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‘पठान’ ने एडवांस बुकिंग में तोड़े सारे रिकॉर्ड, 2400 में बिक रहे टिकट

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मनोरंजन डेस्क : चार साल बाद सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक कर रहे शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की अपकमिंग फिल्म को लेकर फैंस में जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. आलम ये है कि किंग ऑफ रोमांस की अपमकमिंग फिल्म की धुंआधार एडवांस बुकिंग हो रही है. फैंस में फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने के लिए होड़ लगी हुई है नतीजतन टिकट की कीमत भी आसमान पर है.

शाहरुख खान के फैंस उन्हें दिवानों की तरह चाहते हैं. इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि फिल्म ‘पठान’ को देखने के लिए फैंस ऊंचे दाम पर भी टिकट खरीदने से परहेज नहीं कर रहे हैं. बता दें कि फिल्म की एडवांस बुकिंग 20 जनवरी से शुरू हुई थी और तब से फिल्म के टिकट हाथों हाथ बिक रहे हैं ऐसे में टिकट की कीमत भी काफी महंगी कर दी गई है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुग्राम के एंबियंस मॉल की बात करें तो यहां शाहरुख खान की फिल्म पठान का इस कदर बज देखा जा रहा है कि फैंस 22सौ रुपये से लेकर 24सौ रुपये तक टिकट पर खर्च कर रहे है. आसमान छू रही टिकट की कीमत के बावजूद ‘पठान’ के सारे शो फुल बताए जा रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजधानी दिल्ली के भी कई मल्टीपलेक्स पर ‘पठान’ की जमकर एडवांस बुकिंग हो रही है और फैंस टिकट के लिए 2 हजार रुपये से ऊपर के दाम पे कर रहे है. एसआरके की फिल्म की एडवांस बुकिंग ने सारे रिकॉर्ड ब्रेक कर दिए हैं. Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक ‘पठान’ अब तक एडवांस बुकिंग में ही 14 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है.

शाहरुख की कमबैक फिल्म ‘पठान’ 25 जनवरी यानी इस बुधवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इस फिल्म में शाहरुख खान के अलावा सुपरस्टार जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण भी लीड रोल में मौजूद हैं. फिल्म को लेकर काफी विवाद भी हुआ था. बावजूद इसके ‘पठान’ का क्रेज फैंस के सिर चढ़कर बोल रहा है.

इस दिन पेश होगा बजट, आसान भाषा में ऐसे समझें जरूरी बातें

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से एक फरवरी को बजट पेश किया जाने वाला है। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होने वाला है। इस कारण बजट में कई महत्वपूर्ण ऐलान हो सकते हैं। ऐसे में आपके लिए बजट को समझना जरूरी है।

जीडीपी

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी भी देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर एक वित्त वर्ष में उपयोगकर्ता द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य होता है। इसमें सरकार की ओर से प्रदान की जाने वाली रक्षा, शिक्षा, हेल्थ सर्विसेज को भी शामिल किया जाता है।

नॉमिनल जीडीपी और रियल GDP

बजट पेश होने के दौरान कई बार आपको नॉमिनल GDP और रियल जीडीपी जैसे शब्द सुनाई देंगे। एक वित्त वर्ष में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की गणना बाजार मूल्य पर भी की जाती है, जो वैल्यू आपके प्राप्त होती है, उसे नॉमिनल जीडीपी कहा जाता है। इसमें महंगाई और मंदी दोनों को शामिल किया जाता है। वहीं, रियल जीडीपी में एक वित्त वर्ष में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की गणना आधार वर्ष के आधार पर की जाती है और इससे जो वैल्यू प्राप्त होती है, उसे रियल जीडीपी कहा जाता है।

जीएनपी 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) किसी देश के निवासियों की ओर से किए गए उत्पादन और सेवाओं का मूल्य होता है। यह जीडीपी और किसी देश के निवासियों के विदेशी निवेश से शुद्ध आय के बराबर है।

राजस्व और पूंजीगत बजट

केंद्रीय बजट में राजस्व और पूंजीगत बजट शामिल होते हैं। राजस्व बजट सरकार की संपत्ति और देनदारियों में बदलाव नहीं करता है, जबकि पूंजीगत बजट करता है। पूंजीगत प्राप्तियां और पूंजीगत भुगतान (व्यय) पूंजीगत बजट बनाते हैं, जबकि राजस्व प्राप्तियां और राजस्व व्यय राजस्व बजट बनाते हैं।

राजस्व घाटा 

जब राजस्व व्यय प्राप्तियां से अधिक होता है, तो फिर हम उसे राजस्व घाटा कहते हैं।

सकल राजकोषीय घाटा

सरकार के कुल व्यय और उसकी कुल गैर-उधार प्राप्तियों के बीच का अंतर को सकल राजकोषीय घाटा कहा जाता है, इसे आमतौर पर राजकोषीय घाटा भी कहते हैं।

आज होगी क्रिकेटर KL राहुल और एक्ट्रेस अथिया शेट्टी की शादी

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क्रिकेटर केएल राहुल आज अपनी दुल्हनिया लेकर आने वाले हैं। आज बॉलीवुड एक्ट्रेस अथिया शेट्टी संग शादी परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में सात फेरे लेंगे। अथिया और केएल राहुल की शादी सुनील शेट्टी के खंडाला स्थित फार्म हाउस पर होने जा रही है।

सोशल मीडिया पर इस कपल की शादी को लेकर काफी बज बना हुआ है। एक दिन पहले यानि 22 जनवरी को अथिया और केएल राहुल की संगीत और मेहंदी सेरिमनी हुई, जिसमें बॉलीवुड और क्रिकेट जगत की कई हस्तियां पहुंचीं।

सोशल मीडिया पर वेडिंग वेन्यू की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं जिसमे फार्म हाउस को खूबसूरत लाइटों और फूलों से सजाया गया है। इतना ही ही शाह रुख खान की फिल्म पठान का गाना बेशरम रंग बजता नजर आ रहा है। अंदर कुछ लोग डांस भी करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन किसी का चेहरा साफ तरह से नजर नहीं आ रहा है।

संगीत सेरिमनी का यह फंक्शन देर रात तक चला है। इस दौरान कई फिल्मी सेलेब्स और क्रिकेटर भी शामिल हुए। जाने-माने फोटोग्राफर रोहन श्रेष्ठा, क्रिकेटर वरुण आरोन, ऋतिक भसीन, पंजाबी सिंगर गिप्पी ग्रेवाल भी इस पार्टी का हिस्सा रहे। खबरों की माने तो एक्टर अर्जुन कपूर और उनकी बहन अंशुला इस पार्टी में शामिल हुए थे।

रविवार को सुनील शेट्टी ने अपने फार्म हाउस से बाहर आकर मीडिया से मुलाकात भी की थी। उन्होंने वहां मौजूदा पैपराजी से कहा था कि  शादी के बाद वह बेटी अथिया और केएल राहुल को पैपराजी  से मिलवाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं कल लेके आता हूं बच्चों को। आपने जो प्यार दिखाया है, उसके लिए बहुत-बहुत थैंक यू।

उत्तराखंड : जोशीमठ का अस्तित्व रहेगा या मिट जाएगा, कब होगा तय?

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जोशीमठ : जोशीमठ का अस्तित्व रहेगा या मिट जाएगा, इस सवाल का जवाब जांच कर रही संस्थाओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिल पाएगा है। सरकार भी अब तक कोई फैसला ककरने के स्थिति में नहीं दिखाई दे रही है। शहर में ड्रेनेज प्लान लागू करने के लिए सरकार की ओर से डीपीआर बनवाई गई। लेकिन, निविदाएं खुलने के बाद भी सरकार ने इसे फिलहाल स्थगित कर दिया।

शासन की ओर से इसके पीछे भी यही तर्क दिया गया कि अब इस इस विषय पर तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। साफ है यदि यह रिपोर्ट प्रभावित जोशीमठ के पक्ष में नहीं आती है तो संभव है सरकार इस हिस्से में किसी भी प्रकार के निर्माण या पुनर्निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दे। ऐसे में यह रह रहे लोगों के पूर्ण विस्थापन का ही एकमात्र विकल्प बचता है।

जोशीमठ में स्थानीय स्तर पर एनटीपीसी का विरोध पहले से हो रहा है। भूधंसाव और जेपी कॉलोनी में फूटी पानी की धारा के बाद से इस विरोध को नए स्वर मिले हैं। लोग इसके लिए एनटीपीसी की सुरंग को जिम्मेदार बता रहे हैं। बीते दिनों राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) की टीम ने इस पानी के नमूने भरे थे।

करीब सप्ताहभर बाद अपनी प्राथमिक रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी है। इसके बाद सरकार की ओर से बयान सामने आया कि जेपी कॉलोनी में निकल रहे पानी के नमूने एनटीपीसी की सुरंग के पानी से मेल नहीं खाते हैं। सरकार ने परियोजना के कार्यों पर रोक लगाई हुई, लेकिन अभी तक एनटीपीसी पर स्पष्ट राय सामने नहीं आई है। इसको लेकर भी लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं, जो देर सवेर सरकार को जनता को देने होंगे।

प्रभावित जोशीमठ का पुनर्वास सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। इस मुद्दे पर फिलहाल प्रभावित लोगों और सरकार के बीच एक राय नहीं बन पाई है। सरकार ने इसको लेकर एक अलग कमेटी भी बनाई है, जिसकी तीन बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद भी पुनर्वास, विस्थापन को लेकर कागजी लेखाजोखा ही तैयार नहीं हो पाया है। प्रभावित लोग भी एकमत नहीं हैं।

जोशीमठ को गेटवे ऑफ हिमालय भी कहा जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य ने कठोर तप और ज्योर्तिमठ की स्थापना के लिए जोशीमठ को चुना था। कत्यूरी राजाओं की राजधानी रहा जोशीमठ आज भी धर्म और अध्यात्म के लिए जाना जाता है। संस्कृति और अध्यात्म के संवाहक रहे इस नगर के साथ इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को बचाना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

उत्तराखंड : गले एक सप्ताह तक बारिश-बर्फबारी के आसार, आज से बदलेगा मौसम का मिजाज

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देहरादून : राज्य में मौसम लगातार कंपकंपी छुटा रहा है। मैदान से लेकर पहाड़ तक लोगों के लिए अगला एक सप्ताह मौसम के लिहाज से भारी पड़ने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से आज रात से पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार 2200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं। मौसम का यह मिजाज 29 जनवरी तक देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि सोमवार रात से एक बार फिर पूरे राज्य में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है।

इसके चलते मैदान से पहाड़ तक बारिश होगी तो वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग ज्यादातर इलाकों में बारिश के साथ ही बर्फबारी के आसार हैं। उन्होंने बताया कि बारिश और बर्फबारी से मैदानी इलाकों में भी जोरदार सर्दी पड़ेगी।

भारत जोड़ो यात्रा में संजय राउत की राहुल गांधी के साथ कदमताल, क्या होगा गठबंधन

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कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शिवसेना की कश्मीर में हुई दोबारा एंट्री से महाराष्ट्र की सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना न सिर्फ आने वाले दिनों में होने वाले बीएमसी के चुनाव में खुद को मजबूत देख रही है, वहीं कांग्रेस भी शिवसेना के साथ मिलकर 2024 के लोकसभा चुनावों में मजबूत सियासत की नींव रख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिवसेना के नेता कांग्रेस से लगातार मिलकर यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह अब भारतीय जनता पार्टी से किसी भी तरह मिलने वाले नहीं है। वहीं कांग्रेस की ओर से मिले आश्वासन से शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है।

एक सप्ताह बाद राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा का समापन श्रीनगर में हो जाएगा। कांग्रेस ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के समापन पर देश के तमाम बड़े राजनीतिक दलों और नेताओं को आमंत्रित किया है। इस यात्रा में समापन से पहले ही जब शिवसेना के नेता संजय राउत ने कश्मीर में राहुल गांधी के साथ कदमताल की तो महाराष्ट्र की सियासत में चर्चाएं शुरू हो गई।

महाराष्ट्र में बने महाविकास आघाडी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि शिवसेना के लिए कांग्रेस का साथ फिलहाल बहुत जरूरी है। इसके पीछे की वजह बताते हुए वो कहते हैं कि शिवसेना के लिए मजबूत जमीन महाराष्ट्र में तभी तैयार हो सकती है, जब उसके साथ कुछ बड़े राजनैतिक संगठन जुड़े हो। इसके लिए कांग्रेस और एनसीपी जैसे राजनीतिक संगठन शिवसेना के लिए मजबूरी भी है और जरूरत भी है। यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर शिवसेना कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी दिख रही है।

अमर उजाला को वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु शितोले के एक बयान के अनुसार भारतीय जनता पार्टी से मनमुटाव होने के बाद महा विकास आघाड़ी और राज्य की छोटी-छोटी पार्टियों के साथ भी शिवसेना का गठबंधन जारी है। वो कहते हैं कि आने वाले लोकसभा चुनाव और उसके बाद विधानसभा के चुनावों से पहले शिवसेना को अपनी राजनीतिक जमीन बरकरार रखने के लिए यह बेहद जरूरी है। वो बताते हैं कि शिवसेना ने संभाजी ब्रिगेड, कामगार पार्टी और शिक्षक पार्टी समेत कई छोटे छोटे राजनीतिक दलों और बड़ी पार्टियों में एनसीपी और कांग्रेस के साथ अपनी मजबूती बनाई है।

सियासी जानकारों का कहना है कि एकनाथ शिंदे और भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गठबंधन के साथ शिवसेना जब तक किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ अपना गठबंधन करके अपनी जमीन मजबूत नहीं बनाएगी तब तक उसके लिए बीएमसी के चुनाव भी बड़ी चुनौती जैसे लगेंगे। यही वजह है कि शिवसेना न सिर्फ कांग्रेस के साथ बल्कि महा विकास आघाड़ी को मजबूत करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।

दरअसल, राहुल गांधी और संजय राउत के बीच में जम्मू कश्मीर में हुए कदम ताल से माना जा रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत से सियासी समीकरण तो साध ही रहे हैं साथ में कांग्रेस के लिए लोकसभा के चुनावों से पहले राजनीतिक जमीन भी तैयार हो रही है। राजनीतिक विश्लेषक जितेन वाडवलकर कहते हैं कि जिस तरीके से राहुल गांधी ने शिवसेना के नेता संजय राउत का बचाव करते हुए केंद्र सरकार पर हमला किया उससे आने वाले चुनावों में शिवसेना और कांग्रेस के मजबूत रिश्ते की बात पता चलती है।

हालांकि, वाडवलकर पर का कहना है कि कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से भी छोटी पार्टियों के साथ मिलकर 2024 के लिए मजबूत किला तैयार कर रही है। महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ मिलकर मजबूत गठबंधन के साथ लोकसभा चुनाव में जाना कांग्रेस के लिए फिलहाल फायदे का सौदा नजर आ रहा है। यही वजह है कि तमाम वैचारिक मतभेदों के बाद कांग्रेस का गठबंधन महा विकास आघाड़ी के साथ बना हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु शितोले कहते हैं कि शिवसेना का महाराष्ट्र के बाहर कोई विशेष राजनीतिक आधार तो नहीं है, लेकिन हिंदुत्ववादी सोच और एक हिंदुत्व की विचारधारा के चलते समूचे देश में पार्टी की पहचान बनी हुई है। एमवीए गठबंधन से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद जल्द ही महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना का एक बड़ा सम्मेलन भी होने वाला है। उनका कहना है कि शिवसेना राहुल गांधी के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है बल्कि उनके सामाजिक आंदोलन में सहभागिता भी कर रही है। वह कहते हैं कि आने वाले दिनों में बीएमसी चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव और फिर होने वाले विधानसभा चुनाव में गठबंधन महाराष्ट्र में मजबूती से लड़ेगा।

उत्तराखंड : हल्द्वानी पहुंचे अखिलेश यादव, बोले : आखिर क्या कर रही सरकार?

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हल्द्वानी/रुद्रपुर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने जोशीमठ आपदा के जिक्र करते हुए कहा कि जोशीमठ पूरी तरह धंस गया है। ऐसे में सरकार क्या कर रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर कई और आरोप भी लगाए।

 

यहां हल्द्वानी आये अखिलेश यादव ने कहा कि जोशीमठ जैसी जगह पूरी धंस गई है, आखिरकार सरकार कर क्या रही है?। इस दौरान उनका जोरदार स्वागत किया गया। इससे पहले पंतनगर एयरपोर्ट पर भी उनका स्वागत किया गया।

 

दोपहर में सीता के साथ बैठते थे और पीते…, भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी

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रामचरितमानस विवाद के बाद अब कर्नाटक के लेखक और ‘बुद्धिजीवी’ केएस भगवान ने भगवान राम को लेकर एक और विवाद को हवा देने का काम किया है. उन्होंने भगवान राम और सीता को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं. केएस ने दावा किया कि ‘वाल्मीकि रामायण’ में कहा गया है कि भगवान राम हर दोपहर अपनी पत्नी सीता के साथ बैठकर शराब पीते थे. उन्होंने बिना परवाह किए अपनी पत्नी सीता को जंगल में भेज दिया.

इतना ही नहीं केएस भगवान ने यह भी कहा कि राम ने एक पेड़ के नीचे तपस्या कर रहे शूद्र शंबूक का सिर काट दिया था. उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर राम कैसे आदर्श हो सकते हैं. राम राज्य बनाने की बात चल रही है लेकिन वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड को पढ़ने से पता चलता है कि (भगवान) राम आदर्श नहीं थे. उन्होंने 11,000 वर्षों तक शासन नहीं किया बल्कि केवल 11 वर्षों तक शासन किया था.

2018 में भी उन्होंने इसी तरह का विवाद खड़ा किया था. उन्होंने कहा था कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान राम ‘नशा’ पीते थे और सीता को भी इसका सेवन कराते थे. उन्होंने अपनी पुस्तक ‘राम मंदिर येके बेड़ा’ में भी यह टिप्पणी की थी. तब भी उनके बयान का जोरों से विरोध हुआ था. यहां तक की लेखक के घर के बाहर लोगों ने भगवान राम की पूजा करने की भी कोशिश की थी.

भारत जोड़ो यात्रा के बीच आये आंकड़े, BJP की बढ़ी चिंता, राहुल के लिए राहत

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भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कांग्रेस भले ही यह कहती हो कि यह राजनितिक यात्रा नहीं हैं. लेकिन कांग्रेस के लिए यह राजनितिक लाभ वाली जरूर होने वाली है. भारत जोड़ो यात्रा जारी है. इस बीच इंडिया टुडे सी वोटर सर्वे ने राहुल गांधी को लेकर लोगों का मन टटोला है. इसमें पूछा गया था कि राहुल गांधी के काम से भारत में कितने लोग ‘संतुष्ट’ हैं. इस सर्वे में पता लगा है कि 15 जनवरी 2023 तक पूरे भारत में 50 प्रतिशत लोग राहुल के काम से संतुष्ट हैं. यह आंकड़े पिछले साल से ज्यादा है.

पिछले साल अक्टूबर 2022 में यह आंकड़ा 42.6 प्रतिशत था. यानि भारत जोड़ो यात्रा ने लोगों के मन को बदलने का काम तो जरूर किया है.  तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में भी इसे लेकर सर्वे किया गया. सबसे ज्यादा केरल के लोग राहुल गांधी से संतुष्ट नजर आए. सर्वे के मुताबिक केरल के लोग राहुल से 69.1 प्रतिशत संतुष्ट हैं. यही आंकड़ा पिछले साल 62.8 प्रतिशत था. इसके बाद तमिलनाडु का आंकड़ा सबसे ज्यादा है. यहां भी 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग राहुल के काम से संतुष्ट हैं.

इसके अलावा भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए कौन सबसे बेहतर है? इसे लेकर भी सर्वे किया गया. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वालों की तादाद राहुल गांधी की के समर्थकों से दोगुनी थी. नरेंद्र मोदी को 60.06 प्रतिशत तो राहुल गांधी को महज 29.09 प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री के रूप में पसंद किया.

 

उत्तराखंड : रवांल्टा सम्मेलन, तांदी और रासो पर झूमे, जड़ों से जुड़ने का संदेश

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  • प्रदीप रावत (रवांल्टा)

हरिद्वार: धर्म नगरी हरिद्वार में देश के विभिन्न शहरों के लोग तो रहते ही हैं। देश और दुनिया के लोग भी अध्यात्म के लिए यहां आते रहते हैं। इनमें से कुछ लोग यहीं के होकर रह जाते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो यहां नौकरी कर रहे हैं। विभिन्न विभागों और प्राइवेट कंपनियों में रंवाई घाटी के विभिन्न पट्टियों के अलग-अलग गांवों के लोग भी हरिद्वार में रह रहे हैं।

गांव से जुड़े रहते हैं

जब अपने गांव से दूर दूसरे शहर में रहते हैं, तो हम अपने बार-त्योहार और संस्कृति से भी दूर हो जाते हैं। हालांकि, किसी ना किसी रूप में हम गांव से जुड़े तो रहते हैं। लेकिन, शहरों में नौकरी की मजबूरी और दो वक्त की रोटी के लिए अक्सर व्यस्त रहते हैं और इस व्यस्तता के बीच यह भी भूल जाते हैं कि जिस शहर में हम रह रहे हैं, वहां मेरे गांव, गांव के पास के दूसरे गांव के लोग भी रहते हैं।

अनेक तरह के लोग 

इनमें कुछ नौकरी में साथ हैं। कुछ दूसरे विभागों में तैनात हैं। कुछ का रोज मिलना हो जाता है, जबकि कुछ चाहकर भी एक-दूसरे से मिल नहीं पाते हैं। इसी दूरी को मिटाने के लिए हरिद्वार में रह रहे राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता उत्तरकारी जिले के नौगांव ब्लाॅक की बनाल पट्टी के रचनात्मक शिक्षक और साहित्यकार दिनेश रावत भी शिक्षा विभाग में तैनात हैं। उनकी पत्नी भी यहीं पुलिस विभाग में कार्यरत हैं।

मिलने-मिलाने के एक प्रस्ताव

दिनेश रावत ने हमेशा की तरह अपने ही मिजाज के कुछ लोगों को खोज निकाला और मिलने-मिलाने के एक प्रस्ताव रखा। कई दौर की बात-चीत और बैठकों के बाद शनिवार 21 जनवरी का दिन तय हुआ। नाम दिया गया रवांल्टा सम्मेलन। कुलमिलाकर जिस तरह से नाम से ही परिलक्षित हो रहा है कि इस अयोजन में रंवाई घाटी के लोगों का संगम होना था। संगम  हुआ भी, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स के कम्यूनिटी हाॅल में जगह तय की गई थी।

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हरिद्वार में रंवाई

आयोजन स्थल को देखकर ही लग रहा था कि किस तरह से आयोजकों ने हरिद्वार में रंवाई होने का माहौल तैयार किया था। बाकायदा बाजगियों को बुलाया गया था। देवता की डांगरी के साथ तांदी और रासो ननृत्य किया गया। चोपती की झलक भी देखने को मिली। यह कोई मामूली संगम नहीं था। यह अपने आप में खास तरह का संगम था।

कई पट्टियों के लोगों का संगम 

इसमें जहां दूर बननाल पट्टी के लोग शामिल थे। तो वहीं दूर बंगाण के लोगों ने भी अपनी भूमिका निभाई। दूर गीठ पट्टी का प्रतिनिधित्व भी नजर आया। ठकराल पट्टी का प्रतिनिधित्व भी अच्छा रहा। इधर, मुगरसंती पट्टी का भी प्रतिभाग देखने को मिला। कई अन्य पट्टियों के लोग भी नजर आए।

परंपरा को बखूबी निभाया

अपने-अपने गावों से दूर हरिद्वार में आधुनिकता की चाकाचौंध के बीच महिलाओं ने अपनी परंपरा को बखूबी निभाया। अधिकांश महिलाएं अपने पारंपरिक परिधानों में नजर आई। परंपरा की इस कड़ी में जहां एक और युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर हो रही है। उस बदलते दौर से कुछ साल पहले की पीढ़ी अपनी जड़ों से गहरी जुड़ी हुई नजर आई।

बुजुर्गों का आशीर्वाद

इस आयोजन में जहां युवाओं ने अच्छा योग दान दिया। वहीं, बुजुर्गों का आशीर्वाद भी मिला। सरनोल निवासी बुजुर्ग चैहान जी ने छोड़े और लामण सुनाए, तो युवाओं ने उनके साथ भौंण मिलाई। देव नौटियाल ने लोक गीतों की प्रस्तुति दी। आयोजन में शामिल लोगों ने किसी ना किसी रूप में खुद को इससे जोड़े रखा।

सहयोग करने वालों की लंबी फेहरिस्त

इस आयोजन में सहयोग करने वालों की लंबी फेहरिस्त रही। आर्थिक रूप से तो सभी ने सहयोग किया ही। इसके अलावा भी किसी ने घर से गैस सिलेंडर लाकर दिए तो किसी ने कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए पारंपरिक गागर उपब्ध कराई। साफ नजर आ रहा था कि जो आयोजन पहली बार हो रहा है। ऐसा लग रहा था कि इस तरह के आयोजन पहले से हो रहे हों।

आयोजन में सेल्फी प्वाइंट

आयोजन में सेल्फी प्वाइंट भी बनाए गए थे। ये आइडिया रंवाई से जुड़े हर आयोजन के एक तरह से सूत्रधार की भूमिका में रहने वाले शशिमोहर रवांल्टा का था। शशी इस आयोजन के लिए खासतौर पर दिल्ली से पहुंचे थे। उनकी डिजाइनिंग के सभी कायल नजर आए। सेल्फी प्वांइट को भी अपनी परंपरा और पहचानों से जोड़ा गया था। एक तरफ जहां कोटी बनाल के चौकट की बड़ी सी तस्वीर थी। वहीं, दूसरी तरह पुराने समय में घरों में बनाए जाने वाले नक्काशीदार घरों के दरवाजों के कटआउट बनाए गए थे। ये कटआउट लोगों की पहले पसंद बने।

खुद को नहीं रोक पाया

हमें भी (प्रदीप रावत (रवांल्टा) को भी आमंत्रित किया गया था। व्यस्तता और अस्वस्तता के बावजूद रंवाई और रवांल्टा सम्मेलन में जाने से खुद को नहीं रोक पाया और पत्नी समेत आयोजन में पहुंच गए। वहां बहुत सारे पुराने साथ मिले। कुछ को पहचान पाया और कुछ को नहीं थी। लेकिन, हमें लगभग सभी ने पहचाना। उसका कारण यह है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के चलते दूरदर्शन देहरादून केंद्र से कविताओं का प्रसारण होता रहता है। उस रूप में लोग पहचान लेते हैं।

अपने-अपने हिस्से का सहयोग

कुलमिलाकर कहा जाए तो आयोजन बेहद शानदार और सफल रहा। सभी ने अपने-अपने हिस्से का सहयोग दिया और सफल आयोजन के भागीदार बने। इस आयोजन से हर कोई कुछ ना कुछ सीख लेकर गया और साथ ही आने वाले सालों में आयोजन को और बेहतर बनाने के साथ ही नियमित आयोजित करने का संकल्प भी साथ ले गए।

इनका सहयोग और सहभागिता 

आयोजन में अमित गौड़, ताजवर चौहान, मनीष पवांर, ब्रजमोहन रावत, सन्तोष सेमवाल, शशीमोहन रावत (रवांल्टा), प्रदीप रावत (रवांल्टा), संदीप रावत, टी.एस पवांर, गम्भीर चौहान, मुकेश डिमरी, रवि बिष्ट, मनोज कुमार, मदन चौहान, गुरूदेव राणा, बालेन्द्र जयाडा, उदय सेमवाल, अभिजीत राणा, दिनेश नौटियाल, नरेश नोटियाल, यशवन्त असवाल, राजेश बिष्ट, सजंय रावत, पिंकी गौड़, अपर्णा चौहान, ललिता रावत, रजनी रावत, ललिता, रंजना बगांणी, सीमा रावत, संतोषी रावत, देवेन्द्र चौहान समेत बड़ी संख्या में लोआग मौजूद रहे है। कार्यक्रम का संचालन आजोनक मंडल के अध्यक्ष दिनेश रावत ने किया ।