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भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार, LPG, पेट्रोल-डीजल पर अफवाह फैलाई तो होगी कार्रवाई

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नई दिल्ली: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देशभर में कहीं भी इन ईंधनों की कोई कमी नहीं है और सभी खुदरा दुकानों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर जानबूझकर फैलाई जा रही भ्रामक और गलत सूचनाओं से प्रभावित न हों। इन अफवाहों का मकसद केवल अनावश्यक दहशत फैलाना है।

पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति बाधारहित

मंत्रालय के अनुसार, भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम शोधक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जो 150 से अधिक देशों को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति करता है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित है। देशभर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं। किसी भी पंप को आपूर्ति सीमित करने के निर्देश नहीं दिए गए हैं।

कुछ चुनिंदा पंपों पर सोशल मीडिया पर वायरल गलत वीडियो के कारण घबराहट में खरीदारी हुई थी, लेकिन तेल कंपनियों ने तुरंत आपूर्ति बढ़ा दी। पेट्रोल पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी की समस्या को देखते हुए कंपनियों ने क्रेडिट अवधि को एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन से अधिक कर दिया है, ताकि कोई भी पंप सूखे न रहे।

कच्चे तेल की आपूर्ति और भंडार पर्याप्त

होर्मुज जलडमरूमध्य की तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद भारत को 41 से अधिक देशों से पहले से अधिक कच्चा तेल मिल रहा है। सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है।

सामरिक भंडार को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों को मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है। पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी वास्तविक भंडार लगभग 60 दिनों का है (कच्चा तेल, उत्पाद भंडार और रणनीतिक भूमिगत भंडारण सहित)। अगले दो महीनों की खरीद भी पक्की हो चुकी है। इसलिए भंडार समाप्त होने के किसी भी दावे को पूरी तरह गलत बताया गया है।

एलपीजी की स्थिति मजबूत

एलपीजी की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय के नियंत्रण आदेश के बाद घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दैनिक उत्पादन अब 50 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) तक पहुंच गया है, जबकि कुल दैनिक मांग करीब 80 टीएमटी है। शुद्ध आयात की जरूरत घटकर मात्र 30 टीएमटी रह गई है।

अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों से 800 टीएमटी एलपीजी कार्गो पहले से सुरक्षित हैं और 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंच रहे हैं। तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित कर रही हैं। घबराहट के कारण बढ़ी मांग अब सामान्य स्तर पर आ गई है। जमाखोरी रोकने के लिए वाणिज्यिक सिलेंडरों का आवंटन 50 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है।

पीएनजी को बढ़ावा

मंत्रालय ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को घरेलू ईंधन के रूप में बढ़ावा देने की अपनी दीर्घकालिक नीति पर जोर दिया। पीएनजी सस्ता, स्वच्छ और सुरक्षित विकल्प है। घरेलू उत्पादन से भारत एलपीजी की तुलना में आयात पर बहुत कम निर्भर है। शहरी गैस वितरण क्षेत्र 2014 के 57 से बढ़कर 300 से अधिक हो चुके हैं और घरेलू पीएनजी कनेक्शन 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।

मंत्रालय ने साफ किया कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।

भ्रामक सूचनाओं पर सख्त कार्रवाई

मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कतारों की पुरानी तस्वीरें, विदेशी फुटेज और फर्जी लॉकडाउन-अपातकाल की खबरें फैलाने वाले शरारती तत्वों पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार ने चेतावनी दी है कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के बारे में गलत जानकारी फैलाना कानून के तहत दंडनीय अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बस और कार की टक्कर में दो की मौत, 2 घायल

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मंडी: हिमाचल के मंडी स्थित पंडोह डैम के समीप आज सुबह एक भयानक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक बस और कार के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में कार सवार सुषांक और गायत्री की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि कश्मीर और दीक्षा गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बीबीएमबी सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों और ट्रैफिक इंचार्ज चेत राम ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए घायलों को वाहन से बाहर निकाला। घायलों को तुरंत बीबीएमबी की एंबुलेंस से जोनल अस्पताल मंडी पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

एएसपी अभिमन्यू वर्मा ने बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि सड़क हादसों से बचाव के लिए सतर्क रहें।

देहरादून–पिथौरागढ़ हवाई सेवा शुरू, एक घंटे में तय होगा सफर, मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ 

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  • 42 सीटर विमान से कनेक्टिविटी मजबूत.

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को जौलीग्रांट एयरपोर्ट से देहरादून–पिथौरागढ़–देहरादून विमान सेवा का शुभारंभ किया। एलायंस एयर द्वारा संचालित 42 सीटर विमान सेवा के शुरू होने से अब पिथौरागढ़ और देहरादून के बीच सफर महज एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनवमी के शुभ अवसर पर शुरू हुई यह सेवा न केवल आमजन के लिए सुविधाजनक है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हवाई सेवाएं अब केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए जीवन रेखा बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई उड़ान योजना ने देश में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है, जिससे अब आम नागरिक भी सस्ती दरों पर हवाई यात्रा कर पा रहा है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में उड़ान योजना 2.0 को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अगले 10 वर्षों में 29 हजार करोड़ रुपये की लागत से 100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। इसका विशेष लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ ही दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों को मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में उड़ान योजना के तहत 26 हवाई मार्गों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा वर्ष 2023 में शुरू की गई “उत्तराखंड एयर कनेक्टिविटी योजना” के तहत 6 मार्गों पर नियमित उड़ानें संचालित की जा रही हैं। पिछले चार वर्षों में राज्य में हेलिपोर्ट्स की संख्या 2 से बढ़कर 12 और हेलीपैड की संख्या 60 से बढ़कर 118 हो गई है।

उन्होंने कहा कि इस नई सेवा से पिथौरागढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही पिथौरागढ़ और मुनस्यारी के बीच भी हेली सेवा शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिथौरागढ़ हवाई अड्डे के विकास पर 450 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, नैनी सैनी हवाई अड्डे के अधिग्रहण के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राज्य सरकार के बीच एमओयू भी किया गया है, जिससे क्षेत्र में हवाई सुविधाएं और बेहतर होंगी। इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभकामनाएं देते हुए राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार का भरोसा दिलाया।

उत्तराखंड: सिर पर चारधाम यात्रा, यमुनांत्री मार्ग बदहाल, हिमस्खलन से घोड़ापड़ाव, टिनशेड और पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त

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उत्तरकाशी : हाल ही में यमुनोत्री धाम क्षेत्र में हुई भारी बर्फबारी के दौरान आए हिमस्खलन (एवलांच) ने धाम को काफी नुकसान पहुंचाया है। घोड़ापड़ाव सहित मंदिर के आसपास के टिनशेड क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि यमुनोत्री मंदिर को जोड़ने वाला पैदल मार्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भैरो घाटी में पैदल मार्ग पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया है और जगह-जगह विशाल पेड़ टूटकर मार्ग पर गिर गए हैं, जिससे वहां अव्यवस्था का माहौल है।

यमुनोत्री मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल और सहसचिव गौरव उनियाल ने हाल ही में धाम का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के बाद हिमस्खलन से मंदिर के सामने घोड़ापड़ाव और अन्य टिनशेड पूरी तरह ध्वस्त हो गए। कई फीट मोटी बर्फ जमा होने के कारण पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है। भैरो घाटी में एवलांच के कारण कई जगहों पर मार्ग बर्फ से पूरी तरह ढक गया है। नौकैची क्षेत्र के आसपास बड़े-बड़े पेड़ टूटकर पैदल मार्ग पर गिर गए हैं।

मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बर्फबारी रुकने और मौसम साफ होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अभी तक कोई जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण करने नहीं पहुंचा है। चारधाम यात्रा शुरू होने में अब मात्र कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, लेकिन यमुनोत्री धाम की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैदल मार्ग पर बर्फ और क्षति के कारण सुरक्षात्मक कार्य करने वाले मजदूर जानकीचट्टी में ही फंसे हुए हैं।

अधिक बर्फ जमा होने से आवश्यक निर्माण सामग्री भी धाम तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसी स्थिति में अगर समय पर कार्य नहीं हुआ तो यात्रा शुरू होने से पहले आनन-फानन में किए गए अधूरे कामों के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोनिवि का बयान लोनिवि (लोक निर्माण विभाग) के अधिशासी अभियंता तरुण कांबोज ने बताया कि उन्हें जानकारी दी गई है कि पैदल मार्ग से बर्फ हटा दी गई है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाएगा और आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

चारधाम यात्रा की तैयारियों को देखते हुए यमुनोत्री धाम में पैदल मार्ग, घोड़ापड़ाव और अन्य सुविधाओं की मरम्मत व बर्फ हटाने का काम तेजी से करने की मांग उठ रही है। प्रशासन से अपील की जा रही है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों को तुरंत सुधारा जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

भयानक सड़क हादसा: प्राइवेट बस की टिपर लॉरी से टक्कर, आग लगने से 14 यात्री जिंदा जले

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आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम जिले के रायवरम के पास गुरुवार तड़के एक दिल दहला देने वाला सड़क दुर्घटना हो गई। हरिकृष्णा ट्रेवल्स की एक प्राइवेट बस ने बजरी लदे टिपर लॉरी से जोरदार टक्कर मार दी, जिसके बाद बस में भयंकर आग लग गई। हादसे में कम से कम 8 से 14 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 18 से 20 अन्य यात्री घायल हुए हैं। मरने वालों में ज्यादातर यात्री बस में फंसकर जिंदा जल गए।

पुलिस के अनुसार, यह हादसा सुबह करीब 6 बजे स्लैब क्वारी (पत्थर की खदान) के पास हुआ। हाई स्पीड से आ रही बस का टकराव विपरीत दिशा से आ रहे टिपर से हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग भड़क उठी और प्राइवेट बस पूरी तरह जलकर राख हो गई। कई यात्री बस के अंदर फंस गए, जिन्हें बाहर निकालना मुश्किल हो गया।

मार्कापुरम के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) नागराजू ने बताया कि अब तक 8 से 14 शवों को बाहर निकाला गया है, जबकि लगभग 18 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ शव अभी भी बस के मलबे में फंसे हो सकते हैं। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पीड़ितों की पहचान का काम जारी है और उनके परिजनों को सूचित किया जा रहा है।

बस तेलंगाना के जगित्याल (या निर्मल) से आंध्र प्रदेश के विनजमूरु/कालिगिरी/पामुरु की ओर जा रही थी। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, जिसमें ओवरस्पीड और अन्य कारक शामिल हो सकते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को हादसे की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के त्वरित इलाज का भरोसा भी दिया।

देहरादून मेडिकल छात्रा की कार में संदिग्ध मौत, HOD पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप

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देहरादून : श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेस से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां नेत्र रोग (एमएस) की पढ़ाई कर रही छात्रा तन्वी संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी कार में मृत पाई गई। छात्रा ने मौत से पहले अपने पिता से फोन पर बातचीत में मानसिक तनाव और प्रताड़ना की बात कही थी।

मानसिक प्रताड़ना का आरोप

मृतका ने अपने पिता को बताया था कि विभागाध्यक्ष (HOD) द्वारा उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और फेल करने की धमकी दी जा रही है। पिता के अनुसार, रात करीब 9 बजे तन्वी ने उनसे करीब एक घंटे तक बात की थी और वह बेहद परेशान थी। उन्होंने उसे ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि वह सुबह अंबाला से देहरादून पहुंचकर कॉलेज प्रबंधन से शिकायत करेंगे।

रात में अचानक संपर्क टूटा

रात करीब 11:15 बजे तन्वी ने अपनी मां को मैसेज कर बताया कि वह 12:30 बजे तक घर पहुंच जाएगी, लेकिन इसके बाद उसने फोन उठाना बंद कर दिया। अनहोनी की आशंका में पिता तुरंत अंबाला से देहरादून के लिए रवाना हो गए।

सड़क किनारे कार में मिली बेसुध

तड़के करीब 3 बजे पिता अस्पताल परिसर पहुंचे, लेकिन पार्किंग में तन्वी की कार नहीं मिली। तलाश के दौरान उन्हें काली माता मंदिर के पास सड़क किनारे कार खड़ी दिखाई दी। कार के अंदर तन्वी बेसुध अवस्था में मिली। पिता ने शीशा तोड़कर उसे बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

फॉरेंसिक जांच शुरू

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है। कार से दवाइयां, इंजेक्शन और छात्रा के हाथ में लगा केनुला बरामद किया गया है, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने पिता की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पिता का आरोप-“सिस्टम ने ली जान”

मृतका के पिता डॉ. ललित मोहन ने कहा, “मेरी बेटी डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी। हमने उसे हर सुविधा दी, लेकिन सिस्टम की प्रताड़ना और लालच ने उसे हमसे छीन लिया। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।

PNG उपलब्ध होने पर भी कनेक्शन से मना किया तो नहीं मिलेगी LPG, पढ़ें पूरा आदेश

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही पर असर पड़ा है। इसी बीच भारत सरकार ने देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश-2026 जारी किया है। इस आदेश के तहत जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं के लिए PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित समय में PNG कनेक्शन नहीं लेता है, तो सूचना दिए जाने के तीन महीने बाद उसकी एलपीजी आपूर्ति बंद की जा सकती है।

सरकार के अनुसार यह कदम एलपीजी की कमी को देखते हुए उठाया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है और भारत को आयात में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार ‘ईंधन विविधीकरण’ को बढ़ावा देकर एलपीजी पर निर्भरता कम करना चाहती है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों से एलपीजी की मांग कम कर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

नए नियमों के तहत हाउसिंग सोसाइटी और आवासीय परिसरों को गैस पाइपलाइन बिछाने की अनुमति देने में देरी नहीं कर सकेंगे। संबंधित संस्थाओं को तीन कार्य दिवस के भीतर अनुमति देनी होगी और 48 घंटे के भीतर अंतिम कनेक्टिविटी उपलब्ध करानी होगी। यदि कोई सोसाइटी अनुमति नहीं देती है, तो उसे नोटिस दिया जाएगा और तीन महीने बाद उस परिसर की एलपीजी आपूर्ति रोकी जा सकती है।

सरकार ने गैस कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के लिए भी समय-सीमा तय की है। पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी अनुमतियां समय पर न मिलने पर उन्हें स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। वहीं, कंपनियों को मंजूरी मिलने के चार महीने के भीतर काम शुरू करना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, जिन क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से PNG कनेक्शन देना संभव नहीं है, वहां उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। संबंधित गैस कंपनी द्वारा प्रमाणित किए जाने पर ऐसे उपभोक्ताओं की एलपीजी आपूर्ति जारी रहेगी।

सरकार का मानना है कि PNG अपनाने से उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि यह पाइपलाइन के जरिए सीधे घर तक पहुंचती है और बार-बार सिलेंडर बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के अनुसार, यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक संकट के प्रभाव को कम करने की दिशा में अहम साबित होगा।

45, 35 या 25 दिन…नहीं बदला कोई नियम, कब मिलेगा सिलिंडर?

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नई दिल्ली। मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति पर असर पड़ने के बाद देश में गैस सिलेंडरों के लिए घबराहट बढ़ी हुई है। कई जगहों पर लोग रसोई गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें लगा रहे हैं, और कालाबाजारी तथा जमाखोरी की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस बीच सोशल मीडिया और कुछ खबरों में यह अफवाह फैल गई थी कि एलपीजी सिलेंडर रिफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। कहा गया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत मिलने वाले कनेक्शन की रिफिल बुकिंग के लिए नई समय-सीमा रखी गई है – जैसे कि पीएमयूवाई ग्राहकों के लिए 45 दिन, सामान्य सिंगल सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन और डबल सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए 35 दिन। इन दावों के चलते कई जिलों में सिलेंडर के लिए लोगों ने देर रात से कतारें लगानी शुरू कर दीं (तस्वीर: प्रयागराज और कानपुर में सिलेंडर की कतारें, फोटो स्रोत- पीटीआई)।

इन खबरों को भारतीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूरी तरह गलत ठहराया है। मंत्रालय ने बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि एलपीजी रिफिल बुकिंग की मौजूदा समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्रीय मंत्रालय ने कहा, “सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट एलपीजी रिफिल बुकिंग के लिए संशोधित समय सीमा का दावा कर रहे हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिफिल बुकिंग की मौजूदा समय-सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।” यानी अभी भी शहरों में हर रिफिल बुकिंग के लिए न्यूनतम 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर (इंटरलॉकिंग पीरियड) लागू है, वह भी चाहे आपका कनेक्शन पीएम उज्ज्वला योजना के अंतर्गत मिला हो या नहीं।

मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और बिना जरूरत घबराहट में गैस बुकिंग न करें। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि देश भर में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और कहीं भी गैस की कमी नहीं है। सरकार का कहना है कि जितनी गैस मांग में है, उतनी ही मात्रा में घरेलू आपूर्ति जारी है और सभी तेल रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं। इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे एलपीजी के अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर नजर रखें। पहले ही आदेश दिया जा चुका है कि गैस वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें गैरकानूनी स्टोरेज करने वालों के खिलाफ रेड, सिलेंडर जब्ती और आपराधिक मुकदमे शामिल हैं।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 2016 में की गई थी। इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाली महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन और सिलेंडर की सुविधा दी जाती है। योजना का उद्देश्य पारंपरिक ईंधन (जैसे लकड़ी या कोयला) जलाने की बजाय स्वच्छ ईंधन इस्तेमाल कर ग्रामीण परिवारों की महिला सदस्यों के स्वास्थ्य में सुधार और उनकी घरेलू ऊर्जा तक आसान पहुँच सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत अब तक करोड़ों महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।

सरकार की ओर से दी गई इन जानकारियों के बाद एलपीजी सिलेंडरों के संबंध में फैली अफवाहों को पूरी तरह नकार दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान नियमों के तहत रिफिल बुकिंग के लिए निर्धारित समय-सीमा वैसी ही पहले की तरह बनी हुई है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से ही जानकारी लें और बिना कारण घबराहट में या अफवाहों पर विश्वास कर गैस बुकिंग न बढ़ाएं।

कैबिनेट विस्तार के बाद पहली बैठक में 16 प्रस्तावों पर मुहर, कई बड़े फैसले

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देहरादून। कैबिनेट विस्तार के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक सचिवालय में आयोजित हुई। बैठक की शुरुआत में नव नियुक्त मंत्रियों का स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेश से मंत्रिमंडल को अवगत कराया, जिसे मुख्य सचिव ने पढ़कर सुनाया।

बैठक में कुल 16 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें कई अहम निर्णय लिए गए। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के तहत एक ब्रिज इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट की कंसल्टेंसी को एक करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई। वहीं, राज्य में सेवारत न्यायिक अधिकारियों को रियायती दरों पर 10 लाख रुपये तक का ऋण देने का निर्णय लिया गया, जिसमें ई-वाहनों के लिए 4 प्रतिशत और अन्य के लिए 5 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित की गई है।

वन विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दी गई है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 31 मार्च 2025 तक स्थापित संयंत्रों को सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के परिनियमों को प्रख्यापित करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अलावा उत्तराखंड लोक संपत्ति वसूली अधिनियम की नियमावली को लागू करने पर भी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।

गृह विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड होमगार्ड नियमावली को मंजूरी दी गई है। साथ ही पुलिसकर्मियों को डिजिटल और कंप्यूटर प्रशिक्षण देने के लिए भारत सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा।

वर्दीधारी सेवाओं से संबंधित एकीकृत नियमावली में आयु सीमा से जुड़े प्रावधानों को फिलहाल स्थगित रखते हुए दिसंबर 2028 के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया है। पुलिस, पीएसी और आईआरबी में फिलहाल पुरानी आयु सीमा और शारीरिक मानक ही लागू रहेंगे।

एडेड स्कूलों में पूर्व सेवा को प्रोन्नति में शामिल करने के हाईकोर्ट के निर्णय के अध्ययन हेतु मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की गई है। कृषि क्षेत्र में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। साथ ही रबी और खरीफ सत्र में गेहूं व धान की खरीद पर मंडी शुल्क 2 प्रतिशत ही रखा जाएगा।

कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड वीर उद्यमी योजना’ को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के 10 प्रतिशत लक्ष्य अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित किए जाएंगे तथा उन्हें 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी।

इसके अलावा सेतु आयोग के कार्यक्षेत्र और संरचना को मंजूरी, पंचम विधानसभा सत्र के सत्रावसान पर सहमति तथा ‘देवभूमि परिवार अधिनियम’ को भी कैबिनेट की स्वीकृति प्रदान की गई।

AIIMS ऋषिकेश में अफरा-तफरी, छठी मंजिल की छत पर चढ़ा मरीज, इसलिए था नाराज

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ऋषिकेश। ऋषिकेश स्थित एम्स में बुधवार सुबह एक युवक के छत पर चढ़ जाने से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, करीब 11 बजे एक मरीज मनोरोग विभाग की छठी मंजिल की छत पर पहुंच गया और वहां खड़ा हो गया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।

स्थिति को गंभीर होते देख सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए युवक को शांत कराने की कोशिश शुरू की। नीचे खड़े सुरक्षाकर्मी लगातार उससे बातचीत कर उसे समझाने में जुटे रहे, ताकि वह किसी तरह सुरक्षित नीचे आ सके।

इसी दौरान मौके पर मौजूद एक अन्य मरीज के तीमारदार ने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। वह चुपचाप छत पर पहुंचा और पीछे से युवक को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींच लिया। कुछ ही क्षणों में अन्य सुरक्षाकर्मी भी वहां पहुंच गए और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई।

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी श्रीलोय मोहंती ने बताया कि संबंधित युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ है और उसे उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। इस दौरान परिजन ओपीडी में पर्ची बनवाने में लगे थे, जबकि युवक इलाज कराने से इंकार कर रहा था। इसी बीच वह अचानक वहां से निकलकर भाग गया और छठी मंजिल पर पहुंचकर छत पर चढ़ गया।

घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों में भय का माहौल बन गया। फिलहाल युवक सुरक्षित है और सुरक्षा अधिकारी उसके परिजनों से पूछताछ कर रहे हैं।