राजस्व का कार्यभार संभाल रहे दीपेंद्र कुमार चौधरी ने सीएम से भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार शीघ्र ही समिति की रिपोर्ट का गहन अध्ययन कर व्यापक जनहित व प्रदेश हित में समिति की संस्तुतियों पर विचार करेगी और भू – कानून में संशोधन करेगी।

 

जुलाई 2021 में सीएम धामी ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी

 

उल्लेखनीय है कि सीएम धामी ने जुलाई 2021 में प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद उसी वर्ष अगस्त माह में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को राज्य में औद्योगिक विकास कार्यों हेतु भूमि की आवश्यकता तथा राज्य में उपलब्ध भूमि के संरक्षण के मध्य संतुलन को ध्यान में रख कर विकास कार्य प्रभावित न हों, इसको दृष्टिगत रखते हुए विचार – विमर्श कर अपनी संस्तुति सरकार को सौंपनी थी।

 

सभी हितधारकों से सुझाव लेकर गहन विचार विमर्श कर 80 पृष्ठ में तैयार की रिपोर्ट

 

समिति ने राज्य के हितबद्ध पक्षकारों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित कर गहन विचार – विमर्श कर लगभग 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इसके अलावा समिति ने सभी जिलाधिकारियों से प्रदेश में अब तक दी गई भूमि क्रय की स्वीकृतियों का विवरण मांग कर उनका परीक्षण भी किया।

 

राज्य में निवेश और रोजगार बढाने के साथ भूमि के दुरूपयोग को रोकने पर फोकस

 

समिति ने अपनी संस्तुतियों में ऐसे बिंदुओं को सम्मिलित किया है जिससे राज्य में विकास के लिए निवेश बढ़े और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो। साथ ही भूमि का अनावश्यक दुरूपयोग रोकने की भी अनुशंसा की है।

 

समिति ने वर्तमान में प्रदेश में प्रचलित उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) यथा संशोधित और यथा प्रवृत्त में जन भावनाओं के अनुरूप हिमाचल प्रदेश की तरह कतिपय प्रावधानों की संस्तुति की है।

समिति की प्रमुख संस्तुतियां- वर्तमान में जिलाधिकारी द्वारा कृषि अथवा औद्यानिक प्रयोजन हेतु कृषि भूमि क्रय करने की अनुमति दी जाती है। कतिपय प्रकरणों में ऐसी अनुमति का उपयोग कृषि/औद्यानिक प्रयोजन न करके रिसोर्ट/ निजी बंगले बनाकर दुरुपयोग हो रहा है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में लोग भूमिहीन हो रहें और रोजगार सृजन भी नहीं हो रहा है।

 

समिति ने संस्तुति की है कि ऐसी अनुमतियां जिलाधिकारी स्तर से ना दी जाऐं। शासन से ही अनुमति का प्रावधान हो

 

– वर्तमान में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों हेतु भूमि क्रय करने की अनुमति जिलाधिकारी द्वारा प्रदान की जा रही है। हिमांचल प्रदेश की भाँति ही ये अनुमतियाँ, शासन स्तर से न्यूनतम भूमि की आवश्यकता के आधार पर, प्राप्त की जा

 

– वर्तमान में राज्य सरकार पर्वतीय एवं मैदानी में औद्योगिक प्रयोजनों, आयुष, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, उद्यान एवं विभिन्न प्रसंस्करण, पर्यटन, कृषि के लिए 12.05 एकड़ से ज्यादा भूमि आवेदक संस्था/फर्म/ कम्पनी/ व्यक्ति को उसके आवेदन पर दे सकती है

 

उपरोक्त प्रचलित व्यवस्था को समाप्त करते हुए हिमाचल प्रदेश की भांति न्यूनतम भूमि आवश्यकता (Essentiality Certificate) के आधार पर दिया जाना उचित हो

 

– केवल बड़े उद्योगों के अतिरिक्त 4-5 सितारा होटल / रिसॉर्ट, मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वोकेशनल/प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आदि को ही Essentiality Certificate के आधार भूमि क्रय करने की अनुमति शासन स्तर से दी जाए। अन्य प्रयोजनों हेतु लीज पर ही भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था लाने की समिति संस्तुति करती है

 

– वर्तमान में, गैर कृषि प्रयोजन हेतु खरीदी गई भूमि को 10 दिन में S.D.M. धारा- 143 के अंतर्गत गैर कृषि घोषित करते हुए खतौनी में दर्ज करे

 

परन्तु क्रय अनुमति आदेश में 2 वर्ष में भूमि का उपयोग निर्धारित प्रयोजन में करने की शर्त रहती है। यदि निर्धारित अवधि में उपयोग ना करने पर या किसी अन्य उपयोग में लाने/विक्रय करने पर राज्य सरकार में भूमि निहित की जाएगी, यह भी शर्त में उल्लखित रहता है

 

यदि 10 दिन में गैर कृषि प्रयोजन हेतु क्रय की गई कृषि भूमि को “गैर कृषि” घोषित कर दिया जाता है, तो फिर यह धारा-167 के अंतर्गत राज्य सरकार में (उल्लंघन की स्थिति में) निहित नहीं की जा सकती

 

अतः नई उपधारा जोङते हुए उक्त भूमि को पुनः कृषि भूमि घोषित करना होगा तत्पश्चात उसे राज्य सरकार में निहित किया जा सकता है

 

– कोई व्यक्ति स्वयं या अपने परिवार के किसी भी सदस्य के नाम बिना अनुमति के अपने जीवनकाल में अधिकतम 250 वर्ग मीटर भूमि आवासीय प्रयोजन हेतु खरीद सकता है

 

समिति की संस्तुति है कि परिवार के सभी सदस्यों के नाम से अलग अलग भूमि खरीद पर रोक लगाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड राजस्व अभिलेख से लिंक कर दिया जा

 

– राज्य सरकार ‘भूमिहीन’ को अधिनियम में परिभाषित करे। समिति का सुझाव है कि पर्वतीय क्षेत्र में न्यूनतम 5 नाली एवं मैदानी क्षेत्र में 0.5 एकड़ न्यूनतम भूमि मानक भूमिहीन’ की परिभाषा हेतु औचित्यपूर्ण हो

– भूमि जिस प्रयोजन के लिए क्रय की गई, उसका उललंघन रोकने के लिए एक जिला / मण्डल / शासन स्तर पर एक टास्क फ़ोर्स बनायीं जाए। ताकि ऐसी भूमि को राज्य सरकार में निहित किया जा सके।

 

– सरकारी विभाग अपनी खाली पड़ी भूमि पर साइनबोर्ड लगाएं।

 

– कतिपय प्रकरणों में कुछ व्यक्तियों द्वारा एक साथ भूमि क्रय कर ली जाती है तथा भूमि के बीच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमि पड़ती है तो उसका रास्ता रोक दिया जाता है। इसके लिए Right of Way की व्यवस्था।

 

– विभिन्न प्रयोजनों हेतु जो भूमि खरीदी जायेगी उसमें समूह ग व समूह ‘घ’ श्रेणीयो में स्थानीय लोगो को 70% रोजगार आरक्षण सुनिश्चित हो। उच्चतर पदों पर योग्यतानुसार वरीयता दी जाए।

 

– विभिन्न अधिसूचित प्रयोजनों हेतु प्रदान की गयीं अनुमतियों के सापेक्ष आवेदक इकाइयों/ संस्थाओं द्वारा कितने स्थानीय लोगों को रोजगार दिए गए, इसकी सूचना अनिवार्य रूप से शासन को उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो।

 

– वर्तमान में भूमि क्रय करने के पश्चात भूमि का सदुपयोग करने के लिए दो वर्ष की अवधि निर्धारित है और राज्य सरकार को अपने विवेक के अनुसार इसे बढ़ाने का अधिकार दिया गया है। इसमें संशोधन कर विशेष परिस्थितयों में यह अवधि तीन वर्ष (2 + 1 = 3) से अधिक नहीं होनी चाहिए।

 

– पारदर्शिता हेतु क्रय- विक्रय, भूमि हस्तांतरण एवं स्वामित्व संबंधी समस्त प्रक्रिया Online हो। समस्त प्रक्रिया एक वेबसाइट के माध्यम से पब्लिक डोमेन में हो।

 

– प्राथमिकता के आधार पर सिडकुल/ औद्योगिक आस्थानों में खाली पड़े औद्योगिक प्लाट्स/ बंद पड़ी फैक्ट्रियों की भूमि का आबंटन औद्योगिक प्रयोजन हेतु किया जाए।

 

– प्रदेश में वर्ष बन्दोबस्त हुआ है। जनहित/ राज्य हित में भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।

 

– भूमि क्रय की अनुमतियों का जनपद एवं शासन स्तर पर नियमित अंकन एवं इन अभिलेखों का रख-रखाव ।

 

– धार्मिक प्रयोजन हेतु कोई भूमि क्रय/ निर्माण किया जाता है तो अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से निर्णय लिया जाए।

– राज्य में भूमि व्यवस्था को लेकर जब भी कोई नया अधिनियम/ नीति / भूमि सुधार कार्यक्रम चलायें जायें तो राज्य हितबद्ध पक्षकारों / राज्य की जनता से सुझाव अवश्य प्राप्त कर लिए जाएँ।

– नदी – नालों, वन क्षेत्रों, चारागाहों, सार्वजनिक भूमि आदि पर अतिक्रमण कर अवैध कब्जे /निर्माण / धार्मिक स्थल बनाने वालों के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान हो।

-संबंधित विभागों के अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई का प्रावधान हो। ऐसे अवैध कब्जों के विरुद्ध प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाए।

 

एक और सियासी दांव, उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका

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महाराष्ट्र : महाराष्ट्र की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्दव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोमवार को 2020 में पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार द्वारा विधान परिषद (एमएलसी) के लिए प्रस्तावित 12 नामों वाली सूची को वापस लेने की इजाजत दे दी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसके लिए गवर्न को चिट्ठी भी लिखी थी।

उन्होंने इसमें एमएलसी के लिए प्रस्तावित नामों को वापस लेने की मांग की थी, जो कि राजभवन के पास करीब दो साल से लंबित है। इस लिस्ट में उर्मिला मातोंडर और एकनाथ खडसे जैसे नाम भी शामिल हैं।

इस लिस्ट को लेकर तत्कालीन एमवीए सरकार और उस समय विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। सत्ता पक्ष ने राज्यपाल भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली वर्तमान महाराष्ट्र सरकार ने राज्यपाल कोश्यारी को लिखे पत्र में 2020 में पिछली एमवीए सरकार द्वारा भेजे गए एमएलसी नामांकन के लिए 12 नामों की सूची को वापस लेने की मांग की थी। सरकार ने नाम वापस लेते हुए राजभवन से कहा है कि वह एमएलसी नामांकन के लिए नई सूची भेजेगी।

पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने 2020 में राज्यपाल को विधान परिषद में नामांकन के लिए 12 नामों की एक सूची सौंपी थी। हालांकि, कोश्यारी ने न तो इसके खारिज किया और न ही स्वीकार किया। इस सूची में शिवसेना से फिल्म अभिनेत्री अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर, विजय करंजकर, नितिन बानुगड़े पाटिल और चंद्रकांत रघुवंशी।

वहीं, एकनाथ खडसे, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे और गायक आनंद शिंदे को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की तरफ से थे। कांग्रेस ने रजनी पाटिल, सचिन सावंत, अनिरुद्ध वंकर और मुजफ्फर हुसैन का नाम दिया था।