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उत्तराखंड के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रमाणपत्र डीजी लॉकर पर अपलोड करने अनिवार्य

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देहरादून: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को डिजिटल और शैक्षणिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक शत-प्रतिशत डाटा डीजी लॉकर पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है।

डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि पिछले शैक्षणिक सत्रों का लैगेसी डाटा भी समर्थ पोर्टल के माध्यम से डीजी लॉकर पर अपलोड किया जाए और इसकी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।

बैठक में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को 10 फरवरी 2026 तक सभी रिक्त पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने के सख्त निर्देश दिए।

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन (वार्षिक 180 दिन) कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने, समय पर परीक्षाएं आयोजित करने और परिणाम घोषित करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा पैटर्न में बदलाव भी किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय विभिन्न उद्योगों से एमओयू कर छात्रों को अनिवार्य औद्योगिक प्रशिक्षण दिलाएं; मासिक प्रगति रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की जाए। खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का नियमित आयोजन कर छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाए। इस वर्ष की अंतर्विश्वविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता की जिम्मेदारी पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।

सभी शिक्षण संस्थानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य लागू की जाए। स्वामी विवेकानंद ई-पुस्तकालय योजना से सभी संस्थानों को जोड़ा जाए; बैठक में इस पर पावरपॉइंट प्रस्तुति भी दी गई और सुझाव आमंत्रित किए गए। बैठक में सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा, निदेशक उच्च शिक्षा वी.एन. खाली, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “ये कदम उच्च शिक्षा को अधिक डिजिटल, पारदर्शी, छात्र-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में निर्णायक होंगे। सभी निर्देशों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।”

उत्तराखंड में मौसम ने बदली करवट, प्रदेशभर में बारिश-बर्फबारी शुरू

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उत्तराखंड में मौसम ने  करवट ली है। राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के कई हिस्सों में आज सुबह से हल्की से मध्यम बूंदाबांदी जारी है, जिससे ठंड में बढ़ोतरी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

प्रदेश के उच्च हिमालयी जिलों जैसे उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भारी बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है, खासकर 2300-2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में। देहरादून के पर्वतीय इलाकों में भी बारिश-बर्फबारी का अलर्ट है। साथ ही, कुछ मैदानी और निचले इलाकों में ओलावृष्टि, बिजली चमकने और 40-50 किमी/घंटा (कुछ जगहों पर इससे अधिक) की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान के आसार हैं।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से यह बदलाव आया है। यह सिस्टम 23 जनवरी से प्रभावी है और 28 जनवरी तक मौसम इसी तरह असामान्य बना रह सकता है। उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, जबकि ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसलों, बागवानी और यात्रा को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा टालने और मौसम अपडेट्स पर नजर रखने की अपील की है। ठंड बढ़ने से न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV: उत्तराखंड सहित 6 राज्यों को 10,000+ किमी सड़कों की मंजूरी, ग्रामीण विकास को नई गति

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV (PMGSY-IV) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे पहाड़ी एवं चुनौतीपूर्ण राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 10,000 किलोमीटर से अधिक की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। यह कदम विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में ग्रामीण विकास विभाग की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए यह खास तौर पर राहत भरी खबर है, जहां कठिन भू-आकृति, ऊंची चोटियां और दूरस्थ गांवों के कारण कई इलाके साल भर अलग-थलग रहते हैं। इन नई सड़कों से राज्य के हजारों पिछड़े गांवों को बारहमासी (हर मौसम में चलने वाली) कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बाजार पहुंच और रोजगार के अवसर आसानी से उपलब्ध होंगे।

इस मंजूरी से कुल 3,270 पहले से अलग-थलग बस्तियां जुड़ेंगी। ये सड़कें दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण समुदायों तक फैलेंगी, जो न केवल अवसंरचना का विकास करेंगी बल्कि समावेशी विकास को बढ़ावा देकर ग्रामीण जीवन में गहरा बदलाव लाएंगी।

PMGSY-IV के तहत मुख्य लक्ष्य 2011 की जनगणना के अनुसार असंबद्ध बस्तियों को जोड़ना है:

  • मैदानी क्षेत्रों में 500+ आबादी वाली बस्तियां.
  • पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों (जैसे उत्तराखंड) में 250+ आबादी वाली बस्तियां.
  • विशेष श्रेणी क्षेत्रों (जनजातीय अनुसूची V, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, मरुस्थलीय क्षेत्र) में 25,000 असंबद्ध बस्तियां.
  • वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों में 100+ आबादी वाली बस्तियां.
  • योजना के अंतर्गत कुल 62,500 किलोमीटर लंबी हर मौसम में उपयोग योग्य सड़कें और आवश्यक पुलों का निर्माण होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर 2024 को वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक योजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दी थी। कुल परिव्यय 70,125 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 49,087.50 करोड़ रुपये और राज्य सरकारों का हिस्सा 21,037.50 करोड़ रुपये शामिल है।

गायत्री परिवार शताब्दी समारोह में शामिल हुए गृहमंत्री अमित शाह

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भारतीय परंपराओं में निहित हैं विश्व की समस्याओं का समाधान-गृह मंत्री
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देहरादून 22 जनवरी।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरूवार को हरिद्वार में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष समारोह में गायत्री परिवार द्वारा किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों की सराहना की तथा आचार्य श्रीराम शर्मा के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में विश्व की समस्याओं का समाधान निहित है।

गृह मंत्री ने कहा कि श्रीराम शर्मा आचार्य ने सनातन धर्म में व्याप्त विकृतियों को दूर कर आध्यात्मिकता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा तथा समानता, संस्कृति, एकता और अखंडता के मूल्यों को सुदृढ़ किया। उन्होंने “व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण” के विचार को व्यवहार में उतारने का मार्ग प्रशस्त किया। श्री शाह ने आचार्य जी के संदेश “हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” को मानव कल्याण का मूल मंत्र बताते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

गृह मंत्री ने कहा कि बीते दस वर्षों में देश की कार्य-संस्कृति और सोच में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आया है। आज भारत को उसकी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और मूल्यों के संदर्भ में आदर भाव से देखा जा रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष जैसे युगपुरुषों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के उत्कर्ष से मानवता का उत्कर्ष सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि हरिद्वार में कदम रखते ही आध्यात्मिक अनुभूति होती है और गायत्री मंत्र व्यक्ति के भीतर सद्भाव, राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण की चेतना को जाग्रत करता है। उन्होंने युवाओं से आत्म-सुधार को सबसे बड़ी सामाजिक सेवा मानकर इसे जीवन में अपनाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री परिवार एक वटवृक्ष के समान है, जो आध्यात्मिक चेतना का प्रचार-प्रसार करते हुए समाज को शांति और सकारात्मकता की छाया प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को नए स्वरूप में पुनः स्थापित कर रहा है और सनातन संस्कृति का यह विराट संदेश विश्व तक पहुँचे, इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार समाज में आध्यात्मिक जनजागरण का कार्य कर रहा है।

अखिल विश्व गायत्री परिवार से डॉ. चिन्मय पांड्या ने कहा कि गायत्री परिवार का मूल दर्शन समाज से विमुख होना नहीं, बल्कि समाज में रहकर मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान के कार्यों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि संस्थान प्राचीन वेद, उपनिषद और गीता से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक तकनीक को आत्मसात कर शिक्षा, प्रशिक्षण और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म रक्षा के लिए राष्ट्र धर्म रक्षा जरूरी हैं।

कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह, विधायक मदन कौशिक सहित देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में गायत्री साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

भयानक सड़क हादसा : सेना का बुलेटप्रूफ वाहन 200 फीट गहरी खाई में गिरा, 10 जवान शहीद, 7 घायल

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डोडा (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास आज एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ है। सेना का बुलेटप्रूफ वाहन नियंत्रण खोकर 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा, जिसमें सवार 17 जवानों में से 10 की मौके पर ही मौत हो गई। सात अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

स्थानीय प्रशासन और सेना के अधिकारियों के अनुसार, वाहन निकटवर्ती पोस्ट की ओर जा रहा था। अचानक चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और यह खाई में गिर पड़ा। हादसे की सूचना मिलते ही सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रेस्क्यू टीम ने बड़ी मुश्किल से 10 जवानों के शव बरामद किए, जबकि घायल सात जवानों को बाहर निकाला गया।

घायलों में से तीन की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट कर उधमपुर के सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा उनका उपचार किया जा रहा है। बाकी घायलों का इलाज नजदीकी सैन्य चिकित्सा केंद्रों में जारी है।

सेना ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद जवानों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। भारतीय सेना के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे बहादुर जवानों ने देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हम शहीदों के परिजनों के साथ हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।”

हादसे के सटीक कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मौसम की खराबी, सड़क की दुर्गम स्थिति और वाहन का संभावित तकनीकी खराबी जैसे कारक जांच के दायरे में हैं। सेना ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी।

बड़ी खबर : तिलक राज बेहड़ ने बेटे सौरभ पर लगाया बड़ा आरोप, हमला खुद साजिश रचकर करवाया, संबंध तोड़ने का ऐलान

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रुद्रपुर: तराई क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलक राज बेहड़ ने अपने पुत्र सौरभ राज बेहड़ के खिलाफ मारपीट मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है। रुद्रपुर में आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तिलक राज बेहड़ ने दावा किया कि मारपीट की पूरी घटना उनके पुत्र सौरभ ने खुद साजिश रचकर अंजाम दिलवाई। उन्होंने कहा कि सौरभ ने अपने मित्र इंद्र से कहकर अपने ऊपर ही हमला करवाया, ताकि इसे किसी अन्य रूप में पेश किया जा सके।

प्रेस वार्ता के दौरान तिलक राज बेहड़ भावुक नजर आए। उनकी आंखों में आंसू छलक आए और उन्होंने जनता और  समर्थकों से सार्वजनिक माफी मांगते हुए कहा, “मेरे पुत्र ने मुझे बर्बाद कर दिया। वर्षों की मेहनत से बनाई गई छवि को गहरा आघात पहुंचा। समाज में मेरा विश्वास डगमगाया, इसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं। पूर्व मंत्री ने सबसे बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब वे सौरभ से सभी पारिवारिक और सामाजिक संबंध पूरी तरह समाप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सौरभ ने उन्हें किडनी दान दी थी, इसलिए भावनात्मक जुड़ाव बना रहा, लेकिन इस घटना के बाद अब कोई सहारा नहीं बचा।

तिलक राज बेहड़ ने इसे अपने जीवन का सबसे दुखद क्षण बताया और कहा, शायद मेरे पिछले किसी कर्म का यह फल है, जिसकी सजा आज भुगतनी पड़ रही है। घरेलू विवाद पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि यदि सौरभ की पत्नी के साथ कोई मतभेद या समस्या थी, तो उसे पिता के रूप में विश्वास में लेना चाहिए था। समस्याओं का हल संवाद से निकल सकता था, न कि ऐसी साजिश रचकर।

पूर्व मंत्री ने पुलिस की जांच की सराहना करते हुए कहा कि मामला पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा, “कानून अपना काम करे, दोषी चाहे मेरा बेटा ही क्यों न हो। मैं किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करूंगा। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। फिलहाल यह मामला पुलिस जांच के अधीन है। रुद्रपुर पुलिस द्वारा सौरभ राज बेहड़ और उसके सहयोगियों के खिलाफ मारपीट, साजिश रचने और अन्य धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।

उत्तराखंड में जारी हो सकती है दायित्वधारियों की एक और सूची!

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देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव (2027) को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अब पार्टी में सक्रियता और एकजुटता बढ़ाने के लिए दायित्वधारियों की पांचवीं सूची जारी करने की अंतिम तैयारी में जुट गई है। गोपन विभाग द्वारा सभी विभागाध्यक्षों से विभिन्न आयोगों, बोर्डों, निगमों, परिषदों और समितियों में खाली पड़े पदों का विस्तृत ब्योरा मंगाए जाने से अंदरूनी कसरत तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश नामों पर सहमति बन चुकी है और केवल उच्च स्तर से अंतिम मंजूरी बाकी है।

पिछले वर्षों में जारी सूचियों का क्रम देखें तो यह स्पष्ट है कि धामी सरकार ने पार्टी नेताओं को जिम्मेदारियां देकर संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। पहली सूची (27 सितंबर 2023) में 10, दूसरी (14 दिसंबर 2023) में 11, तीसरी (1 अप्रैल 2025) में 20 और चौथी (4 अप्रैल 2025) में 18 दायित्वधारियों के नाम घोषित किए गए थे। इन सूचियों से पार्टी में नई ऊर्जा आई और कई क्षेत्रीय नेताओं को महत्वपूर्ण पद मिले। अब पांचवीं सूची के साथ कुल दायित्वधारियों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे चुनावी तैयारियों में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा होगा।

विधायकों और वरिष्ठ नेताओं में अपनी ‘लॉटरी’ खुलने का बेसब्री इंतजार है। कई विधायक नई जिम्मेदारी की उम्मीद में हैं, जबकि वरिष्ठ नेता अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य पदों पर नजर गड़ाए हुए हैं। भाजपा के आला नेता मानते हैं कि चुनाव से पहले यह दौर बेहद महत्वपूर्ण है – इससे न केवल संगठन को मजबूती मिलेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई जोश भरेगा और पार्टी एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगी।

हालांकि कैबिनेट विस्तार की भी चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन फिलहाल दायित्वधारियों की सूची पहले जारी होने की संभावना ज्यादा है। यह कदम धामी सरकार की सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां संगठन को मजबूत करके और नेताओं को सक्रिय बनाकर 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने का लक्ष्य है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में संत समाज, पंडा-पुरोहितों का भी मिल रहा साथ

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प्रयागराज : प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या (18 जनवरी) के पावन अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई कथित बदसलूकी और प्रशासनिक कार्रवाई ने विवाद को नया रूप दे दिया है। संत समाज, आचार्य परिषद और राजनीतिक नेताओं ने इसे सनातन धर्म की परंपराओं और संतों के सम्मान पर सीधा हमला बताया है।

घटना की शुरुआत मौनी अमावस्या पर हुई, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पहिया लगी पालकी में शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। मेला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और भगदड़ की आशंका का हवाला देते हुए पालकी को रोका। शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की शिकायतें सामने आईं, जिसके विरोध में स्वामी जी ने धरना दिया, स्नान से इंकार किया और प्रशासन पर अपमान का आरोप लगाया।

इसके बाद मेला प्राधिकरण ने दो नोटिस जारी किए:

  • पहला नोटिस बैरियर तोड़ने और बिना अनुमति भीड़ में प्रवेश के आरोप।
  • दूसरा नोटिस सुप्रीम कोर्ट में लंबित ज्योतिष पीठ शंकराचार्य पद से जुड़े मामले का हवाला देते हुए ‘शंकराचार्य’ उपाधि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए 24 घंटे में प्रमाण मांगने वाला।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजा, नोटिस को अपमानजनक बताया और लीगल एक्शन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह सनातन परंपराओं का अपमान है और प्रशासन ने धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कड़ा बयान दिया। उनका कहना है कि शंकराचार्य जी के आग्रह को बलपूर्वक ठुकराकर प्रशासन ने सनातन का अपमान किया है। सरकार संतों के सम्मान की रक्षा करे।

शारदा पीठ के शंकराचार्य ने इसे सनातन धर्म का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत के सर्वोच्च धर्म गुरु के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम जनता के साथ क्या नहीं होगा। पंडित दिनकर बाबुलकर ने उत्तर प्रदेश प्रशासन पर सनातन धर्म पर हमला का आरोप लगाते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सोचना चाहिए कि वे क्या कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।

देवभूमि उत्तराखंड के पंडा समाज इसकी निंदा करता है। वृंदावन के प्रेमानंद महाराज ने वीडियो जारी कर पूर्ण समर्थन जताया। किसान नेता राकेश टिकैत, प्रवीण तोगड़िया और अन्य ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण बताया। कांग्रेस ने भी योगी सरकार की आलोचना की।

छावनी में बदला धार, दो DIG और 13 SP रैंक के अफसर, CAPF समेत हजारों पुलिसकर्मी तैनात

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मध्य प्रदेश: बसंत पंचमी के अवसर पर धार जिले को पुलिस ने पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया है। भोजशाला विवाद के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसमें दो DIG रैंक के अधिकारी, 13 SP स्तर के अफसर और कुल 22 IPS अधिकारी शामिल हैं।

पुलिस मुख्यालय ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की 8 कंपनियां (लगभग 1000 जवान) सहित मध्य प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त 6000 से अधिक कर्मचारियों को मैदान में उतार दिया है। कुल मिलाकर 8000 से 10000 के आसपास पुलिसकर्मी धार में तैनात हैं।

भोजशाला परिसर और उसके आसपास 6 लेयर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है। ड्रोन, जेनरेटेड सीसीटीवी कैमरे और रैपिड एक्शन फोर्स से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। जानकारी मिलते ही 3 मिनट के अंदर पुलिस पहुंचने की व्यवस्था है।

यह इंतजाम इसलिए क्योंकि इस बार बसंत पंचमी और जुम्मे की नमाज एक साथ पड़ रही है, जो 9 साल बाद हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला मामले की सुनवाई गुरुवार को होने वाली है, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव की आशंका है। प्रशासन का साफ संदेश है कि किसी भी तरह की अफरातफरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उत्तराखंड : CM धामी का बयान -इस बार भी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में होगा बजट सत्र

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देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने आगामी विधानसभा बजट सत्र को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि इस बार सभी तैयारियां पूरी हैं और बजट सत्र भराड़ीसैंण में ही होगा। हालांकि, सत्र की सटीक तारीखों का अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में अधिकृत किया था। पिछले वर्ष भी बजट सत्र गैरसैंण में प्रस्तावित था, लेकिन विधानसभा भवन में मेंटेनेंस कार्य चलने के कारण वह संभव नहीं हो सका था। विधानसभा अध्यक्ष ने भी तब स्थिति स्पष्ट की थी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “इस बार हम पहले से पूरी तैयारी में हैं, इसलिए बजट सत्र भराड़ीसैंण विधानसभा में ही आहूत किया जाएगा।”

वित्त विभाग की ओर से बजट तैयारियों की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि एक महीने पहले सभी विभागों को सूचना दी गई थी कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी मांगें ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराएं। अब सभी विभागों ने अपनी मांगें पोर्टल पर दर्ज कर दी हैं और पोर्टल को बंद कर दिया गया है। विभागों की मांगों का परीक्षण पूरा हो चुका है।

वर्तमान में वित्त विभाग एक-एक विभाग के साथ बजट संबंधी चर्चा कर रहा है। ये चर्चाएं विभागों की प्राथमिकताओं को समझने और बजट में उचित समावेश सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। यह प्रक्रिया करीब एक महीने तक चलेगी। वित्त सचिव ने आगे कहा कि केंद्र सरकार 1 फरवरी को आम बजट पेश करेगी। राज्य बजट को अंतिम रूप देने से पहले केंद्र के बजट का अध्ययन किया जाता है, क्योंकि यह राज्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। केंद्र बजट के आधार पर राज्य बजट को फाइनल शेप दी जाएगी, जिसके बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।

यह फैसला गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में मजबूती प्रदान करता है। पिछले वर्षों में भी कुछ सत्र यहां आयोजित हो चुके हैं, लेकिन इस बार बजट सत्र यहां होने से विधायकों और अधिकारियों को ऊंचाई वाले क्षेत्र में सत्र संचालन की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।