उत्तराखंड : जोशीमठ का अस्तित्व रहेगा या मिट जाएगा, कब होगा तय?

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जोशीमठ : जोशीमठ का अस्तित्व रहेगा या मिट जाएगा, इस सवाल का जवाब जांच कर रही संस्थाओं की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिल पाएगा है। सरकार भी अब तक कोई फैसला ककरने के स्थिति में नहीं दिखाई दे रही है। शहर में ड्रेनेज प्लान लागू करने के लिए सरकार की ओर से डीपीआर बनवाई गई। लेकिन, निविदाएं खुलने के बाद भी सरकार ने इसे फिलहाल स्थगित कर दिया।

शासन की ओर से इसके पीछे भी यही तर्क दिया गया कि अब इस इस विषय पर तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। साफ है यदि यह रिपोर्ट प्रभावित जोशीमठ के पक्ष में नहीं आती है तो संभव है सरकार इस हिस्से में किसी भी प्रकार के निर्माण या पुनर्निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दे। ऐसे में यह रह रहे लोगों के पूर्ण विस्थापन का ही एकमात्र विकल्प बचता है।

जोशीमठ में स्थानीय स्तर पर एनटीपीसी का विरोध पहले से हो रहा है। भूधंसाव और जेपी कॉलोनी में फूटी पानी की धारा के बाद से इस विरोध को नए स्वर मिले हैं। लोग इसके लिए एनटीपीसी की सुरंग को जिम्मेदार बता रहे हैं। बीते दिनों राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) की टीम ने इस पानी के नमूने भरे थे।

करीब सप्ताहभर बाद अपनी प्राथमिक रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी है। इसके बाद सरकार की ओर से बयान सामने आया कि जेपी कॉलोनी में निकल रहे पानी के नमूने एनटीपीसी की सुरंग के पानी से मेल नहीं खाते हैं। सरकार ने परियोजना के कार्यों पर रोक लगाई हुई, लेकिन अभी तक एनटीपीसी पर स्पष्ट राय सामने नहीं आई है। इसको लेकर भी लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं, जो देर सवेर सरकार को जनता को देने होंगे।

प्रभावित जोशीमठ का पुनर्वास सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। इस मुद्दे पर फिलहाल प्रभावित लोगों और सरकार के बीच एक राय नहीं बन पाई है। सरकार ने इसको लेकर एक अलग कमेटी भी बनाई है, जिसकी तीन बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद भी पुनर्वास, विस्थापन को लेकर कागजी लेखाजोखा ही तैयार नहीं हो पाया है। प्रभावित लोग भी एकमत नहीं हैं।

जोशीमठ को गेटवे ऑफ हिमालय भी कहा जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य ने कठोर तप और ज्योर्तिमठ की स्थापना के लिए जोशीमठ को चुना था। कत्यूरी राजाओं की राजधानी रहा जोशीमठ आज भी धर्म और अध्यात्म के लिए जाना जाता है। संस्कृति और अध्यात्म के संवाहक रहे इस नगर के साथ इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को बचाना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।