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अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 10 आरोपी गिरफ्तार

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए 10 तस्करों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क पुरानी दिल्ली से संचालित हो रहा था और इसके तार पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश तक जुड़े हुए थे।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 21 अत्याधुनिक विदेशी हथियार बरामद किए हैं। इनमें सबमशीन गन के साथ PX-5.7, PX-3, शैडो CZ, बेरेटा, टॉरस और वाल्थर जैसी पिस्तौलें शामिल हैं। बताया जा रहा है कि PX-5.7 पिस्तौल का उपयोग आमतौर पर विशेष सुरक्षा बलों द्वारा किया जाता है, जिससे इस नेटवर्क की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि इन हथियारों की तस्करी पाकिस्तान से की जा रही थी। हथियार पहले नेपाल सीमा तक पहुंचाए जाते थे और वहां से उन्हें दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई किया जाता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और संगठित तरीके से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए हथियारों की आपूर्ति कर रहा था। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

उत्तराखंड : टूरिस्ट कैंप में गुलदार का हमला, सिक्किम निवासी पर्यटक घायल

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चंपावत। नेपाल सीमा से सटे पंचेश्वर क्षेत्र में स्थित रीवर ट्रेल टूरिस्ट कैंप में मंगलवार शाम एक गुलदार ने हमला कर दहशत फैला दी। इस हमले में सिक्किम के गंगटोक निवासी 47 वर्षीय इयान गंभीर रूप से घायल हो गए, हालांकि उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से गुलदार की गतिविधियां कैंप के आसपास देखी जा रही थीं।

मंगलवार को भी दोपहर से ही गुलदार कैंप क्षेत्र में घूमता रहा और कई टेंटों को नुकसान पहुंचाने के बाद शोर मचाने पर भाग गया। बाद में वह चुपचाप कैंप के शौचालय में छिप गया। इसी दौरान राफ्टिंग कार्य से जुड़े इयान जैसे ही शौचालय पहुंचे, गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। युवक के चीखने पर अन्य लोगों ने शोर मचाया, जिससे गुलदार उसे छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।

घायल इयान को तुरंत कैंप संचालक द्वारा लोहाघाट उप-जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों के अनुसार, युवक के चेहरे और शरीर पर गुलदार के पंजों और दांतों के गहरे घाव हैं, लेकिन वह खतरे से बाहर है। बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

कैंप संचालकों का कहना है कि यह गुलदार काफी बड़ा और असामान्य व्यवहार वाला है। इससे पहले भी वह आसपास के इलाकों में लोगों पर हमला करने की कोशिश कर चुका है। हाल ही में लोहाघाट के धौनी शिलिंग गांव में भी एक महिला पर गुलदार के हमले की घटना सामने आई थी। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गुलदार को जल्द पकड़ने या मारने की मांग की है।

उत्तराखंड : चारधाम में प्रवेश नियमों पर विवाद के बीच यमुनोत्री धाम से बड़ा संदेश

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उत्तरकाशी। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को लेकर इन दिनों प्रवेश नियमों पर जारी बहस के बीच यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने अपना रुख साफ कर दिया है। समिति ने स्पष्ट कहा है कि यमुनोत्री धाम में आने वाले श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का जाति या धर्म नहीं पूछा जाएगा और सभी का “अतिथि देवो भव” की परंपरा के तहत स्वागत किया जाएगा।

हाल के दिनों में बदरीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और गंगोत्री धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग तरह के प्रस्ताव और नियम चर्चा में रहे हैं। खासतौर पर गंगोत्री में पंचगव्य के साथ प्रवेश जैसी शर्तों ने इस मुद्दे को और गरमा दिया था।

इन घटनाक्रमों के बीच यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या यमुनोत्री धाम भी इसी तरह के नियम लागू करेगा। हालांकि, यमुनोत्री मंदिर समिति ने मंगलवार को जारी बयान में ऐसे किसी भी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाला हर व्यक्ति श्रद्धा के साथ आता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण और यात्रा से जुड़े निर्णय लेना सरकार का अधिकार क्षेत्र है।

वहीं, समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल ने कहा कि यमुनोत्री धाम में “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के अनुरूप सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा। इस बीच राज्य सरकार भी यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए तैयारियों में जुटी है। 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है।

19 अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा, अब तक हो चुके 10 लाख पंजीकरण

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देहरादून। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा को लेकर सरकार पूरी तरह तैयार है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम व सुरक्षित दर्शन कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 अप्रैल से शुरू हो रही यात्रा के लिए अब तक करीब 10 लाख श्रद्धालु पंजीकरण कर चुके हैं। वहीं गढ़वाल मंडल विकास निगम के विश्राम गृहों में लगभग 5 करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग हो चुकी है, जो यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं के उत्साह को दर्शाता है।

तैयारियां तेज, सुविधाओं पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2025 में धामों के कपाट बंद होने के बाद से ही सरकार ने अगली यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी थीं। सड़क, आधारभूत ढांचा, परिवहन, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

आपदा के बावजूद रिकॉर्ड श्रद्धालु

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगभग डेढ़ महीने तक यात्रा बाधित रही थी, इसके बावजूद 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस बार सरकार का लक्ष्य है कि यात्रा और भी बेहतर ढंग से संचालित हो।

सुरक्षा और सूचना पर जोर

राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षित यात्रा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आपदा से जुड़ी पूर्व चेतावनियों की जानकारी भी यात्रियों को समय-समय पर दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा शुरू होने से पहले वे स्वयं यात्रा मार्गों का निरीक्षण करेंगे, ताकि व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा सके।

कैपिंग पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में श्रद्धालुओं की संख्या पर किसी प्रकार की सीमा (कैपिंग) लगाने को लेकर अभी कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

ईरान को अमेरिका का 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव, पाकिस्तान बना मध्यस्थ

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वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है, जिसने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश भी की है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव ऐसे समय पर सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य तैयारियों को भी तेज कर रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की इच्छा जताई है।

सैन्य तैनाती में भी इजाफा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पहले से पश्चिम एशिया में तैनात करीब 50,000 सैनिकों के अलावा अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से लगभग 1,000 और सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही पेंटागन दो मरीन यूनिट्स की तैनाती पर भी काम कर रहा है, जिससे क्षेत्र में लगभग 5,000 अतिरिक्त मरीन और हजारों नौसैनिकों की मौजूदगी बढ़ेगी।

इस्राइल ने जताई हैरानी

इस बीच इज़राइल ने अमेरिका के इस कदम पर आश्चर्य जताया है। इज़राइल पहले से ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की वकालत करता रहा है, ऐसे में युद्धविराम प्रस्ताव को अलग रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा प्रस्ताव

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम दोहरी रणनीति का हिस्सा हो सकता है—एक ओर कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिश, वहीं दूसरी ओर सैन्य दबाव बनाए रखना। माना जा रहा है कि यदि ईरान इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका के पास आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त तैयारी का समय रहेगा।

युद्ध के असर से जूझ रही दुनिया, भारत ने कूटनीति से शांति का दिया संदेश: पीएम मोदी

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नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर विस्तृत बयान देते हुए कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र में शांति बहाली के लिए संवाद और कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से जारी इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो रही है।

खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय, सुरक्षा बड़ी चिंता

पीएम मोदी ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहकर काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल मौजूद हैं।

कूटनीतिक प्रयास तेज

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार ईरान, इजराइल और अमेरिका सहित खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों के संपर्क में है। उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत हो चुकी है और तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाल करना है। हम होर्मुज मार्ग को फिर से सुचारु करने के लिए भी प्रयासरत हैं।”

आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत के पास आत्मनिर्भर बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन रणनीतिक तेल भंडार तैयार किए गए हैं और 65 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त क्षमता पर काम जारी है। साथ ही, जहाज निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की गई है।

संसद से शांति की अपील

पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में संसद को एकजुट होकर शांति और संवाद का संदेश दुनिया तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, महिला SSC अधिकारियों को मिलेगा पूर्ण पेंशन लाभ

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में सेना, नौसेना और वायुसेना की उन महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें परमानेंट कमीशन (PC) नहीं दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी सभी महिला अधिकारी अब पूर्ण पेंशन लाभ की हकदार होंगी। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनाया।

भेदभावपूर्ण व्यवस्था पर कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन से वंचित रखना केवल व्यक्तिगत मूल्यांकन का मामला नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी प्रणालीगत व्यवस्था का परिणाम था, जिसमें उनके साथ भेदभाव हुआ। कोर्ट ने माना कि महिलाओं के प्रदर्शन का आकलन पुरुष अधिकारियों की तुलना में निष्पक्ष और गहराई से नहीं किया गया, जिससे उनके करियर और योग्यता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

अनुच्छेद 142 के तहत राहत

पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह राहत देना आवश्यक है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 2019, 2020 और 2021 में जिन महिला अधिकारियों को पहले ही परमानेंट कमीशन दिया जा चुका है, उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

20 वर्ष की सेवा मानकर मिलेगा पेंशन

अदालत ने कहा कि 2019, 2020 और 2021 के बोर्ड में परमानेंट कमीशन के लिए विचार की गई सभी महिला SSC अधिकारियों को 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा। इसी आधार पर उन्हें पेंशन और अन्य सभी लाभ दिए जाएंगे, हालांकि उन्हें पिछले वेतन का बकाया नहीं मिलेगा। यह आदेश 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होगा।

नीतियों पर उठाए सवाल

कोर्ट ने वायुसेना के मामले में 2019 में लागू “सर्विस लेंथ” और “मिनिमम परफॉर्मेंस” मानकों को जल्दबाजी में लागू किया गया बताया, जिससे अधिकारियों को उन्हें पूरा करने का उचित अवसर नहीं मिला।

ACR और पदस्थापन में भी असमानता

पीठ ने यह भी कहा कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) उस समय तैयार की गईं, जब उन्हें परमानेंट कमीशन के लिए अयोग्य माना जाता था। इससे उनके मूल्यांकन पर नकारात्मक असर पड़ा। साथ ही, उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के समान अवसर नहीं मिले, जिससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई।

याचिका के आधार पर आया फैसला

यह फैसला विंग कमांडर सुचेता ईडन समेत अन्य अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर आया, जिसमें 2019 की नीतियों और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के फैसलों को चुनौती दी गई थी।

उत्तराखंड : 29 मार्च तक ऐसा रहेगा मौसम, इन इलाकों में हो सकती है बारिश और बर्फबारी

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी दिनों में मौसम का मिजाज बदला-बदला रहने वाला है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 25 मार्च से 29 मार्च तक राज्य के कई पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश, गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना है। इन जिलों के 3300 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है।

26 और 27 मार्च को इन जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, राज्य के अन्य पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने बताया कि इस अवधि में राज्य के मैदानी जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का असर अधिक रहेगा।

28 मार्च को एक बार फिर इन जिलों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना बनी रहेगी, जबकि 29 मार्च को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ मौसम सक्रिय रह सकता है। मौसम विभाग ने लोगों, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा ऊंचाई वाले इलाकों में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

अक्षय तृतीया पर 12 बजकर 35 मिनट पर खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट 

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खरसाली। उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल यमुनोत्री धाम के कपाट आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कर्क लग्न, कृतिका नक्षत्र और आयुष्मान योग में निर्धारित किया गया है।

यह शुभ मुहूर्त मंगलवार को यमुना जयंती के अवसर पर मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में यमुनोत्री मंदिर समिति की अगुवाई में निकाला गया। मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल के अनुसार, कपाट खुलने से पहले मां यमुना की डोली सुबह 8:45 बजे खरसाली गांव से रवाना होगी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जयकारों के बीच यह डोली यमुनोत्री धाम पहुंचेगी।

इस दौरान मां यमुना के भाई शनिदेव मंदिर सोमेश्वर की डोली भी बहन को विदा करने के लिए साथ जाएगी, जो इस परंपरा का विशेष हिस्सा है। इसी दिन गंगोत्री धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, जिसकी तिथि पहले ही तय की जा चुकी है।

यमुनोत्री धाम का महत्व

यमुनोत्री धाम चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है। यह पवित्र स्थल समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमुना नदी का उद्गम कालिंदी पर्वत (लगभग 4,421 मीटर) से माना जाता है, जबकि गंगा का उद्गम गोमुख (लगभग 3,892 मीटर) से होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना को भगवान सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन हैं। पद्म पुराण में यमुना को पाप नाशिनी और कल्याणकारी बताया गया है। मान्यता है कि यमुना के जल में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।

खरसाली में होता है शीतकालीन प्रवास

सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की पूजा खरसाली गांव में ही छह माह तक की जाती है। यहां मां यमुना को बेटी का दर्जा दिया गया है। कपाट बंद होने पर उनका स्वागत मायके आई बेटी की तरह किया जाता है और कपाट खुलने पर विदाई भी उसी भाव से दी जाती है।

यात्रा से बढ़ती है स्थानीय अर्थव्यवस्था

यमुनोत्री यात्रा शुरू होते ही चरासू, डामटा, बड़कोट और जानकीचट्टी जैसे पड़ावों पर होटल, ढाबे और अन्य व्यवसाय फिर से सक्रिय हो जाते हैं। यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी संचालकों की आजीविका भी इसी यात्रा पर निर्भर रहती है। कपाट खुलने की तिथि नजदीक आते ही स्थानीय व्यापारियों और लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

उत्तराखंड सरकार ने दो IPS अधिकारियों को जबरन केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा, हाईकोर्ट में सुनवाई, कैट जाने के निर्देश

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने  दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) जाने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार कैट के पास है और याचिकाकर्ता वहां अपनी अपील कर सकते हैं।

दरअसल, उत्तराखंड कैडर के दोनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध केंद्रीय बलों में प्रतिनियुक्त किया गया है। अधिकारियों का कहना था कि उन्हें उनके मौजूदा पद से नीचे के रैंक पर भेजा जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।

गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में डीआईजी और 2006 बैच के अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के पद पर तैनात किया गया है।

याचिका में दोनों अधिकारियों ने कहा कि वे वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस में आईजी पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने कभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए सहमति नहीं दी। इसके बावजूद उन्हें जबरन भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले उन्होंने प्रतिनियुक्ति के प्रति अनिच्छा जताई थी, जिसके चलते उन्हें पांच साल के लिए इससे बाहर रखा गया था।

वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत यह मामला हाईकोर्ट में सुनवाई योग्य नहीं है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें कैट में चुनौती देने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।