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‘बॉर्डर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, पहले दो दिनों में तोड़ा ‘धुरंधर’ का रिकॉर्ड

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मनोरंजन:

सनी देओल अभिनीत बहुप्रतीक्षित युद्ध फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म को दर्शकों ने खुलकर प्यार दिया, जिससे पहले दिन ही इसने जबरदस्त कमाई की। ट्रेलर और गानों से पहले से ही चर्चा में रही फिल्म ने ‘धुरंधर’ के ओपनिंग डे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

ट्रेड एनालिस्ट्स और बॉक्स ऑफिस ट्रैकर्स (जैसे सैकनिल्क) के अनुसार, ‘बॉर्डर 2’ ने पहले दिन (शुक्रवार) लगभग 30-32 करोड़ रुपये नेट कलेक्शन किया, जो सनी देओल की पिछली कई फिल्मों से बड़ा ओपनिंग है और हाल के समय की सबसे मजबूत शुरुआत में से एक मानी जा रही है। यह आंकड़ा ‘धुरंधर’ के पहले दिन के कलेक्शन से अधिक है, जिसने ओपनिंग पर करीब 28 करोड़ के आसपास कमाई की थी।

दूसरे दिन (शनिवार) को फिल्म ने और तेज रफ्तार पकड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिन 2 पर लगभग 36-37 करोड़ रुपये नेट कमाए गए, जिससे दो दिनों का कुल नेट कलेक्शन 66-67 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह ‘धुरंधर’ के पहले दो दिनों के कलेक्शन से भी बेहतर है, जहां उसने कम ग्रोथ दिखाई थी। गणतंत्र दिवस वीकेंड के कारण रविवार को और भी बड़ी कमाई की उम्मीद है, जिससे फिल्म जल्द ही 100 करोड़ क्लब में शामिल हो सकती है।

फिल्म में सनी देओल के साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। युद्ध और देशभक्ति पर आधारित इस सीक्वल को दर्शकों ने ‘पैट्रियॉटिक एंटरटेनर’ के रूप में सराहा है। ट्रेलर को लाखों व्यूज मिले थे और गाने भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे थे। रिलीज के साथ मिडनाइट शो और सुबह के शो में भी भारी भीड़ देखी गई।

‘धुरंधर’ (रनवीर सिंह अभिनीत स्पाई थ्रिलर) ने पहले अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन ‘बॉर्डर 2’ की एंट्री से उसके कलेक्शन में गिरावट आई है। अब बॉक्स ऑफिस पर ‘बॉर्डर 2’ का दबदबा साफ दिख रहा है।

ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर फिल्म वीकेंड पर यह रफ्तार बरकरार रखती है, तो यह सनी देओल की अब तक की सबसे बड़ी हिट्स में से एक बन सकती है। दर्शकों की देशभक्ति और एक्शन से भरी कहानी ने इसे खास बनाया है।

फिल्म के निर्माताओं ने भी इस शानदार शुरुआत पर खुशी जताई है और दर्शकों का आभार व्यक्त किया है। अब सभी की नजरें अगले दिनों के आंकड़ों पर टिकी हैं।

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा, डीजीआरई ने जारी किया अलर्ट

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देहरादून: रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई), चंडीगढ़ ने उत्तराखंड के उच्च हिमालयी इलाकों में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन (एवलांच) की संभावना जताई है। डीजीआरई के शुक्रवार शाम 5 बजे से शनिवार शाम 5 बजे तक के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों को ‘डेंजर लेवल-3’ (उच्च जोखिम) में रखा गया है, जबकि बागेश्वर जिले को ‘लेवल-2’ श्रेणी में शामिल किया गया है।

इस पूर्वानुमान के आधार पर राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित जिलों के प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश जारी किए हैं। इन क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों पर निरंतर निगरानी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने स्थानीय निवासियों, पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा टालें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि मौसम की मार के कारण इन क्षेत्रों में हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं, इसलिए सतर्कता बरतना अत्यंत आवश्यक है।

हिमस्खलन से बचाव के लिए महत्वपूर्ण सुझाव:

  • बर्फबारी या हिमस्खलन की चेतावनी के दौरान उच्च हिमालयी एवं बर्फीले क्षेत्रों में केवल अत्यंत आवश्यक यात्रा ही करें।
  • पुराने हिमस्खलन प्रभावित ढलानों और एवलांच वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
  • पूर्व में हिमस्खलन से प्रभावित इलाकों में रुकने या शिविर लगाने से पूरी तरह बचें।
  • यदि अधिक बर्फबारी वाले क्षेत्र में फंसे हैं, तो एक-दो दिन के लिए निचले एवं सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरित हो जाएं।
  • मोबाइल फोन, पावर बैंक, टॉर्च, प्राथमिक उपचार किट और आवश्यक दवाइयां हमेशा साथ रखें।
  • जिला प्रशासन की किसी भी एडवाइजरी, अलर्ट या प्रतिबंध का पालन करें।

पिछले दिनों पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में बर्फबारी और बारिश हुई है, जिससे उच्च क्षेत्र सफेद चादर से ढक गए हैं। हालांकि यह नजारा पर्यटकों के लिए आकर्षक है, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा योजनाओं पर पुनर्विचार करना चाहिए।

विधायक अरविंद पांडे विवाद: भाजपा में गुटबाजी का नया चैप्टर, 2027 से पहले पार्टी के सामने बड़ी चुनौती

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रुद्रपुर: उत्तराखंड की भाजपा सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे हाल के दिनों में लगातार चर्चा में बने हुए हैं। सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब पार्टी की आंतरिक राजनीति तक पहुंच गया है।

जहां एक ओर पांडे इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं भाजपा नेतृत्व एकता बनाए रखने की कोशिश में जुटा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र और 2027 के चुनावों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन पार्टी इसे व्यक्तिगत मामला बताकर निपटाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अतिक्रमण नोटिस और आरोप-प्रत्यारोप

विवाद की शुरुआत 20 जनवरी को गदरपुर तहसील प्रशासन द्वारा जारी नोटिस से हुई, जिसमें पांडे के कैंप ऑफिस को सरकारी भूमि (खाता संख्या 64, खसरा संख्या 12जी, क्षेत्रफल 0.158 हेक्टेयर) पर अवैध निर्माण बताते हुए 15 दिनों में हटाने का आदेश दिया गया। यह कार्रवाई नैनीताल हाईकोर्ट की याचिका के अनुपालन में की गई, जहां भूमि को ‘नदी की तलहटी’ श्रेणी में रखा गया है। पांडे के पुत्र अतुल पांडे ने नोटिस प्राप्त किया और कहा कि इसका जवाब अदालत में दिया जाएगा। पांडे ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया और सीबीआई जांच की मांग की।

इससे पहले, बाजपुर में भूमि धोखाधड़ी के आरोप लगे, जिसमें पांडे परिवार पर जान का खतरा जताने वाले शिकायतकर्ता शामिल हैं। एक अन्य मामले में, पांडे पर धोखाधड़ी का आरोप लगाने वाली महिला के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की धमकी दी गई, जिसे कांग्रेस ने ‘प्रतिशोध की राजनीति’ बताया। विधायक अरविंद पांडे ने एक वीडियो में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और एसएसपी को ‘ईमानदार’ बताते हुए अन्य अधिकारियों पर सवाल उठाए, जो पार्टी के भीतर बहस का विषय बना।

आयोजन का ऐलान और अचानक रद्द होना

विवाद के बीच अरविंद पांडे की ओर से एक आयोजन का ऐलान किया गया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक समेत कई विधायक और नेता शामिल होने वाले थे। हालांकि, यह कार्यक्रम अचानक रद्द हो गया। पांडे का कहना है कि उन्होंने खुद सभी नेताओं को फोन करके नहीं आने का अनुरोध किया, ताकि विवाद को और न बढ़े।

इस घटनाक्रम ने भाजपा में गुटबाजी की अफवाहों को हवा दी है। कुछ राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी की आंतरिक कलह का संकेत माना जा रहा है, जहां पांडे जैसे वरिष्ठ नेता सरकार की कुछ नीतियों से असंतुष्ट हैं। हालांकि, भाजपा सूत्रों का कहना है कि यह कोई गुटबाजी नहीं, बल्कि पांडे का व्यक्तिगत निर्णय था, और पार्टी एकजुट है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहले भी सरकार पर कुछ टिप्पणियां की थीं, लेकिन पार्टी ने उन्हें आंतरिक मामला बताया। पांडे ने गदरपुर में एक शक्ति प्रदर्शन किया, जहां बड़ी भीड़ जुटाई गई, जो उनके स्थानीय प्रभाव को दर्शाता है।

एकता पर जोर, लेकिन असंतोष की सुगबुगाहट

भाजपा नेतृत्व ने इस मुद्दे को ‘व्यक्तिगत और कानूनी’ बताते हुए पार्टी की एकता पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री धामी के करीबी सूत्रों का कहना है कि सरकार अतिक्रमण के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है, और किसी को छूट नहीं दी जाएगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पांडे का आयोजन रद्द करना समझदारी का फैसला था, जो विवाद को बढ़ने से रोकेगा। हालांकि, कुछ विधायकों की दिल्ली लॉबिंग और कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच असंतोष की बातें सामने आ रही हैं। पांडे के समर्थक उन्हें ‘भू-माफियाओं के खिलाफ लड़ने वाला नेता’ बताते हैं, जबकि आलोचक इसे ‘दोहरी नीति’ कहते हैं।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही BJP

कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा हेट स्पीच और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है, लेकिन अब अपने नेताओं पर कार्रवाई से बच रही है। वे आयोजन के रद्द होने को ‘भाजपा की गुटबाजी का प्रमाण’ बताते हैं, जो सरकार की कमजोरी दर्शाता है। सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी है, जहां पांडे के समर्थक उन्हें ‘जनता का मसीहा’ कहते हैं, जबकि विपक्षी ‘सत्ता के दुरुपयोग’ पर सवाल उठा रहे हैं।

व्यापक राजनीतिक प्रभाव: चुनौती या अवसर?

यह विवाद उधम सिंह नगर जैसे जिलों में भाजपा की एकता को चुनौती दे सकता है, जहां पांडे का मजबूत आधार है। हालांकि, पार्टी इसे अवसर के रूप में देख रही है, जहां कानूनी कार्रवाई से ‘साफ-सुथरी छवि’ मजबूत होगी। विश्लेषकों का कहना है कि यदि मुद्दा बढ़ा, तो धामी सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी होगी, लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष संतुलन बनाए रखने की कोशिश में हैं। पांडे ने सीबीआई जांच की मांग दोहराई है, जो मामले को और आगे ले जा सकती है।

 

होमगार्ड वर्दी घोटाले में CM धामी का सख्त एक्शन: DIG अमिताभ श्रीवास्तव निलंबित, संयुक्त जांच समिति गठित

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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी, जूते और अन्य सामग्री की खरीद से जुड़े करोड़ों के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट जनरल) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 से संबंधित है, जहां आरोप है कि लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य की वर्दी एवं संबंधित सामग्री को 3 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जिससे विभाग को करीब 2 करोड़ रुपये का घपला हुआ। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, नियमों का उल्लंघन और अफसरों-ठेकेदारों के गठजोड़ के आरोप लगे हैं।

महानिदेशक होमगार्ड की रिपोर्ट और सिफारिश पर CM धामी ने यह फैसला लिया और संयुक्त जांच समिति (JIC) गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने तक वर्दी खरीद पर रोक लगा दी गई है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में कोई भी स्तर का अधिकारी बचेगा नहीं—कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।”

उत्तरकाशी में बर्फबारी से कई मार्ग प्रभावित, सफाई कार्य जारी

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उत्तरकाशी: जिले में रात भर हुई बर्फबारी के कारण कई महत्वपूर्ण मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा मार्गों को जल्द सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग के अनुसार, विभिन्न मार्गों की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है:

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग: भटवाड़ी तक यातायात सुचारू है, लेकिन भटवाड़ी से गंगोत्री तक बर्फबारी के कारण मार्ग बंद है। अधिकारियों ने बताया कि सुबह लगभग 11 बजे तक मार्ग खोलने की संभावना है।

उत्तरकाशी-लंबगांव मार्ग: मानपुर तक मार्ग सुचारू है, जबकि मानपुर से चौरंगी खाल तक बर्फबारी से अवरुद्ध है। अपराह्न् 2 बजे तक इसे खोलने की उम्मीद जताई गई है।

उत्तरकाशी-बड़कोट मार्ग: सिल्क्यारा, राड़ीटॉप और ओरक्षा बैंड तक बर्फबारी के कारण मार्ग अवरुद्ध है। प्रातः 11 बजे तक सुचारू होने की संभावना है।

बड़कोट-यमुनोत्री मार्ग: पॉल गांव से जानकीचट्टी तक मार्ग सुचारू बना हुआ है।

पुरोला-मोरी मार्ग: जरमोला धार से सांकरी तक बर्फबारी के कारण बंद है। सुबह 10 बजे तक खुलने की संभावना व्यक्त की गई है।

उत्तरकाशी-सुवाखोली मार्ग: उत्तरकाशी से मोरियाणा तक यातायात सामान्य है, लेकिन मोरियाणा से सुवाखोली तक बर्फबारी से अवरुद्ध है। प्रातः 11:30 बजे तक मार्ग खोलने की उम्मीद है।

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग: चिन्यालीसौड़ से आगे नगुण के पास मलवा और पत्थर गिरने से मार्ग बाधित है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) द्वारा सफाई कार्य जारी है और सुबह 8:30 बजे तक मार्ग सुचारू होने की संभावना है।

प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे बिना आवश्यकता के यात्रा न करें और मौसम तथा मार्ग संबंधी अपडेट के लिए आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें। बर्फबारी के कारण जिले के उच्च इलाकों में ठंड बढ़ गई है और कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

उत्तरकाशी में बर्फबारी जारी, कई मार्ग प्रभावित, विद्युत आपूर्ति बाधित

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उत्तरकाशी :  उत्तरकाशी जनपद के ऊंचाई वाले इलाकों जैसे गंगनानी, हर्षिल, गंगोत्री, राड़ी टॉप, चौरंगीखाल, सांकरी, जखोल, यमुनोत्री, राना चट्टी, फूल चट्टी, जानकी चट्टी, खरसाली आदि स्थानों पर हल्की से मध्यम बर्फबारी हो रही है, जबकि निचले इलाकों में हल्की वर्षा दर्ज की जा रही है। यह बर्फबारी सीजन की पहली प्रमुख घटना मानी जा रही है, जिससे चारधाम क्षेत्रों में सफेद नजारा छा गया है और ठंड में तेज इजाफा हुआ है।

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग: गंगनानी तक यातायात सुचारू है। गंगनानी से आगे गंगोत्री की ओर बर्फबारी के कारण मार्ग अवरुद्ध। सुक्की टॉप के आगे लगभग 8 इंच बर्फ जमा हुई है और बर्फबारी जारी। बीआरओ की टीमें बर्फ हटाने में जुटी हुई हैं, जल्द सुचारू होने की उम्मीद।
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग: राड़ी टॉप के पास 4-5 इंच बर्फबारी। ओरछा बैंड तक मार्ग अवरुद्ध। एनएचआईडीसीएल द्वारा जेसीबी मशीनों से सफाई कार्य जारी। राना चट्टी से फूल चट्टी, जानकी चट्टी आदि में भी करीब 4 इंच बर्फ, लेकिन वाहनों का सीमित आवागमन संभव है।

उत्तरकाशी-लम्बगांव मोटर मार्ग: चौरंगीखाल के पास 6-7 इंच बर्फ से मार्ग बंद। लोक निर्माण विभाग बर्फ हटाने का काम तेजी से कर रहा है। विद्युत आपूर्ति बाधित: भटवाड़ी से गंगोत्री तक और बड़कोट-पुरोला-मोरी क्षेत्र (राड़ी टॉप के पास) में बर्फबारी से लाइनें क्षतिग्रस्त। विद्युत विभाग के कर्मचारी निरंतर मरम्मत में लगे हैं।

मौसम विभाग ने उत्तरकाशी सहित कई जिलों में भारी बारिश-बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने अपील की है कि यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की पुष्टि करें और आवश्यक सावधानियां बरतें।

यह बर्फबारी न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है। विभाग 24×7 अलर्ट पर हैं और मार्गों को शीघ्र बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे: वसंत पंचमी पर हुई तिथि की घोषणा

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ऋषिकेश/नरेंद्रनगर: उत्तराखंड के चारधाम यात्रा के प्रमुख केंद्र बदरीनाथ धाम के कपाट इस साल 23 अप्रैल को विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में निर्धारित किया गया है। यह घोषणा आज वसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी जिले के नरेंद्रनगर स्थित राज दरबार में पारंपरिक रूप से की गई।

परंपरा के अनुसार, बदरीनाथ धाम के डिमरी पुजारियों ने बृहस्पतिवार को श्रीलक्ष्मी-नारायण मंदिर डिम्मर में गाडू घड़ा की विशेष पूजा-अर्चना की। यहां पुजारी टीका प्रसाद डिमरी और आचार्यों ने भगवान बदरीविशाल की विष्णु सहस्रनाम और नामावलियों से महाभिषेक किया, बाल भोग अर्पित किया और मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद गाडू घड़ा लेकर जयकारों के साथ यात्रा ऋषिकेश के लिए रवाना हुई।

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शुक्रवार को गाडू घड़ा नरेंद्रनगर राज दरबार पहुंचा, जहां राजपुरोहितों ने पंचांग गणना और शास्त्रों के आधार पर कपाट उद्घाटन की तिथि घोषित की। भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का मुख्य चरण शुरू हो जाएगा।

गाडू घड़ा यात्रा 7 अप्रैल से शुरू होगी

परंपरागत रूप से गाडू घड़ा यात्रा 7 अप्रैल से आरंभ होगी, जो बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालु इस दौरान विशेष उत्साह और भक्ति के साथ दर्शन के लिए तैयार रहते हैं।

बारिश और बर्फबारी से उत्तराखंड में बदला मौसम,मसूरी, धनौल्टी और चकराता में सीजन की पहली बर्फ

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उत्तराखंड में मौसम ने अचानक करवट लेते हुए लोगों को राहत दी है। बीते कई दिनों से लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण जनवरी में ही गर्मी का अहसास होने लगा था, लेकिन बारिश और बर्फबारी के बाद पारे में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इससे खेती-किसानी के साथ ही प्रकृति को भी बड़ी राहत मिली है।

चारधाम में हुई बर्फबारी

लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को उत्तराखंड में मौसम सक्रिय हुआ। तड़के से ही ठंडी हवाएं चलने लगीं और कई इलाकों में बारिश व बर्फबारी देखने को मिली। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी हुई, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड लौट आई। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी को लेकर अलर्ट भी जारी किया है।

मसूरी, धनौल्टी और चकराता में सीजन की पहली बर्फ

पर्यटन नगरी मसूरी, धनौल्टी और चकराता में इस सर्दी की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। बर्फ गिरते ही पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिल उठे। मसूरी की माल रोड तक बर्फ की फुहारें पड़ीं, हालांकि तेज हवाओं के चलते बर्फ जम नहीं पाई। मानसून की विदाई के करीब चार महीने बाद मसूरी में बूंदाबांदी के साथ हल्का हिमपात हुआ। वहीं धनौल्टी और सुरकंडा देवी क्षेत्र में भी बर्फबारी दर्ज की गई।

सिमरन बाला रचेंगी इतिहास: 26 वर्षीय CRPF अधिकारी गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार करेंगी पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व 

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नई दिल्ली: देश 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जुटा है। इस बार कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिलेगा, जब 26 वर्षीय सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला अपनी फोर्स की पूरी तरह पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी। यह पहली बार है जब सीआरपीएफ की किसी पुरुष टुकड़ी को कोई महिला अधिकारी कमान संभालेगी, जो महिला सशक्तिकरण और सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा की रहने वाली हैं। वे अपने जिले की पहली महिला हैं, जिन्होंने सीआरपीएफ में ग्रुप ए अधिकारी (असिस्टेंट कमांडेंट) के रूप में सेवा शुरू की। उन्होंने 2023 में UPSC CAPF परीक्षा अपने पहले प्रयास में पास की और ऑल इंडिया रैंक 82 हासिल की। उनकी चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट पर आधारित रही—ड्रिल में सटीकता, आत्मविश्वास और लीडरशिप स्किल्स के आधार पर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई।

26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में सिमरन बाला 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी को लीड करेंगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले महिला अधिकारी मिश्रित या महिला टुकड़ियों का नेतृत्व कर चुकी हैं, लेकिन किसी पुरुष-प्रधान टुकड़ी को कमांड करने का यह पहला मौका है। यह उपलब्धि न केवल सीआरपीएफ के लिए, बल्कि देश की समस्त सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है।

सिमरन ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे इस राष्ट्रीय स्तर के समारोह में अपनी फोर्स का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना सच्चा सम्मान है। यह मेरे लिए और सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”

उत्तराखंड के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रमाणपत्र डीजी लॉकर पर अपलोड करने अनिवार्य

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देहरादून: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को डिजिटल और शैक्षणिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक शत-प्रतिशत डाटा डीजी लॉकर पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है।

डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि पिछले शैक्षणिक सत्रों का लैगेसी डाटा भी समर्थ पोर्टल के माध्यम से डीजी लॉकर पर अपलोड किया जाए और इसकी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।

बैठक में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को 10 फरवरी 2026 तक सभी रिक्त पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने के सख्त निर्देश दिए।

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन (वार्षिक 180 दिन) कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने, समय पर परीक्षाएं आयोजित करने और परिणाम घोषित करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा पैटर्न में बदलाव भी किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय विभिन्न उद्योगों से एमओयू कर छात्रों को अनिवार्य औद्योगिक प्रशिक्षण दिलाएं; मासिक प्रगति रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की जाए। खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का नियमित आयोजन कर छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाए। इस वर्ष की अंतर्विश्वविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता की जिम्मेदारी पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।

सभी शिक्षण संस्थानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य लागू की जाए। स्वामी विवेकानंद ई-पुस्तकालय योजना से सभी संस्थानों को जोड़ा जाए; बैठक में इस पर पावरपॉइंट प्रस्तुति भी दी गई और सुझाव आमंत्रित किए गए। बैठक में सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा, निदेशक उच्च शिक्षा वी.एन. खाली, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “ये कदम उच्च शिक्षा को अधिक डिजिटल, पारदर्शी, छात्र-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में निर्णायक होंगे। सभी निर्देशों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।”