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नया आधार ऐप फुल वर्जन में लॉन्च, घर बैठे मोबाइल नंबर और पता बदल सकेंगे

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नई दिल्ली: आधार कार्ड धारकों के लिए बहुत बड़ी सुविधा आने वाली है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने घोषणा की है कि नया आधार मोबाइल ऐप का पूर्ण संस्करण (फुल वर्जन) कल यानी बुधवार, 28 जनवरी 2026 को लॉन्च हो जाएगा। इस नए ऐप के लॉन्च होने के बाद आधार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह अनलॉक हो जाएंगी, जिनमें सबसे खास है:

  • घर बैठे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलना
  • घर बैठे पता (एड्रेस) अपडेट करना
  • फिजिकल आधार कार्ड की फोटोकॉपी साथ रखने की जरूरत खत्म होना

UIDAI ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके जानकारी दी है कि अब आधार नंबर धारक कहीं से भी, कभी भी अपना मोबाइल नंबर अपडेट कर सकेंगे। यह पोस्ट UIDAI (@UIDAI) द्वारा 26 जनवरी 2026 को साझा की गई है, जिसमें कहा गया है कि आधार धारक अब अपने मोबाइल नंबर को कहीं से भी, कभी भी अपडेट कर सकेंगे। आधार ऐप का पूर्ण संस्करण (फुल वर्जन) 28 जनवरी 2026 को लॉन्च हो जाएगा, जिससे यह सुविधा सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

इस अपडेट के बाद आधार ऐप में कई नई सुविधाएं सक्रिय हो जाएंगी, जैसे घर बैठे मोबाइल नंबर और पता बदलना, डिजिटल आधार शेयर करना (निजी जानकारी छिपाकर), और प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हुए न्यूनतम डेटा शेयरिंग के साथ पहचान सत्यापन। UIDAI ने जोर दिया है कि प्राइवेसी सबसे पहले है – पहचान सत्यापन में अनावश्यक व्यक्तिगत जानकारी शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मुख्य फीचर्स जो 28 जनवरी से सक्रिय होंगे

  • मोबाइल नंबर और पता ऑनलाइन अपडेट
  • डिजिटल आधार को मोबाइल पर सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर शेयर करना
  • शेयर करते समय निजी जानकारी (जैसे फोटो, जन्मतिथि, पता) को मास्क/छिपाने की सुविधा
  • केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन
  • प्राइवेसी पर विशेष जोर – न्यूनतम डेटा शेयरिंग

ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। UIDAI ने सभी आधार धारकों से अपील की है कि वे 28 जनवरी को आधिकारिक ऐप को अपडेट या डाउनलोड करें और अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल नंबर व पता अपडेट कर लें।

सावधानी: केवल uidai.gov.in या आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।

गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध, बद्री-केदारनाथ समेत अन्य मंदिरों में भी कड़े नियमों की तैयारी

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उत्तरकाशी: उत्तराखंड के पवित्र चार धामों में से एक गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। यह कदम मंदिर की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और अन्य प्रमुख हिंदू मंदिरों में भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और आधिकारिक बयानों से प्राप्त हुई है, जो हाल के दिनों में सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टल्स पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

गंगोत्री धाम में नया नियम

उत्तराखंड सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, गंगोत्री धाम में अब केवल हिंदू धर्मावलंबियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। गैर हिंदुओं, जिसमें विदेशी पर्यटक और अन्य धर्मों के अनुयायी शामिल हैं, को मंदिर के आंतरिक क्षेत्र में जाने की छूट नहीं मिलेगी। यह नियम 2026 के यात्रा सीजन से लागू होने की उम्मीद है। मंदिर समिति के एक अधिकारी ने बताया, “यह निर्णय मंदिर की प्राचीन परंपराओं और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गंगा नदी के उद्गम स्थल पर पवित्रता बनाए रखना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है।”

हाल के वर्षों में, गंगोत्री जैसे तीर्थ स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण धार्मिक स्थलों पर भीड़भाड़ और प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध न केवल धार्मिक भावनाओं की रक्षा करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगा।

बद्री-केदारनाथ और अन्य मंदिरों पर असर

इस निर्णय का असर बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम जैसे अन्य प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों पर भी पड़ने वाला है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटी) ने संकेत दिया है कि वे भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर समीक्षा कर रहे हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “हम चार धाम यात्रा को धार्मिक अनुष्ठानों के अनुरूप रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। केदारनाथ में पहले से ही कुछ प्रतिबंध हैं, जिन्हें और सख्त किया जा सकता है।”

इसके अलावा, तिरुपति बालाजी मंदिर (आंध्र प्रदेश) और सबरीमाला मंदिर (केरल) जैसे अन्य मंदिरों में भी गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध की मांग लंबे समय से उठ रही है। तिरुपति मंदिर में पहले से ही गैर हिंदुओं को आंतरिक क्षेत्र में प्रवेश की मनाही है और अब उत्तराखंड के मॉडल को अन्य राज्यों में अपनाने की चर्चा हो रही है। धार्मिक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है, जबकि पर्यटन उद्योग से चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं कि इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

मौसम अपडेट : ऑरेंज अलर्ट के बीच भारी बारिश-बर्फबारी की चेतावनी

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देहरादून: मौसम विभाग ने आज देहरादून में गंभीर मौसम की स्थिति की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) के साथ गरज-चमक, भारी बारिश और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। इस चेतावनी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कक्षा 1 से 12 तक सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है।

जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह छुट्टी केवल देहरादून जिले में लागू है और अन्य जिलों के स्कूलों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को घर पर ही सुरक्षित रखें और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। मौसम विभाग की लगातार अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

छात्रों एवं अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश:

  • घर के अंदर ही रहें और सुरक्षित माहौल बनाए रखें।
  • तेज हवाओं, बारिश या बिजली गिरने की स्थिति में बाहर न निकलें।
  • यदि मौसम में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो प्रशासन द्वारा तुरंत नई सूचना जारी की जाएगी।
  • यह एहतियाती कदम बच्चों की सुरक्षा और अप्रिय मौसम से बचाव के लिए उठाया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आज प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहेगा, लेकिन देहरादून में सबसे अधिक प्रभाव दिखाई दे सकता है। प्रशासन ने राहत-बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा है और आपात स्थिति में तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।

कर्तव्य पथ पर दिखी भारत की ताकत, लड़ाकू विमानों की गगनभेदी गर्जना से गूंजा आकाश

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भारत आज 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह और गौरव के साथ मना रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भव्य परेड की सलामी ली। इस ऐतिहासिक अवसर पर यूरोपीय संघ की उच्च स्तरीय उपस्थिति रही, जहां यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के दोनों प्रमुख नेताओं ने एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की, जो भारत और यूरोपीय संघ के बीच गहरे रणनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “जीवन भर का सम्मान” बताते हुए कहा कि “एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है”। परेड के दौरान भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का विशेष प्रदर्शन किया गया।

परेड में 30 झांकियां, 29 विमानों का भव्य फ्लाईपास्ट, Mi-17 हेलीकॉप्टरों द्वारा फूलों की वर्षा और 2,500 कलाकारों द्वारा ‘विविधता में एकता’ थीम पर सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ जैसे संदेशों के साथ यह आयोजन भारत की प्रगति और एकता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने वाला रहा।

देश भर में राज्यों के राजभवनों और सरकारी भवनों पर तिरंगा फहराया गया, जहां स्थानीय स्तर पर सैन्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियां निकाली गईं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम जैसे राज्यों में भी उत्साह देखने को मिला, जहां मुख्यमंत्री और स्थानीय नेता शामिल हुए।

उत्तराखंड में जोश के साथ मनाया 77वां गणतंत्र दिवस: सीएम धामी ने मुख्यमंत्री आवास में फहराया तिरंगा, भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी ध्वजारोहण

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देहरादून: उत्तराखंड ने पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुबह मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और इस अवसर पर मौजूद लोगों को संविधान की उद्देशिका की शपथ दिलाई।

ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए लगातार कार्य हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में सभी अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन करें। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हर क्षेत्र में तेजी से विकास कार्यों को अंजाम दे रही है, जिससे उत्तराखंड का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है।

इसके बाद मुख्यमंत्री धामी एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बलवीर रोड स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, प्रेमचंद अग्रवाल सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

ध्वजारोहण समारोहों में उपस्थित लोगों ने ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाकर राष्ट्रभक्ति की भावना व्यक्त की। राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में तिरंगा फहराया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने सभी प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस संविधान की गरिमा, लोकतंत्र की ताकत और राष्ट्रीय एकता की याद दिलाता है। उन्होंने बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि हम सब मिलकर एक मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण करेंगे।

उत्तराखंड मौसम अपडेट : आज भी हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना, 31 मार्ग अभी बंद

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देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के अनुसार, सोमवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। खासकर 2,800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ जमने के आसार अधिक हैं।

प्रदेश के मैदानी और अन्य जिलों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों का पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया है कि 29 जनवरी तक पर्वतीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी जारी रह सकती है। 30 जनवरी को पूरे राज्य में मौसम साफ-सुथरा रहेगा, जबकि 31 जनवरी से एक बार फिर मौसम में बदलाव की संभावना जताई गई है।

बर्फबारी और बारिश के कारण राज्य में यातायात प्रभावित हुआ हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, वर्तमान में दो बॉर्डर रोड, एक राज्यमार्ग, दो जिला मार्ग और कई ग्रामीण मार्गों समेत कुल 31 मार्ग बंद हैं। सबसे अधिक प्रभाव देहरादून जिले में देखा जा रहा है, जहां एक राज्यमार्ग, दो जिला मार्ग और 17 ग्रामीण मार्ग अभी भी बंद पड़े हैं। पिथौरागढ़ में दो बॉर्डर रोड और तीन ग्रामीण मार्ग, टिहरी में दो तथा उत्तरकाशी में चार ग्रामीण मार्ग प्रभावित हैं।

गंगोत्री हाईवे शुक्रवार की बर्फबारी के बाद तीसरे दिन भी सुचारू नहीं हो सका है, जबकि यमुनोत्री हाईवे रविवार को 52 घंटे के बाद खोल दिया गया। गढ़वाल क्षेत्र में 20 से अधिक ग्रामीण मार्ग अभी भी बंद हैं। कई गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को मौसम के खुले रहने पर प्रशासनिक टीमों ने मार्ग बहाली और बिजली सुचारू करने का कार्य तेज किया, लेकिन ऊंचाई वाले इलाकों में चुनौतियां बनी हुई हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें, अनावश्यक यात्रा से बचें और बंद मार्गों पर यात्रा न करें। बर्फबारी के कारण भूस्खलन या हिमस्खलन का खतरा भी बना रहता है।

गणतंत्र दिवस 2026 : उत्तराखंड के 12 सुरक्षाकर्मियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मान, यहां देखें लिस्ट

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देहरादून : गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड, सिविल डिफेंस तथा सुधारात्मक सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड के 12 कर्मियों को वीरता एवं सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, देशभर में कुल 982 कर्मियों को ये सम्मान दिए गए हैं, जिसमें उत्तराखंड से प्राप्त पदक विशेष गौरव का विषय हैं।

विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम)

  •  योगेंद्र सिंह रावत, इंस्पेक्टर जनरल (कार्मिक/मुख्यालय), उत्तराखंड पुलिस। यह पदक सेवा में विशेष रूप से विशिष्ट रिकॉर्ड के लिए प्रदान किया जाता है।

सराहनीय सेवा के लिए पदक (एमएसएम) प्राप्त करने वाले उत्तराखंड के अन्य कर्मी इस प्रकार हैं:

  • पुलिस सेवा: ज्योति चौहान (इंस्पेक्टर, सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर देहरादून),  प्रबोध कुमार घिल्डियाल (डिप्टी सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस, रुद्रप्रयाग),  शिवराज सिंह (डिप्टी सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस, चम्पावत), सुभाष चंद्र (इंस्पेक्टर, अभिसूचना मुख्यालय), साजिद अली (असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, पुलिस मुख्यालय)।
  • फायर सर्विस: मुकेश कुमार पोखरियाल और  गिरीश चंद्र लोहानी (दोनों लीडिंग फायरमैन, देहरादून)।
  • होम गार्ड एवं सिविल डिफेंस: मीना मोहन शर्मा (सेक्टर वार्डन), रविंद्र मोहन काला (डिप्टी डिविजनल वार्डन)।
  • करेक्शनल सर्विसेज (सुधारात्मक सेवा):  बीरबल यादव (हेड वार्डर)।
  • सीबीआई: धर्मेंद्र (इंस्पेक्टर, सीबीआई देहरादून ब्रांच)।

ये पदक कर्तव्यनिष्ठा, मूल्यवान सेवा और निस्वार्थ योगदान की मान्यता हैं। उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक ने सभी सम्मानित कर्मियों को बधाई दी है और कहा कि यह राज्य के सुरक्षा बलों के समर्पण का प्रमाण है। देशभर में कुल 101 पीएसएम (89 पुलिस, 5 अग्निशमन, 3 सिविल डिफेंस/होमगार्ड, 4 सुधारात्मक सेवा) और 756 एमएसएम (664 पुलिस, 34 अग्निशमन, 33 सिविल डिफेंस/होमगार्ड, 25 सुधारात्मक सेवा) प्रदान किए गए हैं।

बिगड़ा रहेगा उत्तराखंड का मौसम, पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

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देहरादून : उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में रविवार को हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। खासकर 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ जमने के आसार हैं, जबकि मैदानी इलाकों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा।

आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहेगा। 29 जनवरी तक प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इससे पहले की बर्फबारी के कारण प्रदेश में कुल 66 सड़कें बंद हैं, जिनमें छह राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं।

बंद प्रमुख सड़कों में चमोली जिले का ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (हनुमान चट्टी से आगे), गोपेश्वर-मंडल-चोपता और जोशीमठ-मलारी-नीती राजमार्ग शामिल हैं। उत्तरकाशी में ऋषिकेश-यमुनोत्री राजमार्ग (राड़ीटॉप से औरछाबैंण्ड तक) तथा ऋषिकेश-गंगोत्री राजमार्ग (गंगनानी से आगे) बर्फबारी के कारण बंद हैं। टिहरी जिले में चंबा-धनोल्टी-सुवाखोली राजमार्ग भी प्रभावित है, जिसे खोलने के प्रयास जारी हैं।

बर्फबारी से हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। डीजीआरई ने चमोली जिले के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है, जिसके चलते प्रशासन सतर्क है। यात्रियों से अपील की गई है कि मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर यात्रा करें और अनावश्यक जोखिम न लें।

पर्यावरण की आड़ में साल जंगल पर अतिक्रमण? RTI एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने उठाया बड़ा मुद्दा, डॉ. अनिल जोशी सहित कईयों के पट्टे रद्द करने की मांग

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उत्तराखंड में वन भूमि और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। RTI एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने इस बार जो खुलासा किया है, उसने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए गये कथित दुरुपयोग को भी बेनकाब कर दिया है। इस बार खुलासे के केंद्र में हैं पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, जिनके नाम पर वर्ष 2011 में देहरादून के इस्ट होप टाउन क्षेत्र स्थित “साल जंगल” (वन भूमि) का आवंटन किए जाने का आरोप है। इस भूमि पर वर्तमान में HESCO NGO का भवन निर्मित है, जिसे अधिवक्ता नेगी ने अवैध बताते हुए इसे संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन करार दिया है।

मुख्य सचिव से जिलाधिकारी तक भेजा गया विस्तृत प्रतिवेदन

एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन, राजस्व सचिव और जिलाधिकारी देहरादून को एक विस्तृत और कानूनी तथ्यों से युक्त प्रतिवेदन भेजा है। प्रतिवेदन में खाता संख्या 02493, खसरा संख्या 384/1, कुल क्षेत्रफल 0.1170 हेक्टेयर, तथा राजस्व प्रविष्टि “साल जंगल / वन भूमि” दर्ज भूमि के वर्ष 2011 में किए गए आवंटन को पूर्णतः अवैध बताया गया है।प्रतिवेदन में मांग की गई है कि उक्त पट्टा/आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय, दंडात्मक और आपराधिक कार्यवाही की जाए।

साल के जंगल को NGO भवन में बदलने का गंभीर आरोप

प्रतिवेदन के अनुसार जिस भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से “साल जंगल/वन भूमि” के रूप में दर्ज किया गया है, उसी भूमि पर वर्तमान में HESCO NGO का पक्का भवन खड़ा है। आरोप है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वन भूमि का उपयोग गैर-वन उद्देश्य के लिए किया गया। यह मामला केवल एक निर्माण या आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग, प्रशासनिक मिलीभगत और कानून की अनदेखी का प्रतीक बताया गया है।

1946 के बाद वन भूमि पर पट्टा अवैध: सुप्रीम कोर्ट

RTI एक्टिविस्ट नेगी ने अपने प्रतिवेदन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के उन फैसलों का उल्लेख किया है, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि 8 अगस्त 1946 के बाद सरकार को भी वन भूमि पर पट्टा देने का कोई अधिकार नहीं है। इस तिथि के बाद जंगल, वन, झाड़ी, नदी, नाला, खत्तिहान जैसी श्रेणी की भूमि पर दिया गया प्रत्येक पट्टा Void ab initio (प्रारंभ से ही शून्य) माना जाता है। इस आधार पर वर्ष 2011 में किया गया आवंटन कानूनी रूप से अस्तित्वहीन बताया गया है।

UPZA & LR Act की धारा 132 का सीधा उल्लंघन

प्रतिवेदन में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 132 का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इस धारा के तहत जंगल, वन, वृक्ष वन, झाड़ी, नदी, नाला, तालाब, चारागाह जैसी भूमि पर न तो पट्टा दिया जा सकता है और न ही उसका निजीकरण किया जा सकता है। कानून के अनुसार ऐसी भूमि सदैव राज्य या वन विभाग में निहित रहती है। ऐसे में डॉ. अनिल प्रकाश जोशी को किया गया आवंटन सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन और असंवैधानिक बताया गया है।

वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत केंद्र की अनुमति जरूरी

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 के अनुसार किसी भी वन भूमि का गैर-वन उपयोग केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। प्रतिवेदन में कहा गया है कि भूमि उपयोग परिवर्तन, भवन निर्माण और NGO संचालन के लिए किसी भी प्रकार की केंद्रीय स्वीकृति का कोई दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इस आधार पर पूरे निर्माण को अवैध घोषित किए जाने की मांग की गई है।

गोदावर्मन केस और 2025 का सुप्रीम कोर्ट आदेश

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा गया है कि राजस्व रिकॉर्ड में यदि भूमि “जंगल”, “वन”, “झाड़ी या “साल जंगल” दर्ज है, तो वह स्वतः वन मानी जाएगी। इसके साथ ही 15 मई 2025 को पारित सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख है, जिसमें राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया था कि वन भूमि, जंगल-झाड़ी, नदी-नाले और राजस्व वन को तत्काल वन विभाग को हस्तांतरित किया जाए और किसी भी प्रकार का पट्टा या लीज अवैध माना जाएगा।

1952–54 की गजट अधिसूचनाएं भी बनीं आधार

प्रतिवेदन में उत्तर प्रदेश सरकार की 1952, 1953 और 1954 की गजट अधिसूचनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें वन भूमि और राजस्व वन का स्पष्ट सीमांकन किया गया था। इसके बावजूद वर्षों बाद ऐसी भूमि का आवंटन किया जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

पर्यावरणविद् के नाम पर जंगल कटान पर सवाल

इस पूरे मामले का सबसे विरोधाभासी पहलू यह बताया गया है कि जिस व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर “पर्यावरणविद्” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, उसी के नाम पर साल जंगल काटकर भवन खड़ा किया गया। इसे पर्यावरण संरक्षण की आड़ में न्यायिक आदेशों की अवहेलना का गंभीर उदाहरण बताया गया है।

तीन बड़ी मांगें, प्रशासन पर दबाव

RTI एक्टिविस्ट व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने प्रशासन से तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं—
वर्ष 2011 में दिया गया पट्टा/आवंटन तत्काल निरस्त किया जाए। HESCO NGO के भवन को अवैध घोषित कर ध्वस्त किया जाए और भूमि को मूल “साल जंगल” स्वरूप में बहाल किया जाए। इस आवंटन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

संवैधानिक संकट की चेतावनी

प्रतिवेदन में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जाएगा। इसे केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि संविधान, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और पर्यावरण संरक्षण की साख से जुड़ा मामला बताया गया है।आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी देहरादून में वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कोर्ट की शरण लेंगे। एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि देहरादून में वन भूमि और आरक्षित वन भूमि पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण हो रहे हैं। इस कारण दून घाटी की आबो-हवा बिगड़ गयी है और प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वन भूमि लीज पर दिये जाने का मामला उजागर होने के बाद अब वो अतिक्रमण मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

‘बॉर्डर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, पहले दो दिनों में तोड़ा ‘धुरंधर’ का रिकॉर्ड

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मनोरंजन:

सनी देओल अभिनीत बहुप्रतीक्षित युद्ध फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म को दर्शकों ने खुलकर प्यार दिया, जिससे पहले दिन ही इसने जबरदस्त कमाई की। ट्रेलर और गानों से पहले से ही चर्चा में रही फिल्म ने ‘धुरंधर’ के ओपनिंग डे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

ट्रेड एनालिस्ट्स और बॉक्स ऑफिस ट्रैकर्स (जैसे सैकनिल्क) के अनुसार, ‘बॉर्डर 2’ ने पहले दिन (शुक्रवार) लगभग 30-32 करोड़ रुपये नेट कलेक्शन किया, जो सनी देओल की पिछली कई फिल्मों से बड़ा ओपनिंग है और हाल के समय की सबसे मजबूत शुरुआत में से एक मानी जा रही है। यह आंकड़ा ‘धुरंधर’ के पहले दिन के कलेक्शन से अधिक है, जिसने ओपनिंग पर करीब 28 करोड़ के आसपास कमाई की थी।

दूसरे दिन (शनिवार) को फिल्म ने और तेज रफ्तार पकड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिन 2 पर लगभग 36-37 करोड़ रुपये नेट कमाए गए, जिससे दो दिनों का कुल नेट कलेक्शन 66-67 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह ‘धुरंधर’ के पहले दो दिनों के कलेक्शन से भी बेहतर है, जहां उसने कम ग्रोथ दिखाई थी। गणतंत्र दिवस वीकेंड के कारण रविवार को और भी बड़ी कमाई की उम्मीद है, जिससे फिल्म जल्द ही 100 करोड़ क्लब में शामिल हो सकती है।

फिल्म में सनी देओल के साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। युद्ध और देशभक्ति पर आधारित इस सीक्वल को दर्शकों ने ‘पैट्रियॉटिक एंटरटेनर’ के रूप में सराहा है। ट्रेलर को लाखों व्यूज मिले थे और गाने भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे थे। रिलीज के साथ मिडनाइट शो और सुबह के शो में भी भारी भीड़ देखी गई।

‘धुरंधर’ (रनवीर सिंह अभिनीत स्पाई थ्रिलर) ने पहले अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन ‘बॉर्डर 2’ की एंट्री से उसके कलेक्शन में गिरावट आई है। अब बॉक्स ऑफिस पर ‘बॉर्डर 2’ का दबदबा साफ दिख रहा है।

ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर फिल्म वीकेंड पर यह रफ्तार बरकरार रखती है, तो यह सनी देओल की अब तक की सबसे बड़ी हिट्स में से एक बन सकती है। दर्शकों की देशभक्ति और एक्शन से भरी कहानी ने इसे खास बनाया है।

फिल्म के निर्माताओं ने भी इस शानदार शुरुआत पर खुशी जताई है और दर्शकों का आभार व्यक्त किया है। अब सभी की नजरें अगले दिनों के आंकड़ों पर टिकी हैं।