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सरकार के दो बड़े फैसले : अटल पेंशन योजना 2030 तक जारी, SIDBI में 5,000 करोड़ की पूंजी

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बुधवार को दो दूरगामी फैसले लिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्तीय वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने और सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को मंजूरी दी गई। ये कदम असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने और छोटे-मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए हैं।

अटल पेंशन योजना का विस्तार: 8.66 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर को फायदा कैबिनेट ने अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने के साथ-साथ इसके प्रचार-प्रसार, विकासात्मक गतिविधियों और गैप फंडिंग के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। 9 मई 2015 को शुरू हुई यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 से 5,000 रुपये प्रति माह की गारंटीड न्यूनतम पेंशन प्रदान करती है। 19 जनवरी 2026 तक योजना में 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।

विस्तार के साथ सरकार अब असंगठित श्रमिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण और योजना की पहुंच को और मजबूत करने पर फोकस करेगी। सिडबी को 5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता: 1.12 करोड़ नई नौकरियों की उम्मीद एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सिडबी में 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता दी जाएगी, जो वित्तीय सेवा विभाग द्वारा तीन किस्तों में प्रदान की जाएगी:

  • 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये.
  • 2026-27 में 1,000 करोड़ रुपये.
  • 2027-28 में 1,000 करोड़ रुपये.

इस अतिरिक्त पूंजी से सिडबी सस्ती दरों पर संसाधन जुटा सकेगा, जिससे एमएसएमई को कम ब्याज दरों पर ऋण मिलेगा। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, इस फैसले से लगभग 1.12 करोड़ नई नौकरियां सृजित होंगी। वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 76.26 लाख एमएसएमई लाभार्थी थे, जो 2028 के अंत तक बढ़कर 102 लाख हो सकते हैं। साथ ही करीब 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ेंगे, जिससे जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियां और तेज होंगी।

बड़ा हादसा टला: वायुसेना का ट्रेनी विमान तालाब में गिरा, दोनों पायलट सुरक्षित

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में बुधवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनी माइक्रोलाइट विमान सिविल लाइंस क्षेत्र में केपी कॉलेज के पास स्थित एक तालाब में क्रैश हो गया।

घटना मेडिकल चौराहे के निकट हुई, जहां विमान उड़ान के दौरान अचानक अनियंत्रित हो गया और तेज धमाके जैसी आवाज के साथ तालाब में जा गिरा। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी, छात्र और लोग मौके पर जमा हो गए।

तालाब में पानी की गहराई कम होने के बावजूद भारी मात्रा में जलकुंभ (पानी की घास) मौजूद थी, जिसने बचाव कार्य को थोड़ा जटिल बना दिया। फिर भी, स्थानीय नागरिकों की तत्परता, साहस और सूझबूझ से विमान में फंसे दोनों ट्रेनी पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दोनों पायलटों को कोई गंभीर चोट नहीं आई, जो बड़ी राहत की बात है।

घटना की सूचना मिलते ही भारतीय वायुसेना के अधिकारी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। इलाके को घेर लिया गया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान हवा में डगमगाता हुआ दिखा और फिर तेज आवाज के साथ गिर पड़ा। स्थानीय लोगों ने बिना देरी के रेस्क्यू शुरू किया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।

उत्तराखंड: यूसीसी निजता में नहीं बनी बाधा

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यूसीसी का एक साल

मजबूत सुरक्षा तंत्र से निर्मूल हुई निजता उल्लंघन की आशंकाएं।

देहरादून 21 जनवरी।उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत बीते एक साल में विभिन्न सेवाओं के लिए कुल पांच लाख से अधिक आवेदन हुए हैं, लेकिन एक भी मामले में निजता उल्लंघन की शिकायत नहीं आई है। इस तरह उत्तराखंड समान नागरिक संहिता, नागरिकों की निजी जानकारियां सुरक्षित रखने के अपने संकल्प पर शत प्रतिशत खरा उतरी है। यही नहीं ऑनलाइन आवेदन में पूरी प्रक्रिया फेसलेस होने से भी किसी की भी पहचान सार्वजनिक होने का खतरा नहीं है।

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता, लगभग शत प्रतिशत आवेदन यूसीसी पोर्टल के जरिए हो रहे हैं। इसमें आवेदक घर बैठे ही किसी भी सेवा के लिए आवेदन कर सकता है। इस तरह उन्हें किसी भी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं, यहां तक कि ऑनलाइन आवेदन यदि एक बार सक्षम स्तर के अधिकारी स्तर से मंजूर हो गया तो फिर, संबंधित अधिकारी भी आवेदन की निजी जानकारी नहीं देख पाता है।

आवेदन के साथ प्रस्तुत की गई निजी जानकारी तक सिर्फ आवेदक की ही पहुंच है, जो जरूरी वैरिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए इसे देख सकता है। यही कारण है कि बीते एक साल में निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत नहीं आई है। जबकि अब लोग विवाह पंजीकरण के साथ ही विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव इन पंजीकरण से लेकर लिव इन रिश्ते समाप्त करने तक के लिए यूसीसी प्रावधानों का प्रयोग कर रहे हैं। दूसरी तरफ औसत पांच दिन में प्रमाणपत्र मिलने से लोगों का समय भी बच रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता को लेकर कुछ लोगों ने शुरुआत में नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया। विगत एक साल में यूसीसी क्रियान्वयन ने ऐसे सभी लोगों को जवाब दे दिया है। समान नागरिक संहिता नागरिकों की निजता का शत प्रतिशत पालन करने में सफल रही है। साथ ही पूरे प्रदेश में जितनी सरलता से इस प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है, वो अपने आप में गुड गर्वनेंस का उदाहरण है।

4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाहों का ऑनलाइन पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 68 जोड़ों का रजिस्ट्रेशन

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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हुए एक साल पूरे होने वाले हैं। 27 जनवरी 2025 को राज्य में UCC की शुरुआत हुई थी, और अब 27 जनवरी 2026 को यह ऐतिहासिक कदम अपना पहला साल पूरा करेगा। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, UCC लागू होने के बाद अब तक 4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाहों का ऑनलाइन पंजीकरण हो चुका है (19 जनवरी 2026 तक के आंकड़े)।

पहले की तुलना में यह संख्या काफी अधिक है, क्योंकि अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है – आवेदक घर बैठे आवेदन कर सकते हैं और औसतन सिर्फ 5 दिनों में प्रमाण-पत्र मिल जाता है। पहले ऑफलाइन सिस्टम में औसतन रोजाना सिर्फ 67 रजिस्ट्रेशन होते थे, जबकि अब यह संख्या रोजाना 1,400 के करीब पहुंच गई है।

इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 68 जोड़ों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि 2 जोड़ों ने लिव-इन संबंध समाप्त करने के लिए भी प्रमाण-पत्र प्राप्त किए हैं। विवाह विच्छेद (तलाक) के लिए 316 आवेदन प्रक्रिया में शामिल हैं। कुल मिलाकर विभिन्न सेवाओं (विवाह, तलाक, वसीयत, लिव-इन आदि) के लिए 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि UCC ने महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिकों में समानता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य ने अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल पेश की है।

सरकार का दावा है कि UCC पोर्टल पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के कारण निजता के उल्लंघन की एक भी शिकायत नहीं आई है। लगभग 100% आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से हो रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बनी हुई है।

उत्तराखंड में कल से बदलेगा मौसम, 23-24 को बारिश-बर्फबारी का येलो और ऑरेंज अलर्ट

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देहरादून: उत्तराखंड में लंबे समय बाद मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, 22 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में बारिश और बर्फबारी शुरू हो सकती है। जबकि मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा छाने से ठंड बढ़ सकती है।

मौसम विभाग ने 23 और 24 जनवरी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन दो दिनों में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में शीतलहर जैसी स्थिति बन सकती है, जिसका असर मैदानी इलाकों में भी दिखेगा।

विशेष प्रेस विज्ञप्ति में विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। 23 जनवरी को भारी बर्फबारी के कारण कई पर्वतीय सड़कें बंद हो सकती हैं। अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका को देखते हुए पहले से खाद्य सामग्री की व्यवस्था करने और आपातकालीन तैयारी रखने की सलाह दी गई है।

मौसम का दिन-प्रतिदिन पूर्वानुमान:

  • 22 जनवरी: पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी (विशेषकर 3400 मीटर से ऊपर)। मैदानी इलाकों में कोहरा और ठंड बढ़ेगी। पाला पड़ने की संभावना।
  • 23-24 जनवरी: भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की आशंका। सड़कें, बिजली और संचार प्रभावित हो सकते हैं।
  • बुधवार (21 जनवरी): प्रदेश में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा, लेकिन सुबह-शाम पर्वतीय इलाकों में पाला और ठंड परेशान कर सकती है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस सीजन की पहली बड़ी बर्फबारी हो सकती है, जो जल स्रोतों, खेती और पर्यटन के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतनी होगी। प्रशासन ने संबंधित जिलों में अलर्ट जारी कर राहत-बचाव टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड होमगार्ड में बड़ा वर्दी घोटाला, जांच शुरू

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देहरादून: उत्तराखंड होमगार्ड विभाग में वर्दी एवं अन्य सामग्री की खरीद में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। गृह विभाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इसकी जांच शुरू कर दी है। मुख्य आरोपी डिप्टी कमांडेंट जनरल (डीसीजी) अमिताभ श्रीवास्तव पर पद का दुरुपयोग कर बाजार भाव से तीन गुना अधिक कीमत पर सामान खरीदने का आरोप है।

विभागीय जांच में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में जवानों के लिए लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य का वर्दी, जूते, डंडे, पैंट-शर्ट और जैकेट आदि सामान तीन करोड़ रुपये में खरीदा गया। कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने जब 2025-26 के लिए इसी दर पर टेंडर जारी होने पर बाजार भाव की जांच कराई तो तीन गुना से अधिक कीमत का खुलासा हुआ।

  • डंडे की बाजार कीमत 130 रुपये थी, लेकिन 375 रुपये में खरीदा गया।
  • जूते 500 रुपये के बजाय 1500 रुपये में।
  • पैंट-शर्ट का सेट 1200 रुपये के स्थान पर 3000 रुपये में।
  • जैकेट 500 रुपये की बजाय 1580 रुपये में खरीदी गई।

कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने विभागीय जांच के बाद डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति की। उन्होंने शासन को रिपोर्ट भेजते हुए आरोपी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने, दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने और सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही उन्होंने होमगार्ड में वर्दी एवं संबंधित सामग्री की खरीद पर रोक लगा दी है।

गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि कमांडेंट जनरल का पत्र 15 दिन पहले प्राप्त हुआ था, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र था। उन्होंने कहा, “शासन स्तर पर उच्चाधिकारियों की टीम गठित कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

यह घोटाला अफसरों और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत का नतीजा बताया जा रहा है, जिससे विभाग के जवानों को निर्धारित समय पर उचित वर्दी नहीं मिल पाई। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला प्राधिकरण को भेजा कानूनी नोटिस, बताया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दुरुपयोग, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

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प्रयागराज: ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के एक नोटिस के खिलाफ कड़ी कानूनी प्रतिक्रिया दी है। उनके वकील अनजनी कुमार मिश्रा ने 20 जनवरी 2026 को जारी एक पत्र में नोटिस को गैर-कानूनी, मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इसे 24 घंटे में वापस लेने की मांग की है। नोटिस वापस न लेने पर अवमानना, मानहानि और अन्य कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह विवाद माघ मेला शिविर से जुड़ा है, जहां प्राधिकरण ने देर रात नोटिस चिपकाया था।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वकील ने पत्र में कहा है कि प्राधिकरण का 19 जनवरी 2026 का नोटिस (संख्या 4907/15- Μ. Κ.Μ. (2025-26)) बिना अधिकार क्षेत्र के जारी किया गया है और इसका उद्देश्य उनके मुवक्किल को अपमानित करना तथा सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है। पत्र में दावा किया गया है कि यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का गलत इस्तेमाल कर जारी किया गया, जो अवमानना का मामला बनता है।

पृष्ठभूमि और उत्तराधिकार का विवाद
पत्र में विस्तार से बताया गया है कि पूर्व ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज 11 सितंबर 2022 को ब्रह्मलीन हुए थे। उन्होंने अपनी पंजीकृत वसीयत (दिनांक 1 फरवरी 2017) और घोषणा-पत्र (दिनांक 1 जुलाई 2021) में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिषपीठ का उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। 12 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के परमहंसी गंगा आश्रम में लाखों लोगों की उपस्थिति में अभिषेक, तिलक और पट्टाभिषेक के साथ उनकी स्थापना हुई। इस समारोह में शारदा मठ द्वारका के लिए स्वामी सदानंद सरस्वती की भी स्थापना हुई, जिसमें श्रींगेरी पीठ के प्रतिनिधि मौजूद थे।

वकील ने जोर दिया कि यह नियुक्ति शास्त्रों, जैसे शिव रहस्य, ऋग्वेद, यजुर्वेद, मठाम्नाय सेतु महानुशासनम और माधवाचार्य के शंकर दिग्विजय पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को तीन अन्य शंकराचार्यों (शारदा मठ गुजरात, श्रींगेरी मठ मैसूर और गोवर्धन मठ पुरी) और भारत धर्म महामंडल का समर्थन प्राप्त है।

अदालती कार्यवाहियां और चुनौतियां
पत्र में कई अदालती मामलों का जिक्र है, जो अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की वैधता को साबित करते हैं:
गुजरात हाई कोर्ट में गोविंदानंद सरस्वती द्वारा दाखिल स्पेशल सिविल एप्लीकेशन नंबर 9878/2025 (वसीयत को फर्जी बताते हुए) को 2 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील नंबर 3010/2020 और 3011/2020 लंबित हैं। 21 सितंबर 2022 के आदेश में अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की नियुक्ति को रिकॉर्ड पर लिया और अन्य पीठों के समर्थन का उल्लेख किया।

सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के अंतरिम आदेश (जिसमें पट्टाभिषेक पर रोक लगाई गई) को अप्रभावी बताया गया, क्योंकि स्थापना पहले ही हो चुकी थी। पत्र में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती पर झूठे दस्तावेज पेश करने का आरोप लगाया गया है, और उनके खिलाफ पेरजुरी की कार्यवाही की मांग की गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल मानहानि मुकदमा (सीएस (ओएस) नंबर 640/2024) में गोविंदानंद सरस्वती की याचिका को वापस लेना पड़ा, और अदालत ने 18 दिसंबर 2025 को इसे निपटाया।

सुप्रीम कोर्ट के 4 अक्टूबर 2018 के आदेश में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य मान्यता दी गई, और उनके उत्तराधिकारी के रूप में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को वैध ठहराया गया।
वकील ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण का नोटिस सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप है और यह मानहानि का मामला बनता है। इससे मुवक्किल की प्रतिष्ठा, सम्मान और आर्थिक स्रोतों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही, मेला प्रशासन पर फर्जी शंकराचार्यों (जैसे स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती और अधोक्षजानंद देव तीर्थ) को सुरक्षा और जगह देने का आरोप लगाया गया है, जबकि अदालत ने ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मांग और चेतावनी
पत्र में प्राधिकरण से 24 घंटे में नोटिस वापस लेने की मांग की गई है। असफल रहने पर अवमानना याचिका, मानहानि मुकदमा और 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की जाएगी। वकील ने कहा, “यह नोटिस मीडिया और समाज में गलत धारणा पैदा कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुवक्किल की नियुक्ति को अमान्य किया है, जो झूठा है।”

माघ मेले में फिर शंकराचार्य का अपमान, प्रशासन का नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

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प्रयागराज। माघ मेले के दौरान रथ रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर स्वयं को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” लिख रहे हैं।

यह नोटिस माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। सोमवार देर रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार शंकराचार्य के शिविर पहुंचे और शिष्यों से नोटिस लेने को कहा, लेकिन रात का समय होने का हवाला देते हुए शिष्यों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। इसके बाद मंगलवार सुबह कानूनगो पुनः शिविर पहुंचे और शिविर के गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया।

प्रशासन ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी वासुदेवानंद के बीच विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता और न ही किसी प्रकार का पट्टाभिषेक किया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार, इस मामले में अब तक कोई नया आदेश पारित नहीं हुआ है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में लगे बोर्ड पर स्वयं को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” दर्शाया है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर उनसे 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

इससे पहले सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि शंकराचार्य वही होता है जिसे अन्य पीठें शंकराचार्य मानती हैं। उन्होंने दावा किया कि दो पीठें उन्हें शंकराचार्य स्वीकार करती हैं और पिछले माघ मेले में वे अन्य शंकराचार्यों के साथ संगम स्नान भी कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन या कोई संवैधानिक पदाधिकारी यह तय नहीं कर सकता कि शंकराचार्य कौन होगा।

इधर, शंकराचार्य अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, वे आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। उनका कहना है कि वे हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन शिविर में नहीं, बल्कि फुटपाथ पर रहेंगे। सोमवार को उन्होंने धरना स्थल पर ही पूजा-पाठ भी किया।

उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम स्नान के दौरान पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रोक दिया था। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में शंकराचार्य धरने पर बैठ गए थे और करीब दो घंटे तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।

हिमालयी राज्यों में हर साल औसतन 132 हिमस्खलन की घटनाएं, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड सबसे ज्यादा प्रभावित

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देहरादून/श्रीनगर: देश के हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर प्राकृतिक खतरा बने हुए हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन राज्यों में हर वर्ष औसतन 132 हिमस्खलन की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित राज्य जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड हैं, जहां भौगोलिक स्थिति, भारी बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन के कारण यह जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

2020-21 से 2024-25 तक के पांच वर्षों के दौरान कुल 661 हिमस्खलन की घटनाएं रिपोर्ट हुईं, जिनमें जम्मू-कश्मीर में अकेले 500 से अधिक मामले सामने आए। उत्तराखंड भी इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जहां पहाड़ी इलाकों में सड़कें, गांव और पर्यटन स्थल बार-बार प्रभावित होते हैं। हिमाचल प्रदेश और अन्य हिमालयी क्षेत्रों में भी यह समस्या मौजूद है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में संख्या और प्रभाव सबसे ज्यादा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी हिमालय में 1,100 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को ‘एवलांच साइट्स’ के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और ढलान की वजह से हिमस्खलन का खतरा रहता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिससे ऐसे हादसों की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। पिछले दशकों में हिमस्खलन से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, और सड़कें कई महीनों तक बंद रहती हैं।

नितिन नबीन ने संभाली भाजपा की कमान, बने पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हो गया। नितिन नबीन ने औपचारिक रूप से पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार ग्रहण कर लिया। 45 वर्ष की उम्र में इस उच्च पद पर पहुंचकर वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। यह परिवर्तन पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व और संगठनात्मक ऊर्जा की नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।

पदभार ग्रहण समारोह भाजपा मुख्यालय में सुबह 11:30 बजे आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद रहे। समारोह से पहले नितिन नबीन ने दिल्ली के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे झंडेवालान मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, हनुमान मंदिर और बंगला साहिब गुरुद्वारे में पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया।

सोमवार को संपन्न नामांकन प्रक्रिया में नितिन नबीन एकमात्र उम्मीदवार थे। राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने घोषणा की कि उनके पक्ष में कुल 37 नामांकन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के प्रस्ताव शामिल थे। किसी अन्य प्रत्याशी के न होने के कारण वे निर्विरोध चुने गए।

नितिन नबीन को 14 दिसंबर 2025 को पार्टी का कार्यकारी (नेशनल वर्किंग) अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बिहार के पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री रहे नबीन बिहार से इस पद पर पहुंचने वाले पहले नेता हैं। उनका जन्म 23 मई 1980 को हुआ था और वे भाजपा के जन्म से महज दो महीने बाद पैदा हुए थे। पार्टी के 45 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी युवा उम्र में कोई नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष बना है (पहले अमित शाह 49 वर्ष की उम्र में अध्यक्ष बने थे)।

यह नेतृत्व परिवर्तन जे.पी. नड्डा के बाद पार्टी में ‘नबीन युग’ की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और इसे संगठन को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। नितिन नबीन के सामने अब आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की चुनौतियां हैं, जहां वे पार्टी की मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी निभाएंगे।